गुरुवार, 10 मार्च 2016

महिला आरक्षण: टूट सकता है दो दशक पुराना मिथक!

मोदी सरकार के पास मुद्दे का पटाक्षेप करने का मौका
महिला आरक्षण के गंभीर नजर आई संसद
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर संसद के दोनों सदनों मेें जिस प्रकार पक्ष एवं विपक्ष संसद में लंबित महिला आरक्षण विधेयक को पारित कराने की एक सुर में वकालत करते दिखे और विपक्ष ने महिला आरक्षण विधेयक को मौजूदा सत्र के एजेंडे में शामिल करने की मांग भी उठाई। मसलन इस मुद्दे पर यदि सहमति बनती है तो करीब दो दशकों से संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण का कांटा निकालने का श्रेय मोदी सरकार को मिल सकता है।
लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण का प्रावधान करने वाले महिला आरक्षण विधेयक को संसद में अंजाम तक पहुंचाने के लिए ही शायद लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने दिल्ली में राष्ट्रीय महिला जनप्रतिनिधि सम्मेलन में नीवं रखी, जिसमें स्वयं राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी भी वकालत करते नजर आए। मंगलवार को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर इस मुद्दे पर शायद पहली बार संसद जिस प्रकार एकजुट नजर आई, उससे लगता है कि 19 साल पुराने इस मुद्दे का पटाक्षेप होने की संभावनाएं प्रबल हैं। वामदल के सीताराम येचुरी आदि विपक्षी दलों के नेताओं ने तो उच्च सदन में यहां तक मांग कर डाली, सरकार को मौजूदा संसद सत्र के एजेंडे में संशोधन करके महिला आरक्षण विधेयक को शामिल करना चाहिए और महिलाओं के हक पर संसद की मुहर लगवाने के लिए प्राथमिकता देनी चाहिए। पिछले सप्ताह ही लोकसभा में विधि मंत्री डीवी सदानंद गौड़ा और राज्यसभा में महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने एक सवाल के जवाब में संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण मुहैया कराने के प्रयास की बात कही थी, लेकिन इसके लिए संसद में संविधान संशोधन विधेयक लाने से पूर्व इस मुद्दे पर सभी राजनीतिक दलों के बीच आम सहमति बनाना जरूरी होगा। मंगलवार को संसद में गूंजे महिलाओं के हक के मुद्दे पर उभरे एक स्वर ने सरकार की आमसहमति के पक्ष को भी मजबूत किया है और लगता है कि सबकुछ ठीक-ठाक चला तो इस सत्र में मोदी सरकार करीब दो दशक पुराने मुद्दे को सुलझाकर अंजाम तक ले जा सकती है। गौरतलब है कि पूर्ववर्ती संप्रग सरकार द्वारा लाया गया विधेयक 15वीं लोकसभा का कार्यकाल समाप्त होते निष्प्रभावी हो गया था।

अब अग्नि परीक्षा के मोड़ पर सरकार!



