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सोमवार, 14 दिसंबर 2015

उपग्रह से होगी परिवहन व्यवस्था की निगरानी!

सड़क हादसों पर काबू करने की कवायद
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
दुनियाभर में सड़क हादसों में भारत में हो रही सर्वाधिक मौतों को काबू करने की कवायद में जुटी केंद्र सरकार विभिन्न योजनाओं में में ही एक फार्मूला तैयार किया है। जिसके जरिए भीड़भाड़ वाले शहरों और उसके आसपास की सड़कों पर आसमान में उपग्रह के जरिए यातायात व्यवस्था पर पैनी नजर रखी जा सकेगी।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार मंत्रालय ने सड़कों की आसमान से कैमरों के जरिए निगरानी रखने के लिए एक पायलेट परियोजना शुरू करने का खाका तैयार करके काम शुरू कर दिया है। सरकार के इस फार्मूले के तहत पहले चरण में उन शहरों को शामिल किया गया है जिनकी आबादी पांच लाख या उससे ज्यादा है। मंत्रालय के अनुसार इस फार्मूले का मकसद सड़क हादसों को रोकने और यातायात व्यवस्था में सुधार लाना है। इस नई व्यवस्था को लागू करने से यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले उन लोगों पर शिकंजा कसा जा सकेगा, जो पुलिस के चालान को अदालत में चुनौती देकर बचते रहे हैं। अब सरकार ने यातायात नियमों के उल्लंघन को रिकार्ड करने के लिए उपग्रहों से जुड़े कैमरे लगाने की योजना शुरू की है। इससे यदि अदालत में चुनौती देने वाला व्यक्ति यातायात नियमों के उल्लंघन का दोषी पाया गया तो उससे दोगुना जुर्माना वसूल किया जाएगा। केंद्र सरकार का मानना है कि इससे जहां यातायात व्यवस्था में सुधार होगा, वहीं सड़क हादसों में भी कमी आएगी। इसके अलावा पुलिस पर वाहन चालकों को तंग करने की शिकायते कम होने से भ्रष्टाचार पर भी लगाम लग सकेगी। एक अध्ययन में पाया गया है कि देश में यातायात नियम तोड़ने वालों में 30 फीसदी लोग चालान के खिलाफ अदालत में चले जाते हैं। इस नई व्यवस्था लागू होने से अब पुलिस या परिवहन प्राधिकरण को भी दोष साबित करने में मशक्कत नहीं करनी पडेगी।

सोमवार, 23 नवंबर 2015

जीएसटी विधेयक पर यू-टर्न ले सकता है जदयू

संसद के शीतकालीन सत्र में सरकार को मिलेगा समर्थन
हरिभूमि ब्यूरो. नयी दिल्ली।
बिहार चुनावों में महागठबंधन को मिली भारी जीत की गूंज संसद के शीतकालीन सत्र की में भी सुनाई देने की संभावना के बीच जनता दल यूनाइटेड की ओर से ऐसे संकेत दिए जा रहे हैं कि जिस जीएसटी विधेयक को इसने शुरुआत में समर्थन दिया था, अब यह उस मुद्दे पर व्यापक विपक्षी एकता के साथ खड़ा हो सकता है। केंद्र की दलील है कि वस्तु एवं सेवा कर को लाने से बिहार जैसे उपभोक्ता राज्यों को लाभ मिलेगा और पिछले 10 साल से बिहार में शासन कर रहे जदयू द्वारा इसे समर्थन दिए जाने के पीछे की एक बड़ी वजह यही थी।बिहार में राजग की करारी हार के बाद विपक्षी दलों के उत्साह के बीच, जदयू के वरिष्ठ नेताओं ने कहा है कि वे अन्य दलों के साथ विचार-विमर्श करने के बाद ही इस बारे में अंतिम फैसला करेंगे। जदयू के एक सांसद ने कहा कि अब परिस्थितियां नई हैं। हम अन्य विपक्षी दलों के साथ विचार विमर्श करने के बाद फैसला लेंगे। महागठबंधन की घटक कांग्रेस ने इस विधेयक के कुछ प्रावधानों का विरोध किया है और इसने संसद के मानसून सत्र में भाजपा के कुछ शीर्ष नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोपों समेत कई मुद्दे उठाकर इस विधेयक के पारित होने के रास्ते में अवरोध पैदा कर दिया था।
 जदयू और लालू प्रसाद की राजद के नेताओं ने कहा है कि आने वाले दिनों में अंतिम फैसला लिया जाएगा। राजद ने 10 साल के बाद बिहार की सत्ता में वापसी की है। दोनों क्षेत्रीय दलों का मानना है कि चूंकि कांग्रेस सबसे बडा विपक्षी दल है, इसलिए इस विधेयक पर उसकी चिंताओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए। जीएसटी विधेयक सभी अप्रत्यक्ष करों को सम्मिलित करके एक ही दर पर ले आएगा और देश को एकीकृत करके एकल बाजार के रुप में परिवर्तित करेगा। इस विधेयक को लोकसभा में मंजूरी मिल चुकी है और राज्यसभा में इसे मंजूरी मिलनी अभी बाकी है। राज्यसभा में जदयू के 12 सदस्य हैं. वहां एनडीए के पास बहुमत का काफी अभाव है। राजद के पास वहां महज एक ही सांसद है. जदयू का प्लान है कि इस मुद्दे पर बीजेपी को संसद में पूरी तरह घेर लिया जाए। भाजपा का महत्वाकांक्षी जीएसटी विधेयक संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान प्रमुख मुद्दों में से एक रहेगा। सत्र की शुरुआत 26 नवंबर से होनी है।महागठबंधन की घटक कांग्रेस ने इस विधेयक के कुछ प्रावधानों का विरोध किया है और इसने संसद के मानसून सत्र में भाजपा के कुछ शीर्ष नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोपों समेत कई मुद्दे उठाकर इस विधेयक के पारित होने के रास्ते में अवरोध पैदा कर दिया था। 
23Nov-2015

