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गुरुवार, 4 फ़रवरी 2016

पीपीपी मॉडल पर मजबूत होगा बुनियादी ढांचा


छह सड़क व एक बंदरगाह परियोजना को मंजूरी
नई दिल्ली
।
केंद्र सरकार की आर्थिक मामलों के विभाग के सचिव की अध्यक्षता में सार्वजनिक निजी परियोजना आकलन समिति और उच्चाधिकार प्राप्त समिति की बैठक के प्रस्ताव को केंद्रीय कैबिनेट ने मंजूरी दी है। इस प्रस्ताव में 9672.12 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली छह सड़क परियोजनाओं और एक बंदरगाह क्षेत्र परियोजना को शुरू किया जाएगा।
देश में बुनियादी ढांचागत परियोजनाओं को मजबूती और तेजी से चलाने की दिशा में ऐसी परियोजनाओं को केंद्र सरकार के विभागों और संबन्धित मंत्रालयों द्वारा सार्वजनिक निजी परियोजनाओं यानि पीपीपी मॉडल पर क्रियान्वित किया जाना है। ऐसी परियोजनाओं के साथ-साथ केंद्र व राज्य सरकारों के विभागों की केन्द्रीय राशि कम पड़ने पर केंद्रीय सहायता वाली पीपीपी परियोजनाओं को भी संस्थागत व्यवस्थाओं द्वारा मंजूरी दी गई है। पीपीपीएसी और ईसी के 9672.12 करोड़ रुपये की अनुमानित परियोजना लागत वाली 6 सड़क परियोजनाओं और एक बंदरगाह क्षेत्र परियोजना को केंद्र सरकार की मंजूरी मिल गई है। इस प्रस्ताव में 4 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं भी शामिल हैं, जिनमें से एक-एक परियोजना महाराष्ट्र एवं हिमाचल प्रदेश में और दो परियोजनाएं उत्तर प्रदेश में हैं। सरकार ने जिस बंदरगाह क्षेत्र परियोजना को मंजूरी दी है, वह गोवा राज्य के लिए प्रस्तावित है।
बिजली-खाद क्षेत्रों में नहीं होगी कोयले की नीलामी
केंद्र सरकार ने देश में आर्थिक विकास की गतिविधियों को तेज करने के लिए बिजली और खाद को छोड़कर अन्य सभी क्षेत्रों में भी उत्पादन का स्तर बढ़ाने के लिए कोयले की आपूर्ति नीलामी के जरिए करने का निर्णय लिया है। कैबिनेट की आर्थिक मामलों की समिति की बैठक में इसकी मंजूरी दी गई। कोयला मंत्री पीयूष गोयल ने यह जानकारी देते हुए बताया कि सीमेंट, अस्पताल, स्पंज लौह, एल्यूमिनियम और अन्य क्षेत्रों के लिए अब पारदर्शी तरीके से कोयले की आपूर्ति करने के लिए यह फैसला लिया गया है। उनका कहना था कि बिजली और यूरिया क्षेत्र के लिए कोयले की आपूर्ति के लिए इस प्रक्रिया का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।
04Feb-2016

शनिवार, 16 जनवरी 2016

सड़क परियोजनाओं में ऐसे लाई जाएगी पादर्शिता!

सरकार जल्द शुरू करेगी इंफ्राकॉन और ईपेस पोर्टल
ओ.पी. पाल.
नई दिल्ली।
केंद्र सरकार सड़कों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में सड़क निर्माण की गुणवत्ता और उसके टिकाऊपन को सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता दोहरा रही है। केंद्र सरकार ने देशभर में चल रही तमाम सड़क परियोजनाओं में ऐसी पारदर्शिता को बनाये रखने की दिशा में इंफ्राकॉन और ईपेस नामक दो पोर्टल शुरू करने का फैसला किया है, जिसे जल्द ही शुरू किया जाएगा।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय का इसरो और नेक्टार से करार भी सड़क परियोजनाओं में पारदर्शिता लाने के लिए निगरानी के तहत किया है। इसके अलावा केंद्र सरकार ने बुनियादी ढांचे को विकसित करने वाले अभियान में और भी अधिक पारदर्शिता एवं दक्षता सुनिश्चित करने के लिए दो पोर्टल ‘इंफ्राकॉन’ और ‘ईपेस’ जल्द ही शुरू करेगी। इस कवायद में राष्टÑीय राजमार्ग परियोजनओं के संबन्ध में सभी आवश्यक विवरण उपलब्ध कराए जाएंगे। इंफ्राकॉन में व्यक्तिगत सलाहकारों और परामर्श सेवा फर्मों के बारे में सभी सूचनाएं होंगी, वहीं ईपेस से लोगों को राजमार्ग परियोजनाओं की स्थिति, फंडिंग और अन्य ब्योरे के बारे में जानने में मदद मिलेगी। मसलन आम जनता भी इन पोर्टल के जरिए सड़क परियोजनाओं के बारे में सभी तरह की जानकारी हासिल कर सकेगी।
भ्रष्टाचार पर लगेगा अंकुश
नेशनल हाईवे एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर डिवेलपमेंट कॉपोर्रेशन याकन एनएचआईडीसीएल के प्रबंध निदेशक आनंद कुमार ने बताया कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के निदेर्शों के मुताबिक भ्रष्टाचार समाप्त करन एवं पूर्ण पारदर्शिता लाने के लिए इन पोर्टलों को डिजाइन किया गया है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, एनएचएआई एवं एनएचआईडीसीएल के तहत राजमार्गों के बारे में इंफ्राकॉन और ईपेस सूचना उपलब्ध कराएंगे। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, एनएचएआई एवं एनएचआईडीसीएल के तहत राजमार्गों के बारे में इंफ्राकॉन और ईपेस सूचना उपलब्ध कराएंगे। उनका कहना है कि सड़क परियोजनाओं की पारदर्शिता के लिए इंफ्राकॉन पोर्टल देश में ढांचागत क्षेत्र के सलाहकारों के लिए एक प्लेटफॉर्म के तौर पर काम करेगा, जहां व्यक्तिगत सलाहकार एवं कंसलटैंट सर्विस देने वाली कंपनियों को अपना पंजीकरण कराने की सुविधा होगी। इस पंजीकरण में ऐसी कंपनियों की विश्वसनीयता वहां उपलब्ध कराई जाएगी और आम नागरिक इस बारे में जानकारी रख सकेंगे।

