शुक्रवार, 31 मई 2024

लोकसभा चुनाव: सातवें चरण में पीएम मोदी व पांच केंद्रीय मंत्रियों की होगी सियासी परख

एक पूर्व मुख्यमंत्री व उप मुख्यमंत्री और फिल्म-संगीत जगत के दिग्गज भी सियासी मैदान में उतरे 
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव के सातवें और अंतिम चरण में सात राज्यों एवं एक केंद्र शासित प्रदेश की 57 लोकसभा सीटों के लिए कल शनिवार एक जून को मतदान कराया जाएगा। इस चरण में 95 महिलाओं समेत 904 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। इनमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनके कैबिनेट के पांच मंत्रियों के अलावा एक पूर्व मुख्यमंत्री और एक उप मुख्यमंत्री की प्रतिष्ठा दांव पर होगी। वहीं फिल्म-संगीत की हस्तियों के अलावा पूर्व मंत्रियों, सांसदों और विधायकों समेत अनेक राजनैतिक दिग्गजों के सियासी भविष्य का फैसला करने के लिए कुल 10 करोड़, 06 लाख 53 हजार 884 मतदाता ईवीएम का बटन दबाकर करेंगे। 
देश में लोकसभा की 543 सीटों के लिए इस चुनावी के महासंग्राम में अब तक पहले छह चरणों में 486 सीटो पर मतदान हो चुका है, जिसमें 705 महिलाओं और दो थर्डजेंडर समेत 7459 प्रत्याशियों की सियासी तकदीर ईवीएम में कैद हो चुकी हैं, जबकि गुजरात की सूरत सीट से भाजपा प्रत्याशी मुकेश दलाल निर्विरोध निर्वाचित हो चुका है। कल 01 जून शनिवार को 57 लोकसभा सीटों पर होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए गुरुवार की शाम को चुनाव प्रचार समाप्त हो गया है। इस अंतिम चरण में शनिवार को 57 सीटों पर होने वाले चुनाव में 904 प्रत्याशियों के लिए 10,06,53,884 मतदाता ईवीएम का बटन दबाकर वोटिंग करेंगे। इस चरण में पंजाब की 13 सीटों पर सबसे ज्यादा 328 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं, जबकि जबकि लोकसभा सीट के हिसाब से देखा जाए तो पंजाब की लुधियाना लोकसभा सीट पर सबसे ज्यादा 43 और हिमाचल प्रदेश की शिमला सीट पर सबसे कम छह प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। इस चरण में ओडिशा की की 6 लोकसभा सीटों के साथ उनके दायरे में आने वाली 42 विधानसभा सीटों पर भी मतदान कराया जाएगा। वहीं हिमाचल प्रदेश की पांच सीटों पर उपचुनाव होगा। 
इन केंद्रीय मंत्रियों व पूर्व मुख्यमंत्रियों की दांव पर प्रतिष्ठा 
लोकसभा चुनाव के सातवें और अंतिम चरण में उत्तर प्रदेश की वाराणसी लोकसभा सीट पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ ही यूपी की ही चंदौली सीट पर केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री महेन्द्रनाथ पांडये, महाराजगंज सीट पर केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी, मिर्जापुर से केंद्रीय वाणिज्य व उद्यम राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल, बिहार की आरा लोकसभा सीट से केंद्रीय ऊर्जा मंत्री राजकुमार सिंह तथा हिमाचल प्रदेश की हमीरपुर सीट से केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण तथा खेल मंत्री अनुराग की भी इस चुनावी जंग में प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। वहीं पंजाब की जालंधर सीट पर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी तथा गुरदासपुर सीट से पूर्व उप मुख्यमंत्री सुखविन्दर सिंह रंधावा की कांग्रेस प्रत्याशी के रुप में सियासी साख का इम्तिहान होगा। 
इन दिग्गजों की दांव पर साख 
लोकसभा चुनाव के अंतिम पड़ाव में जिन सियासी दिग्गजों ने भी अपनी प्रतिष्ठा को दांव पर लगा रखा है, उनमें बिहार की पटना साहिब सीट पर पूर्व केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद, पाटलिपुत्र से पूर्व केंद्रीय मंत्री रामकृपाल व राजद प्रमुख लालू यादव की बेटी मीसा भारती, काराकाट सीट से पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेन्द्र कुशवाह व फिल्मी कलाकार पवन कुमार चुनाव मैदान में हैं। चंडीगढ़ सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी के रुप में पूर्व मंत्री मनीष तिवारी, पंजाब की बठिंडा सीट से पूर्व केंद्रीय मंत्री और शिअद प्रत्याशी हरसिमरत कौर बादल, पटियाल से पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं भाजपा प्रत्याशी परणीत कौर, हिमाचल की कांगड़ा सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा, मंडी सीट पर भाजपा प्रत्याशी फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत, ओडिशा की बालासोर सीट पर भाजपा प्रत्याशी पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रताप सिंह सारंगी, बलिया से भाजपा के नीरज शेखर, पश्चिम बंगाल की दमदम सीट से तृणमूल प्रत्याशी एवं पूर्व मंत्री सौगात राय, कोलकाता उत्तर सीट तृणमूल के पूर्व केंद्रीय मंत्री सुदीप बंदोपाध्याय और डायमंड हार्बर सीट से बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी भी सियासी प्रतिष्ठा के लिए चुनाव मैदान में हैं। 
बसपा ने उतारे सर्वाधिक प्रत्याशी 
लोकसभा के इस अंतिम दौर के चुनाव में 57 सीटों पर प्रमुख राजनैतिक दलों में सबसे ज्यादा 56 प्रत्याशी बसपा ने उतारे हैं। जबकि भाजपा के 51, कांग्रेस के 31, सपा के 9, तृणमूल कांग्रेस के 9, बीजद के 6, आप व शिअद के 13-13, राजद, झामुमो, आरपीआई व सीपीआई(एमएल) के3-3, जदयू, अपना दल के 2, सीपीआईएम के 8, सीपीआई के 7 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। जबकि अन्य दलों के अलावा 375 निर्दलीय प्रत्याशी भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। 
ये मौजूदा सियासी गणित 
लोकसभा के सातवें चरण की जिन 57 सीटों पर मतदान होना है, उनमें साल 2019 के चुनाव में राजग ने सबसे ज्यादा 32 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जिसमें 25 सीटें भाजपा जीती थी, जिसमें जदयू की तीन अपना दल (एस) और शिरोमणि अकाली दल ने 2-2 दो सीटें शामिल थी। जबकि तृणमूल कांग्रेस ने 9, कांग्रेस ने 8, बीजद ने 2, आम आदमी पार्टी और झारखंड मुक्ति मोर्चा ने 1-1 सीट पर जीत दर्ज की थी। भाजपा की सबसे ज्यादा सीटें यूपी की 13 सीटों में भाजपा को 9 सीटों और दो उसके सहयोगी अपना दल को मिली थी। जबकि दो सीटों पर बसपा ने जीत दर्ज की थी। 
अंतिम दौर में दागियों पर खेला दांव 
लोकसभा चुनाव के सातवें व अंतिम चरण में भी राजनीतिक दलों ने दागियों से कोई परहेज नहीं किया, जिसका नतीजा है कि एक जून को चुनाव मैदान में 199 प्रत्याशी आपराधिक छवि के होंगे। इनमें प्रमुख राजनीतिक दलों में सबसे ज्यादा 23 को भाजपा ने अपना प्रत्याशी बनाया है। जबकि बसपा के 13, कांग्रेस के 12, तृणमूल व सपा के 9-9, शिअद के 8, आम आदमी पार्टी व सीपीआई(एम) के 5-5, राजद व सीपीआई(एमएल) के 3-3, बीजद व सीपीआई के 2-2, झामुमो अपना दल, सीपीआई(एम) और आरपीआई 1-1 प्रत्याशी के खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं। हालांकि सबसे ज्यादा 55 निर्दलीय प्रत्याशी भी दागियों की फेहरिस्त में शामिल है। 
करोड़पतियों पर भी खेला दांव 
लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण में सियासी दलों ने ज्यादातर करोड़पतियों को प्रत्याशी बनाया है। इस चरण में 299 करोड़पति प्रत्याशियों में सबसे ज्यादा 44 प्रत्याशी भाजपा के हैं। जबकि कांग्रेस के 30, बसपा के 22, आप और शिअद के सभी 13-13, सपा के 9, तृणमूल के 8, बीजद के सभी 6, सीपीआई जेजेपी के 10 में 9, इनेलों के सभी 7, बीजद के सभी 6, आप के 5 में 4, जदयू के सभी चार, राजद के सभी चार, सीपीआई(एम) के 4, राजद व झामुमों के 3-3, जदयू, अपना दल(सोनेलाल) व अपना दल(कमेरावादी) के सभी 2-2 प्रत्याशी धनकुबेर प्रत्याशियों की सूची में शामिल हैं। वहीं इस चरण में 375 निर्दलीयों में से 80 करोड़पति प्रत्याशियों में शामिल हैं। सबसे अमीर प्रत्याशियों में 198 करोड़ की संपत्ति के साथ पंजाब की बठिंडा लोकसभा सीट से शिरोमणि अकाली दल की प्रत्याशी एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर हैं। जबकि ओडिशा की जगतसिंहपुर सीट से उत्कल समाज के प्रत्याशी भानुमति दास 1500 रुपये की संपत्ति के साथ सबसे गरीब प्रत्याशी दर्ज किया गया है। 
 ------ 
सातवें चरण में कितनी सीट, प्रत्याशी व मतदाता 
राज्य            सीट  प्रत्याशी  दागी  करोड़पति  मतदाता 
बिहार              8     134        30         50           1,62,04,594 
चंडीगढ़           1        19         3           9               6,59,805 
हिमाचल प्रदेश 4       37         7         23             56,45,579 
झारखंड           3       52       10          9              53,23,886 
ओडिशा           6      66        15        20              99,61,057 
पंजाब            13    328       69       102            2,14,61,741 
उत्तर प्रदेश   13    144        36       55             2,50,56,877 
पश्चिम बंगाल 9    124       29       31             1,63,40,345 
----------------------------------------------------------- 
कुल              57   904      199      299        10,06,53,884 
----------------------------------------------------------- 
किस राज्य में कौन सीट पर होगा चुनाव 
बिहार: नालन्दा, पटना साहिब, पाटलिपुत्र, आरा, बक्सर, सासाराम, काराकाट, जहानाबाद। 
चंडीगढ़: चंडीगढ़ लोकसभा सीट 
हिमाचल प्रदेश : कांगड़ा, मंडी, हमीरपुर, शिमला। 
झारखंड : राजमहल, दुमका और गोड्डा। 
ओडिशा: मयूरभंज, बालासोर, भद्रक, जाजपुर, केंद्रपाड़ा, जगतसिंहपुर लोकसभा के साथ में 42 विधानसभा सीट। 
पंजाब: गुरदासपुर, अमृतसर,खडुर साहिब,जालंधर, होशियारपुर, आनंदपुर साहिब, लुधियाना, फतेहगढ़ साहिब, फरीदकोट, फिरोजपुर, भटिंडा, संगरुर, पटियाला। 
उत्तर प्रदेश: महाराजगंज, गोरखपुर, कुशीनगर, देवरिया, वंशगांव, घोसी, सलेमपुर, बलिया, गाजीपुर, चंदौली, वाराणसी, मीरजापुर, रॉर्बट्सगंज। 
पश्चिम बंगाल: दम दम, बारासात, बशीरहाट, जयनगर, मथुरापुर, डायमंड हार्बर, जादवपुर, कोलकाता दक्षिण, कोलकाता उत्तर।
31May-2024

हॉटसीट मिर्जापुर: जातीय समीकरण के जंजाल में उलझी अनुप्रिया की हैट्रिक!

