सोमवार, 9 नवंबर 2015

मिशन मोड से हर गांव के सभी घर होंगे रोशन!

वंचित गांवों का विद्युतीकरण पर राज्यों से बनी सहमति
ओ.पी. पाल
. नई दिल्ली।
प्रधानमंत्री मोदी के देश में वंचित सभी गांवों में हर घर को चौबीस घंटे बिजली की चमक से रोशन करने के लक्ष्य को हासिल करने की कवायद में कई योजनाएं शुरू की गई हैं। केंद्र सरकार ने ऐसे वंचित सभी गांवों जल्द से जल्द दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण ज्योति योजना के तहत मिशन के जरिए रोशन करने की तैयारी शुरू की है।
देश में ऊर्जा संकट से निपटने की दिशा में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आजादी के 68 वर्षों के बाद तथा 21वीं सदी के 15 वर्ष बीत जाने के बावजूद आधुनिक भारत के 18 हजार गांवों में अभी तक बिजली न होने पर दुख व्यक्त कर चुके हैं, जिनका सपना है कि कम से कम वर्ष 2022 तक देश के हर गांव में हर दिन चौबीस घंटे बिजली मुहैया कराई जाए। मोदी के इस लक्ष्य को जल्द से जल्द आगे बढ़ाने की दिशा में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल ने एक और कदम आगे बढ़ाते हुए विद्युतीकरण से बचे शेष सभी गांवों को दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण ज्योति योजना के तहत मिशन पर वर्ष 2017 तक ही पूरा करने की कवायद को तेज कर दिया है। विद्युत मंत्रालय के अनुसार इसके लिए हाल ही में पीयूष गोयल ने सभी राज्यों में केंद्र शासित प्रदशों के साथ सर्वसम्मति सभी वंचित सभी गांवों में विद्युतीकरण सुनिश्चित करने का रोडमैप तैयार कर लिया है। यही नहीं केंद्र सरकार ने राज्यों को इस बात के लिए भी तैयार कर लिया है कि देश में वर्ष 2019 तक या उससे पहले 24 घंटे बिजली सुलभ कराने के लिए योजना निर्माण से संबंधित गतिविधियों को मिशन मोड के जरिए पूरा किया जाए।

मुख्यमंत्रियों के हैट्रिक क्लब में शामिल हुए नीतीश!

