गुरुवार, 31 अक्टूबर 2019

राग दरबार: ईवीएम पर बोलती बंद

विपक्षी दलों की चुप्पी
देश में ‘लोग अपने दुख से दुखी नहीं, बल्कि दूसरो के सुख से दुखी हैं’ जैसी कहावत देश की सियासत में खूब नजर आ रही है। मसलन हाल ही में जिस दिन या उससे पहले लोकसभा और विभिन्न राज्यों में हुए चुनाव के दौरान भाजपा की बढ़ती लोकप्रियता को लेकर चुनावी नतीजों से पहले ही विपक्षी राजनीतिक दल ईवीएम में गड़बड़ी को लेकर सवाल खड़े करने लगते हैं, लेकिन चुनावी नतीजों के बाद जब ऐसे विपक्षी दलों को अच्छी  खासी सीटें मिल जाती हैं तो वे ईवीएम के बारे में कहीं भी उंगली नहीं उठाते। यही स्थिति महाराष्ट्र और हरियाणा के चुनाव के दौरान हुआ और भाजपा के एक प्रत्याशी के ईवीएम के बयान को लेकर ऐसी सियासत गरमाई कि अन्य दलों के नेताओं के साथ कांग्रेस युवराज ने भी उस प्रत्याशी को ईमानदार नेता का खिताब दे दिया। इसके विपरीत जब चुनावी नतीजे सामने आए और कांग्रेस की सीटों में इजाफा हुआ तो कांग्रेस ही नहीं अन्य विपक्षी दलों की ईवीएम पर सवाल उठाने के बजाए चुप्पी साध ली है। मसलन चुनावी नतीजों के बाद अब कोई भी पार्टी इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशीन पर सवाल नहीं उठाने को तैयार नहीं है। सियासी गलियारों में ईवीएम पर सवाल उठाने वालों को लेकर यही चर्चाएं हो रही है कि जब विपक्षी दल चुनाव में पस्त होते हैं तो ईवीएम का रोना रोकर झेप मिटाते हैं और अच्छी खासी जीत हासिल करने पर उन्हीं ईवीएम मशीनों पर उनका विश्वास प्रगाढ़ होता जाता है।
शिवपाल की घर वापसी..
उत्तर प्रदेश की सियासत में समाजवादी पार्टी ने लोकसभा चुनाव में बसपा से गठबंधन करके अपना राजनीतिक नुकसान को शायद समझ लिया है।
राजनीति में शायद यह लाख टके का सवाल बन सकता है? कि क्या सपा के वरिष्ठतम नेता मुलायम सिंह यादव के भाई शिवपाल यादव समाजवादी पार्टी में वापसी करने जा रहे हैं? इन अटकलों को लेकर पिछले करीब एक महा से ऐसी चर्चाएं चल रही है, जिसमें खुद मुलायम सिंह परिवार और पार्टी की कलह को जीरो टारलेंट के साथ पहल करने में आगे बढ़ रहे हैं, ताकि 2022 के यूपी चुनाव में एकजुट होकर प्रदेश में अपने खोए हुए जनाधार को हासिल कर सत्ता हासिल की जा सके। दरअसल सपा के अध्यक्ष बने मुलायम के सुपुत्र अखिलेश यादव को भी पिछले सियासी प्रयोग करने से सबक मिला है, जिसमें लोकसभा चुनाव में बसपा से गठबंधन करके चुनाव मैदान में कूदना सपा के लिए बेहद महंगा साबित हुआ और परिवार की सीटें भी नहीं बचा सके। यही कारण है कि अब जहां मुलायम परिवार को सपा के साथ जोड़ने की मुहिम में जुटें हैं तो शिवपाल भी उनकी इस भावना को नजदीकी से समझ रहे हैं। वहीं इन चर्चाओं ने भी जोर पकड़ा है कि शिवपाल यादव समाजवादी पार्टी में वापस आ सकते हैं, जिसके लिए शिवपाल की मुलायम सिंह और पार्टी के दूसरे बड़े नेताओं की पहल पर इस बारे में बात हुई है और अखिलेश यादव भी समझ रहे हैं कि यदि वे वापस आते हैं तो सपा की ताकत में इजाफा होगा और अन्य दलों की तरफ ताकने की जरूरत नहीं पड़ेगी?
