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सोमवार, 8 अप्रैल 2024
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प. बंगाल: हिंसा की जमीन पर बिछी लोकसभा चुनाव की बिसात
शनिवार, 6 अप्रैल 2024
महाराष्ट्र: बदले सियासी समीकरण से दिलचस्प मोड़ पर लोकसभा चुनाव
शुक्रवार, 5 अप्रैल 2024
मणिपुर: सबसे मुश्किल चुनाव में होगी सत्तारूढ दल की अग्नि परीक्षा!
गुरुवार, 4 अप्रैल 2024
अरुणाचल प्रदेश: लोकसभा व विधानसभा में सियासी वर्चस्व की जंग में भाजपा व कांग्रेस
बुधवार, 3 अप्रैल 2024
मध्य प्रदेश: अंचलवार चुनावी रणनीति के साथ आमने सामने भाजपा-कांग्रेस
लोकसभा चुनाव 16 लाख से अधिक नए वोटर हो सकते हैं निर्णायक
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव में मध्य प्रदेश को फतेह करने के लक्ष्य को लेकर प्रमुख रुप से भाजपा और कांग्रेस अंचलवार अलग अलग चुनावी रणनीति के साथ चुनाव मैदान में उतरी है। राज्य की 29 सीटों पर चार चरणों में मतदान होगा, जिसमें पहले चरण का चुनाव 19 अप्रैल को होगा। जहां कांग्रेस के सामने पिछले चुनाव की हार से सबक लेकर बाजी पलटने की चुनौती होगी, वहीं भाजपा के सामने इस तमाम लोकसभा सीटों पर परचम लहराने मौका है। लेकिन माना जा रहा है कांग्रेस की तैयार की गई नई रणनीति के सामने भाजपा के लिए मध्य प्रदेश को फतेह करना आसान भी नहीं होगा।
मध्य प्रदेश में भौगोलिक, सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से लोकसभा या फिर विधानसभा के चुनाव में अलग अलग समीकरण सामने आते रहे हैं। इसलिए राज्य के अलग अलग जोन यानि मालवा-निमाड, महाकौशल, विंध्य, चंबल, बुंदेलखंड, मध्य भारत में जहां भाजपा ने पिछले चुनाव में जीत का आधार बने वोट बैंक को और ज्यादा बढ़ाने के लक्ष्य के साथ नई रणनीति तैयार की है। भाजपा इस सभी सीटों पर जीत हासिल करके मध्य प्रदेश को फतेह करना चाहती है, ताकि उसके 400 पार के नारे को साकार किया जा सके। वहीं दूसरी ओर इंडिया गठबंधन के साथ चुनाव मैदान में उतरी कांग्रेस पार्टी ने भाजपा से एक कदम आगे बढ़कर मध्य प्रदेश की लोकसभा सीटों को आठ जोन भोपाल जोन, चंबल जोन, बुंदेलखंड जोन, विंध्य जोन, नर्मदापुरम जोन, महाकौशल जोन, उज्जैन जोन और मालवा-निमाड जोन में विभाजित करके हर लोकसभा सीट पर एक प्रभारी नियुक्त किया है। दरअसल प्रदेश में जातिगत समीकरण भी किसी भी प्रत्याशी की हार जीत का फैसला करने में समक्ष है, इसीलिए भाजपा व कांग्रेस ने जाति व धर्म के आधार पर कई प्रत्याशियों को टिकट दिये हैं।
तू डाल-डाल, मै पात-पात: लोकसभा चुनाव में मध्य प्रदेश की 29 सीटों पर काबिज होने के इरादे के साथ भाजपा ही नहीं, बल्कि कांग्रेस भी अपनी ठोस रणनीति के साथ चुनाव मैदान में उतरते हुए ‘तू डाल-डाल, मै पात-पात’ की कहावत को चरितार्थ करती नजर आ रही है। मसलन भाजपा ने पिछले विधानसभा में राज्य संगठन के चुनाव प्रबंधन की सफलता के फार्मूले के आधार पर लोकसभा सीटों को सात जोन में बांटकर अपनी रणनीति तैयार की है। यही नहीं भाजपा अन्य