एक जमाना था जब लोग अपने घरों के बाहर लिखते थे-अतिथि देवो भव: फिर शुरू किया-शुभ लाभ और बाद में लिखा जाने लगा-यूं आर वेलकम अब शुरू हो गया-......से सावधान!
बुधवार, 4 नवंबर 2020
रेलवे का दीवाली एवं छठ त्यौहारों पर यात्रियों की सुरक्षा व सुविधा पर होगा फोकस
उत्तर रेलवे ने अक्टूबर में मालभाड़ा में 26 फीसदी और कमाई में की 30 फीसदी वृद्धि
रेलवे में माल लदान व व्यवसाय विकास यूनिटों के परर्फोमेंस की समीक्षा
हरिभूमि ब्यूरो.नई दिल्ली।
रेलवे ने कोरोना महामारी के प्रोटोकॉल के आधार पर दीवाली और छठ जैसे त्यौहारों पर यात्रियों की भीड़भाड़ को नियंत्रित करने और उनकी सुरक्षा व अन्य सुविधाओं पर फोकस करने का निर्णय लिया है। इस व्यवस्था के तहत आवश्यकता पड़ने पर उत्तर रेलवे ने रेलवे स्टेशनों पर अतिरिक्त टिकट काउंटर स्थापित करने और अतिरिक्त आरक्षित विशेष ट्रेने चलाने की योजना भी तैयार की है।
उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक के पद पर कार्यभार ग्रहण करने के बाद आशुतोष गंगल ने पहली बार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उत्तर रेलवे के विभागीय प्रमुखों एवं डीआरएम के साथ परर्फोमेंस समीक्षा बैठकों का आयोजन किया। उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक आशुतोष गंगल ने समीक्षा बैठक में सुरक्षा, समय-पालन, छठ एवं दीवाली त्यौहार के दौरान भीड़भाड़ की व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने और व्यवसाय विकास यूनिटों के परर्फोमेंस की समीक्षा की। रेलवे अधिकारियों को आशुतोष गंगल ने ट्रैक के साथ ही यार्ड के भीतर दुर्घटनाओं में कमी लाने समीप की अन्य जोनल रेलवे के डिविजनों के बीच बेहतर समन्वयन पर विशेष जोर दिया। आशुतोष गंगल ने सुरक्षा एवं सफाई के साथ कोविड-19 प्रोटोकाल को ध्यान में रखते हुए भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त व्यवस्था करने के भी निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि यदि आवश्यक हुआ, तो यात्रियों की सुविधा के लिए अतिरिक्त आरक्षित विशेष ट्रेनें चलाई जाएंगी और स्टेशनों पर अतिरिक्त काउंटर स्थापित किये जाएंगे। रेल यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता की प्रतिबद्धता के तहत महाप्रबंधन ने ट्रैक, वेल्ड के रखरखाव मानक को सुधारने और ट्रैक के नजदीक पड़े स्क्रैप को हटाने के लिए जोन के भीतर किये गये कार्यों की भी समीक्षा सभी डिविजनों को सुरक्षा बढ़ाने के लिए अभियान चलाने और जहां जरूरी हो अपने स्टाफ को प्रशिक्षण देने के निर्देश दिये।
माल ढुलाई पर फोकस-
उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक गंगल ने एक अन्य बैठक में इस वर्ष जोनल एवं डिविजनल स्तर पर स्थापित व्यवसाय विकास यूनिटों के कार्यप्रदर्शन की भी समीक्षा की। बीडीयू के प्रयासों से उत्तर रेलवे में मालभाड़ा व्यवसाय के नये क्षेत्रों की पहचान हुई है और पहली बार रेलवे द्वारा नेपाल को शुगर की आपूर्ति, व्यापार मेला ट्रेनों का प्रचालन, तीव्र सेवाएं, माल भेजने वाला को सूचना देने के लिए एसएमएस सेवाएं सफलतापूर्वक संचालित की गई है। इसी रणनीति का नतीजा है कि अक्टूबर 2020 माह में माल लदान में 26 प्रतिशत की वृद्धि होने से रेलवे की आय में भी 30 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। यही नहीं इसके अलावा खाद्यान्न लोडिंग लगभग 50 प्रतिशत है। रेलवे की कोविड-19 महामारी संकट में चुनौती के बीच यह बेहद महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक गंगल ने मालभाड़ा व्यवसाय विकास के संदर्भ में जीएम ने व्यवसाय विकास यूनिटो के आउटरीच का जायजा लिया। उन्होंने बीडीयू को ग्राहकों के बीच विश्वास, सहयोग एवं भरोसा बढ़ाने हेतु उचित वातावरण बनाने के निर्देश दिये।
रेलवे स्टेशन पर यात्री सुविधाओं का निरीक्षण-
दिवाली व छठ त्यौहार के लिए यात्रियों की रेलवे सफर के दौरान की गई सुविधाओं का जायजा लेते हुए उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक आशुतोष गंगल ने मंगलवार को नई दिल्ली में आनंद विहार टर्मिनल रेलवे स्टेशन और वहां स्टेशन परिसर, परिसंचारी क्षेत्र, मेट्रो और प्लेटफार्मों का विस्तृत निरीक्षण किया। इस मौके पर उनके साथ दिल्ली मंडल के रेल प्रबंधक एससी जेन और भारतीय रेलवे स्टेशन विकास निगम के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। महाप्रबंधक ने कर्मचारियों को उच्च मानकों को निर्धारित करते हुए रेल यात्रियों को हर समय सुखद और परेशानी मुक्त यात्रा करने की सुविधाएं देने का निर्देश दिया।
04Nov-2020
मंगलवार, 3 नवंबर 2020
बिहार विधानसभा के दूसरे चरण का चुनाव आज: दांव पर होगी नीतीश सरकार के चार मंत्रियों व लालू के दो बेटों की प्रतिष्ठा!
