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सोमवार, 7 मार्च 2016

ट्रांसपोर्टरों को राहत देगी सरकार!

ओवलोडिंग पर पर पांच फीसदी छूट देने का निर्णय
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
देशभर में सड़क हादसों का सबब बनती आ रही ओवरलोडिंग पर शिकंजा कसने के लिए केंद्र सरकार कमर कसे हुए है, लेकिन कार्मिशियल वाहनों के नियमों में ढ़ील देते हुए ओवलोडिंग पर वसूली जाने वाली दस गुणा जुर्माने में राहत दी है। यानि अब ट्रक में ओवरलोडिंग की तयसीमा में पांच प्रतिशत की छूट दी जाएगी।  
दरअसल भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने कार्मिशियल वाहनों यानि ओवरलोडिंग ट्रकों पर शिकंजा कसते हुए जनवरी में एक अधिसूचना जारी की थी, जिसमें ओवरलोडिंग ट्रकों को टोल प्लाजा पर जाते ही या तो ट्रक के सामान को वहीं उतारना पडेंगा और साथ में टोल टैक्स का दस गुणा जुर्माने के रूप में भुगतान करने का भी प्रावधान किया था। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार ट्रांसपोर्टरों की मांग पर सरकार ने ओवरलोड ट्रकों पर लग रही 10 गुणा जुर्माने से कुछ राहत देते हुए उन माल वाहक वाहनों से पेनल्टी न लेने की योजना को हरी झंडी दी है, जो माल के वजन की तय सीमा से पांच फीसदी से ज्यादा ओवरलोड हों। इसके लिए अब एनएचएआई ने सर्कुलर जारी किया है। वहीं सड़क मंत्रालय ने सभी राज्यों और यूनियन टेरेटरी के प्रमुख सचिव ट्रांसपोर्ट को पत्र लिख कर इस राहत से अवगत करा दिया है। मंत्रालय के अनुसार ओवरलोडिंग पर यह छूट मोटर व्हीकल एक्ट के सेक्शन 113 के सब-सेक्शन(3) के अंतर्गत दी गई है। यह वाहन के ग्रॉस व्हीकल वेट पर मान्य होगा। मसलन ट्रांसपोर्टरों की मांग पर मोदी सरकार की नई नीति के तहत व्हीकल के कुल लोड का पांच फीसदी अधिक होने पर उसे ओवरलोड नहीं माना जाएगा। सरकार ने पहले इस राहत को रोड सेफ्टी बिल में देने की योजना बनाई थी, लेकिन यह विधेयक संसद में लंबित है, जिसमें इस नियम को भी शामिल किया जाएगा। हालांकि यूपीए-2 सरकार ने भी ओवरलोडिंग रोकने के लिए टोल प्लाजाओं पर ट्रकों के लोड़ की जांच करने और जुर्माना वसूल करने के निर्देश दिये थे, लेकिन उसका ज्यादा असर नहीं हो सका।

शुक्रवार, 26 फ़रवरी 2016

अब सहायक कहना जनाब, कुली नहीं!

प्रभु ने सम्मान में बदला 200 साल पुराना शब्द 'कुली'
नई दिल्ली
।
आखिरकार रेलवे ने रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों के सामान को ढ़ोने वाले कुलियों को सम्मान देकर अंगे्रजी हकूमत की 200 साल से जारी परंपरा को खत्म करने का ऐलान कर दिया। मसलन अब रेलवे स्टेशन पर कुली शब्द सुनाई नहीं देगा।
लोकसभा में गुरुवार को पेश किये गये रेल बजट में रेल मंत्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने रेलस्टेशन पर यात्रियों के सामान को ट्रेनों में चढ़ाने र उताकर कर ढोने वाले कुलियों को सम्मान देते हुए उनके ‘कुली’ के स्थान पर ‘सहायक’ पद का दर्जा देने का ऐलान किया है। यही नहीं रेलवे ने उनके शब्द में बदलाव नहीं किया, बल्कि उनकी वर्दी बदलने का भी फैसला किया है। अब रेलवे स्टेशनों पर कुलियों को सहायक कहकर पुकारा जाएगा। रेल बजट में प्रभु ने कहा कि कुली का काम करने वाले सहायकों को एक विशेष तरह
का प्रशिक्षण देने और उन्हें सामूहिक बीमा सुविधाएं देने के लिए संभावनाओं को तलाशने की भी घोषणा की है। बजट पेश करते हुए रेलमंत्री ने कहा कि इसका मकसद रेलवे की छवि सुधारने के तहत कुलियों को यात्रियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करने के लिए प्रोत्साहित करना है, जिसके लिए उन्हें समुचित प्रशिक्षण देने की व्यवस्था भी की जाएगी। गौरतलब है कि रेलवे के इतिहास में ब्रिटिश शासनकाल के दौरान वर्ष 1807 में यूरोपियन देशों में ‘कुली’ शब्द की शुरूआत हुई थी, जो अंग्रेजों के साथ भारत आया। भारत में कुली शब्द को उर्दू की जुबान माना जाता है।

गुरुवार, 25 फ़रवरी 2016

जनता की उम्मीदों को पूरा करना प्रभु

आज पेश होगा संसद में रेल बजट
रेल बजट में रेलवे सुधार पर रहेगा जोर
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
रेल मंत्री सुरेश प्रभाकर प्रभु कल गुरुवार को संसद में रेल बजट पेश करेंगे, जिस पर जनता की उम्मीदें भरी नजरे लगी हुई हैं। इस बार रेल बजट में सुरेश प्रभु का जहां रेलवे को घाटे से उबारने पर जोर रहेगा, वहीं रेल यात्रियों को कई तरह की राहत दे सकते हैं, जबकि रेलवे के आधुनिक सुधार और उसके बुनियादी ढांचे को सुधारने की भी घोषणाएं होने की संभावना है।
सरकार को दुनिया के दूसरे सबसे बड़े नेटवर्क रेलवे को विश्वस्तरीय पहचान देने के लिए आगे बढ़ रही मोदी सरकार का प्रयास है कि यात्रियों को ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं और सुरक्षा सुनिश्चित कराई जाए। सरकार रेलवे को घाटे से बाहर भी निकालने की कवायद में लगी हुई है। रेलवे और रेलवे स्टेशनों पर आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल के साथ रेलवे के बुनियादी ढांचे को भी मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। लिहाजा सरकार की ऐसी योजनाओं को देखते हुए गुरुवार को लोकसभा में पेश होने वाले रेल बजट पर पूरे देश की नजरें लगना स्वाभाविक है। मसलन मोदी सरकार के तीसरे रेल बजट में यात्रियों की ज्यादा से ज्यादा सुविधाओं का ख्याल रखते हुए सुरेश प्रभु की रेल सुधारों की पटरी पर दौड़ाने की ज्यादा संभावना है। हालांकि इस बजट में वातानुकूलित प्रथम श्रेणी में तकरीबन सभी रियायतें समाप्त हो सकती हैं। इसके अलावा विभिन्न रियायतों को तर्कसंगत बनाने, उनमें कमी लाने तथा उनके दुरूपयोग को रोकने के उपायों की घोषणा हो सकती है। देश में बुलेट ट्रेन और सेमी बुलेट टेÑन चलाने की योजनाओं का खुलासा होने की भी संभावना बनी हुई है। राज्यों के साथ संयुक्त उपक्रम बनाकर रेलवे ढांचे को मजबूत करने वाली कई योजनाएं सामने आ सकती हैं।

गुरुवार, 18 फ़रवरी 2016

भारतीय बने बांग्लादेशियों को जल्द मिलेगा मताधिकार!

