बुधवार, 14 अक्टूबर 2015

राग दरबार-बीप के ब्रांड एम्बेसडर

सियासी पर्यटन और इंटरटेनमेंट
बिहार विधानसभा चुनाव विश्व राजनीतिक पर्यटन का फिलहाल एक महत्वपूर्ण डेस्टिनेशन है। जिसे देखो उसका रुख पटना की ओर है। देशी चैनलों के पत्रकारों का बड़ा दल इन दिनों पटना से पोलिटकल-शो ऐसे आॅन-एयर कर रहे हैं जैसे एयर में और कुछ है ही नहीं। विदेशी पत्रकार जो भारत में पोस्टेड •ाी नहीं वे भी अमेरिका, जापान और आॅस्ट्रेलिया जैसे देशों से आकर बिहार विधानसभा चुनाव 2015 की रिपोर्टिंग कर रहे हैं। मानो कोई बड़ा सियासी जलसा चल रहा हो। ऐसे देश जिन्हें भारत में बड़ा निवेश करना है वे भी बिहार चुनाव और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ताकतवर होने को अनोन्याश्रय संबंध मानकर डेरा डाले बैठे हैें। वोटर कन्μयूज्ड है।
इतना हो-हल्ला पहले कभी किसी चुनाव में नहीं हुआ। इतनी ताकत। इतना पैसा। इतने दल। और इतने चुनाव चिन्ह। सपा सहित चार दलों के पास साइकिल चिन्ह है। तीर जदयू का चुनाव चिन्ह है तो तीर कमान लेकर शिवसेना और झामुमो के प्रत्याशी तैनात हैं। मुख्य रूप से चुनाव भाजपा के राजग गठबंधन और जदयू महागठबंधन के बीच है। मगर, वोटरों को वोटिंग मशीन पर चुनाव चिन्ह के रूप में आइस्क्रीम, गुड्डा, गुड़िया, बैट, हॉकी, बॉल, रेडियो समेत मनोरंजन के तमाम साधन मिलेंगे।
बीप के ब्रांड एम्बेसडर
देश की सियासत ही अजीब है, वह जो कर दे वही थोड़ा सा ही लगता है। मसलन हर कोई सियासी नुमाइंदा सांप्रदायिक सौहार्द्र की दुहाई देने में तो पीछे नहीं है, लेकिन बिगड़ते सौहार्द्र को राजनीतिक मुद्दा बनाने में भी किसी को हिचक नहीं। बीप को लेकर दादरी कांड में ऐसा ही देखा जा सकता है कि जहां कमंडल वाले बाबाओं ने आजम खान जैसे मंडल के ध्वजवाहक को ही गौ मांस(बीप) का ब्रांड एम्बेसडर ही बना दिया है, जिसने पाकिस्तान की तर्ज पर यूएन जाने की रट लगा रखी है। मुद्दे का हाथ से निकलता देख ओवैसी साहब भी आजम को आड़े हाथ लेकर राष्टÑवादी किरदार में नजर आने लगे। ओवैसी के इस किरदार में ऐसे ख्यालात सामने आए कि आजम खान साहब को संयुक्त राष्ट्र संघ जरूर जाना चाहिए, लेकिन उन्हें वीजा में नाम के साथ खान पढ़ते ही अमेरिकी एयरपोर्ट पर ही सुरक्षा एजेंसियां उन्हें घेरकर घंटों पूछताछ के साथ जामा तलाशी लेकर ही पिंड छुडाना पड़ेगा यह भी उन्हें ध्यान में रखना चाहिए। ऐसे में सवाल उठे कि तुनकमिजाज रामपुरिया खान गुस्से में क्या तत्काल ही भारत नहीं लौट आएंगे? ऐसा वह पहले भी भुगत चुके हैं। राजनीति गलियारे में इस मुद्दे पर यही चर्चा है कि ऐसा करने के बाद आजम कहां अमेरिकी एयरपोर्ट से ही भारतीय मुसलमानों के बेइज्जत करने पर बयान देने के अलावा कुछ भी नहीं कर पाएंगे और उन्हें यह भी अहसास हो जाना चाहिए कि भारत में ही मुसलमान कितने सम्मान और सुरक्षा के माहौल में जी सकता है।
ये किस जीत का जश्न है मेरे भाई......
किसी भी कार्य के सफल होने के बाद उसकी खुशी में जश्न मनाना तो आम इंसानी फितरत होती है। लेकिन बिना कार्य सिद्धी के नाचना-कूदना हास्यास्पद सा जान पड़ता है। हो कुछ भी क्या फर्क पड़ता है जश्न तो मनाया ही जाएगा वो भी पूरे लाव लश्कर और गाजे-बाजे के साथ। यहां बात 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध की हो रही है, जिसे भारत ने जीता या पाकिस्तान ने कोई स्पष्ट प्रमाण किसी के पास नहीं है। लेकिन जैसे ही इस साल युद्ध के 50 साल पूरे हुए यानि स्वर्ण जयंती आई तो दोनों देशों की मानो बल्ले-बल्ले हो गई। दोनों ओर युद्ध जीत लेने का जश्न मनना शुरू हो गया। एक कहता कि हमने दूसरे को पटका तो दूसरा कहता मैंने उसे नाको चने चबवा दिए। ऐसी निराधार जीत का क्या कीजे जनाब जिसका दूर-दूर तक कोई अता पता नहीं। ऐसे जश्न पर तो लोग ये ही कहेंगे कि ये किस जीत का जश्न है मेरे भाई।
--हरिभूमि ब्यूरो
11Oct-2015

