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शुक्रवार, 12 फ़रवरी 2016

राज्य ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन को राहत देने की तैयारी!

प्रदूषण से निपटने को केंद्र ने तैयार किया प्रस्ताव
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
केंद्र सरकार सड़क परियोजनाओं में सड़क हादसों पर अंकुश लगाने और वाहनों के कारण प्रदूषण की बढ़ रही समस्या से निपटने के लिए बजट में रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन को राहत देने की तैयारी में है। केंद्रीय भूतल मंत्रालय ने राज्यों में बसों की μलीट बढ़ाने के लिए राज्यों के परिवहन निगमों के लिए 2500 करोड़ रुपये का बजट में प्रावधान करने का प्रस्ताव किया है।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार ऐसा एक प्रस्ताव मंत्रालय से तैयार होकर वित्त मंत्रालय को भेजा जा चुका है, जिसमें देश में सड़क परिवहन की व्यवस्था में सुधार के लिए संसद के बजट में शामिल करने का अनुरोध किया गया है। वर्ष 2016 के बजट में में यदि यह प्रस्ताव पारित कर दिया जाता है तो राज्य परिवहन निगमों के लिए एक अच्छी खबर होगी। मंत्रालय के अनुसार इस बजट में बसों की μलीट को बढ़ाने के लिए 2500 करोड़ रुपए का बजट संसद में पारित होने की संभावना है। मंत्रालय का इस प्रस्ताव को तैयार करने का मकसद है कि राज्यों में बसों की संख्या बढ़ सके और नई बसें आने से जहां सड़क हादसों में कमी आएगी, वहीं प्रदूषण की समस्या को भी कहीं हद तक कम किया जा सकेगा। वित्त मंत्रालय को भेजे इस प्रस्ताव में इस बात पर जोर दिया गया है कि रोड ट्रांसपोर्ट के लिए 2500 करोड़ रुपए के बजट में ऐसा प्रावधान किया जाए जिसमें हर राज्य को बराबर राशि मिल सके। ऐसा करने से बसों की संख्या में इजाफा होगा और हर राज्य में ई-बसों की योजना को बढ़ावा मिल सके। केंद्र सरकार इस प्रस्ताव के जरिए देश में राज्य परिवहन निगमों की बसों को इलेक्ट्रिक बसों में तब्दील करने का लक्ष्य भी पूरा करने का प्रयास करेगी, जिसके लिए वाहनों के प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए भी ऐसी योजनाओं को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
ई-बसों पर रहेगा फोकस
सड़क मंत्रालय के प्रस्ताव के अनुसार केंद्र सरकार देशभर में स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन की करीब 1.50 लाख बसों को इलेक्ट्रिक बस के रूप में बदलने का प्रयास कर रही है। वहीं क्रूड और पेट्रोलियम का आठ लाख करोड़ रुपए के बोझ को भी कम किया जा सकेगा। सरकार चाहती है कि राज्य निगमों को इस बजट के जरिए मिलने वाली धनराशि के जरिए जहां राज्य परिवहन निगमों की आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा और बसों को बेहतर बनाया जाए। वहीं क्रूड और पेट्रोलियम का आठ लाख करोड़ रुपए के बोझ को भी कम हो सकेगा। प्रस्ताव में भारत को प्रदूषण रहित बनाने की दिशा में इस दिशा में ई-वाहन परियोजना पर जोर देने की बात कही गई है। इसके आलवा केंद्र सरकार वाहनों को बायो डीजल और एथनॉल मोड पर लाने का भी प्रयास कर रही है।

गुरुवार, 28 जनवरी 2016

ये नई पद्धति बढ़ाएगी सड़क परियोजनाओं की रफ़्तार!

उच्च मार्ग परियोजना के मिश्रित वार्षिक खर्च को मिली मंजूरी
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
देश में सड़कों के जाल से पाटने की कवायद में जुटी मोदी सरकार ने चलाई जा रही सड़क परियोजनाओं को तेजी से कार्यान्वित करने की दिशा में एक और कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने उच्च मार्ग परियोजनाओं को समय सीमा में पूरा करने की दिशा में नई पद्धति के रूप में मिश्रित वार्षिक खर्च को मंजूरी दे दी है।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार उच्च मार्ग परियोजनाओं के कार्यान्वयन के निष्पादन के उपायों में मिश्रित वार्षिक खर्च वाली नई पद्धति को लागू करना एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। इस पद्धति की मंजूरी का मंत्रालय को सड़क निर्माण की गति बढ़ाने के लिए इंतजार था। बुधवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने मिश्रित वार्षिक खर्च को मंजूरी देकर उच्च सड़क मार्ग परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने की राह को आसान कर दिया है। दरअसल सड़क परियोजनाओं का ऐसा नमूना बॉट यानि पथकर पद्धति के नजरिये से व्यावहारिक नहीं रह गया था। इसलिए सरकार इस नई पद्धति में सरकार द्वारा मुहैया वित्तीय संसाधनों के भीतर किलोमीटर के आधार पर अधिकतम क्रियान्वित करने के लिए प्रभावी बनाने का फैसला किया है। इसका प्रमुख मकसद उच्च मार्ग संबंधी परियोजनाओं में बेहतर ढंग से लागू करना है। मंत्रालय के अनुसार सड़क परियोजनाओं को पूरा करने वाली पद्धति के रूप में इस मॉडल को स्वीकार करने से सार्वजनिक और निजी भागीदारी की व्यवस्था वाले सभी महत्वपूर्ण हिस्सेदारों में शामिल प्राधिकरण, कर्जदाता और डेवलपर्स, छूट पाने वाले उच्च मार्ग परियोजनाओं में निजी डेवलपर्स व निवेशकों को प्रोत्साहन मिल सकेगा। वहीं इस नई व्यवस्था के जरिए सड़क निर्माण क्षेत्र पुनरुत्थान से बेहतर परिणाम भी मिलेंगे और ये संबंधित परियोजना के माध्यम से नागरिकों और पर्यटकों को सहूलियत भी दी जा सकेगी। सड़क परियोजनाओं के जरिए देश को सड़क संपर्क मार्ग कसे जोड़ने की योजना में बढ़ोतरी होने के साथ आर्थिक गतिविधियां भी तेजी से बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि सड़क सम्पर्क में सुधार की जरूरत को देखते हुए केंद्र सरकार ने अपने अधीन कार्यरत इंजीनियरिंग जैसी भारतीय राष्ट्रीय उच्च मार्ग प्राधिकरण आदि एजेंसियों को क्रय और निर्माण के कार्यों में सार्वजनिक कोष से बढ़-चढ़कर सम्पन्न करने की नीति अपनाई गई है।

शुक्रवार, 8 जनवरी 2016

देश में बनंगे सौलह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे!

