रविवार, 28 सितंबर 2014

दहेज के मामलों का निपटान बना चुनौती!

देश में छोड़ी गई महिलाओं ज्यादा हुई विधवाओं की संख्या
ओ.पी. पाल
. नई दिल्ली।
भले ही केंद्र सरकार देशभर की अदालतों में लंबित पड़े आपराधिक मामलों के निपटाने की दिशा में ठोस कदम उठाने और त्वरित निपटान न्यायालयों की स्थापना की योजनाओं को अंजाम देने का दावा करती आ रही हों, लेकिन यह सच है कि देश में दहेज उत्पीड़न जैसे मामलों की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है। इसी का परिणाम है कि देश में तलाकशुदा या पतियों के परित्याग के बाद अकेले चुनौतियों का सामना कर रही महिलाओं से कहीं ज्यादा विधवाओं की संख्या है।
केंद्र सरकार की महिलाओं की सुरक्षा और उनके प्रति अपराधों के प्रति गंभीरता का नजरिया रखा है और न्यायिक सुधार के लिए पहल भी शुरू की है,जिसमें खासकर न्याय पाने की बाट जो रही महिलाओं के लंबित मामलों के निपटान को एक चुनौती मानते हुए ठोस कदम उठाने का दावा किया है। केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने पिछले महीने ही कहा था कि दहेज के लंबित मामलों को निपटाने के लिए केंद्र सरकार ने त्वरित निपटान न्यायालय यानि फास्ट टेÑक कोर्ट की स्थापना के लिए अधीनस्थ न्यायपालिका में सृजित किये जाने वाले न्यायाधीशों के दस प्रतिशत रिक्त पदों के उपयोग करने के लिए राज्य सरकारों तथा उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायमूर्तियों से अनुरोध किया है। वहीं केंद्र सरकार ने तेरवें वित्त आयोग से इन रिक्त पदों पर होने वाले पूरे व्यय हेतु मौजूदा वित्तीय वर्ष के अंत तक बराबर शेयर के आधार पर अधिकतम 80 करोड़ वार्षिक निधि का प्रबंध करने का भी भरोसा दिया है। जहां तक देश में दहेज प्रतिषेध अधिनियम के अंतर्गत दर्ज मामलों के न्यायालयों में लंबित मामलों का सवाल है, विधि मंत्रालय के अनुसार उनकी संख्या तीन लाख 72 हजार 706 हो चुकी है, जिसमें 31888 मामले भारतीय दंड संहिता की धारा 304 ख के अधीन भी लंबित हैं। अदालतों में लंबित दहेज के मामलों पश्चिम बंगाल पहले पायदान पर है जहां करीब 1.10 लाख मामले लंबित हैं। इसके बाद महाराष्ट् में 54600 मामले निपटारे का इंतजार कर रहे हैं। गुजरात में 42859, राजस्थान में 28317, आंध्र प्रदेश में 22634, केरल में 20844, उत्तर प्रदेश में 15705, मध्य प्रदेश में 12621, असम में 9680 व उडीसा में 9584 दहेज एक्ट के मामले लंबित हैं। इनके अलावा छत्तीसगढ़ में 4632, हरियाणा में 6743, दिल्ली में 3838, पंजाब में 3971 व हिमाचल में 1296 मामलों में दहेज उत्पीड़न की महिलाएं न्याय की बाट जोहने को मजबूर हैं।
विधवाओं की बढ़ती संख्या चिंता
देशभर में दहेज के लिए परित्याग या अन्य किसी कारण से विधवा हो रही महिलाओं की संख्या में लगातार इजाफा भी केंद्र व राज्यों की सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। केंद्र सरकार के आंकड़ों पर गौर करें तो देश में जहां 23 लाख 42 हजार 940 महिलाएं दहेज के कारण या तलाक के कारण अलग रहने को मजबूर हैं, तो वहीं विधवाओं की संख्या तीन करोड़ 42 लाख 89 हजार 729 हो चुकी है। विधवाओं में सबसे ज्यादा 37 लाख 63 हजार 168 उत्तर प्रदेश में हैं, जबकि 37 लाख 26 हजार 735 विधवाओं की संख्या के साथ महाराष्ट् दूसरे पायदान पर है। इसके बाद आंध्र प्रदेश में 32 लाख 70 हजार 964 विधवाएं अपना गुजर-बसर कर रही हैं। मध्य प्रदेश में 17 लाख 52 हजार 228 तथा छत्तीसगढ़ में विधवाओं की संख्या सात लाख 71 हजार 106 आंकी गई है, जबकि हरियाणा में यह संख्या पांच लाख 33 हजार 974 है, तो दिल्ली में तीन लाख, पांच हजार 940 विधवाएं हो चुकी हैं।
परित्याग का दर्द झेलती महिलाएं
दहेज या तलाक की शिकार ऐसी महिलाओं की संख्या हालांकि विधवाओं से बहुत कम यानि 23 लाख 42 हजार 940 हैं, लेकिन इनका दर्द भी न्यायालयों में लंबित मामलों के कारण कम नहीं है। ऐसी महिलाओं की सबसे ज्यादा संख्या तीन लाख 26 हजार198 महाराष्ट् में हैं, जिसके बाद पश्चिम बंगाल में 287344, आंध्र प्रदेश में 261525, तमिलनाडु में 249356, केरला में 196085, उत्तर प्रदेश में 112855, गुजरात में 105753 महिलाएं पति के परित्याग का दर्द झेल रही हैं। मध्य प्रदेश में ऐसी महिलाओं की संख्या 115807, छत्तीसगढ़ में 90985, हरियाणा में 11410, दिल्ली में 13541, हिमाचल में 8336,राजस्थान में 49544 हैं।
28Sep-2014

बुधवार, 24 सितंबर 2014

चौ.चरण सिंह स्मारक बनाने की मांग पर बवाल!

