सुरक्षा सुनिश्चित करने को तैयार होगी योजना
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
केंद्र सरकार नदियों से जुड़े मुद्दों के साथ देशभर के बांधों परियोजनाओं के खतरों की आशंकाओं से निपटने की भी योजना पर आगेबढ़ती
नजर आ रही है। इसके लिए सरकार ने बांध पुनर्वास एवं सुधार परियोजनाओं से
सबक लेने के सुरक्षा सुनिश्चित करने की योजना तैयार करने का निर्णय लिया
है।
केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय के अनुसर देश के सभी राज्यों
में बदहाल स्थिति में मौजूद कई विशाल बांधों के पुनर्वास की तत्काल
आवश्यकता के बारे में विविध मंचों पर चिंता जाहिर की जाती रही है, ताकि
उनकी सुरक्षा और प्रचालन संबंधी दक्षता सुनिश्चित की जा सके। इसलिए देश में
बांधों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए मोदी सरकार ने बांध पुनर्वास
एवं सुधार परियोजना यानि डीआरआईपी की शुरूआत की है। यह परियोजना विश्व बैंक
से प्राप्त ऋण सहायता के साथ सात राज्यों में लगभग 250 बांधों की स्थिति
में सुधार लाने के लिए प्रारंभ की गई है। हालांकि छह वर्षीय डीआरआईपी
परियोजना अप्रैल 2012 में प्रारम्भ हो चुकी थी, जिस पर काम जारी है।
खस्ता हालत में 80 फीसदी बांध
मंत्रालय
के अनुसार देश में करीब 4900 विशाल बांधों में 80 फीसदी बांध 25 साल से भी
ज्यादा पुराने होने के कारण उनसे बाढ़ और भूकंप जैसी आपदा के खतरे की
आशंकाएं बनी रहती है। इनके पुराने प्रचलित डिजाइन की कार्यप्रणालियां और
सुरक्षा की स्थितियां भी डिजाइन के वर्तमान मानकों और सुरक्षा मानदंडों से
मेल नहीं खा रही हैं। बांधों के आकलन और सर्वे के तहत नींव की अभियांत्रिकी
संबंधी सामग्री अथवा बांधों का निर्माण में उपयोग की गयी सामग्री भी समय
के साथ नष्ट होने के कगार पर है। मसलन उनके रखरखाव से जुड़े इन पृथक कारकों
और मामलों के कारण कुछ बांध खस्ता हालत में हैं, जिनकी सुरक्षा सुनिश्चित
करने तथा उनकी प्रचालन संबंधी विश्वसनीयता बहाल करने के लिए उन बांधों की
तत्काल मरम्मत करना जरूरी है।
















