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सोमवार, 9 नवंबर 2015

मुख्यमंत्रियों के हैट्रिक क्लब में शामिल हुए नीतीश!

हैट्रिक क्लब के पीएम बनने वाले मोदी अकेले सीम रहे
हरिभूमि ब्यूरो
. नई दिल्ली।
बिहार विधानसभा में ऐतिहासिक जीत हासिल करने वाले महागठबंधन का नेतृत्व कर रहे जदयू नेता नीतीश कुमार का तीसरी बार मुख्यमंत्री बनना तय हो चुका है। बिहार में मुख्यमंत्री के रूप में हैट्रिक बनाने वाले नीतिश कुमार ऐसे 12वें मुख्यमंत्री होंगे, जिन्होंने लगातार तीन या उससे ज्यादा चुनाव में मुख्यमंत्री का पद संभाला होगा।
बिहार में ताजा चुनाव से पहले भाजपा के साथ गठजोड़ और गठजोड़ टूटने के बाद नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री पद पर विराजमान है। रविवार को विधानसभा 2015 के महागठबंधन को मिले बहुमत में नीतीश कुमार को पहले से ही मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया हुआ है, जिसके लिए वे नतीजे आने के बाद मुख्यमंत्री पद की कुर्सी संभालने को तैयार हैं। बिहार चुनाव में महागठबंधन के जीत के बाद नीतीश कुमार का एक बार फिर राज्य के मुख्यमंत्री बनते ही हैट्रिक बनाने वाले क्लब में शामिल हो जाएंगे। इससे पहले ऐसे 11 नेता रहे जो लगातार तीन या उससे ज्यादा किसी न किसी राज्य के मुख्यमंत्री रहे हैं या फिलहाल पद पर विराजमान हैं। हैट्रिक लगाने वाले मुख्यमंत्रियों में शुमार तमिलनाडु में वर्ष 1954 से 1963 तक के. कामराज भी लगातार तीन बार मुख्यमंत्री रहे। ऐसे ही छत्तीसगढ़ के मौजूदा मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री पद पर कार्यरत है, जो वर्ष 2003 से लगातार तीन चुनावों में भाजपा को जीत दिलाकर इस पद पर अभी तक हैट्रिक के साथ विराजमान हैं। इसी दायरे में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान आते हैं जो वर्ष 2005 से लगातार तीसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री पद पर बने हुए हैं। हैट्रिक लगाने वाले मुख्यमंत्रियों में दिल्ली में वर्ष 1988 से 2008 तक लगातार कांग्रेस सरकार में मुख्यमंत्री रही श्रीमती शीला दीक्षित का नाम भी शामिल है। यही नहीं 16वीं लोकसभा के चुनाव में केंद्र की सत्ता में आई राजग के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी गुजरात में लगातार तीन बार मुख्यमंत्री के रूप में हैट्रिक वालों के क्लब के सदस्य रहे हैं। मोदी वर्ष 2002 से 2014 तक गुजरात के मुख्यमंत्री पद पर थे। इसी प्रकार मणिपुर के ओबराम इबीबो सिंह वर्ष 2002 से अभी तक लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री बने हुए हैं। कांग्रेस की असम सरकार में हैट्रिक लगाकर तरुण गोगोई भी वर्ष 2001 से लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री पद का कार्यभार संभाले हुए हैं। हालांकि ऐसे क्लब में तमिलनाडु की जयललिता को भी तीन बार बारी से मुख्यमंत्री बनने का श्रेय है, जिन्होंने पहली बार 1991, फिर 2001 और फिर 2011 में तीसरी बार मुख्यमंत्री बनी।

मंगलवार, 8 सितंबर 2015

केंद्र ने बिहार में उतारी सड़क परियोजनाएं!

