बुधवार, 6 जनवरी 2016

ग्रामीण क्षेत्रों में भी मिलेंगी सुरक्षित सड़के!

ग्रामीण सड़कों पर ज्यादा हादसों पर गंभीर सरकार
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
देश की सड़कों पर हादसों को रोकने के लिए केंद्र सरकार की सुरक्षित सड़क परियोजनाओं के तहत ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों को भी सुरक्षित बनाने की योजना है। शहरी क्षेत्रों से ज्यादा ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों पर बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार ने परिवहन क्षेत्र में सुरक्षा की दक्षता और निरंतरता में सुधार करने का निर्णय लिया है।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार देश में होने वाले सड़क हादसों और उनमें हो रही मौतों पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने व्यापक योजना खाका तैयार करते हुए सड़क परियोजनाओं को तेजी के साथ शुरू किया है। सरकार ने देश में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं के बारे में उस अध्ययन रिपोर्ट को भी गंभीरता से लिया है, जिसमें पाया गया है कि शहरी क्षेत्रों से ज्यादा ग्रामीण इलाकों की सड़कों पर दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं। इसलिए सरकार ने देशभर के राज्यों में शहरी और ग्रामीण इलाकों में दुर्घटना संभावित क्षेत्रों को भी चिन्हित करने के लिए राज्यों से आग्रह किया है। यह सर्वेक्षण भी उसी योजना का हिस्सा है जिसमें सरकार के सामने ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों पर ज्यादा हादसों की रिपोर्ट आई है। गौरतलब है कि हाल ही में हुए एक सर्वेक्षण में खुलासा हुआ है कि देश के शहरी क्षेत्र में 45.3 प्रतिशत और और ग्रामीण क्षेत्रों में 54.7 प्रतिशत सड़क हादसे हुए हैं।
सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता
केंद्र सरकार की राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग के अलावा शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों को सुरक्षित बनाने की दिशा में सड़कों को डिजाइन करते समय सुरक्षा के इन संघटकों को शामिल करने पर जोर दिया है। मंत्रालय के अनुसार राजमार्गों के अतिशय दुर्घटना वाले स्थलों यानि ब्लैक स्पॉट्स की पहचान करके उन स्थानों पर सुरक्षा की दृष्टि से सुधार के उपाय किये जा रहे हैं। मंत्रालय ने इस आशंका को दूर किया है कि सरकार सड़क परियोजनाओं में शहरी इलाकों के साथ ग्रामीण इलाकों की सड़क परियोजनाओं को भी प्राथमिकत दे रही है। इस अध्ययन को लेकर स्वयं सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने देश में भारतीय सड़कों को सुरक्षित बनाने और जानलेवा दुर्घटनाओं की संख्या में कमी लाने की प्राथमिकता दोहराई है।

मंगलवार, 5 जनवरी 2016

ऐसे रोकी जाएगी भारत-पाक सीमा पर घुसपैठ!