रविवार, 18 अक्टूबर 2015

ई -मोड़ में बदलेगी देश की परिवहन प्रणाली!

संसद के आगामी सत्र में रखा जाएगा प्रस्ताव
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
देश में बढ़ते र्इंधन के खर्च और प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने एक मेगा योजना का खाका तैयार किया है, जिसमें देशभर में चलने वाली डीजल और पेट्रोल चलित वाहनों को दो साल में इलेक्ट्रिक मोड पर लाने का लक्ष्य रखा गया है।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की हरित राजमार्ग नीति का मकसद यही है कि देशभर के राष्ट्रीय राजमार्गो एवं अन्य सड़कों को हराभरा बनाकर पर्यावरण को बढ़ावा दिया जाए। इसी के साथ सड़कों पर दौड़ने वाले वाहनों को भी वैकल्पिक र्इंधन से जोड़ने की मेगा योजना में निर्णय लिया गया है कि दो साल के भीतर देशभर में डीजल व पेट्रोल से चलने वाले लाखों वाहनों को इलेक्ट्रिक यानि ई-वाहनों में तब्दील कर दिया जाए, जिससे प्रदूषण की समस्या से निपटा जा सकेगा और वहीं र्इंधन पर होने वाले खर्च की लागत भी कम हो सकेगी। मंत्रालय के अनुसार केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी ने इस योजना के तहत इसरो के साथ करार को भी अंतिम रूप दे दिया है, जो लिथियम इओन बैटरी तैयार करेगा, जो वैज्ञानिक पद्धति पर चार्ज होगी और इसे कनवर्ट करके हर प्रकार के परिवहन वाहन में इस्तेमाल की जा सकेगी। मंत्रालय का अनुमान है कि ऐसे ई-वाहन की लागत भी कम हो जाएगी। सरकार को उम्मीद है कि दो साल के भीतर कम से कम 1.5 लाख बसों जैसे वाहनों को इलेक्ट्रिक मोड पर लाने की तैयारी है और इसमें सफलता मिल जाएगी। गडकरी ने पहले भी इस परिवहन प्रणाली को लागू करने पर कुछ अन्य मंत्रालयों से भी विचार-विमर्श किया है, जिसके लिए मंत्रालय में एक मसौदा भी तैयार किया जा रहा है। इस मसौदे को एक प्रस्ताव के रूप में संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में संसद में अन्य दलों से भी सुझाव लेने के लिए चर्चा कराने की तैयारी की जा रही है।

शनिवार, 17 अक्टूबर 2015

अमेरिकी विमानन कंपनी-बोइंग भारत में बनाएगी विमान!

