"सड़क निर्माण" लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
"सड़क निर्माण" लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

बुधवार, 2 दिसंबर 2015

अब सड़क निर्माण में प्लास्टिक कचरा!


निर्माण को मजबूती के साथ बढ़ जाएगी सड़कों की उम्र
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
देश में अपिष्ट कचरे के निपटान के लिए जूझ रही केंद्र सरकार ने अब प्लास्टिक कचरे का इस्तेमाल देश में चल रही सड़क निर्माण परियोजनाओं में करने का निर्णय लिया है। केंद्र सरकार ने इस तकनीक को अपनाने के लिए सभी सड़क निर्माण एजेंसियों को निर्देश भी जारी कर दिये हैं, ताकि लंबे समय तक सड़कों की मजबूती को कायम रखा जा सके।
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने सड़क निर्माण में अपिष्ट प्लास्टिक के इस्तेमाल पर हुए अनुसंधान के बाद यह निर्णय लिया है। अनुसंधान के अनुसार सड़क निर्माण में तारकोल के साथ प्लास्टिक कचरे को इस्तेमाल करने से एक नहीं कई फायदे सामने आने का दावा किया जा रहा है। मसलन तारकोल के साथ प्लास्टिक कचरे के इस्तेमाल करने से सड़क को मजबूती मिलेगी और वे लंबे समय तक चलती रहेंगी। वहीं प्लास्टिक कचरे का निपटान होने से पर्यावरण की समस्या से भी निजात मिलेगी। मंत्रालय के अनुसार केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने प्रोजेक्ट इंजीनियर्स, प्रोजेक्ट डिजाइनर्स और कंसलटेंट्स को प्लास्टिक के कचरे का उपयोग सड़क निर्माण में करने के दिशानिर्देश भी जारी कर दिये हैं। हालांकि देश के प्रमुख संगठन भारतीय सड़क कांग्रेस इस संबन्ध में पहले ही दिशानिर्देश जारी कर चुका था, लेकिन सड़क निर्माण एजेंसियों ने इस प्रक्रिया में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई। अब केंद्र सरकार की ओर से जारी किये गये निर्देश का कारण यह भी है कि देश में शहरीकरण में इजाफा होने के कारण प्लास्टिक कचरे में बेतहाशा वृद्धि हो रही है,जिसके निपटान के लिए हालांकि तकनीकी रूप से प्लास्टिक और अन्य कचरे के पुनर्चक्रण की प्रकिया को अपनाया जा रहा है। इसलिए अपिष्ट कचरे का देश के विकास में उपयोग को भी निपटान का बेहतर उपाय माना जा रहा है। इसका कारण है कि पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे कचरे का निपटान देश के लिए ही नहीं दुनियाभर में एक बड़ी चुनौती माना जा रहा है। इस प्रयोग को देश के कुछ हिस्सों में किया भी गया है। मंत्रालय का दावा है कि प्लास्टिक के उपयोग से प्रयोग के तौर पर सड़क बनी है वह अपेक्षाकृत मजबूत और पानी को सहने की ज्यादा क्षमता वाली है। मंत्रालय ने इस तकनीक को सफल प्रयोग मानते हुए भविष्य में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क निर्माण परियोजनाओं में करने को भी हरी झंडी दी है।

मंगलवार, 3 नवंबर 2015

राजमार्गो पर हाईटेक गांव बसाने की तैयारी!

