सोमवार, 25 अप्रैल 2022

मंडे स्पेशल: सरकारी स्कूलों में वजीफा लेने वाले विद्यार्थियों की संख्या में इजाफा

सरकार लगातार स्कूलों के हालात सुधारने और विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने में जुटी 
ओ.पी. पाल.रोहतक। सरकारी स्कूलों में घटती विद्यार्थियों की संख्या की चिंता के बीच आर्थिक रूप से कमजोर और पढ़ाई में होशियार विद्यार्थियों को वजीफा मुहैया कराने के लिए चलाई जा रही विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाएं शायद अभिभावकों को प्रभावित करती नजर आ रही हैं। इसकी पुष्टि राज्य में चल रही राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल योजना के तहत पिछले चार साल में कक्षा नौ से 12वीं तक के विद्यार्थियों को मिलने वाले वजीफे की लगातार बढ़ती संख्या और रकम से हो रही है। मसलन पिछले तीन साल में राष्ट्रीय छात्रवृत्ति योजना के तहत हरियाणा के 98 हजार से ज्यादा विद्यार्थियों को 67 करोड़ रुपये से ज्यादा की छात्रवृत्ति दी गई है, जबकि अकेले वर्ष 2021-22 में इस योजना के तहत एक लाख से ज्यादा आवेदनों में से अब तक मंजूर किय गये 62,513 छात्र छात्राओं की संख्या के हिसाब से 45 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति की रकम राज्य के हिस्से में आने की संभावना है। ये हालात तब हैं, जब एनएसपी योजना में करीब 50 फीसदी विद्यार्थियों के आवेदन नामंजूर हो रहे हैं। राज्य सरकार प्रदेश के सरकारी शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के इन्हीं योजनाओं के सहारे लगातार प्रयास में जुटी है और हाल ही में शुरू हो रहे शैक्षिण सत्र में तीन लाख विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने का लक्ष्य तय किया है। इसके अलावा राज्य के स्कूलों, कालेजों और व्यवसायिक व तकनीकी शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों को आर्थिक मदद और मेधावी छात्रों कई प्रकार की छात्रवृत्ति योजना के तहत प्रोत्साहन राशि दे रही है। 
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हरियाणा में सरकारी स्कूलों के हालात कुछ भी हों, लेकिन वजीफा लेने वालों विद्यार्थियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। प्रदेश सरकार की विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं से इतर साल सितंबर 2018 में केंद्र सरकार की शुरू हुई योजना राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल योजना प्रदेश के सरकारी स्कूलों में प्रीमैट्रिक व पोस्ट मैट्रिक के गरीब छात्र-छात्राओं के लिए आर्थिक मदद की दृष्टि से वरदान साबित होती आ रही है। सरकार का मकसद भी इस योजना के तहत प्रदेश के मेधावी और जरूरतमंद छात्रों खासकर गरीबी की रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए वित्तीय सहायता देना है। इस योजना के तहत प्रत्येक चयनित विद्यार्थी को 12 हजार रुपये सालाना सीधे उनके खातों में जमा कराए जाते हैं। इस योजना के लिए प्रीमैट्रिक यानि आठवीं कक्षा कम से कम 55 प्रतिशत अंको से उत्तीर्ण करना अनिवार्य है और उनके परिवार की सालाना आय डेढ़ लाख रुपये से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। इसके अलावा हरियाणा सरकार ने अब डा. अंबेडकर मेधावी छात्र योजना में संशोधन करते हुए अनुसूचित जातियां एवं पिछड़े वर्ग के साथ ही प्रदेश के अन्य सभी वर्गों के छात्रों को भी इस योजना में शामिल करने की पहल की है। वहीं राज्य स्तर पर किसी भी खेल में पहले तीन स्थान हासिल करने वाले खिलाड़ी छात्रों को भी छात्रवृत्ति देने का ऐलान किया गया है। 
वरदान बना एनएसपी 
प्रदेश में राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल के तहत वजीफा लेने के लिए साल 2021-22 के लिए 63,842 छात्राओं समेत 1,24,499 विद्यार्थियों ने आवेदन किया है, जिनमें छात्रवृत्ति के लिए 62,513 आवेदन मंजूर किये जा चुके हैं और 58,750 विचाराधीन है। जबकि पिछले तीन साल के आंकड़ों पर गौर किया जाए, तो हरियाणा में साल 2020-21 में 52,561 आवेदकों में से चयनित 38,224 विद्यार्थियों के बैंक खातों में 30.88 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति भेजी गई। जबकि साल साल 2019-20 में 40,958 आवेदकों में से चयनित 29,240 विद्यार्थियों को करी 21.74 करोड़ रुपये तथा 2018-19 में पहली बार 53,988 आवेदनों में से चुने गये 30,200 विद्यार्थियों को 14.44 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति का वितरण किया गया। प्रदेश में इस योजना के तहत साल 2021-22 में वजीफा लेने के लिए दो गुना से भी ज्यादा बढ़े विद्यार्थियों की संख्या को देखते हुए यह बात तय मानी जा रही है कि हरियाणा के ऐसे छात्रों के खातों में आने वाली रकम 45 करोड़ रुपये से भी ज्यादा हो सकती है। 
ग्रामीण क्षेत्र में ज्यादा रुझान 
राष्ट्रीय छात्रवृत्ति योजना के तहत ऑनलाइन छात्रवृत्ति के लिए वर्ष 2021-22 में एक लाख से ज्यादा आवेदन करने वालों में ग्रामीण क्षेत्र के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले नौवीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों की संख्या 93865 है, ता शहरी क्षेत्र के 30633 विद्यार्थियों ने छात्रवृत्ति के लिए आवेदन किये हैं। जबकि सबसे ज्यादा 65,619 आवेदक अनुसूचित जाति और 58,880 ओबीसी वर्ग के विद्यार्थी हैं। इनमें से अनुसूचित जाति के 33157 और ओबीसी के 29484 विद्यार्थियों का छात्रवृत्ति के लिए योजना के तहत चयन किया गया है। इन आवेदकों में सर्वाधिक 12351 हिसार जिले और सबसे कम 996 पंचकूला जिले के सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी शामिल हैं। 
छात्राओं से आगे छात्र 
प्रदेश में छात्रवृत्ति की इस योजना के तहत पहले तीन सालों के दौरान हरियाणा के विद्यार्थियो के हिस्से में आई कुल 67.05 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति की रकम 76,942 छात्रों में से 50,849 और 59,712 छात्राओं में से 42,552 के खातों में छात्रवृत्ति की रकम भेजी गई। छात्रों को 34.82 करोड़ रुपये तथा छात्राओं को 32.21 करोड़ रुपये की राशि दी गई। बाकी छात्रवृत्ति की रकम अन्य वर्ग के प्री और पोस्ट मैट्रिक के गरीब छात्रों और मेधावी छात्रों को वितरित की गई। 
उच्च शिक्षा में छात्राओं को वजीफा 
केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल की प्रगति और सक्षम योजनाओं के तहत मेधावी छात्राओं और विशेष रूप से विकलांग छात्राओं को वित्तीय सहायता प्रदान करना है। प्रगति योजना में छात्रवृत्ति की राशि फीस, पुस्तकों की खरीद, उपकरण, वाहन, परीक्षा शुल्क आदि के लिए कुल राशि के रूप में प्रदान की जा रही है। जबकि सक्षम योजना में छात्राओं को उनकी इच्छा के अनुसार उच्च अध्ययन के लिए अपने खर्चों को पूरा करने के मकसद से वित्तीय सहायता दी जाती है, जो पढ़ाई में उनकी वित्तीय बाधाओं को दूर करेगी। 
प्राइमरी से उच्च शिक्षा तक मदद 
प्रदेश में केंद्र सरकार की छात्रवृत्ति योजनाओं के अलावा राज्य स्तर पर प्रदेश सरकार कक्षा एक से उच्च शिक्षा तक के लिए प्रोत्साहन देकर योग्य और जरूरतमंद विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति योजनाएं चला रही है। इसी दिशा में सरकार के 4 प्रमुख विभागों की 10 छात्रवृत्ति योजनाओं के लिए हर-छात्रवृत्ति पोर्टल के रूप में एक केंद्रीकृत राज्य छात्रवृत्ति पोर्टल विकसित किया गया है, जिसे हरियाणा सरकार की परिवार पहचान पत्र योजना के साथ एकीकृत है। इसमें हरियाणा से बाहर पढ़ने वाले राज्य के छात्र भी शामिल किये गये हैं। नेशनल छात्रवृत्ति योजना के अलावा राज्य सरकार प्रदेश में कक्षा एक से आठ तक के बीपीएल छात्रों के लिए मासिक वजीफा, ओबीसी छात्र/छात्राओं के लिए मासिक भत्ता, शिक्षा में उत्कृष्टता के लिए राजीव गांधी छात्रवृत्ति, राज्य मेधावी प्रोत्साहन योजना, हरियाणा राज्य मेरिट छात्रवृत्ति, एससी छात्रों के लिए समेकित वजीफा योजना जैसी कई योजनाओं से आर्थिक मदद के लिए योजनाओं को अंजाम दिया है। यही नहीं राज्य सरकार छात्रों को सर्व शिक्षा अभियान के तहत कक्षा 8 तक की मुफ्त पाठ्यपुस्तकें और कार्य पुस्तिकाएँ प्रदान कर रही है। 
25Apr-2022

