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बुधवार, 17 फ़रवरी 2016

देश के बांधो के खतरे दूर करेगी सरकार

सुरक्षा सुनिश्चित करने को तैयार होगी योजना
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
केंद्र सरकार नदियों से जुड़े मुद्दों के साथ देशभर के बांधों परियोजनाओं के खतरों की आशंकाओं से निपटने की भी योजना पर आगेबढ़ती नजर आ रही है। इसके लिए सरकार ने बांध पुनर्वास एवं सुधार परियोजनाओं से सबक लेने के सुरक्षा सुनिश्चित करने की योजना तैयार करने का निर्णय लिया है।
केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय के अनुसर देश के सभी राज्यों में बदहाल स्थिति में मौजूद कई विशाल बांधों के पुनर्वास की तत्काल आवश्यकता के बारे में विविध मंचों पर चिंता जाहिर की जाती रही है, ताकि उनकी सुरक्षा और प्रचालन संबंधी दक्षता सुनिश्चित की जा सके। इसलिए देश में बांधों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए मोदी सरकार ने बांध पुनर्वास एवं सुधार परियोजना यानि डीआरआईपी की शुरूआत की है। यह परियोजना विश्व बैंक से प्राप्त ऋण सहायता के साथ सात राज्यों में लगभग 250 बांधों की स्थिति में सुधार लाने के लिए प्रारंभ की गई है। हालांकि छह वर्षीय डीआरआईपी परियोजना अप्रैल 2012 में प्रारम्भ हो चुकी थी, जिस पर काम जारी है।
खस्ता हालत में 80 फीसदी बांध
मंत्रालय के अनुसार देश में करीब 4900 विशाल बांधों में 80 फीसदी बांध 25 साल से भी ज्यादा पुराने होने के कारण उनसे बाढ़ और भूकंप जैसी आपदा के खतरे की आशंकाएं बनी रहती है। इनके पुराने प्रचलित डिजाइन की कार्यप्रणालियां और सुरक्षा की स्थितियां भी डिजाइन के वर्तमान मानकों और सुरक्षा मानदंडों से मेल नहीं खा रही हैं। बांधों के आकलन और सर्वे के तहत नींव की अभियांत्रिकी संबंधी सामग्री अथवा बांधों का निर्माण में उपयोग की गयी सामग्री भी समय के साथ नष्ट होने के कगार पर है। मसलन उनके रखरखाव से जुड़े इन पृथक कारकों और मामलों के कारण कुछ बांध खस्ता हालत में हैं, जिनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा उनकी प्रचालन संबंधी विश्वसनीयता बहाल करने के लिए उन बांधों की तत्काल मरम्मत करना जरूरी है।

मंगलवार, 9 फ़रवरी 2016

फास्‍ट ट्रैक पर आएगी नदियों को जोडने की परियोजना।

नदियों को आपस में जोड़ने पर गंभीर सरकार 
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
देश में सूखे और बाढ़ तथा जल संकट जैसी समस्या से निपटने के लिए अटल बिहारी वाजपेयी की नदियों को आपस में जोड़ने वाली महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को फास्ट ट्रैक पर लाने की तैयारी शुरू हो गई है। इन परियोजनाओं में आ रही अड़चनों और समस्याओं के समाधान के लिए राज्यों के साथ मंथन का आधार भी फास्ट ट्रैक होगा।
मोदी की केंद्र सरकार को नदियों को आपस में जोड़ने वाली परियोजनाओं को अंजाम देने के लिए जो कदम उठाए हैं उसमें केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्री सुश्री उमा भारती की अध्यक्षता में एक विशेष समिति गठित की थी, जिसके सदस्यों के रूप में राज्यों के मुख्यमंत्री स्वयं भी शामिल हैं। जल संसाधन मंत्रालय के अनुसार इस विशेष समिति की अभी तक आठ बैठकें हुई है और केवल उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड के हित में केन-बेतवा नदी को जोड़ने की परियोजना ही अभी तक अंतिम चरण की प्रक्रिया में आ सकी है। इसके बाद इस परियोजना के तहत केंद्र के लक्ष्य में दमनगंगा-पिंजाल और पार-तापी-नर्मदा लिंक परियोजनाएं गुजरात और महाराष्ट्र के बीच जल बंटवारे के मुद्दे पर अटकी है, हालांकि बकौल उमा भारती दोनों राज्यों की सरकारों ने जल बंटवारे के मुद्दे पर सहमति बना ली है और इन परियोजनाओं की डीपीआर रिपोर्ट पर राज्यों से अंतिम मंजूरी का इंतजार है। इसी प्रकार ओडिशा में महानदी-गोदावरी लिंक परियोजना के संबंध में आ रही अड़चनों के लिए केंद्र और राज्य सरकार के संबन्धित अधिकारियों का एक दल संपर्क में है जिसकी छह माह में रिपोर्ट आते इस परियोजना को अंतिम रूप देने के लिए ओडिशा के मुख्यमंत्री के साथ स्वयं उमा भारती मंथन करेगी।
अंतर्राज्यीय लिंक चुनौती
देश में नदियों को आपस में जोड़ने वाली परियोजनाओं के तहत सरकार लक्ष्य अंतर्राज्यीय लिंक परियोजनाओं में बिहार की बूढ़ी गंडक-नून-बया-गंगा लिंक परियोजना को शुरू करना भी लक्ष्य में शामिल है, जिसके लिए मंत्रालय ने डीपीआर तैयार हो चुकी है। ऐसी ही पंचेश्वर-शारदा लिंक परियोजना पर भी काम किया जा रहा है। मंत्रालय के अनुसार सरकार के एजेंडे में नदियों को जोड़ने वाली ऐसी ही 35 परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की चुनौती है, जिन पर आगे बढ़ने की दिशा में विशेष समिति की बैठक में विचार विमर्श किया गया है।