पिछड़े इलाकों को सड़क नेटवर्क से जोड़ने की तैयारी
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
देश को सड़कों के जाल से जोड़ने की योजना के तहत केंद्र सरकार ने दूर-दराज और पिछड़े इलाको तक सड़क नेटवर्क बनाने की दिशा में 16 ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे बनाने का निर्णय लिया है। केंद्र सरकार की इस मेगा परियोजना के खाके पर 16,680 करोड़ रुपये की लागत से ऐसे एक हजार किलोमीटर लंबे एक्सप्रेस-वे का निर्माण किया जाएगा, जिसमें प्रमुख रूप से सात गलियारे होंगे।
मोदी सरकार ने एनएचडीपी चौथे चरण के तहत डीबीएफओटी आधार पर 16,680 करोड़ रुपये की लागत से 1000 किलोमीटर एक्सप्रेसवेज का निर्माण करने की योजना को मंजूर कर दिया है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार पिछड़े इलाकों को सड़क संपर्क मार्ग से जोड़ने की दिशा में इन एक्सप्रेस-वे गलियारों में 400 किमी लंबे वडोदरा-मुम्बई गलियारे पहली प्राथमिकता में शामिल किया गया है, जिसमें 93 किलोमीटर लंबा अहमदाबाद-वडोदरा गलियारा देश के पहले एक्सप्रेस-वे के रूप में माना जाता है। सरकार ने शेष 600 किलोमीटर के चयन में यह तय किया गया है कि यातायात घनत्व के आधार पर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का चयन किया जा रहा है। मंत्रालय के अनुसार ये सभी ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे देश के सुदूर इलाकों और पिछड़े हुए इलाकों से होकर गुजरेंगे। इस परियोजना का मकसद है कि सड़क संपर्क बढ़ने से पिछड़े इलाकों को आर्थिक विकास की दिशा में बल मिल सके। इन सड़क परियोजनाओं के बारे में स्वयं सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी का भी कहना है कि वडोदरा-मुंबई, जयपुर-अजमेर-अहमदाबाद और अमरावती-हैदराबाद-बेंगलुरू में पिछड़े इलाकों को सड़क संपर्क मार्गो से जोड़ने के लिए ये सभी 16 एक्सप्रेस-वे तैयार किए जाएंगें।
यूपीए ने भी बनाई थी परियोजना
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि हालांकि ऐसे सात ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे बनाने का ऐलान कांग्रेसनीत यूपीए सरकार ने वर्ष 2005 में ही कर दिया था, लेकिन ऐसी सड़क परियोजना को यूपीए अपने दूसरे कार्यकाल तक अंजाम तक पहुंचाने में कोई कदम नहीं बढ़ा सकी। ऐसी महत्वकांक्षी परियोजना की समीक्षा के बाद मोदी सरकार ने इन परियोजना को नए सिरे से आगे बढ़ाने के लिए अपनी नौ परियोजनाएं शामिल करते हुए 16 एक्सप्रेस-वे बनाने की परियोजनाओं को मंजूरी दे दी और इसके लिए अनुमानित लागत को भी स्वीकृत कर लिया गया है। मंत्रालय का कहना है कि देश के विकास के लिए राजमार्गो के संपर्क की हालत को सुधारने की दिशा में सरकार ने तेजी के साथ कदम बढ़ाने का फैसला किया है। हालांकि मंत्रालय का कहना है कि इतनी बड़ी परियोजना में भूमि अधिग्रहण और वित्तीय व्यस्था की सभी बाधाओं को दूर करने के प्रयास जारी है, लेकिन परियोजना को सरकार अंजाम तक पहुंचाएगी।
ये एक्सप्रेसवे भी रडार पर
केंद्र सरकार देश हर कोने को सड़क संपर्क मार्ग से जोड़ने वाली परियोजनाओं में पूर्वी परिधीय एक्सप्रेसवे, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे तथा वडोदरा-मुम्बई एक्सप्रेसवे को अंतिम रूप दे चुकी है। इसी प्रकार एक्सप्रेस-वे के रडार पर नागपुर-मुंबई, जयपुर-अजमेर अहमदाबाद, नागपुर-हैदराबाद, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-बैंगलुरू, अमृतसर-हैदराबाद-बैंगलुरू तथा दिल्ली-अमृतसर-जम्मू- कटरा को भी आपस में राष्टÑीय राजमार्गो से जोड़ने की योजना तैयार की जा रही है।
08Jan-2016

शनिवार, 26 दिसंबर 2015

हर साल बनेंगे सात हजार किमी राष्ट्रीय राजमार्ग!