शनिवार, 10 अक्टूबर 2015

फ्लाई ओवर भी नहीं दे पाए जाम से राहत!

दिल्ली में हर साल स्वाह हो जाती है अरबो की रकम
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
केंद्र सरकार ने देश में सड़क परिवहन को आसान बनाने के लिए भले ही कई सड़क परियोजनाओं को पटरी पर उतारा हो, लेकिन यह किसी से छिपा नहीं कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में समय-समय पर बनाए गये फ्लाई ओवर और मेट्रो का परिचालन भी दिल्ली की सड़कों पर जाम से राहत नहीं दे पा रहा है। चौंकाने वाली बात तो यह है कि हर साल पांच सौ अरब से भी ज्यादा की रकम दिल्ली की सड़कों पर वाहनों के जाम के तामझाम में ही स्वाह हो जाती है।
सड़क परिवहन से जुडे विशेषज्ञों के आकलन पर गौर करें तो दिल्ली की सड़कों पर जगह-जगह लगने वाले जाम के कारण उसमें फंसे वाहनों के कारण समय की बर्बादी तो होती ही है, वहीं वाहन के र्इंधन का खर्च भी जाम लगने के दौरान जेब को खाली करता नजर आता है। धन की बर्बादी के कारण में यदि पैट्रोल चालित एक कार का रोज 20 किमी सफर हो और उसका माईलेज 15 किमी प्रति लीटर होने के बावजूद उसके र्इंधन की लागत का खर्च 25 से 30 फीसदी जाम के कारण स्वत: ही बढ़ जाता है। इसी प्रकार दुपहिया वाहन की बात की जाए तो औसतन 50 किमी प्रति लीटर माइलेज के बावजूद उसका सफर सिकुड जाता है। यही हाल अन्य वाहनों का है। एक सर्वे के आंकड़ों में इसी प्रकार जाम के कारण दिल्ली में हर साल पांच सौ अरब से ज्यादा रुपयों के नुकसान का आकलन सामने आया है। एक डीटीसी बस ब्रेक डाउन होती है तो चार घंटे बसों के हाइड्रोलिक होने के कारण यातायात प्रभावित होता है। देश की राजधानी में जाम का आलम तो यह है कि लुटियन जोन भी इससे अछूता नहीं है, जहां वाहन चालकों को घंटों तक जाम का शिकार होना पड़ता है। राजधनी के हर इलाके में लगने वाले जाम के पीछे वजहें भी अलग-अलग सामने हैं। धरना-प्रदर्शनों के कारण भी दिल्ली जाम होती देखी गई है। एक आकलन के मुताबिक वर्ष 2014 के दौरान दिल्ली में 2409 प्रदर्शन, 361 रैलियां, 4170 धरने व हड़ताल, 342 त्यौहार संबंधी कार्यक्रमों के कारण भी जाम की स्थिति बनी है। बारिश होने पर तो जाम की स्थिति और भी ज्यादा विकराल रूप लेती देखी गई है। एक आंकड़े के मुताबिक बारिश के मौसम में दिल्ली की ऐसी 152 जगह चिन्हित हैं जहां जलभराव होता है, जिसके लिए दिल्ली यातायात पुलिस भी सिविक एजेंसियों को चेता चुकी है, क्योंकि तेज बारिश के कारण ट्रैफिक सिग्नल काम नहीं करने से वाहनों की लंबी लाइन सड़कों पर लग जाती है।

गुरुवार, 8 अक्टूबर 2015

दिल्ली में वाहनों की भीड़ घटाने की तैयारी!