सत्रह जिलों की 94 सीटों की चुनावी जंग में 1463 प्रत्याशी
सियासी दलों ने 502 दागियों व 495 करोड़पतियों पर भी खेला दांव
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
बिहार में दूसरे चरण में कल मंगलवार को 94 विधानसभा सीटों के लिए वोट डाले जाएंगे, जिसमें विभिन्न दलों के 1463 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं, जिसमें राज्य की नीतीश सरकार के चार मंत्रियों और लालू के दोनों बेटों की प्रतिष्ठा भी दावं पर होगी। बिहार में दूसरे चरण में 94 सीटों के लिए विभिन्न सियासी दलों ने 502 आपराधिक पृष्ठभूमि वाले और 495 कुबेरों पर दांव लगाया है।
बिहार की 243 विधानसभा सीटों पर पहले चरण में 71 सीटों के लिए प्रत्याशियों की मतपेटियों में बंद हुई किस्मत के बाद अब कल मंगलवार को दूसरे चरण में राज्य के 17 जिलों की 94 सीटों के लिए मतदान होगा, जिसमें 147 महिलाओं समेत 1463 उम्मीदवार चुनावी जंग में हैं। इन उम्मीदवारों में राज्य की नीतीश सरकार के चार मंत्री पटना साहिब से नंदकिशोर यादव, नालंदा से श्रवण कुमार, मधुबन से राणा रणधीर सिंह और हथुआ से रामसेवक सिंह की प्रतिष्ठा दांव पर है, तो वहीं राजद की सियासी जमीन का विस्तार करने के इरादे से पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के दो बेटों तेजस्वी यादव की राघोपुर और तेज प्रताप यादव की हसनपुर विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में हैं। हैं। दूसरे चरण में 1,50,33,034 पुरुष, 1,35,16,271 महिलाओं के अलावा 980 ट्रांसजेंडर मतदान करके चुनावी जंग में उतरे प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला करेंगे।
राजद ने उतारे सर्वाधिक दागी प्रत्याशी
बिहार में दूसरे चरण में 94 सीटों के लिए 1463 प्रत्याशियों की चुनावी जंग में प्रमुख दलों समेत विभिन्न पार्टियों ने 502 यानि 34 फीसदी आपराधिक पृष्ठभूमि वाले प्रत्याशियों पर दांव खेला है। दागियों में 389 यानि 27 फीसदी प्रत्याशियों के खिलाफ तो हत्या, लूट, डकैती, बलात्कार, हत्या के प्रयास जैसे गंभीर माले अदालतों में लंबित हैं। इनमें 56 में से 36 दागियों को राजद ने टिकट दिया है, जिसमें 28 के खिलाफ गंभीर अपराधों में मामले लंबित हैं। जबकि लोजपा के 52 में 24, भाजपा के 46 में 29, बसपा के 33 में 16, कांग्रेस के 24 में 14 और जदयू के 43 में 20 उम्मीदवार दागियों की फेहरिस्त में शामिल हैं। इन दागियों में राजद के 28, लोजपा के 24, भाजपा के 20, बसपा के 14, कांग्रेस के 10 तथा जदयू के 15 प्रत्याशियों के खिलाफ गंभीर अपराधिक मामले लंबित चल रहे हैं।
करोड़पति की सियासत
प्रमुख दलों समेत इस दूसरे चरण के चुनाव में 495 करोड़पति उम्मीदवार भी विभिन्न दलों से अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इनमें भी राजद अन्य प्रमुख दलों से आगे है, जिसके 45 प्रत्याशी करोड़पति हैं। जबकि भाजपा ने 39, लोजपा ने 38, जदयू ने 35, कांग्रेस ने 20, बसपा ने 11,एनसीपी व शिवसेना ने 3-3 ने करोड़पतियों को अपना प्रत्याशी बनाया है। इसके अलावा इस चरण के चुनाव में 184 निर्दलीय व अन्य प्रत्याशी भी करोड़पति प्रत्याशियों की सूची में शामिल हैं।
संवेदनशील श्रेणी में 84 सीटें
बिहार की 94 विधानसभा सीटों में से 84 सीटें संवेदनशील सीटों में शामिल हैं। मसलन इन 84 सीटों पर तीन या उससे अधिक प्रत्याशी आपराधिक पृष्ठभूमि वाले चुनावी जंग में हैं। इनमें सबसे ज्यादा 15 वैशाली जिले की लालगंज, 14 सिवान जिले के महाराजगंज व 13 गोपालगंज सीटों पर दागी प्रत्याशी हैं। इसक अलावा पांच सीटों पर 9, आठ सीटों पर 8, छह सीटों पर 7, सात सीटों पर 6, 11 सीटों पर 5, 13 सीटों पर चार तथा 10 सीटों पर तीन प्रत्याशी ऐसे हैं जो दागियों की फेहरिस्त में शामिल हैं।
राजग व महागठबंधन के बीच जंग
बिहार विधानसभा चुनाव में प्रमुख रूप से राजग और महागठबंधन के बीच चुनावी जंग हो रही है। इस दूसरे चरण में राजग में भाजपा के 45, जदयू के 43 और वीआईपी के छह प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं, तो महागठबंधन में राजद के 56, कांग्रेस के 24, भाकपा-माले के छह, माकपा और भाकपा के 4-4 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। इसके अलावा पांच दर्जन से भी ज्यादा सियासी दल चुनाव में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।
10 राज्यों में 24 सीटों पर उप चुनाव
बिहार विधानसभा चुनाव में दूसरे चरण के मतदान के साथ ही, 10 राज्यों के 54 निर्वाचन क्षेत्रों के मतदाता भी बुधवार यानी 3 नवंबर को अपने विधायकों का चयन करेंगे। मध्य प्रदेश में 28 विधानसभा, गुजरात में आठ, उत्तर प्रदेश में सात, कर्नाटक, ओडिशा, झारखंड और नगालैंड में दो-दो और तेलंगाना, छत्तीसगढ़ और हरियाणा में एक-एक सीट है, जो बिहार विधानसभा चुनावों के साथ-साथ उपचुनावों की गवाही देगी। यहां भी 10 नवंबर को ही मतों की गिनती होगी।
इन राज्यों में होंगे उप चुनाव
मध्य प्रदेश: जौरा, सुमौली, मुरैना, दिमनी, अंबाह, मेहगांव, गोहद, ग्वालियर, ग्वालियर पूर्व, डबरा, भांडेर, करेड़ा, पोहरी, बमोरी, अशोक नगर, मुंगौली, सुरखी, मल्हारा, अनूपपुर, सांची, बियोरा, आगर, हाटपिपलिया, मंधाता, मंधाता। नेपानगर, बदनवर, सांवेर और सुवासरा
गुजरात: अब्दसा, लिमडी, मोरबी, धारी, गढ़ा (एसटी), कर्जन, डांग्स (एसटी) और कपराडा (एसटी)
उत्तर प्रदेश: नौगांव, घाटमपुर (कानपुर), बुलंदशहर, टूंडला (फिरोजाबाद), बांगरमऊ (उन्नाव), देवरिया और मल्हनी
कर्नाटक: सिरा, राजा राजेश्वरी नगर
ओडिशा: बालासोर, तीर्थोल
झारखंड: दुमका, बेरमो
नगालैंड: दक्षिणी अंगामी-I, पुंग्रो-किफिर
तेलंगाना: दुब्बाका-
छत्तीसगढ़: मरवाही
हरियाणा: बड़ौदा
03Nov-2020