शुक्रवार, 8 जनवरी 2016

देश में बनंगे सौलह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे!

पिछड़े इलाकों को सड़क नेटवर्क से जोड़ने की तैयारी
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
देश को सड़कों के जाल से जोड़ने की योजना के तहत केंद्र सरकार ने दूर-दराज और पिछड़े इलाको तक सड़क नेटवर्क बनाने की दिशा में 16 ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे बनाने का निर्णय लिया है। केंद्र सरकार की इस मेगा परियोजना के खाके पर 16,680 करोड़ रुपये की लागत से ऐसे एक हजार किलोमीटर लंबे एक्सप्रेस-वे का निर्माण किया जाएगा, जिसमें प्रमुख रूप से सात गलियारे होंगे।
मोदी सरकार ने एनएचडीपी चौथे चरण के तहत डीबीएफओटी आधार पर 16,680 करोड़ रुपये की लागत से 1000 किलोमीटर एक्सप्रेसवेज का निर्माण करने की योजना को मंजूर कर दिया है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार पिछड़े इलाकों को सड़क संपर्क मार्ग से जोड़ने की दिशा में इन एक्सप्रेस-वे गलियारों में 400 किमी लंबे वडोदरा-मुम्बई गलियारे पहली प्राथमिकता में शामिल किया गया है, जिसमें 93 किलोमीटर लंबा अहमदाबाद-वडोदरा गलियारा देश के पहले एक्सप्रेस-वे के रूप में माना जाता है। सरकार ने शेष 600 किलोमीटर के चयन में यह तय किया गया है कि यातायात घनत्व के आधार पर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का चयन किया जा रहा है। मंत्रालय के अनुसार ये सभी ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे देश के सुदूर इलाकों और पिछड़े हुए इलाकों से होकर गुजरेंगे। इस परियोजना का मकसद है कि सड़क संपर्क बढ़ने से पिछड़े इलाकों को आर्थिक विकास की दिशा में बल मिल सके। इन सड़क परियोजनाओं के बारे में स्वयं सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी का भी कहना है कि वडोदरा-मुंबई, जयपुर-अजमेर-अहमदाबाद और अमरावती-हैदराबाद-बेंगलुरू में पिछड़े इलाकों को सड़क संपर्क मार्गो से जोड़ने के लिए ये सभी 16 एक्सप्रेस-वे तैयार किए जाएंगें।
यूपीए ने भी बनाई थी परियोजना
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि हालांकि ऐसे सात ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे बनाने का ऐलान कांग्रेसनीत यूपीए सरकार ने वर्ष 2005 में ही कर दिया था, लेकिन ऐसी सड़क परियोजना को यूपीए अपने दूसरे कार्यकाल तक अंजाम तक पहुंचाने में कोई कदम नहीं बढ़ा सकी। ऐसी महत्वकांक्षी परियोजना की समीक्षा के बाद मोदी सरकार ने इन परियोजना को नए सिरे से आगे बढ़ाने के लिए अपनी नौ परियोजनाएं शामिल करते हुए 16 एक्सप्रेस-वे बनाने की परियोजनाओं को मंजूरी दे दी और इसके लिए अनुमानित लागत को भी स्वीकृत कर लिया गया है। मंत्रालय का कहना है कि देश के विकास के लिए राजमार्गो के संपर्क की हालत को सुधारने की दिशा में सरकार ने तेजी के साथ कदम बढ़ाने का फैसला किया है। हालांकि मंत्रालय का कहना है कि इतनी बड़ी परियोजना में भूमि अधिग्रहण और वित्तीय व्यस्था की सभी बाधाओं को दूर करने के प्रयास जारी है, लेकिन परियोजना को सरकार अंजाम तक पहुंचाएगी।
ये एक्सप्रेसवे भी रडार पर
केंद्र सरकार देश हर कोने को सड़क संपर्क मार्ग से जोड़ने वाली परियोजनाओं में पूर्वी परिधीय एक्सप्रेसवे, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे तथा वडोदरा-मुम्बई एक्सप्रेसवे को अंतिम रूप दे चुकी है। इसी प्रकार एक्सप्रेस-वे के रडार पर नागपुर-मुंबई, जयपुर-अजमेर अहमदाबाद, नागपुर-हैदराबाद, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-बैंगलुरू, अमृतसर-हैदराबाद-बैंगलुरू तथा दिल्ली-अमृतसर-जम्मू- कटरा को भी आपस में राष्टÑीय राजमार्गो से जोड़ने की योजना तैयार की जा रही है।
08Jan-2016

बुधवार, 6 जनवरी 2016

ग्रामीण क्षेत्रों में भी मिलेंगी सुरक्षित सड़के!