हैट्रिक क्लब के पीएम बनने वाले मोदी अकेले सीम रहे
हरिभूमि ब्यूरो
. नई दिल्ली।
बिहार विधानसभा में ऐतिहासिक जीत हासिल करने वाले महागठबंधन का नेतृत्व कर रहे जदयू नेता नीतीश कुमार का तीसरी बार मुख्यमंत्री बनना तय हो चुका है। बिहार में मुख्यमंत्री के रूप में हैट्रिक बनाने वाले नीतिश कुमार ऐसे 12वें मुख्यमंत्री होंगे, जिन्होंने लगातार तीन या उससे ज्यादा चुनाव में मुख्यमंत्री का पद संभाला होगा।
बिहार में ताजा चुनाव से पहले भाजपा के साथ गठजोड़ और गठजोड़ टूटने के बाद नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री पद पर विराजमान है। रविवार को विधानसभा 2015 के महागठबंधन को मिले बहुमत में नीतीश कुमार को पहले से ही मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया हुआ है, जिसके लिए वे नतीजे आने के बाद मुख्यमंत्री पद की कुर्सी संभालने को तैयार हैं। बिहार चुनाव में महागठबंधन के जीत के बाद नीतीश कुमार का एक बार फिर राज्य के मुख्यमंत्री बनते ही हैट्रिक बनाने वाले क्लब में शामिल हो जाएंगे। इससे पहले ऐसे 11 नेता रहे जो लगातार तीन या उससे ज्यादा किसी न किसी राज्य के मुख्यमंत्री रहे हैं या फिलहाल पद पर विराजमान हैं। हैट्रिक लगाने वाले मुख्यमंत्रियों में शुमार तमिलनाडु में वर्ष 1954 से 1963 तक के. कामराज भी लगातार तीन बार मुख्यमंत्री रहे। ऐसे ही छत्तीसगढ़ के मौजूदा मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री पद पर कार्यरत है, जो वर्ष 2003 से लगातार तीन चुनावों में भाजपा को जीत दिलाकर इस पद पर अभी तक हैट्रिक के साथ विराजमान हैं। इसी दायरे में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान आते हैं जो वर्ष 2005 से लगातार तीसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री पद पर बने हुए हैं। हैट्रिक लगाने वाले मुख्यमंत्रियों में दिल्ली में वर्ष 1988 से 2008 तक लगातार कांग्रेस सरकार में मुख्यमंत्री रही श्रीमती शीला दीक्षित का नाम भी शामिल है। यही नहीं 16वीं लोकसभा के चुनाव में केंद्र की सत्ता में आई राजग के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी गुजरात में लगातार तीन बार मुख्यमंत्री के रूप में हैट्रिक वालों के क्लब के सदस्य रहे हैं। मोदी वर्ष 2002 से 2014 तक गुजरात के मुख्यमंत्री पद पर थे। इसी प्रकार मणिपुर के ओबराम इबीबो सिंह वर्ष 2002 से अभी तक लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री बने हुए हैं। कांग्रेस की असम सरकार में हैट्रिक लगाकर तरुण गोगोई भी वर्ष 2001 से लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री पद का कार्यभार संभाले हुए हैं। हालांकि ऐसे क्लब में तमिलनाडु की जयललिता को भी तीन बार बारी से मुख्यमंत्री बनने का श्रेय है, जिन्होंने पहली बार 1991, फिर 2001 और फिर 2011 में तीसरी बार मुख्यमंत्री बनी।

रविवार, 8 नवंबर 2015

जनता की जेब पर बढ़ सकता है बोझ!

मोदी सरकार के फैसलों ने दिया दीवाली पर झटका
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
देश में पहले से ही महंगाई की मार झेल रही जनता के सामने मोदी सरकार के कुछ फैसलों ने ऐसा झटका दिया है, जिससे जनता के ऊपर आर्थिक बोझ बढ़ना तय है। मसलन विमान सेवाएं, फोन बिल, बिजली बिल, बैंकिंग सेवाएं, होटल में खाना और रेल टिकट जैसी जरूरत की चीजों के दाम बढ़ने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। केंद्र सरकार का दीपावली पर यह बड़ा झटका माना जा रहा है।
आर्थिक मामलों के जानकारों का मानना है कि मोदी सरकार के इन कड़े फैसलों का जनता पर सीधा असर पड़ने की संभावना है। इन फैसलों के कारण फोन बिल, बिजली बिल, रेल टिकट, बैंकिंग सेवाएं, होटल में खाना, ये सब एक बार फिर महंगा होना तय माना जा रहा है। एक दिन पहले ही नियमों में बदलाव करके भारतीय रेलवे ने अपने यात्रियों को तगड़ा झटका दिया है। रेलवे द्वारा किये गये नियमों में बदलाव के कारण अब कोई भी टिकट ट्रेन छूटने के बाद कैंसल नहीं होगी और रिफंड भी नहीं मिलेगा। वहीं कन्फर्म टिकट ट्रेन छूटने के 4 घंटे पहले तक ही कैंसल होंगे।
गैस सब्सिडी खत्म होने के संकेत
केंद्र सरकार रसोई गैस पर सब्सिडी को खत्म करने पर पहले से ही विचार कर रही है और वैसे भी एलपीजी गैस के दाम घटाने के नाम पर उपभोक्ताओं को मिलने वाली सब्सिडी की रकम घटती जा रही है। गैस सब्सिडी खत्म करने के संकते स्वयं वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भी दिए हैं। वित्त मंत्री जेटली के संकेतों पर गौर करें तो उन्होंने कहा कि क्या गैस सब्सिडी का लाभ सभी को मिलना चाहिए या सिर्फ उस वर्ग को, जिसे इसकी वाकई जरुरत है? जेटली के इस बयान के बाद कहा जा रहा है कि सरकार शीघ्र ही कानून बनाने जा रही है जिसके तहत एक निश्चित आय से ज्यादा वालों को गैस सब्सिडी नहीं दी जाएगी।

राग दरबार- असहिष्णुता के हालात या साजिश!