ारगिल-लेह में बढ़ी खादी उत्पादन बना हिमालयी क्षेत्रों के चेहरों की मुस्कान
कारगिल-लेह में खादी उत्पादन की गतिविधियां, रोजगार का सृजन बढ़ी हरिभूमि
ब्यूरो.नई दिल्ली। खादी और ग्रामोद्योग आयोग द्वारा सृजित स्व-रोजगार के परिणामस्वरूप
कारगिल और लेह के शांत हिमालयी क्षेत्रों में उत्पादन गतिविधियां फलफूल रही हैं। इस
कारण जहां खादी का प्रोत्साहन मिल रहा है, वहीं खादी उत्पादन से रोजगार सृजन ऐसे
क्षेत्रों के लोगों के चेहरों की मुस्कान बनता नजर आ रहा है। केंद्रीय सूक्ष्म,
मध्यम एवं लघु उद्यम मंत्रालय ने यह जानकारी देते हुए बताया कि 2017-18 से खादी और
ग्रामोद्योग आयोग यानि केवीआईसी ने कारगिल और लेह में प्रधानमंत्री रोजगार सृजन
कार्यक्रम योजना के तहत लगभग एक हजार विभिन्न छोटी और मध्यम विनिर्माण इकाइयां
स्थापित की हैं। इनसे केवल साढ़े तीन साल की अवधि में ही स्थानीय युवाओं के लिए
8200 से अधिक रोजगार सृजित हुए हैं। इन इकाइयों ने 2017-18 से 32.35 करोड़ रुपये की
मार्जिन मनी जारी की है। मंत्रालय के अनुसार सीमेंट ब्लॉकों के विनिर्माण से लेकर
लोहे और स्टील की वस्तुओं के विनिर्माण, ऑटोमोबाइल मरम्मत वर्कशॉप, टेलरिंग
इकाइयां, लकड़ी की फर्नीचर निर्माण इकाइयां, लकड़ी पर नक्काशी की इकाइयां, साइबर
कैफे, ब्यूटी पार्लर और सोने के आभूषणों के निर्माण आदि कुछ ऐसे क्षेत्र हैं,
जिनमें केवीआईसी ने सहायता प्रदान की है। मंत्रालय का दावा है कि मौजूदा वित्त वर्ष
2020-21 के पहले 6 महीनों के दौरान कोविड-19 लॉकडाउन के बावजूद केवीआईसी ने विभिन्न
क्षेत्रों के साथ कारगिल में 26 और लेह में 24 नई परियोजनाएं स्थापित करने में मदद
की, जिससे इन दोनों क्षेत्रों में 350 नौकरियों का सृजन हुआ। केवीआईसी के चेयरमैन
वीके सक्सेना के अनुसार 2017-18 से 2020-21 (30 सितंबर तक) केवीआईसी ने कारगिल में
802 परियोजनाएं और लेह में 191 परियोजनाएं स्थापित की हैं। जिसमें कारगिल में 6,781
और लेह में 1421 रोजगारों का सृजन हुआ। केवीआईसी ने कारगिल में इन परियोजनाओं के
लिए मार्जिन मनी के रूप में 26.67 करोड़ रुपये का वितरण किया, जबकि इसी अवधि के
दौरान लेह क्षेत्र में 5.68 करोड़ रुपये का वितरण किया गया।
लेह-लद्दाख में चुनौतीपूर्ण कार्य-
केवीआईसी के चेयरमैन विनय कुमार सक्सेना ने कहा कि कारगिल और लेह में रोजगार में
हुई वृद्धि में पर्यावरण के लिहाज से चुनौतीपूर्ण लेह-लद्दाख क्षेत्र के सर्वांगीण
विकास के लिए प्रधानमंत्री के नजरिए का योगदान है। इस क्षेत्र में साल में केवल छह
महीने तक ही संपर्क स्थापित हो पाता है। कारगिल और लेह ने विभिन्न विनिर्माण
गतिविधियों को बनाए रखने की अपार क्षमता दिखाई है। लेह और कारगिल देश के बाकी
हिस्सों से लगभग छह महीने तक कटा रहता है। हालांकि ये इकाइयां इन क्षेत्रों में
पूरे वर्ष सामानों की स्थानीय उपलब्धता सुनिश्चित करेंगी। कारगिल और लेह के
लाभार्थियों ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें अपनी उत्पादन इकाइयां शुरू करने
के बाद नौकरियों की तलाश में दूसरे राज्यों में नहीं जाना पड़ेगा। इन इकाइयों ने न
केवल उनके लिए स्व-रोजगार सृजित किए हैं बल्कि इस क्षेत्र के कई अन्य बेरोजगार
युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा किए हैं।
बाकिर की बदली तकदीर-
केवीआईसी के चेयरमैन सक्सेना ने दावा किया है कि कारगिल के गांव मिंजी के निवासी मोहम्मद बाकिर
ने 10 लाख रुपये के शुरुआती ऋण के साथ सीमेंट ब्लॉक ईंटों की उत्पादन इकाई शुरू की
थी। अब उसका 52 लाख रुपये का सालाना कारोबार है। उसने अपनी विनिर्माण इकाई में 8
व्यक्तियों को रोजगार दिया है। इसी तरह लोहे और इस्पात की वस्तुओं के उत्पादन से
जुड़े इस्माइल नसीरी ने कारगिल के ग्राम पोयेन में 25 लाख रुपये की लागत से अपनी
इकाई शुरू की और 10 लोगों को रोजगार दिया है तथा उसकी इकाई 76 लाख रुपये का कारोबार
कर रही है। रोजगार की होड़ ने स्थानीय महिलाओं को भी स्व-रोजगार के लिए प्रेरित
किया है जो घर बाहर जाने और स्वतंत्र रूप से काम करने की इच्छुक नहीं थी। केवीआईसी
की सहायता से अनेक महिला उद्यमी इन जिलों में कटिंग, सिलाई इकाइयां और ब्यूटी
पार्लर सफलतापूर्वक संचालित कर रही हैं। इसी प्रकार कारगिल के बारू में एक महिला
उद्यमी हमीदा बानो ने सिलाई की गतिविधि में भाग लिया और अपनी यूनिट में 3 अन्य
महिलाओं को रोजगार दिया। हमीदा का सालाना कारोबार भी 12 लाख रुपये तक पहुंच गया है।
सरकार का लेह-लद्दाख क्षेत्र का विकास केंद्र सरकार का प्रमुख उद्देश्य रहा है।
2019 में जम्मू और कश्मीर के विभाजन के बाद से इस क्षेत्र में स्थानीय रोजगार के
सृजन पर विशेष ध्यान दिया गया है।
03Nov-2020
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में फिर बढ़ने लगी कोराना महामारी
केंद्रीय गृह सचिव ने की दिल्ली में कोविड-19 स्थिति की समीक्षा
हरिभूमि ब्यूरो.नई दिल्ली।
राष्ट्रीय राजधानी में कोरोना महामारी ने फिर से पैर पसारने शुरू कर दिये और कोरोना मामलों में देखी जा रही बढ़ोतरी के मद्देनजर केंद्र सरकार ने दिल्ली सरकार के साथ चर्चा करके कोरोना महामारी नियंत्रण के लिए चलाए जा रहे अभियानों में तेजी लाने का आग्रह किया।
केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने सोमवार को हालांकि एक नियमित प्रक्रिया के तहत दिल्ली में कोविड-19 स्थिति की समीक्षा की। इस समीक्षा बैठक में दिल्ली में कोविड-19 की वर्तमान स्थिति पर पेश की गई एक प्रस्तुति के मुताबिक दिल्ली में कोरोना मामलों में तीसरी बार वृद्धि देखी जा रही है, जबकि नए कोरोना मामले और कुल सक्रिय मामले भी बढ़ रहे हैं। समीक्षा बैठक में शामिल नीति आयोग के सदस्य डा. वी.के. पॉल, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव आईसीएमआर के महानिदेशक, दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी के अलावा दिल्ली पुलिस आयुक्त की मौजूदगी में इस प्रस्तुति के बाद उन पहलुओं पर चर्चा हुई जिसके कारण कोरोना के सक्रिय मामलों की संख्या में हालिया उछाल देखा गया। दिल्ली सरकार ने जानकारी दी कि प्रशासन जांच, कांट्रैक्ट ट्रेसिंग और उपचार पर ध्यान केंद्रित कर रहा है और सक्रिय मामलों की संख्या में उछाल के लिए त्योहारी मौसम को जिम्मेदार बताया गया, जिसमें लोगों की अधिक से अधिक गतिविधियां देखने को मिल रही हैं। यह भी पाया गया कि सुरक्षित कोविड व्यवहार के मूल सिद्धांतों के पालन करने में ढिलाई के कारण कोरोना मामलों में बढ़ोतरी हो रही है।
केंद्रीय एसओपी का पालन कराने पर बल-
इस समीक्षा बैठक में केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने दिल्ली सरकार से आग्रह किया कि इस संबंध में केंद्र सरकार के जारी किए गए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुसार मेट्रो यात्रा को सावधानीपूर्वक संचालित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि दिल्ली में कोरोना महामारी क प्रसार की रणनीति को सख्ती से लागू किया जाना चाहिए। भल्ला ने दिल्ली के निवासियों को आरडब्ल्यूए, मोहल्ला और बाज़ार समितियों, सार्वजनिक घोषणा प्रणाली, पुलिस वाहनों पर संदेश, आदि के माध्यम से सुरक्षित कोविड व्यवहार के बारे में जागरूक करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले सप्ताह में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के अन्य जिलों के साथ दिल्ली की स्थिति की फिर से समीक्षा की जाएगी।
चुनिंदा गतिविधियों में कोरोना परीक्षण पर बल-
इस बैठक के दौरान मौजूद एमओएचएफडब्ल्यू के प्रतिनिधियों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के साथ दिल्ली में कोविड-19 के प्रसार की रणनीति, विशेष रूप से त्योहार के मौसम और बढ़ते प्रदूषण के साथ घटते तापमान को ध्यान में रखते हुए चर्चा की गई। इसमें कुछ प्रमुख क्षेत्रों में प्रयासों को केंद्रित करने का निर्णय लिया गया है। जैसे कि संवेदनशील और महत्वपूर्ण क्षेत्रों जैसे रेस्तरां, बाजार, नाई की दुकान या सैलून, आदि में लक्षित आरटी-पीसीआर परीक्षण, प्रथम उपाय के रूप में बेड, आईसीयू और वेंटिलेटर सहित चिकित्सा संसाधनों की उपलब्धता को तैयार करना, ट्रांसमिशन की श्रृंखला को दबाने और तोड़ने के लिए संपर्क ट्रेसिंग और संगरोधित संपर्कों की निगरानी का उच्च स्तर सुनिश्चित करना। यह लक्षित सूचना, शिक्षा और संचार अभियानों के माध्यम से अधिक से अधिक जागरूकता फैलाने के साथ चुनिंदा रूप से प्रवर्तन बढ़ाने का भी निर्णय लिया गया।
03Nov-2020
पश्चिम बंगाल में कछुआ चाल ‘जल जीवन मिशन’
मौजूदा वित्तीय वर्ष में 55.58 लाख के लक्ष्य के विपरीत सिर्फ 2.20 लाख घरो को मिला नल कनेक्शन
ओ.पी. पाल.
नई दिल्ली।
देशभर में 2024 तक सभी ग्रामीण घरों में नल कनेक्शन के जरिए शुद्ध पीने का पानी मुहैया कराने के लिए चलाए जा रहे जल जीवन मिशन में पश्चिम बंगाल बहुत पीछे है। मसलन मौजूदा वित्तीय वर्ष में अब तक केवल 2.20 लाख घरों को ही नल जल कनेक्शन प्रदान किये गये हैं। केंद्र सरकार ने इस निराशाजनक प्रदर्शन पर नाराजगी जाहिर करते हुए पश्चिम बंगाल सरकार से मिशन के कार्यान्वयन में तेजी लाने का आग्रह किया है, ताकि पश्चिम बंगाल में सभी 55.58 लाख ग्रामीण घरों में स्वच्छ जल मुहैया कराया जा सके।
यह खुलासा जल शक्ति मंत्रालय द्वारा जल जीवन मिशन की प्रगति के आकलन के लिए राज्यवार की जा रही मध्यावधि प्रगति समीक्षा बैठक के दौरान हुआ, जिसमें पश्चिम बंगाल के साथ वीडियो कांफ्रेंसिग के जरिए हुई समीक्षा बैठक में मंत्रालय की राष्ट्रीय जल जीवन मिशन टीम के समक्ष राज्य के अधिकारियों ने अपनी प्रगति रिपोर्ट पेश की। इस रिपोर्ट से पता चला कि पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य के सभी 1.63 करोड़ ग्रामीण घरों के परिवारों को 2024 तक नल कनेक्शन के जरिए स्वच्छ जल मुहैया कराने का लक्ष्य तय किया है। राज्य का मौजूदा वित्तीय वर्ष 2020-21 के दौरान राज्य में 55.58 लाख परिवारों को नल जल कनेक्शन देने का लक्ष्य था, लेकिन सात माह में केवल 2.20 लाख घरों को ही यह सुविधा प्रदान की जा सकी है। राज्य के इस कछुआ चाल प्रदर्शन पर जल शक्ति मंत्रालय ने नाराजगी जाहिर करते हुए इस मिशन में तेजी लाने का आग्रह किया है। वहीं यह सवाल भी खड़ा होता है कि राज्य में 1.63 ग्रामीण परिवारों को कवर करने के राष्ट्रीय लक्ष्य को कैसे हासिल करेगा। केंद्र सरकार ने राज्य को इस मिशन के कार्यान्वयन में हर संभव मदद देने का आश्वासन भी दिया है। यह भी गौर करने वाली बात है कि पश्चिम बंगाल के 10 जिले एक और गंभीर स्वास्थ्य समस्या की चपेट में हैं, जो जापानी इंन्सेफलाइटिस और एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम है, जिससे 42.96 लाख परिवार प्रभावित हैं और इनमें से केवल 2.20 लाख परिवारों (5.4 प्रतिशत) को ही नल जल कनेक्शन प्रदान किए गए हैं। जबकि राज्य में दिसंबर 2020 तक 1,566 आर्सेनिक और फ्लोराइड प्रभावित इलाकों यानि बस्तियों में नल द्वारा जलापूर्ति किया जाना है।
मिशन के प्रति गंभीर नहीं राज्य सरकार-