अंतर्राष्ट्रीय मानकों से बुनियादी ढांचे का बन रहा है रोडमैप
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
केंद्र सरकार ने राष्‍ट्रीय राजमार्ग और एक्सप्रेस-वे पर अब हाईटेक गांव बसाने का निर्णय लिया है। ऐसी योजना के बुनियादी ढांचे को अंतर्राष्‍ट्रीय मानकों पर तैयार करने के लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने रोडमैप तैयार कर लिया है। मसलन आगामी सभी सड़क परियोजनाओं में हाईवेज विलेजेज के प्रावधान को शामिल करने को मंजूरी दी जा चुकी है।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार अगले पांच सालों में केंद्र सरकार पांच लाख करोड़ रुपए की परियोजना का ठेका देने की योजना बना रही है। सरकार की योजना के तहत मौजूदा 96 हजार किलोमीटर राजमार्ग को बढ़ाकर डेढ़ लाख किलोमीटर तक करने का निर्णय लिया जा चुका है। इस साल करीब 10 हजार किलोमीटर राजमार्ग बनाने के लिए एक लाख करोड़ रुपए के ठेके देने का लक्ष्य है। मसलन आने वाले पांच सालों में 50 हजार किलोमीटर राजमार्ग और 16 हजार किलोमीटर एक्सप्रेस-वे बनाने की योजना पर काम किया जा रहा है, जहां वह सभी एक्सप्रेसवे और हाईवे पर अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुसार ऐसी सुविधाएं मुहैया कराना चाहती है। हाईटेक गांव की इस योजना के प्रस्तुतिकरण को प्रधानमंत्री कार्यालय से भी हरी झंडी दे दी गई है। पीएमओ से मिले समर्थन के बाद सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने योजना के लिए रोडमैप तैयार किया है, जिसके तहत राष्‍ट्रीय राजमार्ग के हर 200 किलोमीटर पर ऐसा हाईटेक गांव होगा, जहां का कामकाज सोलर एनर्जी से चलेगा। ऐसे हाईवे विलेज 75 से 100 एकड़ में बनाए जाने की योजना है। सरकार इसके लिए जमीन लैंड पूलिंग सिस्टम से अधिग्रहण करेगी यानि जमीन के मालिक को इस परियोजना में साझीदार बनाया जाएगा। ऐसे हाईटेक गांवों यानि विलेज में हैंडीक्राफ्ट शोरूम, फूड कोर्ट, डिस्पेंसरी, एटीएम, चाइल्ड केयर फैसिलिटी, कार वाशिंग, सर्विसिंग यूनिट, इंटरनेट फेसिलिटी, कॉफी शाम, बुक स्टोर और टूरिस्ट्स के लिहाज से अन्य सुविधाएं दी जाएंगी। प्राइवेट कंपनियों को स्टोर खोलने के लिए आमंत्रित किया जाएगा।

शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2015

जल्द घट जाएगा दिल्ली-जयपुर का सफर!

राजस्थान में शुरू होंगी 20 हजार करोड़ की परियोजनाएं
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
केंद्र सरकार ने दिल्ली-जयपुर के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग के विकास कार्य की बाधाएं दूर करने का दावा किया है। केंद्र सरकार ने अधूरे पड़े राजमार्ग के काम को जल्द से जल्द पूरा करके जयपुर से दिल्ली के सफर को बेहद आसान बनाने की योजना को अंतिम रूप दे दिया है। मसलन मार्च तक इन दोनों शहरों का सफर मात्र तीन घंटे का रह जाएगा।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार राजस्थान में 20 हजार करोड़ रुपये की सड़क परियोजनाओं को हरी झंडी देने के बाद गुरुवार को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बस में सवार होकर दिल्ली से जयपुर राजमार्ग का जायजा लिया। गड़करी ने स्थलीय निरीक्षण के बाद कहा कि राजस्थान की राजधानी जयपुर और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग का फिलहाल चल रहा चार घंटे का सफर आगामी मार्च 2016 तक तीन घंटे का ही रह जाएगा। इस राजमार्ग के खराब होने के कारण बढ़ रही दुर्घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए गडकरी ने इसके लिए पूर्ववर्ती सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने तर्क दिया कि यह परियोजना वर्ष 2011 में पूरी हो जानी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने विवाद में फंसे राजमार्ग के काम की सभी बाधाओं को दूर कर लिया है और इस महत्वपूर्ण राजमार्ग परियोजना में तीन कामों को छोड़कर फ्लाई ओवरों सहित 57 ढांचों का निर्माण दिसंबर तक पूरा हो जाएगा। उस समय जब इस परियोजना का उद्घाटन होगा। केंद्र सरकार के लिए पिंक सिटी एक्सप्रेसवे परियोजना पूरी करना प्राथमिकता में रही है।

शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2015

नई तकनीक से बिछेगा देश में सड़कों का जाल!