शनिवार, 6 फ़रवरी 2016

‘नमामि गंगे’ मिशन में ऐसे बढ़ेगी सहभागिता!

कार्यान्वयन में वेतन आधारित होगी निजी भागीदारी
ओ.पी. पाल
. नई दिल्ली।
मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी मिशन के रूप में नमामि गंगे कार्यक्रम को तेजी से आगे बढ़ाने की दिशा में सार्वजनिक व निजी भागीदारी को मिश्रित वेतन आधारित बनाने की पहल शुरू कर दी गई है, ताकि इस मिशन को जनांदोलन के रूप में गंगा और सहायक नदियों की स्वच्छता को स्थायी रूप दिया जा सके।
राष्ट्रीय गंगा स्वच्छता अभियान के तहत कई मंत्रालयों की भागीदारी में नमामि गंगे मिशन की तेजी से शुरूआत करने की कवायद की जा रही है, जिसके लिए केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्री सुश्री उमा भारती ने जनता, स्थानीय प्रशासन और शासन के अलावा अन्य संस्थाओं को भी जोड़ते हुए इस कार्यक्रम को जनांदोलन बनाने की रणनीति अपनाई है। मिशन को स्थातित्व देने की दिशा में नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत मिश्रित वार्षिक वेतन आधारित सार्वजनिक-निजी भागीदारी शुरू करने के प्रस्ताव पर केंद्र सरकार अपनी मुहर लगा चुकी है। मिश्रित वेतन आधारित सार्वजनिक निजी साझेदारी यानि पीपीपी मॉडल अपनाने का मकसद मिशन में तेजी लाने की दृष्टि से एक नया बदलाव है।
नीति बदलाव से होगा लाभ
मंत्रालय के अनुसार केंद्र सरकार के फैसले के अनुसार इस मॉडल में पूंजीगत निवेश के एक हिस्से यानि 40 प्रतिशत तक का भुगतान सरकार द्वारा किया जाएगा और शेष भुगतान वार्षिक के रूप में 20 वर्षों तक किया जाता रहेगा। इस कदम के तहत कार्य प्रदर्शन मानकों को वार्षिक भुगतान के साथ जोड़ने से समुचित मानक वाले शोधित जल का उद्देश्य सुनिश्चित होगा, ताकि कार्य प्रदर्शन,सक्षमता, व्यावहारिकता तथा निरंतरता को सुनिश्चित किया जा सके। जिसमें भारत में अपशिष्ट जल क्षेत्र में सुधार लाने की भी तैयारियां शामिल होंगी। इसके लिए रेलवे की तर्ज पर विद्युत, पेट्रोलियम तथा उद्योग आदि केंद्रीय मंत्रलायों के साथ भी करार किये जा रहे हैं।

बुधवार, 3 फ़रवरी 2016

‘नमामि गंगे’ मिशन में रोड़ा बने स्लॉटर हाउस!

