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शुक्रवार, 26 फ़रवरी 2016

रेलवे ऐसे बढ़ाएगी अपनी की आमदनी

रोजगार के अवसर बढ़ाने में भी मिलेगी मदद
नई दिल्ली
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रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने इस बार बजट 2016 में यात्री और मालभाड़े में कोई इजाफा करने के बजाए रेलवे कमाई अन्य दूसरे स्रोतों से करने की योजना बनाई है। मसलन जमीन को मोनेटाइज करना, खाली जमीनों का कमर्शियल यूज, विज्ञापन आदि के जरिए बढ़ाने पर फोकस किया है। इसमें रेलवे की योजना रोजगार सृजन करने की भी योजना है।
संसद में प्रभु ने रेल बजट 2016-17 को पेश करते हुए कहा कि मौजूदा रेवेन्यू को अगले पांचसाल के दौरान 10 फीसदी बढ़ाने का ऐलानप किया है। जबकि जमीन का मोनेटाइजिंग करते हुए रेलवे के आसपास बड़े पैमाने पर खाली पड़ी जमीन को लीज पर देने ताकि हॉटिकल्चर और पौधों के प्लांटेशन को प्रोत्साहन दिया जाए। रेलवे का मानना है कि इससे पिछड़े बेरोजगारी की समस्या से जूझ रहे लोगों को रोजगार भी मिल सकेगा। इतना ही नहीं इससे फूड सिक्योरिटी को बढ़ावा मिलेगा और जमीन और जमीन कब्जे पर रोक लगेगी। अगले तीन महीनों के दौरान कम से कम 20 स्टेशनों में रेवेन्यू की संभावनाएं तलाशकर कमाई बढ़ाने का एक मॉडल तैयार किया जाएगा।
खाली जमीनों का यूज स्टेशन रीडेवलपमेंट के लिए एक प्रोग्राम शुरू किया जाएगा। रेलवे की खाली पड़ी जमीन का कमर्शियल यूज तलाशा जाएगा। इसके अलावा, स्टेशन बिल्डिंग और स्टेशन के बाहर की जमीनों का कमर्शियल यूज किया जाएगा। सर्विसेज से बढ़ाएंगे कमाई रेलवे पैसेंजर की प्राथमिकता, टिकटिंग,कमोडिटी, ट्रेन रनिंग पर विभिन्न सर्विसेज और आॅपरेशन पर डाटा कलेक्ट कर रेवेन्यू बढ़ाने का मॉडल तैयार करेगी। इसके अलावा रेलवे ई-कॉमर्स की फैसिलटी भी देना शुरू करेगी, जिससे रेलवे की कमाई बढ़ेगी। इतना ही नहीं, आईआरटीसी पैसेंजर की प्राथमिकता के आधार पर फूड सर्विसेज भी देगी। मैन्युफैक्चरिंग एक्टिविटी से 2020 तक मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों से 4 हजार करोड़ करोड़ रुपए का रेवेन्यु हासिल करने के लिए कमाई करने की योजना है। इसके लिए अपनी यूनिट्स को सशक्त बनाते हुए इंसेंटिव्स दिए जाएंगे। इसके अलावा डोमेस्टिक और इंटरनेशनल की बड़ी कंपनियों के जरिए बेहतर मैन्युफैक्चरिंग और उत्पादन बढ़ाने पर फोकस करने पर बल रहेगा।

दिल्ली को मिली रिंग रेल की सौगात
सड़क परियोजना के बाद रेलवे बनेगा वरदान
नई दिल्ली।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के यातायात को आसान बनाने के लिए जहां केंद्र सरकार ने कई सड़क योजनाओं को शुरू कराया है, वहीं मेट्रो के बोझ को कम करने के लिए रिंग रेल नेटवर्क बनाने का ऐलान करके दिल्लीवासियों को बड़ी सौगात दी है।
लोकसभा में गुरुवार को रेल बजट के भाषण के दौरान रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने दिल्ली को यह एक बड़ी सौगात देते हुए रिंग रेल नेटवर्क बनाने की योजना का ऐलान किया है। केंद्र सरकार का यह निर्णय राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के यातायात को नियंत्रण करने और प्रदूषण की समस्या से निपटने की दिशा में लिया गया है। मसलन दिल्ली में ज्यादातर जनता मेट्रो नेटवर्क के सहारा ले रही है, रेलवे की इस घोषणा से मेट्रो पर क्षमता से ज्यादा बढ़ रहे बोझ से भी राहत मिल सकेगी। वहीं दिल्ली से बाहर से दिल्ली से होकर एक दूसरे राज्य में जाने वाले वाहनों को बिना दिल्ली में घुसे एक-दूसरे राज्य में जाने की व्यवस्था पहले ही कर दी गई है, जिसके लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पांच नवंबर को फरीदाबाद, गाजियाबाद, बागपत से होते हुए सोनीपत तक बाहरी राजमार्ग की नींव रख चुके हैं। दूसरे दिल्ली में यातायात और प्रदूषण की विकराल होती समस्या के कारण दिल्ली सरकार को आॅड-ईवन फॉम्यूर्ले का सहारा लेना पड़ रहा है। ऐसी समस्या को देखते हुए रेलवे ने दिल्ली वालों को एक सौगात के रूप में रेल बजट में रिंग रेल नेटवर्क योजना दिल्ली के लोगों के लिए एक वरदान साबित होगा, जो प्रदूषण के साथ ही जाम और मेट्रो की बढ़ती भीड़ को भी निजाद दिलाएगा। रेल बजट में की गई घोषणा के अनुसार दिल्ली के 21 स्थानीय स्टेशनों को रिंग रेल से आपस में जोड़ने की योजना है। हालांकि मौजूदा समय में भी दिल्ली में रिंग रेल नेटवर्क चलाया जा रहा है, लेकिन इसकी स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। दैनिक यात्रियों का कहना है कि इस रूट पर ईएमयू बहुत कम हैं और जो हैं भी वह बहुत देरी से चलती हैं। रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने इसी नेटवर्क को बेहतर बनाने के लिए 4 महीने का समय मांगा है और इसके लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के तहत विकसित करने की बात कही है।
इन स्टेशनों को जोड़ने की योजना
रेलमंत्री सुरेश प्रभु के अनुसार करीब 36 किलोमीटर लंबे इस रिंग रेल नेटवर्क के तहत 21 स्टेशनों को शामिल किया जाएगा। यह नेटवर्क स्थानीय परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ पर्यावरण को प्रदूषण मुक्त रखने में भी मददगार होगा। यह रिंग रेल नेटवर्क हजरत निजामुद्दीन स्टेशन से शुरू होकर लाजपत नगर, सेवा नगर, लोधी कॉलोनी, सरोजनी नगर, चाणक्यपुरी, सफदरजंग,सरदार पटेल मार्ग, बराड़ स्क्वैयर, इंद्रपुरी हाल्ट, नारायणा विहार, कीर्ति नगर, पटेल नगर, दया बस्ती, विवेकानंदपुरी, किशनगंज, सदर बाजार, शिवाजी ब्रिज और प्रगति मैदान होते हुए दोबारा हजरत निजामुद्दीन स्टेशन पर खत्म होता है। फिलहाल इस नेटवर्क पर एक चक्कर पूरा करने में लगभग 90 मिनट का समय लगता है।
26Feb-2016

अब सहायक कहना जनाब, कुली नहीं!