पठानकोट आतंकी हमले से मिला नया सबक
एलईडी-हाईमास्ट फ्लैग के साथ लगेंगे सीसीटीवी कैमरे
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
केंद्र सरकार ने पठानकोट एयरबेस आतंकी हमले के बाद भारत-पाक सीमाओं से होने वाली आतंकियों और अन्य अपराधियों की घुसपैठ रोकने की मजबूत योजना बनाने का फैसला किया है। इसके लिए सरकार पाक से लगती भारतीय सीमाओं पर एलईडी और फ्लड लाईटिंग को और ज्यादा सघन करने के साथ घुसपैठ के प्रयासों पर सख्त निगरानी रखने के लिए हाई रिजोल्यूशन वाले सीसीटीवी कैमरे भी लगाने की योजना है।
केंद्र सरकार ने पठानकोट एयरबेस पर आतंकी हमले से सबक लेते हुए अब भारत-पाक सीमा पर घुसपैठ को रोकने की दिशा में गंभीर और मजबूत इंतजाम करने के लिए कमर कसी है। भारत-पाकिस्तान को विभाजित करने वाली पंजाब फ्रंटियर की 550 किलोमीटर लंबी सीमा पर दुश्मनों की ज्यादा घुसपैठ होती रही है। गृह मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार भारत-पाक सीमा पर लगी फ्लडलाईटों को एलईडी में बदलने के बजाए इस रोशनी को और भी ज्यादा व्यापक करने के लिए ज्यादा लाइटें लगाई जाएगी। वहीं पाकिस्तान से लगी जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, महाराष्ट्र और गुजरात की करीब दो हजार किलोमीटर तक की सीमा इस व्यवस्था के साथ कंटीली बाडबंदी को भी मजबूत किया जाएगा। इसमें समुद्री तटों को भी ज्यादा सुरक्षित करने की तैयारी शुरू की जा रही है। भारत-पाक सीमा के रास्ते भारतीय सुरक्षा की चिंता को दूर करने के लिए सरकार ने लाईटिंग तेज करने के साथ सीमाओं पर सुरक्ष चौकियों के अलावा बाडबंदी के खंभों पर भी सीसीटीवी कैमरों से निगरानी रखने का खाका बनाना शुरू कर दिया गया है। मंत्रालय का कहना है कि सरकार की योजना है कि भारत-पाकिस्तान को विभाजित करने वाली पंजाब फ्रंटियर की 550 किलोमीटर लंबी सीमा पर खासतौर से रात्रि के समय होने वाली घुसपैठ को रोकने पर जोर है। इस तकनीकी योजना के लिए तेज रोशनी के साथ ऐसे अति आधुनिक यानि हाई रिजोल्यूशन वाले सीसीटीवी कैमरों की की तकनीक को विकसित किया गया है, जिनकी मदद से सीमा पर निगरानी होने के साथ वहां होने वाली गतिविधियों को दिल्ली मुख्यालय में भी बैठकर देखा जा सकता है।

सोमवार, 4 जनवरी 2016

भारत-पाक सीमा पर बढ़ी नशीली तस्करी!

सीमा की बाड़बंदी को ध्वस्त करने में जुटे पाक तस्कर
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्तों को सुधारने की दिशा में चल रही कवायद के बावजूद पाक की जमीन से भारत को आतंकी हमलों के लिए निशाना बनाया जा रहा है। आतंकियों की घुसपैठ के अलावा पाक तस्करों ने दोनों देशों की सीमाओं पर की गई बाडबंदी को ध्वस्त करके खासकर तस्करी के जरिए नशीले पदार्थो को भारत में भेजने की हरकतें भी तेज कर रखी हैं।
हाल ही में पठानकोट स्थित एयरफोर्स स्टेशन पर पाक के आतंकियों के हमले के बाद खुलासा हुआ है कि आतंक के अलावा भारत को नशीले पदार्थो की खेपें भी भेजी जा रही है। भारत द्वारा पाक सीमा के बीच करीब साढ़े पांच सौ मीटर तक की गई बिजली के करेंट वाले कंटीले तारों की बाड़बंदी भी पाकिस्तानी तस्करों और अन्य अपराधियों के लिए बेअसर साबित हो रहा है। गृह मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार भारत-पाक सीमा पर हालांकि सीमा सुरक्षा बल की चौबीस घंटे निगरानी रहती हैं, लेकिन निरीक्षण के दौरान पाया गया कि पाकिस्तान की सीमा से हेरोइन जैसे नशीले पदार्थो को भारत की सीमा में भेजने के लिए इन तस्करों का तरीका भी हैरतअंगेज करने वाला है। सीमा सुरक्षा बल के हवाले से गृहमंत्रालय का कहना हे कि बिजली के करेंट वाली कंटीली बाड़ के ऊपर और बीच की छोटी जगहों से नशीले पदार्थों के पैकटों को भारतीय सीमा में फेंकने के लिए पीवीसी पाइपों का प्रयोग किया जा रहा है। यहीं नहीं सीमाओं पर जमीन में सुरंगे खोदने के खुलासे भी कई बार सेना और बीएसएफ कर चुकी है। सूत्रों के अनुसार तस्कर ज्यादातर खेत में खड़ी फसलों, रात के अंधेरे और कोहरे का सहारा लेकर ड्रग की तस्करी करने की कोशिश करते हैं।

रविवार, 3 जनवरी 2016

अब कैदियों के मुद्दे पर उलझे भारत-पाक!