मेक इन इंडिया से जुड़ने पर जताई सहमति
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
दुनियाभर में दिग्गज विमान निर्माता कंपनियों में शुमार अमेरिकी बोइंग विमानन कंपनी ने मोदी सरकार के मेक इन इंडिया अभियान से जुड़ने पर सहमति जताई है, जिसके तहत यह कंपनी भारत में अपाचे लडाकू हेलीकाप्टर या चिनूक हैवी लिफ्ट हेलीकाप्टर का निर्माण कर सकती है।
नागर विमानन मंत्रालय के सूत्रों ने यह जानकारी देते हुए बताया कि अमेरिकी विमानन कंपनी बोइंग के चेयरमैन जेम्स मैकनर्नी ने मेक इन इंडिया अभियान के साथ सहमति जताते हुए कहा कि उनकी कंपनी अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टर या चिनूक चॉपर को भारत में ही असेम्बल करने पर विचार कर रही है। इस सहमति से फ्रांसीसी राफेल लड़ाकू विमानों के सौदे में बदलाव के बाद अब अचानक दुनिया की सबसे बड़ी विमान निमार्ता कंपनी बोईंग ने अत्याधुनिक लड़ाकू विमान का भारत में निर्माण करने की योजना का खुलासा किया। बोईंग के चेयरमैन जेम्स मैकनर्नी का यहां तक कहना है कि उनकी कंपनी भारत में लड़ाकू विमान का निर्माण करने के लिए तैयार है, और उससे भारत को भी वह तकनीक मिल जाएगी, जिसका निर्माण के क्षेत्र में कहीं भी इस्तेमाल किया जा सकेगा। मैकनर्नी ने कहा कि भारत के लिए 'मेक इन इंडिया' बेहद महत्वपूर्ण पहल है। दरअसल बोईंग ने एफ-18 हॉरनेट जैसे लड़ाकू विमान बनाए हैं, जो राफेल का सौदा पक्का होने से पहले भारत द्वारा पसंद किए जाने वाले विमानों की दौड़ में शामिल थे। भारत का मानना है कि अब भारतीय वायुसेना को बहुत-से ऐसे विमानों की जरूरत है, जिनमें इंटरसेप्शन, जमीनी हमले तथा हवाई सुरक्षा से जुड़ी तकनीक मौजूद हों। ऐसे में बोइंग के मेक इन इंडिया से जुड़ने से इन जरूरतों को पूरा करना आसान हो सकता है। मैकनर्नी ने यह भी कहा कि वह भारत के साथ अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में भी साझीदारी करना चाहते हैं। उनका मानना है कि बहुत-से क्षेत्रों में भारत से साझीदारी के विकल्प उस समय काफी बढ़ गए थे, जब भारत और अमेरिका के बीच नागरिक परमाणु समझौता हुआ था। गौरतलब है कि पिछले माह ही बोईंग को भारत की ओर से 37 सैन्य हेलीकॉप्टरों जिनमें 22 अपाचे और 15 चिनूक हेलीकॉप्टर शामिल है की आपूर्ति का तीन अरब अमेरिकी डॉलर का आॅर्डर मिला है।
हेलीकाप्टर उद्योग को बढ़ावा देगी सरकार!
नई विमानन नीति में शामिल होगी मेगा योजना
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
केंद्र सरकार द्वारा हवाई सेवाओं की आम आदमी तक पहुंच बनाने की दिशा में नई नागर विमानन नीति में ऐसी मेगा योजना को भी शामिल करने करने का निर्णय लिया है, जिसके जरिए देश में हेलीकाप्टर उद्योग को बढ़ावा मिल सके। सरकार का मकसद है कि खासकर पूर्वोत्तर राज्यों के पहाड़ी इलाकों में हेलीकाप्टर सेवाओं का आवागमन सहजता से बढ़ाया जा सके।

रविवार, 13 सितंबर 2015

जीएसटी लागू करने की कवायद में सरकार!