प्रभु ने सम्मान में बदला 200 साल पुराना शब्द 'कुली'
नई दिल्ली
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आखिरकार रेलवे ने रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों के सामान को ढ़ोने वाले कुलियों को सम्मान देकर अंगे्रजी हकूमत की 200 साल से जारी परंपरा को खत्म करने का ऐलान कर दिया। मसलन अब रेलवे स्टेशन पर कुली शब्द सुनाई नहीं देगा।
लोकसभा में गुरुवार को पेश किये गये रेल बजट में रेल मंत्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने रेलस्टेशन पर यात्रियों के सामान को ट्रेनों में चढ़ाने र उताकर कर ढोने वाले कुलियों को सम्मान देते हुए उनके ‘कुली’ के स्थान पर ‘सहायक’ पद का दर्जा देने का ऐलान किया है। यही नहीं रेलवे ने उनके शब्द में बदलाव नहीं किया, बल्कि उनकी वर्दी बदलने का भी फैसला किया है। अब रेलवे स्टेशनों पर कुलियों को सहायक कहकर पुकारा जाएगा। रेल बजट में प्रभु ने कहा कि कुली का काम करने वाले सहायकों को एक विशेष तरह
का प्रशिक्षण देने और उन्हें सामूहिक बीमा सुविधाएं देने के लिए संभावनाओं को तलाशने की भी घोषणा की है। बजट पेश करते हुए रेलमंत्री ने कहा कि इसका मकसद रेलवे की छवि सुधारने के तहत कुलियों को यात्रियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करने के लिए प्रोत्साहित करना है, जिसके लिए उन्हें समुचित प्रशिक्षण देने की व्यवस्था भी की जाएगी। गौरतलब है कि रेलवे के इतिहास में ब्रिटिश शासनकाल के दौरान वर्ष 1807 में यूरोपियन देशों में ‘कुली’ शब्द की शुरूआत हुई थी, जो अंग्रेजों के साथ भारत आया। भारत में कुली शब्द को उर्दू की जुबान माना जाता है।

मंगलवार, 23 फ़रवरी 2016

वार रूम बना वित्त मंत्रालय: सुरक्षा चाकचौबंद

अंतिम चरण की तैयारी आम बजट
 नई दिल्ली
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संसद के बजट सत्र में 29 फरवरी को वित्त मंत्री आम बजट पेश करेंगे। बजट की तैयारी अंतिम चरण में पहुंचते ही उलटी गिनती शुरू हो चुकी है, जिसके लिए नॉर्थ ब्लाक स्थित वित्त मंत्रालय कड़ी सुरक्षा और खुफिया तंत्र की निगरानी में वार रूम बना हुआ है।
नॉर्थ ब्लॉक स्थित वित्त मंत्रालय में शुक्रवार को बजट दस्तावेज की छपाई प्रक्रिया शुरू हो गई थी। इस बजट दस्तावेज की गोपनीयता बजट पेश होने तक रखना परंपरागत नियम है। बजट दस्तावेज की छपाई प्रक्रिया में मंत्रालय के एक सौ अधिकारी व कर्मचारी ही छपाई खाने में होते हैं, जिन्हें किसी भी व्यक्ति, यहां तक परिजन से मिलने की भी इजाजत नहीं होती। आम बजट में सरकार की रणनीतियों की गोपनीयता को कायम रखने के मकसद से ही वित्त मंत्रालय कड़ी सुरक्षा घेरे में हैं जहां आईबी यानि खुफिया की भी नजरे लगी हुई है, ताकि बजट की गोपनीयता कायम रखी जाए।
ऐसी होती है नार्थ ब्लाक की सुरक्षा
नॉर्थ ब्लॉक स्थित वित्त मंत्रालय के क्षेत्र की सुरक्षा में खुफिया विभाग (आईबी), दिल्ली पुलिस और सीआईएसएफ आदि सुरक्षा बल लगे हुए हैं। आमतौर पर बजट की तैयारी में लगी नार्थ ब्लाक के संबंधित हिस्से में जनवरी के शुरू से ही पत्रकारों और आम जनता का प्रवेश बंद कर दिया जाता है। वहीं नार्थ ब्लाक में आने वाली और यहां से बाहर जाने वाली हर चीज को विशेष एक्स-रे स्कैन से गुजार कर उस पर पैनी नजर रखी जाता है। वहीं शक्तिशाली मोबाइल फोन जैमर यंत्र लगा दिये जाते हैं, ताकि मोबाइल फोन काल से किसी सूचना को बाहर न किया जा सके। वरिष्ठ अधिकारियों व प्रक्रिया में शामिल कर्मचारियों के कार्यालयों में इंटरनेट कनेक्शन बंद कर दिए जाते हैं और नार्थ ब्लाक की बजट शाखा एक वार-रूम की तरह काम करने लगती है। लोकसभा में बजट पेश होने तक नार्थ ब्लाक में सुरक्षा के उच्चतम स्तर के उपाय लागू रहते हैं।
क्या है नीला जैकेट
इन सभी दस्तावेजों की सुरक्षा एक ‘नीला जैकेट’ करता है। इसे नीला जैकेट इसलिए भी कहते हैं क्योंकि इसमें बजट के लिए महत्वपूर्ण संख्या होते हैं। मंत्रालय का संयुक्त सचिव बजट इसका प्रभारी होता है और वह किसी को भी यहां तक कि वित्त मंत्री को भी इसे नार्थ ब्लाक से बाहर ले जाने नहीं देता। बजट बनाने की संपूर्ण प्रक्रिया के दौरान मंत्रालय के कुछ ही अधिकारी इस दस्तावेज को देख पाते हैं। वित्त मंत्री का भाषण, बजट पेश होने से कुछ घंटे पहले ही तैयार किया जाता है। इस बार का बजट इस लिहाज से अहम है कि जेटली को वृद्धि दर में तेजी लानी है और देश में कम निवेश को लेकर आ रही समस्याओं का समाधान करना है। उन्हीं पर राजकोषीय घाटा और राजस्व घाटे पर भी नियंत्रण करने की जिम्मेदारी है।
पहली बार अनुमान
हालांकि बजट की तैयारियों लगे नार्थ ब्लाक (वित्त मंत्रालय) में परंपरागत गोपनीयता बरती जा रही है, लेकिन इस साल ऐसा पहला मौका है, जब वित्त मंत्रालय में सचिवों ने आम बजट 2016-17 की दिशा का संकेत देने के लिए यूट्यूब का सहारा लिया है। अपने खुद के यूट्यूब चैनल का उपयोग करते हुए मंत्रालय ने बजट का महत्व दशार्या हैं। मंत्रालय ने बजट को प्रस्तुत करने के लिए वित्त मंत्री द्वारा बजट पत्रों को चमड़े के एक ब्रीफकेस में ले जाने की परिपाटी को भी प्रदर्शित किया है।
23Feb-2016

जीएसटी जैसे मुद्दों पर भारी पड़ेगा जेएनयू प्रकरण!

सर्वदलीय बैठक: नरम नहीं पड़े विपक्षी दलों के तेवर
 नई दिल्ली
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राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के अभिभाषण के साथ मंगलवार से शुरू हो रहे संसद के बजट सत्र में जहां सरकार जीएसटी और रियल एस्टेट जैसे विधेयकों को पारित कराने पर जोर दे रही है, वहीं विपक्षी दल जेएनयू और हैदराबाद यूनिवर्सिटी में छात्र की आत्महत्या तथा जाट आरक्षण के मुद्दे को जोरशोर से उठाने का राग अलाप रहे हैं। हालांकि सरकार ने इन मुद्दों पर चर्चा कराने का भरोसा दिया है, लेकिन इसके बावजूद इस सत्र की शुरूआत हंगामेदार होने के आसार बने हुए हैं।
सरकार की ओर से सोमवार को संसद भवन में संसदीय कार्यमंत्री एम. वेंकैया नायडू ने सर्वदलीय बैठक में मंगलवार से शुरू हो रहे संसद के बजट सत्र को सुचारू रूप से चलाने में विपक्षी दलों से सहयोग की अपील की है। विपक्षी दलों की मांग पर सरकार ने विपक्ष को भरोसा दिया है कि वह जेएनयू और हैदराबाद यूनिवर्सिटी में छात्र की आत्महत्या तथा जाट आरक्षण जैसे सभी मुद्दों पर संसद में चर्चा कराने को तैयार है। वहीं सर्वदलीय बैठक में सरकार ने विपक्षी दलों से जीएसटी और रियल एस्टेट जैसे देश के लिए महत्वपूर्ण विधायी कार्यो में सहयोग करने और सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने में सहयोग मांगा है। बैठक में सरकार और विपक्ष के विचार विमर्श के बावजूद संसद का बजट सत्र की शुरूआत हंगामेदार होने के आसार हैं। वहीं सरकार के लिए राज्य सभा में प्रमुख विधेयकों को पारित कराने की चुनौती है जिसके लिए सरकार को विपक्ष के समर्थन की दरकार है।
बजट सत्र में 32 विधेयक
सर्वदलीय बैठक के बाद एम. वेंकैया नायडू ने कहा कि संसद के बजट सत्र के दौरान सरकार जीएसटी विधेयक, रियल एस्टेट विधेयक, दिवालिया संबंधी विधेयक, आंतरिक जलमार्ग विधेयक, भारत-बांग्लादेश भूमि सीमा समझौता के बाद लोगों को मताधिकार देने से संबंधित निर्वाचन विधेयक को आगे बढ़ाने का प्रयास करेगी। इस सत्र में इन महत्वपूर्ण और आर्थिक सुधारों संबन्धी विधेयकों समेत एजेंडे में 32 विधायी कार्य शामिल हैं। सरकार का प्रयास है कि इन महत्वपूर्ण कार्यो में विपक्ष सकारात्मक भूमिका निभाते हुए सहयोग दें। उन्होंने कहा कि एजेंडे में शामिल विधेयकों के अलावा उन सभी उन मुद्दों पर भी नियमानुसार चर्चा की जाएगी, जिन्हें विपक्ष उठाना चाहता है।
सरकार का बचाव
नायडू ने विपक्ष द्वारा जेएनयू और रोहित वेमुला मुद्दा उठाने की संभावना पर कहा कि सरकार का बचाव करते हुए कहा कि इन मामलों में कहीं भी कोई गलती नहीं की और वह सभी मुद्दों पर चर्चा कराने के पक्ष में है। नायडू ने कहा कि जेएनयू हो या हैदराबाद विश्वविद्यालय या कोई अन्य मुद्दा, सरकार को उन पर चर्चा कराने में कोई हिचक नहीं है। सरकार का मकसद है कि संसद में हंगामा न हो और सदन सुचारू रूप से चले ताकि देशहित के कार्यो का निपटान हो सके।
23Feb-2016