ग्रामीण सड़कों पर ज्यादा हादसों पर गंभीर सरकार
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
देश की सड़कों पर हादसों को रोकने के लिए केंद्र सरकार की सुरक्षित सड़क परियोजनाओं के तहत ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों को भी सुरक्षित बनाने की योजना है। शहरी क्षेत्रों से ज्यादा ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों पर बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार ने परिवहन क्षेत्र में सुरक्षा की दक्षता और निरंतरता में सुधार करने का निर्णय लिया है।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार देश में होने वाले सड़क हादसों और उनमें हो रही मौतों पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने व्यापक योजना खाका तैयार करते हुए सड़क परियोजनाओं को तेजी के साथ शुरू किया है। सरकार ने देश में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं के बारे में उस अध्ययन रिपोर्ट को भी गंभीरता से लिया है, जिसमें पाया गया है कि शहरी क्षेत्रों से ज्यादा ग्रामीण इलाकों की सड़कों पर दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं। इसलिए सरकार ने देशभर के राज्यों में शहरी और ग्रामीण इलाकों में दुर्घटना संभावित क्षेत्रों को भी चिन्हित करने के लिए राज्यों से आग्रह किया है। यह सर्वेक्षण भी उसी योजना का हिस्सा है जिसमें सरकार के सामने ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों पर ज्यादा हादसों की रिपोर्ट आई है। गौरतलब है कि हाल ही में हुए एक सर्वेक्षण में खुलासा हुआ है कि देश के शहरी क्षेत्र में 45.3 प्रतिशत और और ग्रामीण क्षेत्रों में 54.7 प्रतिशत सड़क हादसे हुए हैं।
सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता
केंद्र सरकार की राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग के अलावा शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों को सुरक्षित बनाने की दिशा में सड़कों को डिजाइन करते समय सुरक्षा के इन संघटकों को शामिल करने पर जोर दिया है। मंत्रालय के अनुसार राजमार्गों के अतिशय दुर्घटना वाले स्थलों यानि ब्लैक स्पॉट्स की पहचान करके उन स्थानों पर सुरक्षा की दृष्टि से सुधार के उपाय किये जा रहे हैं। मंत्रालय ने इस आशंका को दूर किया है कि सरकार सड़क परियोजनाओं में शहरी इलाकों के साथ ग्रामीण इलाकों की सड़क परियोजनाओं को भी प्राथमिकत दे रही है। इस अध्ययन को लेकर स्वयं सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने देश में भारतीय सड़कों को सुरक्षित बनाने और जानलेवा दुर्घटनाओं की संख्या में कमी लाने की प्राथमिकता दोहराई है।

गुरुवार, 31 दिसंबर 2015

ऐतिहासिक मॉडल होगा सुपर दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे

सड़क परियोजना को ढाई साल में पूरा करने का लक्ष्य
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के पहले 14 लेन के ‘दिल्ली-डासना-मेरठ एक्सप्रेस-वे’ की आधारशिला रखी है, वह देश के विकास का ऐतिहासिक सुपर मॉडल साबित होगा। इस ट्रैफिक सिग्नल फ्री एक्सप्रेस-वे से दिल्ली और पश्चिम उत्तर प्रदेश में एनसीआर के लोगों को दिल्ली से मेरठ तक सफर इतना आसान होगा कि समय और धन दोनों की बचत होगी।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने दिल्ली से मेरठ आने जाने वाले वाहनों के करीब ढाई घंटे के सफर को 40 से 45 मिनट के सफर में बदलने के लिए 7566 करोड़ की इस योजना का जो मॉडल तैयार किया है उसे सरकार सुपर विकास का मॉडल मानकर चल रही है। इसका कारण देश में पहली बार किसी 14 लेन वाले राष्ट्रीय राजमार्ग बनाने की शुरूआत की गई है। मंत्रालय का दावा है कि इस परियोजना के जरिए हजारों लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी मिलेंगे। वहीं बकौल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश में बनाए जा रहे एक्सप्रेसवे पर्यावरण की समस्या के समाधान का भी मॉडल साबित होंगे।
क्या है सुपर हाईवे की विशेषता
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का कहना है कि यह एक्सप्रेसवे नये हाईब्रिड एनयूटी मॉडल के तहत पहली परियोजना होगी। इसे एक स्मार्ट एक्सप्रेसवे के रूप में विकसित किया जाएगा। यात्रियों को मौसम, ट्रैफिक एवं दुर्घटनाओं के बारे में अहम जानकारी देने के लिए प्रणालियां स्थापित की जाएगी। स्वास्थ्य देखभाल, पेट्रोल पंप, रेस्तरां, वाहन मरम्मत, विश्राम कक्ष जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध होगी। दिल्ली-मेरठ सुपर एक्सप्रेसवे दिल्ली के निजामुद्दीन पुल से बनना शुरू होगा और एनएच-24 पर डासना पर जाकर खत्म होगा, जिस पर 28 किमी लंबाई के निर्माण पर 2,869 करोड़ रुपए की लागत आएगी। डासना से मेरठ बाईपास रेलवे क्रासिंग तक 3,575 करोड़ रुपए की लागत से छह लेने के 46 किलोमीटर लंबे नए रास्ते का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा चार लेने वाले एनएच-24 के 22 किलोमीटर लंबे डासना-हापुड़ खंड को चौडा करके 6 लेन करने पर 1,122 करोड़ रुपए की लागत तय की गई है। सरकार का दावा है कि इस परियोजना को ढाई साल में पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है।