सहमति बनते ही बुलाया जाएगा संसद का शीत सत्र
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
केंद्र सरकार का देश में आगामी एक अप्रैल को जीएसटी लागू करने का इरादा है। गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) विधेयक के मुद्दे पर जहां सरकार ने प्रशासनिक तैयारिया तेज कर दी है, वहीं सरकार के कुछ वरिष्ठ मंत्री विपक्षी दलों के साथ बातचीत करके आम सहमति बनाने में जुटे हैं। ऐसी भी संभावना है कि यदि आम सहमति बन जाती है तो संसद का शीतकालीन सत्र निर्धारत समय से पहले बुलाकर जीएसटी को अंजाम तक पहुंचाया जा सकता है।
संसद के मानसून सत्र के दौरान प्रवर समिति की जांच से गुजकर राज्यसभा में आने के बावजूद जीएसटी विधेयक को भले ही विपक्षी दलों ने रोक दिया हो, लेकिन सरकार आगामी वित्तीय वर्ष में एक अप्रैल को जीएसटी लागू करने के लिए प्रतिबद्धता की बात बार-बार दोहरा रही ही है। शायद इसी इरादे के तहत वित्त मंत्रालय और संबन्धित विभागों में जीएसटी को लेकर प्रशासनिक तैयारियां तेजी से चल रही है। सूत्रों के अनुसार जीएसटी विधेयक लागू करने की परिकल्पना पूर्ववर्ती यूपीए सरकार की है, लेकिन सत्ता बदलने के बाद यूपीए का नेतृत्व कर रही कांग्रेस पार्टी ही इस विधेयक के विरोध में आकर रोड़ा बनी हुई है। इस विधेयक को अंजाम तक पहुंचाने के लिए मोदी सरकार कितनी गंभीर है इसका अंदाजा इसी बात से लगता है कि कुछ वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री लगातार विपक्षी दलों के साथ इस मुद्दे पर बातचीत करने में जुटे हुए हैं। इस बात के संकेत शनिवार को स्वयं संसदीय कार्य मंत्री एम. वेंकैया नायडू ने देते हुए कहा कि कि कांग्रेस के नेताओं से हुई बातचीत से संभावना है कि इस मुद्दे पर सभी राजनीतिक दलों की सहमति बन जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि आम सहमति बन जाती है तो जीएसटी को पारित कराने के लिए समय से पहले ही संसद का शीतकालीन सत्र बुलाया जा सकता है। उनकी उम्मीद का तर्क था कि विपक्षी दलों ने कोयला विधेयक और खनन विधेयक का भी विरोध किया था, लेकिन
जब सरकार ने उनसे बातचीत की तो उन्होंने समर्थन करके इन विधेयकों को पारित कराया। गौरतलब है कि तृणमूल कांग्रेस जीएसटी के समर्थन का पहले ही ऐलान कर चुकी है।

गुरुवार, 10 सितंबर 2015

ऐसे दूर नहीं होगी लोक लेखा समितियों की चुनौतियां!

छत्तीसगढ़ विस की पीएसी का काम बेहतर 
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
संसद या राज्य विधानसभा की लोक लेखा समितियों के सामने समीक्षा के लिए आने वाली कैग रिपोर्टो की समीक्षा में आने वाली चुनौतियों को दूर करने के लिए संसद को बदलाव करने की जरूरत है। यह बात छत्तीसगढ़ विधानसभा की लोक लेखा समिति के अध्यक्ष सत्य नाराण शर्मा ने हरिभूमि से बातचीत के दौरान कही।
यहां संसदी सौंध में आयोजित संसद और राज्य विधानमंडलों की पीएसी अध्यक्षों के सम्मेलन में हिस्सा ले रहे छत्तीसगढ़ विधानसभा की लोक लेखा समिति अध्यक्ष सत्य नारायण शर्मा ने बेबाक कहा कि पीएसी के लिए संसद या विधानसभा के दायरे में अलग से सचिवालय होना जरूरी है, जहां पर्याप्त संसाधन और स्टॉफ दिया जाना चाहिए। उनका कहना था कि पीएसी के नियमों में आमूल चूल परिवर्तन करने के लिए संसद को राज्यों को भी दिशा निर्देश जारी करके ऐसी व्यवस्था कायम करने की जरूरत है जिससे लोक लेखा समितियों की भूमिका को सार्थक बनाया जा सके। मसलन पीएसी को सौंपी जाने वाली कैग रिपोर्ट की समीक्षा के लिए लंबित पड़े मामलों के निपटान के लिए उप समितियों का गठन करने का भी अधिकार दिया जाना चाहिए। हालांकि मौजूदा केंद्र सरकार ने संसद की पीएसी की सिफारिश पर नई प्रणाली शुरू करने का ऐलान किया है यह अच्छी बात है। शर्मा ने कहा कि जैसा कि सम्मेलन में पीएसी के आधारभूत ढांचे को मजबूत बनाने के लिए सरकारों को बजट का प्रावधान भी रखना चाहिए। उनका मानना है कि पीएसी में विभिन्न दलों द्वारा भेजे जाने वाले सदस्यों को सक्रिय रखने की हिदायद दी जानी चाहिए।
छत्तीसगढ़ अव्वल
लोक लेखा समिति के अध्यक्ष सत्य नारायण शर्मा ने दावा कि शायद देशभर में छत्तीसगढ़ ही ऐसा राज्य है जहां विधानसभा की लोक लेखा समिति सहजता के साथ चुनौतियों का सामना करने में सक्षम है। इस बारे में पूछे गये सवाल पर उन्होंने कहा कि उनकी अध्यक्षता वाली लोक लेखा समिति का कार्य सबसे बेहतर इसलिए कहा जा सकता है कि उसकी हर बैठक में सदस्यों की संख्या शत प्रतिशत रही है और समिति में दलगत राजनीति से अलग कैग की रिपोर्ट के महत्वपूर्ण पैरों का चयन करके उन पर सार्थक चर्चा की जाती है। अन्य चुनौतियों के बारे में शर्मा ने कहा कि सरकारों की ओर से प्रतिवेदनों में की जाने वाली सिफारिशों पर इतना विलंब होता आ रहा है कि जिम्मेदार अधिकारी या दोषी व्यक्ति संबन्धित विभाग में नहीं होता या फिर वह सेवानिवृत्त हो जाता है। इसलिए जरूरी है कि समय सीमा का निर्धारण करना जरूरी है, ताकि जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ समुचित कार्रवाही अमल में लाई जा सके।