पंचायत करने सैकड़ो किसान गिरफ्तार

लुटियंस जोन में निषेधाज्ञा लागू, 12 तुगलक रोड छावनी में तब्दील

ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
लुटियंस जोन में 12 तुगलक रोड के सरकारी बंगले का चौधरी चरण सिंह स्मारक घोषित करने मांग को लेकर रालोद समर्थकों का केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस बंगले को स्मारक बनाने की मांग को लेकर मंगलवार को होने वाली पंचायत में पहुंचते ही किसानों और पुलिस में जमकर बवाल हुआ। पंचायत पर रोक के बावजूद 12 तुगलक रोड के बंगले में घुसने के प्रयास में भाकियू नेता राकेश टिकैत समेत सैकड़ो रालोद समर्थक और किसानों ने गिरफ्तार कर लिया।
रालोद प्रमुख चौधरी अजित सिंह के लोकसभा चुनाव हार जाने के बाद सरकार ने अन्य पूर्व सांसदों के साथ उन्हें भी 12 तुगलक रोड के सरकारी आवास को खाली कराने के लिए कई नोटिस जारी किये थे, लेकिन वह बंगले को खाली करने में आनाकानी करते रहे तो एनडीएमसी व सीपीडब्ल्यूडी ने इस बंगले की बिजली व पानी आपूर्ति को काट दिया। सरकार की ओर से इस कार्यवाही से रालोद और भाकियू समर्थकों का गुस्सा तेज हुआ, तो वहीं इस बंगले को चौधरी चरण सिंह स्मारक बनवाने की मांग ने ज्यादा जोर पकड़ा। बिजली व पानी कटने के बाद अजित सिंह ने बंगले को खाली कराने की शुरूआत तो की लेकिन अभी पूरी तरह खाली नहीं किया। सरकार और रालोद-भाकियू के बीच तकरार इसलिए तूल पकड़ने लगा कि सरकार ने इस बंगले को स्मारक घोषित करने से नियमों का तर्क देते हुए साफ इंकार कर दिया। इसी मांग को लेकर इस बंगले पर मंगलवार को रालोद-भाकियू की एक पंचायत बुलाई गई थी, जिसमें आंदोलन की रणनीति तय करने के लिए संघर्ष समिति का गठन भी किया जाना था। इस पंचायत के मद्देनजर दिल्ली पुलिस ने पूरे लुटियंस जोन में धारा 144 लागू करके मंगलवार को प्रस्तावित पंचायत को भी अवैध करार घोषित कर दिया। तय कार्यक्रम के मुताबिक मंगलवार को यूपी व अन्य आसपास के राज्यों से सैकड़ो रालोद व भाकियू समर्थकों को सुबह ही 12 तुगलक रोड की तरफ आना शुरू हो गया था, लेकिन पुलिस ने पहले ही तुगलक रोड, औरंगजेब रोड, राजेश पायलट रोड और आईएनए, तीन मूर्ति जैसे मार्गो पर बेरेकेटिंग लगाकर कड़ी सुरक्षा के इंतजाम कर रखे थे, ताकि किसानों को 12 तुगलक रोड के बंगले पर जाने से रोका जा सके। इस दिशा में रेसकोर्स मैट्रो स्टेशन को भी बंद कर दिया गया था।
ऐसे हुआ बवाल
12 तुगलक रोड के सरकारी बंगले रालोद प्रमुख अजित सिंह और भाकियू द्वारा बुलाई गई पंचायत में जैसे ही सुबह किसानों के जत्थे आना शुरू हुए तो पूरी तरह से पुलिस सुरक्षा में बेरेकेटिड तुगलक रोड़ पर उन्हें रोका गया। बहुत से समर्थक तो किसी तरह चकमा देकर बंगले तक पहुंच भी गये थे, लेकिन 12 तुगलक रोड पूरी तरह से पुलिस छावनी में तब्दील किया जा चुका था। लुटियंस जोन में बढाई गई सुरक्षा व्यवस्था के बीच पहले ही आने वाले समर्थकों को निषेधाज्ञा लागू होने की जानकारी देकर वापस जाने को कहा गया, लेकिन तुगलक रोड के दोनों ओर से बेरेकैटिंग लांघने के लिए रालोद समर्थकों ने हंगामा करके बवाल काटा। चौधरी चरण सिंह के स्मारक बनाने की मांग को लेकर नारेबाजी करते हुए 12 तुगलक रोड की तरफ बढ़ने के प्रयास में पुलिस ने सौ से भी ज्यादा रालोद व भाकियू नेताओं समेत किसानों को गिरμतार कर लिया और उन्हें बसों में बैठाकर संसद मार्ग, तिलक मार्ग व तुगलक रोड पुलिस स्टेशन ले जाया गया, जहां उन्हें शाम के समय रिहा किया गया। गिरफ्तार समर्थकों में भाकियू नेता राकेश टिकैत, चन्द्रपाल फौजी,रालोद नेता तरसपाल मलिक, त्रिलोक त्यागी व राजकुमार सांगवान आदि प्रमुख रूप से शामिल थे।
अब मेरठ में 12 को होगी महापंचायत
चौधरी चरण सिंह विचार मंच और भाकियू के गिरμतार नेताओं ने संसद मार्ग थाने में ही बैठक करके निर्णय लिया है कि 12 तुगलक रोड को चौधरी चरण सिंह स्मारक बनवाने की मांग के लिए आंदोलन को तेज किया जाएगा। इस आंदोलन की रणनीति के लिए 12 अकटूबर को मेरठ में महापंचायत करने का निर्णय भी लिया गया। हरिभूमि को भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने यह जानकारी देते बताया कि अब मेरठ में प्रस्तावित महापंचायत में जनप्रतिनिधियों को भी बुलाया जाएगा और इस सरकारी बंगले को चौधरी चरण सिंह स्मारक बनवाने के लिए समर्थक आंदोलन करके सरकार से आर-पार की लड़ाई के लिए तैयार हैं।
केंद्र सरकार पर निशाना 
रालोद प्रमुख अजीत सिंह का कहना है कि चौधरी चरण सिंह 12 तुगलक रोड के बंगले पर करीब 35 वर्षो तक रहे और यहीं उन्होंने अंतिम सांस ली थी,जिसके बाद यह बंगला मेरे नाम से आवंटित है। इस बंगले से देश के किसानों की भावनाएं जुडी हुई हैं। तो जनता की मांग है कि इस आवास को उनके स्मृति स्थल में तबदील कर दिया जाना चाहिए, इसमें सरकार को निर्णय लेने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। अजित सिंह ने चौधरी चरण सिंह के अनुयायियों की इस मांग के लिए होने वाली पंचायत के मद्देनजर लुटियन जोन के कई मार्गो को बंद कर बंगले को छावनी बनाने के लिए भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। वहीं रालोद महासचिव त्रिलोक त्यागी ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए बताया कि किसान शांति में रणनीति बनाने आए थें, मगर दिल्ली पुलिस ने केन्द्र सरकार के दबाव में आकर यह कार्यवाही की और किसानों को पंचायत नही करने दी। उन्होंने कहा कि कि जब दिल्ली में वर्ष 2000 के बाद जगजीवन राम स्मारक व कांशीराम स्मारक के अलावा अन्य नेताओं के नाम के स्मारक बन सकते हैं तो किसानों के मसीहा रहे चौधरी चरण सिंह का स्मारक व संग्राहलय क्यों नहीं बनाया जा सकता।
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12 तुगलक रोड को स्मारक बनाने की मांग को एक सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि वर्ष 2000 में कैबिनेट के फैसले से सरकार अलग नहीं जा सकती। यदि चौधरी अजित सिंह को इस बंगले को स्मारक बनवाने की इतनी ही चिंता थी, तो वे इससे पहले की केंद्र सरकार में मंत्री रहते हुए चौधरी चरण सिंह स्मारक क्यों नहीं बनवा पाय। नायडू ने यहां तक कटाक्ष किया कि स्मारक तो दूर की बात है वह उनके नाम से किसी मार्ग का नामकरण तक नहीं करवा सके। अब इस मांग का औचित्य क्या है जिसमें वे केंद्र सरकार के सिर ठींकरा फोडने का प्रयास कर रहे हैं।-- एम. वेंकैया नायडू (केंद्रीय शहरी विकास मंत्री)
24Sep-2014

मंगलवार, 23 सितंबर 2014

पशुओं समेत बंगले में डेरा डालने की तैयारी में किसान!