जारी पैकेज के जरिए सड़कों की हालत सुधारने की कवायद
ओ.पी. पाल.
नई दिल्ली।
बिहार में भाजपा की सियासी जमीन मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने योजनाओं को पटरी पर उतारना शुरू कर दिया है। राज्य में राष्ट्रीय राजमार्ग, प्रमुख ब्रिज तथा रेलवे ओवरब्रिज के लिए केन्द्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने 54.713 हजार करोड़ रूपए का पैकेज जारी कर दिया है।
 राजग सरकार में प्रधानमंत्री ने बिहार के विकास के लिए सवा लाख सौ करोड़ रुपये के पैकेज देने की घोषणा के साथ केंद्रीय मंत्रालयों ने अपनी योजनाओं को पटरी पर उतारते हुए कोष का भी पिटारा खोलना शुरू कर दिया। जल संसाधन मंत्रालय और पर्यटन मंत्रालय के बाद केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने भी 54.713 हजार करोड़ रुपये का पैकेज दिया है। इस पैकेज की यह धनराशि बिहार के राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास, महत्वपूर्ण नदियों पर पुल का काम तथा रेलवे ओवरब्रिज के निर्माण और उन सड़को की हालत सुधारने में खर्च की जाएगी, जिससे बिहार के विकास की रμतार बढ़ाई जा सके। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार मंत्रालय द्वारा बिहार में सड़क निर्माण की ऐसी योजनाएं बनाई है। सड़क परियोजनाओं के तहत प्रमुख रूप से महात्मा गांधी सेतु के समानांतर गंगा नदी पर एक नए पुल का निर्माण, कोसी ओर सोन नदी के ऊपर पुल का निर्माण, धार्मिक पर्यटन से जुड़े क्षेत्रों में सड़कों का निर्माण और रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण शामिल है। वहीं ग्रामीण सड़क के विकास के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत 22,500 किलोमीटर सड़क के निर्माण हेतु 13,820 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

रविवार, 5 जुलाई 2015

राग दरबार- पीछे छूट गए बेचारे लालू

सेक्यूलर सूरमाओं का हिंदू तुष्टिकरण
भारत की राजनीति भी गजब है, जहां सियासत के लिए राजनीतिक दल अपने सिद्धांत और मर्यादाओं को भी ताक पर रखने में पीछे नहीं रहते। बिहार में आने वाले दिनों में विधानसभा चुनाव सिर पर हैं और धर्मनिरपेक्षता का चोला पहने सियासी दल भाजपा को सांप्रदायिक बताकर अपना उल्लू सीधा करना तो चाहते हैं, लेकिन शायद यह भाजपा का बढ़ता दबाव ही हो सकता है कि सेक्यूलर सूरमाओं को भी अब हिंदू तुष्टिकरण की जरूरत महसूस होती नजर आ रही है। बिहार के सुशासन बाबू के नाम से मशहूर होते नीतीश कुमार द्वारा सियासी जमीन का दायरा बढ़ाने की गरज में शुरू किया गया है ‘दस्तक अभियान’ और इसका आगाज करने का तरीका ही शायद उन्हें हिंदू तुष्टिकरण की तरफ खींच लाया। मसलन घर-घर दस्तक का आगाज नीतीश बाबू ने जिस तरह मत्था टेक कर नारियल फोड़ने देवी मंदिर पहुंचे, उसे देख कर तो यही कहा जा सकता है कि धर्मनिरपेक्षता के सुरमाओं ने अब भाजपा की सियासी राह को पकड़ना शुरू कर दिया है। राजनीति के गलियारों में ही नहीं सोशल मीडिया में सेक्यूलर सुरमाओं के हिंदू तुष्टिकरण की याद ताजा होती नजर आ रही है। बिहार की सियासत की बात की जाए तो यूं भी कहा जा सकता है कि इस बार का बिहार चुनाव पूरी तरह मोदी और नीतीश के रंग से सराबोर होगा। इसका कारण भी साफ है कि लालू ने जैसे ही नीतीश कुमार को नेता माना वैसे ही सुशासन बाबू ने ‘बढ़ चला बिहार’ का नारा देकर पूरा चुनाव प्रचार हाइजेक कर लिया। सोशल मीडिया पर तो ऐसी टिप्पणी भी सामने आई कि बिहार में समय की पहचान अब होने लगीं हैं, तभी लालू को साथ नहीं लिया गया, कहीं भगवान जी पहचान लेंगे, तो सेक्यूलर सुरमाओं का कबाडा हो जायेगा। अब पर्चे पर चर्चा हो या दरवाजे पर दस्तक, जिधर भी निगाह पड़ेगी उधर ही नीतीश बाबू ही नजर आएंगे और बेचारे लालू तो पीछे छूट गये..। समय की पहचान अब होने लगीं हैं, तभी लालू को साथ नहीं लिया गया, कहीं भगवान जी पहचान लेंगे, तो कबाडा हो जायेगा?