विश्व गुरु में रोडा असहिष्णुता!
महान कवि रामधारी सिंह दिनकर के शब्दों में कहें तो, समर शेष है नहीं पाप का भागी केवल व्याघ्र, जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनका भी अपराध। जैसी नजर वैसा नजरिया। वाकई ये वाक्य देश में चल रही असहिष्णुता की लहर पर सटीक बैठते हैं। वैसे भी देश की अजब-गजब राजनीति में किसी भी मुद्दें को हवा देने वालों के पीछे कारवां बन जाता है, भले ही उस मुद्दे को उन्हें ज्ञान भी न हो। आजकल देश में असहिष्णुता के नाम पर देश की जनता के सामने जो तमाशा हो रहा है उसके फेर में बुद्धिजीवी तक उलझकर सियासी शिकंजे में नहीं बल्कि तटस्थता की पहचान भी खोते नजर आ रहे हैं। असहिष्णुता का आलम इतने पैर पसार गया कि समाज का कोई भी तबका इससे अछूता नहीं दिख रहा है। मसलन गौमांस के मामले को लेकर जो विवाद चल रहा है उसमें जहां जिसकी लाठी मजबूत है वहां वह अपनी मनमानी करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। मसलन हर तरफ ‘असहिष्णुता’ का ही बोलबाला है। इसी असहिष्णुता की राजनीति में तटस्थता के लिए पहचाने जाने वाले लेखक, इतिहासकार और वैज्ञानिक भी अपना सम्मान लौटने की भेड़ा चाल को चरितार्थ करते नजर आ रहे हैं। असहिष्णुता की चपेट में आने से पहनावा भी नहीं बच पा रहा है। कहीं महिलाओं को जींस व शॉट्स पहनने की इजाजत नहीं मिल रही है तो कहीं साड़ी-धोती व कुर्ते-पायजामे पर आपत्ति हो रही है। दरअसल कोई भी यह हकीकत जानने की कोशिश नहीं कर रहा है कि देश को असहिष्णुता की ओर धकेलने में कोई साजिश है या ऐसे हालात देश की सियासत का नतीजा है। हद तो तब हो गई जब असहिष्णुता की चर्चा अंतर्राष्ट्रीय पटल तक भी सुनाई दी, जिसमें भारत जैसे लोकतांत्रिक देश को महाशक्ति बनाने वाले सपनो पर ब्रेक लग सकता है इसकी भी किसी को चिंता नहीं है यानि इन असहिष्णुता के हालातों का फायदा उठाकर देश के खिलाफ खुरापाती तत्वों की हरकतें भी बेकाबू हो सकती है। इस हालात से चिंतित कुछ समझदार लोगों में तो ऐसी ही चर्चा है कि आम आदमी को इस शब्द का अर्थ तक नहीं मालूम है, लेकिन सियासी स्यापाबाजों ने जनता की फिक्र किये बिना समाज को अपने ही डंडे से हांकने की ठान ली है, जो बर्दाश्त से बाहर है। यही नहीें इस मामले पर कोई किसी की सुनने ही तैयार नहीं है और न ही समझने को। ऐसा भी नहीं है कि सभी वर्ग एक तरफा है यानि सभी वर्गो में इस शब्द को लेकर दो फाड़ है चाहे वे बुद्धिजीवि वर्ग ही क्यों न हो।

शुक्रवार, 6 नवंबर 2015

मोदी ने एनसीआर को दिया तीन सड़क परियोजनाओं का तोहफ़ा!