 ‘भारत माला परियोजना’ में भी तेजी लाने का लक्ष्य
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
केंद्र सरकार ने देश में सड़कों का जाल बिछाने की दिशा में हर साल सात किमी लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण करने का लक्ष्य तयकिया है। वहीं सरकार ने पडोसी देशों के साथ लगी भारतीय सीमाओं और तटीय क्षेत्रों की सड़क मार्ग से संपर्क बनाने के लिए महत्वकांक्षी ‘भारत माला’ सड़क परियोजना को भी तेजी से आगे बढ़ाना शुरू कर दिया है।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार मोदी सरकार की महत्वकांक्षी ‘भारत माला’ सड़क परियोजना के तहत सीमाओं तथा तटवर्ती क्षेत्रों को सात हजार किलोमीटर लम्बे सड़क मार्ग के निर्माण में तेजी लाने के लिए निविदाओं की प्रक्रिया भी पूरी की जा चुकी है। भारत माला सड़क परियोजना के जरिए पडोसी देशों नेपाल, बांग्लादेश, चीन, पाकिस्तान और भूटान से लगी भारतीय सीमा के अलावा विशाल तटीय क्षेत्रों को जोड़ा जाना है। इस परियोजना पर सरकार ने 80 हजार करोड़ रुपये की लागत का अनुमान लगाया है। मंत्रालय के अनुसार इस परियोजना के तहत 80 प्रतिशत राजमार्ग दो लेन तथा 20 प्रतिशत चार लेन का बनाया जाएगा। केंद्र सरकार की इस योजना का मकसद है कि देश के सभी सीमावर्ती क्षेत्र और तटीय बंदरगाह तक सड़क संपर्क को मजबूत बनाया जा सके और सीमा क्षेत्रों तक भारत की पहुंच को आसान किया जा सके। इस परियोजना को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की स्वर्णिम सड़क चतुर्भुज योजना की तर्ज पर शुरू किया गया है।
इन राज्यों गुजरेगी भारत माला
मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार भारत माला परियोजना के दायरे में उत्तरी पूर्व राज्यों समेत 15 राज्य होंगे, जिसमें प्रमुख रूप से राजस्थान,गुजरात, पंजाब, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, पुडुचेरी और उड़ीसा का बड़ा भाग शामिल है। भारत माला सड़क परियोजना के तहत सीमा क्षेत्रों पर राजस्थान में एक हजार किमी, उत्तराखंड में 300 किमी, तमिलनाडु में 600 किमी, पश्चिम बंगाल में 300 किमी तथा ओडिशा में 400 किमी सड़क का निर्माण के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानि एनएचएआई ने निविदा प्रक्रियाओं को पूरा कर लिया है।
तेजी से होगा सड़क निर्माण
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने ऐलान किया है कि भारत माला परियोजना के साथ ही केंद्र सरकार हर साल सात किमी राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण करने का लक्ष्य तय कर चुकी है। गडकरी का कहना है कि केंद्र सरकार इसके लिए राज्य सरकारों के साथ परामर्श कर रही है और हर राज्य इस परियोजना का समर्थन कर रहे हैं। भारत माला परियोजना के तहत सरकार की तटीय क्षेत्रों पर छोटे छोटे बंदरगाह तक सड़क संपर्क को बेहतर बनाने की योजना पर काम कर रही है, जिसका खाका तैयार किया जा रहा है।
26Dec-2015

शनिवार, 21 नवंबर 2015

सड़क दुर्घटनाओं पर काबू करना बड़ी चुनौती!

अंतर्राष्ट्रीय मानको को सख्ती से लागू करेगी सरकार
ओ.पी. पाल.
नई दिल्ली। दुनियाभर के देशों के मुकाबले भारत में सड़क दुर्घटनाओं में हो रही सर्वाधिक मौतों पर काबू करने की चुनौती केंद्र सरकार के लिए चिंता का सबब बनी हुई है। देश में सड़क निर्माण परियोजनाओं में सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता देने का दावा कर रही सरकार अंतर्राष्ट्रीय मानकों को लागू करने की तैयारी कर ली है।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार केंद्र सरकार ने सभी सड़क परियोजनाओं को सड़क सुरक्षा के लिहाज से डिजाइन के आधार पर शुरू कराया है और देशभर में दुर्घटना संभावित क्षेत्रों को चिन्हित कराकर उनके डिजाइन को भी सुधारने की योजना पर काम किया जा रहा है। केंद्र सरकार ने सड़क परिवहन को सुरक्षित और खासकर दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने की दिशा में कई जनहित की योजनाओं को कानूनी रूप से भी लागू किया है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों को संज्ञान में लेते हुए भी कुछ नियमों में बदलाव करके अब अंतर्राष्ट्रीय मानकों को सख्ती के साथ लागू करने की तैयारी की है, जिसके लिए सरकार नए सड़क परिवहन एवं सुरक्षा विधेयक को संसद में पारित कराने का भी प्रयास कर रही है। दुनियाभर में सड़क दुर्घटनाओं में देश में हो रही मौतों के कलंक को धोने की दिशा में किये जा रहे प्रयासों और कटिबद्धता को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने यातायात सुरक्षा पर हाल ब्राजील ब्रासिलिया में संपन्न हुए वैश्विक सम्मेलन में दोहराया। गडकरी ने भारत परिवहन क्षेत्र में सुरक्षा, निरंतरता और दक्षता में बेहतरी सुनिश्चित करने की योजनाओं में यहां तक कहा कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा सुरक्षित प्रणाली अवधारणा का भारत में पूरी तरह से अनुमोदन किया जा रहा है।

सोमवार, 16 नवंबर 2015

अब जलमार्ग से भी होगा बांग्लादेश का सफर!