मंगलवार, 8 सितंबर 2015

केंद्र ने बिहार में उतारी सड़क परियोजनाएं!

जारी पैकेज के जरिए सड़कों की हालत सुधारने की कवायद
ओ.पी. पाल.
नई दिल्ली।
बिहार में भाजपा की सियासी जमीन मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने योजनाओं को पटरी पर उतारना शुरू कर दिया है। राज्य में राष्ट्रीय राजमार्ग, प्रमुख ब्रिज तथा रेलवे ओवरब्रिज के लिए केन्द्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने 54.713 हजार करोड़ रूपए का पैकेज जारी कर दिया है।
 राजग सरकार में प्रधानमंत्री ने बिहार के विकास के लिए सवा लाख सौ करोड़ रुपये के पैकेज देने की घोषणा के साथ केंद्रीय मंत्रालयों ने अपनी योजनाओं को पटरी पर उतारते हुए कोष का भी पिटारा खोलना शुरू कर दिया। जल संसाधन मंत्रालय और पर्यटन मंत्रालय के बाद केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने भी 54.713 हजार करोड़ रुपये का पैकेज दिया है। इस पैकेज की यह धनराशि बिहार के राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास, महत्वपूर्ण नदियों पर पुल का काम तथा रेलवे ओवरब्रिज के निर्माण और उन सड़को की हालत सुधारने में खर्च की जाएगी, जिससे बिहार के विकास की रμतार बढ़ाई जा सके। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार मंत्रालय द्वारा बिहार में सड़क निर्माण की ऐसी योजनाएं बनाई है। सड़क परियोजनाओं के तहत प्रमुख रूप से महात्मा गांधी सेतु के समानांतर गंगा नदी पर एक नए पुल का निर्माण, कोसी ओर सोन नदी के ऊपर पुल का निर्माण, धार्मिक पर्यटन से जुड़े क्षेत्रों में सड़कों का निर्माण और रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण शामिल है। वहीं ग्रामीण सड़क के विकास के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत 22,500 किलोमीटर सड़क के निर्माण हेतु 13,820 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

सोमवार, 31 अगस्त 2015

भूमि बिल के दायरे में आए 13 केंद्रीय कानून!