27Oct-20149

करोड़पतियों से सरोबार होगी हरियाणा विधानसभा!


हरियाणा: चुनाव जीतकर आए दागी विधायकों में इजाफा
उच्च शिक्षित विधायकों को भी सदन में रहेगा वर्चस्व
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
चुनावी नतीजों ने इस बार भले ही हरियाणा की 90 सदस्यीय विधानसभा में किसी दल को बहुमत के आंकड़े को न छूने दिया हो, लेकिन हरियाणा की विधानसभा में करोड़पतियों और बुजुर्गो का वर्चस्व बढ़ा है। हालांकि पिछली विधानसभा के मुकाबले इस बार दागी विधायकों की संख्या में इजाफा हुआ है।
हरियाणा विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद 90 सदस्यीय विधानसभा की स्थिति स्पष्ट हो गई है, जिसमें किसी भी दल को बहुमत हासिल नहीं हो सका, हालांकि 40 सीटे जीतने के साथ भाजपा सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है। हरियाणा विधानसभा चुनाव में निर्वाचित 90 विधायकों में पिछले डेढ़ दशक में करोड़पति विधायकों का वर्चस्व लगातार बढ़ता नजर आ रहा है। इस बार नवनिर्वाचित विधायकों में करोड़पति विधायकों की संख्या 84 यानि 93 फीसदी है, जो पिछली विधानसभा में 75 यानि 83 फीसदी थी। जबकि इस बार चुनावी जंग में सियासी दलों ने 481 करोड़पतियों पर अपना दांव खेला था। विधानसभा में दाखिल हुए करोड़पति विधायकों में भाजपा के 40 विधायकों में से 37, कांग्रेस के 31 में 29 और जननायक जनता पार्टी के 10, इनेलो व हरियाणा लोकहित पार्टी का एक-एक के अलावा निर्दलीय सात में से छह विधायक इस फेहरिस्त में शामिल हैं। हरियाणा विधानसभा में नविनिर्वाचित विधायकों की औसत संपत्ति 18.29 करोड़ रुपये आंकी गई है, जो पिछली विधानसभा में 12.97 करोड़ रुपये थी। चुनावी सुधार के लिए कार्य करने वाली संस्था एडीआर की पिछले दिनों जारी विश्लेषण रिपोर्ट के अनुसार इस बार चुनावी जंग में 481 करोड़पतियों ने अपनी किस्मत आजमाई थी। करोड़पतियों में पांच करोड़ से ज्यादा की संपत्ति वाले विधायकों की संख्या 50 है, जबकि दो से पांच करोड़ तक की संपत्ति वाले 25 और 50 लाख से दो करोड़ तक की संपत्ति वाले विधायकों की  संख्या 15 आंकी गई है।
सबसे अमीर विधायक
हरियाणा विधानसभा में जीतने वाले करोड़पति विधायकों में रोहतक जिले की महम सीट से जीत हासिल करने वाले निर्दलीय विधायक बलराज कुंडु 141.19 करोड़ रुपये की संपत्ति के साथ सबसे अमीर विधायकों की फेहरिस्त में शुमार हुए हैं, जबकि हिसार की आदमपुर सीट से जीते कांग्रेस के कुलदीप बिश्नोई 105.54 करोड़ की संपत्ति के साथ दूसरे और सिरसा से निर्वाचित एचएलपी के गोपाल कांडा 95.44 करोड़ की संपत्ति के साथ तीसरे पायदान पर हैं। खासबात ये भी है कि गोपाल कांडा ने अपने ऊपर सर्वाधिक 78.33 करोड़ रुपये की देनदारी घोषित की है।
पुन: निर्वाचित 29 विधायकों की संपत्ति
हरियाणा विधानसभा में पिछली विधानसभा में रहे 29 विधायक इस बार फिर निर्वाचित होकर लगातार विधानसभा में दाखिल हुए है, जिनमें से 22 विधायकों की संपत्ति में पिछले पांच साल में 4 फीसदी से 90 फीसदी तक का इजाफा हुआ है, तो छह विधायकों की संपत्ति 10 से 27 फीसदी तक घटी है। इनमें सबसे ज्यादा 31.53 करोड़ रुपये की संपत्ति में बाढ़डा से निर्वाचित नैना सिंह ने इजाफा किया है।