12 तुगलक रोड़ पर कोर कमेटी की बैठक आज, बनेगी संघर्ष समिति
ओ.पी. पाल
. नई दिल्ली।
पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं रालोद प्रमुख चौधरी अजित सिंह से 12 तुगलक रोड का सरकारी आवास खाली कराने का विरोध गहराता जा रहा है, जिससे रालोद और भाकियू समर्थक किसानों के मसीहा स्व. चौधरी चरण सिंह का स्मारक बनाने की मांग को लेकर केंद्र सरकार के सामने आर-पार की लड़ाई के लिए तैयार है। मंगलवार को इसी बंगले पर होने वाली बैठक में एक संघर्ष समिति का गठन है, जिसके नेतृत्व में आंदोलन की रणनीति बनेगी। ऐसी भी खबर है कि चरण सिंह स्मारक बनाने की मांग को लेकर किसान अपने पशुओं के साथ इस सरकारी बंगले पर डेरा डालने की तैयारी कर रहे हैं?
भाकियू के प्रवक्ता ने बताया कि 12 तुगलक रोड के सरकारी बंगले को स्व. चौधरी चरण सिंह स्मारक बनवाने के लिए किसान किसी भी तरह की कुर्बानी से पीछे हटने वाला नहीं है। इसी बंगले पर मंगलवार 23 सितंबर को रालोद कोर कमेटी और भाकियू कार्यकारिणी की संयुक्त बैठक होगी, जिसमें रालोद व भाकियू से जिम्मेदार लोगों का चयन करके चौधरी चरण सिंह स्मारक हेतु आंदोलन को तेज करने के लिए एक संघर्ष समिति का गठन किया जाएगा। यह समिति आंदोलन की रणनीतियां तय करेगी और इस समिति के नेतृत्व में किसानों के हक को हासिल करने के लिए इस बंगले को चौधरी चरण सिंह स्मारक घोषित होने तक आंदोलन चलेगा। किसानों का आंदोलन का क्या रूप होगा इसके बारे में भाकियू का कहना है कि सरकार इस मांग को पूरी नहीं करती तो किसान आर-पार की लड़ाई के लिए तैयार बैठा है। सूत्रों के अनुसार ऐसी भी खबर है कि चौधरी अजित सिंह इस बंगले को 24 सितंबर को खाली कर देंगे, जिसके तुरंत बाद दिल्ली कूच करने वाले किसान इस सरकारी बंगले में अपने पशुओं के साथ डेरा जमा लेंगे? हालांकि भाकियू प्रवक्ता और रालोद का कहना है कि इस तरह की नौबत नहीं आनी चाहिए, लेकिन किसान इसी स्थान पर अपना आंदोलन चलाएंगे, यदि सरकार उन्हें बंगले में नहीं घुसने देगी, तो वह बाहर सड़क पर ही बेमियादी धरना देने का निर्णय ले सकते हैं। भाकियू नेताओं का कहना है कि 12 तुगलक रोड़ से चौधरी चरण के परिवार का नाता कई दशक पुराना है और इसी बंगले में चौधरी चरण सिंह ने अंतिम सांस ली थी। उसी समय से इस बंगले में छोटे चौधरी अजित सिंह का परिवार रहता आ रहा है। इसलिए देश के करोड़ो किसानों की इस बंगले से भावनाएं जुड़ी हुई हैं। इसलिए किसान इसे चौधरी चरण सिंह का स्मारक ही मानते हैं जिसकी 1987 में तत्कालीन सरकार भाकियू के संस्थापक अध्यक्ष चौधरी महेन्द्र सिंह टिकैत की मौजूदगी घोषणा भी कर चुकी थी।
आज से शुरू दिल्ली कूच करेंगे
किसान चौधरी चरण सिंह स्मारक की मांग के कारण विवादों में घिरा 12 तुगलक रोड का सरकारी बंगला आंदोलन का केंद्र बनने की राह पर है। मंगलवार को इस बंगले पर भले ही रालोद और भाकियू के वरिष्ठ नेताओं वाली कोर कमेटी की बैठक होने की बात हो रही हो, लेकिन संकेत हैं कि खासकर यूपी,हरियाणा व पंजाब के किसानों का कूच मंगलवार को दिल्ली की तरफ होने जा रहा है। भाकियू पहले ही चौधरी चरण सिंह स्मारक के लिए आर-पार की लड़ाई का ऐलान करके एक टैÑक्टर, 21 किसान और पांच कुंतल अनाज के साथ यहां जमावडा लगाने के लिए सरकार को चेतावनी दे चुकी है। किसानों के आंदोलन की तैयारियों में किसान अपने पशुओं को भी साथ लेकर आ सकते हैं ऐसी चर्चाए तेज हैं। किसानों में सरकार द्वारा इस बंगले को स्मारक बनाने की मांग खारिज करने का गुस्सा ज्यादा देखा जा रहा है।
23Sep-2014

सोमवार, 22 सितंबर 2014

अल्पसंख्यकों को बिना ब्याज मिलेगा शिक्षा ऋण!