उत्तर प्रदेश को दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे की सौगात

प्रधानमंत्री मोदी आज रखेंगे आधारशिला
ओ.पी. पाल.
नई दिल्ली। 
दिल्ली से मेरठ तक के 53 किमी लंबे सफर को आसान बनाने की दिशा में एक जनवरी से 14 लेन के दिल्ली मेरठ एक्सप्रेसवे निर्माण की आधारशिला कल 31 दिसंबर (बृहस्पतिवार) को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी रखेंगे।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अुनसार कल गुरुÞवार को 12 बजे दिन में 14 लेनों वाले 75 किलोमीटर लम्बे दिल्ली-डासना-मेरठ एक्सप्रेसवे के निर्माण की आधारशिला रखी जायेगी, जिसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी रखेंगे। वहीं मोदी नोएडा के सेक्टर 62 स्थित प्लॉट नम्बर ए-33, इंस्टीट्यूशनल एरिया में एनएच-24 पर 22 किलोमीटर लम्बे डासना- हापुड़ सेक्शन के उन्नयन की भी आधारशिला रखेंगे। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाइक, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्री हर्ष वर्धन, संस्कृति एवं पर्यटन (स्वतंत्र प्रभार) तथा नागरिक उड्डयन राज्यमंत्री डॉ. महेश शर्मा, सांख्यिकीय एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन (स्वतंत्र प्रभार), विदेशी मामले और प्रवासी भारतीय मामलों के राज्यमंत्री जनरल वीके सिंह तथा सड़क यातायात और नौवहन राज्यमंत्री श्री पी राधाकृष्णन भी उपस्थित रहेंगे। दिल्ली और मेरठ के बीच एक एक्सप्रेसवे की आवश्यकता को देखते हुए एनएच-58 के भारी यातायात से निजात पाने की दिशा में दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे का जुड़ाव दिल्ली से निजामुद्दीन पुल (टी-प्वाइंट) से शुरू  होगा और वह मौजूदा एनएच-24 पर डासना (30.38 किलोमीटर) तक जारी रहेगा। डासना से मेरठ तक एक नया मार्ग होगा। यह जुड़ाव मेरठ में रेलवे क्रासिंग (66 किलोमीटर) के निकट अन्दरूनी रिंगरोड मेरठ बाईपास पर समाप्त हो जाएगा। 

शनिवार, 26 दिसंबर 2015

हर साल बनेंगे सात हजार किमी राष्ट्रीय राजमार्ग!

 ‘भारत माला परियोजना’ में भी तेजी लाने का लक्ष्य
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
केंद्र सरकार ने देश में सड़कों का जाल बिछाने की दिशा में हर साल सात किमी लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण करने का लक्ष्य तयकिया है। वहीं सरकार ने पडोसी देशों के साथ लगी भारतीय सीमाओं और तटीय क्षेत्रों की सड़क मार्ग से संपर्क बनाने के लिए महत्वकांक्षी ‘भारत माला’ सड़क परियोजना को भी तेजी से आगे बढ़ाना शुरू कर दिया है।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार मोदी सरकार की महत्वकांक्षी ‘भारत माला’ सड़क परियोजना के तहत सीमाओं तथा तटवर्ती क्षेत्रों को सात हजार किलोमीटर लम्बे सड़क मार्ग के निर्माण में तेजी लाने के लिए निविदाओं की प्रक्रिया भी पूरी की जा चुकी है। भारत माला सड़क परियोजना के जरिए पडोसी देशों नेपाल, बांग्लादेश, चीन, पाकिस्तान और भूटान से लगी भारतीय सीमा के अलावा विशाल तटीय क्षेत्रों को जोड़ा जाना है। इस परियोजना पर सरकार ने 80 हजार करोड़ रुपये की लागत का अनुमान लगाया है। मंत्रालय के अनुसार इस परियोजना के तहत 80 प्रतिशत राजमार्ग दो लेन तथा 20 प्रतिशत चार लेन का बनाया जाएगा। केंद्र सरकार की इस योजना का मकसद है कि देश के सभी सीमावर्ती क्षेत्र और तटीय बंदरगाह तक सड़क संपर्क को मजबूत बनाया जा सके और सीमा क्षेत्रों तक भारत की पहुंच को आसान किया जा सके। इस परियोजना को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की स्वर्णिम सड़क चतुर्भुज योजना की तर्ज पर शुरू किया गया है।
इन राज्यों गुजरेगी भारत माला
मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार भारत माला परियोजना के दायरे में उत्तरी पूर्व राज्यों समेत 15 राज्य होंगे, जिसमें प्रमुख रूप से राजस्थान,गुजरात, पंजाब, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, पुडुचेरी और उड़ीसा का बड़ा भाग शामिल है। भारत माला सड़क परियोजना के तहत सीमा क्षेत्रों पर राजस्थान में एक हजार किमी, उत्तराखंड में 300 किमी, तमिलनाडु में 600 किमी, पश्चिम बंगाल में 300 किमी तथा ओडिशा में 400 किमी सड़क का निर्माण के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानि एनएचएआई ने निविदा प्रक्रियाओं को पूरा कर लिया है।
तेजी से होगा सड़क निर्माण
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने ऐलान किया है कि भारत माला परियोजना के साथ ही केंद्र सरकार हर साल सात किमी राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण करने का लक्ष्य तय कर चुकी है। गडकरी का कहना है कि केंद्र सरकार इसके लिए राज्य सरकारों के साथ परामर्श कर रही है और हर राज्य इस परियोजना का समर्थन कर रहे हैं। भारत माला परियोजना के तहत सरकार की तटीय क्षेत्रों पर छोटे छोटे बंदरगाह तक सड़क संपर्क को बेहतर बनाने की योजना पर काम कर रही है, जिसका खाका तैयार किया जा रहा है।
26Dec-2015