साक्षात्कार: सामाजिक विचारधारा का बेहतर माध्यम साहित्य: वीएम बेचैन

इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में इकलौते हरियाणवी साहित्यकार 
--ओ.पी. पाल 
व्यक्तिगत परिचय 
नाम: वी.एम.बेचैन 
जन्म: 07 अगस्त 1976 
जन्म स्थान: भिवानी (हरियाणा)
शिक्षा: एमए(पत्रकारिता) स्नातकोत्तर, जनसंचार कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय। 
संप्रत्ति: सांस्कृतिक पर्यवेक्षक, युवा कल्याण विभाग, चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय भिवानी। 
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हरियाणवी संस्कृति, सभ्यता और भाषा की पहचान के सम्मान हेतु साहित्य साधना में जुटे साहित्यकारों और विद्वानों में शुमार वी.एम. बेचैन एक ऐसे हरियाणवी साहित्यकार, चिंतक एवं कवि हैं, जो हरियाणवी बोली को भाषा का दर्जा दिलवाने की मुहिम को लेकर साहित्य के क्षेत्र में कलम चला रहे हैं। खासबात ये भी है कि वे देश में ऐसे इकलौते हरियाणवी साहित्यकार एवं लेखक हैं, जिन्होंने दुनिया के नामचीन अंग्रेजी कवियों की रचनाओं का हरियाणवी बोली में अनुवाद करके इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराने की उपलब्धि हासिल की है। समाज को सकारात्मक विचारधारा के सांचे में ढालने के मकसद से ही बेचैन अपने रचना संसार में हरियाणवी प्रेम रस घोल रहे हैं। संघर्षशील जीवन को हौंसलों की बुलंदियों से पार करते हुए बहुमुखी प्रतिभा एवं उपलब्ध्यिों के धनी वी.एम. बेचैन ने अपने साहित्यिक सफर को लेकर हरिभूमि संवाददाता से विस्तार से बातचीत की और अनेक अनछुए पहलुओं को उजागर करते हए अपने अनुभवों को साझा किया है। 
हरियाणा के भिवानी निवासी वी.एम. बेचैन उर्फ विनोद मेहरा की पिछले तीन दशक से ज्यादा समय से हरियाणा के लिए साहित्य के क्षेत्र में कुछ अलग और नया करने का जूनून रहा है। हरियाणा की मातृभूमि से लगाव का ही नतीजा है कि साहित्य के क्षेत्र में हिंदी एवं हरियाणवी भाषा के लिए विशेष योगदान को देखते हुए हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा साल 2021 के लिए ढ़ाई लाख रुपये के पंडित लख्मीचंद साहित्य सम्मान के लिए उनका चयन किया गया है। पंडित लख्मीचंद साहित्य सम्मान जैसा पुरस्कार भिवानी जिले में पहली बार किसी साहित्यकार को दिया गया है। यह सम्मान से न केवल ‘छोटी काशी’ कही जाने वाले भिवानी के लिए और भी ज्यादा गौरवान्वित करता है, कि इस सम्मान के साथ वर्ष 2021 में दुनिया के सर्वश्रेष्ठ अंग्रेजी कवियों की रचना का हरियाणवी में अनुवाद करने जैसे अभूतपूर्व काम के लिए उनका नाम इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज हुआ है। साहित्यकार एवं कवि वीएम बेचैन ने अपने साहित्यिक और संघर्षशील जीवन के बारे में बताया कि केंद्र सरकार ने जब आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के तहत पांचवीं कक्षा तक मातृ भाषा पढ़ाने जैसे प्रावधान वाली नई शिक्षा नीति का ऐलान किया तो उनके मन में भी हरियाणवी बोली के लिए कुछ नया और विशेष करने जज्बा जगा। उसी जज्बे के तहत उन्होंने विश्व साहित्य का हरियाणवी अनुवाद तैयार करके अनुवादित पुस्तक 'जै' लिखी, जिसमें दो दर्जन से ज्यादा अंग्रेजी कवियों और कवित्रियों की 50 से ज्यादा रचनाओं का हरियाणवी में अनुवाद शामिल है। ये ऐसी रचनाएं हैं जिन पर शोध कार्य भी हुए। उनका कहना है कि इस अनुवादित पुस्तक को पढ़कर महसूस किया जा सकता है कि हरियाणवी भाषा कितनी सहज और सरल है। यही नहीं बेचैन ने भारतीय साहित्यकारों में रविंद्रनाथ टेगौर, स्वामी विवेकानंद और डॉ. रश्मि बजाज की अंग्रेजी कविताओं का भी हरियाणवी संवाद किया है। इस आधुनिक युग में साहित्य पर पड़ रहे प्रभाव के बारे मे बेचैन का कहना है कि अपनी संस्कृति और सभ्यता में सामाजिक सरोकार साहित्य पढ़ने से ही प्रगाढ़ हो सकते हैं, लिहाजा खासतौर से युवा पीढ़ी को अच्छे साहित्य को पढ़ना चाहिए। 
हरियाणा के भिवानी स्थित चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय में बतौर सांस्कृतिक पर्यवेक्षक के पद कार्यरत वी.एम. बेचैन का जन्म भिवानी शहर के ही एक गरीब परिवार में हुआ। हिंदी साहित्य के क्षेत्र को आयाम देकर हरियाणवी हास्य कवि के रूप में लोकप्रिय वी.एम. बेचैन उसी कहावत का परिचायक हैं जिसमें कहा गया है कि कुछ कर गुजरने का जुनूनी संघर्ष में किये जाने वाले प्रयासों में यदि निष्ठा, ईमानदारी और मेहनत का समावेश हो तो सफलता आपके इंसान के कदमों में होती है। ऐसे ही संघर्षशील जीवन की विडंबनाओं के बावजूद गरीब माता पिता ने उन्हें कक्षा आठ तक शिक्षित किया, जिसके बाद विनोद मेहरा ने मजदूरी करके साहित्यिक गतिविधियों से खर्च निकालकर दिये की रोशनी में अपने सपनों को पंख लगाने के प्रयास में पढ़ाई की। जनसंचार में स्नातकोत्तर के बाद उनका सपना हरियाणवी पर पीएचडी करने का था, लेकिन वक्त और परिवारिक हालातों के कारण उनका यह सपना अधूरा ही रहा। मसलन बेचैन के परिवार व बच्चों की रोटी भी उनकी मेहनत मजदूरी और साहित्यिक मंच से मिलने वाले पैसे से चलती रही। गरीबी के साये में जीवन व्यतीत करने के बावजूद इस साहित्यकार ने जो उपलब्धियां हासिल की है उस पर भिवानी जिले के लोग भी गौरवान्वित महसूस करते हैं। इसके बावजूद पीड़ाओं से निकलकर अपेक्षित अभिनंदन में रोजगार की गारंटी को लेकर उनके मन मे अभी भी टीस है कि सरकार जहां इतनी योजनाएं चला रही है, लेकिन गरीब साहित्यकारों और लेखकों को स्थायित्व रोजगार के लिए भी सरकार को संवेदन होना चाहिए। साल 1996 से 2010 तक सक्रिय साहित्यिक पत्रकारिता की और विभिन्न समाचार पत्रों में रिपोर्टिंग और संपादन किया। इसी दौरान उन्होंने करीब सात साल आकाशवाणी रोहतक में बतौर कैजूअल अनांउसर कार्य भी किया। 
प्रकाशित पुस्तकें 
प्रदेश के साहित्यकार एवं कवि वी.एम. बेचैन के साहित्यिक रचना संसार में उनकी प्रकाशित नौ पुस्तकों में हरियाणवी काव्य संग्रह ‘चौपाल मेरे गाम की’, हास्य हरियाणवी काव्य संग्रह ‘काच्चे काट रे सा’, चुटकला संग्रह ‘किस्से कसूता सिंह के’, हास्य हरियाणवी चुटकी संग्रह ‘फंसो और हंसो’, उर्दू गजल संग्रह ‘दश्ते अहसास’, हरियाणवी अनुवाद ‘शकुंतला और दुष्यंत’, हिंदी उपन्यास ‘औरत एक ब्रह्मशास्त्र’, जै.. और दा लिजेंड ऑफ कालापानी वीर सावरकर शामिल हैं। जबकि हरियाणवी चुटकियां ‘बेचैन की दारुशाला’, हरियाणवी गजल संग्रह ‘तू मेरी दुखती रग सै’ और उर्दू गजल संग्रह ‘बिन तेरे बेचैन’, ‘मुहब्बत की एफडी’ ‘म्हारी गीता म्हारा ज्ञान’, ‘कई बार लगता है’, ‘काश तुम्हारा नाम गलतफहमी होता’, ‘सुणो छोरियो’, ‘रोवै ना संतरा’, ‘मेरी नाबालिग गजले’ जैसी पुस्तकें प्रकाशन के लिए तैयार है। उन्होंने हरियाणवी उपन्यास रोंदडू पर आधारित ‘बिन तेरे बेचैन’ हरियाणवी फिल्म का निर्माण भी किया। 
सम्मान व पुरस्कार 
हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा हाल ही में हरियाणवी भाषा एवं साहित्य के क्षेत्र में विशेष योगदान के लिए वीएम बैचैन को वर्ष 2021 के 2.50 लाख रुपए के पंडित लख्मीचंद साहित्य सम्मान देने का ऐलान किया है। इससे पहले साल 2013 में हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा सर्वश्रेष्ठ लेखन के लिए सर्वश्रेष्ठ कृति सम्मान से भी नवाजा जा चुका है। उनकी हरियाणवी फिल्म बिन तेरे बेचैन को राष्ट्रीय अवार्ड फिल्म फेस्टिवल में नामांकित और इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में गेस्ट ऑफ ऑनर का सम्मान भी मिला है। इसके अलावा बेचैन को देशभर की दर्जनों साहित्यिक संस्थाओं ने अनेक सम्मान देकर उनकी साहित्यिक सेवा को पुरुस्कृत किया है। वर्ष 2021 में अंग्रेजी कवियों की रचनाओं का हरियाणवी भाषा में अनुवाद करने पर इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में उनका नाम दर्ज करके मेडल के साथ इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड होल्डर के रूप में पहचान पत्र मिलना उनकी बड़ी उपलब्धियों में शामिल है। 
संपर्क: 9315373754/9034741834
25Apr-2022 

सोमवार, 11 अप्रैल 2022

मंडे स्पेशल: शौचालय निर्माण तक सिमटा ‘स्वच्छ भारत मिशन’

ग्रामीण क्षेत्रों में कचरा प्रबंधन बना सबसे बड़ी चुनौती प्रदेश को ओडीएफ प्लस का दर्जा दिलाने में जुटी सरकार आधे से ज्यादा जिलों के गांव में कूड़ा व स्थिर पानी बरकरार 
ओ.पी. पाल. रोहतक। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वच्छता अभियान शौचालयों तक सिमटता नजर आ रहा है। केंद्र सरकार के दिशा निर्देशों पर हरियाणा के ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे इस मिशन में घरेलू शौचालयों के निर्माण के अलावा सब कुछ अधर में लटका है। सबसे बड़ी परेशानी तो कचरा प्रबंधन की व्यवस्था में है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ भारत मिशन के अन्य घटकों पर काम की गति बेहद धीमी होने के कारण कुछ जिलों को छोड़कर राज्य मिशन के लक्ष्य से कोसो दूर है। मिशन के तहत ज्यादातर कामों में करनाल जिले के गांवों में सर्वाधिक काम किया गया है। सरकार की ओडीएफ प्लस की उम्मीद में सोनीपत ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन में ऐसा फिसड्डी जिला है, जिसका एक भी गांव मिशन में उदीयमान, उज्जवल और उत्कृष्टता हासिल नहीं कर सका है। जबकि रोहतक जिला ग्रामीण इलाकों के घरेलू शौचालय व स्वच्छता परिसर के अलावा अन्य किसी काम में 15 फीसदी लक्ष्य तक भी नहीं पहुंच पाया है। प्रदेश के अन्य जिलों में भी ग्रामीण स्वच्छता मिशन के काम उतार चढ़ाव के बीच फंसा हुआ है। 
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देश में दो अक्टूबर 2014 से शुरू हुए स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) को महात्मा गांधी की 150वीं वर्षगांठ यानि 2 अक्टूबर 2019 तक भारत को खुले में शौच से मुक्त करने के मकसद से शुरू किया गया गया था। इसमें हरियाणा में इस मिशन को के 6908 गांव में शुरू किया गया था, जिसमें अब तक प्रदेश के सभी गांवों में सर्वाधिक 4,90,618 बीपीएल समेत 6,93,657 घरेलू शौचालय निर्माण कर लक्ष्य हो हासिल करके राज्य को खुले शौच से मुक्त यानी ओडीएफ का दर्जा तो दिला दिया गया, लेकिन लेकिन राज्य को ओडीएफ प्लस बनाने के प्रयास में जुटी सरकार के लक्ष्य में ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन की कुव्यवस्था आड़े आ रही है। प्रदेश में ओडीएफ प्लस की राह में अभी तक 120 उदीयमान, 96 उज्जवल और 358 गांव उत्कृष्ट श्रेणी का दर्जा हासिल कर सके हैं। यही कारण है कि प्रदेश को ओडीएफ प्लस बनाने के प्रयास में जुटी राज्य सरकार ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांवों के समुचित विकास की दिशा में ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन पर विशेष बल दिया हैं। इसके लिए ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और अन्य सभी आवश्यक सुविधाएं देने के लिए प्रत्येक ब्लॉक में चिन्हित क्लस्टरों को मॉडल बनाने मुहिम शुरू गई। इस मिशन के तहत सरकारी विभागों के अलावा गैर सरकारी संगठनों को भी राज्य के सभी गांवों में चल रहे कचरे के डोर-टू-डोर कलेक्शन के काम में जोड़ने के अलावा कई जिलों में ग्राम स्तरीय समितियों का गठन किया गया है, जिन्हें घर-घर से कचरा एकत्र करने, सॉलिड वेस्ट के निपटान और प्लास्टिक कचरे के संग्रह जैसे विभिन्न कार्यों की निगरानी करने की जिम्मेदारी दी गई है। इसी दिशा में सभी गांवों की ओडीएफ स्थिति को बनाए रखने और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता के स्तर में सुधार करने के लिए सरकार ने प्रदेश में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के वर्ष 2024-25 तक लागू दूसर चरण के लिए एक कार्य योजना तैयार की, जिसका मकसद ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन के माध्यम से गांवों को ओडीएफ प्लस बनाया जा सके। 
दयनीय हालत में कचरा प्रबंधन 
प्रदेश में ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन की व्यवस्था इतनी दयनीय है कि सरकार के 1396 ठोस और 1,323 तरल अपशिष्ट प्रबंधन परियोजनाओं के लक्ष्य के विपरीत प्रदेश भर में अभी तक यह व्यवस्था औसतन 519 गांव तक ही पहुंच बना सकी है, जिसमें अकेले करनाल जिले के सर्वाधिक 108 गांव शामिल है, जबकि यमुनानगर के 64 व सिरसा के 50 गांव, पंचकूला के 44 गांवों समेत केवल 13 जिलों के गांव ही इस व्यवस्था के लिए दहाई का अंक छू रहे हैं, जबकि जिलों में कचरा प्रबंधन वाले गांव महज एक अंक वाले हैं। सोनीपत जिले का एक गांव भी इस दायरे में नहीं है, जबकि कचरा प्रबंधन मे एक गांव के साथ सबसे पिछड़ा जिला मेवात है। हालांकि प्रदेश मे ठोस कचरा प्रबंधन में 633 गांव में ठोस कचरा प्रबंधन और 558 ग्राम पंचायतों तरल कचरा प्रबंधन का कार्य पूरा हो चुका है। वहीं सरकार की कार्य योजना के अनुसार प्लास्टिक कचरा प्रबंधन की व्यवस्था को दुरुस्त करने की योजना है, जिसके लिए राज्य में सभी जिलों में एक नीयत तारीख को प्लास्टिक कचरा संग्रहण करके उसे सड़क निर्माण में उपयोग करने हेतु पीडब्लूडी विभागा को सौंपा जाता है। 4364 गांवों में बिना प्लास्टिक के डंपों की व्यवस्था है, जिसमें गांव का कचरा एकत्र करके स्वच्छता मिशन को दिशा दी जा रही है। इस व्यवस्था में भी सर्वाधिक 418 डंप कुरुक्षेत्र और सबसे कम 8 रोहतक जिले के गांव शामिल हैं। 
स्वच्छता परिसरों का निर्माण 
हरियाणा के 5736 गांवों में सामुदायिक स्वच्छता परिसरों का निर्माण करने का लक्ष्य है, जिसमें अब तक गांवों में 5670 परिसरों का निर्माण किया जा चुका है। इनमें सर्वाधिक 634 में 437 परिसर करनाल जिले और सबसे कम 52 में से 38 मेवात जिले में बनाए जा चुके हैं। इस व्यवस्था में यह प्रावधान है कि घनी आबादी वाले केई गांव में एक से ज्यादा परिसर भी बनाए जा सकते हैं। प्रदेश के 2972 में से 1204 गांवों में सामुदायिक शुष्क गड्ढों का ही निर्माण किया गया है, जिसमें गंदे पानी को सोखने की व्यवस्था है। इसी तरह गंदे कूडे का खाद में बदलने के लिए प्रदेश में 1154 के लक्ष्य के विपरीत 734 गांव में सामुदायिक खाद गड्ढों का निर्माण भी किया गया है। इसी प्रकार प्रदेश में कचरा संग्रह व प्रथक्करण शेड बनाने की भी मिशन में व्यवस्था की गई है, जिसमें अभी तक 1216 शेड के लक्ष्य के विपरीत 1166 बनाये जा चुके हैं। इनमे सबसे ज्यादा 159 शेड जींद जिलों के गांव में बनाए गये हैं। 
कूडा व स्थिर जल में भिवानी अव्वल 
हरियाणा का भिवानी एक मात्र जिला ऐसा है, जिसने स्वच्छता मिशन के तहत सभी 319 गांव में कूड़े और स्थिर पानी की समस्या से न्यूनतम करने में सफलता हासिल की है। इसके अलावा इस कार्य में कुरुक्षेत्र 98.63, अंबाला 97.38, पानीपत 97.22, रेवाड़ी 97.21, कैथल 95.83, मेवात 95.73, कैथल 95.83, फरीदाबाद 93.66, जींद 87.87, फतेहाबाद 64.49, चरखी दादरी 55.81, झज्जर 56.35, हिसार 53.85 फीसदी और पंचकूला जिले के 61.21 फीसदी गांव में काम कर चुके है। इस मामलें में भी प्रदेश का रोहतक एक ऐसा जिला है जिसमें यह कार्य 141 गांवों में से महज नौ जिलों यानि 6.38 फिसदी हो सका है। 
मेवात में बने सर्वाधिक शौचालय 
प्रदेश में घरेलू शौचालयों के निर्माण में सरकार पहले ही शतिप्रतिशत लक्ष्य हासिल कर चुकी है। इसमें स्वच्छ भारत मिशन के तहत सर्वाधिक एक लाख 444 शौचालयों का निर्माण मेवात जिले 422 गांवों में किया गया है। जबकि 3394 घरेलू शौचालय फरीदाबाद जिले के 142 गांव में किया गया है। मेवात के बाद 52,057 शौचालय सोनीपत जिले के 316 गांवों में बनाए गये हैं। 
प्रदेश को मिला 296.18 करोड़ 
हरियाणा को स्वच्छ भारत मिशन(ग्रामीण) के लिए केंद्र सरकार से पिछले चार साल में 296.18 करोड़ की धनराशि जारी की जा चुकी है। इसमें वित्तीय वर्ष 2018-19 में 70.24 करोड़, 2019-20 में 115.39 करोड़ 2020-21 में 80.60 करोड़ और 2021-22 के दौरान 29.95 करोड़ रुपये प्रदेश को दिये गये। इस अभियान में खर्च होने वाले धन में केंद्र सरकार 60 फीसदी धनराशि देती है, जबकि 40 फीसदी खर्च को राज्य सरकार वहन करती है। 
11Apr-2022