संविधान में संशोधन लाएगी सरकार, कैबिनेट से मिली मंजूरी
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
भारत और बांग्लादेश की सीमावर्ती इलाकों में चार दशकों से खानाबदोश की जिंदगी जी रहे करीब 51 हजार लोगों को भारतीय नागरिकता देने के बाद केंद्र सरकार ने अब उन्हें मौलिक अधिकार और मताधिकार देने की पहल की है। इसके लिए सरकार ने पश्चिमा बंगाल में संसदीय क्षेत्रों के परिसीमन के बारे में परिसीमन अधिनियम 2002 और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत संसद में एक विधेयक पेश होगा। 
पिछले चार दशकों से ज्यादा समय से दोनों देशों के बीच लंबित विवादित जमीन की अदला-बदली का ऐतिहासिक समझौता साढे छह माह पहले एक अगस्त को लागू कर दिया गया था। इस समझौते में दोनों देशों की सीमाओं पर एक दूसरे देशों में खानाबदोश की जिंदगी जी रहे लोगों की इच्छा के अनुसार देश चुनने की छूट दी गई थी, जिसके बाद भारत में रहने के इच्छुक बांग्लादेशियों को भारतीय नागरिकता दे दी गई। सूत्रों के अनुसार इस अदला-बदली समझौते के तहत भारतीय सीमा में भारतीय क्षेत्र में 51 बांग्लादेशी बस्तियों के 14,215 लोगों ने भारत में रहना पसंद किया था, जबकि बांग्लादेश के भीतर रह रहे भारतीय बस्तियों में 37,369 में से 223 परिवारों के 163 मुस्लिमों समेत 1057 लोगों ने भारतीय नागरिकता को चुना। यानि करीब 16 हजार से ज्यादा इन नागरिकों को मौलिक अधिकार और मताधिकार देने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है।
संसद में पेश होगा विधेयक
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी। प्रस्ताव के अनुसार भारत और बांग्लादेश के बीच क्षेत्रों के आदान-प्रदान के बाद पश्चिम बंगाल में संसदीय क्षेत्रों के परिसीमन के बारे में ‘परिसीमन अधिनियम-2002 की धारा 11 और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम-1950 की धारा 9 में संशोधन करना शामिल है, ताकि इन लोगों को मताधिकार के साथ मौलिक अधिकार हासिल हो सकें। इसके लिए सरकार जल्द ही संसद में इन कानूनों में संशोधन के अलावा निर्वाचन कानून (संशोधन) विधेयक-2016 पेश करेगी। हालांकि यह संविधान (100वां संशोधन) अधिनियम-2015 के अनुरूप है। इस कानून के तहत भारत और बांग्लादेश के बीच क्रमश: 51 बांग्लादेशी और 111 भारतीय इनक्लेव के आदान-प्रदान के बाद पश्चिम बंगाल के कूच बिहार जिले में विधानसभा और संसदीय क्षेत्र का सीमित परिसीमन करने में चुनाव आयोग को मदद मिलेगी।

बुधवार, 17 फ़रवरी 2016

देश के बांधो के खतरे दूर करेगी सरकार

सुरक्षा सुनिश्चित करने को तैयार होगी योजना
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
केंद्र सरकार नदियों से जुड़े मुद्दों के साथ देशभर के बांधों परियोजनाओं के खतरों की आशंकाओं से निपटने की भी योजना पर आगेबढ़ती नजर आ रही है। इसके लिए सरकार ने बांध पुनर्वास एवं सुधार परियोजनाओं से सबक लेने के सुरक्षा सुनिश्चित करने की योजना तैयार करने का निर्णय लिया है।
केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय के अनुसर देश के सभी राज्यों में बदहाल स्थिति में मौजूद कई विशाल बांधों के पुनर्वास की तत्काल आवश्यकता के बारे में विविध मंचों पर चिंता जाहिर की जाती रही है, ताकि उनकी सुरक्षा और प्रचालन संबंधी दक्षता सुनिश्चित की जा सके। इसलिए देश में बांधों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए मोदी सरकार ने बांध पुनर्वास एवं सुधार परियोजना यानि डीआरआईपी की शुरूआत की है। यह परियोजना विश्व बैंक से प्राप्त ऋण सहायता के साथ सात राज्यों में लगभग 250 बांधों की स्थिति में सुधार लाने के लिए प्रारंभ की गई है। हालांकि छह वर्षीय डीआरआईपी परियोजना अप्रैल 2012 में प्रारम्भ हो चुकी थी, जिस पर काम जारी है।
खस्ता हालत में 80 फीसदी बांध
मंत्रालय के अनुसार देश में करीब 4900 विशाल बांधों में 80 फीसदी बांध 25 साल से भी ज्यादा पुराने होने के कारण उनसे बाढ़ और भूकंप जैसी आपदा के खतरे की आशंकाएं बनी रहती है। इनके पुराने प्रचलित डिजाइन की कार्यप्रणालियां और सुरक्षा की स्थितियां भी डिजाइन के वर्तमान मानकों और सुरक्षा मानदंडों से मेल नहीं खा रही हैं। बांधों के आकलन और सर्वे के तहत नींव की अभियांत्रिकी संबंधी सामग्री अथवा बांधों का निर्माण में उपयोग की गयी सामग्री भी समय के साथ नष्ट होने के कगार पर है। मसलन उनके रखरखाव से जुड़े इन पृथक कारकों और मामलों के कारण कुछ बांध खस्ता हालत में हैं, जिनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा उनकी प्रचालन संबंधी विश्वसनीयता बहाल करने के लिए उन बांधों की तत्काल मरम्मत करना जरूरी है।

सोमवार, 15 फ़रवरी 2016

रेल यात्रियों को सुविधाएं देने की तैयारियां!