शनिवार, 21 नवंबर 2015

सड़क दुर्घटनाओं पर काबू करना बड़ी चुनौती!

अंतर्राष्ट्रीय मानको को सख्ती से लागू करेगी सरकार
ओ.पी. पाल.
नई दिल्ली। दुनियाभर के देशों के मुकाबले भारत में सड़क दुर्घटनाओं में हो रही सर्वाधिक मौतों पर काबू करने की चुनौती केंद्र सरकार के लिए चिंता का सबब बनी हुई है। देश में सड़क निर्माण परियोजनाओं में सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता देने का दावा कर रही सरकार अंतर्राष्ट्रीय मानकों को लागू करने की तैयारी कर ली है।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार केंद्र सरकार ने सभी सड़क परियोजनाओं को सड़क सुरक्षा के लिहाज से डिजाइन के आधार पर शुरू कराया है और देशभर में दुर्घटना संभावित क्षेत्रों को चिन्हित कराकर उनके डिजाइन को भी सुधारने की योजना पर काम किया जा रहा है। केंद्र सरकार ने सड़क परिवहन को सुरक्षित और खासकर दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने की दिशा में कई जनहित की योजनाओं को कानूनी रूप से भी लागू किया है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों को संज्ञान में लेते हुए भी कुछ नियमों में बदलाव करके अब अंतर्राष्ट्रीय मानकों को सख्ती के साथ लागू करने की तैयारी की है, जिसके लिए सरकार नए सड़क परिवहन एवं सुरक्षा विधेयक को संसद में पारित कराने का भी प्रयास कर रही है। दुनियाभर में सड़क दुर्घटनाओं में देश में हो रही मौतों के कलंक को धोने की दिशा में किये जा रहे प्रयासों और कटिबद्धता को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने यातायात सुरक्षा पर हाल ब्राजील ब्रासिलिया में संपन्न हुए वैश्विक सम्मेलन में दोहराया। गडकरी ने भारत परिवहन क्षेत्र में सुरक्षा, निरंतरता और दक्षता में बेहतरी सुनिश्चित करने की योजनाओं में यहां तक कहा कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा सुरक्षित प्रणाली अवधारणा का भारत में पूरी तरह से अनुमोदन किया जा रहा है।

शुक्रवार, 6 नवंबर 2015

मोदी ने एनसीआर को दिया तीन सड़क परियोजनाओं का तोहफ़ा!

