नदियों को आपस में जोड़ने पर गंभीर सरकार
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
देश
में सूखे और बाढ़ तथा जल संकट जैसी समस्या से निपटने के लिए अटल बिहारी
वाजपेयी की नदियों को आपस में जोड़ने वाली महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को
फास्ट ट्रैक पर लाने की तैयारी शुरू हो गई है। इन परियोजनाओं में आ रही
अड़चनों और समस्याओं के समाधान के लिए राज्यों के साथ मंथन का आधार भी फास्ट ट्रैक होगा।
मोदी की केंद्र सरकार को नदियों को आपस में जोड़ने
वाली परियोजनाओं को अंजाम देने के लिए जो कदम उठाए हैं उसमें केंद्रीय जल
संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्री सुश्री उमा भारती की अध्यक्षता
में एक विशेष समिति गठित की थी, जिसके सदस्यों के रूप में राज्यों के
मुख्यमंत्री स्वयं भी शामिल हैं। जल संसाधन मंत्रालय के अनुसार इस विशेष
समिति की अभी तक आठ बैठकें हुई है और केवल उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के
बुंदेलखंड के हित में केन-बेतवा नदी को जोड़ने की परियोजना ही अभी तक अंतिम
चरण की प्रक्रिया में आ सकी है। इसके बाद इस परियोजना के तहत केंद्र के
लक्ष्य में दमनगंगा-पिंजाल और पार-तापी-नर्मदा लिंक परियोजनाएं गुजरात और
महाराष्ट्र के बीच जल बंटवारे के मुद्दे पर अटकी है, हालांकि बकौल उमा
भारती दोनों राज्यों की सरकारों ने जल बंटवारे के मुद्दे पर सहमति बना ली
है और इन परियोजनाओं की डीपीआर रिपोर्ट पर राज्यों से अंतिम मंजूरी का
इंतजार है। इसी प्रकार ओडिशा में महानदी-गोदावरी लिंक परियोजना के संबंध
में आ रही अड़चनों के लिए केंद्र और राज्य सरकार के संबन्धित अधिकारियों का
एक दल संपर्क में है जिसकी छह माह में रिपोर्ट आते इस परियोजना को अंतिम
रूप देने के लिए ओडिशा के मुख्यमंत्री के साथ स्वयं उमा भारती मंथन करेगी।
अंतर्राज्यीय लिंक चुनौती
देश
में नदियों को आपस में जोड़ने वाली परियोजनाओं के तहत सरकार लक्ष्य
अंतर्राज्यीय लिंक परियोजनाओं में बिहार की बूढ़ी गंडक-नून-बया-गंगा लिंक
परियोजना को शुरू करना भी लक्ष्य में शामिल है, जिसके लिए मंत्रालय ने
डीपीआर तैयार हो चुकी है। ऐसी ही पंचेश्वर-शारदा लिंक परियोजना पर भी काम
किया जा रहा है। मंत्रालय के अनुसार सरकार के एजेंडे में नदियों को जोड़ने
वाली ऐसी ही 35 परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की चुनौती है, जिन पर आगे बढ़ने की
दिशा में विशेष समिति की बैठक में विचार विमर्श किया गया है।