भूमि विधेयक पर मोदी सरकार का यूटर्न
यूपीए सरकार की शर्तो को किया पूरा
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
संसद में बहुचर्चित एवं विवादित भूमि अधिग्रहण विधेयक को विपक्ष के विरोध के कारण अंजाम तक पहुंचाने में नाकाम रही मोदी सरकार को आखिर यूटर्न लेने के लिए मजबूर होना पड़ा। मसलन केंद्र सरकार ने यूपीए सरकार के भूमि अधिग्रहण विधेयक-2013 में अधूरे रह गये उन तेरह केंद्रीय प्रावधानों को शामिल करने के आदेश जारी कर दिये हैं। एक तरह से यह आदेश को जारी करके मोदी सरकार ने यूपीए सरकार अधूरे वादे को ही पूरा करने का रास्ता अपनाया है।
मोदी सरकार ने रविवार को ही राष्ट्रीय राजमार्ग, पुरातत्व अधिनियम और रेलवे अधिनियम जैसे 13 केंद्रीय अधिनियमों को भूमि अधिग्रहण अधिनियम के दायरे में लाने का आदेश जारी कर दिये है। इन अधिनियमों के तहत जमीन अधिग्रहण के लिए यूपीए सरकार द्वारा वर्ष 2013 में जारी भूमि अधिग्रहण कानून ही लागू होगा, जिसके दायरे में उन 13 केंद्रीय अधिनियमों को शामिल करने के आदेश दिये गये हैं, जिन्हें यूपीए सरकार एक साल के भीतर लागू करना चाहती थी। मसलन मोदी सरकार इस मुद्दे पर विपक्षी दलों के दबाव में पूरी तरह से यूटर्न लेती नजर आ रही है, जिसके बाद सरकार को चौथी बार भूमि अधिग्रहण अध्यादेश लाने की भी जरूरत नहीं है और तत्काल लागू किये गये 13 केंद्रीय कानूनों के तहत ही अब भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। अब मोदी सरकार के जारी नए आदेश के बाद 13 केंद्रीय कानूनों के तहत ही भूमि का अधिग्रहण होगा। वहीं भूमि अधिग्रहण के सभी मामलों में उचित मुआवजा, पुनर्वास और पुनर्स्थापन संबंधित प्रावधान लागू होंगे, जो अभी तक भूमि अधिग्रहण कानून में ऐसी व्यवस्था नहीं थी। इस आदेश के बाद विवादास्पद भूमि अधिग्रहण अध्यादेश को चौथी बार जारी करने की आवश्यकता नहीं होगी, जिसकी मियाद कल सोमवार को खत्म होने जा रही है।

गुरुवार, 13 अगस्त 2015

कसौटी पर खरा नहीं उतरा जीएसटी विधेयक!

संसद का मानसून सत्र हंगामे की बारिश में धुला
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
संसद के मानसून सत्र का कल गुरुवार को अंतिम दिन है और देश की अर्थव्यवस्था के मद्देनजर उच्च सदन में संविधान (122वां संशोधन) विधेयक यानि जीएसटी को पारित करवाने की सरकार के सामने कड़ी चुनौती होगी। मसलन इस विधेयक पर देश ही नहीं बल्कि दुनिया की नजरें भी टिकी हुई हैं। हालांकि सरकार के सामने इस विधेयक को पारित कराने के लिए विशेष संयुक्त सत्र का एक संवैधानिक विकल्प भी बचा हुआ है।
देश की अर्थव्यवस्था की तराजू पर सरकार की कसौटी पर फंसे जीएसटी विधेयक को पारित कराने के लिए मौजूदा मानसून सत्र मेें मात्र एक दिन बाकी बचा हुआ है यानि गुरुवार को यदि सरकार जिस तरह से इसे पारित कराने की रणनीति बना रही है वह ऐतिहासिक दिन भी साबित हो सकता है। यह बात इसलिए कही जा सकती है कि बुधवार को कांग्रेस ने बकायदा प्रेस कान्फ्रेंस करके कहा है कि वह वह जीएसटी के विरोध में नहीं है, बल्कि इसके मौजूदा स्वरूप का विरोध कर रहे हैं, जिसमें कांग्रेस ने कई संशोधन की मांग उठाई है। ऐसे में गुरुवार को इस विधेयक पर सरकार और विपक्ष के बीच सहमति बनाने के जारी प्रयास सफल हुए तो राज्यसभा में इस विधेयक को मानसून सत्र के अंतिम दिन पारित किया जा सकता है। वहीं विपक्ष की मांग पर ही यह उच्च सदन की प्रवर समिति की नजरों से भी गुजरकर सदन में आया है। इस महत्वपूर्ण विधेयक पर पूरे देश की नजरे टिकी हुई है, बल्कि अर्थव्यवस्था में कर प्रणाली का निर्धारण करने वाले इस कानून को लेकर दुनिया भी भारत की तरफ टकटकी नजरों से देख रहा है।