सपा, बसपा व अपना दल के दूसरे गुट ने की राजग प्रत्याशी की घेराबंदी 
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव की अंतिम दौर की जंग में उत्तर प्रदेश की मिर्जापुर लोकसभा सीट एक दल का गढ़ नहीं मानी गई है, जहां एक जून को मतदान कराया जाएगा। इस सीट पर भाजपानीत राजग गठबंधन की ओर से अपना दल(सोनेलाल) की प्रत्याशी एवं केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल जीत की हैट्रिक लगाने के इरादे से चुनावी जंग में है। वहीं अनुप्रिया की हैट्रिक रोकने के लिए उसके खिलाफ विपक्षी दलों ने जिस प्रकार से जातीगत समीकरण के आधार पर सियासी चक्रव्यूह रचा है, वह केंद्रीय मंत्री के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकता है। दरअसल इंडिया गठबंधन की ओर से सपा ने पहले से घोषित प्रत्याशी को ऐनवक्त पर बदलकर पटेल के खिलाफ भदोही के मौजूदा भाजपा सांसद रमेशचंद बिंद अपना प्रत्याशी बनाकर चुनावी मैदान में उतारा है। जबकि बसपा ने ब्राह्मण, दलित और मुस्लिम वोटबैंक साधते हुए ब्राह्मण प्रत्याशी के रुप में मनीष त्रिपाठी को चुनाव मैदान में उतारकर इस चुनावी मुकाबले को त्रिकोणीय मुकाबले में ले जाने की कोशिश की है, तो अपना दल के दूसरे गुट ने भी अनुप्रिया की घेराबंदी करने के मकसद से अपना प्रत्याशी चुनावी मैदान में उतारा है। माना जा रहा है कि इस सीट पर जातीय समीकरण हावी होने के कारण राजग की संयुक्त प्रत्याशी अनुप्रिया पटेल के लिए इस बार चुनावी राह कांटोभरी हो सकती है? 
उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल की मिर्जापुर लोकसभा सीट के दायरे में आने वाली पांचों विधानसभा सीटों राजग के विधायक काबिज है, जिसमें मिर्जापुर, चुनार और मरिहान पर भाजपा, मझवान पर निषाद पार्टी और छानबे (सु) विधानसभा सीट पर अपना दल (एस) का विधायक काबिज है। इस सीट पर पिछले दो चुनाव जीतकर सांसद बनी अनुप्रिया पटेल की इस बार जातीगत समीकरण के आधार इंडी गठबंधन में शामिल सपा के अलावा बसपा ने अपने प्रत्याशियों को चुनाव मैदान में उतारा है। यही नहीं केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल की घेराबंदी करने वालों में अपना दल के दूसरे कमेरावादी गुट के प्रत्याशी दौलत सिंह भी शामिल है। वहीं जातीय आधारित राजनीति करने वाले छोटे दलो के प्रत्याशी भी किसी भी प्रमुख दलों की हारजीत को प्रभावित करने में सक्षम बताए जा रहे हैं। गौरतलब है कि मिर्जापुर वहीं लोकसभा सीट है जहां से दो बार दस्यु फूलन देवी और एक बार ददुआ के भाई बाल कुमार पटेल ने चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचकर सभी राजनीतिक दलों को चौंकाया था। यह सीट इसलिए भी चर्चा रही है कि यहां से 2004 में बसपा को जीत दिलाने वाले सांसद नरेन्द्र कुशवाह को घूसकांड में अपनी सदस्यता गंवानी पड़ी थी। खास बात ये भी है कि 1984 में उमाकांत मिश्रा के बाद मिर्जापुर लोकसभा सीट से स्थानीय सांसद नहीं मिला है यानी पिछले करीब चार दशकों से यहां बाहरी प्रत्याशी ही चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंच रहे हैं। 
ऐसा रहा सीट का चुनावी इतिहास 
उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल की मिर्जापुर लोकसभा सीट के दायरे में आने वाली पांच विधानसभा सीटों में चार सीटों पर राजग के विधायक काबिज है, जबकि एक सीट पर निषाद पार्टी का कब्जा है। अभी तक 17 लोकसभा के लिए हुए 20 चुनावों में कांग्रेस ने सात, सपा ने चार, भाजपा, अपना दल व बसपा ने दो-दो के अलावा भारतीय जनसंघ, जनता पार्टी व जनता दल ने एक-एक जीत दर्ज की है। पहले तीन चुनाव में यहां कांग्रेस के सांसद निर्वाचित हुए। साल 1967 के चुनाव में यहां भारतीय जनसंघ ने चुनाव जीता, लेकिन 1971 में फिर कांग्रेस के अजीज इमाम ने जीत दर्ज की। इंदिरा सरकार की विरोधी लहर में 1977 के चुनाव में यहां जनता पार्टी के फकीर आलम अंसारी जीतकर लोकसभा पहुंचे, लेकिन उसके बाद फिर अजीज इमाम और फिर उपचुनाव व आम चुनाव जीतकर उमाकांत मिश्रा ने यह सीट कांग्रेस की झोली में डाली। साल 1989 के चुनाव में जनता दल के यूसुफ बेग ने कांग्रेस के विजय रथ को ऐसा रोका कि उसके बाद यहां कांग्रेस को आज तक जीत नसीब नहीं हुई। साल 1991 के चुनाव में वीरेन्द्र सिंह ने चुनाव जीतकर पहली बार भाजपा को जीत दिलाई। इसके बाद साल 1996 के चुनाव में समाजवादी पार्टी ने दस्यु फूलन देवी को प्रत्याशी बनाकर पहली जीत दर्ज की, लेकिन 1998 के चुनाव में भाजपा के वीरेन्द्र सिंह ने फूलन देवी को हराकर भाजपा के खाते में दूसरी जीत दर्ज की, लेकिन अगले ही चुनाव में फिर से यहां सपा की फूलन देवी जीत हासिल कर दूसरी बार लोकसभा पहुंची, लेकिन जुलाई 2001 में नई दिल्ली स्थित उनके सरकारी आवास पर कुछ लोगों ने उसकी हत्या कर दी और साल 2002 में इस सीट पर उपचुनाव में सपा के रामरति सिंह ने जीत दर्ज की। साल 2004 में इस सीट पर नरेन्द्र कुशवाह ने जीत दर्ज कर बसपा का खाता खोला और 2009 में भी रमेश दूबे ने जीत दर्ज कर यह सीट बसपा की झोली डाली। साल 2014 के चुनाव में यहां अपना दल की अनुप्रिया पटेल राजगगठबंधन में चुनाव जीती, जिसके बाद दो गुटों में बंटे इस दल के बावजूद अनुप्रिया पटेल ने साल 2019 का चुनाव भी 2.32 लाख के अंतर से जीती और अब तीसरी बार चुनाव मैदान में है। 
मतदाताओं का चक्रव्यूह 
यूपी की मिर्जापुर लोकसभा सीट पर दस प्रत्याशियों के सामने कुल 19,06,327 मतदाता हैं, जिसमें 9,99,442 पुरुष, 9,06,816महिला और 69 थर्डजेंडर मतदाता है। वहीं इस सीट पर 18-19 आयु वर्ग के 27,353 मतदाता पहली बार मतदान करेंगे। जबकि यहां 15,168 दिव्यांग तथा 16,227 मतदाता 85 साल व उससे अधिक उम्र के बुजुर्ग मतदाता हैं। एक जून को इस सीट पर स्थापित किये गये 1352 मतदान केंद्रों के 2143 बूथों पर चुनाव होगा। 
ये है जातीय समीकरण 
मिर्जापुर लोकसभा सीट जब 2009 के चुनाव से भदोही से अलग हुई तो इसे कुर्मी बाहुल्य लोकसभा सीट के रुप में देखा जाता है। इसी लिए हर राजनीतिक दल यहां जातीय समीकरण के आधार अपने प्रत्याशियों को चुनाव मैदान में उतारता है। जहां तक इस सीट के जातीय समीकरण का सवाल है उसमें 1.50 लाख ब्राह्मण, 1.50 लाख बिंद (केवट), 1.50 लाख वैश्य, 90 हजार क्षत्रिय, 1.25 लाख कोल, 3. 50 लाख पटेल के अलावा ओबीसी व दलित करीब 3-3 लाख, एक लाख 50 हजार मौर्य कुशवाहा 1.50 व मुस्लिम 1.50 लाख और करीब एक लाख यादव मतदाता हैं। 
31May-2024

गुरुवार, 30 मई 2024

हॉट सीट वाराणसी: पीएम मोदी को चुनौती देना इंडी गठबंधन के लिए आसान नहीं!

कांग्रेस ने हार की हैट्रिक बना चुके अजय राय पर एक बार फिर खेला दांव 
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की वाराणसी लोकसभा सीट के लिए सातवें और अंतिम चरण में एक जून को होने वाले चुनाव पर सभी की नजरें लगी होंगी। इस सीट से देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भाजपा प्रत्याशी के रुप में चुनाव मैदान में है, जिसकी वजह से इसे ज्यादा ही हाईप्रोफाइल लोकसभा सीट के रुप में देखा जा रहा है। एक सीट ही से तीन बार चुनाव लड़ने वाले प्रधानमंत्रियों जवाहरलाल नेहरु और इंदिरागांधी के बाद नरेन्द्र मोदी ऐसे तीसरे प्रधानमंत्री है, जिन्होंने एक ही सीट से तीसरी बार चुनाव मैदान में है। वाराणसी सीट पर नरेन्द्र मोदी को चुनौती देने के लिए इंडिया गठबंधन की ओर से कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष अजय राय को एक बार फिर प्रत्याशी बनाया गया है, जो इस सीट पर पराजित होने की हैट्रिक बना चुके हैं, तो पीएम नरेन्द्र मोदी इस बार के चुनाव में जीत की हैट्रिक पर हैं। खास बात ये भी है कि वाराणसी सीट पर अभी तक हुए चुनाव में सपा व बसपा जीत का स्वाद नहीं चख पाई है। 
लोकसभा चुनाव के इस अंतिम चरण में उत्तर प्रदेश की 13 सीटों के लिए हो रहे चुनाव में वाराणसी लोकसभा सीट अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस सीट के दायरे में पांच विधानसभाएं रोहनिया, वाराणसी उत्तर, वाराणसी दक्षिण, वाराणसी कैंट और सेवापुरी शामिल है और इन सभी सीटों पर राजग के विधायक काबिज है, जिसमें चार पर भाजपा और रोहनिया सीट पर अपना दल(सोनेलाल) का विधायक है। वाराणसी लोकसभा से सीट से तीसरी बार चुनावी जंग में उतरे पीएम नरेन्द्र मोदी को इस बार रिकार्ड मतों से विजयी बनाने के लिए भाजपा ने यहां कई स्तरीय चुनाव रणनीति बनाकर उनकी जीत की हैट्रिक सुनिश्चत करने का लक्ष्य साधा गया है। वहीं इंडी गठबंधन के कांग्रेस प्रत्याशी अजय राय के लिए गठबंधन में शामिल सपा और कांग्रेस के दिग्गज यहां चुनाव प्रचार कर रहे हैं। इस सीट पर भाजपा प्रत्याशी मोदी को चुनौती देने के लिए बसपा ने भी अतहर जमाल लारी, सपा छोडकर अपना दल(के) प्रत्याशी बने गगन यादव, और युग तुलसी पार्टी के शिवकुमार के अलावा दिनेश कुमार यादव व संजय तिवारी निर्दलीय रुप से चुनावी जंग में हैं। 
वाराणसी का सियासी सफर 
वाराणसी लोकसभा सीट पर अभी तक हुए 17 लोकसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस को 7-7 बार जीत हासिल हुई है, जबकि जनता पार्टी, जनता दल और सीपीआई(एम) का प्रत्याशी एक-एक बार जीतकर लोकसभा पहुंचा है। आजादी के बाद पहले तीन चुनाव में इस सीट से कांग्रेस के रघुनाथ सिंह ने जीत हासिल की, लेकिन 1967 के चुनाव में यहां सीपीआई(एम) के सत्यनारायण सिंह ने जीत का स्वाद चखा, लेकिन 1971 के चुनाव में यहां फिर से कांग्रेस के राजाराम शास्त्री निर्वाचित हुए। आपातकाल के बाद देश में चली कांग्रेस विरोधी लहर में यहां 1977 का चुनाव जनता पार्टी के प्रत्याशी के रुप में चन्द्रशेखर ने जीत हासिल की, तो 1980 के चुनाव में कमलापति त्रिपाठी और 1984 में श्यामलाल यादव ने कांग्रेस को जीत दिलाई। साल 1989 का चुनाव यहां जनता दल के अनिल शास्त्री ने जीता। लेकिन 2004 के चुनाव में कांग्रेस की जीत को छोड़ दें, तो 1991 के बाद अभी तक सात बार यहां भाजपा प्रत्याशियों ने भगवा लहराया है। इसमें लगातार तीन चुनाव जीतकर भाजपा के शंकर प्रसाद जायसवाल ने हैट्रिक भी बनाई है। जबकि एक-एक बार श्रीचंद दीक्षित और मुरली मनोहर जोशी ने भाजपा को जीत दिलाई है। इसके बाद वाराणसी को भाजपा के सियासी किले का नरेन्द्र मोदी ने लगातार दो जीत दर्ज मजबूत किया है। इस बार पीएम मोदी तीसरी बार इस सीट से भाजपा प्रत्याशी के रुप में चुनावी जंग में हैं। 
भाजपा का लगातार बढ़ा वोट शेयर ग्राफ 
यूपी की वाराणसी सीट पर यदि साल 2009 के लोकसभा चुनाव की बात करें, तो यहां भाजपा के डा. मुरली मनोहर जोशी 30.52 फीसदी वोट लेकर लोकसभा पहुंचे थे। इसके बाद साल 2014 के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के रुप में नरेन्द्र मोदी इस सीट से 56.37 फीसदी वोट लेकर निर्वाचित हुए, जो 2009 के चुनाव में मिले वोट शेयर से 25.85 फीसदी ज्यादा था। पिछले चुनाव में पीएम मोदी वाराणसी सीट से दूसरी बार 63.62 फीसदी वोट लेकर चुनाव जीते। 
केजरीवाल ने भी दी थी चुनौती   
लोकसभा के साल 2014 के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के रुप में नरेन्द्र मोदी ने वाराणसी से चुनाव लड़ने का निर्णय लिया तो यहां दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने भी चुनौती देने के लिए पूरी ताकत झोंकी, लेकिन निराशा ही हाथ लगी। जबकि कांग्रेस ने अजय राय को चुनाव मैदान में उतारा था, जो तीसरे स्थान पर रहे। अजय राय 2009 के चुनाव में भी सपा प्रत्याशी के रुप में तीसरे स्थान पर रहे थे। जबकि साल 2019 के चुनाव में पीएम नरेन्द्र मोदी के खिलाफ फिर कांग्रेस ने अजय राय पर ही दांव खेला, लेकिन तीसरे स्थान से ऊपर जाना तो दूर की बात रही, बल्कि अपनी हारने की हैट्रिक जरूर पूरी कर ली। अब इस बार इंडिया गठबंधन की ओर से कांग्रेस प्रत्याशी के रुप में अजय राय को ही फिर से पीएम मोदी को चुनौती देने के लिए चुनाव मैदान में उतारा है। 
मतदाताओं की संख्या 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संसदीय सीट वाराणसी में इस बार 19,62,948 मतदाता वोटिंग करेंगे, जिनमें 10,65,485 पुरुष, 8,97,328 महिला और 135थर्ड जेंडर मतदाता शामिल है। इस सीट पर 18-19 आयु वर्ग के 31,538 नए युवा मतदाता पहली बार मतदान प्रक्रिया के हिस्सेदार बनेंगे। इस सीट पर 25,984 मतदाता 80 साल या उससे अधिक है। इस लोकसभा क्षेत्र में एक जून को मतदान कराने के लिए 1909 मतदान स्थल बनाए गये हैं। क्या है जातीय समीकरण वाराणसी लोकसभा सीट पर सबसे ज्यादा ओबीसी मतदाताओं में सबसे ज्यादा करीब दो लोख कुर्मी, जिनकी संख्या इस लोकसभा क्षेत्र में आने वाली विधानसभा सीटों रोहनिया और सेवापुरी में सबसे ज्यादा है। जबकि एक लाख से ज्यादा यादव, दो लाख से ज्यादा वैश्य, ब्राह्मण, कायस्थ आदि स्वर्ण जातियों के मतदाता हैं। वहीं करीब डेढ़ लाख भूमिहार के अलावा करीब एक लाख दलित और तीन लाख के आसपास मुस्लिम मतदाता भी हैं। 
राय का एबीवीपी से कांग्रेस तक का सफर
पीएम मोदी को चुनौती देने सियासी मैदान में उतरे कांग्रेस प्रत्याशी अजय राय का असली सियासी सफर भाजपा से ही शुरु हुआ था, जो एबीवीपी की छात्र राजनाति के साथ आरएसएस से भी जुड़े रहे और 90 के दशक में श्रीराम मंदिर आंदोलन में भी हिस्सेदारी की। भाजपा से अजय राय तीन बार विधायक निर्वाचित हुए। साल 2009 में अजय राय ने भाजपा छोड़कर सपा की सदस्यता ग्रहण की और वाराणसी से भाजपा के मुरली मनोहर जोशी को चुनौती देने के प्रयास में तीसरे स्थान पर रहे। खास बात है कि अजय राय अब तक इस सीट से तीन बार चुनाव लड़े और तीसरे स्थान से आगे नहीं बढ़ सके। इस बार वह चौथी बार चुनाव मैदान कौन से पायदान पर होंगे, यह चुनवी नतीजे बताएंगे। 
विस वार मतदाताओं की संख्या 
विधानसभा       पुरुष         महिला     थर्डजेंडर   कुल मतदाता 
रोहनिया        2,26,220  1,86,365       27           4,12,612 
 सेवापुरी        1,91,259  1,63,034       20           3,54,323 
 शहर उत्तरी  2,34,182  1,96,826       43          4,31,051 
शहर दक्षिणी 1,70,068,  1,41,118       27          3,11,213 
 वाराणसी कैंट 2,43,746  2,09,985      18        4,53,749
 ----------------------------------------------------
  कुल         10,65,485   8,97,328     135       1962948 
---------------------------------------------------- 
30May-2024