ऐसे कैसे पूरा होगा उमा का ड्रीम प्रोजेक्ट
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना में ‘नमामि गंगे’ मिशन को हालांकि सरकार तेजी से आगे बढ़ाने के लिए पूरे दमखम के साथ जुटी हुई है, जिसमें उन्होंने गंगा और अन्य नदियों में औद्योगिक ईकाईयों, शहरों और कस्बों के अलावा गांवों से पड़ने वाले गंदे नालों की रोकथाम पर ठोस कदम उठाए हैं। इसके बावजूद खासकर यूपी में कई जिलों में संचालित स्लॉटर हाउस केंद्रीय जल संसाधन मंत्री के इस ड्रीम प्रोजेक्ट का रोड़ा बने हुए हैं।
केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री सुश्री उमा भारती ने नमामि गंगे मिशन को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए उन सभी राज्यों की सरकारों, नगर निगमो, नगर पालिकाओं, नगर पंचायतों के अलावा हाल ही में ग्राम प्रधानों व सरपंचों के साथ भी विचार विमर्श कर आबादी से नालों के जरिए नदियों में गिरने वाले गंदे पानी को रोकने की योजना को अंजाम दिया है। केंद्र सरकार द्वारा गंगा व सहायक नदियों को प्रदूषण मुक्त करने के भरे जा रहे दम के तहत नमामि गंगे कार्यक्रम में रोड़ा बने स्लॉटर हाउस यानि कतल खाने एक चुनौतीपूर्ण समस्या बनी हुई है। जल संसाधन मंत्रालय के अनुसार खासकर यूपी में केंद्र सरकार ने यूपी सरकार से इन पर शिकंजा कसने के लिए उचित कार्रवाही करने का भी अनुरोध किया है।
पशुओ के अवैध कटान की चुनौती
दरअसल उत्तर प्रदेश में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनुमति से केवल आठ स्लॉटर हाउस ही वैध हैं, जिन्हें प्रदूषित जल, मल और पशुओं के कचरे को नदियों में जाने से रोकने की सख्त हिदायत है। सूत्रों के अनुसार इन वैध स्लॉटर हाउस के अलावा इनसे कई गुणा अवैध तरीके से पशुओं के कटान के लिए ठिकाने बने हुए हैं, जिसके कारण बड़ी संख्या में काटे जा रहे जानवरों से जल प्रदूषण की समस्या तो गहरा रही ही है, वहीं जानवरों की हड़ियां एवं अन्य दुर्गन्धयुक्त कचरे को बनाई गई भट्टियों में जलाने से वायु प्रदूषण को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
केंद्र सरकार के लिए चुनौती
केंद्र सरकार के लिए नमामि गंगे मिशन में ऐसे स्लॉटर हाउसों का संचालन बड़ी चुनौती बना हुआ है। खासकर पशु कटान के लिए बनाए गये अवैध ठिकानों से बड़े पैमाने पर हो रहे भूजल के दोहन भी जल संसाधन मंत्रालय की अन्य योजनाओं के लिहाज से भी चिंताजनक है। सूत्रों के अनुसार यही नहीं स्लॉटर हाउस से खून तथा जानवरों के अवशेष वाले दूषित पानी सीधे नालों में बहाया जा रहा है। यह भी चिंताजनक पहलू है कि अवैध स्लॉटर हाउसों को संचालित करने वालों ने ऐसे गंदे और प्रदूषित पानी की निकासी के लिए नालों का प्रवाह नदियों की और कर रखा है, जिसके जरिए गंगा-यमुना जैसी नदियां प्रदूषण और गंदगी से मैली हो रही हैं।

रविवार, 31 जनवरी 2016

‘नमामि गंगे’ पर बेहतर बनेगा रोड़ मैप!