गुरुवार, 25 जून 2015

बिहार चुनाव में ऐसे नैया पार करेगी भाजपा!


केंद्र सरकार ने बिहार के लिए खोलना शुरू किया पिटारा
सिताब दायरा में बनेगा जेपी की स्मृति में राष्ट्रीय संग्रालय
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
केंद्र सरकार ने आपातकाल के खिलाफ देश की जनता की आवाज बुलंद करने वाले लोकनायक जयप्रकाश नारायण के सम्मान में उनकी स्मृति में छपरा जिले के जेपी की जन्मस्थली पर एक राष्ट्रीय स्तर का संग्राहलय और एक ऐसा संस्थान खोलने का निर्णय लिया है, जहां उनकी राष्ट्र निर्माण में भूमिका व गांधी के विचारों का अध्ययन व अनुसंधान हो सके।
केंद्र सरकार के इस फैसले को आपातकाल के चालीस साल होने के बहाने बिहार में होने वाले आगामी विधानभा चुनावों की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसकी तैयारी में सियासी जमीन की खातिर सभी राजनीतिक दल अपनी रणनीतियां बनाने में जुटे जुटे हुए हैं। भाजपा को बिहार में सियासी जमीन की बिसात को मजबूत करने के लिए अपनी केंद्र सरकार का ही सहारा नजर आ रहा है। भाजपानीत केंद्र सरकार भी बिहार के लिए सौगातों का पिटारा खोलती नजर आ रही है। हाल ही में वित्तमंत्री अरुण जेटली के बिहार को हर संभव वित्तीय मदद के बयान के बाद बुधवार को केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में लोकनायक जयप्रकाश नारायण के सम्मान में एक बड़ा फैसला लिया गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में आपातकाल के चालीस साल पूरे होने पर समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण की स्मृति में छपरा जिले में सिताब दायरा गांव में राष्ट्रीय स्तर संग्रालय तथा एक ऐसा संस्थान की स्थापना का निर्णय लिया, जिसमें आपातकाल के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाकर जनता की आवाज बुलंद करने राष्ट्र निर्माण में लोकशाही व लोकतंत्र को बहाल करने में अहम भूमिका निभाने वाले लोकनायक जय प्रकाश नारायण पर अध्ययन और अनुसंधान भी हो सके। केंद्र सरकार के फैसले की जानकारी देते हुए गृहमंत्री राजनाथ ने लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने राष्ट्र निर्माण में पंयाचत की भूमिका व गांधी के विचार पर व्यापक अध्ययन किया है, जिसकी तमाम स्मृतियों को समेटा जाएगा और उनकी कृतियों को सभी भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराया जाएगा। लोकनायक जयप्रकाश स्मृति परिसर में उनके नाम से स्थापित होने वाले संस्थान के साथ उनके गांव में महिलओं द्वारा संचालित राष्ट्रीय ध्वज के निर्माण के लिए एक लोकनायक खादी गौरव संवर्धन केंद्र की भी स्थापना की जाएगी। इसके लिए बिहार सरकार से जमीन उपलब्ध कराने की जल्द कार्यवाही शुरू कर दी जाएगी।
नीतीश ने भी मारा नहले पर दहला
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य को विशेष दर्जा और आर्थिक सहायता देने की मांग दोहराते हुए फिर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखा। जिमसें मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार को 'कॉपरेटिव फेडरेलिज्म' की याद दिलाते हुए जनता की आकांक्षाओं को पूर्ण करने वाले प्रस्तावों पर फौरन कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने इस पत्र में वित्त मंत्री अरुण जेटली के कैलिफोर्निया (अमेरिका) के हालिया उस बयान का भी जिक्र किया जिसें वित्त मंत्री ने बिहार को आपार संभावनाओं वाला राज्य बताते हुए देश के न्यायोचित विकास के लिए बिहार की मदद जरुरी बताया है।
25June-2015