भारत-बांग्लादेश के बीच जुड़ा एक और मील का पत्थर
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
दक्षिण एशियाई यानि सार्क देशों के बीच आवागमन को बेरोक-टोक बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही मोदी सरकार ने अब जलमार्ग परिवहन को बांग्लादेश तक का सफर तय करने के लिए कदम बढ़ाया है। इससे पूर्व बांग्लादेश समेत कई सार्क देशों के बीच सड़क परिवहन की परियोजना को अंतिम रूप दिया जा चुका है।
भारत अपने पडोसी देशों खासकर दक्षिण एशियाई यानि सार्क देशों बांगलादेश, नेपाल और भूटान, थाईलैंड व म्यांमार के के बीच बेरोक-टोक यात्री, निजी और माल वाहनों की बेरोक आवाजाई के लिए अंतर्राष्‍ट्रीय सड़क परिवहन परियोजना पर समझौते को अंजाम दिया चुका है। केंद्र में मोदी सरकार की सड़क परिवहन के अलावा सार्क देशों को जलमार्ग परिवहन से भी जोड़ने की योजना के तहत भारत और बांग्लादेश के बीच रविवार को ही ‘तटीय नौपरिवहन पर समझौता’ लागू करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया यानि एसओपी पर हस्ताक्षर हुए। हालांकि इस संबन्ध में दोनों देशों के बीच गत जून में ही हस्ताक्षर की औपचारिकता पूरी हो गई थी। अब एसओपी पर बनी सहमति के बाद भारत और बांग्लादेश के बीच जल परिवहन को अंजाम देने का मार्ग खुल गया है। मसलन एसओपी के प्रावधानों के अंतर्गत अब भारत और बांग्लादेश अंतर्राष्ट्रीय समुद्री परिवहन में उपयोग में आने वाले अपने राष्ट्रीय पोतों के साथ अन्य देशों के जहाजों के लिए भी समान दृष्टिकोण अपनाने के लिए स्वतंत्र होंगे। केंद्रीय सड़क परिहवन एवं राजमर्गा तथा जहाजरानी मंत्री नितिन गड़करी ने भारत और बांग्लादेश के बीच इस करार को अंतर्राष्‍ट्रीय  परिवहन की दृष्टि के बड़ा मील का पत्थर करार दिया है। गडकरी की मौजूदगी में दोनों देशों ने भारत-बांग्लादेश तटीय नौपरिवहन के लिए नदी सागर पोत (आरएसवी) श्रेणी के जहाजों के उपयोग पर भी सहमति बनाई। भारतीय जहाजरानी सचिव राजीव कुमार और बांग्लादेश के जहाजरानी सचिव शफीक आलम मेंहदी ने हस्ताक्षर करके ‘तटीय नौपरिवहन पर समझौते’ के प्रावधानों पर हस्ताक्षर किये हैं।
ऐसे होगा दोनों को फायदा
भारत और बांग्लादेश के बीच तटीय नौपरिवहन की शुरूआत से चटगांव से तटीय नौपरिवहन के माध्यम से पूर्वोत्तर तक कार्गो आवाजाही और उसके बाद सड़क और अंतदेर्शीय जलमार्ग से आवाजाही आसान होगी। वहीं भारत के पूर्वी तट पर डीप ड्राμट बंदरगाह आरएसवी श्रेणी के माध्यम से बांग्लादेश के लिए माल परिवहन हेतु 'केन्द्रीय' बंदरगाह बन सकते हैं। भारतीय बंदरगाह अतिरिक्त कार्गो संचालित करेंगे, जिससे समग्र नौवहन में बांग्लादेश तक परिवहन की लागत कम हो जाएगी। भारतीय बंदरगाह बांग्लादेश के लिए ट्रांस-शिपमैंट कार्गो के रूप में सेवा देकर भारत-बांग्लादेश के तटीय व्यापार को लाभदायक रूप से बढ़ा सकेंगे।

रविवार, 25 अक्टूबर 2015

अब राजमार्गो का श्रेय नहीं ले पाएंगे राज्य!

केंद्रीय मंत्री ही करेंगे हाइवे का शिलान्यास व उद्घाटन
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
देश में केंद्रीय परियोजनाओं का श्रेय शायद अब राज्य या राज्य स्तर के नेता नहीं ले पाएंगे। मसलन देश के विकास पर सियासत करने की इस परंपरा पर अंकुश लााने के प्रयास में ही केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने ऐसा निर्देश जारी किया है, जिसमें राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के भूमि पूजन, शिलान्यास या फिर उद्घाटन करने की इजाजत केंद्रीय मंत्री के अलावा किसी अन्य को नहीं होगी।
दरअसल केंद्र सरकार की सड़क परियोजना में यूपी में बरेली-बहेडी तक 540 करोड़ रुपए की लागत से पीपीपी मॉडल पर 54 किमी लंबे हाइवे बनकर तैयार हुआ, तो इसका लोकार्पण राज्य के मुख्यमत्री अखिलेश यादव ने करते हुए अपनी सरकार को पूरा श्रेय देने का प्रयास किया। शायद विकास पर होने वाली ऐसी सियासत पर लगाम लगाने की दिशा में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राज्य मंत्री नितिश गड़करी को मंत्रालय की ओर से सभी राज्यों को निर्देश के रूप में एक पत्र लिखकर पहले से ही तय मानदंडों का अनुपालन करने की नसीहत दी। मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार के राज्यों में होने वाले काम का श्रेय राज्य के नेता लेते आ रहे हैं, जबकि खासकर केंद्रीय परियोजनाओं के मामले में ऐसे मानक बने हैं जिसमें राज्य सरकारों को मानकों व नियमों की सीमाएं लांघना नहीं चाहिए। इसलिए मंत्रालय ने ऐसे नियमों व मानकों का पालन सुनिश्चित कराने वाले पत्र में राज्य एवं केंद्रशासित प्रदेशों के लोकनिर्माण विभाग के प्रधान सचिव, सचिव, मुख्य अभियंताओं के साथ एनएचएआई के अध्यक्ष राघव चन्द्रा और सीमा सड़क संगठन के महानिदेशक को पूर्ववर्ती यूपीए सरकार द्वारा दिसंबर 2001 में जारी सरकुलर का संज्ञान लेने को भी कहा गया है। इस पत्र की प्रतियां एनएचएआई के सीजीएम वीके शर्मा व एनएचएआई के सदस्य(वित्त) सतीश चन्द्रा को भी भेजी गई है।

शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2015

नई तकनीक से बिछेगा देश में सड़कों का जाल!