बुधवार, 29 मई 2024

चंडीगढ़: लोकसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच वर्चस्व की जंग

शिरोमणि अकाली दल प्रत्याशी के मैदान छोड़ने से दिलचस्प हुआ चुनाव 
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव के सातवें एवं अंतिम चरण में चंडीगढ़ लोकसभा सीट पर एक जून को मतदान होगा। इस बार इस सीट पर बदले सियासी समीकरणों के बीच भाजपा और कांग्रेस दोनों राष्ट्रीय दलों ने ही अपने प्रत्याशी बदल दिये हैं। भाजपा ने यहां लगातार दो बार से चुनाव जीतने वाली किरण खेर का टिकट काटकर संजय टंडन को प्रत्याशी बनाया है। जबकि इंडी गठबंधन की ओर से यहां चुनाव लड़ रही कांग्रेस ने पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन बंसल के बजाए मनीष तिवारी पर दांव खेला है। जबकि शिरोमिण अकाली दल के घोषित प्रत्याशी हरदीप सिंह बुटरेला के अपनी पार्टी से ऐनवक्त पर इस्तीफा देकर टिकट वापस करने की वजह से चंडीगढ़ सीट के लोकसभा चुनाव के सियासी समीकरण दिलचस्प बनते नजर आ रहे हैं, जहां अब भाजपा और कांग्रेस प्रत्याशियों के बीच सीधी टक्कर है, लेकिन यहां पैराशूट से उतारे प्रत्याशी को लेकर कांग्रेस पार्टी में भीतराघात पनपने से कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ सकती है। हालांकि यह तो चुनावी नजीजो से ही तय होगा कि इस सीट की चुनावी जंग जीतकर किसी दल का प्रत्याशी लोकसभा पहुंचेगा? 
पंजाब और हरियाणा की राजधानी चंडीगढ़ एक केंद्र शासित प्रदेश है। भाजपा ने इस बार मौजूदा सांसद किरण खेर का टिकट काटकर भाजपा ने यहां स्थानीय दिग्गज नेता संजय टंडन पर दांव खेला है। जबकि इंडी गठबंधन की ओर से कांग्रेस ने पिछले दो चुनाव में हार चुके पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन बंसल का टिकट काटकर दिग्गज नेता एवं पंजाब की आनंदपुर साहिब के मौजूदा सांसद मनीष तिवारी को यहां प्रत्याशी बनाया है। पवन बंसल का टिकट काटने से यहां स्थानीय कांग्रेस संगठन में भीतर घात बढ़ता नजर आ रहा है। कांग्रेस की इस सीट के लिए तैयार की गई यह चुनावी रणनीति घाटे का सौदा हो सकता है। दूसरी ओर इस सीट पर पिछले चुनाव में भाजपा की सहयोगी रही शिरोमणि अकाली दल के प्रत्याशी हरदीप सिंह बुटरेला ने चुनाव मैदान छोड़कर पार्टी से इस्तीफा दे दिया है, जिसका फायदा भाजपा को मिलने की संभावना बताई जा रही है। बुटरेला चंडीगढ नगर निगम के पार्षद भी हैं। इस सीट पर बसपा ने भी महिला प्रत्याशी रीतू सिंह पर दांव खेला है, जो भाजपा व कांग्रेस के मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की फिराक में है। यहां चुनाव मैदान में कूदे 19 प्रत्याशियों में एक दर्जन प्रत्याशी निर्दलीय रुप से चुनाव लड़ रहे हैं। 
क्या है चुनावी इतिहास 
केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ के इतिहास में कहावत है कि इस सीट से जिस दल का प्रत्याशी निर्वाचित होता है, तो केंद्र में उसी दल की सरकार बनती है। ऐसी कहावत के बीच 18वीं लोकसभा चुनाव हो रहा है। लोकसभा के रुप में अस्तित्व में आए चंडीगढ़ सीट पर साल 1967 के पहले चुनाव में यहां भारतीय जनसंघ ने चुनाव जीता था, जिसके बाद 1971 में यहां काग्रेस और 1977 में जनता पार्टी ने जीत हासिल की थी। 1980 और 1984 के चुनाव में यहां लगातार कांग्रेस के जगन्नाथ कौशल विजयी होकर लोकसभा पहुंचे, लेकिन 1989 में फिर यहां कांग्रेस की वापसी कराने में पवन बंसल सफल रहे, लेकिन 1996 और 1998 के चुनाव में यहां भाजपा के सत्यपाल जैन ने भगवा फहराया। इसके बाद 1999 से 2009 के तीन चुनाव में कांग्रेस के पवन कुमार बंसल लोकसभा पहुंचे और यूपीए सरकार में मंत्री भी बने। जबकि मोदी लहर में 2014 और 2019 का चुनाव भाजपा की किरण खेर ने जीतकर कांग्रेस को पीछे धकेल दिया, लेकिन इस बार भाजपा और कांग्रेस ने अपने प्रत्याशी बदलकर चुनावी समीकरण को नया मोड़ दे दिया है। 
मतदाताओं का चक्रव्यूह 
केंद्र शासित चंडीगढ़ की एक मात्र लोकसभा सीट पर एक जून को होने वाले मतदान के लिए कुल 6,47,291 मतदाता हैं। जिनमें 3,35,060 पुरुष, 3,12,198 महिला और 33 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल है। इनके अलावा 85 साल से अधिक आयु वर्ग के 11,547 और दिव्यांग मतदाताओं की संख्या 3,735 है। चंडीगढ लोकसभा सीट के लिए इस बार 18-19 आयुवर्ग के 15,006 नए युवा मतदाता पहली बार अपना वोट डालेंगे। 2019 के चुनाव में यहां 3,04,507 महिलाओं समेत कुल 6,46,708 थे। इस प्रकार पिछले पांच साल में केवल 583 मतदाताओं का इजाफा देखा गया है। नई मतदाता सूची में जहां पुरुष मतदाताओं की संख्या में 7141 की कमी आई, तो वहीं महिला मतदाताओं में 7691 की बढ़ोतरी भी हुई। 
युवा मतदाता होंगे निर्णायक 
केंद्र शासित राज्य की चंडीगढ़ लोकसभा सीट पर 18 से 39 वर्ष आयु वर्ग के मतदाता किसी भी सांसद का चुनाव करने के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं, जिनकी 3,02,851 यानी 47 फीसदी है। इनमें 15006 की उम्र 18-19 तथा 1,40,212 मतदाताओं की उम्र 18 से 29 तक की है। खास बात ये भी है कि इस सीट पर 70-79 आयु वर्ग के 29960 मतदाताओं में 15152 महिला मतदाताओं की संख्या 14808 पुरुष वोटरों से ज्यादा है। 
इन्होंने डाला अपना वोट 
चुनाव आयोग ने इस बार बुजुर्गो और दिव्यांगों को फॉर्म 12डी के माध्यम से घर से मतदान का विकल्प दिया था, जिसके तहत 633 पात्र मतदाताओं ने आवेदन किया था, जिनका मतदानकर्मियों ने उनके घर जाकर उनका मतदान कराने की प्रक्रिया पूरी कर ली है। 
जातीय समीकरण 
यदि चंडीगढ़ लोकसभा सीट पर जातीय समीकरण पर गौर की जाए, तो यहां की 97 फीसदी जनसंख्या शहरी है और तीन फीसदी ग्रामीण आबादी है। इनमें करीब 80 फीसदी आबादी हिंदू और करीब 20 फीसदी सिख समुदाय की आबादी हैं। हिंदू आबादी में 18.9 फीसदी अनुसूचित जाति के मतदाता भी शामिल है। जबकि मुस्लिम और ईसाई जनसंख्या 5 फीसदी के आसपास है। 
कौन है भाजपा व कांग्रेस प्रत्याशी 
भाजपा प्रत्याशी संजय टंटन लंबे समय तक चंडीगढ़ के प्रदेशाध्यक्ष रहे हैं और उन्हीं के इस कार्यकाल में भाजपा ने पिछले दोनों लोकसभा चुनाव और नगर निगम चुनाव में जीत हासिल की थी। टंडन भाजपा और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के दिग्गज नेता एवं पूर्व राज्यपाल बलराम टंडन के सुपुत्र हैं। भाजपा प्रत्याशी पेशे से चार्टेड अकाउंटेंट हैं। पिछले दो लोकसभा चुनावों में भाजपा प्रत्याशी किरण खेर की जीत में उनकी सक्रीयता का बड़ा योगदान माना गया है। 
29May-2024

मंगलवार, 28 मई 2024

पंजाब: इंडी गठबंधन के कांग्रेस व आप के बीच चुनावी दंगल

भाजपा और शिअद भी इस बार अलग अलग वर्चस्व के संघर्ष को मजबूर 
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली। पंजाब में 13 लोकसभा सीटों पर एक जून को मतदान होगा। पंजाब के लोकसभा चुनाव पर सबकी नजरें होगी, जहां किसानों की नाराजगी झेलते हुए भाजपा, कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल और सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी अकेले दम पर चुनावी जंग में कूदे हैं। कांग्रेस और आप विपक्षी इंडिया गठबंधन का हिस्सा होने के बावूजद अलग थलग होकर अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। वहीं पिछले चुनाव में भाजपा और अकाली दल राजग गठबंधन में चुनाव लड़े थे, लेकिन तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन के दौरान किसानों का पक्ष लेते हुए अकाली दल राजग से अलग हो गया था, लेकिन केंद्र में भाजपा के साथ किसानों की नाराजगी उसके लिए भी कम नहीं है। किसानों के आंदोलन जमीन पर अब इन सभी सियासी दलों ने किसानों की मांगों पर फोकस को रखकर चुनावी मैदान में कदम रखा है। पंजाब में ऐसा पहली बार है जब भाजपा अकेले दम पर सभी सीटों पर चुनाव मैदान में हैं। अब देखना है कि इन चारों दलों के 52 प्रत्याशियों के बीच चुनावी जंग चतुष्कोणीय मुकाबले में किस-किस दल के 13 सांसद चुनावी जंग जीतकर लोकसभा में दाखिल होते है, यह चुनावी नतीजे ही तय करेंगे। 
देश की लोकसभा के लिए पंजाब में लोकसभा की सियासी जंग अन्य राज्यों से एकदम अलग देखी जा रही है। भाजपा की केंद्र सरकार किसानों के आंदोलन के बाद तीनों कृषि कानूनों को स्थगित करके एमएसपी की कानूनी गारंटी पर समिति गठित करने तक की प्रक्रिया अपना चुकी है, लेकिन राजग से अलग हुई पंजाब के प्रमुख दल शिरोमणि अकाली दल के साथ पंजाब में सत्तारूढ़ रही कांग्रेस और मौजूदा आप सरकार भी किसानों की 23 फसलों के लिए एमएसपी की कानूनी गारंटी के सब्जबाग दिखा चुकी है। मसलन अभी तक ये चारो प्रमुख दल किसानों की कसौटी पर खरे नहीं उतर सके, तो जाहिर सी बात है इन लोकसभा चुनाव में इनके सामने किसानों को साधने की सबसे बड़ी चुनौती होगी। लोकसभा चुनाव के सातवें और अंतिम चरण में एक जून को होने वाले चुनाव में पंजाब में वैसे तो 328 प्रत्याशी हैं, लेकिन सभी सीटों पर चुनावी मुकाबला सत्तारूढ़ आप, कांग्रेस, भाजपा और शिअद के बीच यानी चतुष्कोणीय होना तय है, हालांकि कुछ सीटों पर त्रिकोणीय तो कुछ पर बहुकोणीय मुकाबला भी हो सकता है। इन प्रमुख दलों ने पंजाब में अपना अस्तित्व कायम करने के लिए जिस तरह की रणनीतियां तय की है, उनमें एक दूसरे दल के कद्दावर नेताओं में जोड़तोड़ की सियासत भी जमकर की है, लेकिन यहां की सियासत में किसानों की भूमिका को भी नजरअंदाज नहीं किया सकेगा। 
इन दिग्गजों की दांव पर होगी प्रतिष्ठा 
पंजाब में लोकसभा के लिए हो रहे 13 सीटों पर चुनाव में सभी दलों ने मजबूत रणनीति के साथ प्रत्याशियों को चुनाव मैंदान में उतारा है। भाजपा ने जालंधर से आप के इकलौते सांसद सुशील कुमार रिंकू को चुनाव मैदान में उतारा है, तो कांग्रेस ने पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी पर दांव खेला। पटियाला से भाजपा कांग्रेस से चार बार सांसद रह चुकी पूर्व सीएम अमरिन्दर सिंह की धर्मपत्नी परणीत कौर इस बार भाजपा के टिकट पर चुनाव मैदान में है। बंठिंडा सीट से पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर शिअद की प्रत्याशी के रुप में चुनाव मैदान में है। भाजपा ने उत्तर पश्चिम दिल्ली के मौजूदा सांसद एवं सूफी गायक हंसराज हंस को फरीदकोट से प्रत्याशी बनाया है, तो आप ने भी हास्य अभिनेता करमजीत अनमोल पर दांव खेला है। इस चुनाव में गुरदासपुर सीट से कांग्रेस प्रत्याशी के रुप में चुनावी जंग में उतरे पर्वू उप मुख्यमंत्री सुखविन्दर सिंह रंधावा की भी प्रतिष्ठा दांव पर होगी। 
पहली बार वोटिंग करेंगे 5.39 लाख युवा मतदाता 
पजांब की 13 लोकसभा सीटों पर 2,14,61,741 मतदाता अधिकृत होंगे, जिनमें 1,12,86,727 पुरुष, 1,01,74,241 महिला एवं 773 थर्डजेंडर मतदाता शामिल हैं। पंजाब में 18-19 साल की आयु वर्ग के 5,38,715 नए युवा मतदाता पहली बार मतदान करेंगे। जबकि राज्य में 1,58,718 दिव्यांग और 1,89,855 बुजुर्ग मतदाता 85 साल से ज्यादा आयु वर्ग कें पंजीकृत हैं। वहीं 3,151 महिलाओं समेत 1,05,455 सर्विस मतदाता भी पंजीकृत हैं। पंजाब में सबसे ज्यादा 18,06,424 मतदाता पटियाला लोकसभा सीट पर पंजीकृत हैं। जबकि सबसे कम 15,52,567 मतदाता फतेहगढ़ साहिब लोकसभा सीट पर मतदान करेंगे। 
पटियाला में सर्वाधिक पोलिंग स्टेशन 
पंजाब में कुल 24,451 मतदान केंद्रों पर मतदान होगा, जिनमें 16517 ग्रामीण क्षेत्रों और 7934 शहरी क्षेत्रों में स्थापित किये गये हैं। इसमें गुरदासपुर में 1895, अमृतसर 1684, खडूर साहिब 1974, जालंधर 1951, होशियारपुर 1963, आनंदपुर साहिब 2068, लुधियाना 1843, फतेहगढ़ साहिब 1821, फरीदकोट 1688, फिरोजपुर 1903, बठिंडा 1814, संगरूर 1765 और पटियाला में 2082 पोलिंग स्टेशन बनाए गये हैं। 
जातीय समीकरण 
पंजाब में जाट सिख के बाद मालवा व माझा में मजहबी सिख आबादी सबसे बड़ी है। वहीं 32 फीसदी से अधिक दलितों की 39 जातियों में रामदासिया, रविदास समाज, मजहबी व मजहबी सिख, वाल्मीकि समाज, भगत अथवा कबीरपंथी प्रमुख हैं, वहीं इनमें निहाल सिंह वाला, जैतों भी शामिल। इसमें ग्रामीण क्षेत्रों में यह 37 फीसदी तक मानी जाती है। वहीं हिंदू आबादी की संख्या 39 फीसदी के करीब है। खास बात ये है कि पंजाब में वाल्मीकि खुद को हिंदू मानते हैं, जबकि मजहबी समुदाय खुद को सिख मानता रहा है। 
28May-2024