संसद में इस सप्ताह दावं पर एक दर्जन विधेयक
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
संसद के बजट सत्र अब तक की कार्यवाही देशद्रोह जैसे मुद्दे पर सत्ता और विपक्ष के बीच गरमाहट के बीच भले ही राज्यसभा में तीन विधेयक पारित कराने से सरकार उत्साहित हो, लेकिन बाकी दस दिन की कार्यवाही के दौरान कामकाज निपटाने के दबाव में मोदी सरकार को अग्नि परीक्षा के दौर से गुजरने की दरकार है। आज से तीसरे सप्ताह की कार्यवाही में सरकार ने एक दर्जन विधेयकों को पारित कराने का लक्ष्य रखा है।
संसद के बजट सत्र में पहले दो सप्ताह देशद्रोह के मुद्दे पर गरमाए रहे माहौल में लोकसभा में सरकार को किसी भी विधेयक को आगे बढ़ाने में परेशानी नहीं है, लेकिन राज्यसभा में विपक्ष के बहुमत के सामने सरकार को मशक्कत करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इस सत्र के शुरूआती दो सप्ताह में विपक्ष के हंगामे के बीच सरकार खासकर राज्यसभा में कई महत्वपूर्ण विधेयकों को आगे नहीं बढ़ा सकी है, हालांकि इस हंगामे के दौरान ही उच्च सदन में सरकार निर्वाचन विधि (संशोधन) विधेयक तथा विमानन वहन विधेयक तथा हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट जज(वेतन और सेवा शर्त) संशोधन विधेयक को पारित कराने में सरकार सफल रही, जबकि वहीं भारत का राष्ट्रीय पहचान प्राधिकरण विधेयक को विपक्ष के विरोध के बावजूद वापस भी लिया और नया आधार विधेयक लोकसभा में पेश कर दिया गया। अब मंगलवार से शुरू हो रही तीसरे सप्ताह की कार्यवाही के लिए सरकार ने एक दर्जन विधेयक सूचीबद्ध किये हैं,जिनमें पांच विधेयक राज्यसभा और सात विधेयक लोकसभा में पारित कराने का दबाव होगा। लोकसभा के लिए सूचीबद्ध विधेयकों में से चार बजट से संबंधित हैं। सूत्रों का मानना है कि यदि इस सप्ताह की कार्यवाही के दौरान कोई भड़काऊ मुद्दा नहीं छिड़ता, तो निश्चित रूप से पहले दिन से ही सूचीबद्ध होते आ रहे राष्ट्रीय जलमार्ग विधेयक, भारतीय मानक ब्यूरो विधेयक, और सूचना प्रदाता संरक्षण (संशोधन) विधेयक को तो सरकार राज्यसभा में पारित करा सकती है। हालांकि इसके अलावा राज्यसभा में बाल श्रम संशोधन विधेयक तथा पहले से ही लंबित रियल एस्टेट बिल को पारित कराने का लक्ष्य रखा है।

सोमवार, 7 मार्च 2016

ट्रांसपोर्टरों को राहत देगी सरकार!

ओवलोडिंग पर पर पांच फीसदी छूट देने का निर्णय
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
देशभर में सड़क हादसों का सबब बनती आ रही ओवरलोडिंग पर शिकंजा कसने के लिए केंद्र सरकार कमर कसे हुए है, लेकिन कार्मिशियल वाहनों के नियमों में ढ़ील देते हुए ओवलोडिंग पर वसूली जाने वाली दस गुणा जुर्माने में राहत दी है। यानि अब ट्रक में ओवरलोडिंग की तयसीमा में पांच प्रतिशत की छूट दी जाएगी।  
दरअसल भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने कार्मिशियल वाहनों यानि ओवरलोडिंग ट्रकों पर शिकंजा कसते हुए जनवरी में एक अधिसूचना जारी की थी, जिसमें ओवरलोडिंग ट्रकों को टोल प्लाजा पर जाते ही या तो ट्रक के सामान को वहीं उतारना पडेंगा और साथ में टोल टैक्स का दस गुणा जुर्माने के रूप में भुगतान करने का भी प्रावधान किया था। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार ट्रांसपोर्टरों की मांग पर सरकार ने ओवरलोड ट्रकों पर लग रही 10 गुणा जुर्माने से कुछ राहत देते हुए उन माल वाहक वाहनों से पेनल्टी न लेने की योजना को हरी झंडी दी है, जो माल के वजन की तय सीमा से पांच फीसदी से ज्यादा ओवरलोड हों। इसके लिए अब एनएचएआई ने सर्कुलर जारी किया है। वहीं सड़क मंत्रालय ने सभी राज्यों और यूनियन टेरेटरी के प्रमुख सचिव ट्रांसपोर्ट को पत्र लिख कर इस राहत से अवगत करा दिया है। मंत्रालय के अनुसार ओवरलोडिंग पर यह छूट मोटर व्हीकल एक्ट के सेक्शन 113 के सब-सेक्शन(3) के अंतर्गत दी गई है। यह वाहन के ग्रॉस व्हीकल वेट पर मान्य होगा। मसलन ट्रांसपोर्टरों की मांग पर मोदी सरकार की नई नीति के तहत व्हीकल के कुल लोड का पांच फीसदी अधिक होने पर उसे ओवरलोड नहीं माना जाएगा। सरकार ने पहले इस राहत को रोड सेफ्टी बिल में देने की योजना बनाई थी, लेकिन यह विधेयक संसद में लंबित है, जिसमें इस नियम को भी शामिल किया जाएगा। हालांकि यूपीए-2 सरकार ने भी ओवरलोडिंग रोकने के लिए टोल प्लाजाओं पर ट्रकों के लोड़ की जांच करने और जुर्माना वसूल करने के निर्देश दिये थे, लेकिन उसका ज्यादा असर नहीं हो सका।

