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बुधवार, 18 नवंबर 2015

जल्द मिलेगी वाणिज्यक वाहनों को बड़ी राहत!

देशभर में कहीं भी मिलेगा वाहन फिटनेस सर्टिफिकेट
केंद्र सरकार ने तैयार किया कानूनी मसौदा
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
सड़क सुरक्षा के मद्देनजर केंद्र सरकार ने जहां वाणिज्यक वाहनों पर स्पीड़ गवर्नर की अनिवार्य करके उनकी रμतार पर शिकंजा कसा है। वहीं ऐसे वाणिज्यक वाहनों के फिटनेस सर्टिफिकेट रिन्यू यानि नवीनीकरण के लिए बड़ी राहत देने की तैयारी के लिए एक कानूनी मसौदा तैयार किया है। इस कानूनी मसौदे की अधिसूचना जारी होते ही वाणिज्यक वाहनों को देशभर में कहीं भी फिटनेस कराने की छूट मिल जाएगी।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार इस संबंध में मंत्रालय ने एक मसौदा तैयार करके केंद्रीय कानून मंत्रालय को भेजा है, जहां से हरी झंडी मिलने के बाद इसकी जल्द ही अधिसूचना जारी की जाएगी। इस कानून के लागू होने के बाद देश में लंबा सफर करने वाले लाखों ट्रक आॅपरेटरो और वाणिज्यक वाहनों के मालिकों को अपने वाहन का देशभर में किसी भी कोने में फिटनेस सर्टिफिकेट का नवीनीकरण करने की छूट होगी। मौजूदा कानून में ऐसे वाहनों के फिटनेस सर्टिफिकेट का नवीनीकरण उसी राज्य या शहर में होता है, जहां जिस वाहन का पंजीकरण हुआ हो। मसलन इस कानून के लागू होने पर अन्य राज्यों में भी एक निरीक्षण स्तर का अधिकारी किसी भी राज्य के वाहन की जांच करके नया फिटनेस सर्टिफिकेट जारी कर सकेगा। केंद्र सरकार के इस कदम को ट्रक और अन्य वाणिज्यक वाहनों के मालिकों व आपरेटरों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। सड़क परिवहन मंत्रालय के अनुसार केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने यह निर्णय निरंतर ट्रक और वाणिज्यक वाहन आॅपरेटर्स की फिटनेस सर्टिफिकेट को लेकर ऐसी शिकायत को देखते हुए लिया गया है कि फिटनेस सर्टिफिकेट की मियाद अन्य राज्य में होते हुए समाप्त होने पर वाहन आपरेटरों को कठिनाईयों का सामना करना पड़ता था। यहां तक कि अन्य राज्य में में वाहन को जब्त तक कर लिया जाता है।

बुधवार, 14 अक्टूबर 2015

देश में हर चार मिनट में हो रही एक मौत

सड़क हादसों पर जल्द अंकुश न लगा तो बढ़ेंगी मौतें!
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
भले ही केंद्र सरकार ने सड़कों पर होने वाले हादसों पर काबू पाने के मकसद से सड़क सुरक्षा योजना में कई कदम उठाने का दावा किया है, लेकिन यदि जल्द ही सडक हादसों पर अंकुश न लगा तो आने वाले पांच सालों में हर तीन मिनट में एक मौत सामने होगी, जो फिलहाल चार मिनट में एक मौत का आंकड़ा है।
देश में सड़क सुरक्षा पर काम करने वाली एक गैर सरकारी संगठन इंडियन फॉर रोड सेफ्टी की जारी ताजा रिपोर्ट के अनुसार देश में होने वाले सड़क हादसों में हर चार मिनट में एक व्यक्ति की मौत हो जाती है। संस्था ने ऐसी दुर्घटनाओं पर 3.8 लाख करोड़ रुपए या जीडीपी का तीन प्रतिशत खर्च होने का अनुमान भी लगाया है। वहीं यह भी आशंका जताई है कि यदि देश में सड़क हादसों और इनके कारण होने वाली मौतों पर जल्द ही अंकुश नहीं लगया गया तो वर्ष 2020 तक हर तीन मिनट में एक व्यक्ति की मौत हो सकती है। मसलन ऐसे में दुर्घटनाओं पर होने वाले खर्च का बढ़ना भी स्वाभाविक है। संस्था ने इस चौंकाने वाले आंकड़ों का खुलासा यहां ‘टैकलिंग द चैलेंजेज आॅफ अनसेफ वेहिकिल आॅन इंडियन रोड्स’ विषय पर आयोजित एक सेमिनार में किया है। ऐसे में सवाल खड़े हो रहे हैं कि देश में 'कैसे रुकेंगे सड़क हादसे? जबकि भारत में हर मिनट एक सड़क दुर्घटना होती है और उसके कारण हर चार मिनट में एक जान गंवानी पड़ रही है। यह तथ्य भी सामने आए हैं कि सड़कों पर मरने वालों में एक तिहाई 15 से 25 साल की उम्र के नौजवान होते हैं। इंटरनेशनल रोड फेडरेशन (इंडिया चैप्टर) से जुड़े एनके सिन्हा की माने तो सड़कों पर स्पीड कॉमिंग मैजर (गतिशमन उपाय) लगे होने चाहिए, ताकि लोग अपनी गाड़ी की रफ़्तार कम करने को मजबूर हों। स्पीड ब्रेकर, उठे हुए जेबरा क्रासिंग और राउंड अबाउट जैसे उपाय हादसों को कम करने में काफी कारगर हो सकते है। यातायात क्षेत्र में सजा व जुमार्ना बढ़ाने,या ट्रैफिक एजुकेशन देने अथवा बोर्ड लगाने से खास फर्क पड़ता नहीं दिख रहा है।