सोमवार, 27 मई 2024

हिमाचल प्रदेश: भाजपा के सामने ‘क्लीन स्वीप’ की हैट्रिक लगाने की चुनौती

कांग्रेस ने भी भाजपा को चुनौती देने के लिए बिछाई सियासी बिसात 
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव के सातवें और अंतिम चरण में एक जून को देवभूमि हिमाचल प्रदेश की चार लोकसभा सीटों के लिए चुनाव होगा। इन सीटों पर भाजपा और कांग्रेस दोनों प्रमुख दलों ने ही सियासत के खास चेहरों को चुनावी मैदान में उतारा है। भाजपा ने राज्य की चारों सीटों को जीतकर हैट्रिक बनाने की रणनीति के साथ अपने उम्मीदवारों को चुनावी जंग में उतारा है। वहीं कांग्रेस ने भी भाजपा की घेराबंदी करने के इरादे से अपनी अलग ही रणनीति के साथ प्रत्याशी चुनावी मैदान में उतारे हैं। यहां चारों सीटों पर स्थानीय दलो ने भी चुनावी जंग में अपने प्रत्याशी उतारकर भाजपा और कांग्रेस की सियासी रणनीति को प्रभावित करने का प्रयास किया है। देवभूमि हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी राज्य की सियासत अन्य राज्यों से अलग है, जहां इस बार अठारहवीं लोकसभा के लिए हो रहे चुनाव में सत्तारुढ़ कांग्रेस पार्टी ने भाजपा के खिलाफ मजबूत रणनीति तैयार की है और चारों सीटों पर ऐसे प्रत्याशी खड़े किये हैं, जो भाजपा के लिए चुनौती बन सकते हैं। यहां की चारों लोकसभा सीटों पर तीसरे राष्ट्रीय दल बसपा के प्रत्याशी भी चुनावी जंग में हैं। खासबात ये हैं कि यहां हिमाचली राजनीतिक दलों में राष्ट्रीय देवभूमि पार्टी, हिमाचल जनता पार्टी, अखिल भारतीय परिवार पार्टी जैसे दलों के ऐसे प्रत्याशी भी चुनावी मैदान में हैं, जो प्रमुख मुकाबले में शामिल भाजपा और कांग्रेस के चुनाव को प्रभावित करने में सक्षम हैं। इन चारों सीटों पर इन दलों समेत कुल 37 प्रत्याशी लोकसभा की चुनावी जंग में हैं, जिनमें 12 निर्दलीय प्रत्याशी भी सियासी ताल ठोक रहे हैं। यहां की लोकसभा सीटों में केवल शिमला लोकसभा क्षेत्र ही ऐसा है, जहां एक भी निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव मैदान में नहीं हैं। 
किसी सीट पर कैसा चुनावी समीकरण 
मंडी लोकसभा सीट: यह सीट इस बार इसलिए चर्चाओं में है कि जहां भाजपा ने इस बार फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत को प्रत्याशी बनाया है। जबकि कांग्रेस ने हिमाचल प्रदेश की सूक्खू सरकार के कैबिनेट मंत्री विक्रमदित्य सिंह को प्रत्याशी बनाकर लोकसभा चुनाव को दिलचस्प बना दिया है। पिछले चुनाव में यहां भाजपा के रामस्वरुप शर्मा लगातार दूसरी बार जीतकर लोकसभा पहुंचे थे, लेकिन 17 मार्च 2021 को दिल्ली में उनकी संदिग्ध मौत हो गई थी, जिसके कारण यहां उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी एवं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने जीत दर्ज कर ली थी। यानी इस सीट पर फिलहाल कांग्रेस काबिज है। हालांकि इस सीट के दायरे में आने वाली 17 विधानसभाओं में से 13 सीटों पर भाजपा के विधायक है, लेकिन कांग्रेस की रणनीति के खिलाफ यहां भाजपा ने कंगना रनौत को प्रत्याशी बनाया है। इस सीट पर भाजपा व कांग्रेस के अलावा बसपा और स्थानीय दलों समेत कुल दस प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। 
हमीरपुर लोकसभा सीट: इस सीट को भाजपा का गढ़ माना जाता है, जहां 1996 के चुनाव को छोड़कर 1989 से अब तक भाजपा दस बार जीत हासिल करके सिरमौर बनी हुई है। इनमें से तीन बार हिमाचल की भाजपा सरकार में सीएम रह चुके प्रेम सिंह धूमल तीन बार जीत हासिल करके लोकसभा में प्रतिनिधित्व कर चुके हैं, जिसके बाद पिता की विरासत को उनके बेटे अनुराग ठाकुर संजोय हुए हैं। भाजपा प्रत्याशी के रुप में मोदी कैबिनेट के युवा नेताओं में शुमार केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर को इस बार पांचवी जीत की दरकार है। भाजपा के गढ़ में सेंध लगाने की रणनीति के साथ कांग्रेस ने यहां सतपाल रायजादा को चुनावी जंग में उतारा है। इस लोकसभा सीट के दायरे में आने वाली 17 विधानसभाओं में से 11 पर भाजपा और छह पर कांग्रेस के विधायक काबिज हैं। यहां सबसे ज्यादा 12 प्रत्याशी चुनाव लड़ रहें हैं, जिनमें पांच निर्दलीय भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।
कांगड़ा लोकसभा सीट: इस रणभूमि पर पिछले 15 साल से भाजपा का दबदबा है, जहां से भाजपा के प्रत्याशी सात बार जीतकर लोकसभा पहुंचे हैं, जिनमें हिमाचल के मुख्यमंत्री रह चुके शांता कुमार ने भी दो बार जीत हासिल की है। इस बार नई रणनीति के साथ भाजपा ने मौजूदा सांसद किशन कपूर का टिकट काटकर प्रदेश के उपाध्यक्ष कद्दावर नेता राजीव भारद्वाज को प्रत्याशी बनाया है। जबकि कांग्रेस ने उनके खिलाफ पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा को प्रत्याशी बनाया है, जो पहली बार लोकसभा चुनाव के रण में है, इससे पहले उन्होंने केवल एक बार विधानसभा का चुनाव लड़ा था, लेकिन सफल नहीं रहे थे। इसलिए उनकी राजनीति राज्यसभा सदस्य के भरोसे ही चलती रही है। इस सीट पर कुल दस प्रत्याशी चुनाव मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।
शिमला लोकसभा सीट: हिमाचल प्रदेश की एक मात्र आरक्षित पर भाजपा के मुकाबले कांग्रेस की पकट मजबूत मानी जाती है। हालांकि पिछले तीनों चुनाव लगातार यहां भाजपा के सांसद काबिज है। भाजपा ने इस बार अपने मौजूदा सांसद सुरेश कश्यप पर भरोसा जताया है। कांग्रेस ने यहां वापसी करने की रणनीति के तहत यहां से सोनल जिले की कसौली क्षेत्र के मौजूदा विधायक विनोद सुल्तानपुरी को प्रत्याशी बनाकर नया दांव खेला है। इस सीट पर चुनाव मैदान में पांच प्रत्याशियों में बसपा के अनिल कुमार मंगेट के अलावा राष्ट्रीय देवभूमि पार्टी के सुरेश कुमार और अखिल भारतीय परिवार पार्टी के प्रत्याशी मदनलाल भी सियासी किस्मत आजमा रहे हैं। हिमाचल में 57.12 लाख मतदाता 
लोस क्षेत्र  पुरुष        महिला    थर्डजेंडर  कुल मतदाता 
कांगड़ा   7,76,880  7,47,147      5        15,24,032 
मंडी       6,98,666  6,78,504      3       13,77,173 
हमीरपुर 7,38,522  7,17,562    15      14,56,099 
शिमला(सु) 6,99,007 6,55,646 12     13,54,665 
----------------------------------------- 
कुल    29,13,075   27,98,859   35      57,11,969 
------------------------------------------- 
पहली बार मतदान करेंगे युवा 
हिमाचल प्रदेश की चार लोकसभा सीटों पर 18-19 साल की आयुवर्ग के 1,38,918 नये युवा मतदाता पहली बार मतदान करेंगे, जिनमें 63916 महिलाएं और एक थर्डजेंडर भी शामिल है। इनके अलावा हिमाचल में 1641 महिलाओं समेत 66,390 सर्विस और नौ महिलाओं समेत 34 भारतीय प्रवासी मतदाता भी पंजीकृत हैं। 
मतदान केंद्रों का कठिन गणित 
लोकसभा चुनाव में मतदान के लिए 7990 मतदान केंद्र बनाए गये हैं, जिनमें से 425 मतदान केंद्र क्रिटिकल हैं। तीन विधानसभा क्षेत्रों में चार ऐसे मतदान केंद्र हैं, जो समुद्रतल की दस हजार से 15 हजार से ज्यादा फीट की ऊंचाई पर होंगे। इनमें लाहौल व स्पिति विधान क्षेत्र का टाशीगंग के मतदान केंद्र की ऊंचाई 15256 फीट और नाको के मतदान केंद्र की ऊंचाई 12010 फीट है। इसके अलावा भरमौर विधानसभा क्षेत्र के चस्क भटौरी के मतदान केंद्र 11302 तथा मनाली विधानसभा के काथी में बने मतदान केंद्र की ऊंचाई 10 हजार फीट है। भरमौर विधानसभा क्षेत्र के ऐहलमी केंद्र पर 183 और और भटीयात विधानसभा के चक्की मतदान केंद्र पर 135 मतदाताओं का मतदान करने के लिए मतदानकर्मियों को 13-13 किमी पैदल चलना पड़ेगा। सबसे ज्यादा 1410 मतदाता डलहौजी विधानसभा क्षेत्र के मनोला मतदान केंद्र पर वोटिंग करेंगे। जबकि शिमला विधानसभा क्षेत्र के समरहिल पर 34 तथा किन्नौर सीट के का मतदान केंद्र पर महज 16 मतदाता वोटिंग करने के लिए अधिकृत हैं। छह विधानसभा सीटों पर उपचुनाव पिछले दिनों हिमाचल विधानसभा अध्यक्ष द्वारा दल बदल करने वाले छह विधायकों को अयोग्य घोषित करने के कारण खाली हुई धर्मशाला, लौह स्पिति, कुटलैहड, गगरेट, बड़सर और सुजानपुर विधानसभा सीटों पर भी लोकसभा चुनाव के साथ ही मतदान होगा। इन सभी सीटों पर कुल 25 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं, जिनमें 12 निर्दलीय प्रत्याशी भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। 
जातीय समीकरण साधने में जुटे दल 
हिमाचल प्रदेश की राजनीति में जातीय से लेकर क्षेत्रीय समीकरणों को साधते हुए राजनीतिक दल अपने प्रत्याशियों को चुनावी मैदान में उतारते रहे हैं। यदि इस पहाड़ी राज्य में जातीगत समीकरण पर गौर करें तो सबसे ज्यादा 50.72 प्रतिशत स्वर्ण वर्ग के मतदाता हैं, जिनमें 32.72 प्रतिशत राजपूत और 18 प्रतिशत ब्राह्मण हैं। जबकि राज्य के मतदाताओं में 25.22 अनुसूचित जाति, 13.52 प्रतिशत ओबीसी, 5.7 अनुसूचित जाति और 4.83 अलपसंख्य यानी सिख, ईसाई, जैन और मुस्लिम जाति के मतदाता हैं। 
27May-2024

शनिवार, 25 मई 2024

हॉट सीट उत्तर पूर्वी दिल्ली: भाजपा के खिलाफ आसान नहीं कांग्रेस की चुनावी राह!