हरियाणा को दीवाली से पहले मिली बड़ी सौगात
सड़क परियोजनाओं पर 13802 करोड़ की लागत का अनुमान
ओ.पी. पाल. सोनीपत।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोनीपत जिला के राजीव गांधी एजुकेशन सिटी कुंडली में 13 हजार 802 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत से बनाए जाने वाली भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की तीन बड़ी परियोजनाओं की आधारशिला रखी, जिसमें 135 किमी लंबे ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस-वे तथा 126 किमी लंबे वेस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस-वे के अलावा सोनीपत से पानीपत तक 70 किमी लंबे चार लेन को आठ लेन की परियोजना शामिल है।
सोनीपत के राजीव गांधी एजुकेशन सिटी कुंडली में गुरुवार को आयोजित एक समारोह के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन परियोजनाओं का शिलान्यास करने से पहले इस मेगा परियोजना के बनाए गये मॉडल का अवलोकन किया, जिसके बाद मंच से कंप्यूटर का बटन दबाकर तीनों सड़क परियोजनाओं का एक साथ शिलान्यास करने की औपचारिकता पूरी की। इससे पूर्व हरियाणा को दी गई इन तीन सड़क परियोजनाओं पर बोलते हुए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गड़करी ने कहा कि केंद्र सरकार ने सडक इंफ्रास्ट्रक्चर की देश में बड़ी परियोजनाएं तैयार की है। देश में पांच लाख किलोमीटर लंबाई का रोड नेटवर्क है, जिसमें डेढ़ लाख किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों का है। दिसंबर 2015 तक 96 हजार किलोमीटर तक की परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इसमें हरियाणा की सड़क परियोजनाओं से हरियाणा के साथ दिल्ली और उत्तर प्रदेश को भी लाभ होगा। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने एक साल में हरियाणा में करीब 32 हजार करोड़ की परियोजनाएं स्वीकृत की हैं, जिनमें 13820 करोड़ की इन परियोजनाओं की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आधारशिला रख रहे हैं।
देश की पहली एक्सस कंट्रोल एक्सप्रैस-वे परियोजना
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि 7558 करोड़ रुपये की 135 किमी लंबी ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस-वे तथा अरसे से अधूरी पड़ी 136 किमी लंबी वेस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस-वे को पूरा करने के लिए 4115 करोड़ रुपये मंजूर किये गये हैं। दिल्ली को अपने आगोश में लेने वाली ये दोनों परियोजना देश की पहली एक्सस कंट्रोल एक्सप्रैस-वे परियोजना है, जिसे हरियाणा से शुरू किया जा रहा है। इन परियोजनाओं से दिल्ली का 50 प्रतिशत यातायात भार कम हो सके और लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि इसके अलावा सोनीपत से पानी तक चार लेन वाले 70 किमी राजमार्ग को आठ लेन के लिए 2129 करोड़ रुपये खर्च करने का अनुमान है। ये तीनों योजनाएं हरियाणा के विकास के साथ रोजगार को भी आगे बढ़ाएगी। नितिन गडकरी ने कहा कि केंद्र सरकार की सड़क परियोजनाओं में इसी माह दिल्ली में आईटीओ चौक से मेरठ तक 14 लेने का एक्सप्रेस-वे इसी माह शुरू कर दिया जाएगा। यह भी देश की आजादी के बाद पहली ऐसी नई परियोजना है जो पहली बार किसी सड़क मार्ग को 14 लेन में बनाया जा रहा है। यही नहीं दिल्ली से कटरा तक देश का सबसे लंबा एक्सप्रेस-वे की परियोजना रिपोर्ट भी तैयार हो चुकी है, जो दिल्ली से जींद-लुधियाना-अमृतसर-कटरा तक जाएगी, जिसमें पंजाब, हरियाणा व जम्मू कश्मीर राज्यों से सहयोग मांगा गया है।

गुरुवार, 15 अक्टूबर 2015

लंबित सड़क परियोजनाओं पर आगे बढ़ी सरकार!


सुस्त पड़ी परियोजनाओं को मिलेगी एकमुश्त राशि
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
देश में विकास को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने उन लंबित सड़क परियोजनाओं को भी पूरा करने के लिए कमर कस ली है, जिनके लिए अभी तक किसी न किसी बाधा के कारण संघर्ष करना पड़ा रहा था। ऐसी राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के लिए केंद्र सरकार ने एकमुश्त राशि देने का फैसला किया है।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने बताया कि बुधवार को ही केंद्र सरकार द्वारा अधर में लटकी और सुस्त पड़ी राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं को पुनर्जीवित करने और उसके पूरा करने के लिए एकमुश्त राशि को मंजूरी प्रदान की है। यह यह मंजूरी बीओटी (टोल) परियोजनाओं से लेकर बीओटी (वार्षिकी) के लिए उपलब्ध प्रावधानों के विस्तार के तहत की गई है। इस निर्णय से इस वर्ष जून में एनएचएआई द्वारा बीओटी (टोल) परियोजना को विस्तृत करने के लिए एकमुश्त राशि देने पर जारी नीति परिपत्र के प्रावधानों को बीओटी (वार्षिकी) तक विस्तृत करने की अनुमित मिल जाएगी। मंत्रालय के अनुसार इस निर्णय के बाद 50 प्रतिशत काम पूरा होने के बावजूद एक नवंबर 2014 से लटकी पड़ी इस तरह की परियोजनाओं के लिए धन का एकमुश्त राशि के तौर पर वितरण किया जाएगा। इस तरह के सभी मामले और प्रत्येक मामले में जरूरी धनराशि प्राधिकरण द्वारा स्वीकृत की जाएगी। प्रस्ताव के अनुसार राजमार्ग क्षेत्र 3.8 लाख करोड़ रुपये की लटकी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए संघर्ष कर रहा है, लेकिन कई मामलों में निर्माण एजेंसी इसमें रुचि नहीं दिखा पा रही थी। सरकार के इस निर्णय से देश में लटकी पड़ी राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में एक बार फिर से जान आएगी। इससे देश की सामाजिक और आर्थिक स्थिति और बेहतर होगी। वहीं इस नीति को अपनाने से पीपीपी व्यवस्था में सभी प्रमुख हितधारकों प्राधिकरण, ऋणदाता और डेवलपर, रियायतग्राहियों को फायदा होगा। इस क्षेत्र के पुनर्जीवित होने से इस क्षेत्र में नागरिक और यात्रियों को राहत मिलेगी और इससे आर्थिक गतिविधियां भी बढ़ेंगी। इसके लिए वित्तपोषण करने वाली एजेंसी, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण तथा बिल्डर के बीच त्रिपक्षीय करार किया जाएगा।

गुरुवार, 8 अक्टूबर 2015

दिल्ली में वाहनों की भीड़ घटाने की तैयारी!