तीन दागियों में इजाफा
हरियाणा विधानसभा में इस बार नवनिर्वाचत 12 ऐसे विधायक सामने आए हैं, जिनके खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं, जिनमें सबसे ज्यादा कांग्रेस के चार, भाजपा के दो, जजपा, इनेलो व एचएलपी का एक-एक विधायक शामिल है। इनके अलावा तीन निर्दलीय विधायकों पर भी अपराधिक दाग है। जबकि इस बार चुनावी जंग में 117 अपराधिक पृष्ठभूमि वाले प्रत्याशियों ने अपनी किस्मत आजमाई थी। पिछली विधानसभा में ऐसे दागी विधायकों की संख्या मात्र नौ थी। इस बार विधानसभा में दाखिल हुए सात दागी विधायकों के खिलाफ हत्यासंगीन गंभीर मामले लंबित है। हालांकि दागियों की यह संख्या वर्ष 2009 के चुनाव में जीते 15 से कम है।
शिक्षित विधायकों का वर्चस्व
विधानसभा में दाखिल हुए 90 विधायकों में से 62 विधायक उच्च शिक्षा धारक हैं, जिनमें 27 स्नातक, 19 प्रोफेशनल स्नातक, 14 स्नातकोत्तर और दो डॉक्टर शामिल हैं। इनके अलावा 14 इंटरमिडिएट, 10 हाईस्कूल पास, 2 आठवीं पास और एक पांचवी पास विधायक निर्वाचित हुए हैं। जब एक विधायक ऐसा है, जो अनपढ़ है।
दस फीसदी महिला निर्वाचित
हरियाणा विधानसभा में इस बार महिला विधायकों की संख्या में कमी आई है यानि 90 विधायकों में केवल नौ महिलाओं ने ही जीत हासिल की है। जबकि वर्ष 2014 के चुनाव में 13 महिलाएं निर्वाचित होकर विधानसभा में दाखिल हुई थी। इस बार चुनाव में 104 महिलाओं ने अपनी किस्मत आजमाई थी। जबकि विधानसभा में 27-27 युवा एवं बुजुर्ग विधायक दाखिल हुए है, जबकि 36 विधायकों की संख्या 50 से 60 आयुवर्ग के हैं। इसमें 31 से 50 आयु वर्ग के 27 और 60 से 80 आयु वर्ग के विधायक विधानसभा में अपने अनुभव को साझा करेंगे।
26Oct-2019


रेलवे ने त्यौहारों पर चलाई 200 जोड़ी विशेष ट्रेनें


नियमित ट्रेनों में भी कोच बढ़ाकर शुरू की ढ़ाई हजार विशेष सेवाएं
हरिभूमि ब्यूरो. नई दिल्ली।
भारतीय रेलवे ने दीवाली, छठ और भैयादूज, दुर्गा पूजा जैसे त्यौहारों के दौरान बढ़ने वाली यात्रियों की संख्या के मद्देनजर उनकी सुविधा के लिए विशेष प्रबंध किये हैं, जिसके तहत रेलवे ने देशभर में विभिन्न रेलमार्गो पर 200 जोड़ी त्यौहार विशेष रेलगाड़ियों को चलाया है, जिसमें एक्सप्रेस, मेल और पैसजेंर ट्रेने भी शामिल हैं। इसके साथ ही नियमित चलने वाली सभी श्रेणी की ट्रेनों में अतिरिक्त कोच लगाकर कम से कम 2500 अतिरिक्त सेवाएं दी गई हैं।
रेल मंत्रालय ने यह दावा करते हुए बताया कि भारतीय रेलवे ने त्‍यौहार के मौसम में यात्रियों के साथ खुशियां साझा करते हुए त्‍यौहार मनाने के लिए परिवार के साथ अपने गृह नगर जा रहे यात्रियों के लिए विशेष प्रबंध किए हैं। रेल यात्रियों की सुविधा और त्‍यौहार के मौसम के दौरान यात्रियों की भीड़ कम करने के लिए भारतीय रेलवे इस वर्ष दुर्गा पूजा से क्रिसमस तक 200 जोड़े विशेष ट्रेनें चला रहा है। वहीं