रविवार, 6 मार्च 2016

केंद्र बढ़ाएगा राज्यों की परिवहन क्षमता!

निजी बस आॅपरेटरों को दिये जाएंगे स्टेज कैरेज परमिट
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
केंद्र सरकार ने देशभर के राज्यों की परिवहन व्यवस्था में सुधारने की दिशा में मोटर वाहन कानून में एक बार फिर संशोधन करने का फैसला किया है। सरकार देश के विभिन्न शहरों में आमजन की सुविधा के लिए बस सेवा को बेहतर बनाने के लिए प्राइवेट बस आपरेटरों को स्टेज कैरेज परमिट योजना बना रही है।
केंद्रीय सड़क परिहवन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार सरकार का मकसद देश में विभिन्न शहरों के बीच बस सेवाओं को बेहतर करके परिवहन व्यवस्था सुधारना है। इसलिए सरकार ने प्राइवेट बस आॅपरेटरों को भागीदार बनाने का फैसला किया। प्राइवेट बस आपरेटरों को स्टेज कैरेज परमिट जारी करने के लिए मोटर व्हीकल एक्ट में संशोधन किया जाएगा, ताकि परमिट राज को समाप्त करके निजी क्षेत्र की बसों को भी राज्य परिवहन निगमों की बसों की तर्ज पर दी जा सकें। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी मानते हैं कि इस फैसले से अंतर्राज्यीय सड़क मार्गो बस सेवा में क्रांतिकारी बदलाव आएगा और आम जनता को परिवहन व्यवस्था आसानी से मुहैया हो सकेगी। सरकार का यह भी मानना है कि जिस प्रकार कई शहरों में प्राइवेट बसें चलाई जाती हैं, उसी तरह अंतर्राज्यीय रूटों पर भी प्राइवेट बसें चलाई जा सकेंगी। हालांकि अभी भी इंटर स्टेट रूटों पर प्राइवेट बसें चलती हैं, लेकिन ज्यादातर नेशनल परमिट के तहत ही चलती हैं। दिलचस्प बात है कि केंद्र सरकार के इस फैसले से निजी क्षेत्र के ट्रांसपोर्टर भी स्वागत करते नजर आ रहे हैं। मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार सरकार के इस फैसले से अभी अंतर्राज्यीय रूटों पर चलने वाली बसों में यात्रा करने वाले सात करोड़ लोगों की क्षमता तीन गुना तक बढ़ सकेगी।
क्या है स्टेज कैरेज परमिट
केंद्र सरकार ने प्राइवेट बस आपरेटरों को जिस स्टेज कैरेज परमिट देने का फैसला किया है, वह इतनी आसानी से नहीं मिल पाता। मंत्रालय के अनुसार स्टेज कैरिज परमिट का तात्पर्य एक से दूसरी जगह पर जाते हुए रास्ते में जगह जगह स्टैंडों से सवारी लेना और उतारना। स्टेज कैरिज परमिट मिलने में दिक्कत की वजह से कई प्राइवेट बसें गैरकानूनी तरीके से चलती हैं। यही कारण है कि अभी अंतर्राज्यीय मार्गो पर स्टेज कैरिज के तहत ज्यादातर बसें राज्य परिवहन निगमों की ही चलाई जा रही है, लेकिन राज्य परिवहन निगम अंतर्राज्यीय मार्गो पर अपनी बस सेवाओं की क्षमता बढ़ाने में असमर्थ होते रहे हैं। जबकि सड़कों पर लगातार बढ़ते यातायात में बस सेवा क्षमता बढ़ाना जरूरी है।