हरियाणा को दीवाली से पहले मिली बड़ी सौगात
सड़क परियोजनाओं पर 13802 करोड़ की लागत का अनुमान
ओ.पी. पाल. सोनीपत।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोनीपत जिला के राजीव गांधी एजुकेशन सिटी कुंडली में 13 हजार 802 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत से बनाए जाने वाली भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की तीन बड़ी परियोजनाओं की आधारशिला रखी, जिसमें 135 किमी लंबे ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस-वे तथा 126 किमी लंबे वेस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस-वे के अलावा सोनीपत से पानीपत तक 70 किमी लंबे चार लेन को आठ लेन की परियोजना शामिल है।
सोनीपत के राजीव गांधी एजुकेशन सिटी कुंडली में गुरुवार को आयोजित एक समारोह के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन परियोजनाओं का शिलान्यास करने से पहले इस मेगा परियोजना के बनाए गये मॉडल का अवलोकन किया, जिसके बाद मंच से कंप्यूटर का बटन दबाकर तीनों सड़क परियोजनाओं का एक साथ शिलान्यास करने की औपचारिकता पूरी की। इससे पूर्व हरियाणा को दी गई इन तीन सड़क परियोजनाओं पर बोलते हुए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गड़करी ने कहा कि केंद्र सरकार ने सडक इंफ्रास्ट्रक्चर की देश में बड़ी परियोजनाएं तैयार की है। देश में पांच लाख किलोमीटर लंबाई का रोड नेटवर्क है, जिसमें डेढ़ लाख किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों का है। दिसंबर 2015 तक 96 हजार किलोमीटर तक की परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इसमें हरियाणा की सड़क परियोजनाओं से हरियाणा के साथ दिल्ली और उत्तर प्रदेश को भी लाभ होगा। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने एक साल में हरियाणा में करीब 32 हजार करोड़ की परियोजनाएं स्वीकृत की हैं, जिनमें 13820 करोड़ की इन परियोजनाओं की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आधारशिला रख रहे हैं।
देश की पहली एक्सस कंट्रोल एक्सप्रैस-वे परियोजना
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि 7558 करोड़ रुपये की 135 किमी लंबी ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस-वे तथा अरसे से अधूरी पड़ी 136 किमी लंबी वेस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस-वे को पूरा करने के लिए 4115 करोड़ रुपये मंजूर किये गये हैं। दिल्ली को अपने आगोश में लेने वाली ये दोनों परियोजना देश की पहली एक्सस कंट्रोल एक्सप्रैस-वे परियोजना है, जिसे हरियाणा से शुरू किया जा रहा है। इन परियोजनाओं से दिल्ली का 50 प्रतिशत यातायात भार कम हो सके और लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि इसके अलावा सोनीपत से पानी तक चार लेन वाले 70 किमी राजमार्ग को आठ लेन के लिए 2129 करोड़ रुपये खर्च करने का अनुमान है। ये तीनों योजनाएं हरियाणा के विकास के साथ रोजगार को भी आगे बढ़ाएगी। नितिन गडकरी ने कहा कि केंद्र सरकार की सड़क परियोजनाओं में इसी माह दिल्ली में आईटीओ चौक से मेरठ तक 14 लेने का एक्सप्रेस-वे इसी माह शुरू कर दिया जाएगा। यह भी देश की आजादी के बाद पहली ऐसी नई परियोजना है जो पहली बार किसी सड़क मार्ग को 14 लेन में बनाया जा रहा है। यही नहीं दिल्ली से कटरा तक देश का सबसे लंबा एक्सप्रेस-वे की परियोजना रिपोर्ट भी तैयार हो चुकी है, जो दिल्ली से जींद-लुधियाना-अमृतसर-कटरा तक जाएगी, जिसमें पंजाब, हरियाणा व जम्मू कश्मीर राज्यों से सहयोग मांगा गया है।