राज्यों में भी एमपी फार्मूले को अमल लाकर चुनावी रणनीति को हवा दे रही है। दूसरी ओर भाजपा के इस एमपी फार्मूले को टक्कर देने के इरादे से कांग्रेस ने भी राज्य की सभी लोकसभा सीटों को आठ जोन में बांटकर हर लोकसभा क्षेत्र में ‘वार रुम’ स्थापित किये हैं, जहां हर सीट पर एक प्रभारी की नियुक्ति की है, जो कांग्रेस प्रत्याशी, लोकसभा क्षेत्र, जिला प्रभारी एंव संगठन से जुड़े सभी पदाधिकारियों और कांग्रेस संगठन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करेंगे।
एमपी में 5.64 करोड़ मतदाता चुनेंगे सांसद: मध्य प्रदेश की 29 लोकसभा सीटों पर इस बार चुनाव में 5,63,40,064 मतदाता प्रत्याशियों के लोकसभा जाने का रास्ता तय करेंगे। इनमें 2,89,51,705 पुरुष तथा 2,73,87,122 महिला मतदाता है। इस बार 18-19 साल आयु वाले 16,02,647 नए युवा मतदाता पहली बार मतदान करेंगे। प्रदेश में 75,246 सर्विस मतदाता भी हैं। 70 साल से अधिक आयु के बुजुर्ग मतदाताओं की संख्या 28 लाख से अधिक हैं। यहां जबकि नवंबर 2023 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश में 5.60 करोड़ मतदाता थे। यानी पिछले 4 महीने में 3 लाख से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में दर्ज किये गये हैं।
दो सीटों पर पुरुषों के आगे महिला वोटर: पहले चरण में 19 अप्रैल को जिन छह लोकसभा सीटों पर चुनाव में एक करोड़ 1.12 करोड 71 हजार मतदाता वोटिंग करेंगे, जिसमें सर्वाधिक 20.97 लाख मंडला और सबसे कम 16.28 लाख मतदाता छिंदवाड़ा लोकसभा क्षेत्र में हैं। खासबात ये है कि इस चरण में मंडला और बालाघाट ऐसी हैं, जहां महिला मतदाता की संख्या पुरुषों से ज्यादा है। यानी मांडला सीट पर 20,97,051 मतदाताओं में 10,48,930 और बालाघाट सीट पर 18,71,270 मतदाताओं में महिला मतदाताओं की संख्या 941821 है।
भाजपा ने ऐसे जीती थी 28 सीटें: लोकसभा 2019 को हुए पिछले चुनाव में मध्य प्रदेश की 29 सीटों में से भाजपा ने 28 सीटों पर जीत हासिल की थी। जहां तक जोनों के आधार पर राजनीतिक दलों द्वारा विभाजित लोकसभा सीटों का सवाल है, उसमें भाजपा को सबसे ज्यादा भोपाल जोन यानी मध्य भारत में सर्वाधिक 64.6 फीसदी वोट मिले थे। जबकि बुंदेलखंड जोन की सीटों पर 62.18, मालवा-निमाड जोन में 58.44, विंध्य जोन में 56.32, महाकौशल जोन में 52.69 तथा ग्वालियर-चंबल जोन में 51.50 फीसदी वोट हासिल कर जीत हासिल की थी। जबकि कांग्रेस को चंबल जोन में सबसे ज्यादा 38.53 फीसदी और बुंदेलखंड जोन में सबसे कम 39.28 फीसदी वोट ही मिल सके थे और चुनावी नतीजे भाजपा की झोली में चले गये।
इस सीट पर फिर भाजपा की चुनौती: मध्य प्रदेश की छिंदवाड़ा लोकसभा सीट ऐसी है, जिसे भाजपा मोदी लहर में भी नहीं जीत पाई। पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस नेता कमलनाथ का गढ़ कही जाने वाली इस सीट को छोड़कर भाजपा ने बाकी सभी 28 सीटों पर जीत का परचम लहराया था। इस बार भाजपा ने इस सीट के लिए अपनी नई रणनीति बनाकर ज्यादा फोकस किया है। कांग्रेस ने इस बार पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के बेटे नकुलनाथ को प्रत्याशी बनाया है, जिसे चुनौती देने के लिए भाजपा ने बंटी कुमार साहू को ठोस रणनीति के साथ चुनाव मैदान में उतारा है।