गंगा संरक्षण में तय हुई ग्राम प्रधानों की जिम्मेदारी
ओ.पी. पाल.
नई दिल्ली।
मोदी सरकार की महत्वाकांक्षणी ‘नमामि गंगे’ मिशन में शहरी सीवरों और औद्योगिक इकाईयों के बाद अब गांवों के नालों का गंदा पानी सीधे नदियों में गिरने से रोकने की कवायद शुरू की गई है। मसलन केंद्र सरकार इस आधार पर एक रोडमैप तैयार करके इस मिशन को तेजी से आगे बढ़ाऐगी।
केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा सरंक्षण मंत्री सुश्री उमा भारती गंगा और सहायक नदियों को स्वच्छ और प्रदूषणमुक्त बनाने वाली महत्वाकांक्षी योजना ‘नमामि गंगे’ को तेजी से आगे बढ़ाने का संकल्प किया है। इसके लिए उन्होंने पहले ही शहरी क्षेत्रों और औद्योगिक ईकाईयों से निकलने वाले गंदे पानी को रोकने के लिए केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड, नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों की भागीदारी से योजना को अंजाम दे दिया है। चूंकि नदियों के किनारे बसे गावों और बस्तियों से गंदे पानी की निकासी के लिए नाले सीधे नदियों मेंं गिर रहे हैं। इसलिए गांवों के नालों के इस गंदे पानी को सीधे नदियों में गिरने से रोकने की दिशा में सरकार ने कई मंत्रालयों के सहयोग से यूपी, उत्तराखंड, बिहार और झारखंड आदि राज्यों के ऐसे चिन्हित गांवों के ग्राम प्रधानों और सरपंचों की भी इस मिशन में सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए 1600 ग्राम प्रधानों व सरपंचों के लिए राष्ट्रीय स्तर के एक ‘स्वच्छ गंगा और ग्रामीण सहभागिता’ सम्मेलन बुलाया गया, जिसमें गांवों के गंदे पानी को नदियों में सीधे गिरने से रोकने की दिशा में उनकी सहभागिता
तय की गई।
नालों की रोकथाम का काम शुरू
ग्रामीण क्षेत्रों से नदी में गिरने वाले नालों की रोकथाम का काम केंद्र सरकार के कुछ सार्वजनिक उपक्रमों के सुपुर्द कर दिया है। इन उपक्रमों ने फील्ड सर्वेक्षण का कार्य भी शुरू कर दिया है एवं सर्वेक्षण पूरा होने के बाद इस दिशा में कार्य शुरू हो जाएगा। उन्होने कहा कि नालों के लिए हम इस प्रकार की योजना बना रहे हैं कि इनके गंदे पानी को जैविक रूप या अन्य तकनीक से शुद्ध कर इसका खेती तथा जब खेती में आवश्यकता न हो तब वाटर रिचार्जिगं में उपयोग किया जा सके।
शौचालय निर्माण पर 263 करोड़ जारी
जल संसाधन मंत्रालय के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालयों के निर्माण के लिए केंद्र सरकार ने इस वित्त वर्ष में उनके मंत्रालय द्वारा पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय को 263 करोड़ रूपए मुहैया कराया गया है। ताकि ग्रामीण क्षेत्र में घरों के अलावा सार्वजनिक शौचालयों के निर्माण की सुनिश्चितता तय की जा सके। खात बात यह है कि ग्रामीणों की सहभागिता के लिए बुलाए गये सम्मेलन में उमा भारती समेत कई वक्ताओं ने इस बात पर चिंता जताई कि ग्रामों में शौचालयों का निर्माण होने के बावजूद उनका उपयोग कम हो रहा है,इसलिए इसके लिए जागरूकता फैलाने की जिम्मेदारी भी सरपंचों व ग्राम प्रधानों को निभाने का आग्रह किया गया है।

सोमवार, 11 जनवरी 2016

नमामि गंगे मिशन पर आगे बढ़ा कानपुर!

कानपुर में अन्य जगहों से ज्यादा हो रहा काम
हरिभूमि ब्यूरो.
नई दिल्ली
केंद्र सरकार की राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा अभियान के तहत चलाई जा रही महत्वकांक्षी योजना नमामि गंगे मिशन ने कानपुर में ज्यादा गति पकड़ी है, जहां केंद्र सरकार के जारी दिशा-निर्देशों के तहत परियोजना को अन्य जगहों से ज्यादा काम हो रहा है। केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय के अनुसार गंगा को बचाने की इस मुहिम में वैसे तो जनजागृति का प्रसार हुआ है, लेकिन यूपी के कानपुर से गुजर रही गंगा की स्वच्छता के लिए प्रशासन, पुलिस और लोग सक्रिय होकर इस अभियान में तेजी से आगे बढ़े हैं। दावा किया जा रहा है कि कानपुर में कानपुर और आस-पास के घाटों और गंगा नदी किनारे बसे गांवों में लोगों की मदद से शवों को गंगा में प्रवाहित करने से रोकने के प्रयास में नदी पुलिसिंग और प्रशासन के साथ आम लोगों में सक्रियता बनी हुई है। इसमें गंगा किनारे शवों को जलाने वाले लोग भी घाटों की सफाई से जुड़ी किसी भी परियोजना या नियम को समझने का प्रयास कर रहे हैं, जिनमें गंगा सफाई को लेकर जागरुकता भी बढ़ रही है। इसका कारण यह भी है कि गंगा के किनारे और घाटों को साफ करने के लिए जीआरएफडी प्लान को केंद्र पहले ही मंजूरी दे चुकी है।
मंत्रालय के अनुसार 1986 में गंगा एक्शन प्लान का उद्देश्य गंगाजल में प्रदूषण की मात्रा को कम करना और गंगाजल की गुणवत्ता को सुधारने के लिए बनाई गई स्कीमों के कार्यान्वयन के तहत अन्य राज्यों की तरह उत्तर प्रदेश में भी लक्षित सीवेज ट्रीटमेंट संयंत्र लगाए जा रहे हैं। मौजूदा केंद्र सरकार ने गंगा कार्ययोजना का दायरा बढ़ाते हुए ऐसी स्कीमें भी लागू की है जिसमें शहरों और गांवों के नालो तथा औद्योगिक ईकाइयों का प्रदूषित जल गंगा नदी में न आ सके। जल संसाधन मंत्रालय के अनुसार गंगा को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए सिर्फ गंगा ही नहीं, बल्कि इसमें मिलने वाले और इसके किनारे पर स्थित झील एवं तालाबों को भी साफ करने की योजनाओं को भी शुरू किया गया है और गंगा और इसमें वाली नदियों को भी साफ किए जाने की पहल शुरू हो चुकी है।

गुरुवार, 7 जनवरी 2016

केंद्र अपने भरोसे पूरा करेगी नमामि गंगे मिशन!