सोमवार, 22 फ़रवरी 2016

संसद में सरकार को घेरने को तैयार विपक्ष!

हंगामेदार शुरूआत सरकार की चुनौती
23 फरवरी को होगी संसद सत्र की शुरूआत
लोकसभा अध्यक्ष ने आज बुलाई सर्वदलीय बैठक
ओ.पी. पाल.
नई दिल्ली।
संसद का 23 फरवरी से शुरू हो रहा बजट सत्र सरकार की मुश्किलों का सबब बन सकता है। मसलन जेएनयू, जाट आरक्षण आंदोलन, हैदराबाद यूनिवर्सिटी में छात्र की आत्महत्या जैसे अनेक मुद्दों को लेकर संसद में सरकार की घेराबंदी करने के लिए लामबंद होता नजर आ रहा है। हालांकि सरकार भी विपक्ष के हमले का जवाब देने के लिए आक्रमक तेवरों के साथ संसद में आने के लिए पूरी रणनीति तैयार कर चुकी है। देश में ऐसे मुद्दों पर गरमाई सियासत के मद्देनजर संसद के बजट सत्र की शुरूआत हंगामेदार होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
मंगलवार को संसद के बजट सत्र की शुरूआत संयुक्त सदन की बैठक में राष्टÑपति प्रणब मुखर्जी के अभिभाषण से होगी। विपक्षी दलों के सरकार के खिलाफ आक्रमक तेवरों से अभिभाषण के दौरान भी हंगामा होने की संभावना बनी हुई है। हालांकि सरकार विपक्ष के हरेक मुद्दे पर चर्चा कराने का भरोसा दे चुकी है। वहीं एक दिन पहले राज्यसभा के सभापति हामिद अंसारी ने भी सर्वदलीय बैठक बुलाकर संसद के सत्र को सुचारू रूप से चलाने का आव्हान किया है। इन बैठकों में हालांकि सरकार को विपक्ष ने कुछ जरूरी बिलों पर समर्थन करने का भी वादा किया है, लेकिन कुछ पेचीदा मुद्दों पर विपक्ष सरकार से सहमत होने को तैयार नहीं है। सत्र शुरू होने से एक दिन पहले 22 फरवरी को इसी मकसद से लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने भी सर्वदलीय बैठक बुलाई है।
विपक्ष की आक्रमक रणनीति
प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस, वाम दलों, जद-यू, राजग और राकांपा जेएनयू विवाद तथा रोहित वेमुला की आत्महत्या के मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी कर चुके हैं। वहीं इन मुद्दों पर आक्रमक रणनीति में इन दलों द्वारा सरकार के खिलाफ अन्य दलों को भी अपने पाले में लाकर लामबंदी कर रहे हैं। इनके अलावा विपक्ष के पास सरकार को घेरने के लिए जाट आरक्षण आंदोलन, पठानकोट आतंकवादी हमला, अरुणाचल के राजनीतिक घटनाक्रम जैसे अनेक ऐसे मुद्दे है, जिनका जिक्र करते हुए विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा राज्यसभा के सभापति हामिद अंसारी द्वारा बुलाई गयी बैठकों में खुला ऐलान कर दिया है कि वे संसद में इन मुद्दों को जोर शोर से उठाएंगे और सरकार को जवाब देना होगा। इसके अलावा हाल में शेयर बाजारों में भारी उथल पुथल और डालर की तुलना में रुपए की कीमत में गिरावट के लिए भी विपक्ष मौजूदा सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराने में लगे हैं।

गुरुवार, 4 फ़रवरी 2016

पीपीपी मॉडल पर मजबूत होगा बुनियादी ढांचा


छह सड़क व एक बंदरगाह परियोजना को मंजूरी
नई दिल्ली
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केंद्र सरकार की आर्थिक मामलों के विभाग के सचिव की अध्यक्षता में सार्वजनिक निजी परियोजना आकलन समिति और उच्चाधिकार प्राप्त समिति की बैठक के प्रस्ताव को केंद्रीय कैबिनेट ने मंजूरी दी है। इस प्रस्ताव में 9672.12 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली छह सड़क परियोजनाओं और एक बंदरगाह क्षेत्र परियोजना को शुरू किया जाएगा।
देश में बुनियादी ढांचागत परियोजनाओं को मजबूती और तेजी से चलाने की दिशा में ऐसी परियोजनाओं को केंद्र सरकार के विभागों और संबन्धित मंत्रालयों द्वारा सार्वजनिक निजी परियोजनाओं यानि पीपीपी मॉडल पर क्रियान्वित किया जाना है। ऐसी परियोजनाओं के साथ-साथ केंद्र व राज्य सरकारों के विभागों की केन्द्रीय राशि कम पड़ने पर केंद्रीय सहायता वाली पीपीपी परियोजनाओं को भी संस्थागत व्यवस्थाओं द्वारा मंजूरी दी गई है। पीपीपीएसी और ईसी के 9672.12 करोड़ रुपये की अनुमानित परियोजना लागत वाली 6 सड़क परियोजनाओं और एक बंदरगाह क्षेत्र परियोजना को केंद्र सरकार की मंजूरी मिल गई है। इस प्रस्ताव में 4 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं भी शामिल हैं, जिनमें से एक-एक परियोजना महाराष्ट्र एवं हिमाचल प्रदेश में और दो परियोजनाएं उत्तर प्रदेश में हैं। सरकार ने जिस बंदरगाह क्षेत्र परियोजना को मंजूरी दी है, वह गोवा राज्य के लिए प्रस्तावित है।
बिजली-खाद क्षेत्रों में नहीं होगी कोयले की नीलामी
केंद्र सरकार ने देश में आर्थिक विकास की गतिविधियों को तेज करने के लिए बिजली और खाद को छोड़कर अन्य सभी क्षेत्रों में भी उत्पादन का स्तर बढ़ाने के लिए कोयले की आपूर्ति नीलामी के जरिए करने का निर्णय लिया है। कैबिनेट की आर्थिक मामलों की समिति की बैठक में इसकी मंजूरी दी गई। कोयला मंत्री पीयूष गोयल ने यह जानकारी देते हुए बताया कि सीमेंट, अस्पताल, स्पंज लौह, एल्यूमिनियम और अन्य क्षेत्रों के लिए अब पारदर्शी तरीके से कोयले की आपूर्ति करने के लिए यह फैसला लिया गया है। उनका कहना था कि बिजली और यूरिया क्षेत्र के लिए कोयले की आपूर्ति के लिए इस प्रक्रिया का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।
04Feb-2016