जल्द पूरी होगी सड़क परियोजनाओं के टेंडर प्रक्रिया 
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
दिल्ली में वाहनों के बोझ को कम करने के लिए सरकार की ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस-वे के निर्माण के लिए जल्द ही काम शुरू कर दिया जाएगा। इस परियोजना के पूरा होते ही दिल्ली में घुसे बिना वाहन यूपी से हरियाणा और अन्य रास्तों पर जा सकेंगे। इसी एक अन्य परियोजना में दिल्ली से मेरठ तक बनाए जा रहे एक्सप्रेस वे के टेंडर जारी कर दिये गये हैं।
केंद्र सरकार ने अगले छह महीनो में राष्ट्रीय राजमार्ग के नेटवर्क में करीब 50 हजार किलोमीटर सड़क का इजाफा करने का लक्ष्य रखा है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय का दावा है कि यूपीए के दस साल के कार्यकाल में कुल करीब 18 हजार किमी राजमार्ग का निर्माण हुआ है, जबकि राजग सरकार ने 15 सितंबर के बाद अभी तक करीब 7.5 हजार किमी राजमार्ग का निर्माण पूरा किया है, जो सरकार की सड़क निर्माण में तेजी दर्शाता है। ऐसी ही परियोजना में दिल्ली के बाहर हरियाणा से होते हुए यूपी को जोड़ते हुए हरियाणा के सोनीपत तक बनने वाले 135 किमी लंबे ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस-वे के निर्माण का कार्य भी जल्दी शुरू कर दिया जाएगा, जिसके लिए इसी महीने टेंडर जारी करने की योजना है। मंत्रालय के अनुसार इस परियोजना के लिए केंद्र सरकार ने पिछले महीने ही 7558 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत को मंजूरी दी थी। इसी प्रकार दिल्ली से गाजियाबाद के रास्ते हापुड़ और मेरठ के सफर को आसान बनाने के लिए नेशनल हाइवे अथॉरिटी आॅफ इंडिया ने निजामुद्दीन पुल से लेकर डासना तक एनएच-24 की 28 किमी. सड़क को 14 लेन का बनाने के लिए टेंडर जारी कर दिया है, जिसका विस्तार पिछले सात साल से अधर में लटका हुआ था। इसके अलावा डासना से हापुड़ के बीच 22 किमी. सड़क को छह लेन करने के लिए भी टेंडर इसी महीने जारी किये जाने हैं।

मंगलवार, 8 सितंबर 2015

केंद्र ने बिहार में उतारी सड़क परियोजनाएं!

जारी पैकेज के जरिए सड़कों की हालत सुधारने की कवायद
ओ.पी. पाल.
नई दिल्ली।
बिहार में भाजपा की सियासी जमीन मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने योजनाओं को पटरी पर उतारना शुरू कर दिया है। राज्य में राष्ट्रीय राजमार्ग, प्रमुख ब्रिज तथा रेलवे ओवरब्रिज के लिए केन्द्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने 54.713 हजार करोड़ रूपए का पैकेज जारी कर दिया है।
 राजग सरकार में प्रधानमंत्री ने बिहार के विकास के लिए सवा लाख सौ करोड़ रुपये के पैकेज देने की घोषणा के साथ केंद्रीय मंत्रालयों ने अपनी योजनाओं को पटरी पर उतारते हुए कोष का भी पिटारा खोलना शुरू कर दिया। जल संसाधन मंत्रालय और पर्यटन मंत्रालय के बाद केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने भी 54.713 हजार करोड़ रुपये का पैकेज दिया है। इस पैकेज की यह धनराशि बिहार के राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास, महत्वपूर्ण नदियों पर पुल का काम तथा रेलवे ओवरब्रिज के निर्माण और उन सड़को की हालत सुधारने में खर्च की जाएगी, जिससे बिहार के विकास की रμतार बढ़ाई जा सके। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार मंत्रालय द्वारा बिहार में सड़क निर्माण की ऐसी योजनाएं बनाई है। सड़क परियोजनाओं के तहत प्रमुख रूप से महात्मा गांधी सेतु के समानांतर गंगा नदी पर एक नए पुल का निर्माण, कोसी ओर सोन नदी के ऊपर पुल का निर्माण, धार्मिक पर्यटन से जुड़े क्षेत्रों में सड़कों का निर्माण और रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण शामिल है। वहीं ग्रामीण सड़क के विकास के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत 22,500 किलोमीटर सड़क के निर्माण हेतु 13,820 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

