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शुक्रवार, 26 फ़रवरी 2016

मेक इन इंडिया से होगा रेलवे का कायाकल्प!

रेलवे नेटवर्क को विश्व स्तर पर ले जाने की कवायद
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
रेल मंत्री सुरेश प्रभु के रेल बजट में प्रधानमंत्री के शुरू किये गये मेक इन इंडिया, डिजीटल इंडिया, स्वच्छ भारत अभियान की ऐसी झलके देखने को मिली, जिनके जरिए रेलवे का कायाकल्प करने का प्रयास है।
संसद में पेश किये गये रेल बजट-2016-17 में देश को विकास करने वाली प्रधानमंत्री नरेन्द्र मिशन की झलक साफतौर से नजर आई, जिसके जरिए रेल मंत्री प्रभु भी रेलवे के विकास और उसके कायाकल्प करने की योजनाओं को आगे बढ़ाने की राह पर हैं। रेल मंत्री की प्राथमिकता रेलवे को बेहतर बनाकर वैश्विक स्तर तक ले जाने की है, जिसके लिए उन्होंने आम आदमी की जेब पर कतई कोई बोझ नहीं ड़ाला, बल्कि रेलवे को विश्वस्तरीय बनाने के लिए रेलवे के कायाकल्प की परिकल्पना के सामने खड़ी चुनौतियों को ‘चलो मिलकर कुछ नया करें’ जैसे स्लोगन के रूप में यात्रियों की उम्मीदों के पंख के सहारे पार करने का प्रयास है। रेल बजट पेश करते हुए रेल मंत्री सुरेश प्रभु का यह कहना कि इसी प्रयास का द्योतक है कि वह ड्राईविंग सीट पर जरूर हैं, लेकिन उनके साथ देश की पूरी जनता सफर कर रही है, इसलिए जनता का ख्याल रखने की जिम्मेदारी भी उन्हीं की है। इसलिए टेÑनों में ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं देने, कोच बढ़ाने और ट्रेनों की गति बढ़ाने के अलावा ई-टिकटिंग, प्लेटफॉर्म टिकट वेंडिंग मशीन, एसएमएस से कोच की सफाई, हर कोच में इंफॉर्मेशन डिस्पले बोर्ड, बायो-टायलेट, सोलर एनर्जी, वाई-फाई, रेलवे कोचों में मोबाइल चार्जिंग और स्वच्छ शौचालयों जैसी सुविधाएं देने का वादे के अलावा रेलवे सुरक्षा में तकनीक प्रणाली से जोडने के लिए रेलवे को सुधारने की ही कवायद है। वहीं बजट में यात्रयिों की सुरक्षा खासकर महिलाओं की सुरक्षा को रेलवे की प्राथमिकता करार देते हुए रेल मंत्री ने के तौर पर रेलवे की द्वारा सभी बड़े स्टेशनों को चरणबद्ध तरीके से सीसीटीवी सर्विलांस के दायरे में लाने की घोषणा भी यात्रियों की सुरक्षा को सुनिश्चित करना है। यही नहीं बजट में रेलवे की आर्थिक सहेत सुधारने के उपायों पर भी जोर दिया गया है, जिसके लिए अंतर्राष्टÑीय और राज्यों के साथ करार करना भी यही संकेत दे रहा है कि मोदी के विजन के तहत रेलवे की कायाकल्प करने की तैयारी है।

शनिवार, 17 अक्टूबर 2015

अमेरिकी विमानन कंपनी-बोइंग भारत में बनाएगी विमान!