गुरुवार, 5 नवंबर 2015

‘गोल्डन नेकलस’ की आधारशिला आज रखेंगे मोदी

दिल्ली के बिना अन्य राज्यों में जाना होगा आसान!
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कल गुरुवार को सोनीपत में दिल्ली-पानीपत मार्ग स्थित मुकरबा चौक पर इस्टर्न पैरीफेरल एक्सप्रेस वे और वेस्टर्न पैरीफेरल एक्सप्रेस वे यानि ‘गोल्डन नेकलस’ के अलावा दिल्ली-पानीपत मार्ग की आठ लेन की परियोजना की भी आधारशिला रखेंगे। इस मेगा सड़क परियोजना को केंद्र सरकार ने दिल्ली जैसे महानगर की यातायात समस्या का सामना किये बिना हरियाणा के पलवल व फरीदाबाद से सीधे सोनीपत के सफर की राह को आसान बनाने के लिए कदम उठाया है।
केंद्र सरकार ने फरीदाबाद और पलवल से सीधे सोनीपत के लिए छह लेन वाले प्रस्तावित छह लेने वाले पूर्वी बाह्य परिधि एक्सप्रेस-वे के निर्माण को मंजूरी गत 16 जुलाई का देते हुए राष्टÑीय राजमार्ग संख्या एनई-2 के रूप में हरियाणा व उत्तर प्रदेश के 98 गांवों को जोड़ने की दिशा में 7558 करोड़ रुपये की लागत को भी मंजूरी दी थी। इस मंजूरी के बाद अरसे से चली आ रही मांग का रास्ता और भी प्रशस्त होने जा रहा है, जब कल गुरुवार को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नीतिन गडकरी के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आधारशिला रखेंगे। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि इस छह लेन के एक्सपे्रस-वे के रूप में 135 किमी लंबे इस पूर्वी बाह्य परिधि एक्सप्रेस-वे के निर्माण के लिए केंद्र सरकार ने 7558 करोड़ रुपये की मंजूरी पहले ही दे दी है,जिसमें 1795.20 करोड़ रुपये भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनरूद्धार के अलावा अन्य पूर्व निर्माण गतिविधियों पर खर्च करने के लिए शामिल है। इसके निर्माण के बाद हरियाणा में फरीदाबाद व पलवल से सोनीपत जाने के लिए राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की यातायात और प्रदूषण की समस्या से निजात मिलेगी और समय भी बचेगा। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री द्वारा आधारशिला रखते ही पूर्वी बाह्य परिधि एक्सप्रेस-वे का निर्माण कार्य भी शुरू हो जाएगा, वहीं सालों से लंबित सोनीपत से पलवल को जोड़ने वाले पश्चिमी बाह्य परिधि एक्सप्रेस-वे के अधूरे निर्माण को भी गति देने की योजना को अंजाम दिया जाएगा।

बुधवार, 4 नवंबर 2015

कोलेजियम प्रणाली में पारदर्शिता की कवायद!

सरकार के सुझावों पर गौर करेगा सुप्रीम कोर्ट
 पांच नवम्बर को होगी अगली सुनवाई
 नई दिल्ली।
देश में जजों की नियुक्तियों के लिए एनजेएसी को सुप्रीप कोर्ट द्वारा खारिज करने के बाद फिर से लागू हुई कोलेजियम प्रणाली में व्यापक पारदर्शिता लाने की कवायद में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिये हैं। सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले में पांच नवंबर को होने वाली अगली सुनवाई में सरकार के सुझावों पर गौर करेगी।
केंद्र सरकार ने कोलेजियम प्रणाली को खत्म करके जजो की नियुक्तियों की प्रक्रिया के लिए राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (एनजेएसी) अधिनियम की कवायद शुरू की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने गत 16 अक्टूबर को एनजेएसी को असैंवाधिक करार देते हुए इस प्रणाली को खारिज कर दिया था और सुप्रीम कोर्ट व उच्च न्यायालयों में जजो की नियुक्ति पुरानी चली आ रही कोलेजियम प्रणाली से करने को बरकरार रखने के आदेश दिये। उस आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने हालांकि जजों द्वारा जजों की नियुक्ति के लिए दो दशक पुराने कोलेजियम सिस्टम के स्थान पर लाए गए 99वें संविधान संशोधन अधिनियम और एनजेएसी अधिनियम को रद्द करते हुए शीर्ष अदालत ने स्वीकार किया था कि इसमें अधिक पारदर्शिता और सुधार की जरूरत है। इसीलिए केंद्र सरकार ने मंगलवार को शिकायत निवारण व्यवस्था स्थापित करने समेत न्यायपालिका में जजों की नियुक्ति की कोलेजियम प्रणाली में व्यापक पारदर्शिता लाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के समक्ष कई महत्वपूर्ण सुझाव पेश किए हैं।

