ओ.पी. पाल . नई दिल्ली।
अदालत से दोषसिद्ध होते ही अयोग्य ठहराये जाने वाले सांसदों और विधायकों पर तत्काल कार्रवाही सुनिश्चित करने की दिशा में चुनाव आयोग सख्त होता नजर आ रहा है। संसद और राज्य की विधानसभाओं को जारी निर्देश में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का अनुपालन में ऐसे जनप्रतिनिधियों की अयोग्यता की तत्काल अधिसूचना जारी करने को कहा गया है।
केंद्रीय चुनाव आयोग के प्रवक्ता के अनुसार उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित कराने के लिए लोकसभा,राज्यसभा और सभी राज्यों की विधानसभा सचिवालयों को दिशानिर्देश जारी किये हैं। चुनाव आयोग के इन निर्देशों के मुताबिक संसद और विधानसभाओं में ऐसे व्यवस्था बनाने को कहा गया है कि जैसे ही अदालत से किसी निर्वाचित जनप्रतिनिधि को दोषी करार दिया जाता है तो वैसे ही उनके अयोग्य ठहराए जाने की बिना किसी भेदभाव के तत्काल अधिसूचना जारी की जाए। चुनाव आयोग ने यह दिशानिर्देश उच्चतम न्यायालय के गत 10 जुलाई 2013 को दिये गये उस फैसले के आधार पर जारी किये हैं, जिसमें शीर्ष अदालत ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 8 की उपधारा 4 को रद्द कर दिया था। इसके बाद अदालत से दोषी करार सांसद या विधायक अपने बचाव में अपील भी नहीं कर सकता, जो इस अधिनियम के तहत प्रावधान का लाभ उठाकर जनप्रतिधि सुरक्षित हो जाता था।