दो पूर्वांचली मनोज तिवारी और कन्हैया कुमार के बीच दिलचस्प चुनावी जंग के आसार 
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी की सात लोकसभा सीटों पर छठे चरण में 25 मई को मतदान होगा, जिनमें से उत्तर पूर्वी लोकसभा सीट पर सबकी नजरें लगी हैं। लोकसभा चुनाव में इस बार यहां भाजपा और कांग्रेस के दो पूर्वांचली प्रत्याशियों के बीच बेहद दिलचस्प चुनावी मुकाबला होना तय है। इस सीट से लगातार दो बार से मौजूदा सांसद मनोज तिवारी पर भाजपा ने लगातार बढ़ते पार्टी के वोटग्राफ को देखते हुए तीसरी बार भी भरोसा जताया है। भाजपा को चुनौती देने और मनोज तिवारी की जीत की हैट्रिक के खिलाफ इंडिया गठबंधन की ओर से विवादित बयानों के लिए चर्चित कन्हैया कुमार कांग्रेस प्रत्याशी के रुप में चुनावी मैदान में उतारा है। हालांकि हाईप्रोफाइल बनी इस सीट पर भाजपा को चुनौती देने उतरे कन्हैया कुमार के लिए चुनावी वैतरणी को पार करने की पतवार खे लेना आसान नहीं लगता। फिर भी इस दिलचस्प चुनावी जंग में किसकी जीत और किसकी हार होगी, इसका पटाक्षेप तो चुनावी नतीजे से ही होगा। 
उत्तर पूर्वी दिल्ली लोकससभा सीट पर पर भाजपा प्रत्याशी एवं भोजपुरी गायक मनोज कुमार ने लगतार दो चुनाव जीत कर अपना अच्छा खासा दबदबा बनाया रखा है। यही कारण रहा कि पिछले चुनाव में उन्होंने यहां से दिल्ली की तीन बार मुख्यमंत्री रही शीला दीक्षित को हराने मनोज तिवारी को प्रत्याशी बनाकर भाजपा ने तीसरी बार भरोसा जताया है। जबकि भाजपा ने राजधानी की बाकी छह सीटों पर मौजूदा सांसदों के टिकट काटकर नए चेहरों को चुनाव मैदान में उतारा है। लेकिन इस सीट पर इंडिया गठबंधन के तहत आप के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही कांग्रेस ने भाजपा को चुनौती देने के लिए जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी छात्रसंघ के अध्यक्ष रह चुके कन्हैया कुमार को चुनावी मैदान में प्रत्याशी बनाया है। कन्हैया कुमार भाजपा के खिलाफ जहर उगलने और देश विरोधी नारों के लिए चर्चित रहे हैं। उत्तर पूर्वी लोकसभा क्षेत्र के दायरे में आने वली विधानसभा की 10 सीटों में बुराड़ी, तिमारपुर, सीमापुरी, रोहतास नगर, सीलमपुर, घोंडा, बाबरपुर, गोकलपुर, मुस्तफाबाद और करावल नगर विधानसभा शामिल है, जिनमें अधिकांश सीटो पर आम आदमी पार्टी के विधायक है। इस लोकसभा सीट पर भाजपा के मनोज तिवारी, कांग्रेस के कन्हैया कुमार, बसपा के अशोक कुमार समेत 28 प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। 
ये है चुनावी इतिहास 
दरअसल परिसीमन आयोग द्वारा राष्ट्रीय राजधानी में कराए गये परिसीमन के तहत उत्तर पूर्वी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र साल 2008 में अस्तित्व में आया। यहां पहला चुनाव साल 2009 में हुआ, जिसमें कांग्रेस के जयप्रकाश अग्रवाल ने 59.03 फीसदी वोट लेकर जीत दर्ज की थी और भाजपा के बीएल शर्मा को 33.71 फीसदी वोट मिले थे। लेकिन साल 2014 के चुनाव में भाजपा के मनोज तिवारी ने 45.25 फीसदी वोट लेकर कांग्रेस प्रत्याशी जयप्रकाश अग्रवाल को पराजित कियायय, जिन्हे इस चुनाव में महज 16.31 फीसदी वोट मिल सके। जबकि पिछले 2019 के चुनाव में भाजपा के मनोज तिवारी ने दिल्ली की तीन बार मुख्यमंत्री रही कांग्रेस प्रत्याशी शीला दीक्षित को हराकर सबको चौंका दिया था, और भाजपा को वोट बैंक बढ़कर 53.90 फीसदी तक पहुंच गया। इस चुनाव कांग्रेस की शीला दीक्षित को 28.83 फीसदी वोट मिले थे। 
  मतदाताओं का चक्रव्यूह 
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की उत्तर पूर्वी दिल्ली लोकसभा सीट पर कुल 24,63,159 मतदाता हैं, जिनमें 13,26,940 पुरुष, 11,36,970 महिला और 149 ट्रांसजेंडर मतदाता शामिल हैं। इस सीट पर 18-19 साल के 41,744 नए युवा मतदाता पहली बार मतदान करेंगे। यहां 85 साल से अधिक आयु वाले 12,030 मतदाता हैं, तो वहीं दिव्यांग मतदाताओं संख्या 14394 है। वहीं इस सीट पर 1346 सर्विस और 12 प्रवासी भारतीय मतदाता भी पंजीकृत हैं। 
क्या है जातीय समीकण 
उत्तर-पूर्वी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र राष्ट्रीय राजधानी का सबसे घनी आबादी वाला क्षेत्र हैं, जहां बिहार और पूर्वी यूपी के सबसे ज्यादा करीब 28 फीसदी मतदाता हैं। उत्तर प्रदेश की सीमा से सटी इस लोकसभा सीट पर मुस्लिम मतदाताओं की संख्या भी अच्छी खासी है, जहां मुस्लिम 23 फीसदी, ओबीसी 20 फीसदी, दलित 16 फीसदी, ब्राह्मण 11 फीसदी, गुर्जर 7.50 फीसदी, वैश्य (बनिया) 4.50 फीसदी, पंजाबी 4 फीसदी और बाकी अन्य मतदाता हैं। 
कौन हैं भाजपा व कांग्रेस प्रत्याशी 
भाजपा के प्रत्याशी मनोज कुमार ने भोजपुरी गायकी के अलावा कई फिल्मों में भी कार्य किया है। वह साल 2011 में बाबा रामदेव द्वारा रामलीला मैदान पर शुरू किए गए भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन और अन्ना आंदोलन में सक्रिय रहे। इससे पहले उनकी सियासी पारी 2009 में समाजवादी पार्टी से शुरु की और गोरखपुर लोकसभा सीट से भाजपा के योगी आदित्यनाथ के खिलाफ चुनाव लड़ा, लेकिन हार गये तो उस्रके बाद उन्होंने भाजपा का दामन थामा, जहां उनकी राजनीति का सितारा बुलंद हो चुका है और पिछले दस साल से सांसद हैं। इस सीट से भाजपा को चुनौती देने चुनाव मैदान में उतरे कांग्रेस के प्रत्याशी कन्हैया कुमार जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी(जेएनयू) से अपने विवादित बयानों से सुर्खियों में आए थे, जिन्होंने अपनी छवि को राजनीतिक तौर पर निखारने के लिए पिछला लोकसभा चुनाव बिहार की बेगूसराय लोकसभा सीट से सीपीआई(एम) के टिकट पर लड़ा था, लेकिन वह भाजपा के गिरीराज सिंह से हार गये। इसके बाद वह कांग्रेस में शामिल हुए तो पार्टी ने इस बार उन्हें राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की उत्तर पूर्वी दिल्ली लोकसभा सीट पर अपना प्रत्याशी बनाकर भाजपा प्रत्याशी एवं दो बार से मौजूदा सांसद मनोज तिवारी के सामने खड़ा किया है। देश विरोध नारों से चर्चा में आए कन्हैया लाल को जेल भी जाना पड़ा था। 
25May-2024

हॉट सीट आजमगढ़: यादवों के सियासी गढ़ में घिरे भाजपा सांसद दिनेशलाल निरहुआ

बसपा छोड़ गुड्डू जमाली ने सपा का दामन थामकर बढ़ाई भाजपा की मुश्किलें 
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली। त्तर प्रदेश की आजमगढ़ लोकसभा सीट पर कल शनिवार को मतदान होगा, जहां मौजूदा सांसद एवं भोजपुरी गायक दिनेश लाल यादव निरहुआ को भाजपा ने एक बार फिर चुनाव मैदान में उतारा है। जबकि समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी के रुप में एक बार फिर सैफई के मुलायम परिवार के धर्मेन्द्र यादव भाजपा से पिछले उपचुनाव में हार का बदला चुकता करने के इरादे से चुनाव मैदान में है। सपा मुस्लिम-यादव समीकरण अपने इस अपने सियासी गढ़ के रुप में अस्तित्व करने के लिए इस कदर पूरी ताकत के साथ चुनाव प्रचार में जुटी रही, कि पूरा मुलायम परिवार आजमगढ़ में डेरा डाले हुए है। वहीं इसी परिवार की बहू अर्पणा यादव भाजपा प्रत्याशी दिनेश लाल निरहुआ के लिए चुनाव प्रचार करती नजर आ रही है। वहीं भाजपा और सपा के प्रत्याशियों के खिलाफ बसपा ने बड़ा दांव खेलते हुए मुस्लिम चेहरे को चुनावी जंग में उतारा है। हालांकि इस सीट चुनावी इतिहास और सियासी व जातीय समीकरण को देखते हुए इसलिए भी भाजपा प्रत्याशी की राह मुश्किल नजर आ रही है, क्योंकि यहां बसपा के एक बड़ा चेहरा शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली बसपा छोड़कर सपा में आ गये हैं, जिससे सपा का मजबूत होना स्वाभाविक है। फिर भी यहां चुनाव का सियासी ऊंट किस करवट बैठेगा यह चुनावी नतीजे आने पर तय होगा। 
यूपी में पूर्वांचल क्षेत्र के अहम जिलों में शामिल आजमगढ़ की इस लोकसभा सीट के दायरे में पांच विधानसभाएं आती है और सभी सीटों पर सपा के विधायक हैं। इस लोकसभा सीट पर 20 चुनावों में 14 बार यादव प्रत्याशी ही चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे हैं। पिछले चुनाव में साल 2019 में इस सीट से सपा के अखिलेश यादव ने भाजपा प्रत्याशी भोजपुरी सिनेमा के स्टार दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ से चुनाव जीता था, लेकिन साल 2022 में विधायक निर्वाचित होने के बाद उन्होंने यह सीट छोड़ी और उसी साल उपचुनाव में बदांयू से हार चुके मुलायम परिवार के ही धर्मेन्द्र यादव चुनाव लड़े, जहां भाजपा के दिनेशलाल निरहुआ ने उन्हें महज 8,679 मतों से हरा दिया, इस चुनाव में बसपा के गुड्डू जमाली 2,66,210 लेकर तीसरे स्थान पर थे, जो इस बार सपा के पाले में जाकर धर्मेन्द्र यादव को जिताने का प्रयास कर रहे हैं। इस सीट पर भाजपा, सपा के अलावा बसपा के मशहुद अहमद समेत कुल आठ प्रत्याशी चुनाव मैदान में है, लेकिन प्रमुख मुकाबला भाजपा व सपा के बीच ही माना जा रहा है। 
ये है चुनावी इतिहास 
आजमगढ़ लोकसभा सीट पर अभी तक 20 चुनाव और उपचुनावों में कांग्रेस 7, भाजपा और जनता पार्टी 2-2, जनता दल एक, सपा और बसपा 4-4 जीती है। यहां पहले छह चुनावो में कांग्रेस प्रत्याशी जीते हैं। इसके बाद 1977 में जनता पार्टी के रामनरेश यादव चुनाव जीते थे, लेकिन अगले साल ही उपचुनाव में यहां कांग्रेस की मोहसिना किदवई लोकसभा पहुंची। साल 1980 में जनाता पार्टी के चंद्रजीत यादव, तो 1984 में फिर कांग्रेस ने इस सीट पर कब्जा किया। इसके बाद 1989 में यहां पहली बार बसपा को जीत मिली, तो 1991 यहां चंद्रजीत यादव ने फिर जनता दल के टिकट पर जीत हासिल की। साल 1996 में इस सीट पर पहली बार समाजवादी पार्टी ने खाता खोला, लेकिन अगले चुनाव में बसपा के अकबर अली डंपी यहां से सांसद बने। जबकि रमाकांत ने 1999 में सपा और 2004 में बसपा के लिए चुनाव जीता और वे इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हो गये। इसकारण साल 2008 में यहां उपचुनाव हुआ तो बसपा के अकबर अली डंपी जीतकर फिर लोकसभा पहुंचे। साल 2009 का चुनाव रमाकांत यादव ने भाजपा के टिकट पर लड़ा और भाजपा को पहली जीत दिलाई। साल 2014 में यहां समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव और 2019 में उनके बेटे अखिलेश यादव चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे। 
मतदाताओं का चक्रव्यूह 
कुल मतदाता-1868165 
पुरुष मतदाता-9,85,389 
महिला मतदाता- 8,82,739 
  थर्ड जेंडर-37 
जातीय समीकरण 
आजमगढ़ सीट पर जातिगत समीकरण देखा जाए तो यहां 37 प्रतिशत ओबीसी में 25 फीसदी अकेले यादव हैं, जबकि दलित 24 फीसदी, स्वर्ण 19 फीसदी और भूमिहार, ठाकुर, ब्राह्मण, कायस्थ करीब सात फीसदी मतदाता हैं। इस सीट पर मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 19 फीसदी हैं। 
  25May-2024

शुक्रवार, 24 मई 2024

लोकसभा चुनाव: छठे चरण में दांव पर चार केंद्रीय मंत्रियों व तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों की प्रतिष्ठा