भारतीय जेलों में बंद 189 पाक कैदी गायब!
सूची के आदान-प्रदान के बाद हुआ खुलासा
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्तों की जमी बर्फ को पिघलाकर वार्ता को पटरी पर चढ़ाने का प्रयास चल ही रहा है कि इसी कवायद में जैसे ही दोनों देशों के बीच ‘रेड सिग्नल’ ने दस्तक दे दी। मसलन नए साल पर दोनों देशों ने एक-दूसरे देशों की जेलों में बंद अपने-अपने कैदियों की सूची का आदान-प्रदान किया। इसमें हैरानी की बात सामने आई कि पाकिस्तान ने भारत को जिन कैदियों की सूची सौंपी है उसमें सूचीबद्ध 189 पाक कैदी किसी भी भारतीय जेल में बंद ही नहीं हैं।
विदेश मंत्रालय के अनुसार भारत और पाकिस्तान के बीच गंभीर मुद्दों पर चर्चा के लिए 25 जनवरी को ही सचिव स्तर की वार्ता तय हुई है। दोनों देश करीब आठ साल पुराने के समझौते के तहत हर साल दो बार एक-दूसरे देश के कैदियों को रिहा करने की परंपरा निभाते आ रहे हैं। भारत और पाकिस्तान ने शुक्रवार को इसी कूटनीतिक के तहत शुक्रवार को नए साल में दोनों देशों के एक-दूसरे देश की जेलों में बंद कैदियों की रिहाई के लिए सूचियों का आदान प्रदान किया है। पाकिस्तान से भारत को मिली पाक कैदियों की सूची की जांच पड़ताल की गई तो उस सूची में 189 पाक कैदियों का भारत की किसी भी जेल में बंदी होने का कोई रिकार्ड नहीं है। इस पर पाक की आंखे तिरछी हुई और उसने आरोप लगाया है कि भारत में पाकिस्तान के 460 कैदी बंद है, जिनमें 113 मछुआरे भी शामिल हैं। जबकि भारत के पास पाक कैदियों की सूची में 17 मछुआरों समेत कुल 271 पाक कैदी हैं। दोनों देशों की पाक कैदियों की सूची में विरोधाभास होने पर पाक ने साफ कर दिया है कि वह इस मुद्दे को इस माह के अंत में इस्लामाबाद में होने वाली भारत-पाकिस्तान के विदेश सचिवों की बैठक में उठाएगा।