गुरुवार, 21 जनवरी 2016

पूर्वी बाहरी एक्सप्रेसवे पर शुरू हुआ निर्माण कार्य

परियोजना को चार सौ दिन में पूरा करने का लक्ष्य
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के चारों ओर इस्टर्न पैरीफेरल एक्सप्रेस वे और वेस्टर्न पैरीफेरल एक्सप्रेस वे को जोड़ते हुए ‘गोल्डन नेकलस’का रूप देने वाली इस्टर्न पैरीफेरल एक्सप्रेस वे की महत्वाकांक्षी सड़क परियोयजना के निर्माण का कार्य शुरू हो गया है। इस गोल्डन नेकलस की आधारशिला गत पांच नवंबर को सोनीपत में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा रखी गई थी।
केंद्र सरकार की इस महत्वपूर्ण सड़क परियोजना को केंद्र सरकार ने दिल्ली जैसे महानगर की यातायात समस्या का सामना किये बिना हरियाणा के पलवल व फरीदाबाद से सीधे सोनीपत के सफर की राह को आसान बनाने के लिए शुरू किया है। सरकार का प्रमुख मकसद दिल्ली में यातायात का दबाव कम करने का है जिसके लिए 5,763 करोड़ रुपये की पूर्वी बाहरी एक्सप्रेसवे पर काम शुरू हो गया है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने इस परियोजना को 400 दिनों में पूरा करने का लक्ष्य तय किया है। दिल्ली के पूर्वी बाहरी हिस्से से होते हुये उत्तर प्रदेश से हरियाणा को जोड़ने वाली इस सड़क परियोजना के बारे में सरकार ने दावा किया है कि भूमि अधिग्रहण के मुद्दों का समाधान होने के बाद इस एक्सप्रेसवे पर काम शुरू हो गया है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले साल पांच नवंबर में 2,274 करोड़ रुपये की पश्चिमी बाहरी एक्सप्रेसवे और 2,129 करोड़ रुपये की लागत से आठ लेन की एक परियोजना के साथ ही 5,763 करोड़ रुपये की 135 किलोमीटर लंबी पूर्वी बाहरी एक्सप्रेसवे की आधारशिला रखी थी।
किसानों को मुआवजे का भुगतान
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानि एनएचएआई के सूत्रों ने बताया कि भूमि अधिग्रहण मुद्दों के चलते अभी तक अटकी रही पूर्वी बाहरी एक्सप्रेसवे पर काम पलवल की ओर शुरू हो गया है। एनएचएआई द्वारा अधिक मुआवजा दिए जाने के बाद काम शुरू हुआ है। किसान अब पलवल जिले में राजी खुशी से जमीन का कब्जा एनएचएआई को सौंप रहे हैं। एनएचएआई के चेयरमैन राघव चन्द्रा ने किसानों के मुद्दों को हल करने में सहयोग के लिए पलवल के उपायुक्त का आभार प्रकट किया है। परियोजना के सभी पांच निर्माण एजेंसियों के साथ एक बैठक में एनएचएआई के चेयरमैन ने उन्हें युद्धस्तर पर योजना को आगे बढ़ाने का आग्रह किया, ताकि इस परियोजना को 400 दिनों में पूरा किया जा सके।

बुधवार, 20 जनवरी 2016

अब सामाजिक क्षेत्र में छवि निखारेगी मोदी सरकार!


स्वास्थ्य क्षेत्र पर ज्यादा होगा परियोजनाओं का फोकस
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अगुवाई में केंद्र की राजग सरकार देश के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की योजनाओं से हटकर अब नये रोडमैप का सहारा लेगी, ताकि सामाजिक क्षेत्र के सामने बन रही नकारात्मक छवि को निखारा जा सके। दरअसल मोदी सरकार को अभी तक कारपोरेट जगत की हितैषी बताकर विपक्ष अपने निशाने पर लिये हुए था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में सामाजिक क्षेत्र में कामकाज के बेहतर संचालन, समावेशी विकास, रोजगार सृजन, शिक्षा एवं स्वास्थ्य, स्वच्छ भारत और ऊर्जा दक्षता जैसे क्षेत्रों पर फोकस करने के लिए सचिवों के आठ समूहों का गठन किया है, जो इन क्षेत्रों में ऐसे निर्णायक बदलावों के रोडमैप तैयार करेंगे। सामाजिक जन-जीवन को सुधारने की दिशा में प्रधानमंत्री ने सभी सचिवों को नतीजे देने तथा निर्णायक बदलाव लाने को जोरदार तरीके से काम करने का भी आग्रह किया है। सामाजिक जीवन स्तर को सुधारने की कवायद में स्वास्थ्य क्षेत्र सरकार की प्राथमिकता पर होगा। सूत्रों के अनुसार गठित किये गये सचिवों के इन समूहों को सामाजिक क्षेत्र में आमूल-चूल परिवर्तन को अंजाम देने वाली परियोजनाओं का रोडमैप इसी महीने पीएमओ को देना है, ताकि परियोजनाओं का खाका तैयार करके उसे आगामी बजट में शामिल किया जा सके। दरअसल अभी तक अपने 18 माह के कार्यकाल में मोदी सरकार ने देश के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने वाली परियोजनाओं के जरिए देश की अर्थव्यवस्था को भी पटरी पर लाने का प्रयास किया गया है। इसी कारण कारपोरेट जगत की हितैषी होने का ठप्पा लगने से विपक्ष मोदी सरकार पर निशाना साधता रहा है। हालांकि सत्ता में आने के बाद केंद्र सरकार ने सभी क्षेत्रों के लिए योजनाओं को पटरी पर उतारने का दावा किया है, लेकिन अब मोदी सरकार ने अपने रोडमैप की दिशा सामाजिक क्षेत्र की ओर मोड़ते हुए विपक्ष को माकूल जवाब देने का रास्ता चुना है।
स्वास्थ्य भारत का संकल्प 
सूत्रोें के अनुसार मोदी सरकार ने स्वच्छ भारत की तर्ज पर स्वस्थ्य-भारत के संकल्प के साथ स्वास्थ्य क्षेत्र पर फोकस करते हुए जहां बीपीएल परिवारों को सरल बीमा योजना देने पर जोर दिया है। वहीं दूर दराज और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य केंद्रों और चिकित्सकों व स्वास्थ्यकर्मियों की कमी को दूर करने की योजना भी बनेगी। सूत्रों की माने तो सरकार विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवानिवृत्ति विस्तार की योजना भी बना रही है। वहीं सेवानिवृत्त विशेषज्ञ चिकित्सकों के साथ सरकारी अस्पतालों में सप्ताह में एक दिन निजी क्षेत्र के विश्ोषज्ञ चिकितसकों और पैरा मैडिकल स्टॉफ की सेवा लेने की योजना का खाका तैयार हो रहा है। इसके अलावा देश को स्वस्थ्य बनाने की योजना में सरकार विदेशों में सेवा दे रहे भारतीय चिकित्सकों को स्वदेश लौटने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। दर असल सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र को सामाजिक क्षेत्र की जीवन रेखा मानते हुए मौजूदा आंकड़ो की समीक्षा भी की है, जो दुनिया के मुकाबले बेहद चिंताजनक है।