रेल बजट में किराया नहीं, बढ़ सकती है ट्रेने एवं उनकी गति 
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
संसद के बजट सत्र में आम बजट के साथ रेल बजट को लेकर भी तरह-तरह की अटकले लगाई जा रही है। रेल बजट में हालांकि सरकार का जोर रेल यात्रियों की सुविधओं को बढ़ाने पर रहेगा, जिसमें ट्रेनों और उनकी गति में वृद्धि के अलावा रेल किराए में राहत देना शामिल है।
रेल मंत्रालय में रेल बजट तैयार करने की गतिविधियां तेजी पर हैं। मोदी सरकार का यह तीसरा रेल बजट होगा, जिसमें यात्रियों की सुविधा को प्राथमिकता देने के संकेत दिये जा रहे हैं। रेल बजट में सरकार का प्रयास होगा कि यात्रियों को ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं देते हुए भारतीय रेल को सुधारों की पटरी पर दौड़ाया जाए। रेलवे के सूत्रों के अनुसार यात्रियों की सुविधाओं के ख्याल के साथ सरकार यात्री किरायों में वृद्धि करने के बजाए मालवहन, पार्सल, विज्ञापन और खानपान व्यवस्था की नयी नीतियों के माध्यम से राजस्व बढाने की नीतियों का रेल बजट में ऐलान करेगी। सूत्रों के अनुसार इस बार के रेल बजट में दोहरीकरण, तिहरीकरण,विद्युतीकरण, सिंगनल एवं संचार आधुनिकीकरण जैसी क्षमता वृद्धि की नयी योजनाओं के अलावा प्रमुख रेल मार्गों पर तकनीकी उन्नयन करके पटरियों पर रेल गाड़यिों की गति में दस किलोमीटर प्रति घंटा तक की वृद्धि करने की योजना का ऐलान होने की उम्मीद है। यही नहीं देशभर में मोबाइल के जरिये अनारक्षित टिकट की सुविधा एवं अन्य सूचना प्रौद्योगिक आधारित सेवाओं का विस्तार करने पर ज्यादा जोर देगी। मसलन रेलवे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर रेलवे को पेपरलैस करने की कवायद में जुटा हुआ है।

शुक्रवार, 12 फ़रवरी 2016

राज्य ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन को राहत देने की तैयारी!

प्रदूषण से निपटने को केंद्र ने तैयार किया प्रस्ताव
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
केंद्र सरकार सड़क परियोजनाओं में सड़क हादसों पर अंकुश लगाने और वाहनों के कारण प्रदूषण की बढ़ रही समस्या से निपटने के लिए बजट में रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन को राहत देने की तैयारी में है। केंद्रीय भूतल मंत्रालय ने राज्यों में बसों की μलीट बढ़ाने के लिए राज्यों के परिवहन निगमों के लिए 2500 करोड़ रुपये का बजट में प्रावधान करने का प्रस्ताव किया है।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार ऐसा एक प्रस्ताव मंत्रालय से तैयार होकर वित्त मंत्रालय को भेजा जा चुका है, जिसमें देश में सड़क परिवहन की व्यवस्था में सुधार के लिए संसद के बजट में शामिल करने का अनुरोध किया गया है। वर्ष 2016 के बजट में में यदि यह प्रस्ताव पारित कर दिया जाता है तो राज्य परिवहन निगमों के लिए एक अच्छी खबर होगी। मंत्रालय के अनुसार इस बजट में बसों की μलीट को बढ़ाने के लिए 2500 करोड़ रुपए का बजट संसद में पारित होने की संभावना है। मंत्रालय का इस प्रस्ताव को तैयार करने का मकसद है कि राज्यों में बसों की संख्या बढ़ सके और नई बसें आने से जहां सड़क हादसों में कमी आएगी, वहीं प्रदूषण की समस्या को भी कहीं हद तक कम किया जा सकेगा। वित्त मंत्रालय को भेजे इस प्रस्ताव में इस बात पर जोर दिया गया है कि रोड ट्रांसपोर्ट के लिए 2500 करोड़ रुपए के बजट में ऐसा प्रावधान किया जाए जिसमें हर राज्य को बराबर राशि मिल सके। ऐसा करने से बसों की संख्या में इजाफा होगा और हर राज्य में ई-बसों की योजना को बढ़ावा मिल सके। केंद्र सरकार इस प्रस्ताव के जरिए देश में राज्य परिवहन निगमों की बसों को इलेक्ट्रिक बसों में तब्दील करने का लक्ष्य भी पूरा करने का प्रयास करेगी, जिसके लिए वाहनों के प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए भी ऐसी योजनाओं को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
ई-बसों पर रहेगा फोकस
सड़क मंत्रालय के प्रस्ताव के अनुसार केंद्र सरकार देशभर में स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन की करीब 1.50 लाख बसों को इलेक्ट्रिक बस के रूप में बदलने का प्रयास कर रही है। वहीं क्रूड और पेट्रोलियम का आठ लाख करोड़ रुपए के बोझ को भी कम किया जा सकेगा। सरकार चाहती है कि राज्य निगमों को इस बजट के जरिए मिलने वाली धनराशि के जरिए जहां राज्य परिवहन निगमों की आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा और बसों को बेहतर बनाया जाए। वहीं क्रूड और पेट्रोलियम का आठ लाख करोड़ रुपए के बोझ को भी कम हो सकेगा। प्रस्ताव में भारत को प्रदूषण रहित बनाने की दिशा में इस दिशा में ई-वाहन परियोजना पर जोर देने की बात कही गई है। इसके आलवा केंद्र सरकार वाहनों को बायो डीजल और एथनॉल मोड पर लाने का भी प्रयास कर रही है।

गुरुवार, 11 फ़रवरी 2016

आतंकवाद पर संयुक्त राष्ट्र में फिर चूका भारत!

यूएन की समिति में मनोनीत नहीं कर सका विशेषज्ञ
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
पठानकोट एयरबेस हमले के मास्टरमाइंड मसूद अजहर को संयुक्त  राष्ट्र की प्रतिबंधित आतंकियों की सूची में शामिल कराने की मुहिम में भारत फिर चूक गया है। मसलन भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध लगाने वाली समिति में अपना विशेषज्ञ नियुक्त करने का पहला मौका गंवा दिया।
सूत्रों के अनुसार भारत को यूएन की इस समिति में अपना विशेषज्ञ नियुक्त करने के लिए जनवरी तक का समय दिया गया था, लेकिन समयसीमा के भीतर विशेषज्ञ की नियुक्ति न होने के कारण पठानकोट हमले के मास्टरमाइंड और जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर को कालीसूची में शामिल करने की कोशिश पहले दौर में अटक गई है। गृह मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार विशेषज्ञ मनोनीत करने के लिए यूएन ने नाम भेजे जाने के लिए भारत को एक पखवाड़े का समय दिया था। गृहमंत्रालय के सूत्रों की माने तो यूएन में ऐसे नामांकनों हेतु भारत की आंतरिक प्रक्रिया काफी लम्बी है, जिसमें कई निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करना आवश्यक है। हालांकि भारत मसूद अजहर को पठानकोट का गुनाहगार मानते हुए उसे यूएन की प्रतिबंधों की सूची में डाले जाने के लिए लगातार प्रयास में जुटा है। इसका कारण यह भी है कि पाकिस्तान पठानकोट हमले में मसूद अजहर को क्लीनचिट दे रहा है। गृहमंत्रालय ने संकेत दिये हैं कि यूएन की आतंकियों को प्रतिबंधित करने वाली इस महत्वपूर्ण कमेटी के लिए किसी योग्य सेवानिवृत्त और विशेषज्ञ नौकरशाह की तलाश जारी है और गृह मंत्रालय ने एक ऐसे नौकरशाह की नियुक्ति का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिया है, जिस पर जल्द ही निर्णय होने की उम्मीद है।

