रविवार, 31 मई 2020

श्रमिक विशेष ट्रेनों से अपने घर पहुंचे 44 लाख से ज्यादा प्रवासी




रेलवे ने सफर के दौरान मुफ्त 74 लाख भोजन व एक करोड़ पानी की बोतले बांटी
हरिभूमि ब्यूरो.नई दिल्ली।
भारतीय रेलवे ने 25 मई की अर्धरात्रि तक 3276 श्रमिक विशेष ट्रेनों के जरिए लॉकडाउन के कारण देश के विभिन्न राज्यों में फंसे 44 लाख से भी ज्यादा प्रवासी श्रमिकों एवं अन्य लोगों सफर कराते हुए उनकी घर वापसी कराई है। इस दौरान रेलवे ने अब तक इन ट्रेनों में यात्रियों को 74 लाख से ज्यादा भोजन और एक करोड़ से ज्यादा पीने के पानी की बोतले भी मुफ्त देने का दावा किया है।
रेल मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि एक मई से भारतीय रेलवे द्वारा शुरू की गई श्रमिक विशेष ट्रेनों के जरिए 44 लाख से ज्यादा प्रवासी श्रमिकों, तीर्थयात्रियों, पर्यटकों, छात्रों और अन्य लोगों को उनके गंतव्य तक पहुंचाया है। इसके लिए 25/26 मई की अर्धरात्रि तक रेलवे ने 3276 श्रमिक विशेष ट्रेनों का परिचालन किया है। रेलवे ने कहा कि 25 मई 223 श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में 2.8 लाख यात्रियों को विभिन्न राज्यों से उनके गृहराज्य में गंतव्य तक पहुंचाया है। जबकि 24 मई रविवार को रेलवे रिकार्ड 3.10 लाख प्रवासियों की घर वापसी कराई थी। रेलवे ने यह भी जानकारी दी है कि इन ट्रेनों में सफर करने वाले प्रवासी यात्रियों को आईआरसीटीसी ने 4 लाख से अधिक मुफ्त भोजन और एक करोड़ से अधिक पानी की बोतलें वितरित कीं हैं। रेलवे ने इस स्पष्टीकरण को फिर दोहराया है कि भारतीय रेलवे इन श्रमिक ट्रेनों पर खर्च हो रहे खर्च का 85 फीसदी खर्च खुद वहन कर रहा है जबकि 15 फीसदी खर्च राज्यों को करना होगा।
उत्तर प्रदेश पहुंची सर्वाधिक ट्रेनें
इन 3276 ट्रेनों में अब तक गुजरात से 897 ट्रेनें, महाराष्ट्र से 590 ट्रेनें, पंजाब से 358 ट्रेनें, उत्तर प्रदेश से 232 ट्रेनें तथा दिल्ली 201 ट्रेनों के अलावा अन्य राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों से चलाई गई है। अब तक चलाई गई ट्रेनों में से सबसे ज्यादा 1428 श्रमिक विशेष ट्रेनें उत्तर प्रदेश पहुंची है, जबकि बिहार में 1178 ट्रेनें, झारखंड में 164 ट्रेनें, मध्य प्रदेश में 120 ट्रेनें तथा ओडिशा में 128 ट्रेनें अपना सफर तय कर चुकी हैं। रेलवे के अनुसार श्रमिक विशेष के अलावा नई दिल्ली को जोड़ने वाले पंद्रह शहरों के लिए 15 जोड़ी विशेष राजधानी एक्सप्रेस ट्रेनें भी 12 मई से पटरियों पर दौड़ रही हैं। जबकि एक जून से 200 और टाइम टेबल ट्रेनें शुरू करने की योजना के तहत टिकटों की बुकिंग की जा रही है।
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महाराष्ट्र का मामला सुलझा, तो चलेंगी 145 ट्रेनें