जल जीवन मिशन की योजना और कार्यान्वयन पर एक मध्यावधि समीक्षा बैठक में पश्चिम बंगाल की निराशाजनक प्रगति रिपोर्ट से जाहिर है कि राज्य सरकार इस केंद्रीय योजना के कार्यान्वयन के प्रति गंभीर नहीं है। जबकि जल जीवन मिशन के राष्ट्रीय लक्ष्य 2024 तक पश्चिम बंगाल में 1.63 करोड़ घरों में स्वच्छ जल पहुंचाने की योजना का राज्य सरकार द्वारा लक्ष्य तय करने का दावा किया गया है। इस मिशन में पश्चिम बंगाल में 22 जिले, 341 ब्लॉक, 41,357 गाँव और 1.07 लाख निवास-स्थल हैं। राज्य द्वारा मौजूदा वित्तीय वर्ष 2020-21 में अब तक 55.58 लाख के लक्ष्य के मुकाबले 2.20 लाख नल जल कनेक्शन प्रदान करने से संभव नहीं लगता कि राज्य इस लक्ष्य को समय से पूरा करेगा? यह भी गौर करने वाली बात है कि पश्चिम बंगाल के 10 जिले एक और गंभीर स्वास्थ्य समस्या की चपेट में हैं, जो जापानी इंन्सेफलाइटिस और एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम है, जिससे 42.96 लाख परिवार प्रभावित हैं और इनमें से केवल 2.20 लाख परिवारों (5.4 प्रतिशत) को ही नल जल कनेक्शन प्रदान किए गए हैं। जबकि राज्य में दिसंबर 2020 तक 1,566 आर्सेनिक और फ्लोराइड प्रभावित इलाकों यानि बस्तियों में नल द्वारा जलापूर्ति किया जाना है। इसके अलावा पिछले माह 2 अक्टूबर को शुरू किए गए विशेष 100 दिवसीय अभियान के तहत सभी आंगनवाड़ी केंद्रों, आश्रमशालाओं और स्कूलों को नल से जल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार से अनुरोध किया गया था, लेकिन इस अभियान को भी राज्य सरकार ने शायद गंभीरता से नहीं लिया। जबकि इस अभियान का मकसद पीने, हाथ धोने, शौचालयों में उपयोग करने तथा मध्यान्ह भोजन पकाने के लिए इन संस्थानों में पीने योग्य पानी उपलब्ध कराया जाना है।
केंद्र से पर्याप्त धनराशि आवंटित-
मंत्रालय के अनुसार मौजूदा वित्त वर्ष 2020-21 में पश्चिम बंगाल को जल जीवन मिशन के लिए तय किये गये 55.58 लाख घरों में नल कनेक्शन प्रदान करने के लक्ष्य के अनुसार केंद्र सरकार ने 1610.76 करोड़ रूपए की धनराशि आवंटित की है। जबकि केंद्र द्वारा मिशन के तहत प्रदर्शन प्रोत्साहन के रूप में कार्य की प्रगति के आधार पर अतिरिक्त धनराशि प्रदान की जा सकती है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल को 15वें वित्त आयोग ने पीआरआई को 4,412 करोड़ रुपये प्राप्त होंगे, जिनमें से 50 प्रतिशत धनराशि अनिवार्य रूप से पानी और स्वच्छता पर खर्च किए जाएंगे। इस प्रकार राज्य इस मिशन के कार्यान्वयन के लिए धन की कमी को भी दोष नहीं दे सकता। समीक्षा बैठक में यह तथ्य भी सामने आए कि राज्य के 41,357 गाँवों में से 22,319 गांवों में सार्वजनिक जल आपूर्ति प्रणाली है, जिसमें पुनःसंयोजन के माध्यम से बाकी बचे घरों में लगभग एक करोड़ नल जल कनेक्शन उपलब्ध कराने की क्षमता है।
02Nov-2020
छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश व हरियाणा समेत 29 राज्यों में बढ़ा संग्रह
अक्टूबर में 1.05 लाख करोड़ के पार पहुंचा जीएसटी राजस्व संग्रह
हरिभूमि ब्यूरो.नई दिल्ली।
देशभर में बीते अक्टूबर माह के दौरान 1,05,155 करोड़ रुपये के जीएसटी राजस्व संग्रह से स्पष्ट संकेत मिले हैं कि देश की अर्थव्यवस्था में सुधार की तरफ बढ़ रही है। पिछले साल अक्टूबर के मुकाबले इस वर्ष अक्टूबर माह में छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, हरियाणा व दिल्ली समेत 29 राज्यों ने जीएसटी राजस्व में बेहतर इजाफा दर्ज किया है।
वित्त मंत्रालय द्वारा जारी जीएसटी संग्रह के आंकड़ो के मुताबितक अक्टूबर 2020 में सकल जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) राजस्व संग्रह 1,05,155 करोड़ रुपये का हुआ है, जिसमें सीजीएसटी 19,193 करोड़ रुपये, एसजीएसटी 25,411 करोड़ रुपये, माल के आयात पर संग्रहित 23,375 करोड़ रुपये समेत आईजीएसटी 52,540 करोड़ रुपये तथा माल के आयात पर संग्रहित 932 करोड़ रुपये समेत उपकर (सेस) 8,011 करोड़ रुपये शामिल है। यही नहीं अक्टूबर माह के लिए 31 अक्टूबर 2020 तक दाखिल किए गए जीएसटीआर-3बी रिटर्न की कुल संख्या 80 लाख तक पहुंची है। मंत्रालय के अनुसार सरकार ने नियमित निपटान के रूप में आईजीएसटी से सीजीएसटी के लिए 25,091 करोड़ रुपये और एसजीएसटी के लिए 19,427 करोड़ रुपये का भुगतान भी किया है। बीते माह अक्टूबर में नियमित भुगतान के बाद केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों द्वारा अर्जित कुल राजस्व सीजीएसटी के लिए 44,285 करोड़ रुपये और एसजीएसटी के लिए 44,839 करोड़ रुपये रहा है। मसलन इस महीने प्राप्त जीएसटी राजस्व पिछले वर्ष अक्टूबर महीने में प्राप्त राजस्व के मुकाबले 10 प्रतिशत अधिक है। इस अक्टूबर माह के दौरान पिछले वर्ष अक्टूबर में इन स्रोतों से प्राप्त राजस्व की तुलना, माल के आयात से राजस्व 9 प्रतिशत अधिक था और घरेलू लेन-देन (सेवाओं के आयात सहित) से राजस्व 11 प्रतिशत अधिक दर्ज किया गया है। जबकि इससे पहले जुलाई, अगस्त और सितम्बर 2020 की तुलनात्मक रूप से जीएसटी राजस्व संग्रह में कमी दर्ज की गई थी। अक्टूबर में जीएसटी राजस्व संग्रह में हुई वृद्धि देश की अर्थव्यवस्था में सुधार के वक्र तथा राजस्व में सुधार को भी दर्शाता है।
छत्तीसगढ़ में 404 करोड़ का इजाफा-
वित्त मंत्रालय के अनुसार पिछले साल अक्टूबर के मुकाबले इस साल अक्टूबर में जीएसटी राजस्व संग्रह में छत्तीसगढ़ राज्य में 404 करोड़ रुपये यानि 26 फीसदी की वृद्धि दर्ज की है। मसलन अक्टूबर 2019 में राज्य में 1570 करोड़ रुपये का जीएसटी राजस्व मिला था, जिसके मुकाबले इस साल समान अवधि में 1974 करोड़ रुपये के राजस्व का संग्रह हुआ। इसी प्रकार मध्य प्रदेश में पिछले साल अक्टूबर में हुए 2053 करोड़ के जीएसटी संग्रह के मुकाबले इस साल अक्टूबर में 2403 करोड़ रुपये का राजस्व एकत्र किया गया, जो 350 करोड़ रुपये यानि 17 फीसदी अधिक है। जबकि हरियाणा को पिछले साल अक्टूबर में 4578 करोड़ के जीएसटी राजस्व मिला था, जिसका संग्रह इस साल अक्टूबर में बढ़कर 5433 करोड़ रुपये हो गया, जो 855 करोड़ रुपये यानि 19 फीसदी अधिक की वृद्धि दर्ज कराता है।
