सोमवार, 27 जुलाई 2026

संसद का मानसून सत्र: हंगामे की भेंट चढ़े पहले सप्ताह में पानी में बहा ₹35 करोड़ से अधिक पैसा, 5 दिनों में नाममात्र हुआ विधायी कामकाज

नीट पेपर लीक और जनहित के मुद्दों पर अड़ा रहा विपक्ष
by-ओ.पी. पाल
नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र का पहला सप्ताह पूरी तरह से हंगामे, नारेबाजी और स्थगन की भेंट चढ़ गया। विपक्षी दलों के कड़े रुख और सरकार के बीच बनी गतिरोध की स्थिति के कारण दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) में अधिकांश समय सामान्य कार्यवाही नहीं चल सकी। पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च और संसदीय आंकड़ों के मुताबिक, इस एक हफ्ते के गतिरोध में करदाताओं के ₹35 करोड़ से अधिक की धनराशि निष्फल साबित हुई। पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्चसंसद में हंगामे और स्थगन के कारण होने वाले प्रति मिनट के वित्तीय नुकसान और जनता के पैसों की बर्बादी का तथ्यात्मक विश्लेषण करता है। 

पहला दिन (सोमवार): सर्वदलीय बैठक का असर और जोरदार हंगामा 
सत्र की शुरुआत से ही विपक्षी दल 'इण्डिया' गठबंधन ने नीट परीक्षा पेपर लीक मामले, बढ़ती महंगाई और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों को लेकर आक्रामक रुख अपनाया। सुबह कार्यवाही शुरू होते ही नारेबाजी शुरू हो गई, जिसके बाद लोकसभा और राज्यसभा को दिनभर के लिए स्थगित करना पड़ा। संसद में हंगामे और स्थगन के कारण होने वाले प्रति मिनट के वित्तीय नुकसान और जनता के पैसों की बर्बादी का तथ्यात्मक विवरण प्रदान करता है। 

दूसरा दिन (मंगलवार): 'नीट' पर विशेष चर्चा की मांग 
सदन के दूसरे दिन विपक्ष ने स्थगन प्रस्ताव लाकर नीट धांधली पर तत्काल और विस्तृत चर्चा कराने की मांग की। सरकार द्वारा प्रश्नकाल और अन्य विधायी कार्यों को आगे बढ़ाने की कोशिशों के बीच हंगामा बढ़ता गया, जिससे सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई। 

तीसरा दिन (बुधवार): तख्तियों के साथ वेल में पहुंचे सांसद 
विपक्षी सांसद हाथों में तख्तियां लेकर वेल (Well) में उतर आए और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। पीठासीन अधिकारियों की बार-बार की गई शांति की अपीलों का कोई असर नहीं हुआ और दोपहर बाद तक दोनों सदनों को स्थगित करना पड़ा। 

 चौथा दिन (गुरुवार): प्रश्नकाल और शून्यकाल प्रभावित गुरुवार को भी गतिरोध कायम रहा। न तो प्रश्नकाल चल सका और न ही शून्यकाल में जनहित से जुड़े विषय उठाए जा सके। विपक्ष ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह देश के युवाओं और छात्रों के भविष्य से जुड़े संवेदनशील मामलों पर चर्चा से भाग रही है, जबकि सत्ता पक्ष ने आरोप लगाया कि विपक्ष सदन का कीमती समय बर्बाद कर रहा है। 

पांचवां दिन (शुक्रवार): बिना किसी ठोस विधायी कार्य के पहला हफ्ता समाप्त 
सप्ताह के अंतिम दिन भी किसी तरह का कोई विधायी समाधान नहीं निकल सका। हंगामे के बीच कुछ अध्यादेश और दस्तावेज पटल पर रखे गए, लेकिन विस्तृत बहस या विधेयक पारित कराने जैसा काम नहीं हो सका। अंततः दोनों सदनों को सोमवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया। 

अटके कई महत्वपूर्ण विधेयक 
मानसून सत्र के दौरान सरकार द्वारा कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश और पारित कराए जाने प्रस्तावित थे। लेकिन पहले सप्ताह की नाकामी के कारण देश के विकास और प्रशासनिक नीतियों से जुड़े कई प्रमुख कानून लटके हुए हैं। संसदीय विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आगामी दिनों में भी यही स्थिति रही, तो लोकतांत्रिक चर्चा की गुणवत्ता और विधायी व्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।
-27July,2026

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