सरकार रोजना बनाना चाहती है 100 किमी सड़क
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
केंद्र सरकार सड़क सुरक्षा की प्राथमिकता के साथ देशभर में सड़कों के निर्माण में नई तकनीक के जरिए तेजी लाने की कवायद में जुटी है। केंद्र सरकार देशभर में सड़कों का जाल बिछाने के लिए रोजाना 100 किमी सड़कों का निर्माण का लक्ष्य तय करने की तैयारी में है।
देश में सड़कों पर हादसों को लेकर चिंतित केंद्र सरकार सड़कों के डिजाइन बदलने के साथ नई तकनीक के जरिए सुरक्षित एवं नए निर्माण को आगे बढ़ाने की तैयारी में है। इसी योजना के खाके में सरकार अगले साल सड़क निर्माण के नए लक्ष्य में रोजना 100 किमी सड़क निर्माण का लक्ष्य तय करने का मन बना रही है, जो अभी तक राजग शासनकाल ने इस साल के अंत तक 30 किमी के लक्ष्य को साधने के 18 किमी तक पहुंचा दिया है। देश में दुनियाभर के देशों की अपेक्षा सबसे ज्यादा होने वाले सड़क हादसों पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र सरकार ने सड़कों के डिजाइन बदलने, सड़कों का चौड़ीकरण करने और नए सड़क निर्माण के लिए तकनीकी प्रणाली को अपनाने का निर्णय लिया है। शायद इसी मकसद को लेकर गुरुवार को राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए सड़क परिसंपत्ति प्रबंधन प्रणाली यानि आरएएमएस पर आयोजित कार्यशाला में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सरकार की भावी योजना को स्पष्ट किया है। नितिन गडकरी ने देश में सड़क क्षेत्र का तेजी से विकास करने की जरूरत पर विशेष देते हुए कहा कि देश की सड़कों पर बढ़ते यातायात के दबाव और दुर्घटनाओं की बढ़ती संख्या के मद्देनजर उनका मंत्रालय एक्सप्रेस हाईवे नेटवर्कों समेत नई सड़कों के निर्माण और मौजूदा सड़कों को चौड़ा करने तथा उनके रख-रखाव एवं मरम्मत की गति को निश्चित तौर पर तेज करने की तैयारी में है। इसके लिए तकनीक को इस्तेमाल में लाया जाएगा।
क्या होगी नई तकनीक
मंत्रालय के अनुसार सुरक्षित सड़क निर्माण के लिए आरएएमएस जैसी एक आधुनिक एवं डिजिटल परिसंपत्ति प्रबंधन प्रणाली के बिना राष्ट्रीय राजमार्गों को विकसित करना संभवन नहीं होगा। यह प्रणाली एक आधुनिक प्रबंधन प्रणाली है, जो सड़क परिसंपत्तियों के 360 डिग्री वाला नक्शा तैयार करने के लिए ‘गगन’ और ‘भुवन’ उपग्रह प्रणालियों का इस्तेमाल करेगा। इससे समय पर सड़कों की मरम्मत करने और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने में आसानी होगी। इस तकनीकी परियोजना से एकत्रित जानकारी परिवहन मंत्रालय, वित्त मंत्रालय, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, राज्य पीडब्लूडी, पुलिस विभाग, आर्थिक सहायता एजेंसियों, डेवलपर्स और नागरिकों के लिए उपयोगी हो जाएगा।
इसरो से होगा करार
सड़कों के निर्माण में ‘गगन’ और ‘भुवन’ उपग्रह प्रणालियों का इस्तेमाल करने के लिए एनएचएआई जल्द ही इसरों के साथ एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करके समझौता करेगा। यह बात एनएचएआई के चेयरमैन राघव चन्द्र ने कहा कि राजमार्गों के कारगर नियोजन, निर्माण, रख-रखाव और वित्तीय प्रबंधन के लिए आरएएमएस वक्त की मांग है। उन्होंने कहा कि हमारी परिसंपत्तियों का समुचित मानचित्रण करने और सभी हितधारकों के साथ इसे साझा करने में गगन (जीपीएस सहायता युक्त भू संवर्धित नैविगेशन)काफी उपयोगी साबित होगा।

शुक्रवार, 17 जुलाई 2015

हरियाणा-यूपी को जोडेगा बाहरी एक्सप्रेस-वे

जुड़ेंगे हरियाणा व यूपी के 98 गांव!
सरकार ने दी छह लेन के हाइवे निर्माण को मंजूरी
दिल्ली में थमेगी भारी वाहनों की रेलमपेल
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
केंद्र सरकार ने दिल्ली जैसे महानगर की यातायात समस्या का सामना किये बिना हरियाणा के पलवल व फरीदाबाद से सीधे सोनीपत के सफर की राह को आसान बनाने के लिए कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने फरीदाबाद और पलवल से सीधे सोनीपत के लिए छह लेन वाले प्रस्तावित छह लेने वाले पूर्वी बाह्य परिधि एक्सप्रेस-वे के निर्माण को मंजूरी दे दी है। राष्‍ट्रीय राजमार्ग संख्या एनई-2 के रूप में हरियाणा व उत्तर प्रदेश के 98 गांवों को जोड़ने वाले इस एक्सप्रेस-वे के लिए 7558 करोड़ रुपये की लागत तय की है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने इस प्रस्ताव की मंजूरी देकर पिछले अरसे से चली आ रही ऐसी मांग को हरी झंडी दे दी है। इस छह लेन के एक्सपे्रस-वे के निर्माण के बाद हरियाणा में फरीदाबाद व पलवल से सोनीपत जाने के लिए राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की यातायात और प्रदूषण की समस्या से निजात मिलेगी और समय भी बचेगा। 135 किमी लंबे इस पूर्वी बाह्य परिधि एक्सप्रेस-वे के निर्माण के लिए केंद्र सरकार ने 7558 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है, जिसमें 1795.20 करोड़ रुपये भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनरूद्धार के अलावा अन्य पूर्व निर्माण गतिविधियों पर खर्च करने के लिए शामिल है। यह प्रस्ताव केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय में कई सालों से लंबित पड़ा हुआ था। सरकार की इस महत्वाकांक्षी सड़क परियोजना का मुख्य मकसद हरियाणा और उत्तर प्रदेश राज्यों में बुनियादी ढांचे के सुधार में तेजी लाना है। यह सड़क दिल्ली के आसपास बाहरी परिधि में बनाई जाएगी, ताकि जिन गाड़ियों को दिल्ली में नहीं ठहरना है वह शहर के बीच से नहीं गुजरें। इस विस्तार से राज्य के संबद्ध क्षेत्रों की सामाजिक, आर्थिक स्थिति सुधारने में मदद मिलेगी और परियोजना गतिविधियों के लिए स्थानीय श्रमिकों के लिए रोजगार की संभावनाएं बढ़ेंगी।

बुधवार, 15 जुलाई 2015

देश को जल्द मिलेगी सबसे लंबी सड़क सुरंग!