महाराष्ट्र पहले पायदान पर-
वित्त मंत्रालय के जीएसटी राजस्व संग्रह के जारी आंकड़ो के अनुसार पिछले साल अक्टूबर के मुकाबले बीते माह अक्टूबर 2020 में महाराष्ट्र में जीएसटी राजस्व संग्रह सर्वाधिक 15,799 करोड़ रुपए रहा। जबकि 6.998 करोड़ रुपये के जीएसटी संग्रह के साथ कर्नाटक दूसरे, 6,901 करोड़ रुपये तमिलनाडु तीसरे और 5,471 करोड़ रुपये जीएसटी राजस्व संग्रह के साथ उत्तर प्रदेश चौथे स्थान पर रहा। इसके अलावा जीएसटी संग्रह के मामले में अक्टूबर 2019 के मुकाबले अक्टूबर 2020 के दौरान छत्तीसगढ़ में 26 फीसदी, मध्य प्रदेश में 17 फीसदी, हरियाणा में 19 फीसदी, पंजाब में 16 फीसदी, उत्तराखंड में 10 फीसदी और हिमाचल प्रदेश में 3 फीसदी का इजाफा दर्ज किया है। जबक जम्मू कश्मीर में 21 फीसदी, राजस्थान में 22 फीसदी, यूपी, बिहार और केरल में 7-7 फीसदी, पश्चिम बंगाल में 15 फीसदी, झारखंड में 23 फीसदी, ओडिशा में 21 फीसदी, गुजरात मे 15 फीसदी, आंध्र प्रदेश में 26 फीसदी, तेलंगाना में 5 फीसदी, असम में 14 फीसदी, अरुणाचल प्रदेश में 138 फीसदी और पुडुचेरी में 10 फीसदी अधिक जीएसटी संग्रह किया गया है। दूसरी ओर दिल्ली में 8 फीसदी, दमन और द्वीव में 91 फीसदी, लक्षद्वीप में 55 फीसदी, चंडीगढ़ में 3 फीसदी, सिक्किम में 5 फीसदी कम जीएसटी राजस्व हुआ है।
02Nov-2020
अंतर संसदीय संघ के अध्यक्ष पर के चुनाव में वोट करेगा भारत
लोस अध्यक्ष बिरला के नेतृत्व में संघ की शासी परिषद के सत्र में शामिल हुआ भारतीय संसदीय शिष्टमंडल
हरिभूमि ब्यूरो.नई दिल्ली।
अंतर संसदीय संघ की शासी परिषद के चार दिवसीय 206वें सत्र की शनिवार को वर्चुअल रूप से शुरूआत हुई, जिसमें लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के नेतृत्व में भारतीय संसदीय शिष्टमंडल भी हिस्सेदारी कर रहा है। इस सत्र के एजेंडे में अंतर संसदीय संघ के नए अध्यक्ष का चुनाव भी होगा, जिसमें भारत भी मतदान करेगा।
लोकसभा सचिवालय के प्रवक्ता ने यह जानकारी देते हुए बताया कि एक नवंबर से 4 नवंबर तक चलने वाले अंतर संसदीय संघ की शासी परिषद के 206वें वर्चअल सत्र में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के नेतृत्व में भारतीय संसदीय शिष्टमंडल भी हिस्सा ले रहे हैं। इस शिष्टमंडल में लोकसभा सांसद श्रीमती पूनमबेन हेमतभाई माडम और राज्यसभा सांसद स्वपन दासगुप्ता के अलावा लोकसभा महासचिव श्रीमती स्नेहलता श्रीवास्तव, राज्यसभा के महासचिव देश दीपक वर्मा भी हिस्सा ले रहे हैं। जबकि इस वर्चुअल सत्र में लोकसभा के संयुक्त सचिव डॉ अजय कुमार शिष्टमण्डल के सचिव के रूप में शामिल हो रहे हैं।
यह वर्चुअल सत्र जो कोविड-19 महामारी के कारण आईपीयू की व्यक्तिगत रूप से उपस्थित सांविधिक सभा के स्थान पर आयोजित किया जा रहा है। इस वर्चुअल सत्र की कार्यसूची में अन्य बातों के साथ-साथ रिमोट इलेक्ट्रानिक गुप्त मतदान के माध्यम से आईपीयू के नए प्रेसिडेंट का चुनाव भी शामिल है, क्योंकि आईपीयू के निवर्तमान प्रेसिडेंट महामहिम सुश्री गैब्रिएला क्यूवास बैरोन(संसद सदस्य, मैक्सिको) का कार्यकाल 19 अक्तूबर 2020 को पूरा हो गया था। इसी सत्र में अंतर संसदीय संघ यानि आईपीयू के नए प्रेसिडेंट का 2020-23 के कार्यकाल के लिए चुनाव होगा। इस चुनाव में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के नेतृत्व भारतीय संसदीय शिष्ट मण्डल भी अपना मत देगा।
चार उम्मीदवार मैदान में-
अंतर संसदीय संघ के अध्यक्ष के चुनाव के लिए प्रतिस्पर्धा में चार उम्मीदवार हैं, जिनमें पुर्तगाल से दुआरते पचेको, पाकिस्तान से मोहम्मद संजरानी, उज्बेकिस्तान से अकमल सैदोव और कनाडा से सुश्री सलमा अताउल्लाहजान अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। शासी परिषद के निर्धारित वर्चुअल सत्र से पहले एपीजी के वर्तमान अध्यक्ष फिलिपीन्स की सीनेट के प्रेसिडेंट द्वारा आईपीयू के 36 राष्ट्र वाले एशिया प्रशांत भूराजनैतिक समूह (एपीजी) की वर्चुअल बैठक 30 अक्तूबर को आयोजित की गई थी, जिसमें लोकसभा की महासचिव स्नेहलता श्रीवास्तव और राज्यसभा सांसद स्वपन दासगुप्ता ने भी हिस्सा लिया है। शासी परिषद आईपीयू का मुख्य नीति निर्माण निकाय है, जिसे अन्य बातों के साथ-साथ आईपीयू के नए प्रेसिडेंट को चुनने का अधिकार प्राप्त है। आईपीयू की प्रत्येक सदस्य संसद के तीन संसद सदस्य शासी परिषद में प्रतिनिधित्व करते हैं और तदनुसार उनके तीन मत होते हैं, बशर्ते शिष्ट मण्डल में पुरुष और महिला दोनों हों।
02Nov-2020
भारत में दुनिया की सबसे खराब सड़कें
देश में सड़क हादसों में होती हैं हर घंटे 17 मौतें
हरिभूमि ब्यूरो.नई दिल्ली।
भारत की सड़कों को लेकर दो अहम बातें सामने आई हैं। पहली तो यह कि यह पूरी दुनिया में सबसे खराब है। दूसरी इन्हीं सड़कों पर हर घंटे 17 मौतें हो रही हैं। यह हम नहीं बल्कि खुद सरकार के आंकड़े कह रहे हैं। आंकड़े पिछले साल के हैं। हर दिन 1,230 एक्सीडेंट हुए और उनमें 414 लोगों की मौत हुई। यदि हर घंटे का ब्रेक-अप देखें तो 51 एक्सीडेंट और 17 मौतें। पूरी दुनिया में सबसे भयावह स्थिति है।
सबसे दुखद पहलू यह है कि मरने वालों में 57% ऐसे थे, जो पैदल चल रहे थे, साइकिल चला रहे थे या टू-व्हीलर पर कहीं जा रहे थे। पिछले साल सितंबर नया मोटर व्हीकल एक्ट लागू हुआ, लेकिन उसकी सख्ती के बाद भी भारत में रोड एक्सीडेंट में होने वाली मौतों में कोई कमी फिलहाल तो नजर नहीं आ रही। 2015 की तुलना में एक्सीडेंट जरूर 50 हजार कम हुए हैं, लेकिन एक्सीडेंट विक्टिम जरूर पांच हजार बढ़ गए। वैसे, राहत की बात यह है कि 2018 के मुकाबले पिछले साल एक्सीडेंट्स में 3.86%, मौतों में 0.20% और घायलों में 3.85% की कमी आई है।