बुधवार, 10 फ़रवरी 2016

अदालतों में लंबित मामलों का निपटान चुनौती

ढाई करोड़ से ज्यादा मामलों का अंबार
ओ.पी. पाल.
नई दिल्ली।
सुप्रीम कोर्ट में हजारो और देश के उच्च न्यायालयों में लाखों मुकदमें लंबित हैं, तो निचली अदालतों में ऐसे लंबित मामलों की संख्या करोड़ो में पहुंच गई है, जो कानून सुधार की कवायद में जुटी केंद्र सरकार के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है।
देश में न्यायिक सुधार के लिए पिछले साल मोदी सरकार की पहल पर उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों और मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन के दौरान तत्कालीन भारत के मुख्य न्यायाधीश एचएल दत्तू ने सम्मेलन में आए सुझावों के बूते पर कहा था कि अगले पांच साल में अदालतों में कोई भी मामला लंबित नहीं रहेगा। लेकिन इसके विपरीत देश के शीर्ष अदालत से लेकर निचली अदालतों पर मुकदमों को बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। विधि एवं न्याय मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक 31 दिसंबर तक देश के सभी राज्यों की जिला अदालतों में दो करोड़ 61 हजार मामलें लंबित हैं। चिंताजनक बात है कि इनमें करीब 21.73 लाख मुकदमें तो पिछले दस साल से निर्णय का इंतजार कर रहे हैं। जबकि 83 लाख 462 यानि 41.38 फीसदी मामले केवल पिछले दो वर्षों से कम समय से लंबित हैं। विधि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि लंबित मामलों का अंबार ऐसे ही लगता रहा तो सैकड़ो साल में भी इनका निपटारा करना संभव नहीं हो सकता।

मंगलवार, 9 फ़रवरी 2016

फास्‍ट ट्रैक पर आएगी नदियों को जोडने की परियोजना।

नदियों को आपस में जोड़ने पर गंभीर सरकार 
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
देश में सूखे और बाढ़ तथा जल संकट जैसी समस्या से निपटने के लिए अटल बिहारी वाजपेयी की नदियों को आपस में जोड़ने वाली महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को फास्ट ट्रैक पर लाने की तैयारी शुरू हो गई है। इन परियोजनाओं में आ रही अड़चनों और समस्याओं के समाधान के लिए राज्यों के साथ मंथन का आधार भी फास्ट ट्रैक होगा।
मोदी की केंद्र सरकार को नदियों को आपस में जोड़ने वाली परियोजनाओं को अंजाम देने के लिए जो कदम उठाए हैं उसमें केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्री सुश्री उमा भारती की अध्यक्षता में एक विशेष समिति गठित की थी, जिसके सदस्यों के रूप में राज्यों के मुख्यमंत्री स्वयं भी शामिल हैं। जल संसाधन मंत्रालय के अनुसार इस विशेष समिति की अभी तक आठ बैठकें हुई है और केवल उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड के हित में केन-बेतवा नदी को जोड़ने की परियोजना ही अभी तक अंतिम चरण की प्रक्रिया में आ सकी है। इसके बाद इस परियोजना के तहत केंद्र के लक्ष्य में दमनगंगा-पिंजाल और पार-तापी-नर्मदा लिंक परियोजनाएं गुजरात और महाराष्ट्र के बीच जल बंटवारे के मुद्दे पर अटकी है, हालांकि बकौल उमा भारती दोनों राज्यों की सरकारों ने जल बंटवारे के मुद्दे पर सहमति बना ली है और इन परियोजनाओं की डीपीआर रिपोर्ट पर राज्यों से अंतिम मंजूरी का इंतजार है। इसी प्रकार ओडिशा में महानदी-गोदावरी लिंक परियोजना के संबंध में आ रही अड़चनों के लिए केंद्र और राज्य सरकार के संबन्धित अधिकारियों का एक दल संपर्क में है जिसकी छह माह में रिपोर्ट आते इस परियोजना को अंतिम रूप देने के लिए ओडिशा के मुख्यमंत्री के साथ स्वयं उमा भारती मंथन करेगी।
अंतर्राज्यीय लिंक चुनौती
देश में नदियों को आपस में जोड़ने वाली परियोजनाओं के तहत सरकार लक्ष्य अंतर्राज्यीय लिंक परियोजनाओं में बिहार की बूढ़ी गंडक-नून-बया-गंगा लिंक परियोजना को शुरू करना भी लक्ष्य में शामिल है, जिसके लिए मंत्रालय ने डीपीआर तैयार हो चुकी है। ऐसी ही पंचेश्वर-शारदा लिंक परियोजना पर भी काम किया जा रहा है। मंत्रालय के अनुसार सरकार के एजेंडे में नदियों को जोड़ने वाली ऐसी ही 35 परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की चुनौती है, जिन पर आगे बढ़ने की दिशा में विशेष समिति की बैठक में विचार विमर्श किया गया है।

रविवार, 7 फ़रवरी 2016

राग दरबार: यह कैसा मजाक है जनाब

माननीय के गले की फांस
सरकारी बंगलों पर अपनी सुविधानुसार बसने की चाह में माननीय न जाने क्या-क्या कह जाते हैं, लेकिन जब सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के एक कांग्रेसी सांसद की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने सरकारी बंगले को खाली न कराए जाने की गुजारिश की थी। दरअसल कांग्रेसनीत यूपीए सरकार के बदलने के बाद केंद्र की नई सरकार ने उन्हें कुछ माह बाद ही दूसरा बंगला आवंटित किया गया था, लेकिन उन्होंने कुछ बहाना बनाते हुए वहां जाने से इंकार कर दिया था, बल्कि सरकार पर मजाक करने जैसी टिप्पणी करके कई तरह के नियमों को धत्ता तक करार दे दिया। सरकारी बंगले की सुविधाओं की खातिर यह मामला अदालत तक भी जहां पहुंचा, जहां दिल्ली हाई कोर्ट ने माननीय को अंतरिम राहत देते हुए केंद्र सरकार से कहा कि मामले की सुनवाई पूरी होने तक बंगला खाली न कराया जाए। जबकि केंद्र सरकार की दलील रही कि इन सांसद महोदय ने सरकारी आवास में रहने के लिए तीन बार अलग अलग तरह की बातें कही हैं जिसके साथ ही आवास में ठहरने की उनकी सारी योग्यता खत्म हो गई है। लेकिन हाई कोर्ट से मिली इस राहत पर अतिउत्साहित माननीय ने मीडिया के समक्ष यहां तक कह दिया कि 'ये क्या मजाक है। मसलन केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए उनका कहना था कि उन्हें ऐसा बंगला तो दिया जाए, जो रहने लायक तो होना चाहिए। अब जब सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रूख अपनाया तो कांग्रेस के इन माननीय का मजाकिया लहजा गले की हड्डी बन गया यानि सुप्रीम कोर्ट ने माननीय को गरिमा का ख्याल रखने जैसी टिप्पणियां करते हुए बंगला खाली करने का फरमान दे दिया है। राजनीति गलियारों में चर्चा है कि क्या सुप्रीम कोर्ट के फैसले को भी अब क्या ये माननीय मजाक करार देंगे?