राग दरबार: मिठास बनाम सियासी कडुवाहट

राग दरबार
मिठास का मतलब अन्नदाता
हरितक्रांति का मतलब अन्नदाताओं यानि कृषि को जीवंत बनाए रखना..। यह जानते हुए भी देश की सियासत किसानों पर करने में कोई भी राजनीतिक दल पीछे नहीं है। देश पर राज करने वाली हरेक सरकार ही कृषि और किसानों के हितैषी होने का दम भरते देखे गये हैं। सरकारों के इस दावों के बावजूद खेती-किसानी की हालत बद से बदतर होती जा रही है। मसलन केंद्र सरकार जब कृषि या किसानों के हितों में कोई कदम आगे बढ़ाती है तो पिछले दशकों से विपक्ष उसमें अडंगेबाजी करता देखा गया है। दो दिन पहले ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ से दिल्ली के बीच सुपर एक्सप्रेस वे के शिलान्यास पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी इस इलाके के किसानों के दर्द को बयां करते हुए पूर्ववर्ती सरकार का नेतृत्व करने वाले राजनीतिक दल पर हमला बोलते हुए कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश गन्ना किसानों का प्रदेश है जो गन्ने का उत्पादन करके पूरे हिंदुस्तान का मुहं मीठा करने का काम करता आ रहा है,लेकिन गन्ना किसानों के बकाया भुगतान की समस्या के लिए उनकी सरकार द्वारा उठाए गये कदमों के बीच में छह दशक तक देश में राज करने वाली पार्टी रोड़ा बन रही है। ऐसी पार्टी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के साथ ही अन्याय नहीं कर रही, बल्कि देशभर के मुहं की मिठास छीनने का प्रयास कर रही है। मोदी के इस कथन पर राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि देश के अन्नदाताओं पर सियासत करने वाले दलों की ऐसी ही रणनीति रही तो देश में आने वाले समय में संकट पैदा हो जाएगा और उसके लिए सियासी कडुवाहट ही जिम्मेदार होगी।
तरक्की की आशा
एक खास तबके के कल्याण के लिए बने मंत्रालय के जूनियर मंत्री नए वर्ष में खुद का ओहदा बढ़ने को लेकर खासा आशांवित हैं। खुल कर तो वह कुछ नहीं बोलते पर मंत्रिमंडल विस्तार में वह खुद के लिए बड़ा ओहदा मिलने की संभावना जरुर जता रहे हैं। जब भी कोई पत्रकार उनसे पूछता है कि मंत्रिमंडल का विस्तार कब होगा? तो वह इस ओर से तो अपनी अनभिज्ञता जता देते हैं, पर यह पूछने पर की आप का आॅफिस बदलेगा कि नही तो मुस्कुरा देते हैं। लगे हाथ वो यह कहना नही भूलते कि अगर बड़ी जिम्मेदारी मिले तो वह कई बेहतर काम कर सकते हैं। वह बेहतर काम क्या-क्या हो सकता है इस बारे में पूछने पर मंत्री महोदय शायराना अंदाज में कह उठते हैं कि, हम अभी से क्या बताए, क्या हमारे दिल में है। लगता है कि शायद वह भूल गए हैं कि, प्रधानमंत्री परफार्मेंस पर ही तरक्की तय होगी। अब इन जनाब का ओहदा बढ़ेगा कि, घटेगा ये तो आने वाले दिनों में ही पता चल जाएगा।
लालबत्ती की जुगत
पूर्वी उत्तर प्रदेश से आने वाले एक युवा सांसद मोदी मंत्रिमंडल में अपने लिए जगह बनाने की जुगत में लग गए हैं। निजी संपर्क से लेकर वाया संघ भी लगातार प्रयास कर रहे हैं। इसके अलावा पूजा पाठ में भी किसी तरह की कोई कमी नहीं रख रहे। मकरसक्रांति के बाद वह एक प्रसिद्ध मंदिर में पूजा कराने जा रहे हैं। ताकि, ग्रह दशा की चाल को दूरूस्त किया जा सके। जिससे कि लालबत्ती मिलने की राह में किसी तरह की अड़चन न आ पाए। अब देखते हैं कि, उनके इस हवन पूजा का क्या नतीजा आता है।
इस प्रदूषण में तो हैं बड़े-बड़े झोल
वायु प्रदूषण ने देश की राजधानी दिल्ली की आबोहवा में इतना जहर घोल दिया है कि न चाहते हुए भी दिल्ली और केंद्र सरकार को सख्त कदम उठाने का ऐलान करना पड़ा। नियम ऐसे की कोई मंतरी हो या संतरी सब जन एक बराबर समझे जाएंगे। जो नियम तोड़ेगा समझो फंसेगा। अभी एक दिन पहले ही केंद्रीय पर्यावरण एवं वन राज्य मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए दिल्ली-एनसीआर समेत पड़ोस के तीन राज्यों यूपी, राजस्थान और हरियाणा को सख्त दिशानिर्देंशों का पालन करने का फरमान सुनाया है। नियमों के कड़ाई से पालन की निगरानी की जिम्मेदारी केंद्रीय और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों पर डाली गई है। लेकिन इन सबके बीच ये क्या नए साल के पहले दिन पर्यावरण मंत्री से लेकर कुछ और केंद्रीय मंत्रियों की गड़ियां प्रदूषण मानकों पर खरी उतरती हुई नजर नहीं आर्इं। यहां तो रक्षक ही अलग राह पर चल दिए। भई इस प्रदूषण तो सही में हैं बड़े-बड़े झोल।
03Jan-2016

शनिवार, 2 जनवरी 2016

हाइवे ट्रक लूट पर बनेगी विशेष योजना!