शुक्रवार, 17 जुलाई 2015

हरियाणा-यूपी को जोडेगा बाहरी एक्सप्रेस-वे

जुड़ेंगे हरियाणा व यूपी के 98 गांव!
सरकार ने दी छह लेन के हाइवे निर्माण को मंजूरी
दिल्ली में थमेगी भारी वाहनों की रेलमपेल
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
केंद्र सरकार ने दिल्ली जैसे महानगर की यातायात समस्या का सामना किये बिना हरियाणा के पलवल व फरीदाबाद से सीधे सोनीपत के सफर की राह को आसान बनाने के लिए कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने फरीदाबाद और पलवल से सीधे सोनीपत के लिए छह लेन वाले प्रस्तावित छह लेने वाले पूर्वी बाह्य परिधि एक्सप्रेस-वे के निर्माण को मंजूरी दे दी है। राष्‍ट्रीय राजमार्ग संख्या एनई-2 के रूप में हरियाणा व उत्तर प्रदेश के 98 गांवों को जोड़ने वाले इस एक्सप्रेस-वे के लिए 7558 करोड़ रुपये की लागत तय की है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने इस प्रस्ताव की मंजूरी देकर पिछले अरसे से चली आ रही ऐसी मांग को हरी झंडी दे दी है। इस छह लेन के एक्सपे्रस-वे के निर्माण के बाद हरियाणा में फरीदाबाद व पलवल से सोनीपत जाने के लिए राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की यातायात और प्रदूषण की समस्या से निजात मिलेगी और समय भी बचेगा। 135 किमी लंबे इस पूर्वी बाह्य परिधि एक्सप्रेस-वे के निर्माण के लिए केंद्र सरकार ने 7558 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है, जिसमें 1795.20 करोड़ रुपये भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनरूद्धार के अलावा अन्य पूर्व निर्माण गतिविधियों पर खर्च करने के लिए शामिल है। यह प्रस्ताव केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय में कई सालों से लंबित पड़ा हुआ था। सरकार की इस महत्वाकांक्षी सड़क परियोजना का मुख्य मकसद हरियाणा और उत्तर प्रदेश राज्यों में बुनियादी ढांचे के सुधार में तेजी लाना है। यह सड़क दिल्ली के आसपास बाहरी परिधि में बनाई जाएगी, ताकि जिन गाड़ियों को दिल्ली में नहीं ठहरना है वह शहर के बीच से नहीं गुजरें। इस विस्तार से राज्य के संबद्ध क्षेत्रों की सामाजिक, आर्थिक स्थिति सुधारने में मदद मिलेगी और परियोजना गतिविधियों के लिए स्थानीय श्रमिकों के लिए रोजगार की संभावनाएं बढ़ेंगी।

रविवार, 21 जून 2015

फास्ट ट्रैक पर सीमाओं की सड़क परियोजना!

दस हजार किमी सड़क निर्माण में दो हजार पुल भी शामिल
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
देश में सड़को का जाल बिछाकर विकास के एजेंडे को अंजाम तक पहुंचाने की कवायद में जुटी मोदी सरकार ने सीमावर्ती इलाकों को आबाद करने का खाका तैयार किया है। इसके लिए देश की सीमावर्ती इलाकों की सड़कों को राष्ट्रीय राजमार्ग से जोड़ने की सड़क परियोजनाओं को अंतिम रूप दे दिया गया है। सीमावर्ती इलाकों की सड़कों राष्ट्रीय राजमार्ग से जोडने के लिए सरकार के इस मेगा प्लान में सरकार 10 हजार किमी सड़क निर्माण होगा, जिसमें दो हजार पुलों का निर्माण भी शामिल है।

शुक्रवार, 12 जून 2015

सड़क परियोजनाओं का जल्द बदलेगा मॉडल!

सड़क निर्माण में तेजी लाने की नीति पर सरकार
निजी कंपनियों के प्रोत्साहन को तैयार किया हाईब्रिड मॉडल
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।

देश में सड़कों का जाल बिछाने के इरादे से एक साल में सड़क निर्माण में तेजी लाने से उत्साहित मोदी सरकार ने अब नई सड़क परियोजनाओं को निजी भागीदारी के साथ हाईब्रिड मॉडल की पटरी पर उतारने की तैयारी कर ली है, ताकि राष्ट्रीय राजमार्गो समेत सभी सड़क परियोजनाओं में और भी तेजी लाई जा सके।
दरअसल केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गड़करी ने महाराष्ट में मंत्री रहते हुए जिस तरह सड़क और ओवर ब्रिज का जाल बिछाकर सूबे की वाहवाही लूटी थी, उसी तरह वह इस अनुभव को  राष्ट्रीय स्तर पर समर्पित करना चाहते हैं। यही कारण था कि उन्होंने मंत्रालय का कार्यभार ग्रहण करते ही देशभर में सड़क निर्माण में तेजी लाने के लिए शुरूआती दो साल में प्रतिदिन 30 किमी सड़क निर्माण का लक्ष्य तय किया था। हाालांकि इस लक्ष्य में गडकरी सड़क निर्माण के कार्य को प्रतिदिन 15 किमी तक लाने में सफल रहे हैं, जो पिछले डेढ़ दशक में एक रिकार्ड है। गडकरी इस लक्ष्य के आधे रास्ते पर पहुंचने पर यह उम्मीद भी जता चुके हैं कि देश के विकास में सड़क परियोजनाओं के कार्यान्व्यन के लिए सरकार इस लक्ष्य से भी आगे बढ़ेगी। इसी इरादे से उन्होंने हॉल ही में निजी भागीदारी को बढावा देने के लिए एक मिश्रित हाइब्रिड मॉडल पेश किया है, जिसमें सरकार अब नई सड़क परियोजनाओं को इसी मॉडल के आधार पर पूरा कराने का निर्णय लिया गया है। अभी तक एक साल की सड़क परियोजनाओं में निर्माण कार्य भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानि एनएचएआई द्वारा कराया गया है, लेकिन सड़क निर्माण में और भी ज्यादा तेजी लाने के लिए अब सरकार इस मॉडल के जरिए जोखिम के साथ निजी कंपनियों के टूटे भरोसे का वापस लाना चाहती है।