फिल्म-संगीत जगत के दिग्गजों की भी सियासी साख के लिए होगी अग्नि परीक्षा 
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव के छठे चरण में आठ राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों की 58 लोकसभा सीटों के लिए कल शनिवार 26 मई को चुनाव कराया जाएगा। इस चरण में 94 महिलाओं और एक थर्ड जेंडर समेत 889 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं, जिनके सामने 11 करोड़ 13 लाख 16 हजार 606 मतदाताओं के चक्रव्यूह को भेदने की दरकार होगी। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री और चार केंद्रीय मंत्रियों की प्रतिष्ठा भी दांव पर होगी। वहीं फिल्म अभिनेता, गायक और कलाकारों के अलावा पूर्व मंत्रियों, सांसदों समेत अनेक राजनैतिक दिग्गजों के सियासी भविष्य का फैसला भी मतदाता करेंगे। 
देश में लोकसभा की 543 सीटों के लिए चल रहे इस चुनावों के महासंग्राम के पहले पांच चरणों में 429 सीटो पर मतदान हो चुका है, जिसमें 611 महिलाओं और एक थर्डजेंडर समेत 6570 प्रत्याशियों की सियासी तकदीर मतदाता ईवीएम में कैद करके लिख चुके हैं, जबकि एक प्रत्याशी निर्विरोध होकर लोकसभा की राह पकड़ चुका है। कल 26 मई शनिवार को 58 लोकसभा सीटों पर होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए आज गुरुवार की शाम चुनाव प्रचार समाप्त हो गया है। अब शनिवार को आठ राज्यों की 58 सीटों पर होने वाले चुनाव में 889 प्रत्याशियों के लिए ईवीएम का बटन दबाया जाएगा। इस चरण में हरियाणा की 10 सीटों पर सबसे ज्यादा 223 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं, जबकि जबकि लोकसभा सीट के हिसाब से देखा जाए तो हरियाणा की कुरुक्षेत्र लोकसभा सीट पर सबसे ज्यादा 31 प्रत्याशी चुनव मैदान में हैं। इस चरण में ओडिशा की की 6 लोकसभा सीटों के साथ उनके दायरे में आने वाली 42 विधानसभा सीटों पर भी मतदान कराया जाएगा। 
इन पूर्व मुख्यमंत्रियों व केंद्रीय मंत्रियों की दांव पर प्रतिष्ठा 
लोकसभा चुनाव के छठे चरण में हरियाणा की गुडगांव लोकसभा सीट पर केंद्रीय योजना, सांख्यिककी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्री राव इन्द्रजीत सिंह, फरीदाबाद सीट से केंद्रीय ऊर्जा और भारी उद्योग राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर के अलावा ओडिशा की संबलपुर लोकसभा सीट से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान तथा पश्चिम बंगाल की बांकुरा लोकसभा सीट से केंद्रीय शिक्षा राज्यमंत्री डा. सुभाष सरकार की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी है। वहीं जिन तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों की इस चुनावी संग्राम में अग्नि परीक्षा होनी है, उनमें हरियाणा की करनाल लोकसभा सीट से भाजपा के मनोहरलाल खट्टर, जम्मू कश्मीर की राजौरी-अनंतनाग सीट से पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती और यूपी की डुमरियागंज सीट से भाजपा के जगदंबिका पाल शामिल है। 
इन दिग्गजों की दांव पर साख 
छठे चरण में यूपी की सुल्तानपुर लोकसभा सीट पर भाजपा प्रत्याशी एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी, बिहार की पूर्वी चंपारण से भाजपा प्रत्याशी एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री राधा मोहन सिंह, हरियाणा की सिरसा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी सैलजा, हिसार से हरियाणा के पूर्व कैबिनेट मंत्री रणजीत चौटाला सियासी साख भी दांव पर लगी है। वहीं सियासी प्रतिष्ठा के लिए राष्ट्रीय राजधानी की उत्तर पूर्व दिल्ली सीट से भाजपा प्रत्याशी भोजपुरी गायक मनोज तिवारी और कांग्रेस के कन्हैया कुमार, नई दिल्ली सीट से भाजपा की बांसुरी स्वराज, उत्तर पश्चिम दिल्ली से कांग्रेस के उदित राज, हरियाणा की गुडगंव से फिल्म अभिनेता राजबब्बर, यूपी की आजमगढ़ सीट से भोजपुरी स्टार दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ, बिहार की सिवान सीट से बाहुबली शहाबुद्दीन की पत्नी हिना शहाब, हरियाणा की हिसार सीट से जेजेपी की नैना चौटाला और इनेलो की सुनैना चौटाला, रोहतक से कांग्रेस के दीपेन्द्र हुड्डा व भाजपा के अरविंद शर्मा, झारखंड रांची सीट से भाजपा के संजय सेठ, ओडिशा की पुरी सीट से भाजपा के प्रवक्ता संबित पात्रा, कटक से बीजद छोड़कर भाजपा प्रत्याशी बने भृतहरि महताब और भुवनेश्वर से अपराजिता सारंगी जैसे दिग्गज चुनावी मैदान में हैं। दक्षिणी दिल्ली सीट से बाल्टी चुनाव चिन्ह पर बिहार निवासी एक थर्ड जेंडर राजन सिंह भी अपनी किस्मत आजमा रहा है। 
निर्दलीय प्रत्याशिें की भरमार 
लोकसभा चुनाव के इस चरण में 58 सीटों पर प्रमुख राजनैतिक दलों में सबसे ज्यादा 54 प्रत्याशी बसपा ने उतारे हैं। जबकि भाजपा के 51, कांग्रेस के 25, सपा के 12, जेजेपी के 10, तृणमूल कांग्रेस के 9, इनेलो के 7, बीजद के 6, आप और सीपीआई(एम) के 5-5, जदयू व राजद के 4-4, सीपीआई और एआईएमआईएम के 3-3, झामुमो व अजसू के 2-2 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। हालांकि इस चरण में 325 प्रत्याशी निर्दलीय तौर पर भी चुनावी जंग में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। फिलहाल किसके पास कितनी सीटें लोकसभा के छठे चरण में 58 लोकसभा सीटों पर शनिवार को मतदान होना है। उनमें साल 2019 के चुनाव में भाजपा ने सबसे ज्यादा 40 सीटें जीतकर अपना दबदबा बनाया था। जबकि बीजद व बसपा ने 4-4, तृणमूल कांग्रेस व जदयू ने 3-3, सपा, लोजपा, आजसू और नेशनल कॉफ्रेंस ने एक-एक सीट पर जीत दर्ज की थी। इन सीटों पर पिछले चुनाव में भी कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, राजद जैसे दल का खाता भी नहीं खुला था। भाजपा को सबसे बड़ी सफलता हरियाणा की सभी दस और राजधानी दिल्ली की सभी सात सीटों पर क्लीन स्वीप करके बड़ी सफलता मिली थी। 
दागियों से किसी को नहीं परहेज 
लोकसभा चुनाव के पहले पांच चरणों की तरह ही छठे चरण में भी राजनीतिक दलों ने दागियों पर दांव खेला है। इस चरण में 183 दागी चुनाव मैदान में हैं, जिसमें प्रमुख राजनीतिक दलों में सबसे ज्यादा 28 को भाजपा ने अपना प्रत्याशी बनाया है। जबकि सपा के 9, कांग्रेस के 8, बसपा के 7, आम आदमी पार्टी के सभी 5, तृणमूल कांग्रेस व राजद के 4-4, बीजद, जेजेपी, सीपीआई(एम) और एआईएमआईएम के 2-2, इनेलो, सीपीआई, झामुमो और अजसू के 1-1 प्रत्याशी के खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं। हालांकि सबसे ज्यादा 50 निर्दलीय प्रत्याशी भी दागियों की फेहरिस्त में शामिल है। सबसे ज्यादा 37 आपराधिक मामले ओडिशा की भुबनेश्वर सीट से कांग्रेस प्रत्याशी सैयद यासिर नवाज के खिलाफ लंबित हैं। इसके बाद यूपी की जौनपुर सीट पर सपा प्रत्याशी बाबूसिंह कुशवाह ने विचाराधीन 25 आपराधिक मामलों की जानकारी चुनाव आयोग को दी है। 
करोड़पतियों पर भी खेला दांव 
लोकसभा चुनाव के छठे चरण में ज्यादातर सियासी दलों ने करोड़पतियों पर दांव खेला है। इस चरण में 343 करोड़पति प्रत्याशियों में सबसे ज्यादा 48 प्रत्याशी भाजपा के हैं। बसपा के 54 में 23, कांग्रेस के 25 में 20, सपा के 12 में 11, तृणमूल के 9 में 7, जेजेपी के 10 में 9, इनेलों के सभी 7, बीजद के सभी 6, आप के 5 में 4, जदयू के सभी चार, राजद के सभी चार, सीपीआई के तीन में एक, एआईएमआईएम के 3 में 2, सीपीआई(एम) 5 में 2, झामुमो के 2 में एक, अजसू के 2 में एक प्रत्याशी धनकुबेर प्रत्याशियों की सूची में शामिल हैं। इस चरण में 325 निर्दलीयों में से 86 करोड़पति शामिल हैं। सबसे अमीर प्रत्याशियों में 1241 करोड़ की संपत्ति के साथ हरियाणा की कुरुक्षेत्र सीट से भाजपा प्रत्याशी नवीन जिंदल हैं। जबकि रोहतक सीट से निर्दलीय प्रत्याशी मास्टर रणधीर सिंह ने महज दो रुपये की संपत्ति घोषित की है। इससे ज्यादा यूपी की प्रतापगढ़ सीट से एसयूसीआई के रामकुमार यादव ने 1686 रुपये की संपत्ति का मालिक होने का दावा किया है। 
------ 
छठे चरण में कितनी सीट व प्रत्याशी और मतदाता 
राज्य           सीट  प्रत्याशी  दागी  करोड़पति  मतदाता संख्या 
बिहार              8      86       24       35         1,49,32,165 
हरियाणा        10     223      27     102        2,00,76,768 
जम्मू कश्मीर  1       20        3         5        18,36,576 
झारखंड           4       93      28       25         82,16,506 
दिल्ली             7     162      25      68        1,52,01,936 
 ओडिशा         6        64      18      28          94,48,553 
 उत्तर प्रदेश  14     162      38      59        2,70,69,874 
पश्चिम बंगाल 8      79       20      21        1,45,34,228 
 --------------------------------------------- 
कुल               58   889       183   343       11,13,16,606 
-------------------------------------------- 
किस राज्य में कौन सीट पर होगा चुनाव 
बिहार: वाल्मिकीनगर,पश्चिम चंपारण,पूर्वी चंपारण, शिवहर, वैशाली, गोपालगंज, सिवान, महाराजगंज। 
हरियाणा: अंबाला, कुरुक्षेत्र, सिरसा, हिसार, करनाल, सोनीपत, रोहतक, भिवानी-महेन्द्रगढ़, गुडगांव, फरीदाबाद। 
जम्मू कश्मीर: राजौरी अनंतनाग लोकसभा सीट। 
  झारखंड : गिरिडीह, धनबाद, रांची और जमशेदपुर। 
दिल्ली: उत्तर पूर्वी दिल्ली, चांदनी चौक, उत्तर पश्चिम दिल्ली,नई दिल्ली, पूर्वी दिल्ली, दक्षिणी दिल्ली,पश्चिमी दिल्ली। 
ओडिशा: संबलपुर, क्योंझर, ढेंकनाल, पुरी, भुवनेश्वर, कटक लोकसभा के साथ में 42 विधानसभा सीट। 
उत्तर प्रदेश: सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, फूलपुर, प्रयागराज, अंबेडकरनगर, श्रीवस्ती, डुमरियांगंज, बस्ती, संत कबीरनगर, लालगंज, आजमगढ़, जौनपुर, मछली शहर, भदोही। 
 पश्चिम बंगाल: तमलुक, कांथी, घाटल, झाड़ग्राम, मेदिनीपुर, पुरुलिया, बांकुरा, बिष्णुपुर। 
24May-2024

गुरुवार, 23 मई 2024

हॉट सीट संबलपुर: कांग्रेस के सियासी चक्रव्यूह में फंसी भाजपा व बीजद!

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान की चुनाव में आसान नहीं होगी राह 
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव में ओडिशा की संबलपुर लोकसभा सीट इसलिए हाई प्रोफाइल बन गई है, कि यहां गठबंधन की डोर बंधने से पहले टूटने के कारण भाजपा और बीजद ने प्रतिष्ठा दांव पर लगा रखी है। भाजपा ने इस सीट पर राज्यसभा सांसद एवं केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान को चुनावी जंग में उतारकर बड़ा दांव खेला है। जबकि राज्य में सत्तारूढ़ बीजद ने यहां वापसी करने के मकसद से अन्य जिले की सीट से मौजूदा विधायक प्रणब प्रकाश दास को प्रत्याशी बनाया। वहीं इंडी गठबंधन की तरफ से कांग्रेस ने भी भाजपा और बीजद दोनों को सियासी चुनौती देने के लिए बीजद के बागी हुए पूर्व सांसद नागेन्द्र प्रधान को अपना प्रत्याशी बनाकर नहले पर दहला मारा है। नागेन्द्र प्रधान इस सीट से सोलहवीं लोकसभा में बीजद के सांसद रहे हैं। कांग्रेस की इस चुनावी रणनीति के दांव ने संबलपुर लोकसभा चुनावी समीकरण को दिलचस्प मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है। राजनीतिक विशेषलकों की माने तो यहां अब त्रिकोणीय चुनावी मुकाबला होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। 
अठारहवीं लोकसभा के लिए इस बार चुनाव में ओडिशा की संबलपुर लोकसभा सीट भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। यहां 25 मई को छठे चरण में 25 मई को होने वाले लोकसभा चुनाव के साथ ही इसके अंतर्गत आने वाली सात विधानसभा सीटों के लिए भी मतदान कराया जा रहा है। संबलपुर लोकसभा सीट के चुनाव की बात की जाए तो यहां का चुनाव भाजपा और बीजद के लिए इसलिए भी सियासी प्रतिष्ठा का सवाल बना हुआ है, कि दोनों दलों की गठबंधन करके चुनाव लड़ने डोर बंधने से पहले ही टूट गई थी। इसलिए भाजपा ने पिछले चुनाव में यहां भाजपा को पहली जीत का स्वाद चखाने वाले मौजूदा सांसद नितेश गंगा देब का टिकट काटकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान को प्रत्याशी बनाया है, केंद्रीय मंत्री प्रधान इससे पहले देवगढ़ सीट से चुनाव लड़ते रहे हैं। बीजद ने एक मजबूत चुनावी रणनीति के तहत मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के करीबी जाजपुर से तीन बार विधायक रहे बीजद के संगठन महासिचव प्रणब प्रकाश दास को भाजपा के खिलाफ चुनावी जंग में उतार दिया है, जबकि 2014 में इस सीट से बीजद सांसद नागेन्द्र प्रधान ने पिछले चुनाव की तरह इस बार भी टिकट न मिलने पर ऐसी बगावत करके पिछले महीने ही कांग्रेस का दामन थाम लिया और कांग्रेस ने पहले यहां बनाए गये प्रत्याशी दुलालचंद्र प्रधान का टिकट कैंसिल करके नागेन्द्र को प्रत्याशी बनाकर ऐसा चक्रव्यूह तैयार किया कि संबलपुर लोकसभा सीट पर भाजपा और बीजद के चुनावी मुकाबले में सभी समीकरण बदल दिये। यह भी माना जा रहा है कि यहां चुनावी मुकाबला अब दो प्रधानों के बीच हो सकता है, लेकिय यह तो चुनाव के बाद नतीजे ही तय करेंगे कि इन प्रमुख दलों की रणनीतियों का समीकरण किस करवट बैठेगा। 
ये है लोकसभा का इतिहास 
ओडिशा की संबलपुर लोकसभा सीट पर अब तक हुए 17 लोकसभा चुनावों में सबसे ज्यादा सात बार कांग्रेस का कब्जा रहा है, जबकि बीजद चार, गणतंत्र परिषद दो के अलावा भाजपा, जनता पार्टी, जनता दल व प्रजा सोशलिस्ट एक-एक बार यहां जीत कर सकी है। भाजपा ने पहली बार साल 2019 के चुनाव में नितेश गंगा देब को प्रत्याशी बनाकर बीजद प्रत्याशी के खिलाफ महज 9,162 मतों के अंतर से जीत हासिल की थी। आजादी के पहले दो चुनाव यहां गणतंत्र परिषद के प्रत्याशियों ने जीते, तो तीसरे चुनाव 1962 में यहां प्रजा सोशलिस्ट पार्टी ने पताका लहराया। कांग्रेस ने पहली बार 1967 में खाता खोला और लगातार दो चुनाव जीते, लेकिन आपातकाल के दौरान 1977 में कांग्रेस विरोधी लहर में यहां जनता पार्टी ने जीत दर्ज की, लेकिन 1980 और 1984 के चुनाव में एक बार फिर कांग्रेस के प्रत्याशी जीतकर लोकसभा पहुंचे। 1989 में यहां जनता दल ने अपना झंडा फहराया, तो उसके बाद एक बार फिर कांग्रेस ने लगातार दो लोकसभा चुनाव जीते। लेकिन इसके बाद ओडिशा में बीजू जनता दल ने राज्य में बढ़ते जनाधार की बदौलत 1998 में इस सीट पर पहली बार जीत का स्वाद चखा और बीजद के प्रसन्ना आचार्य यहां से लगातार तीन बार चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे। जबकि केंद्र में यूपीए की सरकार के दौरान 2009 के चुनाव में एक बार फिर कांग्रेस का प्रत्याशी जीतकर लोकसभा पहुंचा, जबकि 2014 के चुनाव में यहां नागेन्द्र प्रधान ने बीजद को जीत दिलाई। इस बार नागेन्द्र प्रधान कांग्रेस के टिकट पर भाजपा के धर्मेन्द्र प्रधान को चुनौती दे रहे हैं। 
क्या है विधानसभाओं का गणित 
संबलपुर लोकसभा के अंतर्गत तीन जिलों की सात विधानसभा सीटे आती है, जिनमें संबलपुर जिले की कुचिंडा, रेंगाली(सु) व संबलपुर व रायराखोल हैं तो देवगढ़ जिले की देवगढ़ और अंगुल जिले की छेंदीपाडा(सु) तथा अथमल्लिक विधानसभा शामिल हैं। इन सीटों में फिलहाल चार पर बीजद और तीन पर भाजपा के विधायक काबिज है। इस लोकसभा सीट के साथ सातों विधानसभा के लिए भी मतदान होगा। संबलपुर लोकसभा सीट पर करीब 15 लाख से ज्यादा मतदाताओं को भेदने के लिए 14 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। साल 2019 के चुनाव में 1468530 मतदाता थे। 
एससी व एसटी वर्ग निर्णायक 
ओडिशा के पश्चिमी भाग के अनुगुल, देबगढ़ और संबलपुर जिले में फैली इस लोकसभा क्षेत्र की आबादी करीब 20 लाख है, जिसमें 19 फीसदी लोग शहरी और 81 फीसदी लोग ग्रामीण इलाकों में बसे हैं। यहां 30 फीसदी आदिवासी जनजाति राजनीति में निर्णाय की की भूमिका में रहती है। जबकि 17.91 फीसदी मतदाता अनुसूचित जाति हैं, जबकि बाकी सामान्य वर्ग के मतदाता है। गौरतलब है कि देश की आजादी की जंग में विशेष योगदान देने वाले संबलपुर जिला कभी एक बड़ा जिला होता था, लेकिन नब्बे के दशक में इसे चार जिलों में विभाजित कर दिया गया। 1993 में संबलपुर से अलग होकर बरगढ़ जिला बना तो, अगले ही साल 1994 में इस जिले से झारसुगुड़ा और देवगढ़ को भी दो अलग अलग जिलों में बांट दिया गया। 
23May-2024