राज्यों की मदद से जल्द तैयार होगा सुरक्षा नेटवर्क
ओ.पी. पाल.
नई दिल्ली।
देश में सड़कों का जाल बिछाने की कवायद के साथ सुरक्षित सफर बनाने के लिए भी केंद्र सरकार ने खासकर  राष्ट्रीय राजमार्गो पर बढ़ती जा रही ट्रक जैसे वाहनों की लूट पर अंकुश लगाने के लिए भी एक विशेष योजना का खाका तैयार किया है। केंद्र सरकार इस योजना को आगामी मार्च तक लागू करने की तैयारी में है, जिसमें राज्यों की पुलिस की मदद से एक सुरक्षा नेटवर्क तैयार किया जा रहा है।
केंद्र सरकार ने देश में राष्ट्रीय राजमार्गो के निर्माण की सड़क परियोजनाओं को पटरी पर उतारा है, जिसमें सरकार ने सड़क पर सफर करने वाले वाहनों और लोगों की सुरक्षा को भी प्राथमिकता पर रखा है। दरअसल राजमार्गो पर रात्रि के समय चलने वाले ट्रकों और उनमें लदे माल की लूट की वारदातों के मद्देनजर केंद्र सरकार ने इस विशेष योजना का खाका तैयार किया है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार ट्रक लूट की वारदातों पर लगाम कसने की दिशा में गृह मंत्रालय के साथ मिलकर बनाई जा रही इस विशेष योजना में राज्यों की सरकारों और पुलिस के समन्वय से एक तकनीकी सुरक्षा नेटवर्क बनाने के तहत एक ऐसा साफ्टवेयर तैयार किया जा रहा है, जो कंप्यूटर के जरिए इस विशेष योजना को कारगर बनाएगा। केंद्र सरकार और राज्य सरकार के समन्वय से ट्रक लूट की घटनाओं पर लगाम कसने के लिए बनने वाली इस तकनीकी आधारित विशेष योजना से हाइवे राबरी पर अंकुश लगने की उम्मीद है।
कैसी होगी विशेष योजना
केंद्र सरकार की इस विशेष योजना में विकसित किये जा रहे साफ्टवेयर के जरिए हाइवे पर होने वाली लूट जैसी वारदातों और उसे अंजाम देने वाले अपराधियों का डाटा तैयार हो सकेगा। वहीं अपराधियों के हुलिए और फिंगर प्रिंट भी कंप्यूटर के डाटा बैंक में होंगे। इस योजना के जरिए खासकर राज्यों की सीमा के पुलिस अधिकारियों का टेलीफोन और इंटरनेट सिस्टम के तहत गृह मंत्रालय से भी संपर्क बना रहेगा। ऐसी तकनीकी योजना के जरिए लूट के शिकार ट्रक चालकों का संदेश की पहुंच पुलिस और इस कंप्यूटरीकृत सिस्टम तक हो जाएगी। केंद्र सरकार ने टोल बेरियर पर फोन सुविधा और व उच्चकोटि के कैमरे लगाने की व्यवस्था को इस योजना के दायरे में शामिल किया है। फिलहाल गृहमंत्रालय ने राज्यों की सरकारों को सुझाव दिया है कि वारदात होने पर पुलिस शून्य एफआईआर दर्ज करके बाद में उसे संबन्धित पुलिस थाना क्षेत्र को हस्तांतरित करने की पहल को आगे बढ़ाए।

शुक्रवार, 1 जनवरी 2016

संसद में काम करने का संकल्प करे कांग्रेस!

नये साल पर पीएम मोदी ने नसीहत देते हुए दी सलाह
ओ.पी. पाल. नोएडा।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संसद में अवरोधों को लेकर बिना नाम लिये कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि उसे कल से शुरू हो रहेनए साल में वह संसद को कार्य करने देने और देश के विकास में बाधा उत्पन्न नहीं करने का संकल्प ले। उन्होंने सभी राजनीतिकदलों से भी ऐसा ही आव्हान किया है।
यहां सड़क परियोजना के शिलान्यास समारोह में बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संसद सत्र के दौरान कार्यवाही को बाधा करने की टीस को उजागर किया। उन्होंने एक तरह से कांग्रेस पर यह हमला बोलते हुए कहा कि जिन्हें जनता ने नकार दिया था उन्होंने संसद को बंधक बना लिया। उन्होंने कहा कि हमारे से ज्यादा ये लोग जानते हैं कि संसद के काम रूकने से देश और जनता के हितों पर किस तरह आघात होता है। देश पर 60 साल तक राज करने और हमारे से ज्यादा यह जानते हुए कि संसद के काम रूकने से देश और जनता के हितों का किस तरह से नुकसान होता है और संसद में काम करना कितना जरूरी है। ऐसी स्थिति में उन्हें छह दशक तक सत्ता का सुख भोगने के बाद उसे अपने राजनीतिक कारणों से संसद में कामकाज को बाधित करने और देश के विकास को रोकने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि जिनको अवसर नहीं मिला, उनकी नाराजगी समझी जा सकती है, लेकिन जिन्होंने 60 साल तक देश पर हर प्रकार की सत्ता का उपभोग किया उन्हें तो संसंद को बर्बाद करने का कतई अधिकार नहीं है। प्रधानमंत्री मोदी ने हालांकि इस मंच से सभी राजनीतिक दलों से 2016 में एक संकल्प करने का आव्हान किया कि नए साल 2016 में वे संसद का कार्य चलने देंगे और गरीबों के लाभ के लिए काम करेंगे। उन्होंने कहा कि भारत के नागरिकों ने अपने प्रतिनिधियों का निर्वाचन संसद में बहस करने, परिचर्चा करने एवं विचार-विमर्श करने के लिए किया है इसलिए यह उनका दायित्व है।