शनिवार, 6 फ़रवरी 2016

‘नमामि गंगे’ मिशन में ऐसे बढ़ेगी सहभागिता!

कार्यान्वयन में वेतन आधारित होगी निजी भागीदारी
ओ.पी. पाल
. नई दिल्ली।
मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी मिशन के रूप में नमामि गंगे कार्यक्रम को तेजी से आगे बढ़ाने की दिशा में सार्वजनिक व निजी भागीदारी को मिश्रित वेतन आधारित बनाने की पहल शुरू कर दी गई है, ताकि इस मिशन को जनांदोलन के रूप में गंगा और सहायक नदियों की स्वच्छता को स्थायी रूप दिया जा सके।
राष्ट्रीय गंगा स्वच्छता अभियान के तहत कई मंत्रालयों की भागीदारी में नमामि गंगे मिशन की तेजी से शुरूआत करने की कवायद की जा रही है, जिसके लिए केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्री सुश्री उमा भारती ने जनता, स्थानीय प्रशासन और शासन के अलावा अन्य संस्थाओं को भी जोड़ते हुए इस कार्यक्रम को जनांदोलन बनाने की रणनीति अपनाई है। मिशन को स्थातित्व देने की दिशा में नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत मिश्रित वार्षिक वेतन आधारित सार्वजनिक-निजी भागीदारी शुरू करने के प्रस्ताव पर केंद्र सरकार अपनी मुहर लगा चुकी है। मिश्रित वेतन आधारित सार्वजनिक निजी साझेदारी यानि पीपीपी मॉडल अपनाने का मकसद मिशन में तेजी लाने की दृष्टि से एक नया बदलाव है।
नीति बदलाव से होगा लाभ
मंत्रालय के अनुसार केंद्र सरकार के फैसले के अनुसार इस मॉडल में पूंजीगत निवेश के एक हिस्से यानि 40 प्रतिशत तक का भुगतान सरकार द्वारा किया जाएगा और शेष भुगतान वार्षिक के रूप में 20 वर्षों तक किया जाता रहेगा। इस कदम के तहत कार्य प्रदर्शन मानकों को वार्षिक भुगतान के साथ जोड़ने से समुचित मानक वाले शोधित जल का उद्देश्य सुनिश्चित होगा, ताकि कार्य प्रदर्शन,सक्षमता, व्यावहारिकता तथा निरंतरता को सुनिश्चित किया जा सके। जिसमें भारत में अपशिष्ट जल क्षेत्र में सुधार लाने की भी तैयारियां शामिल होंगी। इसके लिए रेलवे की तर्ज पर विद्युत, पेट्रोलियम तथा उद्योग आदि केंद्रीय मंत्रलायों के साथ भी करार किये जा रहे हैं।

गुरुवार, 4 फ़रवरी 2016

प्रदूषण रोकेगा ई-किट नियम!

वाहनों में वैकल्पिक र्इंधन पर आगे बढ़ी सरकार!
छह फरवरी से लागू होंगे हाईब्रिड ई-किट नियम
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
देश में प्रदूषण की समस्या के निपटने के लिए केंद्र सरकार ने वैकल्पिक र्इंधन के रूप में हाईब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना शुरू कर दिया है, जिसके लिए छह फरवरी से हाईब्रिड इलेक्ट्रिक किट नियम लागू करने के लिए अधिसूचना जारी कर दी है।
केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल चालित वाहनों में हाईब्रिड इलेक्ट्रिक किट लगवाने वालों के लिए केंद्रीय मोटर वाहन नियमावली में संशोधन के लिए एक मसौदे की अधिसूना जारी की है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए वैकल्पिक र्इंधन को बढ़ावा देने के लिए यह कदम उठाया गया है। भारत स्टेज-2 यानि बीएस-2 प्रदूषण मानक के अनुकूल होने के आलवा इन संशोधित नियमों को छह फरवरी को लागू हो जाएगा। हाइब्रिड इलेक्ट्रिक किट फिट कराने के लिए वाहन का भारत स्टेज-2 प्रदूषण मानक के अनुकूल होना जरूरी है। यानि कारें, बसें और ट्रक जैसी श्रेणी के वाहनों में मानकों के अनुरूप हाइब्रिड इलेक्ट्रिक किटें लगाई जा सकेगीं। इस नियमावली के तहत यह किट तभी लगेगी, जब संबन्धित वाहन में इससे पहले किसी तरह की किट न लंगवाई गई हो। मसलन पेट्रोल और डीजल के अलावा अन्य किसी ईंधन से चलने वाले वाहनों में यह किट नहीं लगाई जा सकेगी। हाईब्रिड इलेक्ट्रिक किट भारतीय मानक ब्यूरो के मानकों के अनुरूप होने और प्राधिकृत एजेंसी से ही लगवाना जरूरी होगा।

पीपीपी मॉडल पर मजबूत होगा बुनियादी ढांचा


छह सड़क व एक बंदरगाह परियोजना को मंजूरी
नई दिल्ली
।
केंद्र सरकार की आर्थिक मामलों के विभाग के सचिव की अध्यक्षता में सार्वजनिक निजी परियोजना आकलन समिति और उच्चाधिकार प्राप्त समिति की बैठक के प्रस्ताव को केंद्रीय कैबिनेट ने मंजूरी दी है। इस प्रस्ताव में 9672.12 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली छह सड़क परियोजनाओं और एक बंदरगाह क्षेत्र परियोजना को शुरू किया जाएगा।
देश में बुनियादी ढांचागत परियोजनाओं को मजबूती और तेजी से चलाने की दिशा में ऐसी परियोजनाओं को केंद्र सरकार के विभागों और संबन्धित मंत्रालयों द्वारा सार्वजनिक निजी परियोजनाओं यानि पीपीपी मॉडल पर क्रियान्वित किया जाना है। ऐसी परियोजनाओं के साथ-साथ केंद्र व राज्य सरकारों के विभागों की केन्द्रीय राशि कम पड़ने पर केंद्रीय सहायता वाली पीपीपी परियोजनाओं को भी संस्थागत व्यवस्थाओं द्वारा मंजूरी दी गई है। पीपीपीएसी और ईसी के 9672.12 करोड़ रुपये की अनुमानित परियोजना लागत वाली 6 सड़क परियोजनाओं और एक बंदरगाह क्षेत्र परियोजना को केंद्र सरकार की मंजूरी मिल गई है। इस प्रस्ताव में 4 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं भी शामिल हैं, जिनमें से एक-एक परियोजना महाराष्ट्र एवं हिमाचल प्रदेश में और दो परियोजनाएं उत्तर प्रदेश में हैं। सरकार ने जिस बंदरगाह क्षेत्र परियोजना को मंजूरी दी है, वह गोवा राज्य के लिए प्रस्तावित है।
बिजली-खाद क्षेत्रों में नहीं होगी कोयले की नीलामी
केंद्र सरकार ने देश में आर्थिक विकास की गतिविधियों को तेज करने के लिए बिजली और खाद को छोड़कर अन्य सभी क्षेत्रों में भी उत्पादन का स्तर बढ़ाने के लिए कोयले की आपूर्ति नीलामी के जरिए करने का निर्णय लिया है। कैबिनेट की आर्थिक मामलों की समिति की बैठक में इसकी मंजूरी दी गई। कोयला मंत्री पीयूष गोयल ने यह जानकारी देते हुए बताया कि सीमेंट, अस्पताल, स्पंज लौह, एल्यूमिनियम और अन्य क्षेत्रों के लिए अब पारदर्शी तरीके से कोयले की आपूर्ति करने के लिए यह फैसला लिया गया है। उनका कहना था कि बिजली और यूरिया क्षेत्र के लिए कोयले की आपूर्ति के लिए इस प्रक्रिया का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।
04Feb-2016

