BY-ओ.पी. पाल
भारत में अवसंरचना का विकास अब केवल सड़कें बनाने अथवा पुल खड़े करने तक सीमित नहीं है। इसका वास्तविक उद्देश्य लोगों को कम समय में, सुरक्षित और सुविधाजनक तरीके से उनके गंतव्य तक पहुंचाना भी है। देश के विभिन्न हिस्सों में सड़क संपर्क मार्गो पर विकसित हो रहे एक्सप्रेसवे, सुरंगें, नदी पुल, और आर्थिक गलियारे आवागमन की पुरानी चुनौतियों को दूर कर रहे हैं। इससे न केवल यात्रियों का समय बच रहा है, बल्कि व्यापार, पर्यटन, रोजगार, औद्योगिक विकास और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था के लिए भी नए अवसर बन रहे हैं। इस आधुनिक परिवहन व्यवस्था में किसी परियोजना की सफलता का आकलन केवल उसकी लंबाई या निर्माण लागत से नहीं, बल्कि इससे भी किया जाना चाहिए कि वह लोगों की कितनी दूरी घटाती है, कितना समय बचाती है और कितने नए क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ती है। भारत के सड़क परिवहन अवसंरचना में हो रहे बदलाव विकास का वास्तविक मूल्य केवल निर्माण की लंबाई, परियोजना की लागत या अधिकतम गति से तय नहीं होगा। यह भी देखना होगा कि आम नागरिकों का कितना समय बचा, परिवहन कितना सुरक्षित और किफायती हुआ, ग्रामीण क्षेत्रों तक कितनी बेहतर पहुंच बनी और व्यापार तथा रोजगार के कितने नए अवसर पैदा हुए। समय की बचत ही आधुनिक अवसंरचना का सबसे महत्वपूर्ण लाभ है। जब किसी परिवार को अस्पताल पहुंचने में कम समय लगे, किसी विद्यार्थी को शिक्षा के बेहतर अवसर मिलें, किसान अपनी उपज बाजार तक आसानी से पहुंचा सके और व्यापारी कम समय में माल की आपूर्ति कर सके, तभी परिवहन विकास का लाभ व्यापक समाज तक पहुंचता है। भारत के लिए अगली चुनौती केवल तेज परिवहन नेटवर्क बनाने की नहीं, बल्कि उसे सुरक्षित, टिकाऊ, सुलभ और आर्थिक रूप से उपयोगी बनाने की भी है। यदि इन सभी पहलुओं पर समान ध्यान दिया जाता है, तो आधुनिक अवसंरचना देश की विकास यात्रा को नई गति देने के साथ करोड़ों लोगों के जीवन को अधिक सुविधाजनक बना सकती है।
सड़क नेटवर्क का विस्तार और बदलती परिवहन व्यवस्था
भारत दुनिया के सबसे बड़े सड़क नेटवर्क वाले देशों में शामिल है। सड़कें ग्रामीण क्षेत्रों को मंडियों, अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों और शहरों से जोड़ने का प्रमुख माध्यम हैं। राष्ट्रीय राजमार्गों और नियंत्रित प्रवेश वाले एक्सप्रेसवे के विस्तार ने लंबी दूरी की सड़क यात्रा को नया स्वरूप दिया है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के आंकड़ो के मुताबिक मार्च 2026 तक भारत का कुल सड़क नेटवर्क लगभग 63.73 लाख किलोमीटर था। इसमें राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई वित्त वर्ष 2013-14 के 91,287 किलोमीटर से बढ़कर मार्च 2026 में लगभग 1,46,572 किलोमीटर हो गई है। इसी अवधि में चार लेन और उससे अधिक चौड़ाई वाले राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई 18,371 किलोमीटर से बढ़कर 45,516 किलोमीटर तक पहुंच गई। देशभर में लगभग 3,644 किलोमीटर नियंत्रित प्रवेश वाले हाई-स्पीड कॉरिडोर और एक्सप्रेसवे चालू किए गये है। ये आंकड़े बताते हैं कि परिवहन के क्षेत्र में विस्तार के साथ सड़क की गुणवत्ता, क्षमता और गति पर भी जोर दिया जा रहा है। हालांकि सड़क नेटवर्क की लंबाई बढ़ने के साथ दुर्घटनाओं में कमी, रखरखाव, यातायात अनुशासन और पर्यावरण संरक्षण जैसे पहलुओं पर लगातार काम करना भी जरूरी है।