बुधवार, 22 मई 2024

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली: भाजपा के ‘क्लीन स्वीप’ हैट्रिक के लक्ष्य इंडी गठबंधन की चुनौती

आप-कांग्रेस के खिलाफ भाजपा ने दिल्ली फतेह करने के इरादे से बदली चुनावी रणनीति 

ओ.पी. पाल.नई दिल्ली। अठारहवीं लोकसभा के लिए राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की सात लोकसभा सीटों पर छठे चरण में 25 मई को चुनाव होगा। पिछले दस साल से यहां सभी सीटों पर भाजपा काबिज है, जिसे ‘क्लीन स्वीप’ करके हैट्रिक बनाने से रोकने के लिए दिल्ली की सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी उसी कांग्रेस पार्टी के साथ मिलकर चुनाव मैदान में उतरी है, जिससे पिछले चुनाव में 36 का आंकड़ा था। विपक्षी गठबंधन इंडिया के तहत आप चार और कांग्रेस तीन सीटों पर भाजपा को चुनौती देने का प्रयास कर रही है। वहीं भाजपा ने इस गठजोड़ को चुनौती देने के लिए अपनी चुनावी रणनीति में व्यापक फेरबदल करते हुए छह लोकसभा सीटों पर नए चेहरों पर दांव खेला है। केवल उत्तर पूर्वी दिल्ली से ही मौजूदा सांसद मनोज तिवारी को जीत की तिगड़ी बनाने का मौका दिया है, जिसे चुनौती देने के लिए कांग्रेस ने चर्चित कन्हैया कुमार को अपना प्रत्याशी बनाया है। बहरहाल इस बार दिल्ली में भाजपा और इंडिया गठबंधन के बीच दिलचस्प और कड़ा चुनावी मुकाबला होने के आसार हैं, जहां सभी की नजरें लगी हुई हैं। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 70 विधानसभा क्षेत्रों में से 10-10 विधानसभा सीटों को मिलाकर बनी सात लोकसभा सीटों होने वाले चुनाव के लिए चुनाव प्रचार चरम पर है और भाजपा के खिलाफ विपक्षी गठबंधन पूरी ताकत झोंके हुए है। हालांकि राष्ट्रीय राजधानी होने के कारण दिल्ली में धर्म या जातीगत समीकरण ज्यादा मायने नहीं रखते, लेकिन विपक्षी गठबंधन के दल और अकेले दम पर चुनाव मैदान में उतरी बहुजन समाज पार्टी ने जातीय समीकरणों के आधार सभी सीटों पर अपने प्रत्याशी तय किये हैं। भाजपा ने दिल्ली फतेह करने के लिए इंडी गठबंधन के खिलाफ जिस चुनावी रणनीति के साथ चुनावी मैदान तैयार किया है। चुनाव प्रचार में भाजपा के खिलाफ इंडिया गठबंधन में कांग्रेस से कहीं ज्यादा आप आक्रमक नजर आ रही है। किस दल ने कहां से किसे बनाया प्रत्याशी 

उत्तर पूर्वी दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी की यह लोकसभा सीट इस बार ज्यादा चर्चा में है, जहां भाजपा ने भोजपुरी गायक और दो बार के मौजूदा सांसद मनोज तिवारी को अपना प्रत्याशी बनाकर तीसरी बार भरोसा जताया है। इस सीट पर भाजपा के विजय रथ को रोकने की रणनीति से विपक्षी गठबंधन में कांग्रेस प्रत्याशी कन्हैया कुमार को प्रत्याशी बनाया है। पिछले चुनाव में मनोज तिवारी ने दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को हराकर लगातार दूसरी जीत दर्ज की थी। इस सीट पर बसपा ने भी अशोक कुमार को अपना प्रत्याशी बनाया है। इस सीट पर 28 प्रत्याशी अपनी चुनावी किस्मत आजमा रहे हैं। 
चांदनी चौक: राष्ट्रीय राजधानी की चांदनी चौक सीट का अधिकांश क्षेत्र कारोबारी हब के रूप में जाना जाता है। यहां भाजपा ने मौजूदा सांसद डा. हर्षवर्धन के राजनीति से सन्यास लेने की वजह से नए चेहरे पर दांव खेला है। यह क्षेत्र कारोबारी गढ़ माना जाता है तो भाजपा ने दिल्ली के प्रसिद्ध व्यापारी नेता प्रवीण खंडेलवाल को अपना प्रत्याशी बनाया है, जबकि कांग्रेस ने पिछले चुनाव में पराजित जयप्रकाश अग्रवाल को प्रत्याशी बनाकर भरोसा जताया है। जबकि यहां चुनाव मैदान में कूदे 25 प्रत्याशियों में बसपा ने मुस्लिम व दलित समीकरण साधने के लिए अबुल कलमा आजाद को चुनाव मैदान में उतारा है। 
उत्तर पश्चिम दिल्ली: राजधानी की अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित इस लोकसभा सीट पर भाजपा ने मौजूदा सांसद एवं गायक हंसराज हंस का टिकट काटकर उतरी नगर निगम के पूर्व मेयर योगेंद्र चंदोलिया को अपना प्रत्याशी बनाया है। जबकि कांग्रेस ने यहां दलितों की राजनीति करते रहे उदित राज को चुनाव मैदान में उतारा है, जो पिछले चुनाव में भाजपा से पराजित हो गये थे। जबकि उससे पहले साल 2014 के चुनाव में उदित राज भाजपा के टिकट पर जीत हासिल कर लोकसभा पहुंचे थे। इस सीट पर 26 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं, जहां बसपा ने विजय बौद्ध को अपना प्रत्याशी बनाया है। 
नई दिल्ली: यह लोकसभा सीट अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है, जहां से दो बार पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के अलावा केसी पंत, लालकृष्ण आडवाणी, संघ के बलराज मधोक, यूपी की सीएम रही सुचेता कृपलानी और फिल्म अभिनेता राजेश खन्ना भी सांसद रह चुके हैं। इस सीट पर भाजपा ने मौजूद सांसद मीनाक्षी लेखी की जगह भाजपा दिग्गज रही स्व. सुषमा स्वराज की बेटी बांसुरी स्वराज को अपना प्रत्याशी बनाया है। जबकि इंडी गठबंधन से यहां आम आदमी पार्टी के सोमनाथ भारती चुनाव मैदान में हैं। इसी सीट पर 17 प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतरे है, जिनमें बसपा राजकुमार आनंद को प्रत्याशी बनाया है। 
पूर्वी दिल्ली: इस लोकसभा सीट को हॉट सीट माना जा रहा है। यहां भाजपा ने मौजूदा सांसद एवं क्रिकेटर गौतम गंभीर का टिकट काटकर हर्ष मल्होत्रा के रुप में नया चेहरा उतारा है। भाजपा के खिलाफ आप ने इस सीट से कुलदीप कुमार (मोनू) को अपना प्रत्याशी बनाकर दांव खेला है। पिछला चुनाव यहां आप की अतिशी पराजित हुई थी। इस सीट का यह भी इतिहास रहा है कि यहां से आज तक कोई महिला लोकसभा नहीं पहुंच सकी। बसपा ने इस सीट पर मौहम्मद वकार चौधरी पर दांव खेला है। इस सीट पर 20 प्रत्याशी चुनाव मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। 
दक्षिणी दिल्ली: राजधानी में वीआईपी क्षेत्रों के अलावा ग्रामीण इलाकों को कवर करने वाली इस सीट पर भाजपा ने दो बार के मौजूदा सांसद रमेश विधूडी की जगह दिल्ली विधानसभा में विपक्ष के नेता रामबीर सिंह विधूडी को अपना प्रत्याशी बनाकर बड़ा दावं खेला है। जबकि इंडी गठबंधन से आम आदमी पार्टी ने सहीराम पहलवान को चुनावी मैदान में उतारा है। पिछले चुनाव में इस सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े बॉक्सर विजेन्दर सिंह भाजपा के सामने चित्त हुए थे। जबकि बसपा प्रत्याशी के रुप में यहां अब्दुल बासित चुनावी जंग में हैं। इस सीट पर 20 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। 
पश्चिमी दिल्ली: दिल्ली की इस सीट पर भाजपा ने नए चेहरे के रुप में दक्षिणी दिल्ली की पूर्व मेयर महिला प्रत्याशी कमलजीत सहरावत पर दांव खेला है, जबकि दो बार के मौजूदा सांसद प्रवेश वर्मा का टिकट काट दिया गया है। इस सीट पर भी इंडी गठबंधन से आप का प्रत्याशी एवं पूर्व सांसद महाबल मिश्रा चुनाव मैदान में है, जिन्होंने पिछला चुनाव कांग्रेस के टिकट पर लड़ा था, लेकिन सफलता नहीं मिली थी। इस सीट पर कुल 24 प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं, जिनमें बसपा ने जातीय समीकरण साधने के मकसद से महिला प्रत्याशी के रुप में विशाखा को अपना प्रत्याशी बनाया है। 
------------------ 
निर्णायक होंगे युवा मतदाता 
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली की सात लोकसभा सीटों पर युवा मतदाता निर्णायक होंगे। दिल्ली की सभी लोकसभा सीटों पर कुल 1,52,01,936 मतदाता हैं, जिनमें 8212794 पुरुष, 6987914 महिला और 1228 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं। पिछले पांच साल में एनसीआर दिल्ली में 8,85,483 मतदाताओं का इजाफा हुआ है। इनमें से 18 से 39 आयुवर्ग के युवा मतदाताओं की संख्या 69,87,076 है, जिनमें से सबसे ज्यादा 12,06,036 उत्तर पश्चिमी दिल्ली सीट पर हैं। इन युवा मतदाताओं में 20-29 आयुवर्ग के भी 4.46 लाख मतदाता शामिल है। एनसीआर दिल्ली की लोकसभा सीटों पर 18-19 आयुवर्ग के 2,34,531 नए मतदाता पहली बार मतदान में हिस्सेदारी करेंगे, जिसमें सबसे ज्यादा 43,629 पश्चिमी दिल्ली सीट पर वोट करेंगे। वहीं 85 साल से अधिक आयु के 97 823 मतदाता पंजीकृत हैं। दिल्ली में 13637 मतदान केंद्र बनाए गये हैं, जिनमें 2891 संवेदशील श्रेणी के हैं। किस सीट पर कितने युवा मतदाता 
लोकसभा क्षेत्र       आयु वर्ग18-19  आयुवर्ग 20-39  कुल मतदाता 
उत्तर पूर्वी दिल्ली-       38,915      11,57,378           24,63,159 
चांदनी चौक-               20,743 6,   63,606              16,45,958 
उत्तर पश्चिमी दिल्ली- 41,663     11,64,373         25,67,423 
नई दिल्ली-                 20,673      6,21,822           15,25,071 
पूर्वी दिल्ली-               32,586        9,46,311          21,20,584 
पश्चिमी दिल्ली-        43,629        11,42,531        25,87,977 
दक्षिणी दिल्ली-         36,422        10,56,524        22,91,764 
------------------------------------------------------------- 
कुल                     2,34,531        67,52,545      1,52,01,936 
------------------------------------------------------------- 
22May-2024