मंगलवार, 19 जनवरी 2016

कॉलेजियम प्रणाली के बावजूद बढ़ा जजों का टोटा

24 उच्च न्यायालयों में 443 जजों के पद रिक्त
 हरिभूमि ब्यूरो. नई दिल्ली। 
 केंद्र सरकार की एनजीएसी को बेअसर करते हुए सुप्रीम कोर्ट द्वारा फिर से बहाल की गई कॉलेजियम प्रणाली भी देशभर के न्यायालयों में जजों की रिक्तियों में कमी नहीं ला पा रही है। इसी का नतीजा है कि सुप्रीम कोर्ट से लेकर जिला एवं अधीनस्थ न्यायालयों में जजों का टोटा बढ़ना शुरू हो गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने करीब तीन माह पहले 16 अक्टूबर को सरकार के राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग को असंवैधानिक करार देते हुए कॉलेजियम प्रणाली को बहाल कर दिया था। विधि एवं न्याय मंत्रालय के आंकड़े के अनुसार गत एक मार्च 2015 तक उच्चतम न्यायालय में दो न्यायाधीशों के पद रिक्त थे, जो बढ़कर पांच हो गये हैं। इसी प्रकार पिछले साल मार्च में देश के 24 उच्च न्यायालयों में मंजूर 1044 न्यायाधीशों के पदों में 346 न्यायाधीशों के पद रिक्त थे, लेकिन फिलहाल उच्च न्यायालयों में जजों की रिक्तियां बढ़कर 443 हो गई है। कॉलेजियम प्रणाली की वापसी होने के बाद भी इन पदों के लिए नये नामों की सिफारिश की जाने की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई, जिनमें मुख्य न्यायाधीश के आठ पद भी शामिल हैं। विधि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक 24 उच्च न्यायालयों में रिक्त 443 जजों के रिक्त पदों के बाद केवल एक जनवरी तक 610 न्यायाधीशों से ही काम चलाया जा रहा है। सबसे ज्यादा 86 जजों के पद इलाहाबाद उच्च न्यायालय में रिक्त हैं। इसके बाद मद्रास उच्च न्यायालय में स्वीकृत 75 न्यायाधीशों के पदों के मुकाबले 38 रिक्त न्यायाधीशों का टोटा झेलते हुए दूसरे पायदान पर है। बंबई और पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालयों में 35-35 न्यायाधीशों की कमी है। हालांकि त्रिपुरा उच्च न्यायालय में कोई पद रिक्त नहीं है जबकि मेघालय उच्च न्यायालय में एक पद रिक्त है जबकि उसकी क्षमता चार न्यायाधीशों की है। सिक्किम उच्च न्यायालय में तीन न्यायाधीशों की मंजूर क्षमता है जिसमें एक न्यायाधीश की कमी है। उच्चतम न्यायालय में मंजूर क्षमता 31 न्यायाधीशों की है जिनमें पांच न्यायाधीशों के पद रिक्त हैं। जबकि जिला एवं अधीनस्थ न्यायालयों में रिक्त पदों पर करीब पांच हजार न्यायाधीशों की नियुक्तियां अभी अधर में बताई गई है।

शनिवार, 16 जनवरी 2016

सड़क परियोजनाओं में ऐसे लाई जाएगी पादर्शिता!

सरकार जल्द शुरू करेगी इंफ्राकॉन और ईपेस पोर्टल
ओ.पी. पाल.
नई दिल्ली।
केंद्र सरकार सड़कों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में सड़क निर्माण की गुणवत्ता और उसके टिकाऊपन को सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता दोहरा रही है। केंद्र सरकार ने देशभर में चल रही तमाम सड़क परियोजनाओं में ऐसी पारदर्शिता को बनाये रखने की दिशा में इंफ्राकॉन और ईपेस नामक दो पोर्टल शुरू करने का फैसला किया है, जिसे जल्द ही शुरू किया जाएगा।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय का इसरो और नेक्टार से करार भी सड़क परियोजनाओं में पारदर्शिता लाने के लिए निगरानी के तहत किया है। इसके अलावा केंद्र सरकार ने बुनियादी ढांचे को विकसित करने वाले अभियान में और भी अधिक पारदर्शिता एवं दक्षता सुनिश्चित करने के लिए दो पोर्टल ‘इंफ्राकॉन’ और ‘ईपेस’ जल्द ही शुरू करेगी। इस कवायद में राष्टÑीय राजमार्ग परियोजनओं के संबन्ध में सभी आवश्यक विवरण उपलब्ध कराए जाएंगे। इंफ्राकॉन में व्यक्तिगत सलाहकारों और परामर्श सेवा फर्मों के बारे में सभी सूचनाएं होंगी, वहीं ईपेस से लोगों को राजमार्ग परियोजनाओं की स्थिति, फंडिंग और अन्य ब्योरे के बारे में जानने में मदद मिलेगी। मसलन आम जनता भी इन पोर्टल के जरिए सड़क परियोजनाओं के बारे में सभी तरह की जानकारी हासिल कर सकेगी।
भ्रष्टाचार पर लगेगा अंकुश
नेशनल हाईवे एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर डिवेलपमेंट कॉपोर्रेशन याकन एनएचआईडीसीएल के प्रबंध निदेशक आनंद कुमार ने बताया कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के निदेर्शों के मुताबिक भ्रष्टाचार समाप्त करन एवं पूर्ण पारदर्शिता लाने के लिए इन पोर्टलों को डिजाइन किया गया है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, एनएचएआई एवं एनएचआईडीसीएल के तहत राजमार्गों के बारे में इंफ्राकॉन और ईपेस सूचना उपलब्ध कराएंगे। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, एनएचएआई एवं एनएचआईडीसीएल के तहत राजमार्गों के बारे में इंफ्राकॉन और ईपेस सूचना उपलब्ध कराएंगे। उनका कहना है कि सड़क परियोजनाओं की पारदर्शिता के लिए इंफ्राकॉन पोर्टल देश में ढांचागत क्षेत्र के सलाहकारों के लिए एक प्लेटफॉर्म के तौर पर काम करेगा, जहां व्यक्तिगत सलाहकार एवं कंसलटैंट सर्विस देने वाली कंपनियों को अपना पंजीकरण कराने की सुविधा होगी। इस पंजीकरण में ऐसी कंपनियों की विश्वसनीयता वहां उपलब्ध कराई जाएगी और आम नागरिक इस बारे में जानकारी रख सकेंगे।

सोमवार, 7 दिसंबर 2015

संसद में पक्ष-विपक्ष की रणनीति का खुला पिटारा!

सोमवार को लोस में आठ व रास में तीन विधेयक
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
संसद के शीतकालीन सत्र में केंद्र सरकार की विपक्षी दलों के साथ समन्वय बनाकर कामकाज को आगे बढ़ाने की रणनीति कसौटी पर खरी उतरेगी या नहीं, इसका पिटारा सोमवार को संसद में पेश किये जाने वाले विधायी कार्यो के दौरान खुलेगा। कल लोकसभा में कुछ नए विधेयकों समेत आठ लंबित विधेयक तथा राज्यसभा में तीन विधेयक पेश किये जाने हेतु सूचीबद्ध किये गये हैं। सोमवार को संसद के दोनों सदनों में मोदी सरकार और विपक्षी दलों की एक-दूसरे के बीच बदली रणनीति का अंदाजा संसद की कार्यवाही शुरू होने पर ही लगेगा। हालांकि सरकार मान रही है कि देश के विकास और आर्थिक सुधारों के साथ लोक कल्याण से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयकों को सरकार को विपक्षी दलों का साथ मिलने की उम्मीद है। उधर विपक्षी दल भी सरकार की समन्वय की दिशा में सामने आई रणनीति पर अपने तेवर नरम करके छिटपुट हंगामे को छोड़कर सुचारू रूप से चलाने में सहयोग करते नजर आ रहे हैं। हालांकि जीएसटी व रियल एस्टेट राज्यसभा में सोमवार की कार्यसूची में शामिल नहीं है, जिस पर सरकार को अभी विपक्ष के साथ एक-एक कदम सकारात्मक दृष्टि से आगे बढ़ाने की दरकार है। जहां तक असहिष्णुता जैसा मुद्दा है उस पर संसद के दोनों सदनों में सरकार चर्चा कराकर विपक्षी दलों के प्रति कुछ हमदर्दी बटोर चुकी है, लेकिन ऐसा भी नहीं है कि विपक्षी अन्य मुद्दों पर सरकार को घेरने से पिछे नहीं रहेगा। मसलन सोमवार से शीतकालीन सत्र के तीसरे सप्ताह की शुरू होने वाली बैठकों में सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों की रणनीतियों पर नजरे टिकी हुई हैं।

रविवार, 6 दिसंबर 2015

सांसदों के वेतन-भत्तों में इजाफे पर नरम सरकार!