केंद्र और राज्य के 75:25 अनुपात खर्च में बदलाव
अब केंद्र सरकार ही वहन करेगी पूरा खर्च
ओ.पी. पाल
. नई दिल्ली।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की महत्वकांक्षी ‘नमामि गंगे’ परियोजना को केंद्र सरकार ने अपने भरोसे शुरू कर दिया है। गंगा को अविरल और निर्मल बनाने वाली इस परियोजना की वित्तीय व्यवस्था में बदलाव करते हुए केंद्र सरकार ने पूरा खर्च अपने जिम्मे वहन करने का फैसला किया है। इससे पूवे इस परियोजयना के लिए केंद्र का 75 प्रतिशत और राज्य का 25 प्रतिशत खर्च होने की व्यवस्था थी। केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय के अनुसार राज्य अपने हिस्से की 25 प्रतिशत धनराशि करने में हिचक रहे हैं जिसके कारण इस महत्वपूर्ण परियोजना में विलंब हो रहा है। सरकार नमामि गंगे परियोजना को तेजी के साथ आगे बढ़ाकर लक्ष्य हासिल करना चाहती है। ऐसी स्थिति में मंत्रालय के इस परियोजना के लिए नये ढांचागत एवं वित्तीय व्यवस्था के प्रस्ताव को बुधवार को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है, जिसमें राज्यों के खर्च करने वाली 25 प्रतिशत व्यवस्था में बदलाव करते हुए संपूर्ण खर्च केंद्र सरकार ही वहन करेगी। केंद्र सरकार को इस परियोजना को तीन चरणों में पूरा करना है।नमामि गंगे परियोजना की शुरूआत
मंत्रालय के अनुसार नमामि गंगे मिशन के रूप में इस परियोजना की शुरूआत यूपी में अनूपशहर से कर दी गई है। इससे पहले इस परियोजना में केंद्र और राज्य के बीच खर्च का बंटवारा 75:25 के अनुपात मे होने की व्यवस्था की गई थी, लेकिन बाद में इसमें बदलाव किया गया और अब शत प्रतिशत खर्च केंद्र वहन करेगा। सूत्रों के अनुसार इस परियोजना का पहलो चरण एक वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य है जिसमें गंगा नदी की अविरलता पर विशेष ध्यान दिया जायेगा। कानपुर, इलाहाबाद और वाराणसी में इस पहल को सबसे पहले आगे बढ़ाया जा रहा है। वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के अनुसार नदी के किनारे स्थिति उद्योगों से निकलने वाले प्रवाह को हम 24 घंटे चलने वाले प्रदूषण निगरानी उपकरण से जोड़ने का कार्य आगे बढ़ा रहे हैं। यह नयी प्रौद्योगिकी पर आधारित है और कई तरह की श्रेणियों में हैं।

बुधवार, 25 नवंबर 2015

जल्द आएगा राष्ट्रीय जल ढांचा विधेयक!

यूरोपीय जल नीति से निपटेगा जल संकट
ओ.पी. पाल.
नई दिल्ली।
देश में जल की गुणवत्ताा में सुधार के साथ जल प्रबंन्धन और जल संकट की चुनौती से निपटने के लिए केंद्र सरकार जल्द ही ‘राष्ट्रीय जल ढांचा विधेयक’ लाने की तैयारी कर रही है। इस विधेयक का मसौदा यूरोपीय संघ के जल विशेषज्ञों ने तैयार किया है। यही कारण है कि सरकार देश में जल सुधार की योजनाओं में यूरोपीय जल नीति लागू करने पर विचार कर रही है।
केंद्र सरकार मानती है कि देश में जल की गुणवत्ताा में सुधार के साथ यूरोपीय जल नीति के जरिए नदियों को आपस में जोड़ने की परियोजनाओं को भी तेजी ला सकेगी। केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री सुश्री उमा भारती यूरोपीय जल नीति को देश के उद्योग, कृषि, ऊर्जा और घरेलू उपयोग जैसे क्षेत्रों में जल की बढ़ती हुई खपत को देखते हुए नदी और जल प्रबंधन एक बड़ी चुनौती निपटने में महत्वपूर्ण उपयोगी करार दिया है। इसी फायदे को देखते हुए केंद्र सरकार ने यूरोपीय संघ के जल विशेषज्ञों द्वारा भारत के लिए तैयार किये गये एक ‘राष्ट्रीय जल ढांचा विधेयक’ के मसौदा तैयार किया है, जिसकी समीक्षा के बाद इसे अंतिम रूप देकर इस विधेयक जल्द से जल्द संसद में पेश करने की तैयारी की जा रही है। सुश्री उमा भारती ने संकेत दिये हैं कि देश की जल संबन्धी चुनौतियों में जल की मात्रा, आबंटन, गुणवत्ता, तथा प्रबंधन के मामले में केंद्र राज्यों के सहयोग से यूरोपीय जल नीति को अपनाया जा सकता है, ताकि उद्योग, कृषि, ऊर्जा, घरेलू उपयोग और पर्यावरण के बीच जल के लिए बढ़ती प्रतिस्पर्धा से नदी बेसिन और सतत् तरीके से बहुक्षेत्रीय आधार पर जल प्रबंधन के महत्व को बढ़ावा मिल सके। देश में जटिल जल चुनौतियों के परिपेक्ष्य में नदी बेसिन प्रबंधन और व्यांपक जल प्रबंधन पर केंद्रित यूरोपीय जल नीति, यूरोप और भारत के बीच राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर सहयोग के लिए एक व्यवहारिक मॉडल भी प्रस्तुत किया जाएगा।