राग दरबार: कुछ तो सबक लो युवराज

युवराज को सीख कीदरकार
देश की राजनीतिक में अजब-गजब खेल ने जनता को सांसत में डाला हुआ है। कांग्रेस को सत्ताविहिन होना पच नहीं रहा है और इसी कारण इस पार्टी का शुरू से ही मोदी सरकार पर हमला होता आ रहा है, तो संसद में देश व जनहित के कामों में रोड़ा डालना कांग्रेस की नीयती में शुमार होती नजर आ रही है। कांग्रेस के युवराज तो संसद और संसद से बाहर सीधे पीएम मोदी को निशाना बनाने में कोई चूक नहीं करना चाहते, लेकिन उसमें गरिमा व मार्यादा भी अहम होना चाहिए, लेकिन इस आक्रमक राजनीति में कांग्रेस युवराज बड़ो या वरिष्ठों के सम्मान की भी परवाह करना गंवारा नहीं समझते। शायद यही अहसास उन्हें कराने के इरादे से संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा के जवाब में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को सांस्कारिक ज्ञान देना पड़ा। इसका कारण भी साफ है उससे एक दिन पहले ही तो कांग्रेस युवराज सदन में ऐसे गरजे जैसे देश में सबकुछ देन कांग्रेस की ही है और राजग सरकार का कोई योगदान नहीं है? राजनीतिक गलियारों में यही सवाल उठ रहे हैं कि जिस तरह से युवराज सीधे पीएम से सवाल कर रहे थे उससे पहले युवराज को अपने या अपनी पार्टी के गिरेबान में भी झांक लेना चाहिए कि देश में सबसे ज्यादा राज करने के बाद देश व समाज को क्या दिया। खैर किसी पर निशाना साधना तो पीएम मोदी से सीखना चाहिए और इससे युवराज को भी सबक ले लेना चाहिए। चर्चा के जवाब में जिस तरह से प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्ष को विश्वास में लेने की शालीनता दिखाते हुए युवराज को भी बिना नाम लिये उम्र बढ़ने पर समझ न बढ़ने के जुमले के जरिए मोदी ने कांग्रेस युवराज को आर्डिनेंस फाड़ने की याद दिलाते हुए यही नसीहत दी, देश, समाज और अपने से बड़ो का सम्मान कैसे किया जाना चाहिए, जो युवराज के लिए निश्चित रूप से सबक लेने से कम नहीं था। पीएम के संसद में इस बयान को विपक्षी दल भी शायद इसीलिए पूरी तरह से सराहना करते नजर आए। सोशल मीडिया पर तो कांग्रेस युवराज राहुल को किसी पर निशाना साधने की शालीनता की सीख लेने के लिए शब्दों के चयन की दलील तक देने की टिप्पणी तक की गई। राजनीति गलियारों में यही चर्चा हो रही है कि कांग्रेस युवराज को आरोप-प्रत्यारोपों में मर्यादाओं की सीख ले ही लेनी चाहिए, जो उनके राजनीतिक सफर का सहारा बन सकती है।
सिद्धांत की राजनीतिक
देश गरमाती सियासत में जेएनयू प्रकरण सड़क से संसद तक की सुर्खियों से अभी दूर नहीं हो पायी है, जिसमें छात्र संघ के नेता कन्हैया कुमार जेल की कोठरी से छह महीने की सशर्त अंतरिम जमानत पर खुली हवा में भी आ चुके हैं। दरअसल देशद्रोह के मामले को लेकर तेज होती सियासत में राजनीतिक दल एक नहीं कई धड़ों में बंटे हुए हैं तो बदजुबानी की परंपरा को हवा मिलना भी स्वाभाविक है। ऐसे में सवाल उठता है सिद्धांत की राजनीति का जो हर दल दुहाई देने में पीछे नहीं है। शायद केंद्र सरकार का नेतृत्व कर रही भाजपा ने ऐसे सिद्धांत मेें बाजी मारते हुए अन्य दलों के मुकाबले एक मिसाल ही कायम की है। मसलन देशद्रोह का आरोप झेल रहे जेएनयू के छात्र नेता कन्हैया कुमार की जीभ काटकर लाने वाले को पांच लाख रुपए का इनाम देने का ऐलान करने वाले भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के बदायूं जिलाध्यक्ष कुलदीप वार्ष्णेय के खिलाफ भाजपा हाईकमान ने तत्काल कार्रवाही का कड़ा फैसला लिया और वार्ष्णेय को सीधे छह साल के लिए पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया। यही नहीं भाजपा हाईकमान ने विवादास्पद बयान देने वाले पार्टी नेताओं की जुबान पर ताला जड़ते हुए एक कड़ा संदेश भी दे दिया है।