2500 करोड़ की लागत से बनेगी सुरंग में सड़क
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
देश में दुलर्भ इलाकों को भी सड़क संपर्क मार्ग से जोड़ने की दिशा में तैयार की जा रही सड़क परियोजनाओं में सरकार ने जम्मू-कश्मीर में जहां चिनाव नदी पर दुनिया में सबसे ऊंचे रेलवे पुल की सौगात देने की तैयारी को गति दी है, वहीं सूबे के राष्ट्रीय मार्ग पर चेनानी और रामबन के नाशरी के बीच ऐसी चार लेने वाली सड़क सुरंग के निर्माण को जल्द से जल्द करने का रास्ता प्रशस्त कर दिया है, जो देश में सबसे लंबी सुरंगयुक्त सड़क के रूप में इतिहास बनेगी।
केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्रालय के अनुसार इस सड़क सुरंग परियोजना पर 2500 करोड़ रुपये की लागत का अनुमान लगाया गया है। हालांकि इस परियोजना को यूपीए सरकार ने ही गत 23 मई 2011 को सड़क सुरंग का काम शुरू करा दिया था। इस सड़क सुरंग को जल्द पूरा कराने के लिए केंद्रीय नितिन गडकरी ने मौके पर जाकर सुरंग को पूरा खोलने के लिए आखिर विस्फोट कराया, जिसके बाद सड़क सुरंग के निर्माण में तेजी लाकर इसे देश को समर्पित कर दी जाएगी। जम्मू-कश्मीर के उधमपुर में 9.2 किमी लंबी सडक सुरंग जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय मार्ग पर चेनानी से नाशरी के बीच भारत की सबसे लंबी सड़क सुरंग होगी। मंत्रालय के अनुसार इस सड़क सुरंग परियोजना के तहत 9.2 किलोमीटर लंबी सुरंग के साथ हर 300 मीटर के अंतराल पर 29 क्रॉस मार्ग पर समानांतर निकास सुरंग का निर्माण कराया जा रहा है, जिसका मकसद विशेष रूप से पैदल चलने वालों के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। इस सड़क सुरंग का निर्माण पूरा होने के बाद जम्मू-श्रीनगर के बीच करीब 285 किमी लंबे  राष्ट्रीय राजमार्ग आवागम के लिए लगभग 30 किलोमीटर दूरी भी कम होगी और वहीं मौजूदा दस घंटे के बजाए पांच घंटे का सफर संभव हो जाएगा। वहीं यह सुरंग पटनीटॉप क्षेत्र में पारिस्थितिकी और पुराने जंगलों के संरक्षण को सुरक्षित भी करने में मददगार साबित होगी। देश की सबसे लंबी सड़क सुरंग जम्मू-कश्मीर में जुलाई 2016 तक बनकर तैयार हो जाएगी।

शुक्रवार, 10 जुलाई 2015

सड़क निर्माण की रफ्तार में रोड़ा भूमि अधिग्रहण!

सरकार को भूमि अधिग्रहण पास होने का इंतजार
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।

देशभर के दूर-दराज के इलाकों को राष्ट्रीय राजमार्गो से जोड़ने वाली सड़क परियोजनाओं को तेजी के साथ पूरा करना मोदी सरकार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। सरकार को उम्मीद है कि भूमि अधिग्रहण विधेयक पारित होने के बाद देशभर में सड़क परियोजनाओं को पूरा करने में मदद मिलेगी, जिसमें अनेक महत्वपूर्ण सड़क परियोयजनाओं को शुरू करने के लिए भूमि अधिग्रहण की बाधा सरकार के सामने खड़ी हुई है। 
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार मोदी सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्गो और अन्य सड़क परियोजनाओं में निर्माण की गुणवत्ता को प्राथमिकता के मानक पर रखा है। सरकार के प्रतिदिन 30 किलोमीटर सड़क निर्माण के लक्ष्य के आधे से ज्यादा रास्ते यानि प्रतिदिन 15 किमी से ज्यादा सडक बनाने का काम किया जा रहा है। इस लक्ष्य के साथ सरकार पहले ही 40 हजार करोड़ रुपये की सड़क परियोजनाओं को मंजूरी दे चुकी है। सरकार पर्यावरण जैसी मंजूरी की बाधाओं को तो कहीं हद तक दूर करने में आगे बढ़ी है, लेकिन कई ऐसी महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं के बीच भूमि अधिग्रहण की बाधा अभी मुहं बाए खड़ी हुई है। मंत्रालय की माने तो भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को परियोजनाएं पूरी करने में फिलहाल भूमि अधिग्रहण की समस्या सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। पर्यावरण की मंजूरी के बिना लंबित पड़ी ऐसी परियोजनाओं को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकारण पूरा करने में जुटा हुआ है। मंत्रालय के अनुसार संसद में लंबित भूमि अधिग्रहण के मद्देनजर सरकार ने यह भी निर्णय लिया है कि जब तक बीओटी (बनाओ,चलाओ, सौंप दो) परियोजनाओं के लिए कम से कम 80 फीसदी और ईपीसी (इंजीनियरिंग-खरीद-निर्माण) परियोजनाओं के लिए कम से कम 90 फीसदी भूमि अधिग्रहित नहीं कर ली जाती, तब तक ऐसी किसी भी सड़क परियोजना का कार्य प्राधिकरण को नहीं सौंपा जाएगा। मसलन सरकार को ऐसी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए अब भूमि अधिग्रहण के संशोधनोें को मंजूरी मिलने का इंतजार है, जो संसद की संयुक्त समिति के पास है और उम्मीद है कि समिति की रिपोर्ट आने के बाद सरकार भूमि अधिग्रहण विधेयक को पारित कराने का हरसंभव प्रयास करेगी।

मंगलवार, 7 जुलाई 2015

फर्जी लाइसेंस और शराबी ड्राइवरों की खैर नहीं!