गुरुवार, 31 दिसंबर 2015

ऐतिहासिक मॉडल होगा सुपर दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे

सड़क परियोजना को ढाई साल में पूरा करने का लक्ष्य
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के पहले 14 लेन के ‘दिल्ली-डासना-मेरठ एक्सप्रेस-वे’ की आधारशिला रखी है, वह देश के विकास का ऐतिहासिक सुपर मॉडल साबित होगा। इस ट्रैफिक सिग्नल फ्री एक्सप्रेस-वे से दिल्ली और पश्चिम उत्तर प्रदेश में एनसीआर के लोगों को दिल्ली से मेरठ तक सफर इतना आसान होगा कि समय और धन दोनों की बचत होगी।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने दिल्ली से मेरठ आने जाने वाले वाहनों के करीब ढाई घंटे के सफर को 40 से 45 मिनट के सफर में बदलने के लिए 7566 करोड़ की इस योजना का जो मॉडल तैयार किया है उसे सरकार सुपर विकास का मॉडल मानकर चल रही है। इसका कारण देश में पहली बार किसी 14 लेन वाले राष्ट्रीय राजमार्ग बनाने की शुरूआत की गई है। मंत्रालय का दावा है कि इस परियोजना के जरिए हजारों लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी मिलेंगे। वहीं बकौल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश में बनाए जा रहे एक्सप्रेसवे पर्यावरण की समस्या के समाधान का भी मॉडल साबित होंगे।
क्या है सुपर हाईवे की विशेषता
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का कहना है कि यह एक्सप्रेसवे नये हाईब्रिड एनयूटी मॉडल के तहत पहली परियोजना होगी। इसे एक स्मार्ट एक्सप्रेसवे के रूप में विकसित किया जाएगा। यात्रियों को मौसम, ट्रैफिक एवं दुर्घटनाओं के बारे में अहम जानकारी देने के लिए प्रणालियां स्थापित की जाएगी। स्वास्थ्य देखभाल, पेट्रोल पंप, रेस्तरां, वाहन मरम्मत, विश्राम कक्ष जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध होगी। दिल्ली-मेरठ सुपर एक्सप्रेसवे दिल्ली के निजामुद्दीन पुल से बनना शुरू होगा और एनएच-24 पर डासना पर जाकर खत्म होगा, जिस पर 28 किमी लंबाई के निर्माण पर 2,869 करोड़ रुपए की लागत आएगी। डासना से मेरठ बाईपास रेलवे क्रासिंग तक 3,575 करोड़ रुपए की लागत से छह लेने के 46 किलोमीटर लंबे नए रास्ते का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा चार लेने वाले एनएच-24 के 22 किलोमीटर लंबे डासना-हापुड़ खंड को चौडा करके 6 लेन करने पर 1,122 करोड़ रुपए की लागत तय की गई है। सरकार का दावा है कि इस परियोजना को ढाई साल में पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है।