सोमवार, 20 मई 2024

भाजपा के खिलाफ महाविकास अघाडी ने कांग्रेस प्रत्याशी पर खेला दांव
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली। देश की आर्थिक नगरी के नाम से विख्यात मुंबई के उपनगर जिले की मुंबई नॉर्थ लोकसभा सीट पर पांचवे चरण में सोमवार 20 मई को मतदान होगा। मुंबई की इस महत्वपूर्ण लोकसभा सीट पर भाजपा समर्थित महायुति गठबंधन की ओर से भाजपा प्रत्याशी के रुप में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल पहली बार लोकसभा के चुनाव मैदान में हैं। जबकि कांग्रेस समर्थित महाविकास अघाड़ी गठबंधन से कांग्रेस प्रत्याशी के रुप में भूषण पाटिल यहां भाजपा के गढ़ को भेदने के लक्ष्य के साथ चुनावी जंग लड़ रहे हैं। इस सीट पर इस बार भाजपा प्रत्याशी के सामने पार्टी के सियासी गढ़ को बचाने की चुनौती होगी, वहीं कांग्रेस प्रत्याशी महाविकास अघाडी गठबंधन की प्रतिष्ठा बचाने के प्रयास में है। महाराष्ट्र में भाजपा सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन और कांग्रेस महाविकास अघाड़ी गठबंधन के साथ मिलकर चुनाव मैदान में है। राज्य की 48 लोकसभा सीटों में आर्थिक नगरी मुंबई की छह लोकसभा सीटों में मुंबई नॉर्थ लोकसभा सीट पर पिछले चुनावों के समीकरण के आधार पर इस बार भी भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशी आमने सामने है। महायुति के साथ भाजपा की नई चुनाव रणनीति के तहत इस सीट से लगातार दो बार के मौजूदा सांसद गोपाल शेट्टी का टिकट काटकर राज्यसभा में सदन के नेता एवं केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग, कपड़ा मंत्री पीयूष गोयल को चुनावी जंग में उतारा है। भाजपा की इस रणनीति के खिलाफ महाविका अघाडी गठबंधन की ओर से भूषण पाटिल को कांग्रेस का प्रत्याशी बनाया गया है। इस सीट पर हमेशा की तरह इस बार भी भाजपा और कांग्रेस के बीच ही प्रमुख मुकाबला माना जा रहा है, लेकिन इस सीट पर चुनाव मैदान में अपनी किस्मत आजमाने के लिए उतरे कुल 19 प्रत्याशियों में सात निर्दलीयों के अलावा महाराष्ट्र के क्षेत्रीय दलों के प्रत्याशी भी अपनी ताकत झोंक रहे हैं। गौरतलब है कि महायुति गठबंधन में भाजपा के अलावा शिवसेना(शिंदे), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना, राष्ट्रीय समाज पक्ष (महादेव जानकर) हैं, तो महाविकास अघाडी गठबंधन में कांग्रेस के साथ शिव सेना (यूबीटी) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी(शरद पवार) हैं। 
ये है लोकसभा चुनाव का इतिहास 
महाराष्ट्र की मुंबई नॉर्थ लोकसभा सीट पर अभी तक हुए 15 चुनाव में सबसे ज्यादा सात बार भाजपा के प्रत्याशी चुनाव जीते हैँ, जबकि कांग्रेस को छह, और भाजपा समर्थित जनता पार्टी को यहां लगातार दो बार जीत मिली है। 1952 से अब तक यह ऐसा क्षेत्र रहा है, जिसे 1967 और 1971 के लोकसभा चुनाव के दौरान समाप्त कर दिया गया था, जिसे 1977 में फिर से बहाल किया गया। इस चुनावी इतिहास में यह भी एक पहलू है, जब पहले 1952 के लोकसभा चुनाव में यहां दो सांसद निर्वाचित हुए थे। 1977 में यहां मृणाल मोरे और 1980 में रवीन्द्र वर्मा ने जीत दर्ज कर यह सीट जनतापार्टी की झोली में डाली थी। इसके बाद 1984 का चुनाव फिर कांग्रेस प्रत्याशी ने जीता, लेकिन उसके बाद 1989 के चुनाव में भाजपा के राम नाईक ने लगातार पांच जीत दर्ज कर इसे भाजपा का गढ़ बना दिया, लेकिन 2004 में लगातार दो बार राम नाईक को परास्त करके फिल्म अभिनेता गोविंदा और 2009 में संजय निरुपम ने कांग्रेस की वापसी कराई। साल 2014 में कांग्रेस के संजय निरुपम और 2019 में कांग्रेस प्रत्याशी फिल्म अभिनेत्री उर्मिला मातोंडर को हराकर भाजपा प्रत्याशी गोपाल शेट्टी ने लगातार दो जीत दर्ज कर भाजपा का परचम लहराया। मुंबई नॉर्थ लोकसभा के अंतर्गत मुंबई उपनगर जिले की छह विधानसभा सीटें बोरीवली, दहिसर, मागाठाणे, कांदिवली, चारकोप और मालाड (वेस्ट) आती हैं। इन सीटों में चार में भाजपा, एक में कांग्रेस और एक शिवसेना के विधायक हैं। 
जातीय व क्षेत्रवाद गठजोड़ हावी 
महाराष्ट्र की सियासत में जातीय समीकरण से ज्यादा क्षेत्रवाद के आधार पर राजनीतिक दल अपनी रणनीति तय करते रहे हैं। इस सबसे ज्यादा 32 प्रतिशत मराठी, 28 प्रतिशत गुजराती व मारवाड़ी, 20 प्रतिशत उत्तर भारतीय, 7 प्रतिशत दक्षिण भारतीय, 9 प्रतिशत मुस्लिमों के अलावा दो प्रतिशत अन्य वर्ग के मतदाता वोटिंग करते रहे हैं। 
कौन है भाजपा व कांग्रेस प्रत्याशी 
मुंबई उत्तर सीट से भाजपा प्रत्याशी पीयूष गोयल लगातार तीन बार से राज्यसभा सांसद और सदन के नेता होने के साथ केंद्र की मोदी सरकार में रेल, ऊर्जा जैसे कई मंत्रालय में अहम भूमिका निभाने के साथ मौजूदा केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग, कपड़ा, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री हैं। उनके पास कांग्रेस प्रत्याशी से ज्यादा राजनीतिक अनुभव है। जबकि भाजपा को को चुनौती देने के लिए सियासी मैदान में कूदे कांग्रेस प्रत्याश भूषण पाटिल कांग्रेस की मुंबई इकाई के उपाध्यक्ष हैं। उन्होंने पहले 2009 में बोरीवली विधानसभा का चुनाव भी लड़ा था, जो पिछले दो दशक से ज्यादा समय से कांग्रेस के लिए कार्य कर रहे हैं और वे कांग्रेस की मुंबई इकाई के कोषाध्यक्ष के रूप में भी अपनी भूमिका निभा चुक हैं। यही नहीं वे यूपीए शासनकाल में केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड सलाहकार बोर्ड पैनल का भी हिस्सा भी रहे हैं।
मतदाताओं का चक्रव्यूह 
कुल मतदाता-1811942 
पुरुष-935129 
महिला-876616
  ट्रांसजेंडर-197 
--------------- 
20May-2024

रविवार, 19 मई 2024

लोकसभा चुनाव: पांचवे चरण में तीन केंद्रीय मंत्रियों व एक पूर्व मुख्यमंत्री की दांव पर साख


राहुल गांधी जैसे कई दिग्गजों के लिए होगा सियासी प्रतिष्ठा का चुनाव 
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव के पांचवें चरण में आठ राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों की 49 लोकसभा सीटों के लिए कल सोमवार 20 मई को को मतदान होगा। इस दौर की चुनावी जंग में 82 महिलाओं समेत 695 उम्मीदवारों की सियासी किस्मत का फैसला करने के लिए 8 करोड़ 95 लाख 67 हजार 973 मतदाता वोटिंग करेंगे। इस चरण में तीन केंद्रीय मंत्री, एक पूर्व मुख्यमंत्री तथा करीब आधा दर्जन पूर्व मंत्रियों के अलावा कांग्रेस नेता राहुल गांधी जैसे केई दिग्गज नेताओं की प्रतिष्ठा भी दांव पर होगी। 
देश में लोकसभा की 543 सीटों के लिए चल रहे इस चुनावी समर के पहले चार चरणों में आधे से भी ज्यादा 380 सीटो पर चुनाव संपन्न हो चुका है, जिसमें 529 महिलाओं और एक थर्डजेंडर समेत 5875 उम्मीदवारों का सियासी भविष्य ईवीएम में कैद हो चुका है। जबकि इनके अलावा गुजरात की सूरत सीट से एक सांसद निर्विरोध घोषित हो चुका है। कल 20 मई सोमवार को 49 लोकसभा सीटों के लिए होने वाले मतदान के लिए शनिवार की शाम चुनाव प्रचार खत्म हो चुका है। अब सोमवार को दो केंद्र शासित प्रदेशों तथा छह राज्यों की इन सीटों पर मतदान के दौरान 695 उम्मीदवारों की किस्मत के लिए मतदाता ईवीएम का बटन दबाएंगे। इस चरण में सबसे ज्यादा महाराष्ट्र की 13 सीटों के लिए 264 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। जबकि लोकसभा सीट के हिसाब से देखा जाए तो महाराष्ट्री की नासिक सीट पर सबसे ज्यादा 31 प्रत्याशी तथा लद्दाख सीट पर सबसे कम तीन प्रत्याशी अपनी किस्मत आजामा रहे हैं। इस चरण में ओडिसा की पांच लोकसभा सीटों के साथ उनके दायरे में आने वाली 35 विधानसभा सीटों के लिए भी मतदान होगा। 
इन पूर्व मुख्यमंत्रियों व केंद्रीय मंत्रियों की दांव पर प्रतिष्ठा 
लोकसभा चुनाव के पांचवें चरण में यूपी की लखनऊ लोकसभा सीट पर देश के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह तथा अमेठी सीट से केंद्रीय अल्पसंख्यक तथा महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी की प्रतिष्ठा दांव पर है। वहीं महाराष्ट्र की मुंबई नॉर्थ सीट से केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग, कपड़ा मंत्री के अलावा राज्यसभा में सदन के नेता पीयूष गोयल पहली बार लोकसभा चुनाव में परीक्षा देंगे। वहीं इस चरण में जम्मू कश्मीर की बारामूला लोकसभा सीट से पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्दुला की साख भी दांव पर होगी। इनके अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्रियों में ओडिशा की सुंदरगढ सीट से जुएल ओराम, बिहार की सारण सीट से राजीव प्रताप रूडी, यूपी की फतेहपुर सीट से निरंजन ज्योति तथा झांसी से कांग्रेस के प्रदीप जैन भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। 
इन दिग्गजों की साख की भी होगी परीक्षा 
पांचवे चरण में यूपी की रायबरेली लोकसभा सीट पर कांग्रेस के दिग्गज राहुल गांधी और योगी सरकार के मंत्री दिनेश प्रताप सिंह, ओडिशा की सुंदरगढ़ सीट पर पूर्व हॉकी खिलाड़ी एवं राज्यसभा सांसद दिलीप टिर्की, बिहार की हाजीपुर सीट पर लोजपा के चिराग पासवान, पश्चिम बंगाल की श्रीरामपुर सीट पर टीएमसी के कल्याण बनर्जी तथा मुंबई नॉर्थ सेंट्रल सीट पर आतंकी कसाब को फांसी दिलाने वाले अधिवक्ता उज्जवल निकम भी भाजपा के टिकट पर चुनाव मैदान में हैं। इनके अलावा विभिन्न दलों के सांसदों व पूर्व सांसदों जैसे दिग्गजों की भी सियासी पिच पर परीक्षा होगी। 
बसपा के सर्वाधिक प्रत्याशी 
लोकसभा चुनाव के पांचवे चरण में 49 सीटों पर प्रमुख राजनैतिक दलों में सबसे ज्यादा 46 प्रत्याशी बसपा ने उतारे हैं। जबकि भाजपा के 40, कांग्रेस के 18, सपा के 10, शिवसेना(यूबीटी) के 8, तृणमूल कांग्रेस के 7, शिवसेना(शिंदे) के 6, बीजद और सीपीआई(एम) के 5-5, राजद, सीपीआई और एआईएमआईएम के 4-4 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। राकांपा(एसपी) के दो तथा जदयू व लोजपा का एक-एक प्रत्याशी इस चरण की चुनावी जंग में हैं। इस चरण अन्य दलों के दलों के अलावा 291 निर्दलीय भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। 49 सीटों पर किस दल का कब्जा पांचवे चरण में आठ राज्यों की जिन 49 सीटों पर 20 मई को मतदान होना है, उनमें साल 2019 के चुनाव में भाजपा ने 40 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 32 सीटें जीती थी। शिवसेना ने सात, तृणमूल कांग्रेस ने चार तथा कांग्रेस, जदयू, लोजपा, बीजद और नेशनल कांफ्रेंस ने एक-एक सीट पर जीत दर्ज की थी। बाकी पांच सीटें अन्य प्रत्याशियों के खाते में गई थी। 
इन प्रमुख दलों ने दागियों पर खेला दांव 
लोकसभा चुनाव के पहले चार चरणों की तरह ही पांचवे चरण में भी राजनीतिक दलों ने दागियों पर दांव खेला है। इस चरण में 159 दागी चुनाव मैदान में हैं, जिसमें प्रमुख राजनीतिक दलों में सबसे ज्यादा 19 को भाजपा ने अपना प्रत्याशी बनाया है। जबकि कांग्रेस और बसपा के 8-8, सपा के पांच, तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना(शिंदे), सीपीआई, सीपीआई(एम) और शिवसेना(यूबीटी) के 3-3, एआईएमआईएम के दो तथा राजद व जदयू के एक-एक प्रत्याशी के खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं। हालांकि सबसे ज्यादा 58 निर्दलीय प्रत्याशी भी दागियों की फेहरिस्त में शामिल है। सबसे ज्यादा 93 आपराधिक मामले पश्चिम बंगाल की बराकपुर सीट से चुनाव लड़ भाजपा प्रत्याशी अर्जुन सिंह के खिलाफ दर्ज हैं। 
करोड़पतियों में भाजपा के सबसे ज्यादा प्रत्याशी 
लोकसभा चुनाव के पांचवे चरण में ज्यादातर सियासी दलों ने करोड़पतियों पर दांव खेला है। इस चरण में 227 करोड़पति प्रत्याशियों में सबसे जथ्यादा 36 प्रत्याशी भाजपा के हैं। बसपा के 46 में 20, कांग्रेस के 18 में 15, सपा के सभी 10, तृणमूल के सात में 6, शिवसेना(यूबीटी) के आठ में 7, शिवसेना(शिंदे) के सभी छह, राजद के सभी चार, राकांपा(एसपी), सीपीआई व एआईएमआईएम के चार में 2-2 प्रत्याशी धनकुबेर प्रत्याशियों की सूची में शामिल हैं। इनमें से सबसे ज्यादा अमीर प्रत्याशी यूपी की झांसी लोकसभा सीट के भाजपा के अनुराग शर्मा 212 करोड़ की संपत्ति के मालिक हैं। भाजपा के पीयूष गोयल अमीर प्रत्याशियों की सूची में तीसरे पायदान पर है। वहीं सबसे गरीब प्रत्याशी जम्मू कश्मीर की बारामूला सीट से निर्दलीय प्रत्याशी मोहम्मद सुल्तान गंवाई हैं, जिनके बाद बिहार की मुजफ्फरपुर सीट के निर्दलीय प्रत्याशी मुकेश कुमार ने अपनी संपत्ति 700 रुपये घोषित की है। 
------ 
पांचवें चरण में कितनी सीट व प्रत्याशी एवं मतदाता 
राज्य            सीट  प्रत्याशी दागी करोड़पति मतदाता 
बिहार             5      80        15    27           95,11,186 
जम्मू कश्मीर 1      22          2      4            17,37,865 
झारखंड           3    54         18     21          58,34,618 
लद्दाख              1     3         00      2          1,84,808 
महाराष्ट्र        13   264       62     87         2,46,69,544 
ओडिशा            5    40        12    13         79,69,887 
उत्तर प्रदेश    14   144      29    53         2,71,36,363
 पश्चिम बंगाल 7    88      21    20          1,25,23,702
 --------------------------------------------- 
कुल             49   695     159    227       8,95,67,973
-------------------------------------------- 
किस राज्य में कौन सीट पर होगा चुनाव 
बिहार: सीतामढ़ी, मधुबनी, मुजफ्फरपुर, सारण, हाजीपुर। 
जम्मू कश्मीर: बारामूला लोकसभा सीट 
झारखंड: चतरा, कोडरमा और हजारीबाग। 
लद्दाख: लद्दाख लोकसभा सीट 
महाराष्ट्र: धुले, डिंडौरी, नासिक, पालघर, कल्याण, थाने, मुंबई नॉर्थ, मुंबई नॉर्थ वेस्ट, मुंबई नॉर्थ इस्ट, मुंबई नॉर्थ सेंट्रल, मुंबई साउथ सेंट्रल और मुंबई साउथ। 
  ओडिशा: बरगढ़, सुंदरगढ़, बोलांगीर, कंधमाल, अस्का लोकसभा के साथ में 35 विधानसभा सीट। 
उत्तर प्रदेश: मोहनलालगंज, लखनऊ, राय बरेली, अमेठी, जालौन, झांसी, हमीरपुर, बांदा, फतेहपुर, कौशांबी, बाराबंकी, फैजाबाद, कैसरगंज, गोंडा। 
पश्चिम बंगाल: बनगांव, बैरकपुर, हावड़ा, उलुबेरिया, श्रीरामपुर, हुगली, आरामबाग। 
19May-2024