जल्द पूरी होगी सड़क परियोजनाओं के टेंडर प्रक्रिया 
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
दिल्ली में वाहनों के बोझ को कम करने के लिए सरकार की ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस-वे के निर्माण के लिए जल्द ही काम शुरू कर दिया जाएगा। इस परियोजना के पूरा होते ही दिल्ली में घुसे बिना वाहन यूपी से हरियाणा और अन्य रास्तों पर जा सकेंगे। इसी एक अन्य परियोजना में दिल्ली से मेरठ तक बनाए जा रहे एक्सप्रेस वे के टेंडर जारी कर दिये गये हैं।
केंद्र सरकार ने अगले छह महीनो में राष्ट्रीय राजमार्ग के नेटवर्क में करीब 50 हजार किलोमीटर सड़क का इजाफा करने का लक्ष्य रखा है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय का दावा है कि यूपीए के दस साल के कार्यकाल में कुल करीब 18 हजार किमी राजमार्ग का निर्माण हुआ है, जबकि राजग सरकार ने 15 सितंबर के बाद अभी तक करीब 7.5 हजार किमी राजमार्ग का निर्माण पूरा किया है, जो सरकार की सड़क निर्माण में तेजी दर्शाता है। ऐसी ही परियोजना में दिल्ली के बाहर हरियाणा से होते हुए यूपी को जोड़ते हुए हरियाणा के सोनीपत तक बनने वाले 135 किमी लंबे ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस-वे के निर्माण का कार्य भी जल्दी शुरू कर दिया जाएगा, जिसके लिए इसी महीने टेंडर जारी करने की योजना है। मंत्रालय के अनुसार इस परियोजना के लिए केंद्र सरकार ने पिछले महीने ही 7558 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत को मंजूरी दी थी। इसी प्रकार दिल्ली से गाजियाबाद के रास्ते हापुड़ और मेरठ के सफर को आसान बनाने के लिए नेशनल हाइवे अथॉरिटी आॅफ इंडिया ने निजामुद्दीन पुल से लेकर डासना तक एनएच-24 की 28 किमी. सड़क को 14 लेन का बनाने के लिए टेंडर जारी कर दिया है, जिसका विस्तार पिछले सात साल से अधर में लटका हुआ था। इसके अलावा डासना से हापुड़ के बीच 22 किमी. सड़क को छह लेन करने के लिए भी टेंडर इसी महीने जारी किये जाने हैं।

बुधवार, 7 अक्टूबर 2015

नहीं घटेगा जेलों में कैदियों का बोझ!

देशभर की जेलों में बंद हैं 68 फीसदी विचाराधीन कैदी
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
देश में जेल आधुनिकीकरण और उनकी क्षमता बढ़ाने जैसी सुधार योजनाओं को भी अंजाम तक पहुंचाने के प्रयास किये जा रहे हैं, लेकिन जेलों पर क्षमता से अधिक कैदियों का बोझ बरकरार है। इसका कारण जेलों में बंद विचाराधीन कैदियों की भरमार होना भी माना जा रहा है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय भी स्वीकार कर रही है कि देश की ज्यादातर जेलों में क्षमता से अधिक कैदी बंद हैं। मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार देश की 1391 जेलों में 3,47,859 कैदियों की क्षमता के विपरीत 4,18,536 कैदी बंद हैं, जिनमें 54.5 प्रतिशत कैदी उम्र कैद की सजा काट रहे हैं। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के ताजे आंकड़ों पर नजर डालें तो भारत की जेलों में बंद इन कैदियों में 2,31,962 यानि 68 प्रतिशत विचाराधीन यानि अंडर ट्रायल कैदी अपनी किस्मत का इंतजार कर रहे हैं। आंकड़े के अनुसार विचाराधीन कैदियों में 69,225 यानि 27.3 प्रतिशत हत्या के आरोप में सलाखों के पीछे हैं। यही नहीं जेलों में सभी विचाराधीन कैदियों में ऐसे 40 प्रतिशत कैदी छह माह से अधिक समय से बंद हैं, जिन्हें जमानत पर रिहा किया जाना है। तीन माह से अधिक समय से जेलों में बंद विचाराधीन कैदियों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है। जबकि वर्ष 2013 में यह आंकड़ा 62 प्रतिशत था। ऐसे विचाराधीन कैदियों में 3540 कैदी तो पिछले पांच साल से अधिक समय से जेल में बंद है, जबकि 5394 मानसिक रूप से बीमार बताए जा रहे हैं। मसलन कि ज्यादातर ऐसे कैदी जेलों में बंद है जिन्हें जमानत मिल सकती है, लेकिन अदालतों में चलने वाली तारीख पर तारीख भी जेलों में कैदियों की बढ़ती संख्या का बड़ा कारण माना जा रहा है।

मंगलवार, 6 अक्टूबर 2015

चुनाव आचार संहिता उल्लंघन के टूटे रिकार्ड!