मंगलवार, 3 नवंबर 2015

राजमार्गो पर हाईटेक गांव बसाने की तैयारी!

अंतर्राष्ट्रीय मानकों से बुनियादी ढांचे का बन रहा है रोडमैप
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
केंद्र सरकार ने राष्‍ट्रीय राजमार्ग और एक्सप्रेस-वे पर अब हाईटेक गांव बसाने का निर्णय लिया है। ऐसी योजना के बुनियादी ढांचे को अंतर्राष्‍ट्रीय मानकों पर तैयार करने के लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने रोडमैप तैयार कर लिया है। मसलन आगामी सभी सड़क परियोजनाओं में हाईवेज विलेजेज के प्रावधान को शामिल करने को मंजूरी दी जा चुकी है।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार अगले पांच सालों में केंद्र सरकार पांच लाख करोड़ रुपए की परियोजना का ठेका देने की योजना बना रही है। सरकार की योजना के तहत मौजूदा 96 हजार किलोमीटर राजमार्ग को बढ़ाकर डेढ़ लाख किलोमीटर तक करने का निर्णय लिया जा चुका है। इस साल करीब 10 हजार किलोमीटर राजमार्ग बनाने के लिए एक लाख करोड़ रुपए के ठेके देने का लक्ष्य है। मसलन आने वाले पांच सालों में 50 हजार किलोमीटर राजमार्ग और 16 हजार किलोमीटर एक्सप्रेस-वे बनाने की योजना पर काम किया जा रहा है, जहां वह सभी एक्सप्रेसवे और हाईवे पर अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुसार ऐसी सुविधाएं मुहैया कराना चाहती है। हाईटेक गांव की इस योजना के प्रस्तुतिकरण को प्रधानमंत्री कार्यालय से भी हरी झंडी दे दी गई है। पीएमओ से मिले समर्थन के बाद सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने योजना के लिए रोडमैप तैयार किया है, जिसके तहत राष्‍ट्रीय राजमार्ग के हर 200 किलोमीटर पर ऐसा हाईटेक गांव होगा, जहां का कामकाज सोलर एनर्जी से चलेगा। ऐसे हाईवे विलेज 75 से 100 एकड़ में बनाए जाने की योजना है। सरकार इसके लिए जमीन लैंड पूलिंग सिस्टम से अधिग्रहण करेगी यानि जमीन के मालिक को इस परियोजना में साझीदार बनाया जाएगा। ऐसे हाईटेक गांवों यानि विलेज में हैंडीक्राफ्ट शोरूम, फूड कोर्ट, डिस्पेंसरी, एटीएम, चाइल्ड केयर फैसिलिटी, कार वाशिंग, सर्विसिंग यूनिट, इंटरनेट फेसिलिटी, कॉफी शाम, बुक स्टोर और टूरिस्ट्स के लिहाज से अन्य सुविधाएं दी जाएंगी। प्राइवेट कंपनियों को स्टोर खोलने के लिए आमंत्रित किया जाएगा।

सोमवार, 2 नवंबर 2015

ड्रोन ने उड़ाई सुरक्षा एजेंसियों की उड़ी नींद!