मोदी ने एनसीआर को दी नए साल की सौगात


‘दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस हाईवे' की रखी आधारशिला
हरिभूमि ब्यूरो. नोएडा।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 14 लेन के दिल्ली-मेरठ एक्सपे्रसवे की आधारशिला रखते हुए एनसीआर और यूपी को नए साल का तोहफा दिया है। केंद्र सरकार की 75.66 अरब की इस सड़क परियोजना के पूरा होते ही दिल्ली से मेरठ तक का सफर करीब ढ़ाई घंटे से घटकर मात्र 40-45 मिनट का हो जाएगा।
केंद्र सरकार की दिल्ली से मेरठ तक के करीब ढाई घंटे के सफर को आसान बनाने के लिए 7566 करोड़ की सड़क परियोजना के तहत करीब 75 किमी लंबे दिल्ली-डासना-मेरठ एक्सप्रेस-वे का निर्माण कार्य नए साल में एक जनवरी से शुरू हो रहा है। यहां नोएडा के सेक्टर-62 में शिलान्यास समारोह में इस सुपर एक्सप्रेसवे की आधारशिला प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रखी। इस मौके पर उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने देश में सड़कों का जाल बिछाने का जो सपना देखा था उसे मौजूदा सरकार आगे बढ़ाने का काम कर रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने भाषण में सड़क परियोजनाओं में बार-बार अटल बिहारी वाजपेयी का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि अटल जी ने गांवों में बड़े स्तर के बदलाव लाने के प्रयास किए और गांवों को सड़कों से जोड़ने की दिशा में काम किया। पीएम ने इतिहास के पन्नों का जिक्र करते हुए कहा कि आजादी के लिए 1857 की लड़ाई में मेरठ का योगदान अहम है, इसे भुलाया नहीं जा सकता। वाजपेयी जी ने देश में स्वर्णिम चतुर्भुज और प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना की शुरूआत की थी, जिससे देश में आर्थिक विकास को गति मिली। इसी काम को अब उनकी सरकार तेजी के साथ आगे बढ़ाने का एक बड़ा अभियान चला रही है। इससे पहले केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने नए साल से शुरू हो रही इस एम्सप्रेसवे परियोजना की विस्तार से जानकारी दी। इस मौके पर उनके साथ केंद्रीय नितिन गडकरी और महेश शर्मा भी मौजूद थे।

उत्तर प्रदेश को दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे की सौगात

प्रधानमंत्री मोदी आज रखेंगे आधारशिला
ओ.पी. पाल.
नई दिल्ली। 
दिल्ली से मेरठ तक के 53 किमी लंबे सफर को आसान बनाने की दिशा में एक जनवरी से 14 लेन के दिल्ली मेरठ एक्सप्रेसवे निर्माण की आधारशिला कल 31 दिसंबर (बृहस्पतिवार) को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी रखेंगे।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अुनसार कल गुरुÞवार को 12 बजे दिन में 14 लेनों वाले 75 किलोमीटर लम्बे दिल्ली-डासना-मेरठ एक्सप्रेसवे के निर्माण की आधारशिला रखी जायेगी, जिसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी रखेंगे। वहीं मोदी नोएडा के सेक्टर 62 स्थित प्लॉट नम्बर ए-33, इंस्टीट्यूशनल एरिया में एनएच-24 पर 22 किलोमीटर लम्बे डासना- हापुड़ सेक्शन के उन्नयन की भी आधारशिला रखेंगे। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाइक, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्री हर्ष वर्धन, संस्कृति एवं पर्यटन (स्वतंत्र प्रभार) तथा नागरिक उड्डयन राज्यमंत्री डॉ. महेश शर्मा, सांख्यिकीय एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन (स्वतंत्र प्रभार), विदेशी मामले और प्रवासी भारतीय मामलों के राज्यमंत्री जनरल वीके सिंह तथा सड़क यातायात और नौवहन राज्यमंत्री श्री पी राधाकृष्णन भी उपस्थित रहेंगे। दिल्ली और मेरठ के बीच एक एक्सप्रेसवे की आवश्यकता को देखते हुए एनएच-58 के भारी यातायात से निजात पाने की दिशा में दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे का जुड़ाव दिल्ली से निजामुद्दीन पुल (टी-प्वाइंट) से शुरू  होगा और वह मौजूदा एनएच-24 पर डासना (30.38 किलोमीटर) तक जारी रहेगा। डासना से मेरठ तक एक नया मार्ग होगा। यह जुड़ाव मेरठ में रेलवे क्रासिंग (66 किलोमीटर) के निकट अन्दरूनी रिंगरोड मेरठ बाईपास पर समाप्त हो जाएगा।