साक्षात्कार: साहित्य के बिना संस्कार असंभव: डा. बालकिशन शर्मा

अब तक 183 हरियाणवी लोक कवियों और उनकी रचनाओं को तलाशा 
व्यक्तिगत परिचय 
नाम: डॉ. बालकिशन शर्मा 
जन्म: 5-6-1958 
जन्म स्थान: गांव अलीपुर खालसा, करनाल (हरियाणा) 
शिक्षा: एम.ए. (संस्कृत),एम.ए.(हिन्दी), एम.फिल्. (हिन्दी), पी.एच.डी. (हिन्दी) 
संप्रत्ति: पूर्व अध्यक्ष, हिंदी-विभाग, एस.डी. कॉलेज, पानीपत
-ओ.पी. पाल 
साहित्य के क्षेत्र में डा. बालकिशन शर्मा उन मूर्धन्य साहित्यकारों और लेखकों में शामिल है, जिन्होंने हिंदी के साथ संस्कृत और हरियाणवी साहित्य को भी बढ़ावा दिया है। यही नहीं हरियाणा के गुमनाम लोक कवियों और उनकी रचनाओं को साहित्यिक पहचान दिलाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। भारतीय संस्कृति और हिन्दी को बढ़ावा देने के साथ हरियाणवी भाषा, लोक संस्कृति एवं सभ्यता को प्रोत्साहन देते हुए उन्होंने हरियाणवी लोक कवियों और उनकी रचनाओं को तलाशने के मिशन को अपने साहित्यिक जीवन का हिस्सा बना लिया है, ताकि समाज खासकर नई पीढ़ी हरियाणवी साहित्य के इतिहास को जान सके। शायद यही कारण है कि साहित्य की विभिन्न विधाओं में लिखी गई उनकी रचनाएं कड़वा सच यानि हकीकत को उजागर करती हैं। उच्च शिक्षा में गोल्ड मेडेलिस्ट रहे सामाजिक परिवेश पर रचनाओं को लिखने में विश्वास रखने वाले डा. बालकिशन शर्मा ने अपने साहित्यिक सफर को लेकर हरिभूमि संवाददाता से विस्तार से बातचीत की और अनुछुए पहलुओं तथा अनुभवों को साझा किया है। हरियाणा के मूर्धन्य साहित्यकार डा. बालकिशन शर्मा का भारतीय संस्कृति और हिंदी प्रेम और खासकर लुप्त होती हरियाणवी साहित्य एवं संस्कृति को पुनर्जीवित करने का यह मिशन बेहद सराहा जा रहा है, कि वे अब तक 183 हरियाणवी लोक कवियों और उनकी रचनाओं को संजोकर उन पर शोध तक करा रहे हैं। हरियाणवी साहित्य को पहचान दिलाने के मकसद से जब वे अध्यापन के क्षेत्र में आए ता उन्होंने गांव दर गांव जाकर लोक कवियों और उनकी पांडुलिपी में रचानाओं को एकत्र किया। वे मानते हैं कि यदि लोक कवियों की रचानाएं इतनी महत्वपूर्ण हैं कि यदि सामने न आ पाती तो समाज के समाज गुमनाम कवियों और हरियाणवी साहित्य के बारे में कोई जानकारी कभी न जान पाता। इस आधुनिकता और भौतिकवाद के युग में साहित्य की स्थिति के बारे में उनका कहना है कि इस वैज्ञानिक युग ने साहित्य का इतना हास हुआ है कि लिपी और भाषा के मिश्रण से विकृत रुप लेते हिंदी शब्दों का विकृत होता रुप भविष्य के लिए शुभ संकेत नहीं है। खासकर युवा पीढ़ी का सामाजिक परिवेश प्रभावित हो रहा है, क्योंकि समाज से ही साहित्य का जन्म होता और साहित्य से संस्कार पैदा होते हैं। ऐसे में अच्छा इंसान बनने के लिए संस्कार या तो परिवार से मिल सकते हैं या फिर ऐसे साहित्य की आवश्यकता है जिसमें गंभीरता और शब्दावली नजर आए। क्योंकि जो संस्कार गुरु से मिल सकते हैं वे उपकरणों से कदापि नहीं मिलेंगे। इसके बावजूद समय के साथ साहित्य में बदलाव तो संभव है, लेकिन अच्छा साहित्य कभी समाप्त नहीं हो सकता, क्योंकि समाज का प्रतिबिंब कहे जाने वाला एक ऐसी संजीवनी है, जो अपना रास्ता खुद तय कर लेता है। 
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प्रदेश में एस.डी. कालेज पानीपत में हिंदी विभाग के अध्यक्ष रहे डा.बालकिशन शर्मा का जन्म पांच जून 1958 को करनाल के गांव अलीपुर खालसा में एक साधारण परिवार में हुआ। माता पिता के मार्गदर्शन में परिवार के सनातन धर्मी संस्कारों मेहनत और ईमानदारी तथा सभ्यता के बीच बचपन में उन्होंने आजीविका के लिए खेती किसानी और पशु पालन के काम में भी हाथ बंटाया। पढ़ाई में उनकी बेदह रुचि का परिणाम था के कक्षा दस में 60 में से 6 विद्यार्थी ही पास हुए, जिनमें वह सबसे अव्व्ल रहे। परिवार की कोई साहित्यिक पृष्ठभूमि नहीं थी, फिर भी उनका साहित्य के प्रति बेहद लगाव रहा। उनका कहना है कि जब वे ग्यारवीं कक्षा में थे तो नेता जी सुभाषचंद्र बोस की जयंती पर उन्होने पहली कविता लिखी। अध्यापकों के प्रोत्साहन ने उन्हें साहित्य के प्रति मजबूत बनाना शुरू किया। अध्यापन के क्षेत्र में आने के बाद उन्होंने विभिन्न विधाओं में कविता लिखना शुरू किया तो उनकी लेखनी चलती ही रही। ग्रामीण परिवेश से शहरी परिवेश में जाने का मर्म को उन्होंने अपने पहले काव्य संग्रह से दस अध्यायों में लिखा है। यही नहीं बल्कि काव्य मंच पर भी उनके इस संग्रह की कविताओं की चौतरफर सराहना मिली। गरीब और ग्रामीण परिवेश में बचपन व्यतीत करने वाले डा. शर्मा परिवार के सहयोग व प्रोत्साहन की बदौलत हिंदी व संस्कृत में डबल एमए और हिंदी में एमफिल की और स्वर्ण पदक विजेता रहे। पीएचडी भी उनकी हिंदी विषय पर ही रही। एमफिल (हिंदी) के बीस तथा पीएचडी के चार शोधार्थी भी उनके निर्देशन में शोध कार्य संपन्न कर चुके हैं। वे भारत सरकार की हिन्दी सलाहकार समिति, उपभोक्ता मामले एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय एवं दूरभाष सलाहकार समिति के सदस्य भी रहे हैं। पानीपत निवासी डा.बालकिशन शर्मा की पत्नी श्रीमति ऊषा भी सेवानिवृत्त अध्यापिका हैं। परिवारिक संस्कार में साहित्य का समावेश ही माना जा सकता है कि उनकी दो बेटियां सुमेधा और सुचेता शर्मा दिल्ली के राजकीय स्कूल में अंग्रेजी व विज्ञान की शिक्षक हैं। 
लेखन व प्रकाशन: 
साहित्यकार एवं लेखक डा.बालकिशन शर्मा की पांच प्रकाशित पुस्तकों में दो काव्य संग्रह ‘गाँव की छाँव’ और ‘हरया भरया हरियाणा’ तथा नाटक ‘ढलती फिरती छाया’ सुर्खियों में हैं। वहीं उनके प्रकाशित शोध-ग्रंथों में मतिराम सतसई:काव्यशास्त्रीय अध्ययन तथा पद्माकर-काव्य का काव्य शास्त्रीय अध्ययन भी शामिल हैं। जबकि उनके लेखन में प्रो. जयभगवान गोयल: व्यक्तित्व और कृतित्व नामक पुस्तक भी शामिल है। उन्होंने 'आठवाँ वचन' नामक हरियाणवी फिल्म के गीत भी लिखे हैं। जहां उनकी अनेक कविताएं, कहानियां और शोधपत्र राष्ट्रीय स्तर के पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं, वहीं अनेक विषयों पर आकशवाणी से वार्ताएं और दिल्ली दूरदर्शन पर परिचर्चाएं भी प्रसारित हुई हैं। 
पुरस्कार एवं सम्मान 
हरियाणा सरकार ने साहित्यकार डा. बालकिशन शर्मा को गत फरवरी माह में ही वर्ष 2019 के लिए दो लाख रुपये के हरियाणा साहित्य अकादमी के जनकवि मेहर सिंह सम्मान से अलंकृत किया है। इससे पहले उन्हें भारतीय संस्कृति के प्रचार एवं प्रसार में विशेष योगदान हेतु जगदगुरू शंकराचार्य द्वारा पुरस्कृत सम्मान, हिन्दी साहित्य प्ररेक संस्था'(जीन्द) के हरियाणवी लोकसाहित्य-रत्न सम्मान, नवजागरण साहित्स संस्था (नारनौंद) के साहित्य श्री सम्माति सम्मान, पं. लखमीचन्द सांग-सेवा सम्मान व हरियाणवी लोककवि पं. जगदीश चन्द्र वत्स' स्मृति सम्मान से भी नवाजा जा चुका है। इसके अलावा उन्हें हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड द्वारा श्रेष्ठ परीक्षा-परिणाम' का प्रशंसा पत्र प्राप्त कर चुके हैं। दादा लखमीचन्द कला-विकास मंच हरियाणा, अखिल भारतीय ब्राहामण महासभा दिल्ली, ब्राहामण जागृति मंच हरियाणा, रत्नावली युवा सांग-महोत्सव' कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, केन्द्रीय संस्थान 'पानीपत रिफाइनरी तथा एनएफएल पानीपत, पानीपत की सामाजिक संस्था रोटरी क्लब, मीडिया क्लब, नागरिक मंच' रेडकास सोसायटी, व अंकन साहित्यिक मंच से विशेष सम्मान मिल चुका है। डा. शर्मा हरियाणा साहित्य अकादमी' की हरियाणवी श्रेष्ठ कृति पुरस्कार-योजना के निर्णायक-मण्डल का सम्मानित सदस्य, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय तथा 'यूएमसी कमेटी का सदस्य तथा कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के परीक्षा संचालन में नकल-विरोधी उडन दस्ते' का संयोजक भी है। 
सम्पर्क: 8 ब्लॉक डी-1, विला नं. 5822 अंसल, सुशांत सिटी, पानीपतध/ मोबाइल नं. 94164 05605
11Apr-2022