शनिवार, 5 मार्च 2016

पटरी पर उतरी ‘सेतुभारतम परियोजना’

रेलवे क्रासिंग मुक्त होंगे राष्ट्रीय राजमार्ग
पीएम मोदी और गड़करी ने की परियोजना की शुरूआत
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
देश के 19 राज्यों में मौजूद 208 रेलवे क्रासिंग खत्म करके रेल ओवर ब्रिज और अंडरपास बनाकर राष्ट्रीय  राजमार्गो को सिग्नल फ्री करने वाली महत्वाकांक्षी ‘सेतुभारतम परियोजना’ को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने पटरी पर उतार दिया है। पीएम मोदी ने इस परियोजना में देश में जर्जर होते अंग्रेजी हकूमत के 1500 पुराने पुलों के जीर्णोद्धार करने के काम को भी शामिल कर लिया है।
यंहा विज्ञान भवन में शुक्रवार को आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुल 50,800 करोड़ रुपये की ‘सेतुभारतम परियोजना’ का शुभारंभ किया। इस परियोजना को पूरा करने के लिए वर्ष 2019 तक का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें 10,200 रुपये की अनुमानित लागत से 19 राज्यों में राष्ट्रीय राजमार्गों पर बने 208 रेलवे क्रासिंग की पहचान की गई, जिनके स्थान पर रेल ओवर ब्रिज और अंडर पास बनाने की योजना है। सरकार का मकसद है कि देश के सभी राष्ट्रीय राजमार्गों को रेलवे क्रॉसिंग से मुक्त बनाकर सड़क मार्गो को ज्यादा आसान और सुरक्षित बनाया जा सके।
पुलो पर नई प्रणाली
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि कुल मिलाकर इस योजना में इन पुलों पर 50,800 करोड़ रुपये की लागत आयेगी और इन्हें 2019 तक पूरा कर लिया जायेगा। उन्होंने कहा कि शेष बजट में मंत्रालय ने समूचे देश में डेढ़ लाख पुलों को मापने के लिये ‘भारतीय पुल प्रबंधन प्रणाली’ की शुरूआत की है।
दिल्ली यातायात की चिंता
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 'सेतु भारतम' योजना शुरू करने के मौके पर राष्ट्रीय  राजधानी दिल्ली में यातायात जाम की समस्या पर चिंता जताया। उन्होंने कहा कि दिल्ली को जाम से निजात दिलाने की प्रतिबद्धता पर काम शुरू करते हुए आए दिन जाम वाले प्रमुख स्थानों की पहचान कर ली गई है और इस दिश में अगले दो माह में ठोस पहल शुरू कर दी जाएगी। उन्होंने विश्वास दिलाया कि अगले दो माह में इसके लिए ठोस उपाय खोज लिए जाएंगे और दिल्ली के लोगों को जल्द ही जाम से निजात मिल सकेगा।