पूरी दुनिया में भारत की सड़कें ही सबसे खतरनाक-
भारत में भले ही दुर्घटनाओं और मौतों को कम करने की कोशिश की जा रही हो, दुनियाभर में हमारी सड़कें ही सबसे खतरनाक हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की ग्लोबल स्टेटस रिपोर्ट ऑन रोड सेफ्टी 2018 के मुताबिक 2016 में दुनियाभर में सालभर में 13.5 लाख लोगों की मौतें सड़क दुर्घटनाओं की वजह से हुई। यह और भी चौंकाने वाली बात है कि 5-29 वर्ष के एज ग्रुप में मौतों का यह सबसे बड़ा कारण है। यह आंकड़ा और भी चौंकाने वाला है कि अमेरिका और जापान में भारत से भी ज्यादा रोड एक्सीडेंट हुए थे। लेकिन, हमारे यहां एक्सीडेंट्स में मरने वालों की संख्या दोनों देशों के विक्टिम्स से चार गुना ज्यादा है। रिपोर्ट कहती है कि कम आय वाले देशों में मौतों का आंकड़ा बढ़ा है।
तीन साल में लड़कियों की मौतें बढ़ी-
रोड एक्सीडेंट्स की बात करें तो विक्टिम पांच में से चार पुरुष ही रहे हैं। लेकिन, पिछले तीन वर्षों का ट्रेंड देखें तो मरने वालों में लड़कियों की संख्या तेजी से बढ़ी है। 2017 में रोड एक्सीडेंट्स का शिकार बनने वालों में 18 साल से कम उम्र की लड़कियों की संख्या 1,965 थी, जो 2019 में बढ़कर 2,516 हो गईं। यानी करीब 30% से ज्यादा की बढ़ोतरी। इसी तरह ओवरऑल देखें तो कुल विक्टिम में महिलाओं की हिस्सेदारी 2017 में 13.6% थी, जो 2019 में बढ़कर 14.4% हो गईं।
ओवर स्पीडिंग बन रहा मौत का कारण-
केंद्र सरकार की रिपोर्ट कहती है कि 2018 की तरह 2019 में भी ओवर स्पीडिंग ही रोड एक्सीडेंट्स में मौत का सबसे बड़ा कारण रहा। ओवर स्पीडिंग की वजह से 71.1% एक्सीडेंट्स हुए और 67.3% मौतों और 72.4% घायलों में यही दोषी भी रहा। रिपोर्ट कहती है कि ओवर स्पीडिंग, शराब पीकर ड्राइविंग, रेड सिग्नल तोड़ने और गाड़ी चलाते समय मोबाइल फोन के इस्तेमाल की घटनाएं 2018 के मुकाबले 2019 में ज्यादा रही। करीब 10% एक्सीडेंट्स बिना लाइसेंस के ड्राइविंग की वजह से हुए। इसका मतलब यह है कि मोटर व्हीकल एक्ट 2019 का सख्ती से पालन करने की जरूरत है।
ओपन एरिया में स्पीड कंट्रोल से ही थमेंगे एक्सीडेंट-
रिपोर्ट में चौंकाने वाली बात सामने आई है। रेसिडेंशियल एरिया, इंस्टिट्यूशनल एरिया और मार्केट में ट्रैफिक ज्यादा होता है और वहां एक्सीडेंट्स होने का खतरा भी ज्यादा रहता है। डेटा इसके उलट तस्वीर पेश करता है। 2018 और 2019 में ओपन एरिया में एक्सीडेंट्स ज्यादा हुए और विक्टिम्स भी ज्यादा रहे। वैसे, राहत की बात यह है कि सख्ती से नियमों का पालन कराने से 2019 में मार्केट और ओपन एरिया में एक्सीडेंट कुछ कम हुए और विक्टिम भी कम रहे।
अंधे मोड़ नहीं सीधी सड़कों पर सबसे ज्यादा एक्सीडेंट-
सरकार ने एक्सीडेंट्स कहां हुए, यह आंकड़े भी जुटाए हैं। यह चौंकाने वाले हैं। आम तौर पर अंधे मोड़ या कर्व्ड सड़कों पर एक्सीडेंट्स का खतरा बताया जाता है, लेकिन यह सच नहीं है। डेटा कहता है कि 65.5% एक्सीडेंट्स सीधी सड़कों पर हुए और कुल मौतों में 66% हिस्सेदारी इन्हीं सड़कों की रही। वहीं, गड्ढों की वजह से 4,775 एक्सीडेंट्स हुए और इनमें 2,140 लोगों की मौत हुई।
02Nov-2020
भारतीय रेलवे ने कोरोना संकट में भी कम नहीं होने दी कमाई
माल ढुलाई में 15 फीसदी इजाफा कर कमाई में की 9 फीसदी वृद्धि
हरिभूमि ब्यूरो.नई दिल्ली।
भारतीय रेलवे ने कोरोना काल के दौरान रेलवे की आमदनी को गति देने की दिशा में मिशन मोड पर माल ढुलाई को नई गति दी, जिसके नतीजे सकारात्मक आ रहे हैं। इस कोरोना महामारी के संकट के बावजूद बीते माह अक्टूबर में माल ढुलाई में 15 फीसदी की वृद्धि रेलवे के इसी मिशन का सकारात्मक नतीजा है।
रेल मंत्रालय ने शनिवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि भारतीय रेलवे ने अक्टूबर 2020 के महीने में कमाई और लोडिंग के मामले में माल ढुलाई के उच्च स्तर को कायम रखा है। मिशन मोड पर भारतीय रेलवे ने अक्टूबर 2020 के महीने में हुए माल लदान पिछले साल अक्टूबर को हुए माल लदान की तुलना में इजाफा दर्शाता है। इस साल अक्टूबर के महीने में भारतीय रेलवे 108.16 मिलियन टन माल लदान किया, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि में हुए 93.75 मिलियन टन के लदान की तुलना में 15 प्रतिशत अधिक है। इसी अवधि के दौरान भारतीय रेलवे ने माल ढुलाई से 10,405.12 करोड़ रुपये कमाए जबकि पिछले वर्ष की इसी अवधि में 9536.22 करोड़ रुपये कमाए थे। यानी रेलवे ने इस वर्ष 868.90 करोड़ की अधिक कमाई की, जोकि 9 प्रतिशत है।
अक्टूबर 2020 के महीने में भारतीय रेलवे की लोडिंग 108.16 मिलियन टन रही जिसमें 46.97 मिलियन टन कोयला, 14.68 मिलियन टन लौह अयस्क, 5.03 मिलियन टन खाद्यान्न, 5.93 मिलियन टन उर्वरक और 6.62 मिलियन टन सीमेंट (क्लिंकर को छोड़कर) शामिल है। गौरतलब है कि रेलवे फ्रेट गतिविधि को बहुत ही आकर्षक बनाने के लिए भारतीय रेलवे द्वारा कई रियायतें और छूट दी जा रही हैं। इसी के साथ माल ढुलाई गतिविधि में सुधार को संस्थागत रूप दिया जाएगा और आगामी शून्य आधारित टाइम टेबल में शामिल किया जाएगा। इसके अलावा नए व्यवसाय को आकर्षित करने और अन्य मौजूदा ग्राहकों को प्रोत्साहित करने के लिए रेल मंत्रालय ने लौह और इस्पात, सीमेंट, बिजली, कोयला, ऑटोमोबाइल और लॉजिस्टिक सेवा प्रदाताओं के शीर्ष नेतृत्व के साथ बैठकें की हैं। इसके अलावा पंजाब में माल ढुलाई सेवा अवरुद्ध होने के बावजदू क्षेत्रीय और संभागीय स्तरों पर व्यावसायिक विकास इकाइयां और माल ढुलाई की गति को दोगुना करते हुए सतत विकास की गति में योगदान दिया है। भारतीय रेलवे ने कोविड-19 का उपयोग एक अवसर के रूप में करके पूरी दक्षता और प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए किया है।