सोमवार, 4 अप्रैल 2022

मंडे स्पेशल:जी का जंजाल बन रही है अमरुत योजना की धीमी चाल

पाइप लाइन डालने के लिए सडकों को खोदा, तीन साल से जनता का हाल बेहाल 
काम धंधे चौपट, धूल मिट्टी ने बिगाड़ दिया स्वस्थ आमजन की परेशानी का सबब बने हैं अधूरे कार्य 
जन स्वास्थ्य विभाग दूसरे चरण की डीपीआर तैयार करने में जुटा 
ओ.पी. पाल.रोहतक। पेयजल आपूर्ति, सीवरेज और जल निकासी प्रणाली को मजबूत करने के लिए शुरू की गई अमरुत योजना प्रदेशभर के शहरवासियों के जी का जंजाल बन गई है। इसके तहत शुरू किए गए कार्यों की रफ्तार इतनी धीमी है कि लोगों पूरी योजना को ही कोस रहे हैं। पेयजल और जल निकासी के लिए शहरों के प्रवेश मार्गों को खोदकर रख दिया गया है। कहीं कहीं तो यह खुदाई किए हुए दो से तीन साल बीत चुके हैं, लेकिन काम है कि पूरा होने को नहीं आ रहा। हालात ये हैं कि प्रदेश के बीस शहरों में शुरू की कार्यों में से तीन साल में 136 में से महज 63 परियोजनाओं का काम ही अभी तक पूर्ण हो पाया है। एक ओर जहां कई राज्यों में योजना का दूसरा चरण शुरू हो चुका है वहीं हरियाणा में पहले चरण की 73 परियोजनाओं का काम पटरी से उतर चुका है। दूसरे चरण की शुरूआत तो दूर, यहां पहला चरण ही गले की फांस बना हुआ है। योजना के तहत जहां खुदाई काम किया है, वहां के लोग अधिकारियों को कोस रहे हैं, काम धंधे चौपट हो चुके हैं, धूल मिट्टी से जीना मुहाल हो गया है। आने जाने वाले को परेशानी हो रही है सो अलग।
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अटल नवीनीकरण व शहरी परिवर्तन मिशन(अमरुत) परियोजना के तहत एक लाख से ज्यादा आबादी वाले 20 शहरों की परियोजनाओं में वर्ष 2017-20 के दौरान बुनियादी शहरी संरचना में सुधार हेतु 136 परियोजनाओं के लिए 2,544 करोड़ रुपये का निवेश निर्धारित किया गया। जबकि इन तीन वित्तीय वर्ष में केवल 693 करोड़ रुपये की 63 परियोजनाएं पूरी की जा सकी और अमरुत योजना में राष्ट्रीय रैंकिंग में हरियाणा को 12वां स्थान मिला। इस कार्ययोजना के तहत अम्बाला, करनाल, पंचकुला, सोनीपत, गुरूग्राम, जींद, यमुनानगर, कैथल, थानेसर, फरीदाबाद, पलवल, रोहतक, हिसार, सिरसा, बहादुरगढ़, रेवाड़ी, पानीपत तथा भिवानी आदि को शामिल किया गया था। हालांकि सरकार का दावा है कि अमरुत योजना के तहत प्रदेश में किये गये विकास कार्यो पर अब तक ढ़ाई हजार करोड़ रुपये की लागत के कार्य किये गये हैं। पिछले साल अक्टूबर में देश में पीएम मोदी ने इस योजना के दूसरे चरण की भी शुरुआत कर दी है, जिसमें हरियाणा भी शामिल है। 
प्रदेश में अब तक हुआ कार्य 
हरियाणा में अमरुत योजना के तहत राज्य में 20 शहरों हेतु वर्ष 2017-20 के दौरान 2,544 करोड़ रुपये निवेश किये गये थे, जिनमें से इस दौरान 693 करोड़ रुपये की 63 परियोजनाओं के काम पूरे किये गये, जबकि 1,963.37 करोड़ रुपये की शेष बची परियोजनाओं को पूरा करने का काम चल रहा है। सरकार के आंकड़ो के मुताबिक इस योजना के तहत हरियाणा में 2.22 लाख सीवर कनेक्शन और 2.3 लाख पानी के नलों के कनेक्शन दिये और 300 स्थानों पर जल भराव को खत्म किया गया, तो वहीं 1.95 लाख पुरानी स्ट्रीट लाइट को एलईडी लाइट में बदला गया है। इस आवंटित राशि में पानीपत में 350 करोड़, रोहतक में 190 करोड़, फरीदाबाद में 102 करोड़, सोनीपत में 164 करोड़, अंबाला में 78.46 करोड़, कैथल सिटी में 54 करोड़, सिरसा में 38 करोड़ और भिवानी में 36 करोड़ रुपये की अमरूत योजना के काम शुरू किये गये। कोरोना महामारी के कारण इस योजना का कार्य कुछ समय बंद रहने के कारण केंद्र सरकार ने योजना के कार्यो के लक्ष्य की अवधि बढ़ाकर 31 मार्च 2021 तय कर दी थी, लेकिन प्रदेश में अभी भी अमरुत योजना का लक्ष्य अधूरा है। 
अंतिम चरण में कई शहरों में योजना 
प्रदेश के रोहतक, भिवानी, जींद, थानेसर व यमुनानगर में अमरुत योजना के पहला चरण के तहत जल निकासी, सीवरेज और सेप्टेज प्रबंधन का कार्य अंतिम चरणों में है, जबकि फरीदाबाद, हिसार, पलवल, पंचकूला, रोहतक, रेवाड़ी, सोनीपत जिलों में पचास फीसदी भी काम पूरा नहीं हुआ है। यह हालात जब है कि इस चरण की समय सीमा एक साल पहले ही खत्म हो चुकी है। इस योजना के तहत अटल मिशन अमरुत योजना के तहत भिवानी में 13 करोड़ की लागत से तैयार हुआ करीब 14 करोड़ 33 लाख लीटर पानी की वाटर टैंक का निर्माण पूरा कर लिया गया है। जिसके कारण पहले से 30.20 करोड़ लीटर क्षमता के सात टैंक के साथ पानी स्टोरेज की क्षमता बढ़ने से समस्या खत्म हो जाएगी। 
अटल मिशन 2.0 की तैयारी 
हरियाणा में स्वीकृत कायाकल्प और शहरी परिवर्तन के लिए अटल मिशन 2.0 का प्राथमिक फोकस पानी की सर्कुलर अर्थव्यवस्था के माध्यम से शहरों को जल-सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाने पर रहेगा। हालांकि अमरुत योजना के जल आपूर्ति, सीवरेज, सीवेज प्रबंधन और उपचारित उपयोग किए गए पानी के पुनर्चक्रण, जल निकायों के कायाकल्प और हरित स्थानों के निर्माण जैसे सभी घटकों जैसे के सभी घटकों को प्राप्त करने पर जोर दिया जाएगा। 2025-26 तक नवीकरण और शहरी परिवर्तन के लिए अटल मिशन (अमृत 2.0) को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक कदम के रूप में और पानी की सर्कुलर इकोनॉमी के जरिए शहरों को 'जल सुरक्षित' एवं ‘आत्मनिर्भर’ बनाने के उद्देश्य से मंजूरी दे दी है। योजना के दूसरे चरण का काम स्थानीय निकायों के बजाए जन स्वास्थ्य विभाग को सौंपा गया है, जिसने विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने का काम भी शुरू कर दिया है। 
रोहतक में बनेंगे दो जलाशय 
प्रदेश में दूसरे चरण की अमरुत योजना के तहत गढ़ी बोहर और झज्जर रोड जलघर के नजदीक अगले डेढ़ दशक की संभावित जनसंख्या के हिसाब से रॉ वाटर स्टोरेज टैंक यानी पानी के भंडारण जलाशय बनाया जाएगा। इन दोनों जलाशयों में जेएलएन व बीएसबी नहर का पानी पहुंचाने की योजना है। इसके लिए पेयजल लाइन से अछूते तथा जनसंख्या के आधार पर कम क्षमता की पेयजल लाइन के इलाकों में नई पाइप लाइन बिछाई जाएगी। दोनो रॉ वाटर स्टोरेज टैंक बनाने के लिए गढ़ी बोहर में 24 एकड़, झज्जर जलघर के नजदीक, सुनारिया जेल के पीछे 27 एकड़ और सुनारिया कलां में 27 एकड़ जमीन देखी गई है। जहां तक रोहतक में अमरुत योजना के पहले चरण के काम का सवाल है, सीवेज कार्य बेहद धीमी गति से चल रहा है, इससे आमजन इतना परेशान है कि राष्ट्रीय राजधानी को जोड़ने वाली दिल्ली रोड़ शहर में प्रवेश करने से पहले पिछले कई साल से टूटी हुई है, जो परेशानी के सबब से कम नहीं है। 
हिसार में बदलेगी सीवर लाइन 
अमृत योजना के दूसरे चरण के तहत हिसार में जन स्वास्थ्य विभाग योजना का खाका तैयार करना शुरू कर दिया है, जिसमें 30 साल पुरानी 80 किमी लंबी बदलने के साथ तीन नए बूस्टिंग स्टेशन बनाने और जलघरों की क्षमता बढ़ाने का प्रस्ताव है। फिलहाल शहर में करीब 15 करोड़ की योजना पर काम किया जा रहा है। जबकि जींद जिले में अमृत योजना-दो के तहत जिले की 11 कॉलोनियों में नई सीवरेज लाइन डाली जाएगी। इसके अलावा 6.24 करोड़ रुपये की लागत से सीवरेज की पुरानी लाइनें भी दुरुस्त करने का प्रस्ताव है। 
रेवाडी में भी नहीं हुआ काम 
रेवाड़ी में 2019 में अमरुत योजना के तहत सीवर व पेयजल के लिए 68.59 करोड़ रुपये का टेंडर दे दिया गया था। इसमें पेयजल के लिए 33.28 और सीवर के लिए 34.72 करोड़ रुपये का काम शामिल है। इसके बावजूद शहर में 640 किलो लीटर क्षमता का बूस्टिंग स्टेशन, 20 पंप बदलने के कार्यों में से एक पर भी काम नहीं हो पाया। इसके अलावा रेवाड़ी-नांगलमूंदी स्टेशन की रेलवे क्रॉसिंग के लिए 150 एमएम डीआई पाइप, कालाका जलघर पर रोड बनाने के दो कार्य होने थे, यही नहीं 133 चैंबर बनाने पर भी कोई कार्य शुरू नहीं हो पाया। 
04Apr-2022