पांच राज्यों में बजा चुनावी बिगुल

पश्चिम बंगाल में छह चरण व असम में दो चरण
केरल, तमिलनाडु और पुडुच्चेरी एक चरण में होगा मतदान
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
देश के पांच राज्यों पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, पुदुच्चेरी और केरल में विधानसभा चुनावों का बिगुल बज गया है। पश्चिम बंगाल में छह चरणों, असम में दो तथा तमिलनाडु, पुडुच्चेरी और केरल में एक-एक चरण में मतदान कराया जाएगा। इन सभी राज्यों में चार अप्रैल से 16 मई तक होने वाले चुनावों के नतीजे एक साथ 19 मई को घोषित होंगे। केंद्रीय निर्वाचन आयोग द्वारा तारीखों का ऐलान होते ही पांचों राज्यों में चुनाव आचार संहिता भी लागू हो गई है।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त डा. नसीम जैदी ने शुक्रवार को इन राज्यों के विधानसभा चुनाव कार्यक्रम का ऐलान करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में पहले चरण के तहत दो तिथियों यानि 4 और 11 अप्रैल को मतदान होगा, जबकि दूसरे चरण में 17 अप्रैल, तीसरे चरण में 21 अप्रैल, चौथे चरण में 25 अप्रैल, पांचवें चरण में 30 अप्रैल तथा छठे व अंतिम चरण के तहत 5 मई को मतदान होगा। इसके अलावा असम में दो चरणों में 4 और 11 अप्रैल को मतदान होगा। केरल, तमिलनाडु और पुडुच्चेरी में एक ही चरण में 16 मई को मतदान कराया जाएगा। जैदी ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त नसीम जैदी के अनुसार, नामांकन पत्र दाखिल करना शुरू होने से 10 दिन पहले तक मतदाता अपने नाम सूची में जुड़वा सकेंगे। उन्होंने कहा कि इन राज्यों में कुल सात लाख नाम मतदाता सूचियों से हटा
दिए गए हैं, जो या अब नहीं रहे, या फर्ज़ी थे। जैदी के मुताबिक सभी मतदाताओं को फोटो आईकार्ड दिए गए हैं, लेकिन यह जरूरी है कि वोटर का नाम मतदाता सूची में हो, क्योंकि सिर्फ फोटो आईकार्ड होने से वोट देने का अधिकार नहीं मिल सकता।

शुक्रवार, 4 मार्च 2016

तो राज्यसभा में बढ़ेगी मोदी सरकार की ताकत!

 बजट सत्र के दूसरे चरण में मिल सकता है फायदा
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
राज्यसभा में विपक्ष के सामने कमजोर पड़ती दिख रही राजग सरकार की ताकत बढ़ने का सिलसिला जल्द ही शुरू होने जा रहा है, जिसमें अगले महीने खाली हो रही 13 सीटो पर 21 मार्च को चुनाव होना है। जबकि उच्च सदन में मनोनीत होने वाले सात सदस्य मोदी सरकार की ताकत बढ़ाने का सबब बनेंगे।
लोकसभा में बहुमत के साथ मोदी सरकार के सभी विधायी कार्य पूरे होते आ रहे हैं, लेकिन राज्यसभा में संख्याबल में विपक्ष का पलटा भारी होने के कारण जीएसटी जैसे कई महत्वपूर्ण विधेयक अटकते आ रहे हैं। अगले महीने अप्रैल के पहले पखवाड़े में छह राज्यों से 13 सीटें खाली हो रही हैं, जिसके लिए चुनाव आयोग ने 21 मार्च को द्विवार्षिक चुनाव कार्यक्रम का ऐलान भी कर दिया है। माना जा रहा है कि इन तेरह सीटों के चुनाव से ज्यादा राज्यसभा में मनोनीत होने वाले सात सदस्य मोदी सरकार की ताकत बढ़ाने में निश्चित रूप से सहायक होंगे। मसलन संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण में राज्यसभा में राजग सरकार की ताकत में इजाफा होना तय माना जा रहा है। संसद में मनोनीत सदस्य भले ही सरकार सिफारिश पर ही मनोनीत किये जाते हों, लेकिन उनपर सत्ता या विपक्ष का किसी प्रकार से किसे समर्थन करना या नहीं कोई दबाव नहीं होता। राज्यसभा की 245 सीटों में से 12 सदस्य मनोनीत होते हैं,जिनका मनोनयन सरकार की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्वारा ऐसे सदस्यों के रूप में की जाती है, जिनका साहित्य, कला, खेल, विज्ञान या समाजसेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट सहयोग रहा हो।
राज्यसभा में ये सीटें होंगी रिक्त
छह राज्यों की जिन 13 राज्यसभा सीटों पर 21 मार्च को चुनाव होना है, उनमें दो अप्रैल को असम से पंकज बोरा व नाजनीन फारूख,हिमाचल प्रदेश से भाजपा की श्रीमती बिमला, केरल से कांग्रेस के एके एंटोनी, सीपीएम केएन बालगोपाल व डा. टीएन सीमा, तथा त्रिपुरा से सीपीएम के झारनादास का कार्यकाल पूरा हो रहा है, जबकि नौ अप्रैल को पंजाब से कांग्रेस के मंत्री अश्विनी कुमार व मनोहर सिंह गिल, भाजपा के अविनाश राय खन्ना, अकाली दल के सुखबीर सिंह व नरेश गुजराल सेवानिवृत्त हो रहे हैं। नागालैंड की सीट खेकिहो जिमोनी के निधन के कारण 26 नवंबर से ही खाली पड़ी हुई है। इसके अलावा सदन में सात सीटें मनोनीत सदस्यों की भी रिक्त हो जाएंगी, जिसमें 21 मार्च को पांच मनोनीत सदस्यों का भी कार्यकाल खत्म हो रहा है, जिसमें मणिशंकर अय्यर, जावेद अख्तर, बी. जयश्री, मृणाल मिरी और बालचंद्र मुंगेकर शामिल है, जबकि दो मनोनीत सदस्य अशोक गांगुली और एचके दुआ पहले ही कार्यकाल पूरा कर चुके हैं। निर्वाचन सूची में शामिल 13 सीटों में फिलहाल पांच कांग्रेस, तीन सीपीएम और दो-दो सीट भाजपा व एसडी के पास है। जबकि एक सीट नागा पीपल्स फ्रंट के पास थी।
04Mar-2016