सरकार रोजना बनाना चाहती है 100 किमी सड़क
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
केंद्र सरकार सड़क सुरक्षा की प्राथमिकता के साथ देशभर में सड़कों के निर्माण में नई तकनीक के जरिए तेजी लाने की कवायद में जुटी है। केंद्र सरकार देशभर में सड़कों का जाल बिछाने के लिए रोजाना 100 किमी सड़कों का निर्माण का लक्ष्य तय करने की तैयारी में है।
देश में सड़कों पर हादसों को लेकर चिंतित केंद्र सरकार सड़कों के डिजाइन बदलने के साथ नई तकनीक के जरिए सुरक्षित एवं नए निर्माण को आगे बढ़ाने की तैयारी में है। इसी योजना के खाके में सरकार अगले साल सड़क निर्माण के नए लक्ष्य में रोजना 100 किमी सड़क निर्माण का लक्ष्य तय करने का मन बना रही है, जो अभी तक राजग शासनकाल ने इस साल के अंत तक 30 किमी के लक्ष्य को साधने के 18 किमी तक पहुंचा दिया है। देश में दुनियाभर के देशों की अपेक्षा सबसे ज्यादा होने वाले सड़क हादसों पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र सरकार ने सड़कों के डिजाइन बदलने, सड़कों का चौड़ीकरण करने और नए सड़क निर्माण के लिए तकनीकी प्रणाली को अपनाने का निर्णय लिया है। शायद इसी मकसद को लेकर गुरुवार को राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए सड़क परिसंपत्ति प्रबंधन प्रणाली यानि आरएएमएस पर आयोजित कार्यशाला में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सरकार की भावी योजना को स्पष्ट किया है। नितिन गडकरी ने देश में सड़क क्षेत्र का तेजी से विकास करने की जरूरत पर विशेष देते हुए कहा कि देश की सड़कों पर बढ़ते यातायात के दबाव और दुर्घटनाओं की बढ़ती संख्या के मद्देनजर उनका मंत्रालय एक्सप्रेस हाईवे नेटवर्कों समेत नई सड़कों के निर्माण और मौजूदा सड़कों को चौड़ा करने तथा उनके रख-रखाव एवं मरम्मत की गति को निश्चित तौर पर तेज करने की तैयारी में है। इसके लिए तकनीक को इस्तेमाल में लाया जाएगा।
क्या होगी नई तकनीक
मंत्रालय के अनुसार सुरक्षित सड़क निर्माण के लिए आरएएमएस जैसी एक आधुनिक एवं डिजिटल परिसंपत्ति प्रबंधन प्रणाली के बिना राष्ट्रीय राजमार्गों को विकसित करना संभवन नहीं होगा। यह प्रणाली एक आधुनिक प्रबंधन प्रणाली है, जो सड़क परिसंपत्तियों के 360 डिग्री वाला नक्शा तैयार करने के लिए ‘गगन’ और ‘भुवन’ उपग्रह प्रणालियों का इस्तेमाल करेगा। इससे समय पर सड़कों की मरम्मत करने और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने में आसानी होगी। इस तकनीकी परियोजना से एकत्रित जानकारी परिवहन मंत्रालय, वित्त मंत्रालय, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, राज्य पीडब्लूडी, पुलिस विभाग, आर्थिक सहायता एजेंसियों, डेवलपर्स और नागरिकों के लिए उपयोगी हो जाएगा।
इसरो से होगा करार
सड़कों के निर्माण में ‘गगन’ और ‘भुवन’ उपग्रह प्रणालियों का इस्तेमाल करने के लिए एनएचएआई जल्द ही इसरों के साथ एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करके समझौता करेगा। यह बात एनएचएआई के चेयरमैन राघव चन्द्र ने कहा कि राजमार्गों के कारगर नियोजन, निर्माण, रख-रखाव और वित्तीय प्रबंधन के लिए आरएएमएस वक्त की मांग है। उन्होंने कहा कि हमारी परिसंपत्तियों का समुचित मानचित्रण करने और सभी हितधारकों के साथ इसे साझा करने में गगन (जीपीएस सहायता युक्त भू संवर्धित नैविगेशन)काफी उपयोगी साबित होगा।

मंगलवार, 8 सितंबर 2015

केंद्र ने बिहार में उतारी सड़क परियोजनाएं!

