बिहार विधानसभा चुनाव: तीसरा चरणछह जिलों की 50 सीटो पर कल होगा मतदान
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
बिहार विधानसभा की 50 सीटों के लिए 28 अक्टूबर को होने वाले तीसरे चरण के चुनाव में जिन 808 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला होगा, उनमें 215 यानि 27 प्रतिशत प्रत्याशियों पर आपराधिक दाग है। जबकि 458 यानि 57 प्रतिशत प्रत्याशी करोड़पतियों की फेहरिस्त में शामिल है।
देश में चुनाव सुधार का समर्थन करते हुए भले ही सभी राजनीतिक दल राजनीति के आपराधीकरण को खत्म करने की दुहाई देते आ रहे हों, लेकिन उसके विपरीत कोई भी राजनीतिक दल ऐसा नहीं है जो चुनाव में आपराधियों को गले न लगाता हो। मसलन एसोसिएशन फॉर डेमोके्रटिक रिफार्म्स यानि एडीआर द्वारा बिहार में तीसरे चरण में 50 विधानसभा सीटों के लिए होने वाले चुनाव में अपनी किस्मत आजमाने सियासी मैदान में उतरे 808 उम्मीदवारों की खंगाली गई पृष्ठभूमि में जो खुलासा किया गया है उसके अनुसार इस चरण में 215 प्रत्याशी ऐसे हैं जिनके खिलाफ अदालतों में आपराधिक मामले लंबित हैं, इनमें 162 यानि 20 प्रतिशत उम्मीदवार तो ऐसे हैं, जिनके खिलाफ हत्या, डकैती, अपहरण, महिलाओं के खिलाफ अपराध और सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाने जैसे गंभीर मामले चल रहे हैं। इनमें 31 प्रत्याशियों के खिलाफ हत्या के मामले दर्ज हैं, जिनमें कुम्हरार सीट से निर्दलीय प्रत्याशी अजय कुमार के खिलाफ आठ मामले हैं। जबकि दीघा सीट से समरस समाज पार्टी के प्रत्याशी राजीव रंजन सिंह के खिलाफ सात हत्या के मामले लंबित हैं। तीसरे पायदान पर दुमराव सीट से बसपा प्रत्याशी प्रदीप कुमार और मोकामा सीट से निर्दलीय प्रत्याशी अनंत कुमार सिंह के खिलाफ पांच-पांच हत्या के मामले लंबित हैं। हत्या के आरोपी वाले मामले के अन्य प्रत्याशियों में भाजपा के पांच, सीपीआईएम के तीन, जदयू, राजद,सीपीआई के दो प्रत्याशी, सपा व शिवसेना के एक-एक प्रत्याशी पर हत्या के मामले दर्ज हैं। इसी प्रकार हत्या के प्रयास करने वाले 57 प्रत्याशी लिप्त रहे, जबकि महिलाओं के खिलाफ अपराध में 12, डकैती व लूट में 13 प्रत्याशियों के खिलाफ मुकदमे लंबित हैं। 13 प्रत्याशियों के खिलाफ अपहरण तथा चार के खिलाफ सांप्रदायिक हिंसा फैलाने का भी आरोप है।