नया आधार विधेयक संसद में हुआ पेश

केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को दी थी मंजूरी
हरिभूमि ब्यूरो.
नई दिल्ली
सरकार ने केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद बृहस्पतिवार को संसद में नया आधार कार्ड विधेयक पेश कर दिया है। यह नया आधार विधेयक वर्ष 2016 के वित्तीय और अन्य सब्सिडी, लाभ और सेवाओं के वितरण पर लक्षित है। यह बिल लोगों को विशिष्ट पहचान संख्या दिलाने के लिए एक कानूनी आधार माना जाएगा।
केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने आधार लक्षित वित्तीय और अन्य सब्सिडी लाभ तथा सेवा प्रदान करने संबंधी विधेयक-2016 को लोकसभा में पेश कर दिया, जबकि राज्यसभा में लंबित एक विधेयक को वापस ले लिया गया, जिसके स्थान पर लोकसभा से पारित होने के बाद राज्यसभा में पेश किया जाएगा। केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने एक दिन पहले ही बुधवार को अपनी बैठक में इस विधेयक को मंजूरी दी थी। केंद्रीय मंत्री जेटली ने बुधवार को भी सदन में कहा था कि आधार कार्ड विधेयक, जो एक महत्वपूर्ण कानून है जिससे सब्सिडी को तर्कसंगत बनाया जा सकता है। गौरतलब है कि देश में अब तक 98 करोड़ से अधिक आधार नंबर जारी किए जा चुके हैं और प्रतिदिन 26 लाख बॉयोमीट्रिक और 105 लाख ई-केवाईसी (अपने ग्राहक को जानो) प्रक्रिया जारी हैं। आधार संख्या को 11.19 करोड़ सब्सिडी खातों से जोड़ा गया है, जबकि इसके लाभार्थियों की संख्या कुल 16.5 करोड़ है। उम्मीद है कि इससे न सिर्फ लीकेज रोकने में कामयाबी मिलेगी, बल्कि इससे भ्रष्टाचार पर भी लगाम लगेगी। जबकि स्पष्ट है कि आधार संख्या या प्रमाणीकरण से नागरिकता या अधिवास के किसी अधिकार की पुष्टि नहीं होती। उन्होंने आशा जताते हुए कहा कि यह आधार विधेयक चल रहे बजट सत्र में पारित हो जाएगा। इस विधेयक से विशिष्ट पहचान संख्या को कानूनी आधार मिलेगा। जेटली ने स्पष्ट किया कि आधार संख्या या सत्यापन किसी व्यक्ति की नागरिकता या निवास की पुष्टि नहीं करेगा। भारतीय राष्ट्रीय पहचान प्राधिकरण विधेयक 2010 पहले से ही राज्यसभा में विचाराधीन है।
आधार को मिलेगा संवैधानिक दर्जा
वित्तमंत्री अरुण जेटली ने अपने आम बजट भाषण में भी आधार कार्ड को संवैधानिक दर्जा दिलाने के लिए आधार बिल लाने की बात कही थी। आधार बिल से सरकार द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी का फायदा सीधे जरूरतमंदों के खाते में पहुंच सकेगा। इस दौरान उन्होंने कहा था कि आधार पर कानून पारित करने से लेकर हम कई महत्वपूर्ण सुधार करेंगे। ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आधार को संवैधानिक सर्मथन के साथ सरकार के सभी किस्म के लाभ उन लोगों तक पहुंचाया जाए जो इसके हकदार हैं। 
04Mar-2016