रेल मंत्रालय के अनुसार मंगलवार 26 मई को महाराष्ट्र से 145 ट्रेनें चलाई जा रही है या चलेगीं। मंत्रालय के अनुसार मध्य रेलवे इन ट्रेनों के परिचालन के लिए सावधानीपूर्वक योजना और निरंतर प्रयास के बाद अपने संसाधनों को बहुत ही कम समय में जुटा हुआ है, ताकि महाराष्ट्र से अधिसूचित इन 145 श्रमिक ट्रेनें चलाई जा सकें। गौरललब है क फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिखकर मीडिया और मनोरंजन उद्योग में काम फिर से शुरू करने के लिए दिशा-निर्देशों का प्रस्ताव दिया है। मध्य रेलवे के हवाले से रेल मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि 25 मई के लिए रेलवे ने महाराष्ट्र से प्रवासियों के लिए 125 ट्रेनों की पेशकश की थी, लेकिन राज्य सरकार 25 मई को सुबह दो बजे तक केवल 41ट्रेनों की जानकारी दे सकी थी, इनमें से केवल 39 ट्रेनें ही चल सकीं, क्योंकि स्थानीय अधिकारियों द्वारा यात्रियों की संख्या ही नहीं जुटाई जा सकी थी।
27May-2020

रेलवे ने अब तक कराई 40 लाख से ज्यादा प्रवासियों की घर वापसी

पिछले 25 दिनों में 3060 श्रमिक विशेष ट्रेनों में कराया सफर
हरिभूमि ब्यूरो.नई दिल्ली।
भारतीय रेलवे ने देश में लॉकडाउन के कारण जगह-जगह फंसे प्रवासी श्रमिकों, छात्रों, पर्यटकों एवं अन्य लोगों के लिए पिछले दिन में 3060 श्रमिक विशेष ट्रेनों को चलाया है, जिनमें 40 लाख से भी ज्यादा प्रवासियों ने सफर करते हुए अपने घर वापसी की है।
रेल मंत्रालय ने सोमवार को यह जानकारी देते हुए बतया कि एक मई से अब तक भारतीय रेलवे ने इन विशेष रेलगाड़ियों के जरिए देश में विभिन्न स्थानों पर फंसे प्रवासी श्रमिकों, तीर्थयात्रियों, पर्यटकों, छात्रों और अन्य लोगों की आवाजाही के लिए गृह मंत्रालय के आदेश के बाद 3060 श्रमिक विशेष ट्रेनों का संचालन किया है। इन विशेष ट्रेनों में अब तक 40 लाख से भी ज्यादा प्रवासी अपने गंतव्य तक पहुंच चुके हैं। रेलवे के अनुसार सोमवार सुबह दस बजे तक चलाई गई 3060 श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में से 2608 ट्रेनें अपनी यात्राएं समाप्त कर चुकी थी, जबकि 453 ट्रेनें रेल पटरियों पर दौड रही थी। रेलवे के अनुसार 24 मई रविवार को रेलवे इन ट्रेनों से 3.10 लाख प्रवासियों की घर वापसी कराई गई है। इन 3060 ट्रेनों में अब तक गुजरात से 853 ट्रेनें, महाराष्ट्र से 550 ट्रेनें, पंजाब से 333 ट्रेनें, उत्तर प्रदेश से 221 ट्रेनें तथा दिल्ली 181 ट्रेनों के अलावा अन्य राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों से चलाई गई है। अब तक चलाई गई ट्रेनों में से सबसे ज्यादा 1245 श्रमिक विशेष ट्रेनें उत्तर प्रदेश पहुंची है, जबकि बिहार में 846 ट्रेनें, झारखंड में 123 ट्रेनें, मध्य प्रदेश में 112 ट्रेनें तथा ओडिशा में 73 ट्रेनें अपना सफर तय कर चुकी हैं। दो तिहाई से भी ज्यादा अकेले ट्रेनों ने उत्तर प्रदेश व बिहार का सफर किया है। रेलवे के अनुसार श्रमिक विशेष के अलावा नई दिल्ली को जोड़ने वाले पंद्रह शहरों के लिए 15 जोड़ी विशेष राजधानी एक्सप्रेस ट्रेनें भी 12 मई से पटरियों पर दौड़ रही हैं। जबकि एक जून से 200 और टाइम टेबल ट्रेनें शुरू करने की योजना के तहत टिकटों की बुकिंग की जा रही है।