सड़क हादसों पर गंभीर सरकार
नए मोटर वाहन कानून से सुधरेगी परिवहन व्यवस्था
मानसून सत्र में पारित बिल पास कराने की तैयारी
ओ.पी. पाल
. नई दिल्ली।
देश में बढ़ रही सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को कम करने की दिशा में केंद्र सरकार गंभीर है। सरकार मानती है कि देश में सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए यातायात नियमों को सख्त बनाने की जरूरत है, जिसमें फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस धारकों व शराब पीकर वाहन चलाने वालों की शामत आना तय है। सरकार संसद के मानसून सत्र में इस सख्त प्रावधान वाले नए सड़क परिवहन और सुरक्षा विधेयक को पास कराने की तैयारी में है।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार पुराने मोटर वाहन कानून का स्थान पर मोटर वाहन व सड़क सुरक्षा व नियमन के प्रावधानों को मिलाकर एक करते हुए एक विधेयक तैयार किया है, जिसमें सख्त जुर्माने व सजा के प्रावधान को लेकर केंद्र सरकार राज्यों के साथ भी समन्वय स्थापित कर रही है। इस संबन्ध में सोमवार को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने संकेत दिये कि हर संभव इस नए सड़क परिवहन और सुरक्षा विधेयक को सरकार संसद के आगामी मानसून सत्र में पारित कराने का प्रयास करेगी। गडकरी का कहना है कि सरकार सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए अत्यंत गंभीर है। उन्होंने कहा कि केंद्र ने राज्यों की उन आशंकाओं को भी दूर करने के लिए राज्यो के साथ समन्वय बना रही है कि नए विधेयक से राज्यों प्रशासनिक और वित्तीय अधिकारों का अतिक्रमण होगा। उन्होंने कहा कि इस विधेयक में ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे संघीय ढांचे पर प्रभाव पड़ेगा। गडकरी ने कहा एक बार कानून के बाद इस क्षेत्र में आमूलचूल बदलाव के अलावा पारदर्शिता भी आएगी और अपराधों पर रोक लगेगी। गडकरी ने माना कि देश में हर साल 5 लाख सड़क दुर्घटनाओं में अपंग होते हैं जबकि 1.5 लाख लोगों की जान जाती है।

सोमवार, 6 जुलाई 2015

सड़क हादसों पर सरकार का अलर्ट!

सड़क हादसों पर अंकुश लगाना बड़ी चुनौती!
सरकार ने तैयार की व्यापक कार्ययोजना
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
दुनिया में सड़क दुर्घटनाओं में सबसे ज्यादा हो रही मौतों को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने कई मेगा योजनाओं का खाका तैयार किया है, लेकिन सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। केंद्र सरकार ने नए सिरे से सभी राज्यों में संभावित दुर्घटनाग्रस्त स्थानों की पहचान करके एक ऐसी व्यापक कार्ययोजना बनाने की तैयारी कर रही है, ताकि सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाकर सड़क के सफर को सुगम बनाया जा सके।
केंद्र की मोदी सरकार ने जहां देश में सौ स्मार्ट सिटी की योजना के मद्देनजर स्मार्ट परिवहन इंफ्राटक्चर को भी बढ़ावा देने का निर्णय लिया है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इस दिशा में हाल ही में यातायात और परिवहन उद्योग से जुडे नीति और निर्णय निर्माताओं और हितधारकों के साथ एक सम्मेलन में सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने की दिशा में विस्तार से चर्चा की और सुझाव मांगे। मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार इस दौरान संभावित दुर्घटनाग्रस्त स्थानों की पहचान करने पर बल दिया, ताकि उन स्थानों के सड़क डिजाइन और तकनीकी रूप से बदलाव किया जा सके, जिसमें सड़क यातायात को सुगम बनाया जा सके। मंत्रालय के अनुसार केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने 'भारत में बनाओ' और 'स्मार्ट शहरों’ की तर्ज पर देश में ‘स्मार्ट परिवहन प्रणाली’ को विकसित करने पर बल दिया है। सूत्रों के अनुसार वित्तपोषण स्मार्ट परिवहन पहल के लिए सरकार एक व्यापक कार्ययोजना तैयार करने में जुट गई है। सरकार का मकसद है कि सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में ज्यादा से ज्यादा कमी लाकर वैश्विक स्तर पर लगे इस धब्बे को मिटाने के लिए देशभर में संभावित दुर्घटनाग्रस्त यानि ब्लैक स्पॉटों की पहचान करके सड़क अनुसंधान और तकनीकी को बढ़ावा दिया जाए जिसके लिए परिवहन उद्योगों को भी इस पहल से जुड़ने का आव्हान किया जा रहा है।

गुरुवार, 2 जुलाई 2015

‘फास्टैग’ से हाइवे पर सरपट दौड़ेंगे निजी वाहन!

देश में जल्द लागू होगी शैडो टॉलिंग स्कीम
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय राजमार्गो पर इलेक्ट्रॉनिक टोलिंग व्यवस्था को जल्द ही शुरू कर देगी, जिसके लिए पिछले एक साल से की जा रही कवायद में सरकार जल्द ही शैडो टोलिंग स्कीम को लागू करेगी। इस स्कीम में निजी वाहन मालिक 'फास्टैग' नामक स्मार्ट टैग लगाकर टोल प्लाजाओं को पार करके अपनी गाड़ियों को राष्ट्रीय राजमार्गो पर सरपट दौड़ा सकेंगे।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने राष्ट्रीय राजमार्गो पर निजी वाहनों के सफर को सुगम बनाने की दिशा में टोल प्लाजाओं पर टोल संग्रह के कारण आने वाली बाधाओं को दूर करने की दिशा में इलेक्ट्रॉनिक टोलिंग व्यवस्था को शुरू करने के लिए पिछले साल ही तैयारी शुरू कर दी थी। इस व्यवस्था के लिए पिछले साल सितंबर में सरकार ने आरएफआईडी यानि रेडियो-फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन टैग को ‘फास्टैग’ नामक स्मार्ट टैग का लोगों भी जारी कर दिया था। सूत्रों के अनुसार राजमार्गो पर निजी वाहन सरपट दौड़ सके इसलिए लिए मंत्रालय ने यह सुविधा उपलब्ध कराने के लिए एक 'शैडो टॉलिंग' स्कीम शुरू करने के लिए इरादे से उन निजी वाहन चालों को टोल में छूट देने की नीति तैयार की है, जो अपने वाहनों में 'फास्टैग' स्मार्ट टैग लगवाएंगे। यह एक तरह से सालाना टोल पास होगा, जिसमें वाहन चालकों को साल में एक बार ही भुगतान करना होगा और इसमें 2500 से तीन हजार रुपये का भुगतान करने के बाद वाहन चालकों को टोल प्लाजाओं पर बार-बार टोल देने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस स्कीम का प्रस्ताव अभी केंद्रीय कैबिनेट में है जिसकी मंजूरी जल्द ही मिलने की उम्मीद है। मंत्रालय के अनुसार मौजूदा समय में निजी वाहनों को एक टोल से एक माह के लिए ही आवागमन के लिए पास जारी किया जाता है। देशभर में राष्ट्रीय राजमार्गों पर इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन (ईटीसी) प्रणाली लागू करने के लक्ष्य में सरकार इसी साल दिल्ली-मुंबई के बीच एनएच-8 पर इलेक्ट्रॉनिक टोलिंग व्यवस्था कर चुकी है।

शनिवार, 27 जून 2015

जलमार्गो के विकास में आगे बढ़ी सरकार!