नई तकनीक से बन रहे पुलों ने बाधाएं कीं दूर
भारत में नदियां जीवन, कृषि और अर्थव्यवस्था का आधार हैं, लेकिन कई क्षेत्रों में वे आवागमन की बड़ी बाधा भी रही हैं। जहां पहले यात्रियों को नदी पार करने के लिए लंबा चक्कर लगाना पड़ता था, वहां आधुनिक पुलों ने सीधे संपर्क का विकल्प उपलब्ध कराया है। इसमें भूपेन हजारिका सेतु, असम-अरुणाचल प्रदेश को जोड़ने वाला मई 2017 में शुरू हुआ धोला-सदिया पुल पूर्वोत्तर भारत की महत्वपूर्ण परियोजनाओं में शामिल है। लगभग 9.15 किलोमीटर लंबा यह पुल असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच सड़क संपर्क मजबूत करता है। सरकारी जानकारी के अनुसार, रुपई और मेका/रोइंग के बीच संबंधित यात्रा का समय लगभग छह घंटे से घटकर एक घंटा रह गया, जिससे करीब पांच घंटे की बचत संभव हुई। वहीं असम में दिसंबर 2018 में शुरू हुआ बोगीबील पुल रेल-सह-सड़क पुल ब्रह्मपुत्र नदी पर बनाया गया है। इससे धेमाजी और डिब्रूगढ़ के बीच संपर्क बेहतर हुआ। पहले जिन यात्राओं में लंबा चक्कर लगाना पड़ता था, उनमें अब मार्ग और परिवहन के विकल्प के अनुसार काफी कमी आई है। इसी प्रकार महाराष्ट्र में अटल सेतु जनवरी 2024 में यातायात के लिए खोला गया मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक मुंबई और नवी मुंबई के बीच सीधा संपर्क प्रदान करता है। संबंधित मार्ग पर यात्रा का समय लगभग दो घंटे से घटकर करीब 20 मिनट तक होने का अनुमान है। इससे महानगर क्षेत्र में काम करने वाले लोगों, व्यवसायों और यात्रियों को सुविधा मिलती है। बिहार में सितंबर 2020 में शुरू हुई कोसी रेल महासेतु परियोजना ने निर्मली और सरायगढ़ के बीच रेल संपर्क को बेहतर बनाया। इस मार्ग पर रेल यात्रा की दूरी लगभग 300 किलोमीटर से घटकर 22 किलोमीटर और यात्रा समय लगभग आठ घंटे से घटकर 30 मिनट रह गया। अरुणाचल प्रदेश में लगभग 200 मीटर लंबा सिसेरी नदी पुल पासीघाट और रोइंग के बीच संपर्क बेहतर करता है।
पहाड़ों के बीच बेहतर संपर्क का सबब सुरंगे
देश के पहाड़ी इलाकों में परिवहन की सबसे बड़ी चुनौतियां ऊंचे दर्रे, घुमावदार सड़कें, बर्फबारी, भूस्खलन और मौसम में अचानक होने वाले बदलाव हैं। इन क्षेत्रों में सुरंगें केवल सड़क की लंबाई कम नहीं करतीं, बल्कि साल के अधिक समय तक आवागमन जारी रखने में भी मदद करती हैं। इसमें हिमाचल प्रदेश में 9.02 किलोमीटर लंबी अटल सुरंग अक्टूबर 2020 में शुरु हुई, जो रोहतांग दर्रे के नीचे से गुजरती है। इससे मनाली और लाहौल-स्पीति के बीच संपर्क बेहतर हुआ। इस परियोजना से मनाली और लेह की दिशा में सड़क दूरी लगभग 46 किलोमीटर कम हुई और यात्रा में चार से पांच घंटे तक की बचत संभव हुई। इससे पर्यटन, स्थानीय कारोबार और सामरिक आवागमन को भी लाभ मिलता है। इसी प्रकार जम्मू-कश्मीर में लगभग नौ किलोमीटर लंबी डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सुरंग पुराने कठिन पहाड़ी मार्ग के विकल्प के रूप में संबंधित सड़क मार्ग