मंगलवार, 24 नवंबर 2015

यूरोपीय जल नीति से जल सुधार की योजना!

यूरोपीय संघ का भारत को मिला सहयोग
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
देश में जल सुधार की दिशा में जल प्रबन्धन और जल संकट से निपटने के लिए जल सुधार की योजनाओं में केंद्र सरकार यूरोपीय जल नीति को अपनाने पर विचार कर रही है, ताकि जल की गुणवत्ताा में सुधार के साथ जल संकट से निपटना जा सके। वहीं सरकार इस नीति के जरिए नदियों को आपस में जोड़ने की परियोजनाओं को भी तेजी से आगे बढ़ाना चाहती है।
केंद्र सरकार ने स्वीकार किया है कि देश में जल संसाधनों के विकास में चलाई गई योजनाओं में पारिस्थितिकीय और प्रदूषण संबन्धी पहलुओं पर ध्यान न देने के कारण जल संकट की स्थिति पैदा हुई है। मौजूदा केंद्र सरकार ने देश की जल प्रबंधन आवश्यकताओं से निपटने में सर्वाधिक ध्यान ऐसे पहलुओं पर देते हुए गंभीरता प्रकट की है। दरअसल सोमवार को यहां शुरू हुई भारत-यूरोपीय जल मंच की दो दिवसीय बैठक में देश में जटिल होती जल संबन्धी चुनौतियों पर केंद्रीय जल संसाधन राज्य मंत्री प्रोफेसर सांवर लाल जाट ने देश में सबसे अधिक जल के उपयोग को कृषि क्षेत्र में होने की स्थिति पर कहा कि ऐसे में सिंचाई और व्यक्तिगत जरूरतों को पूरा करने के लिए उचित आबंटन, मांग का प्रबंधन और प्रभावी उपाय किए जाने की तुरंत आवश्यकता है। प्रोफेसर जाट ने भी यूरोपीय जल नीति का समर्थन करते हुए कहा कि देश की जल प्रबंधन आवश्यकताओं से निपटने में सर्वाधिक ध्यान और गंभीरता की आवश्यकता है। इसलिए जल के समुचित आवंटन, मांग के प्रबंधन और उसके उपयोग के लिए प्रभावकारी उपाय किए जाने बहुत जरूरी है।
‘राष्ट्रीय जल ढांचा विधेयक’ तैयार
केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री सुश्री उमा भारती ने कहा कि उद्योग, कृषि, ऊर्जा और घरेलू उपयोग जैसे क्षेत्रों में जल की बढ़ती हुई खपत को देखते हुए नदी और जल प्रबंधन एक बड़ी चुनौती निपटना बेहद जरूरी है। इसलिए यूरोपीय संघ के जल विशेषज्ञों द्वारा भारत के लिए तैयार किये गये एक ‘राष्ट्रीय जल ढांचा विधेयक’ के मसौदे को जल्द संसद में पेश किया जाएगा। सुश्री उमा भारती ने संकेत दिये हैं कि देश की जल संबन्धी चुनौतियों में जल की मात्रा, आबंटन, गुणवत्ता, तथा प्रबंधन के मामले में केंद्र राज्यों के सहयोग से यूरोपीय जल नीति को अपनाया जा सकता है, ताकि उद्योग, कृषि, ऊर्जा, घरेलू उपयोग और पर्यावरण के बीच जल के लिए बढ़ती प्रतिस्पर्धा से नदी बेसिन और सतत् तरीके से बहुक्षेत्रीय आधार पर जल प्रबंधन के महत्व को बढ़ावा मिल सके। देश में जटिल जल चुनौतियों के परिपेक्ष्य में नदी बेसिन प्रबंधन और व्यांपक जल प्रबंधन पर केंद्रित यूरोपीय जल नीति, यूरोप और भारत के बीच राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर सहयोग के लिए एक व्यवहारिक मॉडल प्रस्तुत किया जा रहा है।

शुक्रवार, 20 नवंबर 2015

केन-बेतवा लिंक परियोजना पर आगे बढ़ी सरकार!