सोमवार, 28 मार्च 2022

मंडे स्पेशल: प्रदेश में गरीबों के आशियाने पर दस्तावेजों का अडंगा

सरकार को नहीं मिल रहे गरीब, तो अमीरों के लिए खोले दरवाजे 
घर के सपना पूरा करने का गरीबों को बेसब्री से इंतजार 
ओ.पी. पाल.रोहतक। हरियाणा में गरीबों और बेघरों को आशियाना देने के लिए चलाए जा रहे ‘सबके लिए आवास’ मिशन यानी प्रधानमंत्री आवास योजना के अलावा राज्य स्तर की आवास योजनाओं के तहत भले ही मकान बनाने की रफ्तार धीमी हो, लेकिन जो भी आवास बनाए गये हैं, उनके लिए भी सरकार को गरीब नहीं मिल रहे। ऐसा भी नहीं है कि प्रदेश में गरीबों या बेघर परिवारों की कमी हो, लेकिन छत मुहैया कराने के लिए जो पात्रता तय की गई है, उसके लिए दस्तावेजों के अभाव में अधिकांश गरीब परिवार पात्रता के दायरे से बाहर हो जाते हैं। शायद इसीलिए राज्य सरकार ने घोषणा की है की प्रदेश में गरीबों के लिए बनाए जा रहे आवासों का लाभ सामान्य श्रेणी के लोग भी उठा सकते हैं। दूसरी ओर प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए आवासों के निर्माण और उनके आंवटन को कछुआ चाल ही कहा जा सकता है, जिसमें शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में प्रस्तावित आवासों का 18 फीसदी भी निर्माण नहीं हो पाया है। ऐसा भी नहीं है कि इस योजना के तहत प्रदेश के शहरी व ग्रामीण अंचलों में गरीबों को मकानों का आवंटन नहीं हुए, लेकिन ज्यादातर पात्र गरीब लोगों को तीन किस्तों में जारी होने वाली सहायता राशि के विलंब के कारण भी उनके आशियाना मिलने का सपना अभी अधूरा है। वहीं खासकर शहरी क्षेत्र में आवंटित आवासों को लेकर उन्हें किराए पर देकर मुनाफा कमाने और कुछ गरीबों के आशियानों पर दबंगों ने हथियाकर गरीबों के हकों पर डांका डाल रखा है। 
हरियाणा में केंद्र सरकार की ‘प्रधानमंत्री आवास योजना की रफ्तार इतनी धीमी है कि 2022 तक ‘हर सिर पर छत’ का लक्ष्य मुश्किल ही नहीं, बल्कि नामुमकिन है। प्रदेश में अभी तक शहरी व ग्रामीण क्षेत्र में गरीबों के आशियाने के लिए प्रस्तावित लक्ष्य के विपरीत अभी तक 18 फीसदी भी मकानों का निर्माण नहीं हो सका है, जिसमें केंद्र सरकार द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना में प्रदेश में स्वीकृत मकानों में से शहरी क्षेत्र में 30.56 और ग्रामीण क्षेत्र में 67.3 फीसदी आवासों का निर्माण हुआ है। पीएमएवाई के तहत प्रदेश के सभी नगर निगम, नगर परिषद व नगर पालिकाएं इस योजना के तहत सरकारी कर्मचारियों को छोड़कर गरीबों और जरूरतमंद लोगों को शहरी क्षेत्र में घर बनाने के लिए वित्तीय मदद उपलब्ध करवा रहे हैं। हालांकि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत हरियाणा में सरकार का 3.94 लाख आवास का प्रस्ताव है, लेकिन केंद्र सरकार ने अभी तक हरियाणा में 2.78 लाख से ज्यादा आवासों को ही मंजूरी दी है। प्रदेश में पीएमएवाई के तहत स्वीकृत आवासों में करीब 1.58 लाख शहरी और 1.20 लाख से ज्यादा ग्रामीण क्षेत्रों के शामिल हैं। लेकिन पिछले सात साल में अभी तक 68,852 आवासों के निर्माण ही पूरा हो सका है, जिसमें शहरी क्षेत्र में 48,130 और ग्रामीण क्षेत्र में 20,722 आवास शामिल हैं। यानी राज्य के शहरी क्षेत्र में 83,597 और ग्रामीण क्षेत्र में 10067 आवासों के निर्माण कार्य अंतिम चरण में हैं। वहीं हाउसिंग बोर्ड हरियाणा भी योजना के तहत आवासों का लगातार निर्माण कर रहा है। 
गरीबों के घर पर सरकार गंभीर 
हरियाणा सरकार ने हाल ही में ऐलान किया है गरीबों के लिए बनाए जा रहे मकानों को सामान्य श्रेणी के लोगों को भी आवंटित किया जा सकेगा। इसका प्रमुख कारण यही माना जा रहा है कि मकान के लाभ के लिए ज्यादातर गरीब परिवार दस्तावेजों के अभाव में पात्रता से बाहर हो रहे हैं। यही कारण है कि प्रदेश में लाखों में तादाद के बावजूद गरीब परिवार मकानों के लिए सरकार के आंकड़े मे नहीं आ रहे हैं। हाउसिंग बोर्ड की ओर से आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए प्रदेश के अधिकतर जिलों में हजारों मकान बनाए गए थे। कुछ लोगों ने इन मकानों को छोटा तो कुछ ने महंगा और शहरी आबादी से दूर बताते हुए खरीदने में खास रूचि नहीं दिखाई। सरकार का तर्क है कि काफी लोगों ने तो मामूली कटौती के बाद अपने पैसे भी वापस ले लिए हैं। प्रदेश सरकार को लगता है कि सामान्य श्रेणी में भी लाखों-हजारों लोग ऐसे हैं, जो गरीब हैं और उनके पास अपनी खुद की कोई छत नहीं है। ऐसे लोग बीपीएल श्रेणी के लोगों के लिए बने इन मकानों की खरीद कर सकते हैं। हाउसिंग बोर्ड की ओर से हर माह 15 तारीख और 30 या 31 तारीख को ई-नीलामी करने की व्यवस्था की हुई है। 
ऐसे गरीबों का सपना अधूरा 
सरकारी आंकड़ों के अनुसार पीएमएवाई के तहत जिस प्रकार से पात्रता के लिए दस्तावेज अनिवार्य किये गये हैं। उसके मुताबिक को बेघर गरीबों की छत का सपना अधूरा ही रहने की संभावना है। सरकारी आंकड़े के मुताबिक हरियाणा में 51,871 परिवार बेघर हैं, जिनमें 23,789 यानी 45.86 प्रतिशत शहरी और 28,082 यानी 54.14 प्रतिशत ग्रामीण इलाकों में हैं। जनगणना 2011 के मुताबिक हरियाणा में झुग्गियों मे रहने वाले 3,32,697, स्लम परिवारों की आबादी 16,62,305 है। वहीं हरियाणा में सर्वेक्षण के अनुसार बीपीएल परिवारों यानि गरीबी की रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों की संख्या 46,30,959 है और आवास या अन्य सरकारी योजनाओं को इसी आंकड़े के तहत मदद मिल रही है। ऐसे बीपीएल परिवारों में 16,61,450 शहरी और 29,69,509 ग्रामीण परिवार हैं। वहीं प्रदेश में गरीब वर्ग के 81900 परिवार किराए के मकानों में जीवन व्यतीत कर रहे हैं, जिनमें 62176 परिवार शहरी और 19724 परिवार ग्रामीण क्षेत्रों में किराएदार हैं। हालांकि राज्य सरकार ने अंत्योदय-सरल योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए मकान मुहैया कराने हेतु हाउसिंग बोर्ड हरियाणा के फ्लैट और प्लाट देने की योजना चलाई है, जिसमें गरीबो के सिर पर छत का इंतजाम करने का लक्ष्य है। 
बीपीएल परिवारों की भरमार 
हरियाणा में वर्ष 2007 के सर्वेक्षण के अनुसार बीपीएल परिवारों यानि गरीबी की रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों की संख्या 46,30,959 थी और और केंद्रीय व राज्य स्तर की आवास या अन्य योजनाओं को इसी आंकड़े के तहत मदद दी जा रही है। ऐसे बीपीएल परिवारों में 16,61,450 शहरी और 29,69,509 ग्रामीण परिवार हैं। ग्रामीण बीपीएल वर्ष 2007 के सर्वे के अनुसार ग्रामीण बीपीएल परिवारों में 8,58,389 परिवारों के पास अपने मकान हैं, जबकि हरियाणा में 7,86,862 परिवार ऐसे थे, जिनके पास न तो अपनी जमीन या मकान तक नहीं था। ऐसे बिना किसी संपत्ति वाले बीपीएल परिवारों में सबसे ज्यादा 58,087 भिवानी तथा 56,499 परिवार हिसार के ग्रामीण परिवार सामने आए हैं। मकान व भूमिहीन बीपीएल परिवारों में झज्जर में 50691, करनाल में 50665 परिवार पाए गये थे। हरियाणा सरकार ने बीपीएल व ईडब्ल्यूएस श्रेणी के लोगों की इस परेशानी को समझते हुए उन्हें फ्लैट हस्तांतरण की सुविधा प्रदान की है। यानी वे उन्हें बेच सकते हैं। 
बेघरों के 52 आश्रय गृह 
शहरी बेघरों समेत लोगों को आश्रय उपलब्ध कराने की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्य सरकार की है। तथापि केंद्र सरकार राज्य सरकारों के माध्यम से शहरी बेघरों के लिए आश्रय उपलब्ध कराने में उनके प्रयास को सफल बनाने के मकस से दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन यानि डीएवाई-एनयूएलएम योजना के अंतर्गत शहरी बेघरों के लिए आश्रय(एसयूएच) योजना को प्रशासित कर रहा है। इस योजना में सर्वेक्षण के मुताबिक हरियाणा के 20 हजार से ज्यादा शहरी बेघरों के लिए आधारभूत सुविधाओं वाले 52 आश्रयगृह सक्रीय हैं। 28Mar-2022