मंगलवार, 11 अगस्त 2015

आखिर फिर लटका भूमि अधिग्रहण बिल

आज नहीं पेश हो पाएगी जेपीसी की रिपोर्ट
जेपीसी में खूब हुआ हंगामा
ओ.पी. पाल
. नई दिल्ली।
बहुप्रतीक्षित भूमि अधिग्रहण विधेयक पर संसद की संयुक्त समिति को मंगलवार को लोकसभा में अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपनी थी, लेकिन सोमवार को हुई समिति की बैठक में सदस्यों के बीच हुए हंगामे के कारण इस मुद्दे पर रिपोर्ट को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका और यह विधेयक आगामी संसद सत्र तक के लिए लटक गया है।
सूत्रों के अनुसार भूमि अधिग्रहण विधेयक के संशोधनों की पड़ताल करने वाली संसद की संयुक्त समिति की मंगलवार को संसद में पेश करने के लिए अपनी रिपोर्ट तैयार करने के लिए सोमवार को बैठक बुलाई गई, लेकिन इस बैठक में कुछ प्रावधानों को लेकर समिति के सदस्यों में आम राय नहीं बन सकी और आपस में तीखी झड़पे तक हुई। इसलिए समिति के अध्यक्ष एवं भाजपा सांसद एसएस अहलूवालिया ने इस रिपोर्ट को संसद के अगले सत्र में पेश करने का निर्णय लिया है, जिसका कारण रिपोर्ट को हंगामे के कारण अंतिम रूप नहीं दिया जा सका। मसलन सरकार के उन मंसूबों पर पानी फिर गया है, जिसमें इसी सत्र में इस विधेयक को पारित कराने का प्रयास किया जा रहा था। इसी मकसद से सरकार ने नौ में से छह संशोधनों को वापस लेने के लिए सहमति भी बना ली थी, लेकिन बाकी तीन संशोधनों पर भी समिति के अंदर विपक्षी दलों के सदस्यों के साथ सहमति नहीं बन पाई, जिसके कारण रिपोर्ट को अंतिम रूप नहीें दिया जा सका। गौरतलब है कि पिछले दो महीनों की जद्दोजहद के बावजूद संयुक्त समिति में नए जमीन अधिग्रहम बिल के प्रारूप पर आम राय नहीं बन सकी। अब संयुक्त समिति के चेयरमैन ने तय किया है कि वे शीतकालीन सत्र के पहले हμते तक अपनी फाइनल रिपोर्ट पेश करेंगे और इस दौरान जिन मसलों पर राजनीतिक गतिरोध बना हुआ है उसे दूर करने करने के लिए नए सिरे से राजनीतिक आमराय बनाने की फिर कोशिश होगी।

शनिवार, 8 अगस्त 2015

भूमि बिल पारित कराने में जुटी सरकार

 संसद का मानसून सत्र
संसद में 11 अगस्त को पेश होगी जेपीसी रिपोर्ट
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
संसद के मौजूदा मानसून सत्र के भले ही तीन सप्ताह की कार्यवाही गतिरोध के कारण हंगामे की भेंट चढ़ गई हो, लेकिन सरकार अगले सप्ताह बहुचर्चित भूमि अधिग्रहण विधेयक को संसद में पारित कराने की तैयारी में है। सरकार पहले ही इस विधेयक पर विपक्ष के चौतरफा दबाब पर कुछ विवादित संशोधन वापस लेने का भरोसा दे चुकी है और संयुक्त संसदीय समिति की अंतिम रिपोर्ट भी समिति में विपक्षी सदस्यों की सहमति से तैयार हो रही है, जो 11 अगस्त को लोकसभा में पेश होगी।
दरअसल भूमि अधिग्रहण संशोधन विधेयक की पड़ताल करने वाली संयुक्त संसदीय समिति में भी सरकार द्वारा किये गये संशोधनों पर गतिरोध गहराया हुआ था, जिसके कारण जेपीसी को अंतिम रिपोर्ट पेश करने के लिए तीन बार कार्यकाल का विस्तार कराना पड़ा। इस विस्तार के अनुसार संयुक्त संदीय समिति को आज शुक्रवार को रिपोर्ट संसद में पेश करनी थी, लेकिन पूर्व राष्टÑपति ऐपीजे अब्दुल कलाम के निधन के कारण समिति की बैठक नहीं हो सकी और अब अंतिम रिपोर्ट पर समिति की सहमति बनाने के लिए दस अगस्त को बैठक होगी, जो इस रिपोर्ट को अगले दिन यानि 11 अगस्त को संसद में पेश करेगी। सूत्रों के अनुसार संसद और संसद से बाहर विपक्षी दलों में इस विधेयक के संशोधनोें को लेकर सरकार चौतरफा घिरी हुई थी, वहीं किसान संगठनों को भी इस विधेयकों के संशोधनों पर ऐतराज रहा। इस विधेयक की जांच पड़ताल कर रही संयुक्त संसदीय समिति के एक सदस्य ने बताया कि यह विरोध समिति के बीच सदस्यों में भी गहरी आपत्तियों के साथ गहराया हुआ था, जिसके कारण सरकार को देश में भूमि अधिग्रहण विधेयक को संसद में पारित कराने के लिए वर्ष 2013 में यूपीए सरकार के विधेयक के प्रावधानों को भी बरकरार रखने और आपत्तिजनक संशोधन वापस करने के लिए वापसी करनी पड़ी है। सूत्रों के अनुसार सामाजिक प्रभाव का संतुलन बनाने के लिए सरकार ने छह संशोधनों को वापस करने पर सहमति बनाई है। इसी आधार पर समिति की सिफारिशों पर सरकार रिपोर्ट पेश होने के बाद कैबिनेट में मंजूरी देगी और फिर लोकसभा में विधेयक पेश करके इसी सत्र में उसे पारित कराने का प्रयास करेगी।