गुरुवार, 3 मार्च 2016

रेलवे क्रासिंग फ्री होंगे नेशनल हाइवे!

छत्तीसगढ़, हरियाणा व मध्य प्रदेश समेत 208 फाटक चिन्हित
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
देश के परिवहन व्यवस्था को सुगम एवं सुरक्षित बनाने की दिशा में मोदी सरकार ने सड़कों का जाल बिछाने की परियोजनाओं में एक और कदम आगे बढ़ाने का फैसला किया है। मसलन देश के सभी राष्ट्रीय राजमार्गो को पूरी तरह सिग्नल फ्री करने के प्रयास में सरकार ने 19 राज्यों में ऐसे 208 रेलवे क्रासिंग को ओवर ब्रिज या अंडर पास में बदलने के लिए 10,200 करोड़ रुपये की सेतुभारतम परियोजना तैयार की है।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार सेतुभारतम परियोजना के जरिए सरकार राष्ट्रीय राजमार्गो को पूरी तरह सिग्नल फ्री करना चाहती है, ताकि सड़को का सफर सुरक्षित और आसान किया जा सके। सरकार ने इस परियोजना के जरिए वर्ष वर्ष 2019 तक देशभर में सभी राष्ट्रीय राजमार्गों को रेलवे क्रॉसिंग से मुक्त करने हेतु सेतुभारतम परियोजना शुरू करने का फैसला किया है,जिसके लिए 10,200 हजार करोड़ रुपये के खर्च का अनुमान लागया गया है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का कहना है कि इस परियोजना के तहत सरकार ने 19 राज्यों में 208 ऐसे स्थानों की पहचान की है, जो राष्ट्रीय राजमार्ग की रμतार में बाधक हैं। सेतुभारतम परियोजना के तहत इन रेलवे क्रासिंग पर रेल ओवर ब्रिज या अंडरपास निर्माण किया जाएगा। के लिए पहचान की गई है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना पर 10,200 करोड़ रुपये खर्च होने की उम्मीद है। इनमें से 65 स्थानों के लिए सरकार ने टैंडर नोटिस भी जारी कर दिये हैं।
किस राज्य में कितने रेलवे क्रासिंग
सेतुभारतम परियोजना के तहत जिन 19 राज्यों के राष्ट्रीय राजमार्गो पर रेलवे क्रासिंग की पहचान की गई है, उसमें छत्तीसगढ़ में तीन हाइवों पर पांच, मध्य प्रदेश में चार हाइवें पर छह व हरियाणा में दस राष्ट्रीय राजमार्गो पर दस रेलवे क्रासिंग पर रेल ओवर ब्रिज या अंडर पास का निर्माण किया जाएगा। इनके अलावा सबसे ज्यादा 33 रेलवे क्रासिंग आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल में 22, बिहार में 20, कर्नाटक में 17, महाराष्ट्र व असम में 12-12, झारखंड में 11, पंजाब में दस, राजस्थान, उत्तर प्रदेश व तमिलनाडु में 9-9, गुजरात में आठ, हिमाचल प्रदेश में पांच, ओडिसा व करेल में 4-4 तथा उत्तराखंड में दो रेलवे क्रासिंग शमिल हैं। मंत्रालय के अनुसार इस परियोजना को हाल ही में सड़क क्षेत्र में किये गये बजटीय प्रावधानों से भी बढ़ावा देने का फैसला किया गया है।