पहले चरण के मतदान से पहले ही 1413 मामले दर्ज
करोड़ों की नकदी, हथियार व शराब जब्त
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
बिहार में पांच चरणों में कराए जा रहे विधानसभा चुनाव की घोषणा होने से अभी तक राज्य में चुनाव आदर्श आचार संहिता उल्लंघन के पिछले सभी रिकार्ड भंग हो गये हैं। राज्य में अभी पहले चरण का मतदान भी नहीं हो पाया, लेकिन राज्य में अबतक 1413 मामले दर्ज किए जा चुके हैं।
केंद्रीय चुनाव आयोग के प्रवक्ता ने राज्य चुनाव आयोग के हवाले से आई रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि सोमवार को बिहार में इससे पहले वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में कुल 1059 और 2010 में विधानसभा चुनाव में 1185 मामले दर्ज किए गए थे। निर्वाचन आयोग के अनुसार चुनाव आयोग के निर्देश पर सभी जिलों में चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत सार्वजनिक एवं निजी संपत्तियों पर लगाए गए पोस्टर एवं दीवार लेखन के सर्वाधिक मामले दर्ज किए गए हैं। बिना अनुमति के लगे पोस्टर को हटाने की कार्रवाई भी चुनाव आयोग कर रहा है। चुनाव आयोग के दिशानिर्देशों के मुताबिक नामांकन दाखिल करने के दौरान निर्वाचन पदाधिकारी के कार्यालय में अधिकतम पांच समर्थक प्रवेश कर सकते हैं, लेकिन कोई भी दल या प्रत्याशी इस नियम का पालन करने में नाकाम हैं, इस संबन्ध में भी ज्यादातर जिलों में मामले दर्ज किये गये हैं। यही नहीं चुनाव आयोग की टीमें की जारी निगरानी में कई स्थानों पर तीन से अधिक वाहन लेकर नामांकन केंद्र पर पहुंचने को भी आचार संहिता का उल्लंघन मानते हुए मामले दर्ज हुए हैं। चुनाव आयोग के अनुसार आचार संहिता उल्लंघन के मामलों में आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज मामलों की पुलिस जांच करके अपनी रिपोर्ट अदालत में पेश करेगी, जिसमें अंतिम निर्णय चुनाव आयोग के बजाए अदालतों का होगा। अभी तक 520 लोगों के खिलाफ गैर जमानती वारंट भी जारी किये जा चुके हैं।

सोमवार, 5 अक्टूबर 2015

विदेशियों को नहीं मिलेगी किराये की कोख!

सरकार सख्त कानून बनाने के लिए लाएगी विधेयक
ओ.पी. पाल.
नई दिल्ली।
भविष्य में विदेशियों के लिए भारत में किराये की कोख लेना बेहद मुश्किल हो जाएगा। मसलन केंद्र सरकार देश में किराये की कोख यानि सरोगेसी के कानूनी नियमों को सख्त बनाकर ऐसे प्रावधान लागू करने के लिए जल्द ही एक विधेयक लाने की तैयारी में है। जिसके बाद भारत में कोई भी विदेशी किसी महिला को सरोगेट मदर बनने की पेशकश नहीं कर सकेगा।
स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार का सरोगेसी के लिए कानूनी नियमों को सख्त करने का मकसद किराये की कोख के दुरुपयोग रोकना है। सरकार ने ऐसे कानून के लिए संसद में एक नया विधयेक लाने के लिए मसौदा भी तैयार करा लिया है, ताकि सरोगेसी को ज्यादा सुरक्षित बनाया जा सके। यानि इस काननू के लागू होने पर किसी भी विदेशी नागरिक का भारत में किराये की कोख लेना नामुमकिन ही नहीं, बल्कि असंभव हो जाएगा। सूत्रों के अनुसार नये ‘असिस्टेड रीप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी रेगुलेशन बिल’ में ऐसे प्रावधान किए जा रहे हैं जिससे सरोगेसी के मामलों में बहुत हद दुरुपयोग को रोका जा सकेगा। दरअसल सरकार का पूरा ध्यान सरोगेसी के कानूनी पहलू को दुरुस्त करने के अलावा इसे सुरक्षित बनाने पर है। क्योंकि भारत में नियम-कानून को ताक पर रखकर कई जगहों पर ऐसे क्लिनिक चलाए जाने की शिकायते रही हैं, जहां सरोगेसी को लेकर उत्पीड़न होता है। वहीं किराये की कोख लेने के लिए विदेशियों को मोटी राशि चुकानी पड़ती है। सूत्रों के अनुसार 2.5 से 6 लाख रुपये तक या उससे भी अधिक रकम किराये की कोख के लिए वसूलने के मामले सामने आए हैं। हालांकि विदेशी नागरिकों का भारत से किराये की कोख लेना कोई नई बात नहीं है। एक अनुमान के मुताबिक करीब 10 हजार विदेशी प्रत्येक साल भारत का दौरा किराये की कोख के लिए करते हैं। इनमें से 30 फीसदी सिंगल या होमोसेक्सुअल होते हैं।