ब्याज को वहन करेगी केंद्र सरकार
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हाल में सामने आये बयान ने केंद्र सरकार की मंशा को जाहिर कर दिया है कि वह देश में अल्पसंख्यकों की सोच को बदलना चाहती है, तभी तो सरकार ने अल्पसंख्यकों के विकास और कल्याणकारी योजनाओं के तौर तरीके बदलकर उन्हें ज्यादा से ज्यादा बुनियादी सुविधाएं देने का खाका तैयार किया है। मोदी सरकार की इसी नीति में अल्पसंख्यक वर्ग के बच्चों को बिना ब्याज के उच्च शिक्षा ऋण देने का महत्वपूर्ण फैसला किया गया है यानि ब्याज को सब्सिडी के रूप में स्वयं केंद्र सरकार वहन करेगी।
प्रधानमंत्री के रूप में नरेन्द्र मोदी को लेकर अल्पसंख्यक समुदाय में बेचैनी थी कि राजग सरकार अल्पसंख्यक मामले के मंत्रालय को बंद कर देगी, लेकिन सरकार ने इस मंत्रालय के अधिकार और भी ज्यादा बढ़ाकर अल्पसंख्यक वर्ग के लिए चल रही पहली योजनाओं की समीक्षा की, जिनमें खामियों को दूर करके नई योजनाओं को कार्यान्वित किया गया है। अल्पसंख्यक मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार ने मदरसों की पढ़ाई को तरजीह देते हुए सभी मदरसों को आधुनिक रूप से विकसित करने की योजना बनाई है। सरकार ने मदरसों से निकलने वाले लड़के-लड़कियों को दुनिया की तालीम देने के लिए नई मंजिल कार्यक्रम शुरू किया है, जिसमें देश-विदेश में उच्च शिक्षा पाने के इच्छुक अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चों को बिना ब्याज शिक्षा ऋण मुहैया कराने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। मंत्रालय के अनुसार खासकर मुस्लिम बच्चों को उच्च शिक्षा के प्रति प्रोत्साहन देने की दृष्टि से केंद्र सरकार ने उन्हे शिक्षा ऋण देने का फैसला किया है जिसके ब्याज को सब्सिडी के रूप में केंद्र सरकार स्वयं वहन करेगी। वहीं सरकार ने विदेशों में उच्च शिक्षा के लिए अल्पसंख्यक छात्रों को इसी प्रकार से शिक्षा ऋण की सुविधा देने का भी निर्णय लिया है। इसके लिए अल्पसंख्यक मंत्रालय ने क्रियान्वयन एजेंसी के रूप में केनरा बैंक से करार किया है, जिसमें शिक्षा ऋण देने के लिए योग्यता के आधार पर चयनित अल्पसंख्यक वर्ग के छात्र-छात्राओं शिक्षा ऋण मुहैया कराया जाना है। मंत्रालय ने बताया कि पांच सितंबर तक एक 48 बच्चों को बिना ब्याज के शिक्षा ऋण देने की मंजूरी दी गई है जिन्हें 19.22 लाख रुपये की सब्सिड़ी यानि ब्याज की छूट दी गई, इससे पहले ऐसे शिक्षा ऋण को तीन प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर पर दिये जाने का प्रावधान था।
पारदर्शी बनाई छात्रवृत्ति योजना
अल्पसंख्यक मंत्रालय के अनुसार अभी तक देश में अल्पसंख्यक वर्ग के बच्चों को दी जाने वाली छात्रवृत्त्ति की राशि में 25 प्रतिशत राज्य का हिस्सा होता था, लेकिन राजग सरकार की समीक्षा के बाद पाया गया कि राज्य अपने हिस्से की राशि न देने के कारण केंद्र द्वारा जारी छात्रवृत्ति योजना की राशि को खर्च नहीं कर पाते थे और उस धनराशि का अन्य रूप से दुरूपयोग होने के मामले भी सामने रहे, जिसके कारण कई राज्यों पर केंद्र की करोड़ो रुपये की धनराशि बकाया है। मोदी सरकार ने छात्रवृत्ति योजना को पारदर्शी बनाते हुए निर्णय लिया है कि केंद्र सरकार अब शतप्रतिशत राशि सीधे लाभार्थी के खाते में भेजेगी और राज्य सरकार का हिस्सा खत्म कर दिया गया है। 
22Sep-2014

स्मारक के बहाने वजूद बनाने की जुगत में रालोद!



23 सितंबर को रालोद व भाकियू  कोर कमेटी की बैठक
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।  
राष्ट्रीय लोकदल के सामने लोकसभा चुनाव में खोये हुए जनाधार को वापस हासिल करने की चुनौती है, जिसके लिए शायद अब रालोद ने 12 तुगलक रोड के सरकारी बंगले को चौधरी चरण सिंह स्मारक बनवाने की मांग के बहाने किसानों की सहानुभूति की रणनीति अपनाई है। इसके लिए 23 सितंबर को इसी बंगले पर रालोद व भाकियू की होने वाली कोर कमेटी की बैठक में रणनीति तय की जाएगी।
भाकियू के सूत्रों ने बताया कि 12 तुगलक रोड पर कोर कमेटी की बैठक में इस बंगले को स्व. चौधरी चरण सिंह स्मारक बनवाने की मांग को लेकर आंदोलन की अगली रणनीति को अंतिम रूप दिया जाएगा। लोकसभा चुनाव में अपना वजूद खो चुके रालोद प्रमुख चौधरी अजित सिंह ने सरकार के इस बंगले को कोई स्मारक न बनाने के ऐलान के बाद ही चुप्पी तोड़ी थी। उससे पहले बंगला खाली कराने के लिए काटी गई बिजली व पानी आपूर्ति के विरोध में रालोद समर्थक और भाकियू समर्थक किसान ही आंदोलन करते नजर आए। माना जा रहा है कि रालोद का मकसद अब यूपी के 2017 में होने वाले विधानसभा के लिए पार्टी के वजूद को बचाने का लक्ष्य है। राजनीति के जानकार भी मान रहे हैं कि चौधरी चरण सिंह के स्मारक के बहाने रालोद समर्थकों की अजित सिंह को सहानुभूति मिलने से पार्टी में कुछ जान आने की संभावना है। 12 तुगलक रोड के सरकारी बंगले को चौधरी चरण सिंह स्मारक की मांग को हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा का समर्थन भी चौधरी अजित सिंह के लिए राज्यसभा तक जाने का रास्ता तय कर सकता है। हालांकि हुड्डा की स्मारक की मांग को केंद्र सरकार पहले ही खारिज कर सकती है, लेकिन स्मारक के बहाने रालोद सुर्खियों में रहेगा, तो उसके लिए यूपी की सत्तारूढ़ पार्टी सपा का भी रालोद को साथ मिल रहा है तो जदयू ने भी इस बंगले को चौधरी चरण सिंह का स्मारक बनाने की वकालत की है। इसके अलावा राजनीतिक दलों में जाट नेता भी स्मारक के समर्थक हैं, लेकिन भाजपा में शामिल जाट नेता इस मुद्दे पर खामोश ही रहना बेहतर समझ रहे हैं और वे खुलकर इस मामले में सामने आने को कहीं तक भी राजी नहीं हैं।
सरकार पर दबाव बरकरार
12 तुगलक रोड जहां पूर्व प्रधानमंत्री चरण सिंह ने अंतिम सांस ली थी और तभी से यह बंगला उसके परिवार के पास ही रहा है। अब जब लोकसभा चुनाव में रालोद जनमत हासिल नहीं कर सका तो इस सरकारी बंगले को खाली करने का फरमान तो आना तय था। ऐसे में इस बंगले को चौधरी चरण सिंह स्मारक बनाने की मांग जाग उठी और सरकार की मनाई के बाद रालोद व भाकियू समर्थक लगातार दबाव बनाने में लगे हुए हैं। इस मुद्दे को जीवित रखकर रालोद व भाकियू समर्थक हरियाणा में हो रहे विधानसभा चुनाव में जाट वोटों को साधकर भाजपा की घेराबंदी करने का प्रयास कर रहे हैं। सूत्रों की माने तो हुड्डा का केंद्र सरकार को स्मारक बनाने के लिए भेजा गया पत्र के पीछे भी यही राजनीति रही, ताकि जाट वोट के लिए अजित सिंह उनके चुनाव में योगदान दें सकें।
22Sep-2014

शनिवार, 20 सितंबर 2014

12 तुगलक रोड़ के बंगले पर गरमाई सियासत!