बुधवार, 3 फ़रवरी 2016

‘नमामि गंगे’ मिशन में रोड़ा बने स्लॉटर हाउस!

ऐसे कैसे पूरा होगा उमा का ड्रीम प्रोजेक्ट
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना में ‘नमामि गंगे’ मिशन को हालांकि सरकार तेजी से आगे बढ़ाने के लिए पूरे दमखम के साथ जुटी हुई है, जिसमें उन्होंने गंगा और अन्य नदियों में औद्योगिक ईकाईयों, शहरों और कस्बों के अलावा गांवों से पड़ने वाले गंदे नालों की रोकथाम पर ठोस कदम उठाए हैं। इसके बावजूद खासकर यूपी में कई जिलों में संचालित स्लॉटर हाउस केंद्रीय जल संसाधन मंत्री के इस ड्रीम प्रोजेक्ट का रोड़ा बने हुए हैं।
केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री सुश्री उमा भारती ने नमामि गंगे मिशन को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए उन सभी राज्यों की सरकारों, नगर निगमो, नगर पालिकाओं, नगर पंचायतों के अलावा हाल ही में ग्राम प्रधानों व सरपंचों के साथ भी विचार विमर्श कर आबादी से नालों के जरिए नदियों में गिरने वाले गंदे पानी को रोकने की योजना को अंजाम दिया है। केंद्र सरकार द्वारा गंगा व सहायक नदियों को प्रदूषण मुक्त करने के भरे जा रहे दम के तहत नमामि गंगे कार्यक्रम में रोड़ा बने स्लॉटर हाउस यानि कतल खाने एक चुनौतीपूर्ण समस्या बनी हुई है। जल संसाधन मंत्रालय के अनुसार खासकर यूपी में केंद्र सरकार ने यूपी सरकार से इन पर शिकंजा कसने के लिए उचित कार्रवाही करने का भी अनुरोध किया है।
पशुओ के अवैध कटान की चुनौती
दरअसल उत्तर प्रदेश में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनुमति से केवल आठ स्लॉटर हाउस ही वैध हैं, जिन्हें प्रदूषित जल, मल और पशुओं के कचरे को नदियों में जाने से रोकने की सख्त हिदायत है। सूत्रों के अनुसार इन वैध स्लॉटर हाउस के अलावा इनसे कई गुणा अवैध तरीके से पशुओं के कटान के लिए ठिकाने बने हुए हैं, जिसके कारण बड़ी संख्या में काटे जा रहे जानवरों से जल प्रदूषण की समस्या तो गहरा रही ही है, वहीं जानवरों की हड़ियां एवं अन्य दुर्गन्धयुक्त कचरे को बनाई गई भट्टियों में जलाने से वायु प्रदूषण को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
केंद्र सरकार के लिए चुनौती
केंद्र सरकार के लिए नमामि गंगे मिशन में ऐसे स्लॉटर हाउसों का संचालन बड़ी चुनौती बना हुआ है। खासकर पशु कटान के लिए बनाए गये अवैध ठिकानों से बड़े पैमाने पर हो रहे भूजल के दोहन भी जल संसाधन मंत्रालय की अन्य योजनाओं के लिहाज से भी चिंताजनक है। सूत्रों के अनुसार यही नहीं स्लॉटर हाउस से खून तथा जानवरों के अवशेष वाले दूषित पानी सीधे नालों में बहाया जा रहा है। यह भी चिंताजनक पहलू है कि अवैध स्लॉटर हाउसों को संचालित करने वालों ने ऐसे गंदे और प्रदूषित पानी की निकासी के लिए नालों का प्रवाह नदियों की और कर रखा है, जिसके जरिए गंगा-यमुना जैसी नदियां प्रदूषण और गंदगी से मैली हो रही हैं।

मंगलवार, 2 फ़रवरी 2016

खेलों से तैयार होगा सोनोवाल का सियासी मैदान!


पीएम मोदी पांच फरवरी करेंगे दक्षिण एशियाई खेलों उद्घाटन
ओ.पी. पाल
. नई दिल्ली।
असम में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले गुहावटी में शुरू हो रहे 12वें दक्षिण एशियाई खेल राज्य में भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री के उम्मीदवार सर्वानंद सोनोवाल के लिए सियासी जमीन की तैयार करने की नींव साबित हो सकते हैं। सोनोवाल के नेतृत्व में हो रहे इन खेलों का शुभारंभ पांच फरवरी को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी करेंगे।
पूर्वोत्तर राज्यों में विकास और अन्य गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में केंद्र सरकार की योजनाओं के तहत ही पांच फरवरी से असम और मेघालय में 12वें दक्षिण एशियाई खेलों का आयोजन किया गया है। भारत के इन खेलों की मेजबानी करने से जहां केंद्र की मोदी सरकार दक्षिण एशियाई देशों को खेल कूटनीति के जरिए अपने बेहद निकट लाने का प्रयास कर रही है। वहीं पूर्वोत्तर में केंद्र सरकार का नेतृत्व कर रही भाजपा भी अपनी सियासी जमीन तलाश रही है। असम में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं जिन्हें देखते हुए रानीतिक दृष्टि से केंद्री खेल मंत्री सर्बानंद सोनोवाल को असम राज्य में भाजपा प्रमुख और फिर हाल ही में पुन: राष्ट्रीय अध्यक्ष बने अमित शाह ने सोनोवाल को असम के आगामी विधानसभा चुनाव में सोनोवाल को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार भी घोषित कर दिया है। ऐसे में दक्षिण एशियाई खेल सोनोवाल के लिए सियासी जमीन का टेÑक तैयार करने में भी सहायक साबित हो सकते हैं। इसके लिए पांच से 16 फरवरी तक होने वाले दक्षिण एशियाई खेलों की कामयाबी के लिए सभी तैयारियां दुरस्त कर दी गई हैं। यानि इन खेलों से केंद्रीय खेल मंत्री सोनोवाल की प्रतिष्ठा भी जुड़ी हुई है।
दोनो हाथों में लड्डू
दरअसल असम में पहली बार भाजपा सत्ता के संग्राम के लिए मैदान में है, जिसके लिए गठबंधन करने की रणनीति भी चलाई जा रही है। उसी का नतीजा है कि कांग्रेस के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के सामने भाजपा ने सर्बानंद सोनोवाल को पूरी तरह लाकर अपनी तस्वीर भी साफ कर दी है। राजनीतिकारों का मानना है कि इन अंतर्राष्टÑीय खेलों में केंद्रीय खेल मंत्री सोनोवाल चुनाव मैदान में उतरने से पहले खेल के मैदान से एक कुशल और सफल प्रशासक साबित होने की जुगत में हैं। दिलचस्प पहलू यह है कि सोनोवाल भाजपा की असम ईकाई के अध्यक्ष होने के साथ मुख्यमंत्री के दावेदार भी घोषित हो गये हैं, वहीं दक्षिण एशियाई खेल भी उन्हीं के नेतृत्व में हो रहे हैं, जो उनकी सियासत का माध्यम भी साबित होगा। सूत्रों के अनुसार असम चुनाव की सियासत के लिहाज से सार्क देशों के खलों के लिए बनी समिति के अध्यक्ष भी स्वयं सोनोवाल ही हैं जिसके नाते उनहोंने भारतीय प्रदर्शन को भी बेहतर बनाने की दिशा में पहले ही खेल संघों को सतर्क कर दिया है।