पहले चरण में 30 फीसदी दागी उम्मीदवार!

बिहार विधानसभा चुनाव
ओ.पी. पाल.
नई दिल्ली।
बिहार विधानसभा की 49 सीटों के लिए 12 अक्टूबर को होने वाले पहले चरण के चुनाव में जिन 583 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला होगा, उनमें 174 यानि 30 प्रतिशत प्रत्याशियों पर आपराधिक दाग है। जबकि 146 प्रत्याशी करोड़पतियों की फेहरिस्त में शामिल है।
देश में चुनाव सुधार के लिए उठाए जा रहे कदमों का समर्थन करते हुए भले ही सभी राजनीतिक दल राजनीति के आपराधीकरण को खत्म करने की दुहाई देते आ रहे हों, लेकिन उसके विपरीत कोई भी राजनीतिक दल ऐसा नहीं है जो चुनाव में आपराधियों को गले न लगाता हो। मसलन एसोसिएशन फॉर डेमोके्रटिक रिफार्म्स यानि एडीआर द्वारा बिहार में पहले चरण में 49 विधानसभा सीटों के लिए होने वाले चुनाव में अपनी किस्मत आजमाने सियासी मैदान में उतरे 583 उम्मीदवारों की खंगाली गई पृष्ठभूमि में जो खुलासा किया गया है उसके अनुसार इस चरण में 174 प्रत्याशी ऐसे हैं जिनके खिलाफ अदालतों में आपराधिक मामले लंबित हैं, इनमें 130 यानि 22 प्रतिशत उम्मीदवार तो ऐसे हैं, जिनके खिलाफ हत्या, डकैती, अपहरण, महिलाओं के खिलाफ अपराध और सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाने जैसे गंभीर मामले चल रहे हैं। इनमें 16 प्रत्याशियों के खिलाफ हत्या के मामले दर्ज हैं, जिनमें जदयू के प्रदीप कुमार के खिलाफ चार मामले हैं। जबकि सात अन्य निर्दलीय प्रत्याशियों पर भी हत्या के मामले दर्ज हैं। इसी प्रकार हत्या के प्रयास करने वाले 37 प्रत्याशी, 11 के खिलाफ महिलाओं के खिलाफ अपराध, पांच के खिलाफ डकैती व लूट, नौ के खिलाफ अपहरण तथा दो के खिलाफ सांप्रदायिक हिंसा फैलाने का भी आरोप है। इन दागी प्रत्याशियों में भाजपा व सीपीआई के सर्वाधिक 14-14, बसपा के 11, जदयू के 11, सपा के नौ, लोजपा, राजद, बसपा व सीपीएम के 8-8,कांग्रेस के छह तथा 45 निर्दलीय प्रत्याशी शामिल हैं। संगीन अपराध में भाजपा के सबसे ज्यादा दस तथा जदयू के नौ प्रत्याशी शामिल हैं।

रविवार, 4 अक्टूबर 2015

राग दरबार- सावधान! चमकेश बहादुरों...