चरण सिंह स्मारक पर सरकार और रालोद में रार
ओ.पी. पाल
. नई दिल्ली।
पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी अजित सिंह से सरकार बंगला खाली कराने के विरोध और इस 12 तुगलक रोड के सरकारी बंगले को पूर्व प्रधानमंत्री स्व. चौधरी चरण सिंह का स्मारक बनाने के मुद्दे पर सियासत इतनी गरमा गई है कि केंद्र सरकार और रालोद आमने सामने है। केंद्र सरकार ने इस बंगले को स्मारक घोषित करने से साफ इंकार करने के बाद स्वयं अजित सिंह ने भी चुप्पी तोड़ी तो सरकार ने भी पलटवार करने में नियमों का तर्क देते हुए अजित सिंह और उनकी हिमायत कर रही कांग्रेस को नसीहत देने में कोई परहेज नहीं किया।
केंद्र सरकार के इस बंगले को स्मारक न बनाने के प्रस्ताव को खारिज करने के बाद शुक्रवार को स्वयं रालोद प्रमुख चौधरी अजित सिंह ने अपनी चुप्पी तोड़ी और केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए अजित सिंह ने इस बंगले को अपने पिता पूर्व प्रधानमंत्री चरण सिंह के स्मारक में बदलने से इंकार करने पर मोदी सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा लाल बहादुर शास्त्री, बाबू जगजीवन राम और कांशी राम के नाम पर भी एक स्मारक बने हैं तो यह क्यों नहीं बन सकता। इस पर केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया कि वह नियमों के मुताबिक किसी सरकारी बंगले को स्मारक में तब्दील नहीं कर सकती, क्योंकि केन्द्रीय मंत्रिमंडल वर्ष 2000 में मंत्रियों के सरकारी बंगले को दिवंगत नेताओं के नाम पर स्मारक में बदलने पर रोक लगाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे चुका है। गौरतलब है कि सांसद होने के नाते चौधरी अजित सिंह को आबंटित 12 तुगलक रोड का सरकारी आवास जब सीपीडब्ल्यूडी के कई नोटिस के बावजूद बंगला खाली नहीं हुआ तो पिछले सप्ताह इस बंगले की बिजली व पानी आपूर्ति काट दी गई और तब कहीं जाकर अजित सिंह ने बंगला खाली करने की शुरूआत की, हालांकि अभी इस बंगले पर उनका निजी कार्यालय और टेलीफोन सेवा काम कर रही है। बिजली पानी काटे जाने के विरोध में रालोद और भाकियू समर्थकों ने 12 तुगलक रोड को स्व. चौधरी चरण सिंह का स्मारक घोषित करने की मांग को लेकर अपनी आवाज बुलंद करना शुरू कर दिया। किसानों ने मुरादनगर नहर से कुछ घंटे तक दिल्ली की गंगा जल की आपूर्ति का रास्ता भी रोका और केंद्र सरकार पर दबाव बनाने का प्रयास किया। इसके बाद केंद्र सरकार का स्पष्टीकरण आने के बाद राजनीति गरमाने लगी। सूत्रों के अनुसार इस बंगले को खेल और युवा कल्याण मंत्री सवार्नंद सोनेवाल को आवंटित किया गया है। जबकि अजित सिंह अपने दिल्ली के वसंत विहार स्थित अपने निजी आवास में जाने की तैयारी में हैं।
स्वयं अजित जिम्मेदार
केंद्रीय शहरी विकास मंत्री एम. वेंकैया नायडू ने इस बंगले को चौधरी अजित सिंह को ही जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि अभी तक वह केंद्र की सरकार में थे, तो उन्होंने कैबिनेट के इस प्रस्ताव को निरस्त कराने के लिए प्रस्ताव क्यों पेश नहीं किया। लगे हाथ ही नायडू ने हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा के इस बंगले को चौधरी चरण सिंह स्मारक घोषित करने के लिए आए पत्र पर भी कांग्रेस पर वार किया। नायडू ने रालोद पर प्रहार करते हुए कहा यदि इन लोगों को चरण सिंह के नाम पर स्मारक के लिए इतनी ही फिक्र है तो उनके निधन के बाद पिछले 37 साल में उन्हें किसने रोका? सरकार पर आरोप लगाना अनुचित है और वह आशा करते हैं कि लोग हकीकत समझते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने 14 साल पहले तय किया था कि कोई भी सरकारी बंगला स्मारक में नहीं बदला जाएगा। हम तो महज तीन महीने से सरकार में हैं। अजीत सिंह पिछली सरकार में महत्वपूर्ण मंत्री थे। पिछले दस साल से कांग्रेस केंद्र की सत्ता में थी तो हुड्डा या केंद्र में कांग्रेस की सरकार इस बंगले को स्मारक में क्यों बदलने का प्रयास नहीं किया। उन्होंने रालोद प्रमुख या अन्य विपक्षी दलों के उन आरोपों को एक सिरे से खारिज कर दिया कि सरकार अजित सिंह से सरकारी आवास खाली करवाने में बदले की राजनीति कर रही है। गौरतलब है कि यह बंगला केंद्रीय खेल एवं युवा कल्याण मंत्री भावना जैसा कुछ नहीं है। सरकार ने साफ कर दिया है कि वह किसी आंदोलन या अन्य दबाव में आकर नियमों को नहीं तोड़ेगी।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
राकांपा नेता नवाब मलिक ने भी चौधरी चरण सिंह का स्मारक बनाने की वकालत की है। मलिक ने कहा कि चौधरी चरण सिंह देश के पीएम और किसानों के बड़े नेता रहे हैं इसलिए उनके स्मारक की मांग को लेकर सरकार को मान जाना चाहिए। समाजवादी पार्टी के सांसद नरेश अग्रवाल ने कहा कि 12 तुगलक रोड का बंगला चौधरी साहब का स्मारक बनना चाहिए। हालांकि अग्रवाल ने पानी काटने, हुड़दंग व हंगामे के तरीके को गलत करार दिया। दूसरी ओर भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि रालोद प्रमुख चौधरी अजित सिंह और रालोद के कार्यकर्ता जो दिल्ली की वाटर सप्लाई रोकने की बात कर रहें हैं यह गलत है। अजित सिंह राजनीति खेलने का प्रयास कर रहें हैं, ऐसा उन्होंने पहले सत्ता में रहते हुए क्यों नहीं किया।
20Sep-2014

गुरुवार, 18 सितंबर 2014

चरण स्मारक की मांग को हुड्डा का मिला साथ!