02Nov-2020
रविवार, 1 नवंबर 2020
छत्तीसगढ़ में इस साल मिलेंगे 20 लाख घरों को नल कनेक्शन
राज्य में 2023 तक सभी ग्रामीण घरों को मिलेगा स्वच्छ जल
जल जीवन मिशन: केंद्र ने मौजूदा वर्ष के लिए आवंटित किये 445.52 करोड़ रुपये
हरिभूमि ब्यूरो.नई दिल्ली।
केंद्र सरकार की देशभर के सभी ग्रामीण घरों में नल कनेक्शन के जरिए 2024 तक पीने का शुद्ध पानी मुहैया कराने के लिए चल रहे जल जीवन मिशन के लक्ष्य को छत्तीसगढ़ राज्य सरकार 2023 तक पूरा कर लेगी। मिशन के तहत छत्तीसगढ़ में इस साल 20 लाख घरों को नल कनेक्शन देने की योजना है, जिसके लिए केंद्र सरकार ने राज्य को 445.52 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने यह जानकारी देते हुए बताया कि देश के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जल जीवन मिशन की प्रगति की मध्यावधि समीक्षा की श्रृंखला में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से छत्तीसगढ़ ने राष्ट्रीय जल जीवन मिशन के समक्ष एक प्रस्तुति पेश की। समीक्षा के दौरान जल जीवन मिशन की प्रगति रिपोर्ट के अनुसार छत्तीसगढ़ राज्य में 45 लाख ग्रामीण घरों में से अब तक केवल 5.66 लाख घरों को नल से पानी का कनेक्शन प्रदान किया गया है। हालांकि छत्तीसगढ़ राज्य ने वर्ष 2023 तक 100 फीसदी यानि सभी घरों में नल से पानी के चालू कनेक्शन (एफएचटीसी) प्रदान करने की योजना बनाने का दावा किया है। मंत्रालय के अनुसार राज्य सरकार की इस वर्ष 20 लाख घरों में नल से पानी के कनेक्शन देने की योजना है। केंद्र सरकार पहले ही मौजूदा वित्तीय वर्ष 2020-21 में मिशन के कार्यान्वयन के लिए 445.52 करोड़ रुपये आवंटित कर चुकी है। मंत्रालय ने बताया कि इसके अलावा छत्तीसगढ़ राज्य को 15वें वित्त आयोग के अनुदान के तहत ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिये वर्ष 2020-21 में 1,454 करोड़ आवंटित किए गए हैं, जिनमें से 50 फीसदी हिस्से को पेयजल आपूर्ति और स्वच्छता गतिविधियों के लिये उपयोग करना अनिवार्य है।
राज्य के 1698 स्कूलों में नहीं पीने का पानी
छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन की प्रगति में मध्यावधि समीक्षा बैठक के दौरान इस बात का भी खुलासा हुआ कि राज्य के 1,698 स्कूलों में पीने के पानी की कोई सुविधा नहीं है। इस बात को खुद राज्य सरकार ने स्वीकार करते केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय को जानकारी दी कि 50,518 आंगनवाड़ी केंद्रों में से 31,031 में पेयजल की सुविधा है। हालांकि सुविधा के प्रकार, मात्रा, गुणवत्ता, आदि और कवरेज के लिए योजना के बारे में एक विस्तृत विश्लेषण करने की आवश्यकता है। इसके लिए जल शक्ति मंत्रालय द्वारा 2 अक्टूबर को पीएम नरेन्द्र मोदी के आव्हान पर शुरू किये गये 100 दिवसीय अभियान को तेजी से लागू करने को कहा है। इस 100 दिवसीय अभियान के अंतर्गत देश भर के सभी स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में पीने योग्य पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए राज्य को सक्रिय रूप से काम करने की सलाह दी गई है।
पानी की गुणवत्ता पर फोकस करने पर बल
मंत्रालय के अनुसार ग्राम पंचायत की उप-समिति के रूप में 50 फीसदी महिला सदस्यों के साथ ग्राम कार्य योजनाओं और संविधान तैयार करने और ग्राम जल और स्वच्छता समिति की तैयारी पर जोर दिया गया। ये सदस्य गावों में जल आपूर्ति ढांचे की योजना, डिज़ाइनिंग, कार्यान्वयन और संचालन और रखरखाव के लिए जिम्मेदार होंगे। सभी गांवों को ग्राम कार्य योजना तैयार करनी होगी, जिसमें अनिवार्य रूप से पेयजल स्रोतों, जल आपूर्ति, दूषित जल प्रबंधन और संचालन तथा रख रखाव शामिल होगा। छत्तीसगढ़ राज्य भूजल की कमी और रासायनिक प्रदूषण के मुद्दो से जूझ रहा है। इस लिये राज्य को अग्रिम पंक्ति के अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी के माध्यम से पानी की गुणवत्ता की निगरानी को प्राथमिकता तथा इसके बारे में जागरूकता पैदा करने की सलाह दी गई। इसी मकसद से 5 व्यक्तियों विशेष रूप से महिलाओं को पानी की गुणवत्ता का परीक्षण करने के लिए फील्ड टेस्ट किट का उपयोग करने के लिए हर गांव में प्रशिक्षित किया जा रहा है।
केंद्र का राज्य से आग्रह
केंद्र सरकार के प्रमुख कार्यक्रम जल जीवन मिशन (जेजेएम) के तहत जल शक्ति मंत्रालय सार्वभौमिक क्षेत्र के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा की गई प्रगति का आकलन करने के लिए मध्यावधि समीक्षा कर रहा है, जिसका मकसद वर्ष 2024 तक देश के ग्रामीण परिवार में हर व्यक्ति को नल से पानी का कनेक्शन प्रदान करना है। सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपने यहाँ ग्रामीण घरों के साथ-साथ संस्थागत तंत्र और जेजेएम के तहत सार्वभौमिक क्षेत्र सुनिश्चित करने के लिए नल से पानी का कनेक्शन उपलब्ध करने के प्रावधान के बारे में अपनी अपनी स्थिति रिपोर्ट पेश कर रहे हैं। इस दौरान मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ राज्य को विभिन्न कार्यक्रमों जैसे कि एमजीएनआरईजीएस, जल जीवन मिशन, एसबीएम (जी) के अंतर्गत ग्रामीण स्थानीय निकायों को 15 वें वित्त आयोग अनुदान, जिला स्तर पर खनिज विकास निधि, सीएएमपीए, स्थानीय क्षेत्र विकास निधि इत्यादि के लिए ग्राम स्तर पर अभिसरण करने का आग्रह किया है, जिसमें इस कोष के विवेक पूर्ण उपयोग सुनिश्चित करने हेतु इन सभी संसाधनों को अगले 5 वर्षों के लिए योजना तैयार करने की आवश्यकता पर बल दिया गया है।
01Nov-2020
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