साक्षात्कार. संस्कृति निर्माण में साहित्य की अहम भूमिका: राजेश भारती

जापानी काव्य विधा में बाल साहित्य लिखने का अनूठा प्रयास
-ओ.पी. पाल 
व्यक्तिगत परिचय
नाम: राजेश ‘भारती’ 
जन्म: 10 नवंबर 1989 
जन्म स्थान: गांव काकौत, जिला कैथल (हरियाणा) 
शिक्षा: स्नातक 
संप्रत्ति: कविता लेखन और खेती किसानी 
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साहित्य जगत में बाल साहित्य जैसे कठिन लेखन को धार देने वाले गिने चुने साहित्यकारों में ही हरियाणा के रचनाकार राजेश ‘भारती’ एक ऐसे उदयीमान प्रतिभाशाली युवा लेखक एवं कवि हैं, जिन्होंने समाज को नई दिशा देने के लिए भाषा, सभ्यता, संस्कृति और संस्कार के प्रति जागरूकता करने के अलावा राष्ट्रप्रेम, सामाजिक समरसता जैसे सामयिक विषयों पर गंभीरता के साथ सृजनात्मक लेखन को धार दी है। खासतौर से उन्होंने बाल मन को मोहने और बाल पाठकों को परिवार, समाज व देश के प्रति सम्मान की प्रेरणा देते हुए संस्कारों का पाठ पढ़ाने के मकसद से बाल साहित्य को ही अपने रचना संसार का आधार बनाया है। उनके इसी सृजनात्मक लेखन की विभिन्न विधाओं में अपने रचना संसार का विस्तार करने में जुटे युवा रचनाकार को हाल ही में हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा वर्ष 2018 के लिए स्वामी विवेकानन्द स्वर्ण जयंती युवा लेखक सम्मान से नवाजा है। प्रदेश के युवा कवि एवं लेखक राजेश भारती ने अपने अनूठे साहित्यिक सफर के अनुभवों को हरिभूमि संवाददाता से हुई खास बातचीत में विस्तार से अनेक पहलुओं के साथ साझा किया है। 
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हरियाणा में कैथल जिले के गांव काकौत के रहने वाले युवा साहित्यकार राजेश भारती का जन्म 10 नवंबर 1989 को पाला राम के घर में हुआ। प्राथमिक शिक्षा गांव के सरकारी स्कूल से हुई। इनका व्यक्तित्व शुरू से ही गंभीर प्रवृति का रहा है। स्कूल टाइम से ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बढ़ चढ़ कर भाग लेते रहे हैं। लेकिन पूरा परिवार खेतीबाड़ी के पवित्र कार्य से जुड़ा हुआ है। राजेश भारती भी स्वयं किसानी का कर्म करते हुए लेखन कार्य में इस मकसद से जुटे हैं कि वह हरियाणा के साहित्य क्षेत्र को विश्व पटल तक ले जाया जा सके, क्योंकि संस्कृति निर्माण में साहित्य की अहम भूमिका होती है। उनका कहना है कि कक्षा छह से उन्होंने दसवीं कक्षा तक चार पांच हजार फिल्मी गाने लिखे, उसके बाद उन्होंने समाज व देश के सामयिक विषयों पर कविताएं लिखने का सिलसिला शुरू किया। उनका मुख्य फोकस बाल साहित्य पर रहा है। बाल साहित्य के अलावा इनका लेखन बेटियों और नारी सम्मान के अलावा समाजिक कुरितियों के उन्मूलन और देशभक्ति से जुड़ा हुआ है। बाल साहित्य को आधार बनाकर राजेश भारती ने बालकों परिवार, समाज, व देश के प्रति प्रेम और सम्मान की प्रेरणा देकर उन्हें अपनी बाल कविताओं के माध्यम से साहस, ईमानदारी, मेहनत, सत्यवादी, अहिंसा जैसे गुणों का संचार करना है। जापानी काव्य विधा में बाल हाइकु संग्रह और तांका छंद में बच्चों के लिए जिस प्रकार रचनाएं लिखी है, वह उनका बेहद कठिन, लेकिन अनूठा प्रयास है। इसमें तांका विधा में कविताएं बच्चों को प्रकृति, पशु व पक्षी के प्रति लगाव सिखाता नजर आता है। ऐसे सृजनात्मक लेखन के जरिए बाल जीवन से जुड़ हर छोटे व बड़े पल को उन्होंने हाइकु संग्रह के जरिए बालकों में अपनी संस्कृति और संस्कार भरने का प्रयास किया है। राजेश भारती ने कहा कि हाइकु 5-7-5 ध्वनि घटकों में विभाजित 17 अक्षरों वाली जापानी मूल की वह कविता है, जो तीन पंक्तियों और तांका पांच लाइनों में लिखी जाती है। हाइकु व तांका काव्य विधा की रचनाओं के लिए तो हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध साहित्यकारों और आलोचकों ने आश्चर्य जताते हुए सराहना की है, कि खेती बाड़ी के कार्य में व्यस्त इतना कठिन साहित्य लिखना कैसे संभव हो पा रहा है, जो उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियां हैं। आज के आधुनिक युग में साहित्य की स्थिति के बारे में राजेश भारती का कहना है कि साहित्य का सृजन तो धरती के साथ ही हो रहा है। फर्क केवल इतना है कि इसमें समय के साथ परिवर्तन होते रहते हैं, लेकिन अच्छा साहित्य ही हमेशा जिंदा रहता है। यह बात जरुर है कि इंटनेट, मोबाईल और ईबुक्स के कारण प्रकाशित पुस्तकों पर इस तकनीकी युग में प्रभाव पड़ा है, जिसकी वजह से सोशल मीडिया की बढ़ती अहम भूमिका सामने आती है और लोगों में किताबे पढ़ने की रुचि खासकर युवा पीढ़ी में कम होने लगी है। वह मानते हैं कि आज सोशल मीडिया का बढ़ते प्रभाव के कारण साहित्य के लेखन स्तर में गिरावट भी आई है और हर कोई स्वतंत्र है, तो सोशल मीडिया के जरिए ही कुछ भी कहने को लिखने से नहीं चूकता। यहां तक कि अश्लील से अश्लील शब्द या वाक्य भी सोशल मीडिया पर आसानी से प्रचारित हो जाती है। साहित्य तो एक लंबी साधना है, जो जीवन के आखिर तक करनी पड़ती है। इसके लिए शार्टकट लेना हितकारी नही होता। इसलिए इस आधुनिक युग में आज और भी आवश्यक हो गया है कि बच्चों कोई साहित्य से जोड़ा जाए, क्योंकि साहित्य में ही संस्कार और संस्कृति के साथ जीवन जीने के तौर तरीके और सलीके विद्यमान हैं। 
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पुस्तकें प्रकाशित 
प्रदेश के साहित्यकार राजेश भारती की प्रकाशित करीब आधा दर्जन पुस्तकों में कविता संग्रह ' बेटियां हैं अनमोल', 'बेटी करे पुकार' और 'बिटिया के बस्ते में' हरियाणा साहित्य अकादमी के सौजन्य से 2014 में प्रकाशित हुई हैं। जबकि बाल कविता संग्रह 'मच्छर की शादी' भी बाल मन को खूब मोह रही है। युवा रचनाकार के बाल साहित्य में बालमन को मोहने वाला जापानी मूल की काव्य विधा में लिखा गया बाल हाइकु संग्रह 'आँख-मिचौली' इसलिए सुर्खियों में है कि जापानी विधा का यह बाल कविता संग्रह देश का पांचवा और हरियाणा में पहली बार किसी रचनाकार ने लिखकर बाल साहित्य के क्षेत्र में लोकप्रियता हासिल की है।वहीं हाल ही में एक ओर जापानी काव्य विधा-ताँका पर आधारित 'कच्ची धूप' नामक बाल-ताँका संग्रह बाल पाठकों के सामने आया है, जो जापानी काव्य विधा-ताँका पर यह देश का पहला बाल साहित्य है।
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पुरस्कार व सम्मान 
हरियाणा सरकार ने प्रदेश के युवा साहित्यकार एवं कवि राजेश भारती को पिछले माह फरवरी में हरियाणा साहित्य अकादमी के वर्ष 2018 के लिए स्वामी विवेकानंद युवा लेखक सम्मान से नवाजा गया है। राजेश भारती को साहित्य की विभिन्न विधाओं में लेखन और काव्य पाठ के लिए निर्मला स्मृति हिन्दी साहित्य गौरव सम्मान से सम्मानित (चरखी दादरी), अखिल भारतीय साहित्य मंथन शोध संस्थान दिल्ली से श्री देवेन्द्र माँझी साहित्य शिरोमणि सम्मान, हिन्दी प्रेरक साहित्य संस्था जींद से श्री कमल प्रकाश स्मृति साहित्य रत्न सम्मान हासिल हुआ है। साहित्य सभा कैथल से जुड़े राजेश भारती को मासिक गोष्ठियों और वार्षिक कवि सम्मेलनों में भी एक कवि एवं रचनाकर में अनेकों सम्मान हासिल हो चुके हैं। 
संपर्संक: राजेश भारती सुपुत्र श्री पाला राम, गांव काकौत, जिला कैथल-136027 हरियाणा। मोबाईल:9896992737 28Mar-2022

बुधवार, 23 मार्च 2022

मंडे स्पेशल:जल संकट से निपटने को सरकार ने कसी कमर

 कैच दा रेन और मेरा पानी मेरी विरासत से तस्वीर बदलने की उम्मीद 
अब तक के प्रयासों को नहीं मिल पाई उम्मीद के मुताबिक कामयाबी 
ओ.पी. पाल.रोहतक। राज्य सरकार को बीते कई सालों में प्रयासों के बाद भी जल संचय और भू-जल प्रबंध में वो सफलता नहीं मिल पाई, जिसकी उम्मीद थी। एक तरफ तो प्रदेश के 141 में से 85 ब्लॉक रेड कैटेगरी में शामिल हो गए है, जहां पानी पाताल में जा रहा है, वहीं भिवानी, रोहतक, कैथल, जींद, हिसार, झज्जर, सोनीपत जिलों की खेती भूमि का बडा हिस्सा सेम की चपेट में आ गया है। अनेक योजनाएं बनाने के बाद भी दोनों हालातों में सुधार नहीं हो पाया। अब राज्य सरकार ने एक बार फिर इन परेशानियों से निपटने को कमर कस ली है। एक तरफ तो ‘कैच दा रेन अभियान’ शुरू किया है, जिसमें बरसाती पानी को संचय करके मुरुथल हो रहे क्षेत्रों को संचित किया जाएगा। साथ ही ‘मेरा पानी-मेरी विरासत’ योजना के तहत पानी को बचाने का अभियान चल रहा है। इस योजना में किसानों को धान जैसी अधिक पानी से तैयार होने वाली फसलों की बजाय अन्य फसलों की ओर रुझान पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है। जिससे सेमग्रस्त समस्या से निपटा जा सके। इसके लिए केंद्र सरकार ने भी राज्य सरकार की पीठ थपथपाई है। 

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 सरकारी आंकड़े के अनुसार राज्य में ‘मेरा पानी मेरी विरासत’ योजना के तहत वर्ष 2021 में 32,196 किसानों ने 51,874 एकड़ क्षेत्र में धान के स्थान पर अन्य फसलों की बुआई की गई और 7000 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि का लाभ लिया। यही नहीं खेत में तालाब निर्माण के लिए किसान को कुल खर्च पर 70 प्रतिशत की सब्सिडी भी दी जा रही है। सरकार ने भूजल को कानूनी अमलीजामा भी पहना दिया है। यानी केंद्रीय भूजल प्राधिकरण के दिशानिर्देशों के तहत संरक्षण प्रबंधन तथा भू-जल के विनियमन के दायरे में सूक्ष्म सिंचाई, अपशिष्ट जल का सिंचाई व अन्य के लिए प्रयोग और जलभराव वाले क्षेत्रों को शामिल किया गया है। 

जोहड़ों का कायाकल्प 

अब ग्रे-वाटर मैनेजमेंट अपशिष्ट स्थिरीकरण तालाब पद्धति के तहत पहले चरण में 3400 गांवों के जोहड़ों का कायाकल्प होगा। अब तक कुल 502 पूर्ण तालाब, जिसमे 213 तीन तालाब पद्धति व 289 पांच तालाब पद्धतियों का निर्माण किया जा चुका है। इनमें से 443 तालाब क्रियाशील है। यह पद्धति वातावरण में मौजूद ऑक्सीजन और सूर्य के प्रकाश के माध्यम से होने वाली एक प्राकृतिक उपचार प्रक्रिया है। इस प्रणाली में अन्य उपचार प्रणालियों की तरह किसी रसायन, बिजली या कुशल व्यक्तियों की आवश्यकता नहीं है। हरियाणा में अब तक जल विशेष जल संरक्षण अभियान के तहत जल शक्ति योजना के तहत 1.5 लाख सोख गड्ढे भी बनाए गए हैं। गांवों में 4 हजार तालाबों का विस्तार किया गया है और वाटर शेड के अलावा 30 लाख पेड़ लगाए गए हैं। 