12 तुगलक रोड का बवाल अभी टला नहीं
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
पूर्व केंद्रीय मंत्री चौ. अजित सिंह के सरकारी आवास 12 तुगलक रोड को चौधरी चरण सिंह स्मारक घोषित करने के लिए अड़िग भाकियू और रालोद को कांग्रेस का भी साथ मिला। मसलन 12 तुगलक रोड को पूर्व प्रधानमंत्री स्व. चौधरी चरण सिंह स्मारक बनाने की मांग के समर्थन में हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने समर्थन करते हुए केंद्रीय शहरी विकास मंत्री एम. वेंकैया नायडू को पत्र भेजा है।
केंद्र सरकार के निर्देश पर 12, तुगलक रोड़ स्थित सरकारी आवास को खाली करने में आनकानी कर रहे पूर्व मंत्री चौधरी अजित सिंह की बिजली व पानी आपूर्ति काटकर जिस तरह किसानों की राजनीति गरमाई तो चौधरी अजित सिंह यह सरकारी आवास खाली करने को राजी हुए और कुछ सामान उन्होंने अपने निजी आवास बसंत बिहार पहुंचा दिया, बाकी 25 सितंबर तक इस आवास को खाली करने का वादा करने को मजबूर हुए। वहीं दूसरी और रालोद और भाकियू समर्थकों ने 12 तुगलक रोड को अजित सिंह से खाली कराने का विरोध किया और इस बंगले का चौ.चरणसिंह स्मृति भवन बनवाने और स्मारक घोषित कराने की मांग को लेकर अपना जमावड़ा भी लगाए रखा। बिजली व पानी काटने के विरोध में किसानों ने गुरुवार को मुरादनगर नहर से दिल्ली की पानी आपूर्ति रोकने और मंडोला से बिजली काटने तक का ऐलान किया। 12 तुगलक रोड को चौधरी चरण सिंह स्मारक बनाने की रालोद व भाकियू समर्थक किसानों के आंदोलन को और बल बुधवार को उस समय मिल गया जब हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने केदं्रीय शहरी विकास मंत्री एम वेंकैया नायडू को पत्र लिखकर इस बंगले को चौ.चरण संह स्मृति भवन बनाये जाने की मांग की। अपने पत्र में हुड्डा ने लिखा है कि यह एक सरकारी आवास ही नहीं है, बल्कि इस बंगले से किसानों की आस्था भी जुड़ी रही है, जहां किसानों के मसीहा चौधरी चरण सिंह मरते दम तक रहे हैं।शहरी विकास मंत्री को भेजे पत्र में मुख्यमंत्री हुड्डा ने लिखा है कि चौ. चरण सिंह इस बंगले में 1978 में आए थे, तो उसी समय से यह बंगला उनके परिवार के पास ही है। 1978 से ही यह बंगला किसानों के हित में कार्यरत रहा है। कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक हजारों किसानों से जुडे आंदोलन का केन्द्र 12 तुगलक रोड़ ही रहा है। इसलिए केंद्र सरकार को चाहिए कि किसानों के मसीहा और पूर्व प्रधानमंत्री चौ. चरण सिंह की स्मृति में 12, तुगलक रोड़ को चौ.चरण सिंह स्मृति भवन घोषित कर दिया जाए।
आज दिल्ली का पानी रोकेंगे किसान
भाकियू के राष्टीयप्रवक्ता राकेश टिकैत ने हरिभूमि से बातचीत में कहा कि उन्होंने 12 तुगलक रोड पर पंचायत करके सरकार को दो दिन का समय दिया था कि वह इस बंगले की बिजली व पानी आपूर्ति को बहाल कर दे, वरना वे दिल्ली के पानी की आपूर्ति को ठप कर देंगे। उनका कहना है कि अभी तक केंद्र सरकार या एनडीएमसी के कानों तक यह बात शायद असर नहीं कर पाई है। इसलिए अब किसान आरपार की लड़ाई लडने के लिए तैयार हो चुका है, जिसके लिए कल गुरुवार को मुरादनगर नहर पर कूच करके किसान दिल्ली के पानी को रोकने वाले हैं। गौरतलब है कि भाकियू की इस चेतावनी के बावजूद अभी तक सरकार ने इस बंगले की बिजली-पानी आपूर्ति बहाल नहीं की। इसलिए 18 सितंबर यानि कल गुरुवार को मुरादनगर में किसानों का जमावडा होगा और वहां से दिल्ली के लिए आपूर्ति हो रहे पानी को रोककर सरकार पर दबाव बनाने की तैयारी है।

18Sep-2014

बुधवार, 17 सितंबर 2014

उपचुनावों के नतीजे भाजपा के लिए सबक!