बुधवार, 22 जुलाई 2015

विपक्ष को संसद में ऐसे घेरेगी भाजपा!

कांग्रेस को नहीं मिल रहा है अन्य दलों का साथ
ओ.पी. पाल.
नई दिल्ली।
संसद के मानसून सत्र के पहले ही दिन राज्यसभा में ललित गेट और व्यापम घोटाले के मुद्दे पर विपक्ष की मांग पर चर्चा कराने को सरकार पूरी तरह तैयार नजर आई। इसके बावजूद विदेशमंत्री सुषमा स्वराज और मुख्यमंत्रियों के इस्तीफा लेने पर अडिग खासकर कांग्रेस को सदन में घेरने के लिए भाजपा भी आक्रमकता के साथ अपने तरकश से जहरीले तीर निकालने को तैयारी कर चुकी है।
दरअसल भाजपा शासित राज्यों से जुडे कुछ मुद्दों पर कांग्रेस मोदी सरकार को संसद में घेरने की रणनीति के तहत सदन में मुस्तैद नजर आई और सरकार इन मुद्दों पर तत्काल चर्चा कराने को भी तैयार रही, लेकिन कांग्रेस इसके बावजूद इन मुद्दों पर कार्यस्थगन का नोटिस देने और बार बार पीठ से चर्चा शुरू करने की अनुमति देने पर चर्चा की शुरूआत करने से कतराती ही नजर नहीं आई, बल्कि पहले इन मुद्दोें से जुडे मंत्रियों और राज्य के मुख्यमंत्रियों के इस्तीफे की मांग की ओर मुखर हुई। राजनीतिकारों की माने तो कांग्रेस सरकार को घेरने की रणनीति को उग्र बनाने का प्रयास कर रही है, ताकि केंद्र सरकार और उसका नेतृत्व कर रही भाजपा पर संबन्धित मुद्दों से जुड़े मुख्यमंत्रियों के इस्तीफे के लिए दबाव बनाया जा सके। ऐसा सरकार भी कांग्रेस पर आरोप लगा चुकी है कि वह सदन में चर्चा कराने से डर रही है। माना जा रहा है कि यदि कांग्रेस इन मुद्दो पर नरम न पड़ी तो भाजपा भी संसद में कांग्रेस शासित राज्यों के प्रकरण उठाकर सदन में राज्यों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के दायरे को बढ़ाने की मांग करेगी। संसदीय कार्यमंत्री मुख्तार अब्बास नकवी तो यहां तक कह चुके हैं कि संसद में चर्चा के लिए ऐसे मुद्दों में कांग्रेस के भ्रष्टाचार के कंकाल से अधिक मुखर और कुछ भी नहीं है। शायद यह बात कांग्रेस भी समझ चुकी है कि केंद्र सरकार उनके द्वारा पहले ही दिन उठाए गये मुद्दों पर इतनी आसानी से चर्चा कराने को किसलिए तैयार हुई है। ऐसे मुद्दों में कांग्रेस के भ्रष्टाचार के कंकाल से अधिक मुखर और कुछ भी नहीं है। दिलचस्प बात यह भी है कि इन मुद्दों पर कांग्रेस को सभी विपक्षी दलों का साथ भी मिलता नजर नहीं आ रहा है।