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बुधवार, 11 नवंबर 2015

..तो दागियों से सजी होगी बिहार विधानसभा!

पिछली विधानसभा से ज्यादा बढ़ा दागियों का ग्राफ
सदन में करोड़पति ने लगाई लंबी छलांग
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
बिहार विधानसभा चुनावों में ऐतिहासिक जीत हासिल करने वाले महागठबंधन की सरकार में दागियों और उनसे भी ज्यादा करोड़पतियों का वर्चस्व कायम रहने के आसार हैं। मसलन पिछले चुनावों की तुलना में इस बार कहीं ज्यादा दागियों ने विधानसभा में दस्तक दी है, जिनमें करोड़पति विधायकों ने तो बेतहाशा छलांग लगाई है।
चुनाव आयोग की चुनाव सुधार की कवायद के बावजूद बिहार के संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में हरेक राजनीतिक दल ने दागियों और करोड़पतियों पर दांव लगाया था, जिसका नतीजा विधानसभा में दागियों और करोड़पतियों के वर्चस्व की तस्वीर सामने रखने जा रहा है। मसलन वर्ष 2010 की विधानसभा में 139 यानि 57 प्रतिशत की तुलना में बिहार की नई विधानसभा में निर्वाचित 243 विधायकों में से 142 यानि 58 प्रतिशत आपराधिक पृष्ठभूमि वाले दाखिल हो गये हैं, जिनमें 40 प्रतिशत यानि 98 विधायकों पर हत्या,
हत्या का प्रयास, लूट, डकैती, अपहरण, महिलाओं के खिलाफ जैसे संगीन मामले लंबित हैं। इस चुनावी समर में अपनी किस्मत आजमाने उतरे कुल 3450 उम्मीदवारों में 1038 दागियों की फेहरिस्त में शामिल थे, जिसमें 58 प्रतिशत विधानसभा में दाखिल होने में कामयाब रहे। चुनाव सुधार के लिए काम करने वाली गैर सरकारी संस्था एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स द्वारा किये गये खुलासे के मुताबिक इस बार विधानसभा में जीतकर पहुंचे 142 दागियों में राजद के 80 में से 46 यानि 58 प्रतिशत, जदयू के 71 में से 37 यानि 52 प्रतिशत, भाजपा के 53 में से 34 यानि 64 प्रतिशत, कांग्रेस के 27 म ें से 16 यानि 59 प्रतिशत, सीपीआई के सभी तीन, आरएलसपी के दो में एक, लोजपा के दोनों पर आपराधिक मामले लंबित चल रहे हैं। जहां तक संगीन मामलों में आरोपी विधायकों का सवाल है ऐसे 98 में राजद के सर्वाधिक 34, जदयू के 28, भाजपा के 19, कांग्रेस के 11, सीपीएमएल के दो, रालोसपा का एक और लोजपा के दोनों विधायक शामिल हैं। वर्ष 2010 की निर्वाचित विधानसभा में दागियों की संख्या 139 यानि 57 प्रतिशत थी, जिसमें बढ़ोतरी होकर 142 हो गई है।

सोमवार, 19 अक्टूबर 2015

अयोग्‍य सांसद-विधायक नपेंगे !

चुनाव आयोग ने तत्काल अधिसूचना जारी करने के दिये निर्देश
ओ.पी. पाल .
नई दिल्ली।
अदालत से दोषसिद्ध होते ही अयोग्य ठहराये जाने वाले सांसदों और विधायकों पर तत्काल कार्रवाही सुनिश्चित करने की दिशा में चुनाव आयोग सख्त होता नजर आ रहा है। संसद और राज्य की विधानसभाओं को जारी निर्देश में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का अनुपालन में ऐसे जनप्रतिनिधियों की अयोग्यता की तत्काल अधिसूचना जारी करने को कहा गया है।
केंद्रीय चुनाव आयोग के प्रवक्ता के अनुसार उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित कराने के लिए लोकसभा,राज्यसभा और सभी राज्यों की विधानसभा सचिवालयों को दिशानिर्देश जारी किये हैं। चुनाव आयोग के इन निर्देशों के मुताबिक संसद और विधानसभाओं में ऐसे व्यवस्था बनाने को कहा गया है कि जैसे ही अदालत से किसी निर्वाचित जनप्रतिनिधि को दोषी करार दिया जाता है तो वैसे ही उनके अयोग्य ठहराए जाने की बिना किसी भेदभाव के तत्काल अधिसूचना जारी की जाए। चुनाव आयोग ने यह दिशानिर्देश उच्चतम न्यायालय के गत 10 जुलाई 2013 को दिये गये उस फैसले के आधार पर जारी किये हैं, जिसमें शीर्ष अदालत ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 8 की उपधारा 4 को रद्द कर दिया था। इसके बाद अदालत से दोषी करार सांसद या विधायक अपने बचाव में अपील भी नहीं कर सकता, जो इस अधिनियम के तहत प्रावधान का लाभ उठाकर जनप्रतिधि सुरक्षित हो जाता था।