अति आत्मविश्वास या बेइंतहा बयानों का नतीजा
यूपी में अपनी सीटें भी नहीं बचा पाई भाजपा
ओ.पी. पाल
. नई दिल्ली।
देश के नौ राज्यों में तीन लोकसभा और 33 विधानसभा सीटों पर उप चुनाव के नतीजे भाजपा के लिए उत्साहजनक नहीं कहे जा सकते, जो अगले महीने हरियाणा और महाराष्ट्र के विधानसभा चुनावों में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए भाजपा के लिए एक सबक से कम नहीं हैं। उत्तर प्रदेश में तो भाजपा अपनी विधानसभा सीटें भी बचाने में कामयाब नहीं हो सकी, वहीं भाजपा शासित गुजरात और राजस्थान में भी भाजपा के लिए इन उप चुनाव के नतीजे झटका साबित हुए।
केंद्र में मोदी सरकार के कार्यकाल में यह सबसे बड़ा उप चुनाव था, जिसमें भाजपा खासकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रतिष्ठा भी दावं पर थी। खासतौर पर उत्तर प्रदेश में जिस तरह से लोकसभा चुनाव में भाजपा ने अप्रत्याशित प्रदर्शन करके देश के सबसे बडेÞे सूबे का दिल जिता है और राज्य में 11 भाजपा के 11 विधायकों को लोकसभा में जगह मिली है। तो ऐसे में मुलायम सिंह यादव द्वारा छोड़ी गई मैनपुरी लोकसभा सीट के उपचुनाव भी भाजपा के खाते में आने की उम्मीद जताई जा रही थी, लेकिन यूपी में भाजपा विधायकों की रिक्त हुए 11 विधानसभा सीटों के उप चुनाव में भाजपा की आठ सीटे सत्तारूढ़ सपा की झोली में चली गई और भाजपा केवल तीन सीटों पर ही वापसी कर सकी है। उप चुनाव के इन नतीजों से भाजपा के जनाधार पर सवालिया निशान खड़े होना स्वाभाविक है। हरिभूमि संवाददाता ने मैनपुरी लोकसभा के अलावा उपचुनाव के प्रचार का जायजा लिया था, जहां भाजपा ने मैनपुरी लोकसभा सीट और सभी 11 विधानसभा सीटों पर निष्पक्ष चुनाव कराने के इरादे में अर्द्धसैनिक बलों की फौज भी उतारी, लेकिन भाजपा को इसका लाभ नहीं मिल सका। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में भाजपा के निराशाजनक प्रदर्शन के पीछे या तो पार्टी का अति आत्मविश्वास या फिर बेइंतहा बयानबाजी बड़ा कारण हो सकती है। भाजपा सुप्रीमो अमित शाह ने योगी आदित्यनाथ पर दांव खेला, जिन्होंने जमकर मेहनत भी की, लेकिन जनता ने उनके लव जेहाद के मुद्दे को नकारते हुए यह सबक दिया है कि सिर्फ उग्र हिंदुत्व के सहारे सत्ता तक नहीं पहुंचा जा सकता, उससे ज्यादा विकास का एजेंडा जनता के सामने होना चाहिए। इन उप चुनाव के नतीजों में सबसे दिलचस्प बात यह भी रही कि यूपी में बसपा सुप्रीमो मायावती ने उप चुनाव में बसपा को दूर रखा और उम्मीमद थी कि बसपा का वोटबैंक के बंटवारे का ज्यादा हिस्सा भाजपा को मिल सकता है, लेकिन नतीजे इसके विपरीत रहे। राजनीति के जानकार तो यहां तक कह रहे हैं कि यूपी में अखिलेश राज किसी से छिपा नहीं है फिर भी सपा के शानदार सियासी प्रदर्शन ने यूपी की राजनीतिक जमीन पर भाजपा के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिये हैं।
गुजरात व राजस्थान में भी झटका
भाजपा शासित राज्य गुजरात में लोकसभा की बडोदरा सीट तो भाजपा को वापस मिल गई है, लेकिन लोकसभा चुनाव में गुजरात और राजस्थान में शतप्रतिशत नतीजे हासिल करने वाली भाजपा को उप चुनावों ने झटके दिये हैं। मसलन गुजरात में नौ विधानसभा सीटों पर हुए उप चुनाव में गुजरात की 9 विधानसभा सीटों में से भाजपा छह सीट ही बचाने में कामयाब रही, जबकि कांग्रेस ने भाजपा के विधायकों के सांसद बनने से खाली तीन सीटों पर अपना कब्जा कर लिया। इसी प्रकार राजस्थान में भी लोकसभा चुनाव में सभी सीटें जीतने वाली भाजपा को ठीक चार महीने बाद अपनी खाली चार विधानसभा सीटों में से तीन सीटें गंवानी पड़ी जिन पर कांग्रेस ने कब्जा कर लिया है।
फिर भी सबसे आगे भाजपा
तीनों लोकसभा सीटों के नतीजे तो आम चुनाव की तरह ही रहे, लेकिन नौ राज्यों की विधानसभा सीटों में मात खाने के बावजूद भाजपा सबसे आगे रही। मसलन 33 विधानसभा सीटों के आए नतीजों में भाजपा को सबसे ज्यादा 13 सीटों पर जीत हासिल हुई। भाजपा ने जहां यूपी, गुजरात और राजस्थान में अपनी सीटें गंवाई हैं, वहीं पश्चिम बंगाल की चौरांगी विधानसभा सीट वामदलों से छीनी है तो वहीं असम की सिलचर विधानसभा सीट को कांग्रेस के जबड़े से छीनने में सफलता हासिल की है। इसके अलावा एआईयूडीएफ, सीपीएम, टीएमसी और टीडीपी के अलावा एक सीट निर्दलीय प्रत्याशी ने जीती है। केंद्र में मोदी सरकार के सत्ता संभालने के बाद यह चौथे और सबसे बड़े उप चुनाव थे, जिसमें भाजपा के लिए उम्मीद के विपरीत नतीजे सामने रहे हैं।
17Sep-2014

हरियाणा विधानसभा में करोड़पतियों का वर्चस्व!

15 प्रतिशत विधायकों पर लंबित हैं अपराधिक मामले
ओ.पी. पाल.
नई दिल्ली।
हरियाणा विधानसभा में पिछले पांच साल में निर्वाचित होकर गये विधायकों ने अपनी संपत्ति बढ़ाने में ज्यादा दिलचस्पी दिखाई, जिसका नतीजा है कि 90सदस्यीय विधानसभा में फिलहाल 66 विधायक ऐसे हैं जिनकी संपत्ति करोड़ों में हैं, जबकि बाकी लखपतियों की फेहरिस्त में शामिल हैं। वहीं 17 प्रतिशत यानि 15 विधायक ऐसे हैं जिनके खिलाफ आपराधिक मामले लंबित चल रहे हैं।
हरियाणा विधानसभा चुनाव के लिए राज्य में सभी दलों ने रणभेरी का दम भरा हुआ है, जहां 15 अक्टूबर को चुनाव होने हैं। मौजूदा विधानसभा का स्वरूप कैसा है इसका अध्ययन चुनाव सुधार के लिए काम कर रहे गैर सरकारी संगठन नेशनल इलेक्शन वॉच और ऐसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉम्स ने किया है। इस रिपोर्ट के अनुसार 66 यानि 75 फीसदी करोड़पति विधायकों में पहले पायदान पर अंबाला सिटी के विनोद शर्मा हैं, जिनकी संपत्ति 87 करोड़ रुपये से ज्यादा की है, इसके बाद सिरसा के विधायक गोपाल कांडा जिनकी संपत्ति 63 करोड़ से ज्यादा आंकी गई है। आदमपुर से रेणुका बिश्नोई की सवा 47 करोड़, हिसार से सावित्री जिंदल की 43 करोड़, गुडगांव के सुखबीर की 38 करोड़, बहादुरगढ़ के राजेन्द्र जून की 33 करोड़, डबकाली से अजय चौटाला की 28 करोड़, उचाना कलां से ओमप्रकाश चौटाला की 15 करोड़, बडखल के महेन्द्र प्रताप की 14 करोड़ तथा एलनाबाद से अभय चौटाला की 14 करोड़ की संपत्ति है। इनके अलावा 56 और ऐसे विधायक हैं जिनका नाम कुबेरपतियों की सूची में शामिल है। यदि दलवार करोड़पतियों की बात की जाए तो कांग्रेस के 32, इनेलो के 49, हजकां के पांच और सात निर्दलीय विधायक शामिल हैं। मसलन हरियाणा विधानसभा में एक विधायक की औसतन संपति 7.11 करोड़ आंकी गई है।
सबसे कम संपत्ति
विधानसभा में नरवाना से इनेलो के विधान प्रिथी सिंह ऐसे विधायक हैं जिनकी संपत्ति सबसे कम करीब डेढ़ लाख रुपये ही है, जबकि गुहला के इनेलो के फूल सिंह की करीब सवा तीन लाख और बावल के रामेश्वर दयाल की चार लाख से ज्यादा की है।
अपराधी पृष्ठभूमि वाले विधायक 
हरियाणा विधानसभा में 15 विधायकों पर आपराधिक मामले चल रहे हैं, जिनमें से 13 पर गंभीर धाराओं वाले मामले शामिल हैं। इनमें कांग्रेस के छह,इनेलो के पांच, शिरोमणी अकाली दल का एक और तीन निर्दलीय शामिल हैं। जबकि गंभीर मामलों वाले में कांग्रेस के चार, इनेलो के पांच विधायक भी शामिल हैं।
17Sep-2014

सोमवार, 15 सितंबर 2014

किसानों की प्रतिष्ठा बना 12 तुगलक रोड का बंगला!