आईजी एयरपोर्ट पर मंडरा रहा है कैमरे से लैस ड्रोन
ओ.पी. पाल
. नई दिल्ली।
संसद भवन के बाद देश की राजधानी दिल्‍ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट के ऊपर मंडराते कैमरे से लैस ड्रोन जैसी किसी संदिग्ध चीज के कारण विमानन विभाग और सुरक्षा तंत्र में हड़कंप मचा हुआ है। इस संदिग्ध ड्रोन के रडार पर न आने के कारण सुरक्षा एजेंसियों की भी नींद हराम हो रही है। हालांकि इसे किसी खतरे के दायरे में रखते हुए एयरपोर्ट पर हाई अलर्ट करके भारतीय वायु सेना के हेलीकाप्टर को निगरानी के लिए लगाया गया है।
इंदिरा गांधी एयरपोर्ट के सूत्रों के अनुसार ड्रोन जैसी चीज के एयरपोर्ट और आसपास उड़ान भरना प्रतिबंधित है, लेकिन गत शुक्रवार को पहली बार जब भुवनेश्वर से आए एक विमान ने लैडिंग शुरू की तो उसके पायलट ने रनवे पर ड्रोन जैसी संदिग्ध वस्तु को मंडराते देखा और वह विचलित हुआ, जहां सैकड़ों यात्रियों की जिंदगी दावं पर थी। इस शिकायत को एयरपोर्ट अथोरिटी ने गंभीरता से लिया, जिसके बाद एयरफोर्स के एक अधिकारी ने टावर से वॉच करके ऐसी संदिग्ध वस्तु को मंडराने की पुष्टि कर दी। सूत्रों के अनुसार शुक्रवार को तो हालात ज्यादा भयावह नजर आए जब सुबह एयर ट्रैफिक कंट्रोलर (एटीसी) ने तीन बार कोई संदिग्ध चीजों को देखा। इसका पता लगाने के लिए एयरफोर्स के एक हेलिकॉप्टर ने इसकापता लगाने के लिए उड़ान भी भरी, लेकिन कोई सफलता नहीं मिल सकी। इतना जरूर महसूस किया जा रहा है कि एयरपोर्ट के ऊपर और आसपास उड़ने वाली यह संदिग्ध चीज कैमरों से लैस ड्रोन जैसी है, जिसे रिमोर्ट कंट्रोल ने संचालित किया जाने की आशंका है। गौरतलब है कि पिछले सप्ताह ऐसी ही ड्रोन जैसी चीज को संसद भवन के ऊपर मंडराता देखा गया था, जिसे सुरक्षा बलों की बड़ी चूके भी माना जा रहा है।