जारी पैकेज के जरिए सड़कों की हालत सुधारने की कवायद
ओ.पी. पाल.
नई दिल्ली।
बिहार में भाजपा की सियासी जमीन मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने योजनाओं को पटरी पर उतारना शुरू कर दिया है। राज्य में राष्ट्रीय राजमार्ग, प्रमुख ब्रिज तथा रेलवे ओवरब्रिज के लिए केन्द्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने 54.713 हजार करोड़ रूपए का पैकेज जारी कर दिया है।
 राजग सरकार में प्रधानमंत्री ने बिहार के विकास के लिए सवा लाख सौ करोड़ रुपये के पैकेज देने की घोषणा के साथ केंद्रीय मंत्रालयों ने अपनी योजनाओं को पटरी पर उतारते हुए कोष का भी पिटारा खोलना शुरू कर दिया। जल संसाधन मंत्रालय और पर्यटन मंत्रालय के बाद केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने भी 54.713 हजार करोड़ रुपये का पैकेज दिया है। इस पैकेज की यह धनराशि बिहार के राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास, महत्वपूर्ण नदियों पर पुल का काम तथा रेलवे ओवरब्रिज के निर्माण और उन सड़को की हालत सुधारने में खर्च की जाएगी, जिससे बिहार के विकास की रμतार बढ़ाई जा सके। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार मंत्रालय द्वारा बिहार में सड़क निर्माण की ऐसी योजनाएं बनाई है। सड़क परियोजनाओं के तहत प्रमुख रूप से महात्मा गांधी सेतु के समानांतर गंगा नदी पर एक नए पुल का निर्माण, कोसी ओर सोन नदी के ऊपर पुल का निर्माण, धार्मिक पर्यटन से जुड़े क्षेत्रों में सड़कों का निर्माण और रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण शामिल है। वहीं ग्रामीण सड़क के विकास के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत 22,500 किलोमीटर सड़क के निर्माण हेतु 13,820 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

शुक्रवार, 10 जुलाई 2015

सड़क निर्माण की रफ्तार में रोड़ा भूमि अधिग्रहण!

सरकार को भूमि अधिग्रहण पास होने का इंतजार
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।

देशभर के दूर-दराज के इलाकों को राष्ट्रीय राजमार्गो से जोड़ने वाली सड़क परियोजनाओं को तेजी के साथ पूरा करना मोदी सरकार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। सरकार को उम्मीद है कि भूमि अधिग्रहण विधेयक पारित होने के बाद देशभर में सड़क परियोजनाओं को पूरा करने में मदद मिलेगी, जिसमें अनेक महत्वपूर्ण सड़क परियोयजनाओं को शुरू करने के लिए भूमि अधिग्रहण की बाधा सरकार के सामने खड़ी हुई है। 
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार मोदी सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्गो और अन्य सड़क परियोजनाओं में निर्माण की गुणवत्ता को प्राथमिकता के मानक पर रखा है। सरकार के प्रतिदिन 30 किलोमीटर सड़क निर्माण के लक्ष्य के आधे से ज्यादा रास्ते यानि प्रतिदिन 15 किमी से ज्यादा सडक बनाने का काम किया जा रहा है। इस लक्ष्य के साथ सरकार पहले ही 40 हजार करोड़ रुपये की सड़क परियोजनाओं को मंजूरी दे चुकी है। सरकार पर्यावरण जैसी मंजूरी की बाधाओं को तो कहीं हद तक दूर करने में आगे बढ़ी है, लेकिन कई ऐसी महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं के बीच भूमि अधिग्रहण की बाधा अभी मुहं बाए खड़ी हुई है। मंत्रालय की माने तो भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को परियोजनाएं पूरी करने में फिलहाल भूमि अधिग्रहण की समस्या सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। पर्यावरण की मंजूरी के बिना लंबित पड़ी ऐसी परियोजनाओं को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकारण पूरा करने में जुटा हुआ है। मंत्रालय के अनुसार संसद में लंबित भूमि अधिग्रहण के मद्देनजर सरकार ने यह भी निर्णय लिया है कि जब तक बीओटी (बनाओ,चलाओ, सौंप दो) परियोजनाओं के लिए कम से कम 80 फीसदी और ईपीसी (इंजीनियरिंग-खरीद-निर्माण) परियोजनाओं के लिए कम से कम 90 फीसदी भूमि अधिग्रहित नहीं कर ली जाती, तब तक ऐसी किसी भी सड़क परियोजना का कार्य प्राधिकरण को नहीं सौंपा जाएगा। मसलन सरकार को ऐसी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए अब भूमि अधिग्रहण के संशोधनोें को मंजूरी मिलने का इंतजार है, जो संसद की संयुक्त समिति के पास है और उम्मीद है कि समिति की रिपोर्ट आने के बाद सरकार भूमि अधिग्रहण विधेयक को पारित कराने का हरसंभव प्रयास करेगी।