की दूरी करीब 30 किलोमीटर करीब दो घंटे के सफर को कम करती है। वहीं लगभग 8.45 किलोमीटर लंबी यह ट्विन-ट्यूब सुरंग के रुप में बनिहाल-काजीगुंड सुरंग सड़क की दूरी करीब 16 किलोमीटर घटाती है। इसके अलावा अरुणाचल प्रदेश में मार्च 2024 में राष्ट्र को समर्पित यह सेला सुरंग लगभग 13,000 फीट की ऊंचाई वाले क्षेत्र में तेजपुर-तवांग मार्ग पर स्थित है। इससे कठिन मौसम में बेहतर पहुंच से स्थानीय निवासियों, पर्यटन और आवश्यक सेवाओं को फायदा मिल सकता है। इन परियोजनाओं का महत्व इस बात में भी है कि सड़क संपर्क मजबूत होने से दूरदराज के गांवों में चिकित्सा सहायता, खाद्य सामग्री और जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति अधिक भरोसेमंद बनाई जा सकती है।
एक्सप्रेसवे ने बदली लंबी सड़क यात्रा की तस्वीर
भारत में एक्सप्रेसवे आधुनिक परिवहन व्यवस्था का ऐसा माध्यम हैं, जिनसे शहरों के बीच यात्रा समय घटाने, भीड़भाड़ कम करने और माल परिवहन की गति बढ़ाने में सहायता मिलती है। नियंत्रित प्रवेश, बेहतर सड़क डिजाइन, फ्लाईओवर और बाईपास लंबी दूरी की यात्रा को अधिक व्यवस्थित बनाते हैं। इस परियोजना में लगभग 82 किलोमीटर लंबे दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे ने राष्ट्रीय राजधानी और मेरठ के बीच संपर्क को बेहतर बनाया। इस मार्ग पर यात्रा का समय लगभग ढाई घंटे से घटकर करीब 50 मिनट हो गया है। इसका लाभ विशेष रुप से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के यात्रियों, व्यापारियों, विद्यार्थियों और नौकरीपेशा लोगों के लिए भी बेहतर सड़क संपर्क महत्वपूर्ण है। इसी प्रकार लगभग 213 किलोमीटर लंबे दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे शुरु हो चुका है, जिससे आर्थिक गलियारे के मकसद से दिल्ली और उत्तराखंड की राजधानी देहरादून की यात्रा छह घंटे से अधिक से घटाकर लगभग ढाई घंटे रह गई है। यहीं नहीं इस परियोजना का पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए विशेष महत्व है, क्योंकि इसका मार्ग बागपत, बड़ौत, मुजफ्फरनगर, शामली और सहारनपुर क्षेत्र से जुड़ता है। इस आर्थिक गलियारे में राजाजी राष्ट्रीय उद्यान के संवेदनशील क्षेत्र से होकर लगभग 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड वन्यजीव कॉरिडोर भी शामिल है। इसी प्रकार 118 किलोमीटर लंबे बेंगलुरु-मैसूरु एक्सप्रेसवे लगभग तीन घंटे के सफर को 75 मिनट तक तक सीमित कर दिया। वहीं लगभग 701 किलोमीटर लंबे मुंबई-नागपुर समृद्धि महामार्ग वाले एक्सप्रेसवे से महाराष्ट्र में मुंबई और नागपुर के बीच की यात्रा को 16 घंटे की तुलना में करीब आठ घंटे किया है। सबसे महत्वपूर्ण एक्सप्रेसवे में शामिल 1,386 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के रुप में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से पूरे मार्ग की यात्रा करीब 12 घंटे तक सिमट गई है। इसके अलावा गुजरात में अहमदाबाद-धोलेरा और के साथ दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे से पंजाब और जम्मू क्षेत्र की ओर जाने वाले यात्रियों, श्रद्धालुओं तथा माल परिवहन को लाभ मिलना शुरु हो गया है।
-10/11Oct-2026
