रेड कैटेगरी में 85 ब्लॉक 

केंद्रीय भूजल प्राधिकरण के ताजा आंकड़ो पर गौर करें तो हरियाणा के कुल 141 ब्लॉकों में से 85 ब्लॉक के 1780 गांव भूजल दोहन के कारण रेड कैटेगरी में पहुंच गए हैं। यह 85 ब्लॉक राज्य के भौगोलिक क्षेत्र के 60 फीसदी हिस्से को दर्शाते हैं, जहां जल संकट है। जबकि वर्ष 2004 में 55 ब्लॉक रेड कैटेगरी में थे। यानी डेढ़ दशक में 30 और ब्लॉक इसमें जुड़ गए हैं। सरकार ने भूजल स्तर के हिसाब से गुलाबी, बैंगनी और नीली श्रेणियां भी गांवों के लिए बनाई हैं। वहीं सरकार ने हरियाणा में उचित जल ऑडिट भी शुरू कर दिया गया है। इसके लिए भूजल तालिका की रियल टाइम मॉनीटरिंग के लिए महत्वपूर्ण रेड ब्लॉक में 1,700 पीजोमीटर लगाए जा रहे हैं। भू-जलस्तर में गिरावट में सुधार के लिए हरियाणा के 22 जिलों में से 14 जिलों की 1669 ग्राम पंचायतों में सामुदायिक भागीदारी के साथ अटल भूजल योजना भी चलाई जा रही है। इस योजना के तहत भूजल संसाधनों का हाइड्रोजियोलॉजिकल डाटा नेटवर्क तैयार किया जा रहा है। 

गिरता भूजल स्तर खतरे की घंटी 

प्रदेश में आमतौर पर भूजल की दो श्रेणियां हैं, जिसमे एक जो गतिशील है और दूसरी स्थिर है और जमीन के काफी नीचे है। प्रदेश में गिरते भूल की समस्या से अंबाला, कुरुक्षेत्र, करनाल, कैथल, हिसार, झज्जर, भिवानी, रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, सिरसा, सोनीपत, पानीपत और जींद सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। वहीं रोहतक, झज्जर आदि क्षेत्रों में तो भूजल खारा है और इसे सिंचाई के लिए उपयोग नहीं किया जा सकता। हरियाणा में भूजल निकालने की क्षमता देश के औसत 63 फीसदी से भी ज्यादा 137 प्रतिशत अधिक निकाला जाता है। हरियाणा सरकार के आंकड़ों के अनुसार वर्षा जल और नहर के पानी से वार्षिक भूजल रिचार्ज 10.15 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) है, जिसमें से 9.13 बीसीएम का उपयोग किया जा सकता है। लेकिन राज्य में भूजल रिचार्ज के मुकाबले कहीं वार्षिक भूजल निकासी कहीं ज्यादा 12.50 बीसीएम है, जिसमें से 11.53 बीसीएम अकेले सिंचाई के लिए उपयोग किया जाता है और शेष घरेलू (0.63 बीसीएम) और औद्योगिक उपयोग (0.34 बीसीएम) के लिए रह जाता है। हरियाणा जल संसाधन प्राधिकरण के अनुसार तेजी से गिरते भूजल स्तर की सबसे बड़ी वजह धान की फसलों की खेती है। 

प्रदेश में करोड़ो की योजनाएं 

प्रदेश में चल रही जल सरंक्षण की योजनाओं पर पिछले तीन साल में 8452 कार्यो पर 1655.28 करोड़ रुपये की धनराशि खर्च की गई है, इसमें 23.84 करोड़ रुपये के कार्य मनरेगा के तहत हुए है। इन कार्यो में मौजूदा वित्तीय वर्ष 2021-22 में गत 10 मार्च तक जल सरंक्षण और जल संचयन के 1235 कार्यो पर 20.163 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जबकि 30.72 करोड़ रुपये की लागत से 1693 कार्य चालू हैं। प्रदेश में 14,898 जल निकाय काम कर रहे हैं। 

कैच दा रेन अभियान

देशभर में 22 मार्च 2021 से 30 नवंबर 2021 तक चलाए गए ‘कैच दा रेन’ अभियान के तहत सरकार ने जल सरंक्षण और जल संचय की दिशा में वर्षा जल को इकठ्ठा करने का कार्य किया, जिसमें मानसून आने से पहले वर्षा जल संचय करने की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर विशेष बल देते हुए जल संचय करने से जुड़े रेन वाटर हार्वेस्टिंग, वृक्षारोपण, पोखरों की सफाई और निर्माण कार्यों जैसे आदि करवाए। इस अभियान को जमीनी स्तर पर लोगों की सहभागिता से जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए एक जन आंदोलन के रूप वर्षा के जल संग्रह सुनिश्चित किया गया। कैच दा रेन अभियान के तहत प्रदेश में 49,136 कार्य किये गये, जिसमें 351 चेक डैम, 10,257 तालाब/ टैंक, 7,309 ट्रेंच, 9,735 रूफटॉप जल संचयन संरचना के अलावा 11,052 अन्य वर्षा जल पुनर्भरण संरचनाएं तथा 11,052 अन्य जल संरक्षण संरचना के कार्य किये गये। 

21Mar-2022

सोमवार, 14 मार्च 2022

मंडे स्पेशल: प्रदेश के सभी ग्रामीण घरों तक पहुंचा जल कनेक्शन, फिर भी ‘हर घर जल का सपना अधूरा

जल जीवन मिशन: समय से पहले लक्ष्य हासिल करने वाला तीसरा राज्य हरियाणा 
प्रदेश में 17.66 लाख से ज्यादा जल कनेक्शन के साथ 30.97 लाख ग्रामीण जल कनेक्शन 
ओ.पी. पाल.रोहतक। प्रत्येक ग्रामीण परिवारों को शुद्ध पेयजल मुहैया कराने के मकसद से पाइप जल कनेक्शन देने में हरियाणा देश के उन राज्यों में तीसरा राज्य बन गया है, जिन्होंने जल जीवन मिशन का शतप्रतिशत लक्ष्य हासिल कर लिया है। प्रदेश में जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण ग्रामीण परिवारों को 17,66,363 जल कनेक्शन देने के बाद प्रदेश 6804 गांवों में सभी ग्रामीण परिवारों के पास अब 30,96,792 जल कनेक्शन मौजूद हैं। जल जीवन मिशन के तहत जल कनेक्शन हासिल करने वालों को अभी भी शुद्ध पेयजल आपूर्ति के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। मसलन सरकार द्वारा प्रदेश मंज हर घर जल के इस लक्ष्य में पानी की गुणवत्ता पूर्वक पेयजल आपूर्ति में बढ़ोतरी के लिए 404 नलकूप, 75 बूस्टिंग स्टेशन और 4643 किलोमीटर लम्बी नई पाइप लाईनें बिछाई गईं है। जहां ग्रामीण क्षेत्रों के प्रत्येक परिवार को अपने घरों में स्वच्छ नल का पानी मिलने लगेगा। वहीं मिशन के तहत राज्य के सभी स्कूलों, आंगनवाड़ी केंद्रों, स्वास्थ्य केंद्रों आदि में भी नल के पानी की आपूर्ति की व्यवस्था की गई है। 
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जल जीवन मिशन की घोषणा प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने 15 अगस्त 2019 को 2024 तक हर घर में कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन देने का ऐलान किया था। हरियाणा को 30 जून, 2022 तक ‘हर घर जल’ राज्य बनना था, लेकिन राज्य सरकार ने इसे निर्धारित अवधि से पहले साल 2021 में ही हासिल कर लिया। हरियाणा में सभी गांवों के 30 लाख 96 हजार 792 ग्रामीण घरों तक पानी के कनेक्शन पहुंचाने का काम पूरा कर लिया है। जल जीवन मिशन के तहत हरियाणा में लक्षित ग्रामीण परिवारों को 17,66,363 जल कनेक्शन प्रदान कर दिये गये हैं। जबकि मिशन शुरु के समय ग्रामीण घरों में 13,30,429 जल कनेक्शन पहले से ही लगे थे। सभी ग्रामीण घरों में जल जीवन मिशन का शतप्रतिशत लक्ष्य हासिल करने के बाद हरियाणा गोवा, तेलंगाना के बाद तीसरा राज्य बन गया है, जहां ग्रामीण क्षेत्रों के प्रत्येक परिवार को अपने घरों में स्वच्छ नल का कनेक्शन दिया गया है। जबकि देश के प्रत्येक ग्रामीण घर में नल जल कनेक्शन के माध्यम से नियमित और दीर्घकालिक आधार पर निर्धारित गुणवत्ता के लिए पर्याप्त मात्रा में पीने योग्य पानी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्यों के साथ साझेदारी में केंद्र सरकार का जल जीवन मिशन को परा करने का राष्ट्रीय लक्ष्य जल जीवन 2024 तक निर्धारित किया गया था। प्रदेश के 22 जिलों में 142 ब्लॅकों की 6176 में पंचायतो के 6804 गांवों में से 6420 ग्राम जल और स्वच्छतता कमेटियों का गठन करके अब तक 6694 ग्राम कार्य योजना तैयार की गई है, ताकि हर घर जल का सपना पूरा किया जा सके। सरकार के आंकड़ो के मुताबिक इस योजना पर खर्च के लिए केंद्र और राज्य की 50:50 की हिस्सेदारी है। हरियाण में मिशन को जलापूर्ति होने तक 2,285.26 करोड़ रुपये की धनराशि सुनिश्चित की गई, जिसमें से अब तक 1013.14 करोड़ रुपये खर्च किये जा चुके हैं। 
जल की शुद्ध धारा देने की तैयारी 
हरियाण सरकार ने इस मिशन के तहत प्रदेश में पेयजल आपूर्ति में बढ़ोतरी के लिए 104.75 करोड़ रुपये की लागत से 404 नलकूप, 75 बूस्टिंग स्टेशन और 24.25 करोड़ रुपये की लागत से 17 नए जलघर स्थापित करने के साथ ही 765.58 करोड़ रुपये की लागत से 4643 किलोमीटर लम्बी नई पाइप लाईनें बिछाई है। मिशन के तहत प्रदेश में 10 हजार से ज्यादा आबादी वाले सभी गांवों में 135 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन की दर से जल आपूर्ति बढ़ाने तथा सीवरेज व्यवस्था को ठीक करने के लिए ‘महाग्राम योजना’ के तहत 128 गांवों का चयन काम शुरु कर दिया गया है। सरकार ने ताजा जल संसाधनों पर निर्भरता कम करने के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के 50 किलोमीटर के दायरे में आने वाले थर्मल पावर प्लांट्स में टावरों की कूलिंग के लिए ट्रीटेड वेस्ट वाटर का उपयोग।करने के अलावा प्रतिदिन 1000 किलो लीटर पानी का उपयोग करने वाले उद्योग के लिए भी ट्रीटेड वेस्ट वाटर का उपयोग करना अनिवार्य कर दया है। हरियाणा के जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अनुसार प्रदेश के 6804 गांवों में प्रति व्यक्ति के लिए प्रतिदिन 160 से 165 लीटर पेयजल की आपूर्ति की जा रही है। इसमें 127 गांवों में प्रति दिन प्रति व्यक्ति के लिए 40 लीटर, 4062 गांवों में 40 से 55 एलपीसीडी तथा 2615 गांवों में 70 एलपीसीडी पेयजल की आपूर्ति की जा रही है। हालांकि गांवों में की जा रही यह जलापूति शहरी क्षेत्रों में होने वाली जलापूर्ति के मुकाबले लगभग आधी है। 
आंगनबाड़ी केंद्रों में नल का जल 
मिशन के तहत ही प्रदेश के 12,988 स्कूलों और 21,789 आंगनबाड़ी केंद्रों में नल का सुरक्षित पानी सुनिश्चित करने वाले 2 अक्टूबर 2020 को 100 दिनों के अभियान का लक्ष्य को भी हासिल कर लिया गया है। प्रदेश के विद्यालय और 21,789 आंगनवाड़ी केद्रों में जल का उपयोग बच्चों और शिक्षकों द्वारा पीने, मध्याह्न भोजन पकाने, हाथ धोने और शौचालयों में किया जाता है। हालांकि इसके अलावा हालांकि हरियाणा में 19419 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में यह लक्ष्य 88 प्रतिशत ही हासिल किया जा सका है। 
हिसार में सबसे ज्यादा जल कनेक्शन 
प्रदेश में ग्रामीण घरों में सबसे ज्ययादा 2,20,134 जल कनेक्शन हिसार जिलें में हैं, मिशन से पहले ही 51 प्रतिशत जल कनेक्शन थे।जबकि सोनीपत में मिशन के तहत 57.74 प्रतिशत काम के बाद 2,04,620 ग्रामीण जल कनेक्शन के साथ दूसरे पायदान पर है। घरों वहीं सबसे कम 34,433 कनेक्शन के जरिए पंचकूला जिलें में शुद्ध जल धारा पहुंचाने की तैयारी है, जहां मिशन से पहले महज 14.49 जल कनेक्शन थे। 
पानी की गुणवत्ता पर फोकस 
प्रदेश में जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के पास प्रदेशभर में 43 परीक्षण प्रयोगशालाएं हैं। यह अत्याधुनिक मोबाइल वाटर टेस्टिंग लेबोरेटरी वैन पूरी तरह से मल्टीमीटर प्रणाली से लैस है, जिसमें एनालइजऱ, सेंसर, प्रॉब्स और कलरीमेट्रिक आधारित उपकरण, इलेक्ट्रोकेमिस्ट्री आदि हैं। सभी प्रयोगशालाओं से परीक्षण की गुणवत्ता की काउंटर चैकिंग करना है। वहीं जल जीवन मिशन के तहत प्रदेश में जल की गुणवत्ता के परीक्षण के मद्देनजर अति आधुनिक 'चलित जल परीक्षण प्रयोगशाला वैन' भी कार्य कर रही है, जो जल परीक्षण की बहु-आयामी प्रणाली से लैस है, जिसमें सेंसर और विभिन्न उपकरण लगे हैं। इस वैन में जीपीएस और जीपीआरएस/3जी कनेक्टिविटी के जरिए परीक्षण किए गए नमूनों के डेटा को एक केन्द्री य जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के सर्वर को भेजा जा सकता है. इस प्रयोगशाला वैन में एलईडी डिस्लेाम यूनिट के जरिए परीक्षण का नतीजा तुरंत सामने आ जाता है। प्रदेश में जल की गुणवत्ता को लेकर जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग एवं वासो क्षमता संवर्धन कार्यक्रम भी चला रहे हैँ। जल जीवन मिशन जल की गुणवत्ता की निगरानी और निरीक्षण पर बहुत जोर देता है। यह अनिवार्य है कि प्रत्येक गाँव में 5 व्यक्तियों विशेषकर महिलाओं को फील्ड टेस्ट किट के उपयोग के लिए प्रशिक्षित किया जाए, ताकि गाँवों में पानी की जांच की जा सके। 
क्या है जल जीवन मिशन योजना? 
देश के हर गांव में घर के अंदर नल पहुंचाने की सरकार की योजना हर घर नल स्कीम के तहत अबतक गांव के 6 करोड़ से ज्यादा घरों में सरकारी नल लग चुका है। दरअसल केंद्र सरकार ने इस योजना की शुरुआत गांवों में पानी की किल्लत को देखते हुए की है। भारत में अभी भी कई गांव ऐसे हैं जहां लोगों को पानी भरने के लिए कुएं पर दूसरे के घरों में या सरकारी नल पर जाना पड़ता है। ऐसे ही देश की स्वतंत्रता के 7 दशक बाद भी गांवों में महिलाओं को अपने परिवार की घरेलू आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पीने योग्य पानी लाने के लिए दूर तक जाना पड़ रहा था। हालांकि सरकार का आपूर्ति विभाग ग्रामीण घरों में सुरक्षित पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित कर रहा है और प्रयोगशालाओं में जांच करके नियमित रूप से पानी की गुणवत्ता की निगरानी कर रहा है। 
14Mar-2022