केंद्र को जल्द सौंप सकती है संसदीय समति अपनी रिपोर्ट
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों में नौकरशाहों के वेतन और फिर कुछ राज्यों में विधायकों का वेतन सांसदों के वेतन से ज्यादा होने पर ऐसी संभावना जताई जा रही है कि केंद्र सरकार सांसदों के वेतन-भत्ते बढ़ाने के लिए संबन्धित विधेयक को संसद में पेश कर सकती है। संसद की वेतन-भत्तों संबन्धी समिति फिर से जल्द ही अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप सकती है।
सूत्रों के अनुसार सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को माना गया तो कैबिनेट स्तर के सचिव का वेतन 2.25 लाख हो जाएगा। इसलिए केंद्र सरकार ने कैबिनेट स्तर के सचिव के वेतन की तुलना में मंत्रियों और सांसदों का वेतन ज्यादा होने पर विचार करना शुरू कर दिया है। हाल ही में दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने ऐसा विधेयक पारित करके मुख्यमंत्री, मंत्रियों और विधायकों के वेतन-भत्तों में एक सौ प्रतिशत का इजाफा किया है, जिससे विधायकों का वेतन प्रधानमंत्री और सांसदों से ज्यादा हो जाएगा। ऐसी स्थिति को देखते हुए कुछ सांसदों ने राज्यसभा में भी यह मांग उठाते हुए प्रस्ताव दिया कि सांसदों का वेतन कैबिनेट सचिव से एक रुपये ज्यादा होना चाहिए। सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार फिलहाल इस प्रस्ताव पर विचार कर रही है कि प्रधानमंत्री, मंत्री और सांसदों का वेतन सरकार के कैबिनेट स्तर के सचिव की तुलना में कम से कम एक हजार रुपये अधिक होना चाहिए। ऐसी संभावना है कि सांसदों के वेतन-भत्ते बढ़ाने संबन्धी संसदीय समिति को पुनर्विचार के लिए वापस की गई सिफारिशों वाली रिपोर्ट को केंद्र सरकार जल्द सौंपने के लिए कह सकती है, ताकि वेतन-भत्ते बढ़ाने वाले विधेयक को सरकार संसद के मौजूदा सत्र में ही पारित कराकर सांसदों की टीस का समाधान कर सके। जुलाई को सरकार को सौंपी गई रिपोर्ट में भारी भरकम सिफारिशें की गई थी, जिन्हें सरकार ने खारिज करते हुए समिति से फिर से विचार करके रिपोर्ट सौंपने को कहा था।

बुधवार, 2 दिसंबर 2015

अब सड़क निर्माण में प्लास्टिक कचरा!


निर्माण को मजबूती के साथ बढ़ जाएगी सड़कों की उम्र
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
देश में अपिष्ट कचरे के निपटान के लिए जूझ रही केंद्र सरकार ने अब प्लास्टिक कचरे का इस्तेमाल देश में चल रही सड़क निर्माण परियोजनाओं में करने का निर्णय लिया है। केंद्र सरकार ने इस तकनीक को अपनाने के लिए सभी सड़क निर्माण एजेंसियों को निर्देश भी जारी कर दिये हैं, ताकि लंबे समय तक सड़कों की मजबूती को कायम रखा जा सके।
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने सड़क निर्माण में अपिष्ट प्लास्टिक के इस्तेमाल पर हुए अनुसंधान के बाद यह निर्णय लिया है। अनुसंधान के अनुसार सड़क निर्माण में तारकोल के साथ प्लास्टिक कचरे को इस्तेमाल करने से एक नहीं कई फायदे सामने आने का दावा किया जा रहा है। मसलन तारकोल के साथ प्लास्टिक कचरे के इस्तेमाल करने से सड़क को मजबूती मिलेगी और वे लंबे समय तक चलती रहेंगी। वहीं प्लास्टिक कचरे का निपटान होने से पर्यावरण की समस्या से भी निजात मिलेगी। मंत्रालय के अनुसार केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने प्रोजेक्ट इंजीनियर्स, प्रोजेक्ट डिजाइनर्स और कंसलटेंट्स को प्लास्टिक के कचरे का उपयोग सड़क निर्माण में करने के दिशानिर्देश भी जारी कर दिये हैं। हालांकि देश के प्रमुख संगठन भारतीय सड़क कांग्रेस इस संबन्ध में पहले ही दिशानिर्देश जारी कर चुका था, लेकिन सड़क निर्माण एजेंसियों ने इस प्रक्रिया में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई। अब केंद्र सरकार की ओर से जारी किये गये निर्देश का कारण यह भी है कि देश में शहरीकरण में इजाफा होने के कारण प्लास्टिक कचरे में बेतहाशा वृद्धि हो रही है,जिसके निपटान के लिए हालांकि तकनीकी रूप से प्लास्टिक और अन्य कचरे के पुनर्चक्रण की प्रकिया को अपनाया जा रहा है। इसलिए अपिष्ट कचरे का देश के विकास में उपयोग को भी निपटान का बेहतर उपाय माना जा रहा है। इसका कारण है कि पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे कचरे का निपटान देश के लिए ही नहीं दुनियाभर में एक बड़ी चुनौती माना जा रहा है। इस प्रयोग को देश के कुछ हिस्सों में किया भी गया है। मंत्रालय का दावा है कि प्लास्टिक के उपयोग से प्रयोग के तौर पर सड़क बनी है वह अपेक्षाकृत मजबूत और पानी को सहने की ज्यादा क्षमता वाली है। मंत्रालय ने इस तकनीक को सफल प्रयोग मानते हुए भविष्य में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क निर्माण परियोजनाओं में करने को भी हरी झंडी दी है।

गुरुवार, 26 नवंबर 2015

सरकार के भोज में विपक्ष को नहीं मिला जायका!


पीएम की अपील के बावजूद तल्ख हैं विपक्ष के तेवर
सोमवार से संसद सत्र के हंगामेदार होने के आसार
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
कल गुरुवार से शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र को सुचारू रूप से चलाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में विपक्षी दलों के तेवर तल्ख नजर आए। ऐसी संभावना है कि दोपहर के भोज पर बुलाई गई इस बैठक में जीएसटी और कुछ अन्य बिलों के अलावा असहिष्णुता के मुद्दे पर विपक्षी दल संसद में सरकार को घेरने की तैयारी में है। हालांकि पीएम ने सहयोग की अपील करते हुए सभी दलों के आपसी विचार विमर्श से सदन की कार्यवाही चलाने का भरोसा दिया है। संसद में बुधवार को संसदीय कार्य मंत्री एम. वेंकैया नायडू द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संसद के शीतकालीन सत्र को सुचारु रुप से चलाने की अपील की और भरोसा दिया कि सरकार सभी राजनीतिक दलों को साथ लेकर आपसी विचार विमर्श से ही संसद की कार्यवाही को चलाना चाहती है। इस बैठक में पीएम मोदी ने जीएसटी विधेयक को देशहित में बताते हुए अन्य महत्वपूर्ण विधेयकों पर भी खासकर राज्यसभा में सहयोग मांगा है। वेंकैया नायडू ने बताया कि जीएसटी संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए वित्त मंत्री अरुण जेटली कांग्रेस समेत सभी दलों के नेताओं से बातचीत कर रहे हैं। कांग्रेस ने सरकार को अपनी शर्तो पर इस मुद्दे पर समर्थन देने का भरोसा भी दिया है। विपक्षी दलों की ओर से वामदल ने मांग रखी कि असहिषणुता के मुद्दे पर सरकार संसद में एक प्रस्ताव पारित करे और विवादित बयान देने वाले मंत्रियों को उनके पदों से हटाए। हालांकि संसद में विपक्ष सरकार को घेरने के लिए आगामी सोमवार से ही अपने आक्रामक तेवर प्रकट करेगा। इसका कारण है कि सरकार संविधान और इसके निमार्ता बी आर अंबेडकर पर उनकी 125वीं जयंती के अवसर चर्चा के लिए पहले दो दिन की विशेष बैठक करके चर्चा करेगी। इसके बाद सोमवार से विधायी कार्यो पर सरकार आगे बढ़ेगी।