भाकियू ने चौ. चरणसिंह स्मारक बताकर डाला डेरा
सरकार से आर-पार की लड़ाई का ऐलान
ओ.पी. पाल.
नई दिल्ली।
रालोद प्रमुख चौधरी अजित सिंह ने बिजली-पानी की आपूर्ति कटने के बाद 12 तुगलक रोड स्थित सरकारी आवास को खाली करना शुरू कर दिया है,लेकिन चौधरी अजित सिंह की हिमायत में भाकियू ने इस सरकारी बंगले पर अपना डेरा जमाना शुरू कर दिया। भाकियू ने इस बंगले का स्व. चौधरी चरण सिंह स्मारक घोषित करने की मांग को लेकर आर-पार की लड़ाई का भी ऐलान कर दिया है, जिसके लिए सोमवार को चौतरफा कई राज्यों के किसान दिल्ली में उमड़ने वाले हैं।
केंद्र सरकार के निर्देश पर पूर्व मंत्रियों एवं सांसदों के सरकारी आवास खाली कराने के लिए सीपीडब्ल्यूडी के जरिए केई नोटिस भेजने के बावजूद सरकारी आवास खाली न करने वाले पूर्व मंत्रियों व पूर्व सांसदों में से 30 सरकारी बंगलों की शनिवार को बिजली व पानी की आपूर्ति ठप कर दी गई, जिसमें यूपीए में कैबिनेट मंत्री रहे राष्ट्रीय लोकदल प्रमुख चौधरी अजित सिंह सुर्खियों में रहे, जो 12 तुगलक रोड़ के बंगले को खाली न कराने के लिए चौधरी चरण सिंह का स्मारक बताकर सरकार पर दबाव बना रहे थे। शनिवार को जब इस बंगले की भी बिजली व पानी आपूर्ति ठप कर दी गई तो चौधरी अजित सिंह ने यह सरकारी आवास खाली करना शुरू कर दिया है, लेकिन रविवार को यहां भाकियू के नेतृत्व में सैकड़ो किसानों ने डेरा डाल लिया और सरकार की इस बंगले को खाली कराने का विरोध किया। भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने ऐलान किया है कि केंद्र में मंत्री और सांसद होने के नाते चौधरी अजित सिंह को आवंटित इस बंगले को अजित सिंह भले ही खाली कर रहे हों, लेकिन इस बंगले को किसी अन्य मंत्री या सांसद को भी आबंटित नहीं होने दिया जाएगा। इसके लिए उन्होंने तर्क दिया कि यह बंगला पहले से ही स्व. चौधरी चरण सिंह स्मारक समाधि घोषित है और यह किसानों के मसीहा चौधरी चरण सिंह संग्राहलय के रूप में बना रहे, जो किसानों की प्रतिष्ठा से जुड़ा है। यही कारण है कि इसके लिए भाकियू के नेतृत्व में किसान केंद्र सरकार से आर-पार की लड़ाई लड़ने का फैसला कर लिया है। भाकियू नेता राकेश टिकैत ने कहा चरण सिंह के निधन के बाद ही तत्कालीन कांग्रेस की केंद्र सरकार ने भाकियू के संस्थापक अध्यक्ष चौधरी महेन्द्र सिंह टिकैत की मौजूदगी में 12 तुगलक रोड़ को चौ. चरण सिंह स्मारक घोषित कर दिया था, जहां वे प्रधानमंत्री बनने के बावजूद भी रहे हैं। दरअसल ऐसे 158 सांसद थे, 16वीं लोकसभा का चुनाव हार गए। इनमें से 70 सांसदों को सरकार ने नोटिस देकर उन्हें बीती 26 जुलाई तक अपने सरकारी आवास खाली करने को कहा गया था, जिनमें से शनिवार को 30 पूर्व सांसदों की बिजली व पानी की सुविधाएं बंद कर दी गई। जाहिर है कि अजित सिंह अपना सरकारी बंगला खाली नहीं कर पाए, जो बागपत से और उनके पुत्र जयंत चौधरी मथुरा से बीता लोकसभा चुनाव हार गए थे।
भाकियू ने सरकार द्वारा सरकारी बंगलों की बिजली पानी ठप करने पर यह भी चेतावनी दी है कि यदि सरकार 12 तुगलक रोड़ के बंगले की बिजली व पानी आपूर्ति ठप करती है तो किसान पूरी दिल्ली के बिजली व पानी को ठप रखने की कुबत रखते हैं। यह सरकार के विवेक पर निर्भर है कि वह किसानों से आर-पार की लड़ाई लड़ना चाहती है या नहीं। यदि 12 तुगलक रोड के बंगले पर आर-पार की लड़ाई होती है तो किसान गंगा के पानी को बंद कर देंगे और मंडोला से बिजली आपूर्ति ठप करने के लिए मजबूर हो जाएंगे। भाकियू नेता राकेश टिकैत ने आरोप लगाया कि जब दिल्ली में जगजीवन राम स्मारक व कांशीराम स्मारक के अलावा अन्य नेताओं के नाम के स्मारक बन सकते हैं तो किसानों के मसीहा रहे चौधरी चरण सिंह का स्मारक व संग्राहलय क्यों नहीं बन सकता। वहीं राकेश टिकैत ने भाजपा के कई पूर्व सांसदों का हवाला दिया जो अपने सरकारी आवासों में जमे हुए हैं। उन्होंने यह भी ऐलान किया कि भाकियू आर-पार की लड़ाई के लिए सोमवार से हरेक टैक्टर में 21 किसान और पांच कुंतल अनाज के साथ दिल्ली पहुंचना शुरू हो जाएंगे।
दो पूर्व प्रधानमंत्रियों की आस्‍था
केन्द्रीय शहरी विकास मंत्रालय और नई दिल्ली नगर पालिका मिलकर 12 तुगलक रोड से पूर्व केन्द्रीय मंत्री अजित सिंह को और 2 साउथ एवेन्यू के बंगले से नीरज शेखर को बाहर निकालने की कोशिश कर रही है। हालांकि अब तो ये बंगले इन नेताओं के नामों पर ही आवंटित थे, पर ये मूल रूप से मिले थे चौधरी चरण सिंह को और चंद्रशेखर को। ये दोनों देश के प्रधानमंत्री भी रहे। बताने की जरूरत नहीं है कि अजित सिंह पुत्र हैं चरण सिंह के और नीरज शेखर पुत्र हैं चंद्रशेखर के। सूत्रों के अनुसार चौधरी चरण सिंह 12 तुगलक रोड में 1978 में और चंद्रशेखर 1971 में साउथ एवेन्यू के बंगले में गए थे। तब से इनके परिवार इनमें ही रह रहे हैं। अब राजग सरकार इन दोनों बंगलों को खाली कराने की कार्यवाही कर रही है।
15Sep-2014