नदियों को आपस में जोड़ना सरकार की उच्च प्राथमिकता
ओ.पी. पाल.
नई दिल्ली।
केंद्र सरकार ने अटल सरकार की महत्वाकांक्षी नदियों को आपस में जोड़ने वाली परियोजनाओं में तेजी लाने की प्राथमिकता तय की है। केन-बेतवा लिंक परियोजना के बाद गुजरात व बिहार की दो परियोजनाओं की डीपीआर भी तैयार कर ली गई है।
केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय के अनुसार उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड में सूखे की समस्या का समाधान करने वाली केन-बेतवा लिंक परियोजना के प्रथम चरण से जुड़ी विभिन्न प्रक्रिया तेजी से अंतिम चरण में है। इस परियोजना की सिफारिश मध्य प्रदेश राज्य वन्य जीव बोर्ड ने 9 सितंबर 2015 को की थी, ताकि इस परियोजना को वन्य जीव मंजूरी प्रदान करने के लिए पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के राष्ट्रीय वन्य जीव बोर्ड को संबंधित प्रस्ताव अग्रेषित किया जा सके। इस परियोजना के पहले चरण की बदौलत 6.35 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई सुनिश्चित होगी और 9393 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत से मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बुन्देलखंड क्षेत्र को 49 एमसीएम पेयजल की आपूर्ति होगी।
गुजरात-महाराष्ट्र की दो डीपीआर तैयार
मंत्रालय के अनुसार मोदी सरकार ने नदियों को आपस में जोड़ने का कार्यक्रम पूरे देश खासकर जल की किल्लत, सूखा प्रभावित क्षेत्रों और वर्षा जल पर निर्भर खेती वाले क्षेत्रों में जल एवं खाद्य सुरक्षा को बेहतर करने के लिहाज से राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना के तहत इन परियोजनाओं को उच्च प्राथमिकता पर रखा है। केन-बेतवा लिंक परियोजना के बाद दमनगंगा-पिंजल लिंक परियोजना और पार-तापी-नर्मदा लिंक परियोजना से संबंधित विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानि डीपीआर भी तैयार कर ली गई हैं। दमनगंगा-पिंजल लिंक परियोजना की डीपीआर मार्च 2014 में पूरी करके महाराष्ट्र एवं गुजरात सरकारों को पेश किया जा चुका है। महाराष्ट्र सरकार ने प्रमुख संगठन के रूप में कार्य कर रहे ग्रेटर मुंबई नगर निगम ने दमनगंगा-पिंजल लिंक परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट ने पहले ही केंद्रीय जल आयोग को सौंप दी है। इस परियोजना के जरिए मुंबई शहर की पेयजल संबंधी जरूरतें पूरी हो सकेंगी। इसी प्रकार पार-तापी-नर्मदा लिंक परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट गत अगस्त माह में गुजरात एवं महाराष्ट्र सरकारों को सौंपी गई हैं। जल संसाधन मंत्री उमा भारती दावा कर रही हैं कि दमनगंगा-पिंजल और पार-तापी-नर्मदा लिंक परियोजनाओं के संदर्भ में गुजरात और महाराष्ट्र के बीच जल बंटवारे के मसले पर प्राथमिकता के साथ विचार किया जा रहा है।

बुधवार, 16 सितंबर 2015

नदियों को जोड़ने पर आगे बढ़ी सरकार!