साक्षात्कार:साहित्य के मापदंड़ो दरकिनार नहीं किया जा सकता: महेन्द्र शर्मा

साहित्यकारों को इस बदलते युग में रचनाओं मे संतुलन की जरुरत 
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व्यक्तिगत परिचय 
नाम: महेन्द्र शर्मा 
जन्म: 25 अगस्त 1954 
जन्म स्थान: गांव खलीलपुर, जिला गुरुग्राम (हरियाणा) शिक्क्षा: स्नातक (पंजाब विश्वविद्यालय) 
संप्रत्त्ति: स्वतंत्र लेखन, काव्य पाठ एवं पत्रकारिता। 
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-ओ.पी. पाल 
हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा वर्ष 2018 के लिए आदित्य अल्हड़ सम्मान से सम्मानित साहित्यकार एवं वरिष्ठ पत्रकार महेन्द्र शर्मा हास्य-व्यंग्य के ऐसे लोकप्रिय कवि के रुप में पहचाने जाते हैं, जिन्होंने अपने काव्य पाठ से राष्ट्रीय कवि सम्मेलनों में ही नही, बल्कि विदेशों में भी श्रोताओं को अपनी ओर आकर्षित किया हैं। उन्होने साहित्य के क्षेत्र में पद्य के साथ गद्य लेखन में भी कहानी, नाटक, निबंध जैसी पुस्तकों का संपादन कर विभिन्न विधाओं में अपना रचना संसार रचा है। यही नहीं शर्मा ने बालको से लेकर बुजुर्गों तक के लिए रचनाएं लिखकर साहित्यकार व कवि के अलावा नाटकों एवं फीचर फिल्म में अभिनय की भूमिका से अपनी कला का हुनर प्रस्तुत किया हैं। समाज को नई दिशा देने के मकसद से अपनी अलग-अलग विधाओं के बीच सामंजस्य बनाकर साहित्य के क्षेत्र में सेवा देते आ रहे महेन्द्र शर्मा ने हरिभूमि संवाददाता से हुई खास बातचीत के दैरान अपने साहित्यिक सफर के अनुभवों को साझा किया है। -------- 
हरियाण के प्रसिद्ध साहित्यकार, कवि एवं पत्रकार महेन्द्र शर्मा मानते हैं कि साहित्य को समाज का दर्पण इसलिए कहा जाता है कि किताबी ज्ञान कभी मरता नहीं है, भले ही आज के इस आधुनिक युग में नई तकनीक, इंटरनेट या सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के कारण खासकर युवाओं में किताबे पढ़ने में रुचि कम हो रही हो? उसे में साहित्य के मापदंडों को दरकिनार भी नहीं किया जा सकता है। इसलिए साहित्य को जिंदा रखने के लिए साहित्यकारों को भी इस बदलते युग में युवा पीढ़ी के मन और रुचि के अनुसार संतुलन बनाकर साहित्य और रचनाएं लिखने का प्रयास करना चाहिए। उनका कहना है कि यथार्थ के नाम पर छोटी बड़ी लाइन करके जो साहित्य रचा जा रहा है, उसे छोड? कविताओं जैसी रचनाओं में युवाओं को जोड़ने की आवश्यकता है। अपने साहित्य जीवन को लेकर महेन्द्र शर्मा का कहना है कि उन्होंने सबसे पहले एक परौड़ी लिखी औ उसके बाद करनाल में पढ़ते समय नहर के किनारे बैठकर जो लाइने लिखी थी वे अखबार में छपी, जिसमें उन्हे यह भी मालूम नही था कि ये कविता है या गजल। हौंसला और आत्मविश्वास बढ़ा तो साल 1981 के बाद उनकी कलम नही रुकी और उसके बाद उन्हें एक साहित्यकार औ हास्य कवि के रुप में पहचाना गया और सम्मान मिला। वे इसके साथ पत्रकारिता के क्षेत्र में आए और पंजाब, हरियाण तथा दिल्ली में कई अखबारों में विभिन्न पदो पर कार्य किया। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के लालकिला ग्राउंड में देश के सर्वोच्च गणतंत्र दिवस और 'स्वतंत्रता दिवस कवि-सम्मेलनों में पिछले डेढ़ दशक तक अपने काव्यपाठ की दमदार प्रस्तुति और संचालन किया। लोकप्रिय कवि महेन्द्र शर्मा तीन साल तक केन्द्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामले एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की हिन्दी सलाहकार समिति के बतौर मनोनीत सदस्य भी रहे। यही नहीं सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थानों में आयोजित हिंदी प्रतियोगिताओं एवं कार्यशालाओं में निर्णायक की भूमिका निभाने वाले साहित्यकार महेन्द्र शर्मा को हरियाणा में महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी रोहतक, कुरूक्षेत्र यूनिवर्सिटी तथा देश के अन्य विश्वविद्यालयों में निर्णायक, कविता पाठ एवं आतिथ्य भाव में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी का दायित्व भी सौंपा गया है। भारतीय सेना के लिए लेह, लाख, कारगिल, द्रास, श्रीनगर, जम्मू, उधमपुर में सेना के अफसरों व सैनिकों के लिए कवि-सम्मेलनों में कवितापाठ करना भी राष्ट्र सेवा के रुप में विशेष साहित्यिक उपलब्धियां रही हैं। लेखन एवं काव्य पाठ के अलावा उन्होंने नाटकों एवं हरियाणवी फीचर फिल्म 'ज़र जोरू और जमीन' में अभिनय भी किया। आकाशवाणी, दूरदर्शन तथा अन्य अनेक चैनलों पर कविता पाठ करने वाले महेन्द्र शर्मा की कविताएं, रचनाएं और साक्षात्कार देश के विभिन्न प्रतिष्ठित समाचार पत्रों, पत्रिकाओं में प्रकाशित हो रहे हैं। उनकी उपलब्धियों में दुबई, मारिशस, नेपाल तथा बैंकाक में आयोजित कवि सम्मेलनों व कार्यशालाओं में कविता पाठ करना भी शामिल है। साहित्यकार, कवि, अभिनेता और मंचन के साथ उनकी पत्रकारिता के क्षेत्र में भी अहम भूमिका रही है, एक राष्ट्रीय दैनिक समाचार पत्र दिल्ली मे ढ़ाई दशक से ज्यादा समय तक सेवाओं के उपरान्त 'मुख्य उप संपादक' के पद से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति हुए हैं। इसके बाद 13 वर्षों तक अखिल भारतीय अणुव्रत न्यास, दिल्ली में हिन्दी विभाग के प्रभारी पद पर कार्यरत है। 
प्रकाशित पुस्तक 
साहित्यकार महेन्द्र शर्मा ने समाज के सामने अपने साहित्यिक जीवन में दो उपन्यास प्रेमपथ और प्रेरणा, एक कहानी संग्रह तंग गली,दो कविता-संग्रह खण्डहर तुम लौट जाओं और आहट उजाले की के साथ ही एक हास्य व्यंग्य कविता-संग्रह ‘ऐसा भी होता है’ नामक पुस्तकों को प्रस्तुत किया है। उनके बाल गीत संग्रह ‘प्यारे-प्यारे गीत तुम्हारे’ नाम की पुस्तक हिंदी के अलावा पंजाबी में अनुवाद में भी सुर्खियों में है। महेन्द्र शर्मा के साहित्य कर्म की पुस्तक में हरियाणा के कहानीकारों की महिला-समस्याओं पर केन्द्रित कहानियों का संकलन एक नया आकाश, रेत में उगा गुलाव का संपादन भी शामिल है। उन्होंने 'अखिल भारतीय अणुव्रत न्यास, दिल्ली' द्वारा आयोजित विद्यार्थियों के लिए निबंध प्रतियोगिता तथा शिक्षकों के लिए कविता, कहानी, नाटक प्रतियोगिता की रचनाओं का राष्ट्रीय स्तर पर 32 पुस्तकों का संपादन भी किया है। 
पुरस्कार एवं सम्मान 
हरियाण सहित्य अकादमी ने पिछले माह फरवरी में ही साहित्यकार महेन्द्र शर्मा को वर्ष 2018 के आदित्य अल्हड़ सम्मान से नवाजा है। इससे पहले भी हरियाणा साहित्य अकादमी उन्हें विशेष हिन्दी साहित्य मेवी सम्मान-2013 से पुरस्कृत कर चुकी है। विभिन्न विधाओं में रचनाओं और काव्य मंचों पर लोकप्रियता ने उन्हें हिन्दी अकादमी, दिल्ली सरकार द्वारा काका हाथरसी सम्मान-2007 का गौरव भी प्रदान किया है। इसके अलावा अन्तर्राष्ट्रीय साहित्यिक सांस्कृतिक विकास संस्थान, जबलपुर, म.प्र. से सारस्वत सम्मान, जीवन विकास संस्थान, भाषनगर, बस्ती, उ.प्र से साहित्य रश्मि सम्मान, उदभव, दिल्ली से पानव सेवा सम्मान, हरियाणा प्रादेशिक हिन्दी साहित्य सम्मेलन, गुरुग्राम, हरियाणा से साहित्यकार सम्मान, नेशनल प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, बुलंदशहर, उ.प्र से गौरव विपार्धा राम सम्मान हासिल किया है। इसके अतिरिक्त उन्हें देश विदेश की अनेक संस्थाओ द्वारा पुरस्कृत एवं सम्मानित किया जा चुका है। 
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14Mar-2022