रेलवे ने नियमित ट्रेनों में कोचों की संख्‍या बढ़ाई है ताकि त्‍यौहार के दौरान होने वाली भीड़ के लिए बर्थ उपलब्‍ध कराई जा सके। भारतीय रेलवे देश भर में 200 जोड़े विशेष ट्रेनों में 2500 अतिरिक्‍त सेवाएं चला रहा है। देश के प्रमुख स्‍थानों जैसे दिल्‍ली-पटना, दिल्‍ली-कोलकाता, दिल्‍ली-मुम्‍बई, मुम्‍बई-लखनऊ, चंडीगढ़-गोरखपुर, दिल्‍ली-छपरा, हावड़ा-कटिहार, हरिद्वार-जबलपुर आदि को जोड़ने के लिए रेलवे ने विशेष ट्रेनों की योजना बनाई है। अनार‍क्षित डिब्‍बों में यात्रियों का प्रवेश अनुशासित तरीके से कराने के लिए आरपीएफ कर्मचारियों की देखरेख में टर्मिनस स्‍टेशनों पर पंक्तियां बनाकर भीड़ को नियंत्रित किया जाएगा।
यात्रियों की सुरक्षा के विशेष इंतजाम
रेलवे के अनुसार यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रमुख स्‍टेशनों में आरपीएफ के अतिरिक्‍त जवान तैनात किए गए हैं। सुरक्षाक‍र्मियों के साथ इंजीनियरिंग, सिगनल और दूरसंचार विभागों के अतिरिक्‍त कर्मचारियों को भीड़भाड़ वाले रेलवे सेक्‍शनों में महत्‍वपूर्ण रेलवे क्रॉसिंग पर तैनात किया गया है। रेल और सड़क का इस्‍तेमाल करने वालों की सुविधा के लिए स्‍टेशनों और प्रमुख रेलवे क्रॉसिंग पर प्रकाश के पर्याप्‍त प्रबंध किए गए हैं। ट्रेनों को सुचारू रूप से चलाने के लिए प्रमुख रेलवे स्‍टेशनों पर अधिकारियों को तैनात किया गया है। ट्रेन सेवा में किसी प्रकार की बाधा से निपटने के लिए प्राथमिकता के आधार पर विभिन्‍न सेक्‍शनों में कर्मचारियों की तैनाती की गई है।
स्टेशनों पर यात्रियों की सुविधाएं बढ़ाई
रेलवे के अनुसार रेलवे स्टेशनों पर प्‍लेटफॉर्म संख्‍या के साथ ट्रेनों के आगमन/रवाना होने के समय की घोषणा कराने के भी उपाय किए गए हैं। महत्‍वपूर्ण स्‍टेशनों पर “क्‍या मैं आपकी मदद कर सकता/सकती हूं” बूथ भी काम करेंगे, जहां आरपीएफ जवान और टीटीई यात्रियों की उपयुक्‍त सहायता और मार्गदर्शन करेंगे। जरूरत पड़ने पर प्रमुख स्‍टेशनों में चिकित्‍सकों के दल उपलब्‍ध होंगे। अर्द्धचिकित्‍सकों के साथ एम्‍बुलेंस भी उपलब्‍ध रहेगी। मेल/एक्‍सप्रेस/यात्री ट्रेनों को निर्धारित समय पर रवाना करने के उपाय किए गए हैं। किसी तरह के भ्रष्‍टाचार को रोकने के लिए रेलवे ने सीट बेचने, ओवर चार्जिंग और दलाली आदि पर सुरक्षा और सतर्कता विभाग के अधिकारियों द्वारा कड़ी निगरानी रखी जा रही है। जोनल मुख्‍यालयों ने प्रतीक्षा हॉलों, रिटायरिंग रूम, यात्रियों की सुख-सुविधा वाले क्षेत्रों और स्‍टेशनों में सफाई बनाए रखने के निर्देश दिए हैं।
26Oct-2019

अब मुखर्जी के नाम से जानी जाएगी देश की सबसे लंबी सड़क सुरंग



जम्मू-कश्मीर में चेनानी-नाशरी सुरंग का गडकरी ने किया नामकरण
हरिभूमि ब्यूरो. नई दिल्ली।
केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर में करीब ढ़ाई साल पहले राष्ट्र को समर्पित की गई देश की सबसे लंबी सड़क सुरंग चेनानी-नाशरी अब श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम से जानी जाएगी। इस सुरंग का नामकरण केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी व पीएमओ में राज्यमंत्री डा. जितेन्द्र सिंह ने किया है। वहीं जम्मू-कश्मीर से धारा 370 खत्म करने के बाद जम्मू-कश्मीर के विकास को गति देने के लिए केंद्र सरकार ने श्रीमाता वैष्णोदवी के दर्शन के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए दिल्ली से कटरा तक महामार्ग के निर्माण की योजना शुरू करने का भी ऐलान किया है।
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और पीएमओ में राज्यमंत्री डा. जितेंद्र सिंह ने गुरुवार को यहां परिवहन भवन में आयोजित एक समारोह में जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर बनाई गई देश की 9.28 किमी लंबी यानि संबसे लंबी चेनानी-नाशरी सड़क सुरंग का नामकरण महापुरुष डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम से कर दिया है। इसके लिए उधमपुर को जम्मू में रामबन से जोड़ने वाली इस सुरंग पर लगाई गई नामकरण पट्टिका के लिए चेनानी-नाशरी में आयोजित समारोह में वीडियो कांफ्रेंस के जरिए बटन दबाकर अनावरण किया और चेनानी-नाशरी सुरंग को डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को समर्पित किया। इसी वीडियो कांफ्रेस के जरिए गडकरी और जितेन्द्र सिंह ने सुरंग के मुहाने पर आयोजित समारोह में राज्य के अधिकारियों और लोगों को संबोधित भी किया। इस सुरंग का निर्माण 2600 करोड़ रुपये की लागत से किया गया था, जिसका आवागमन के लिए गत 2 अप्रैल 2017 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोकार्पण किया था। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री ने दोहराया कि इस सुरंग के बनने के बाद जम्मू से कश्मीर जाने वाले हाइवे पर 31 किमी दूरी कम होने के साथ दो घंटे के सफर की बचत भी हो रही है, जिसके कारण ईंधन की लागत में पर्याप्त बचत भी लोगों को हो रही है।
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जल्द शुरु होगी दिल्ली-कटरा के बीच द्रुतगति महामार्ग परियोजना
केंद्रीय मंत्री गडकरी ने इस मौके पर ऐलान किया कि उनके मंत्रालय ने दिल्ली से कटरा तक के सफर को आसान बनाने के लिए नई सड़क परियोजना तैयार की है, जिसके तहत चार लेने का द्रुतगति वाले महामार्ग का निर्माण किया जाएगा, जो हरियाणा और पंजाब से होकर गुजरेगा। इस परियोजना के पूरा होने के बाद श्रीमाता वैष्णोदेवी के दर्शन करने के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं का दिल्ली से कटरा तक सफर महज छह घंटे में तय हो सकेगा। उन्होंने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार ने पिछले पांच साल में जम्मू-कश्मीर में सात हजार करोड़ रुपये की सड़क परियोजनाएं शुरू की है। राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर चेनानी-नाशरी सुरंग के अलावा कई और सुरंग बनाने की परियोजनाओं का काम भी अंतिम चरणों में है, जिससे जम्मू से श्रीनगर तक का सफर और भी आसान हो जाएगा। उन्होंने समारोह में कहा कि जम्मू और श्रीनगर दोनों के आसपास रिंग रोड और अन्य सड़कों का निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने यह भी का कि लद्धाख तक के सफर के लिए लंबित ज़ोजिला टनल का निर्माण भी जल्द पूरा कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार धारा 370 खत्म होने के बाद केंद्रीय परियोजनाओं को लागू करके राज्य में मध्यम और लघु उद्योगों जैसे हथकरघा, हस्तशिल्प, शहद आधारित उद्योग आदि के माध्यम से रोजगार सृजन को बढ़ाने के लिए एक नीति पर काम कर रही है।
कौन थे श्यामा प्रसाद मुखर्जी
केंद्रीय मंत्री ने समारोह में कहा कि यह देश के लिए एक अनूठा क्षण है। कि 66 साल पहले तत्कालीन लोकसभा सदस्य डा. मुखर्जी को लखनपुर से अवैध रूप से गिरफ्तार किया गया था, और चेनानी-नाशरी के माध्यम से श्रीनगर ले जाया गया था। इसी सम्मान की दृष्टि से डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर इस सुरंग का नामकरण करना उनके लिए एक श्रद्धांजलि होगी और आने वाली पीढ़ियां इस दिन को भविष्य में याद रखेंगी। उन्होंने कहा कि डा. मुखर्जी जम्मू-कश्मीर में धारा-370 के खिलाफ थे, और देश में एक विधान, एक निशान, एक प्रधान की प्रतिज्ञा को परिभाषित किया था, जिसे मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर में धारा-370 खत्म करके उनके इस सपने का साकार किया है।
25Oct-2019



करतारपुर साहिब कॉरिडोर पर भारत-पाक के बीच हुआ समझौता


वैध पास्पोर्ट के साथ बिना वीजा पूरे साल हो सकेगी तीर्थयात्रा
हरिभूमि ब्यूरो. नई दिल्ली।
आखिरकार आगामी नौ नवंबर को शुरू हो रहे करतारपुर साहिब कॉरिडोर के संचालन के लिए भारत और पाकिसतान के बीच समझौते पर हस्ताक्षर हो गये हैं। भारत ने तीर्थयात्रियों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए समझौते पर हस्ताक्षर करने का फैसला किया है। इस समझौते के भारतीय मूल के सभी धर्मों और श्रद्धालुओं को वैध पासपोर्ट के साथ बिना किसी वीजा के तीर्थयात्रा करने का मौका मिल सकेगा।
केंद्रीय गृहमंत्रालय ने डेरा बाबा नानक से करतारपुर साहिब कॉरिडोर के संचालन के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच गुरुवार को किये गये समझौते की जानकारी देते हुए बताया कि भारत ने जीरो प्वाइंट इंटरनेशनल बाउंड्री डेरा बाबा नानक में करतारपुर साहिब कॉरिडोर के संचालन के तौर-तरीकों पर पाकिस्तान के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। मंत्रालय के अनुसार केंद्रीय मंत्रिमंडल ने
22 नवंबर 2018 को श्री गुरु नानक देवजी की 550 वीं जयंती के ऐतिहासिक अवसर पर पूरे देश और दुनिया भर में भव्य तरीके से मनाने का एक प्रस्ताव पारित किया था, जिसके मद्देनजर भारत ने भारतीय तीर्थयात्रियों की धार्मिक भावनाओं के सम्मान हेतु इस समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए कदम बढ़ाया है। इस समझौते पर हस्ताक्षर के दौरान विदेश मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय के अलावा पंजाब सरकार के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। इस ऐतिहासिक फैसले