शनिवार, 10 अक्टूबर 2015

फ्लाई ओवर भी नहीं दे पाए जाम से राहत!

दिल्ली में हर साल स्वाह हो जाती है अरबो की रकम
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
केंद्र सरकार ने देश में सड़क परिवहन को आसान बनाने के लिए भले ही कई सड़क परियोजनाओं को पटरी पर उतारा हो, लेकिन यह किसी से छिपा नहीं कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में समय-समय पर बनाए गये फ्लाई ओवर और मेट्रो का परिचालन भी दिल्ली की सड़कों पर जाम से राहत नहीं दे पा रहा है। चौंकाने वाली बात तो यह है कि हर साल पांच सौ अरब से भी ज्यादा की रकम दिल्ली की सड़कों पर वाहनों के जाम के तामझाम में ही स्वाह हो जाती है।
सड़क परिवहन से जुडे विशेषज्ञों के आकलन पर गौर करें तो दिल्ली की सड़कों पर जगह-जगह लगने वाले जाम के कारण उसमें फंसे वाहनों के कारण समय की बर्बादी तो होती ही है, वहीं वाहन के र्इंधन का खर्च भी जाम लगने के दौरान जेब को खाली करता नजर आता है। धन की बर्बादी के कारण में यदि पैट्रोल चालित एक कार का रोज 20 किमी सफर हो और उसका माईलेज 15 किमी प्रति लीटर होने के बावजूद उसके र्इंधन की लागत का खर्च 25 से 30 फीसदी जाम के कारण स्वत: ही बढ़ जाता है। इसी प्रकार दुपहिया वाहन की बात की जाए तो औसतन 50 किमी प्रति लीटर माइलेज के बावजूद उसका सफर सिकुड जाता है। यही हाल अन्य वाहनों का है। एक सर्वे के आंकड़ों में इसी प्रकार जाम के कारण दिल्ली में हर साल पांच सौ अरब से ज्यादा रुपयों के नुकसान का आकलन सामने आया है। एक डीटीसी बस ब्रेक डाउन होती है तो चार घंटे बसों के हाइड्रोलिक होने के कारण यातायात प्रभावित होता है। देश की राजधानी में जाम का आलम तो यह है कि लुटियन जोन भी इससे अछूता नहीं है, जहां वाहन चालकों को घंटों तक जाम का शिकार होना पड़ता है। राजधनी के हर इलाके में लगने वाले जाम के पीछे वजहें भी अलग-अलग सामने हैं। धरना-प्रदर्शनों के कारण भी दिल्ली जाम होती देखी गई है। एक आकलन के मुताबिक वर्ष 2014 के दौरान दिल्ली में 2409 प्रदर्शन, 361 रैलियां, 4170 धरने व हड़ताल, 342 त्यौहार संबंधी कार्यक्रमों के कारण भी जाम की स्थिति बनी है। बारिश होने पर तो जाम की स्थिति और भी ज्यादा विकराल रूप लेती देखी गई है। एक आंकड़े के मुताबिक बारिश के मौसम में दिल्ली की ऐसी 152 जगह चिन्हित हैं जहां जलभराव होता है, जिसके लिए दिल्ली यातायात पुलिस भी सिविक एजेंसियों को चेता चुकी है, क्योंकि तेज बारिश के कारण ट्रैफिक सिग्नल काम नहीं करने से वाहनों की लंबी लाइन सड़कों पर लग जाती है।