हरित राजमार्ग नीति
भ्रष्टाचार..शब्द देश के सिस्टम से बाहर होगा या नहीं! यह तो भविष्य के गर्भ में है, लेकिन शायद मोदी सरकार सरकारी धन के दुरुपयोग को रोकने पर सतर्क है। शायद इसी मकसद से देश में राष्टÑीय राजमार्गो को हरा-भरा करने के लिए जारी हुई हरित राजमार्ग नीति में ऐसे भ्रष्टाचार या धांधलियों की बू को सरकार ने पहचानने का प्रयास किया है। इसी लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इस नीति के कार्यान्वयन में स्थानीय लोगों, एनजीओ और इस क्षेत्र में कार्य करने वाले लोगों को शामिल करने की योजना तो बनाई है, लेकिन इस नीति के जरिए रोजगार को बढ़ावा देने के साथ ही मुस्कराते हुए मंत्री जी ने स्पष्ट कर दिया है कि सड़को के किनारे लगने वाले पेड़ों की मानिटरिंग के बाद ही भुगतान होगा, इसलिए वे लोग उनकी योजना से न जुड़े जो सरकारी धन को हड़पने के लिए नापते ज्यादा हैं और काटते कम हैं। मंत्री जी ने सरकार की नजरों में चढ़ने और पुरस्कार पाने की चाह वाले लोगों को चमकेश बहादुर की संज्ञा देने में भी कोई हिचक नहीं की, जिनसे परहेज करने का फैसला किया है। हरित भारत की कल्पना में ऐसी योजनाओं की निगरानी के लिए बनाए जाने वाले निगरानी तंत्रों की टेढ़ी नजरे होंंगी चमकेश बहादुरो पर...।
जूनियर से हलकान मंत्री
सियासत भी अजीब खेल है। अमूमन तो माना जाता है कि इस खेल में बड़ा खिलाड़ी छोटे खिलाड़ी को तकलीफ देता है या शोषण करता है। लेकिन, कई बार मामला उल्टा भी पड़ जाता है। अब ये वाक्या तो कम से कम इस बात की तस्दीक करता ही है। दरअसल, एक केंद्रीय मंत्री अपने जूनियर मंत्री से खासा खफा रहती हैं। कारण, काम तो वो कर रही पर मीडिया में उनके जूनियर मंत्री उस काम को जमकर भूना लेते हैं। इतना ही नही, मैडम जूनियर मंत्री से इस बात से भी तनिक रूष्ट रहती हैं कि उनके बारे में नकारात्मक खबरें जो पूर्व में मीडिया में आई उसके पीछे हो न हो छोटे मंत्री का हाथ रहा है। उनके मन की बात एक दिन सामने भी आ गईं। हुआ यूं कि कुछ पत्रकारों ने उनसे कोई जानकारी लेनी चाही । मैडम ने जानकारी तो न दी पर इशारों में ही कह दिया कि, जहां से दूसरी खबरें लेते हो उसी सूत्र से पूछो. .बेहतर जानकारी मिलेगी। इतना कह वे मुस्कुरा कर चल दी।. . मैडम के जाते ही एक पत्रकार ने उनके सलाहकार से तंज कसते हुए कहा कि जब मैडम बोलेंगी नही तो सूत्र के पास जाना ही होगा।
अजब था ईरानी के संस्कृत प्रेम का नजारा
अपनी बेहतरीन वाक शैली के लिए जानी जाने वाली केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी हिंदी और अंग्रेजी में बहुत अच्छा बोलती हैं ये सभी जानते हैं। लेकिन वो देश की प्राचीन भाषा संस्कृत को भी निबार्ध गति से बोल सकती हैं ये शायद किसी ने नहीं सोचा होगा। लेकिन हुआ तो कुछ ऐसा ही है। हाल ही में राजधानी में आयोजित संस्कृत के एक कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री ने न सिर्फ अपना संबोधन संस्कृत में दिया बल्कि इस पुरातन भाषा को स्पष्ट उच्चारण के साथ सबके सामने रखा। उनका ये संस्कृत अवतार देखकर श्रोता मानो एक पल को आवाक रह गए। लेकिन मंत्री जी की संस्कृत में दी गई इस बेहतरीन स्टेज परर्फाॅमेंस के पीछे उनके द्वारा बैक स्टेज में की गई कड़ी मेहनत ने काफी अहम रोल निभाया था। संस्कृत में भाषण देने से ठीक एक दिन पहले ईरानी ने अपने एचआरडी मंत्रालय स्थित कार्यालय में संस्कृत के एक विद्वान के साथ शब्दों के उच्चारण की कड़ी रिहर्सल की। पूरा भाषण तैयार किया। उनकी इसी मेहनत और संस्कृत प्रेम का अजब नजारा कार्यक्रम में मंच पर भी देखने को मिला। वास्तव में अजब नजर आया ईरानी का संस्कृत प्रेम।
सहमे हुए है आप विधायक
आम आदमी पार्टी के विधायक सहमे हुए हैं। उनको लगता है कि मुसीबत में कोई दुश्मन भले ही काम आ जाए पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल कोई साथ नहीं देने वाले। सोमनाथ भारती का मामला इस बात की ताजी मिसाल है। भारती को पूरा विश्वास था कि उनकी पत्नी के साथ चल रहे पुलिस केस में पूरी पार्टी उनके पीछे लामबंद हो जाएगी। इसी खुशफहमी में दिल्ली के पूर्व कानून मंत्री कानून को ठेंगा दिखाने की जुगत में थे। पुलिस और कोर्ट के साथ लुकाछिप्पी के बीच में केजरीवाल ने जब कहा कि भारती पार्टी और परिवार दोनों को शर्मिंदा कर रहे हैं तो उनके पैंरों तले से जमीन खिसक गई। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केजरीवाल से नाराज
भारती ने अपने वकील के जरिये उन्हें एक पत्र लिखवाया। चिट्ठी लिखी भले ही वकील साहब ने थी पर उसका मजमून सोमनाथ ने बताया था। केजरीवाल पर निशाना साधते हुए कहा गया था कि मोदी मुसीबत और मुश्किल समय में अपनी पार्टी के नेताओं के साथ खड़े रहते हैं पर केजरीवाल नहीं। तोमर मामले में केजरीवाल देर तक साथ खड़े रहने का स्वाद चख चुके थे और वे भारती से तौबा करने में देर नहीं करना चाहते थे। सोमनाथ दुखी हैं। कोर्ट ने उनका रिमांड बढ़ाया तो आम आदमी पार्टी को लगा कि अब सोमनाथ का थोड़ा बहुत साथ देना चाहिए, वरना विधायकों में गलत मैसज जाएगा। लिहाजा अब आम आदमी पार्टी अपने रूख को थोड़ा लचीला कर रही हैं।