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रेलवे मुख्यालय में कोरोना संक्रमण का पांचवा मामला
रेल भवन में सोमवार को एक ओर कर्मचारी कोरोना संक्रमित मिला
हरिभूमि ब्यूरो.नई दिल्ली।
भारतीय रेल के मुख्यालय रेल भवन में एक और कर्मचारी कोरोना से संक्रमित पाया गया है, जिसके साथ अब तक रेल भवन में पांच लोग कोरोना संक्रमण का शिकार हो चुके हैं।
यहां दिल्ली स्थित रेलवे मुख्यालय रेल भवन में सोमवार को एक चतुर्थ श्रेणी के कोरोना संक्रमित पाए जाने के बाद रेलवे में खलबली मची हुई है। रेल भवन में पिछले एक ही सप्ताह में चार कोरोना मामले सामने आ चुके थे ,जिसके बाद सोमवार को इस कर्मचारी के कोरोना पॉजेटिव पाए जाने से अब तक रेल भवन में इस महामारी के पांच मामले आ चुक हैं। बताया गया कि रेल भवने में कार्यरत एक वरिष्ठ अधिकारी रविवार को भी चौथे मामले के रूप में कोरोना संक्रमित पाया गया था, जिसके अगले ही दिन यानि आज सोमवार को लगाता पांचवा मामला सामने आया। रेलवे के सूत्रों के अनुसार रेलवे भवन में चौथी मंजिल पर आरपीएफ के कार्यालय में दूसरा कोरोना संक्रमित मामला आने के बाद से ही 14 अधिकारियों व कर्मचारियों को पृथक वास में भेज दिया गया था, उसमें पिछले सप्ताह 22 मई को रेल भवन की चौथी मंजिल पर कोरोना संक्रमित पाई गई आरपीएफ की एक महिला अधिकारी भी शामिल रही। इन्ही पृथक वास किये गये अधिकारियों में चौथा मामला रविवार को सामने आया था। अब सोमवार को चतुर्थ श्रेणी के रेलवे कर्मचारी के कोरोना संक्रमित पाए जाने के बाद रेल भवन में ऐसे पांच मामले हो गये हैं, जो कोरोना प्रकोप के शिकार हुए हैं। रेलवे के सूत्रों के अनुसार यह चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पिछले सप्ताह 19 मई तक कार्यालय आया था, जिसके कोरोना वायरस से संक्रमित पाए जाने के बाद उनके संपर्क आए नौ लोगों को घर में पृथक-वास के लिए भेज दिया गया है। रेलवे के एक अधिकारी के अनुसार इस चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का काम फाइलों को एक अधिकारी से दूसरे अधिकारी के पास ले जाने का होता है। इसलिए यह कर्मचारी किस किस अधिकारी और कर्मचारियों के सपंर्क में आया है उसे देखते हुए ऐसे लोगों को पृथक वास में भेजा जा रहा है। रेलवे के अनुसार अभी तक जांच रिपोर्ट में ऐसे पृथक वास के तहत अपने घरों में रह रहे पांच लोगों की रिपोर्ट पॉजेटिव आ चुकी है।
 26May-2020

सरकार ने फिर बढ़ाई वाहन संबन्धी दस्तावेजों की वैधता अवधि



अब 31 जुलाई तक वैध माने जाएंगे वाहन दस्तावेज व ड्राईविंग लाईसेंस
हरिभूमि ब्यूरो. नई दिल्ली।
