
सैलजा
व जया बच्चन ने की सख्ती से निपटने की मांग
हरिभूमि ब्यूरो. नई दिल्ली।
राज्यसभा
में विपक्षी दलों ने देश में महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराधों और महिलाओं के यौन
उत्पीड़न का मामला उठाया गया, जिसमें केंद्र सरकार से एसे मामलों से निपटने के लिए
कानून को सख्ती लागू करते हुए निपटने की मांगब की।
दरअसल
बुधवार को उच्च सदन की कार्यवाही शुरू होने के बाद शून्यकाल के दौरान कांग्रेस
सांसद कुमारी सैलजा तथा सपा सांसद जया बच्चन ने जोरशोर से उठाया। इस दौरान महिलाओं
के यौन उत्पीड़न के मामलों में बढ़ोतरी पर चिंता जताते हुए कांग्रेस की कुमारी सैलजा
ने कहा कि संसद के हर सत्र में महिलाओं के यौन उत्पीड़न का मुद्दा उठाया जाता है और
भारत में यह मामला अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी उठता है, जो देश के लिए बेहद दुख और
शर्मनाक भी है। सैलजा ने हाल में हरियाणा के मोरनी गांव में एक महिला से हुए कथित
बलात्कार, बिहार में बालिका गृह की बच्चियों से बलात्कार की घटनाओं के उदाहरण देते
हुए कहा कि पीडिताओं को न्याय देने और उनकी सुनवाई करने के बजाए पुलिस भी कानूनों
का उल्लंघन कर रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को चाहिए कि ऐसे मामलों में
कानून को सख्ती से पालन कराना सुनिश्चित किया जाए, ताकि अपराधियों में खौफ का
माहौल पैदा हो। ऐसा नहीं है कि देश में कठोर कानून नहीं है, लेकिन विडम्बना यह है
कि उसका सख्ती से पालन नहीं किया जा रहा है जिसके कारण अपराधी छूट जाते हैं और
महिलाओं की सुरक्षा को ज्यादा खतरा बन जाता है।
मुद्दे पर की चर्चा कराने की
मांग
राज्यसभा
में सपा सांसद जया बच्चन ने भी महिलाओं की सुरक्षा के मामले को उठाते हुए कहा कि
वह संसद में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बात करती हैं, लेकिन महिलाओं की सुरक्षा
को लेकर बनाए जा रहे कानूनों के बावजूद आए दिन बलात्कार जैसी घटनाएं सामने आ रही
हैं। उन्होंने सदन में बोलते हुए सुझाव दिया कि ऐसे जघन्य मामलों में लिप्त अपराधियों
के अभिभावकों को सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा किया जाना चाहिए, ताकि ऐसे मामले दबाए
न जा सके। जया बच्चन ने इस मामले पर सदन में चर्चा कराने की भी मांग की।
सभापति ने जताई सहमति
महिला
सांसदों द्वारा उठाए गये मामलों को गंभीर करार देते हुए सभापति वेंकैया नायडू ने इस
मुद्दे पर व्यापक चर्चा की मांग पर सहमति जताते हुए कहा कि यह बेहद गंभीर मुद्दा है,
जिसके लिए हमें सोचना होगा कि क्या कानून में कोई कमी है? क्या समाज की सोच में बदलाव
लाना होगा? हालांकि नायडू ने कहा कि ऐसे मामले कानून के कार्यान्वयन से नहीं,
बल्कि इसके लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति और प्रशासनिक कुशलता की जरूरत है जिससे इस सामाजिक
बुराई का खात्मा किया जा सके।
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दिग्विजय ने की नर्मदा संरक्षण
पर कानून की मांग
राज्यसभा
में शून्यकाल के दौरान ही कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने नर्मदा नदी की
निर्मलता बहाल करने और इसकी पैदल परिक्रमा का मार्ग सुनिश्चित करने की मांग की।
वहीं उन्होंने केंद्र सरकार से इस पवित्र नदी के संरक्षण के लिए समन्वित तरीके से एक
कानून बनाने की मांग की। गौरतलब है कि पिछले दिनों ही दिग्विजय सिंह ने नर्मदा नदी
की परिक्रमा पूरी की थी। उन्होंने यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि नर्मदा नदी मध्यप्रदेश
और गुजरात के लोगों के लिए जीवन रेखा है, लेकिन नर्मदा के पूरे केचमेंट एरिया में जंगल
काट दिए गए और नदी पर जगह-जगह बांध बना दिये गये गये हैं। वहीं मशीनों से अवैध तरीके
से रेत खनन तथा उद्योगों के खतरनाक अपशिष्ट ने इस नदी की दुर्दशा कर दी है, जिसके
कारण नर्मदा का बहाव बहुत ही कम हो, जिससे उसके जल स्तर में भी कमी आई है। दिग्विजय
सिंह ने नर्मदा नदी के उत्तर तट और दक्षिण तट पर जेट्टी बनाने तथा नर्मदा में नौकायन
कराने के लिए नावों पर लाइफ जैकेट मुहैया कराने की मांग करते हुए केंद्र सरकार से
नर्मदा के संरक्षण के लिए एक समन्वित कानून बनाने पर बल दिया।
26July-2018