संसद का शीतकालीन सत्र संसद में गूंजेगा असहिष्णुता राग

जीएसटी विधेयक पर ज्यादा फोकस
बीस बैठकों में 38 विधेयक सरकार के ऐजेंडे पर
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
मोदी सरकार कल गुरुवार से शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र में महत्वपूर्ण एजेंडे के साथ आने की तैयारी कर चुकी है, जिसमें सात नए विधेयकों समेत 38 विधेयकों के अलावा मसौदों और अन्य कई मुदÞदों का निपटान करने का भी प्रयास किया जाएगा। सरकार की प्राथमिकता पर जीएसटी विधेयक के अलावा अध्यादेश से संबन्धित विधेयकों को कानून में बदलवाना होगी।
 संसदीय कार्य मंत्रालय के अनुसार संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान 20 बैठकें तय की गई हैं, जिसमें सरकार के एजेंडे में वस्तु कर संबन्धी जीएसटी विधेयक यानि संविधान (122 वां संशोधन) विधेयक को राज्यसभा में पारित करना फोकस में रहेगा। इसके अलावा सरकार के सामने इस सत्र के दौरान अध्यादेश संबन्धी तीन विधेयकों को कानून का रूप देने की भी चुनौती है। इन तीन अध्यादेश से संबन्धित परक्राम्य लिखत (संशोधन) अध्यादेश-2015, मध्यस्थता एवं सुलह (संशोधन)अध्यादेश-2015 तथा वाणिज्यिक अदालतों,वाणिज्यिक डिवीजन और उच्च न्यायालयों अध्यादेश-2015 के वाणिज्यिक अपीलीय डिवीजन शामिल है, जिन्हें कानून का रूप देने की सरकार पर बड़ी चुनौती होगी। वैसे तो संसद में करीब चार दर्जन से ज्यादा विधेयक लंबित हैं, लेकिन इस सत्र के लए सरकार ने अपने एजेंडे में महत्वपूर्ण विधेयकों को आगे बढ़ाने का फैसला किया है। संसद में लंबित विधेयकों में लोकसभा में पारित हो चुके जीएसटी विधेयक के अलावा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति(अत्याचार निवारण)संशोधन विधेयक-2014, व्हिसल ब्लोअर संरक्षण (संशोधन) विधेयक-2015, किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण)संशोधन विधेयक-2015 के अलावा भ्रष्टाचाररोधी (संशोधन) विधेयक-2013, उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों (वेतन और सेवा शर्तें) संशोधन विधेयक, 2015, रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) विधेयक-2013, बाल श्रम (निषेध एवं विनियमन) संशोधन विधेयक-2012 और अपहरण रोधी विधेयक-2014 को अंजाम तक पहुंचाने की चुनौती रहेगी।

शुक्रवार, 20 नवंबर 2015

केन-बेतवा लिंक परियोजना पर आगे बढ़ी सरकार!

नदियों को आपस में जोड़ना सरकार की उच्च प्राथमिकता
ओ.पी. पाल.
नई दिल्ली।
केंद्र सरकार ने अटल सरकार की महत्वाकांक्षी नदियों को आपस में जोड़ने वाली परियोजनाओं में तेजी लाने की प्राथमिकता तय की है। केन-बेतवा लिंक परियोजना के बाद गुजरात व बिहार की दो परियोजनाओं की डीपीआर भी तैयार कर ली गई है।
केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय के अनुसार उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड में सूखे की समस्या का समाधान करने वाली केन-बेतवा लिंक परियोजना के प्रथम चरण से जुड़ी विभिन्न प्रक्रिया तेजी से अंतिम चरण में है। इस परियोजना की सिफारिश मध्य प्रदेश राज्य वन्य जीव बोर्ड ने 9 सितंबर 2015 को की थी, ताकि इस परियोजना को वन्य जीव मंजूरी प्रदान करने के लिए पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के राष्ट्रीय वन्य जीव बोर्ड को संबंधित प्रस्ताव अग्रेषित किया जा सके। इस परियोजना के पहले चरण की बदौलत 6.35 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई सुनिश्चित होगी और 9393 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत से मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बुन्देलखंड क्षेत्र को 49 एमसीएम पेयजल की आपूर्ति होगी।
गुजरात-महाराष्ट्र की दो डीपीआर तैयार
मंत्रालय के अनुसार मोदी सरकार ने नदियों को आपस में जोड़ने का कार्यक्रम पूरे देश खासकर जल की किल्लत, सूखा प्रभावित क्षेत्रों और वर्षा जल पर निर्भर खेती वाले क्षेत्रों में जल एवं खाद्य सुरक्षा को बेहतर करने के लिहाज से राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना के तहत इन परियोजनाओं को उच्च प्राथमिकता पर रखा है। केन-बेतवा लिंक परियोजना के बाद दमनगंगा-पिंजल लिंक परियोजना और पार-तापी-नर्मदा लिंक परियोजना से संबंधित विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानि डीपीआर भी तैयार कर ली गई हैं। दमनगंगा-पिंजल लिंक परियोजना की डीपीआर मार्च 2014 में पूरी करके महाराष्ट्र एवं गुजरात सरकारों को पेश किया जा चुका है। महाराष्ट्र सरकार ने प्रमुख संगठन के रूप में कार्य कर रहे ग्रेटर मुंबई नगर निगम ने दमनगंगा-पिंजल लिंक परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट ने पहले ही केंद्रीय जल आयोग को सौंप दी है। इस परियोजना के जरिए मुंबई शहर की पेयजल संबंधी जरूरतें पूरी हो सकेंगी। इसी प्रकार पार-तापी-नर्मदा लिंक परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट गत अगस्त माह में गुजरात एवं महाराष्ट्र सरकारों को सौंपी गई हैं। जल संसाधन मंत्री उमा भारती दावा कर रही हैं कि दमनगंगा-पिंजल और पार-तापी-नर्मदा लिंक परियोजनाओं के संदर्भ में गुजरात और महाराष्ट्र के बीच जल बंटवारे के मसले पर प्राथमिकता के साथ विचार किया जा रहा है।

शुक्रवार, 13 नवंबर 2015

ऐसे तो मजबूत नहीं होगा पूर्वोत्तर में बुनियादी ढांचा!

केंद्र की मंजूरी के बावजूद रेल बजट पर अडंगा
ओ.पी. पाल
. नई दिल्ली।
केंद्र सरकार की मंजूरी के बावजूद पूर्वोत्तर क्षेत्रीय रेलवे बजट के प्रस्ताव को कैग की आॅडिटिंग से उठने वाले सवालों से बचने के लिए वित्त मंत्रालय हरी झंडी देने को तैयार नहीं है। ऐसे मे सवाल उठता है केंद्र सरकार पूवोत्तर में बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने के लिए किस फार्मूले पर कौन सी रणनीति तैयार करेगी।
दरअसल हाल में केंद्र की आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने पूवोत्तर क्षेत्रीय लैप्स न होने वाले रेल फंड के निर्माण को कारगर करने की दिशा में एक प्रस्ताव को मंजूरी देने के बाद इसे रेल बजट 2014-15 में शामिल कर लिया था। इस प्रस्ताव के तहत पूर्वोत्तर क्षेत्रीय रेल फंड का 25 प्रतिशत हिस्सा रेल बजट और 75 प्रतिशत हिस्सा वित्त मंत्रालय के सहयोग से संचालित किया जाना है। केंद्र सरकार के पूर्वोत्तर में विकास को गति देने के संकल्प के बावजूद मौजूदा वित्तीय वर्ष का ज्यादातर समय बीत चुका है, लेकिन यह ऐसे ही अटका हुआ है। जबकि इस प्रस्ताव को जल्द से जल्द गति देने के मकसद से रेल मंत्रालय लगातार वित्त मंत्रालय से पत्र व्यवहार कर रहा है, लेकिन वित्त मंत्रालय इस प्रस्ताव को हरी झंडी देने को तैयार ही नहीं है। सूत्रों के अनुसार इसका कारण भी साफ है कि वित्त मंत्रालय इस प्रस्ताव में कैग की आॅडिटिंग में आने वाली परेशानी पर कोई जोखिम नहीं लेना चाहता। मसलन वित्तीय मामलों में केंद्र सरकार के जारी बजट यदि खर्च नहीं हो पाता तो वह स्वत: ही लैप्स होकर सरकार के खाते में आ जाता है और ऐसी स्थिति में भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक यानि कैग के आॅडिट में सरकारी बजट में शामिल कर लिया जाता है, लेकिन जो फंड लैप्स नहीं होगा उसकी अकाउंटिंग की परेशानी पर कैग लगातार ऐसे फंड के औचित्य पर सवाल उठाता रहा है। सूत्रों की माने तो कैग की ऐसी आपत्ति भी अपनी जगह सही है कि क्योंकि किसी भी परियोजना के बजट का प्रावधान होने पर वह निवेश एक तरह से एसेट निर्माण के दायरे में आ जाता है। इसलिए कैग इस तरह की अकाउंटिंग करने से मना कर देता है। हालांकि कैग ने ऐसे भी सुझाव दिये हैं कि रेलवे अपने बजट में ऐसी व्यवस्था बना ले जो केंद्रीय फंड के बजाए उसके मुनाफे से आती है। इस समस्या से निपटने की दिशा में हाल ही में कैबिनेट में वित्त मंत्रालय से ऐसी व्यवस्था करने का एक निर्णय लिया गया है जिससे वह अपने आदेश को कायम रखने में मदद कर सके।

रविवार, 8 नवंबर 2015

जनता की जेब पर बढ़ सकता है बोझ!