कोरोना वायरस के कारण देशभर में लागू लॉकडाउन को देखते हुए केंद्र सरकार ने वाहनों से संबन्धित ऐसे दस्तावेजों की वैधता अवधि को अब            30 जून से बढ़ाकर 31 जुलाई तक कर दिया गया है, जिनकी वैधता एक फरवरी या उसके बाद खत्म होने जा रही है। मसलन यानी सरकार के इस निर्णय के बाद अब एक फरवरी से नवीकरण में 31 जुलाई तक देरी के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क या लेट फीस नहीं ली जाएगी।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने यह जानकारी देते हुए बातया कि केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने देश में कोरोना वायरस के संकट में पूरा देश लॉकडाउन हाने के कारण वाहन मालिकों को बड़ी राहत देने का फैसला किया है। मंत्रालय ने इस संबन्ध में जारी परिपत्र में कहा है कि ऐसे ड्राइविंग लाइसेंस, फिटनेस, परमिट, पंजीकरण और अन्य मोटर वाहन दस्तावेज, जिनकी वैधता अवधि एक फरवरी से समाप्त हो चुकी है या होने वाली है की वैधता को 31 जुलाई तक विस्तार दिया गया है, इससे पहले लॉकडाउन के कारण इस वैधता की तिथि 30 जून तक बढ़ाई गई थी। इसके लिए केंद्रीय सडक परिवहन मंत्रालय ने इस संबन्ध में सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को भेजे गए एक परामर्श पत्र में स्पष्ट कहा है कि ऐसे दस्तावेजों को 31जुलाई  तक वैध माना जाना चाहिए। मंत्रालय ने देश में लॉकडाउन और सरकारी परिवहन कार्यालयों के बंद रहने के कारण लोगों को विभिन्न वाहन दस्तावेजों की वैधता के नवीनीकरण में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए लोगों की सुविधा के लिए यह निर्णय लिया गया है। इन दस्तावेजों में फिटनेस, परमिट (सभी प्रकार के), ड्राइविंग लाइसेंस, पंजीकरण या मोटर वाहन नियम के तहत कई अन्य दस्तावेज शामिल हैं। मंत्रालय ने सभी राज्यों से परामर्श को लागू करने का अनुरोध किया है, ताकि आवश्यक सेवाओं से जुड़े लोगों, परिवहन कंपनियों और संगठनों को परेशानी न हो और उन्हें कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।
दूसरी बार जारी किया आदेश
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय के अनुसार इससे पहले भी केंद्रीय सड़क मंत्रालय देश में लॉकडाउन के कारण 30 मार्च 2020 को मोटर वाहन अधिनियम-1988 और केंद्रीय मोटर वाहन अधिनियम-1989 से संबंधित दस्तावेजों की वैधता के विस्तार के संबंध में एक परिपत्र जारी करके इस प्रकार के दस्तावेजों की वैधता अवधि 30 जून की थी, लेकिन लगातार देश में कोरोना के प्रकोप बढ़ने से लॉकडाउन को भी विस्तार दिया जा रहा है। इसी के मद्देनजर मंत्रालय ने वाहन मालिकों और ऑटो सेक्टर की परेशानी को देखते हुए फिर से एक माह का विस्तार करने का फैसला किया है।
यदि इन दस्तावेजों के नवीकरण व अन्य प्रमाण पत्र आदि के लिए किसी ने एक फरवरी या उसके बाद शुल्क जमा भी कर दिया है और लॉकडाउन के कारण उसकी प्रक्रिया पूरी न हो सकी हो तो ऐसे जमा कराये गये शुल्क को भी वैध माना जाएगा। क्योंकि कोरोना संकट में लॉकडाउन के कारण आरटीओ कार्यालयों में काम प्रभावित रहा है और वाहन मालिकों को भी विभिन्न प्रकार के वाहन संबन्धी शुल्क जमा करने में विलंब हुआ है, तो 31 जुलाई तक किसी प्रकार का विलंब शुल्क लागू नहीं किया जाएगा।
26May-2020