में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अंतर्राष्ट्रीय सीमा तक डेरा बाबा नानक से करतारपुर साहिब कॉरिडोर के निर्माण और विकास को मंजूरी दी थी, जिसके कारण भारत ने करतारपुर कॉरिडोर का यात्रियों की सुविधा हेतु निर्माण को तेजी के साथ पूरा किया, ताकि भारत के तीर्थयात्रियों को गुरुद्वारा दरबार साहिब करतारपुर की यात्रा करने में सुविधा हो और यह यात्रा वर्ष भर सुचारू और सुगम तरीके से चल सके। इस समझौते पर हस्ताक्षर के साथ करतारपुर साहिब गलियारे के संचालन के लिए एक औपचारिक रूपरेखा तैयार की गई है।
समझौते के प्रमुख बिंदु
गृह मंत्रालय के अनुसार इस समझौते के तहत भारतीय मूल के सभी धर्मों और व्यक्तियों के भारतीय तीर्थयात्री गलियारे का उपयोग करते हुए वीजामुक्त यात्रा कर सकते है। लेकिन तीर्थयात्रियों को केवल एक वैध पासपोर्ट ले जाने साथ ओसीआई कार्ड ले जाने की जरूरत होगी। समझौते में यह भी तय किया गया है कि कॉरिडोर सुबह से शाम तक खुलेगा, सुबह यात्रा करने वाले तीर्थयात्रियों को उसी दिन वापस लौटना होगा। हालांकि कॉरिडोर का संचालन पूरे साल तक जारी रहेगा। तीर्थयात्रियों के पास अकेले या समूहों में जाने के लिए और पैदल यात्रा करने का भी विकल्प भी रखा गया है। इस करार के तहत भारत यात्रा की तारीख से 10 दिन पहले तीर्थयात्रियों की सूची पाकिस्तान को भेजेगा और यात्रा की तारीख से 4 दिन पहले तीर्थ यात्रियों को पुष्टिकरण भेजा जाएगा।
पाकिस्तान वसूलेगा 20 अमेरिकी डॉलर
पाकिस्तान ने भारत के उस आग्रह को नहीं माना कि वह भारतीय तीर्थयात्रियों को 20 अमेरिकी डॉलर प्रति यात्री सेवा शुल्क न वसूले, लेकिन पाकिस्तान यह शुल्क वसूलने पर अडिग रहा। गौरतलब है कि इससे पहले कॉरिडोर को लेकर भारत ने पिछली तीन संयुक्त सचिव स्तर की बैठकों और कूटनीतिक स्तर पर बार-बार यह जोर दिया था कि इस प्रकार का शुल्क वसूलना भारतीय तीर्थयात्रियों की धार्मिक और आध्यात्मिक भावनाओं के अनुरूप नहीं है। लेकिन 550वें प्रकाशपर्व के पहले तीर्थयात्रियों और करतारपुर साहिब कॉरिडोर के समय पर परिचालन के हित में भारत को झुकना पड़ा और इस समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए सहमत हो गया है, इसके बावजूद भारत सरकार इस मुद्दे पर पाकिस्तान सरकार से शुल्क लगाने के मुद्दे पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है।
कॉरिडोर का निर्माण लगभग पूरा
मंत्रालय के अनुसार करतारपुर साहिब कॉरिडोर के समय पर उद्घाटन के लिए सभी आवश्यक इन्फ्रास्ट्रक्चर अर्थात राजमार्ग और यात्री टर्मिनल भवन पूरा होने वाले हैं। तीर्थयात्रियों के मार्ग को सुगम और आसान तथा सुविधाजनक बनाने के लिए एक मजबूत सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। सभी मौसम कनेक्टिविटी के मुद्दे पर भारत सरकार ने अंतरिम व्यवस्था के रूप में पुल का निर्माण भारतीय पक्ष और एक अस्थायी सेवा मार्ग के रूप में किया है। उम्मीद है कि पाकिस्तान इस आश्वासन को पूरा करेगा कि वह जल्द से जल्द अपनी तरफ से पुल का निर्माण करेगा।
25Oct-2019