केन-बेतवा से शुरू होगी राष्ट्रीय मॉडल लिंक परियोजना
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहार वाजपेयी की महत्वाकांक्षी नदियों को आपस में जोड़ने की योजना को मोदी सरकार ने दिशा देना शुरू कर दिया है। केंद्र सरकार ने केन-बेतवा नदियों को आपस में जोड़ने की संवैधानिक मंजूरी मिलते ही देश में नदियों को आपस में जोड़ने की मुहिम को मॉडल लिंक परियोजना के रूप में राष्ट्रीय परियोजना को लागू करने का कार्य शुरू करेगी।
केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री सुश्री उमा भारती ने  नदियें को आपस में जोडने वाली राज्‍यों की विशेष समिति की बैठक में कहा कि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बीच बनी सहमति के बाद केन-बेतवा लिंक परियोजना के लिए विभिन्न मंजूरी प्रक्रिया के अंतिम चरण में हैं और संवैधानिक मंजूरी मिलने के बाद देश में नदियों को आपस में जोड़ने का काम मॉडल लिंक परियोजना के रूप में राष्ट्रीय परियोजना को लागू करने का कार्य शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि देश में जल की वृद्धि और खाद्य सुरक्षा के लिए नदियों को आपस में जोड़ने का कार्यक्रम बहुत महत्वपूर्ण है और जल की कमी वाले, सूखा ग्रस्त और वर्षा पर आधारित क्षेत्रों को पानी उपलब्ध कराने के लिए यह बहुत लाभदायक सिद्ध होगा। उन्होंने कहा कि सरकार संबंधित राज्य सरकारों की सहमति और सहयोग से नदियों को आपस में जोड़ने के कार्यक्रम को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस बैठक में पश्‍चिम बंगाल, हरियाणा, पंजाब, तमिलनाडु, गुजरात, मध्‍य प्रदेश, उत्‍तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, छत्‍तीसगढ़ और असम से विभिन्‍न राज्‍यों के वरिष्‍ठ अधिकारियों ने भी इस बैठक में भाग लिया।
दमनगंगा-पिंजाल पर विवाद
उमा भारती ने बैठक में यह भी जानकारी दी कि पार-तापी-नर्मदा लिंक परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट का कार्य राष्ट्रीय जल विकास एजेंसी ने पूरा करके गत 25 अगस्त को गुजरात और महाराष्ट्र सरकारों को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। उन्होंने कहा कि केन-बेतवा और दमनगंगा-पिंजाल के बाद यह तीसरी लिंक परियोजना है, जिसके लिए डीपीआर पूरी की जा चुकी है। सुश्री भारती ने कहा दमनगंगा-पिंजाल के संबंध में गुजरात और महाराष्ट्र में पानी बंटवारे का मुद्दा और पार-तापी-नर्मदा लिंक परियोजना के बारे में अब प्राथमिकता के आधार पर विचार किए जाने की जरूरत है। इसलिए वह गुजरात और महाराष्ट्र दोनों की सरकारों से जल बंटवारे के मुद्दे को निपटाने का अनुरोध कर रही हैं, ताकि जल्दी से जल्दी इन दोनों परियोजनाओं पर कार्य शुरू किया जा सके। उन्होंने कहा कि उनके मंत्रालय द्वारा नदियों को आपस में जोड़ने के लिए गठित कार्य बलों ने अपना कार्य शुरू कर दिया है, जिससे नदियों को आपस में जोड़ने की परियोजनाओं के बारे में राज्यों में तेजी से सहमति कायम करने में मदद मिलेगी।

मंगलवार, 30 जून 2015

बस तीन का इंतजार, साफ-सुधरी हो जाएगी गंगा !

नमामि गंगे पर केंद्र के साथ यूपी भी गंभीर
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
देश की नदियों को प्रदूषणमुक्त करने के लिए  राष्ट्रीय गंगा स्वच्छ अभियान के तहत नमामि गंगे पर सरकार ने गंभीर है, जिसके लिए सरकार ने दावा किया है कि अगले तीन साल में गंगा के जल का प्रवाह पूर्णतया निर्मल हो जाएगा, जिसका पहला चरण में अगले साल अक्टूबर में पूरा कर लिया जाएगा।
केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय के अनुसार केंद्र सरकार के नमामि गंगे मिशन में उत्तर प्रदेश सरकार ने भी केंद्र के सहयोग हेतु गंभीरता के साथ गंगा सफाई के लिए कमर कस ली है। सोमवार को इलाहाबाद में नमामि गंगे मिशन पर केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार ने संयुक्त रूप से योजनाओं के खाके की संयुक्त प्रस्तुति पेश की। इसका अवलोकन करने के बाद केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री सुश्री उमा भारती ने दावा किया है कि जिस प्रकार से यूपी सरकार इस महत्वाकांक्षी मिशन में केंद्र का सहयोग करके आगे बढ़ रही है उससे निश्चित रूप में अगले तीन सालों में 11 प्रमुख शहरों में गंगा के जल का प्रवाह पूर्णतया निर्मल हो जाएगा, जिसका पहला चरण अगले वर्ष अक्टूबर तक पूरा कर हो जाएगा। नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत केंद्र सरकार 20 हजार करोड़ रुपए खर्च करेगी। सुश्री भारती ने उत्तर प्रदेश सरकार का आव्हान किया है कि वह पूरी निष्ठा और गंभीरता के साथ केंद्र सरकार के इस कार्यक्रम में इसी प्रकार सहयोग दे। उन्होंने कहा कि इस पूरे कार्यक्रम को पारदर्शी बनाने के लिए इसके आकलन की जिम्मेदारी नेहरू युवा केंद्र और गंगा वाहिनी पर होगी। उन्होंने कहा कि नमामि गंगे कार्यक्रम में गंगा के साथ-साथ उसकी सहयोगी नदियों पर भी बराबर ध्यान दिया जाएगा।