रविवार, 1 नवंबर 2015

राग दरबार-अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता या सियासत

बुद्धिजीवियों की विधा भी राजनीति के फेर में
देश की सियासत ही ऐसी है जिसमें बुद्धिजीवियों की विधा भी राजनीति के फेर से नहीं बच पाती। तभी तो लेखकों, फिल्मकारों एवं वैज्ञानिकों के असहिष्णुता के माहौल के विरोध में इतिहासकार भी शामिल हो गये हैं। ऐसा ही कुछ गीतकार गुलजार को अभिव्यक्ति पर बोले गये हमले से सामने नजर आ रहा है। हमला भी ऐसा जिसमें केंद्र में मोदी सरकार बनने के बाद उनके बयान को हैरानी पैदा करने वाला तो बिल्कुल नहीं कहा जा सकता, लेकिन उन्होंने जो चश्मा लगा रखा है, उससे ऐसा ही दिखायी देना लाजिम है। गुलजार यदि कुछ ना कहते तो भी उनसे यही कहने की उम्मीद थी। राजनीति के गलियारों में तो ऐसी ही चर्चाएं सुर्खियों में हैं कि यदि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता ना होती तो शायद पुरस्कार वापसी की नौटंकी का लाइव प्रसारण भी गुलजार साहब और उन जैसे खास चश्मा लगाने वाले ना देख पाते। आप अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अलम्बरदार है तो पहले सलमान रूश्दी और तस्लीमा को बुला कर उन्हें भी भारत में अपनी बात कहने की आजादी दीजिए। यह सभी को पता है कि ऐसा हरगिज नहीं होगा, क्योंकि ऐसे चश्मे वाले दिखावे के प्रगतिशील हैं, जैसी मानसिकता का प्रतिनिधित्व उनके बयान करते हैं, जो शायद सीधे सियासत का संकेत देते हैं।
तसलीमा की खरी-खरी
देश के स्यापाबाज सेक्युलरों को जानी-मानी लेखिका तसलीमा नसरीन की खरी-खरी भले ही अखरती नजर आ रही हो, लेकिन यह सच है जब तसलीमा नसरीन मुस्लिम कट्टरपंथियों के निशाने पर थीं और भारत के अधिकांश बुद्धिजीवियों ने उसका समर्थन करने के बजाए चुप्पी साधी हुई थी। हालांकि जब वे हमले का शिकार हुए तो नसरीन ने बिना ढोंग किये उनका साथ दिया था। कुछ भारतीय लेखकों ने उनकी पुस्तक पर पाबंदी लगाने और उन्हें पश्चिम बंगाल से बाहर किए जाने का भी समर्थन किया था। तमाम भारतीय लेखक तब भी चुप थे, जब उनके खिलाफ फतवे जारी हुए थे। भारत के ज्यादातर सेक्युलर लोग मुस्लिम समर्थक और हिंदू विरोधी हैं। वे हिंदू कट्टरपंथियों के कामों का तो विरोध करते हैं, लेकिन मुस्लिम कट्टरपंथियों का बचाव करते हैं। ऐसे में तसलीमा की ताजा नसीहत से ऐसे स्यापाबाजों को सबक लेना चाहिए।
. . . जमकर पड़ी डांट
एक खास तबके के कल्याण के लिए गठित एक केंद्रीय संस्थान के आने अधिकारी इन दिनों पत्रकारों से दूरी बना के चल रहे हैं। संस्थान का जिम्मा संभालने के बाद जनाब पत्रकारों से गर्मजोशी से मिलते थे। हालांकि, वह ऊर्दू के पत्रकारों से उनकी ज्यादा छनती थी। हिंदी व अंग्रेजी अखबार के पत्रकारों से भी उनके रिश्ते ठीक ही रहे। हुआ यूं कि जनाब ने एक दिन 4 पत्रकारों को विशेष तौर पर आमंत्रित किया। दोपहर के भोजन के दौरान उन्होंने बातचीत में एक ऐसी खबर दे दी जो उनके जी का जंजाल बन गई । पहले तो वो खबर उनके चहते ऊर्दू के पत्रकार ने अपने वहां लिखी। यहं तक तो ठीक था। उस पत्रकार ने वो खबर एक अंग्रेजी अखबार के पत्रकार को दे दी। फिर क्या, अगले दिन मचा बवाल। जनाब को उनके आला अधिकारियों ने जमकर सुनाई। तब से वह पत्रकारों से बच के चल रहे हैं। खास तौर पर ऊर्दू के पत्रकारों से।
ये कैसी उलझन है भाई
केंद्र सरकार को बने हुए डेढ़ वर्ष हो गया है। इस दौरान तमाम अहम विभागों में जरूरी कार्य विभाजन के बाद कामकाज ने रμतार पकड़ ली है। लेकिन इस गति के बीच मंत्रियों की मीडिया से भागने वाली छवि बन रही है। जब-जहां कभी मीडिया नजर आ जाता है तो मंत्री किनारा करके निकल जाते हैं। इसे लेकर धीरे-धीरे मीडिया में सरकार की गलत छवि बननी शुरू हुई। काफी देर बाद सरकार जागी और उसके मंत्रियों ने खबरनवीसों से बातचीत शुरू की। लेकिन इस बातचीत में भी मीडिया के काम की कोई बात नजर नहीं आती। मंत्री आते हैं मीडिया से मिलते हैं, लेकिन उसमें भी केवल गपशप ही होती है। ये मीडिया के लिए अजब उलझन है भाई। मांगने पर कोई खबर बताता नहीं और जब मिलता भी है तो उससे कोई गुजारा नहीं। ये कैसी उलझन है भाई।
01Nov-2015