राज्यों के संग बनेगा अंतर्देशीय जलमार्ग निगम
ओ.पी. पाल
. नई दिल्ली।
केंद्र सरकार के देश में 101 नदियों को राष्ट्रीय जलमार्ग के रूप विकसित करने के लिए राज्यों से संयुक्त उद्यम बनाने के लिए उद्योगोें को आगे लाने का आग्रह किया। सरकार ने राज्यों से केंद्र के साथ मिलकर अंतर्देशीय जलमार्ग निगम बनाने का प्रस्ताव भी दिया है,जिसमें राज्यों की 26 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी।
केंद्र सरकार देश की नदियों को जलमार्ग के रूप में विकसित करने की परियोजनाओं के लक्ष्य पर तेजी से आगे बढ़ने की तैयारी कर चुकी है, जिसके लिए सरकार ने देश की 101 नदियों को जलमार्ग में तब्दील करने के लिए चिन्हित किया है। केंद्रीय सडक परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को पंख लगाने की दिशा में राज्यों के साथ समन्वय करके उन्हें हिस्सेदार बनाने की योजना भी बनाई है, जिसके लिए राज्यों के साथ विचार-विमर्श किया जा रहा है। मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार सरकार राष्ट्रीय जलमार्गो के विकास के लिए संयुक्त उद्यम बनाने की योजना पर काम कर रही है जिसके लिए केंद्र ने राज्यों से केंद्र के साथ मिलकर एक अंतर्देशीय जलमार्ग निगम बनाने का प्रस्ताव दिया है। केंद्र सरकार ने राज्यों से इस निगम के गठन में राज्यों की हिस्सेदारी 26 प्रतिशत रखने का प्रस्ताव रखा है, जबकि शेष केंद्र सरकार वहन करेगी। गडकरी पहले भी कह चुके हैं कि माल ढुलाई और यात्री परिवहन के लिए अंतदेर्शीय जलमार्गों के विकास के लिए सरकार निजी निवेश को भी बढ़ावा देगी।

रविवार, 21 जून 2015

फास्ट ट्रैक पर सीमाओं की सड़क परियोजना!

दस हजार किमी सड़क निर्माण में दो हजार पुल भी शामिल
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
देश में सड़को का जाल बिछाकर विकास के एजेंडे को अंजाम तक पहुंचाने की कवायद में जुटी मोदी सरकार ने सीमावर्ती इलाकों को आबाद करने का खाका तैयार किया है। इसके लिए देश की सीमावर्ती इलाकों की सड़कों को राष्ट्रीय राजमार्ग से जोड़ने की सड़क परियोजनाओं को अंतिम रूप दे दिया गया है। सीमावर्ती इलाकों की सड़कों राष्ट्रीय राजमार्ग से जोडने के लिए सरकार के इस मेगा प्लान में सरकार 10 हजार किमी सड़क निर्माण होगा, जिसमें दो हजार पुलों का निर्माण भी शामिल है।

शुक्रवार, 12 जून 2015

सड़क परियोजनाओं का जल्द बदलेगा मॉडल!

सड़क निर्माण में तेजी लाने की नीति पर सरकार
निजी कंपनियों के प्रोत्साहन को तैयार किया हाईब्रिड मॉडल
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।

देश में सड़कों का जाल बिछाने के इरादे से एक साल में सड़क निर्माण में तेजी लाने से उत्साहित मोदी सरकार ने अब नई सड़क परियोजनाओं को निजी भागीदारी के साथ हाईब्रिड मॉडल की पटरी पर उतारने की तैयारी कर ली है, ताकि राष्ट्रीय राजमार्गो समेत सभी सड़क परियोजनाओं में और भी तेजी लाई जा सके।
दरअसल केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गड़करी ने महाराष्ट में मंत्री रहते हुए जिस तरह सड़क और ओवर ब्रिज का जाल बिछाकर सूबे की वाहवाही लूटी थी, उसी तरह वह इस अनुभव को  राष्ट्रीय स्तर पर समर्पित करना चाहते हैं। यही कारण था कि उन्होंने मंत्रालय का कार्यभार ग्रहण करते ही देशभर में सड़क निर्माण में तेजी लाने के लिए शुरूआती दो साल में प्रतिदिन 30 किमी सड़क निर्माण का लक्ष्य तय किया था। हाालांकि इस लक्ष्य में गडकरी सड़क निर्माण के कार्य को प्रतिदिन 15 किमी तक लाने में सफल रहे हैं, जो पिछले डेढ़ दशक में एक रिकार्ड है। गडकरी इस लक्ष्य के आधे रास्ते पर पहुंचने पर यह उम्मीद भी जता चुके हैं कि देश के विकास में सड़क परियोजनाओं के कार्यान्व्यन के लिए सरकार इस लक्ष्य से भी आगे बढ़ेगी। इसी इरादे से उन्होंने हॉल ही में निजी भागीदारी को बढावा देने के लिए एक मिश्रित हाइब्रिड मॉडल पेश किया है, जिसमें सरकार अब नई सड़क परियोजनाओं को इसी मॉडल के आधार पर पूरा कराने का निर्णय लिया गया है। अभी तक एक साल की सड़क परियोजनाओं में निर्माण कार्य भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानि एनएचएआई द्वारा कराया गया है, लेकिन सड़क निर्माण में और भी ज्यादा तेजी लाने के लिए अब सरकार इस मॉडल के जरिए जोखिम के साथ निजी कंपनियों के टूटे भरोसे का वापस लाना चाहती है।