रविवार, 31 जनवरी 2016

‘नमामि गंगे’ पर बेहतर बनेगा रोड़ मैप!

गंगा संरक्षण में तय हुई ग्राम प्रधानों की जिम्मेदारी
ओ.पी. पाल.
नई दिल्ली।
मोदी सरकार की महत्वाकांक्षणी ‘नमामि गंगे’ मिशन में शहरी सीवरों और औद्योगिक इकाईयों के बाद अब गांवों के नालों का गंदा पानी सीधे नदियों में गिरने से रोकने की कवायद शुरू की गई है। मसलन केंद्र सरकार इस आधार पर एक रोडमैप तैयार करके इस मिशन को तेजी से आगे बढ़ाऐगी।
केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा सरंक्षण मंत्री सुश्री उमा भारती गंगा और सहायक नदियों को स्वच्छ और प्रदूषणमुक्त बनाने वाली महत्वाकांक्षी योजना ‘नमामि गंगे’ को तेजी से आगे बढ़ाने का संकल्प किया है। इसके लिए उन्होंने पहले ही शहरी क्षेत्रों और औद्योगिक ईकाईयों से निकलने वाले गंदे पानी को रोकने के लिए केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड, नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों की भागीदारी से योजना को अंजाम दे दिया है। चूंकि नदियों के किनारे बसे गावों और बस्तियों से गंदे पानी की निकासी के लिए नाले सीधे नदियों मेंं गिर रहे हैं। इसलिए गांवों के नालों के इस गंदे पानी को सीधे नदियों में गिरने से रोकने की दिशा में सरकार ने कई मंत्रालयों के सहयोग से यूपी, उत्तराखंड, बिहार और झारखंड आदि राज्यों के ऐसे चिन्हित गांवों के ग्राम प्रधानों और सरपंचों की भी इस मिशन में सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए 1600 ग्राम प्रधानों व सरपंचों के लिए राष्ट्रीय स्तर के एक ‘स्वच्छ गंगा और ग्रामीण सहभागिता’ सम्मेलन बुलाया गया, जिसमें गांवों के गंदे पानी को नदियों में सीधे गिरने से रोकने की दिशा में उनकी सहभागिता
तय की गई।
नालों की रोकथाम का काम शुरू
ग्रामीण क्षेत्रों से नदी में गिरने वाले नालों की रोकथाम का काम केंद्र सरकार के कुछ सार्वजनिक उपक्रमों के सुपुर्द कर दिया है। इन उपक्रमों ने फील्ड सर्वेक्षण का कार्य भी शुरू कर दिया है एवं सर्वेक्षण पूरा होने के बाद इस दिशा में कार्य शुरू हो जाएगा। उन्होने कहा कि नालों के लिए हम इस प्रकार की योजना बना रहे हैं कि इनके गंदे पानी को जैविक रूप या अन्य तकनीक से शुद्ध कर इसका खेती तथा जब खेती में आवश्यकता न हो तब वाटर रिचार्जिगं में उपयोग किया जा सके।
शौचालय निर्माण पर 263 करोड़ जारी
जल संसाधन मंत्रालय के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालयों के निर्माण के लिए केंद्र सरकार ने इस वित्त वर्ष में उनके मंत्रालय द्वारा पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय को 263 करोड़ रूपए मुहैया कराया गया है। ताकि ग्रामीण क्षेत्र में घरों के अलावा सार्वजनिक शौचालयों के निर्माण की सुनिश्चितता तय की जा सके। खात बात यह है कि ग्रामीणों की सहभागिता के लिए बुलाए गये सम्मेलन में उमा भारती समेत कई वक्ताओं ने इस बात पर चिंता जताई कि ग्रामों में शौचालयों का निर्माण होने के बावजूद उनका उपयोग कम हो रहा है,इसलिए इसके लिए जागरूकता फैलाने की जिम्मेदारी भी सरपंचों व ग्राम प्रधानों को निभाने का आग्रह किया गया है।

शनिवार, 30 जनवरी 2016

बीस स्मार्ट शहरों पर खर्च होंगे 51 हजार करोड़!