मेक इन इंडिया से जुड़ने पर जताई सहमति
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
दुनियाभर में दिग्गज विमान निर्माता कंपनियों में शुमार अमेरिकी बोइंग विमानन कंपनी ने मोदी सरकार के मेक इन इंडिया अभियान से जुड़ने पर सहमति जताई है, जिसके तहत यह कंपनी भारत में अपाचे लडाकू हेलीकाप्टर या चिनूक हैवी लिफ्ट हेलीकाप्टर का निर्माण कर सकती है।
नागर विमानन मंत्रालय के सूत्रों ने यह जानकारी देते हुए बताया कि अमेरिकी विमानन कंपनी बोइंग के चेयरमैन जेम्स मैकनर्नी ने मेक इन इंडिया अभियान के साथ सहमति जताते हुए कहा कि उनकी कंपनी अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टर या चिनूक चॉपर को भारत में ही असेम्बल करने पर विचार कर रही है। इस सहमति से फ्रांसीसी राफेल लड़ाकू विमानों के सौदे में बदलाव के बाद अब अचानक दुनिया की सबसे बड़ी विमान निमार्ता कंपनी बोईंग ने अत्याधुनिक लड़ाकू विमान का भारत में निर्माण करने की योजना का खुलासा किया। बोईंग के चेयरमैन जेम्स मैकनर्नी का यहां तक कहना है कि उनकी कंपनी भारत में लड़ाकू विमान का निर्माण करने के लिए तैयार है, और उससे भारत को भी वह तकनीक मिल जाएगी, जिसका निर्माण के क्षेत्र में कहीं भी इस्तेमाल किया जा सकेगा। मैकनर्नी ने कहा कि भारत के लिए 'मेक इन इंडिया' बेहद महत्वपूर्ण पहल है। दरअसल बोईंग ने एफ-18 हॉरनेट जैसे लड़ाकू विमान बनाए हैं, जो राफेल का सौदा पक्का होने से पहले भारत द्वारा पसंद किए जाने वाले विमानों की दौड़ में शामिल थे। भारत का मानना है कि अब भारतीय वायुसेना को बहुत-से ऐसे विमानों की जरूरत है, जिनमें इंटरसेप्शन, जमीनी हमले तथा हवाई सुरक्षा से जुड़ी तकनीक मौजूद हों। ऐसे में बोइंग के मेक इन इंडिया से जुड़ने से इन जरूरतों को पूरा करना आसान हो सकता है। मैकनर्नी ने यह भी कहा कि वह भारत के साथ अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में भी साझीदारी करना चाहते हैं। उनका मानना है कि बहुत-से क्षेत्रों में भारत से साझीदारी के विकल्प उस समय काफी बढ़ गए थे, जब भारत और अमेरिका के बीच नागरिक परमाणु समझौता हुआ था। गौरतलब है कि पिछले माह ही बोईंग को भारत की ओर से 37 सैन्य हेलीकॉप्टरों जिनमें 22 अपाचे और 15 चिनूक हेलीकॉप्टर शामिल है की आपूर्ति का तीन अरब अमेरिकी डॉलर का आॅर्डर मिला है।
हेलीकाप्टर उद्योग को बढ़ावा देगी सरकार!
नई विमानन नीति में शामिल होगी मेगा योजना
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
केंद्र सरकार द्वारा हवाई सेवाओं की आम आदमी तक पहुंच बनाने की दिशा में नई नागर विमानन नीति में ऐसी मेगा योजना को भी शामिल करने करने का निर्णय लिया है, जिसके जरिए देश में हेलीकाप्टर उद्योग को बढ़ावा मिल सके। सरकार का मकसद है कि खासकर पूर्वोत्तर राज्यों के पहाड़ी इलाकों में हेलीकाप्टर सेवाओं का आवागमन सहजता से बढ़ाया जा सके।

मंगलवार, 23 जून 2015

विमानन व रेल क्षेत्र में नजदीक आएंगे भारत व रूस!

जल्द ही दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर होंगे करार
ओ.पी. पाल.
नई दिल्ली।
मोदी सरकार के ‘मेक इन इंडिया’ मिशन के जरिए विदेशी निवेश की बढ़ती संभावनाओं को पंख लगने शुरू हो गये हैं, जिसमेें कई देश भारत में निवेश करने के लिए उत्सुकता जाहिर कर रहे हैं। ऐसे में भारत के अरसो पुराने दोस्त रहे रूस ने अपने आपसी रिश्तों को और नजदीक लाने के लिए भारत के साथ खासकर विमानन और रेल के क्षेत्र में आपसी सहयोग आधुनिकीकरण की दहलीज पर और मजबूत करने का निर्णय लिया है।
नागर विमानन मंत्रालय के सूत्रों की माने तो विमानन और रेल क्षेत्र में दोनों देशों के बीच पहले से द्विपक्षीय निवेश संरक्षण समझौता है, जिसमें दोनों देश और सुधार करने की तैयारी में हैं। भारत की दोनों देशों के बीच रिश्तों को और भी बेहतर बनाने की पहल पर रूस भी कारोबारी संबन्धों समेत विमानन व रेल क्षेत्र में सहयोग को बढाने के प्रति आश्वस्त हैं और दोनों देश लंबी अवधि के दोस्त और भागीदार के रूप में दोनों देश एक दूसरे देश को मदद करने को तैयार हैं। सूत्रों के अनुसार रूस सरकार निवेश को प्रोत्साहित करने और उसके परस्पर संरक्षण के लिए अंतर सरकारी समझौते के आधुनिकीकरण की प्रक्रिया में आगे बढ़ चुकी है। मसलन रूस एंड इंडिया रिपोर्ट (आरआईआर) ने रूस के आर्थिक विकास मंत्री एलेक्सी उलयुकाएव के साथ इस दिशा में आगे बढ़ने के इरादे से भारत-रूस व्यापारिक संबंधों में अन्य कई मुद्दों पर विचार विमर्श किया है, जिसमें दोनों देशोें के बीच द्विपक्षीय निवेश संरक्षण समझौते में सुधार करना भी शामिल हैं।