04Oct-2015

शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2015

नई तकनीक से बिछेगा देश में सड़कों का जाल!


सरकार रोजना बनाना चाहती है 100 किमी सड़क
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
केंद्र सरकार सड़क सुरक्षा की प्राथमिकता के साथ देशभर में सड़कों के निर्माण में नई तकनीक के जरिए तेजी लाने की कवायद में जुटी है। केंद्र सरकार देशभर में सड़कों का जाल बिछाने के लिए रोजाना 100 किमी सड़कों का निर्माण का लक्ष्य तय करने की तैयारी में है।
देश में सड़कों पर हादसों को लेकर चिंतित केंद्र सरकार सड़कों के डिजाइन बदलने के साथ नई तकनीक के जरिए सुरक्षित एवं नए निर्माण को आगे बढ़ाने की तैयारी में है। इसी योजना के खाके में सरकार अगले साल सड़क निर्माण के नए लक्ष्य में रोजना 100 किमी सड़क निर्माण का लक्ष्य तय करने का मन बना रही है, जो अभी तक राजग शासनकाल ने इस साल के अंत तक 30 किमी के लक्ष्य को साधने के 18 किमी तक पहुंचा दिया है। देश में दुनियाभर के देशों की अपेक्षा सबसे ज्यादा होने वाले सड़क हादसों पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र सरकार ने सड़कों के डिजाइन बदलने, सड़कों का चौड़ीकरण करने और नए सड़क निर्माण के लिए तकनीकी प्रणाली को अपनाने का निर्णय लिया है। शायद इसी मकसद को लेकर गुरुवार को राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए सड़क परिसंपत्ति प्रबंधन प्रणाली यानि आरएएमएस पर आयोजित कार्यशाला में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सरकार की भावी योजना को स्पष्ट किया है। नितिन गडकरी ने देश में सड़क क्षेत्र का तेजी से विकास करने की जरूरत पर विशेष देते हुए कहा कि देश की सड़कों पर बढ़ते यातायात के दबाव और दुर्घटनाओं की बढ़ती संख्या के मद्देनजर उनका मंत्रालय एक्सप्रेस हाईवे नेटवर्कों समेत नई सड़कों के निर्माण और मौजूदा सड़कों को चौड़ा करने तथा उनके रख-रखाव एवं मरम्मत की गति को निश्चित तौर पर तेज करने की तैयारी में है। इसके लिए तकनीक को इस्तेमाल में लाया जाएगा।
क्या होगी नई तकनीक
मंत्रालय के अनुसार सुरक्षित सड़क निर्माण के लिए आरएएमएस जैसी एक आधुनिक एवं डिजिटल परिसंपत्ति प्रबंधन प्रणाली के बिना राष्ट्रीय राजमार्गों को विकसित करना संभवन नहीं होगा। यह प्रणाली एक आधुनिक प्रबंधन प्रणाली है, जो सड़क परिसंपत्तियों के 360 डिग्री वाला नक्शा तैयार करने के लिए ‘गगन’ और ‘भुवन’ उपग्रह प्रणालियों का इस्तेमाल करेगा। इससे समय पर सड़कों की मरम्मत करने और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने में आसानी होगी। इस तकनीकी परियोजना से एकत्रित जानकारी परिवहन मंत्रालय, वित्त मंत्रालय, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, राज्य पीडब्लूडी, पुलिस विभाग, आर्थिक सहायता एजेंसियों, डेवलपर्स और नागरिकों के लिए उपयोगी हो जाएगा।
इसरो से होगा करार
सड़कों के निर्माण में ‘गगन’ और ‘भुवन’ उपग्रह प्रणालियों का इस्तेमाल करने के लिए एनएचएआई जल्द ही इसरों के साथ एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करके समझौता करेगा। यह बात एनएचएआई के चेयरमैन राघव चन्द्र ने कहा कि राजमार्गों के कारगर नियोजन, निर्माण, रख-रखाव और वित्तीय प्रबंधन के लिए आरएएमएस वक्त की मांग है। उन्होंने कहा कि हमारी परिसंपत्तियों का समुचित मानचित्रण करने और सभी हितधारकों के साथ इसे साझा करने में गगन (जीपीएस सहायता युक्त भू संवर्धित नैविगेशन)काफी उपयोगी साबित होगा।