मोदी सरकार के फैसलों ने दिया दीवाली पर झटका
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
देश में पहले से ही महंगाई की मार झेल रही जनता के सामने मोदी सरकार के कुछ फैसलों ने ऐसा झटका दिया है, जिससे जनता के ऊपर आर्थिक बोझ बढ़ना तय है। मसलन विमान सेवाएं, फोन बिल, बिजली बिल, बैंकिंग सेवाएं, होटल में खाना और रेल टिकट जैसी जरूरत की चीजों के दाम बढ़ने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। केंद्र सरकार का दीपावली पर यह बड़ा झटका माना जा रहा है।
आर्थिक मामलों के जानकारों का मानना है कि मोदी सरकार के इन कड़े फैसलों का जनता पर सीधा असर पड़ने की संभावना है। इन फैसलों के कारण फोन बिल, बिजली बिल, रेल टिकट, बैंकिंग सेवाएं, होटल में खाना, ये सब एक बार फिर महंगा होना तय माना जा रहा है। एक दिन पहले ही नियमों में बदलाव करके भारतीय रेलवे ने अपने यात्रियों को तगड़ा झटका दिया है। रेलवे द्वारा किये गये नियमों में बदलाव के कारण अब कोई भी टिकट ट्रेन छूटने के बाद कैंसल नहीं होगी और रिफंड भी नहीं मिलेगा। वहीं कन्फर्म टिकट ट्रेन छूटने के 4 घंटे पहले तक ही कैंसल होंगे।
गैस सब्सिडी खत्म होने के संकेत
केंद्र सरकार रसोई गैस पर सब्सिडी को खत्म करने पर पहले से ही विचार कर रही है और वैसे भी एलपीजी गैस के दाम घटाने के नाम पर उपभोक्ताओं को मिलने वाली सब्सिडी की रकम घटती जा रही है। गैस सब्सिडी खत्म करने के संकते स्वयं वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भी दिए हैं। वित्त मंत्री जेटली के संकेतों पर गौर करें तो उन्होंने कहा कि क्या गैस सब्सिडी का लाभ सभी को मिलना चाहिए या सिर्फ उस वर्ग को, जिसे इसकी वाकई जरुरत है? जेटली के इस बयान के बाद कहा जा रहा है कि सरकार शीघ्र ही कानून बनाने जा रही है जिसके तहत एक निश्चित आय से ज्यादा वालों को गैस सब्सिडी नहीं दी जाएगी।

गुरुवार, 5 नवंबर 2015

‘गोल्डन नेकलस’ की आधारशिला आज रखेंगे मोदी

दिल्ली के बिना अन्य राज्यों में जाना होगा आसान!
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कल गुरुवार को सोनीपत में दिल्ली-पानीपत मार्ग स्थित मुकरबा चौक पर इस्टर्न पैरीफेरल एक्सप्रेस वे और वेस्टर्न पैरीफेरल एक्सप्रेस वे यानि ‘गोल्डन नेकलस’ के अलावा दिल्ली-पानीपत मार्ग की आठ लेन की परियोजना की भी आधारशिला रखेंगे। इस मेगा सड़क परियोजना को केंद्र सरकार ने दिल्ली जैसे महानगर की यातायात समस्या का सामना किये बिना हरियाणा के पलवल व फरीदाबाद से सीधे सोनीपत के सफर की राह को आसान बनाने के लिए कदम उठाया है।
केंद्र सरकार ने फरीदाबाद और पलवल से सीधे सोनीपत के लिए छह लेन वाले प्रस्तावित छह लेने वाले पूर्वी बाह्य परिधि एक्सप्रेस-वे के निर्माण को मंजूरी गत 16 जुलाई का देते हुए राष्टÑीय राजमार्ग संख्या एनई-2 के रूप में हरियाणा व उत्तर प्रदेश के 98 गांवों को जोड़ने की दिशा में 7558 करोड़ रुपये की लागत को भी मंजूरी दी थी। इस मंजूरी के बाद अरसे से चली आ रही मांग का रास्ता और भी प्रशस्त होने जा रहा है, जब कल गुरुवार को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नीतिन गडकरी के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आधारशिला रखेंगे। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि इस छह लेन के एक्सपे्रस-वे के रूप में 135 किमी लंबे इस पूर्वी बाह्य परिधि एक्सप्रेस-वे के निर्माण के लिए केंद्र सरकार ने 7558 करोड़ रुपये की मंजूरी पहले ही दे दी है,जिसमें 1795.20 करोड़ रुपये भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनरूद्धार के अलावा अन्य पूर्व निर्माण गतिविधियों पर खर्च करने के लिए शामिल है। इसके निर्माण के बाद हरियाणा में फरीदाबाद व पलवल से सोनीपत जाने के लिए राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की यातायात और प्रदूषण की समस्या से निजात मिलेगी और समय भी बचेगा। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री द्वारा आधारशिला रखते ही पूर्वी बाह्य परिधि एक्सप्रेस-वे का निर्माण कार्य भी शुरू हो जाएगा, वहीं सालों से लंबित सोनीपत से पलवल को जोड़ने वाले पश्चिमी बाह्य परिधि एक्सप्रेस-वे के अधूरे निर्माण को भी गति देने की योजना को अंजाम दिया जाएगा।

बुधवार, 4 नवंबर 2015

कोलेजियम प्रणाली में पारदर्शिता की कवायद!

सरकार के सुझावों पर गौर करेगा सुप्रीम कोर्ट
 पांच नवम्बर को होगी अगली सुनवाई
 नई दिल्ली।
देश में जजों की नियुक्तियों के लिए एनजेएसी को सुप्रीप कोर्ट द्वारा खारिज करने के बाद फिर से लागू हुई कोलेजियम प्रणाली में व्यापक पारदर्शिता लाने की कवायद में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिये हैं। सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले में पांच नवंबर को होने वाली अगली सुनवाई में सरकार के सुझावों पर गौर करेगी।
केंद्र सरकार ने कोलेजियम प्रणाली को खत्म करके जजो की नियुक्तियों की प्रक्रिया के लिए राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (एनजेएसी) अधिनियम की कवायद शुरू की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने गत 16 अक्टूबर को एनजेएसी को असैंवाधिक करार देते हुए इस प्रणाली को खारिज कर दिया था और सुप्रीम कोर्ट व उच्च न्यायालयों में जजो की नियुक्ति पुरानी चली आ रही कोलेजियम प्रणाली से करने को बरकरार रखने के आदेश दिये। उस आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने हालांकि जजों द्वारा जजों की नियुक्ति के लिए दो दशक पुराने कोलेजियम सिस्टम के स्थान पर लाए गए 99वें संविधान संशोधन अधिनियम और एनजेएसी अधिनियम को रद्द करते हुए शीर्ष अदालत ने स्वीकार किया था कि इसमें अधिक पारदर्शिता और सुधार की जरूरत है। इसीलिए केंद्र सरकार ने मंगलवार को शिकायत निवारण व्यवस्था स्थापित करने समेत न्यायपालिका में जजों की नियुक्ति की कोलेजियम प्रणाली में व्यापक पारदर्शिता लाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के समक्ष कई महत्वपूर्ण सुझाव पेश किए हैं।