मध्य प्रदेश के तीन शहरों पर 12539 करोड़ रुपये खर्च करेगी सरकार
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
केंद्र सरकार द्वारा पहले चरण में जिन बीस शहरों को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने का ऐलान किया है, उन्हें विकसित करने के लिए 50845.20 करोड़ खर्च किया जाएगा। इस अनुमानित कुल खर्च में 12539 करोड़ अकेले मध्य प्रदेश के जबलपुर, इंदौर और भोपाल शहरों पर खर्च होगा।
केंद्र सरकार ने पहले चरण के लिए एक दिन पहले ही 12 राज्यों के बीस शहरों को स्मार्ट शहरों के रूप में विकसित करने का ऐलान किया है। इन बीस शहरों पर केंद्र सरकार ने पांच साल में 50,845.20 करोड़ रुपए खर्च करेगी। इनमें 38,657.10 करोड़ शहरी क्षेत्र के विकास और 12188.10 करोड़ रुपये की रकम इन शहरों में बुनियादी सुविधाओं समेत करीब पांच दर्जन मद्दों में सुविधाएं मुहैया कराने पर खर्च किया जाएगा। मसलन केंद्र सरकार इन शहरों में पानी और बिजली आपूर्ति, सफाई और ठोस कचरा प्रबंधन, समुचित शहरी आवागमन और सार्वजनिक परिवहन, आईटी कनेक्टीविटी, ई-गवर्नेंस के माध्यम, बुनियादी सुविधाएं और नागरिक सहभागिता विकसित करने की योजना पर काम कर रही है।
मध्य प्रदेश के स्मार्ट सिटी का खर्च
पहले चरण में 20 शहरों को स्मार्ट शहरों के रूप में विकसित करने के लिए पांच साल तक खर्च की कुल अनुमानित राशि में से अकेले 12539 करोड़ की राशि मध्य प्रदेश के र्स्माट शहरों जबलपुर, इंदौर और भोपाल के विकास पर खर्च की जाएगी। केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के अनुसार जबलपुर को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने के लिए कुल 2290 करोड़ रुपये की लागत का अनुमान लगाया गया है, जिसमें 1751 करोड़ से 590 एकड़ क्षेत्र के विकास और 539 करोड़ रुपये शहरी बुनियादी सुविधााओं पर खर्च होंगे। इसी प्रकार इंदौर में खर्च होने वाली 5099.60 करोड़ की राशि में से 4468.76 करोड़ रुपये 742 एकड़ ऐतिहासिक क्षेत्र को विकसित करने और 388 करोड़ की राशि शहरी समस्याओं के समाधान पर खर्च होने हैं। जब कि राज्य की राजधानी भोपाल को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए 3440.90 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। इस राशि में से शहर में ही 350 एकड़ सरकारी भूमि क्षेत्र को विकसित करने के लिए 2565.20 करोड़ तथा 875.70 करोड़ शहर की जनता की बुनियादी सुविधाओं को सुनिश्चित करने पर खर्च किये जाएंगे।

भारत-पाक सीमा ऐसा होगा सुरक्षा अलर्ट!


शुरू हुई कंटीली बाड़बंदी में घंटियां लगाने की कार्यवाही
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
पाकिस्तान की ओर से भारत-पाक सीमाओं के जरिए ना-पाक हरकतों यानि घुसपैठ को पूरी तरह से खत्म करने की योजना पर काम कर रही केंद्र सरकार ने एक और कदम उठाया है। मसलन पठानकोट एयरबेस पर आतंकी हमले के बाद भारत-पाक सीमा पर जहां सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी कैमरों और तेज लाईटिंग और नदी क्षेत्र में लेजर दीवारों का निर्माण करने की योजना बनाई है, वहीं इसी योजना के तहत सीमाओं पर सुरक्षा अलर्ट के लिए कंटील बाडबंदी में घंटियां लगाने की योजना शुरू कर दी है।
गृहमंत्रालय के अनुसार भारत-पाक अंतर्राष्टÑीय सीमा पर कंटीली तारो से की गई बाडबंदी में सुरक्षा अलर्ट के लिए घंटियां लगाने का काम शुरू कर दिया गया है। दरअसल ये घंटियां बाड़बंदी से किसी भी तरह की छेड़छाड़ होने अथवा घुसपैठ का प्रयास होने पर बजने लगती हैं और सीमाओं की निगरानी में तैनात सुरक्षा बल सतर्क हो जाते हैं। इस व्यवस्था को फिर से अन्य अत्याधुनिक इंतजामों के साथ फिर बहाल करने का फैसला किया गया है। सूत्रों के अनुसार गुजरात राज्य से लगी पाक सीमा पर श्रीगंगानगर सेक्टर में कंटीली बाडबंदी में छोटी-छोटी घंटियां लगाने का काम शुरू कर दिया गया है। देश की पश्चिम सीमा से लगते इस अंतर्राष्टÑीय सीमा पर बाडबंदी की सुरक्षा कतार को और मजबूत करने के इरादे से इन घंटियों की खनखनाहट से सुरक्षा बलों को सतर्क होने के लिए बेहतर सुरक्षा अलर्ट माना गया है।

गुरुवार, 28 जनवरी 2016

ये नई पद्धति बढ़ाएगी सड़क परियोजनाओं की रफ़्तार!

उच्च मार्ग परियोजना के मिश्रित वार्षिक खर्च को मिली मंजूरी
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
देश में सड़कों के जाल से पाटने की कवायद में जुटी मोदी सरकार ने चलाई जा रही सड़क परियोजनाओं को तेजी से कार्यान्वित करने की दिशा में एक और कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने उच्च मार्ग परियोजनाओं को समय सीमा में पूरा करने की दिशा में नई पद्धति के रूप में मिश्रित वार्षिक खर्च को मंजूरी दे दी है।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार उच्च मार्ग परियोजनाओं के कार्यान्वयन के निष्पादन के उपायों में मिश्रित वार्षिक खर्च वाली नई पद्धति को लागू करना एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। इस पद्धति की मंजूरी का मंत्रालय को सड़क निर्माण की गति बढ़ाने के लिए इंतजार था। बुधवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने मिश्रित वार्षिक खर्च को मंजूरी देकर उच्च सड़क मार्ग परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने की राह को आसान कर दिया है। दरअसल सड़क परियोजनाओं का ऐसा नमूना बॉट यानि पथकर पद्धति के नजरिये से व्यावहारिक नहीं रह गया था। इसलिए सरकार इस नई पद्धति में सरकार द्वारा मुहैया वित्तीय संसाधनों के भीतर किलोमीटर के आधार पर अधिकतम क्रियान्वित करने के लिए प्रभावी बनाने का फैसला किया है। इसका प्रमुख मकसद उच्च मार्ग संबंधी परियोजनाओं में बेहतर ढंग से लागू करना है। मंत्रालय के अनुसार सड़क परियोजनाओं को पूरा करने वाली पद्धति के रूप में इस मॉडल को स्वीकार करने से सार्वजनिक और निजी भागीदारी की व्यवस्था वाले सभी महत्वपूर्ण हिस्सेदारों में शामिल प्राधिकरण, कर्जदाता और डेवलपर्स, छूट पाने वाले उच्च मार्ग परियोजनाओं में निजी डेवलपर्स व निवेशकों को प्रोत्साहन मिल सकेगा। वहीं इस नई व्यवस्था के जरिए सड़क निर्माण क्षेत्र पुनरुत्थान से बेहतर परिणाम भी मिलेंगे और ये संबंधित परियोजना के माध्यम से नागरिकों और पर्यटकों को सहूलियत भी दी जा सकेगी। सड़क परियोजनाओं के जरिए देश को सड़क संपर्क मार्ग कसे जोड़ने की योजना में बढ़ोतरी होने के साथ आर्थिक गतिविधियां भी तेजी से बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि सड़क सम्पर्क में सुधार की जरूरत को देखते हुए केंद्र सरकार ने अपने अधीन कार्यरत इंजीनियरिंग जैसी भारतीय राष्ट्रीय उच्च मार्ग प्राधिकरण आदि एजेंसियों को क्रय और निर्माण के कार्यों में सार्वजनिक कोष से बढ़-चढ़कर सम्पन्न करने की नीति अपनाई गई है।