गुरुवार, 1 अक्टूबर 2015

आखिर नियमों व मानकों के शिकंजे में आए वाहन!

हरियाणा समेत सात राज्यों में लागू होगा बीएस-4 मानक
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
देश में दौड़ते वाहनों के प्रदूषण पर लगाम लगाने की चली आ रही कवायद में कल यानि एक अक्टूबर से केंद्र सरकार द्वारा संशोधित किये गये मोटर वाहन नियमों को लागू किया जा रहा है। मसलन नियमों का सहारा लेकर सरकार ने वायु प्रदूषण के साथ सड़क सुरक्षा जैसे मुद्दो पर स्पीड गवर्नर प्रणाली को भी लागू कर दिया है।
देश में बढ़ती प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए गंभीर हुई केंद्र सरकार ने एक अक्टूबर से सबसे पहले वाहनों में इस्तेमाल किये जा रहे र्इंधन के कारण होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने की शुरूआत की है। इसके लिए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने अगस्त में ही हरियाणा, पंजाब, हिमाचल, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के अलावा लेह व कारगिल को छोड़कर समूचे जम्मू-कश्मीर में एक अक्टूबर से बीएस-4 मानक लागू करने के लिए अधिसूचना जारी कर दी थी। इस अधिसूचना के मुताबिक इन सात राज्यों के 23 जिलों में एक अक्टूबर से बीएस-4 मानकों वाले वाहनों का ही पंजीकरण होगा। केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्रालय की प्रदूषण नियंत्रण के लिए की गई इस पहल के तहत इन राज्यों में उन चार पहिया वाहनों की बिक्री और पंजीकरण पर कल से रोक लग जाएगी, जो भारत स्टेज यानि बीएस-4 उत्सर्जन मानक पर खरे नहीं उतरते। मंत्रालय के अनुसार एक अक्टूबर से इन सभी जिलों में पेट्रोल पंपों पर यूरो-4 यानि बीएस-4 मानक के पेट्रोल व डीजल की आपूर्ति शुरू हो जाएगी। हालांकि यूरो-4 या भारत-4 मानक के पेट्रोल व डीजल की आपूर्ति दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, अहमदाबाद और लखनऊ जैसे 26 शहरों में पहले से शुरू कराई जा चुकी है। सरकार का लक्ष्य है कि इस साल के अंत तक देश में एक दर्जन से अधिक राज्यों के 50 से ज्यादा प्रमुख शहरों में वाहनों के प्रदूषण नियंत्रण के लिए यूरो-4 यानि बीएस-4 मानक के पेट्रोल व डीजल की आपूर्ति शुरू कर दी जाए।