चुनाव मैदान ये प्रमुख दल: मध्य प्रदेश में जहां भाजपा सभी सीटों पर अकेले दम पर चुनाव लड़ रही है, तो वहीं कांग्रेस ने इंडिया गठबंधन के सपा व अन्य दलों के साथ चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया है। राज्य में भाजपा के प्रमुख प्रत्याशियों में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, फग्गन सिंह कुलस्ते, महेन्द्र सोलंकी, संध्या राय, आशीष दुबे, अनिता नागर, लता वानखेड़े व बंटी कुमार साहू जैसे प्रत्याशियों को चुनाव मैदान में उतारा है, वहीं कांग्रेस ने हाईब्रांड दिग्वजय सिंह, पूर्वमंत्री कांतिलाल भूरिया, कमलनाथ के बेटे नकुलनाथ, महेश परमार, नीलम मिश्रा और अरुण श्रीवास्तव जैसे उम्मीदवरों पर दांव खेला है। इनके अलावा बसपा और भारत आदिवासी पार्टी भी मध्य प्रदेश में ताल ठोक रही है।
मप्र में कब कहां होंगे चुनाव:
पहला चरण(19 अप्रैल)-सीधी, शहडोल, जबलपुर, मंडला, बालाघाट, छिंदवाड़ा। दूसरा चरण(26 अप्रैल)-टीकमगढ़, दमोह, खजुराहो, सतना, रीवा, होशंगाबाद, बैतूल। तीसरा चरण(07 मई)-मुरैना, भिंड, ग्वालियर, गुना, सागर, विदिशा, भोपाल, राजगढ़। चौथा चरण(13 मई)-देवास, उज्जैन, मंदसौर, रतलाम, धार, इंदौर, खरगोन, खंडवा। 03Apr-2024
उत्तर प्रदेश: नए चुनावी समीकरण बनाकर साधने में जुटे तमाम दल
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के पहले दो चरणों में भाजपा की अग्नि परीक्षा
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की 80 सीटों पर सात चरणों में होने वाले चुनाव पर सभी की नजरे टिकी हैं। भाजपा ने इस बार यूपी के चुनाव मिशन में जहां पश्चिमी उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय लोकदल और पूर्वांचल में अपना दल सुभासपा के साथ चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया है, जहां पिछले चुनाव में भाजपा कमजोर साबित हुई थी। दरअसल यूपी में अलग अलग क्षेत्रों में अलग चुनावी समीकरण की संभावना को लेकर राजग और महागठबंधन ने जनाधार के आधार पर उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारे हैं। हालांकि यूपी के लोकसभा चुनाव का दंगल किस करवट जाएगा, इसका फैसला तो चार जून को आने वाले नतीजे ही तय करेंगे, लेकिन देशभर के राजनीतिक दलों व विश्लेषकों की नजरे सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश पर टिकी हुई हैं।
उत्तर प्रदेश देश का ऐसा सबसे बड़ा राज्य है, जहां 75 जिलों में सर्वाधिक 80 लोकसभा सीट होने के साथ सर्वाधिक जनसंख्या के साथ सबसे ज्यादा मतदाताओं का जाल बिछा हुआ है। यही अकेले यूपी से पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु के अलावा विश्वनाथ प्रताप सिंह, चंद्रशेखर, इंदिरागांधी और चौधरी चरण से लेकर नरेन्द्र मोदी तक कई प्रधानमंत्री भी बने हैं। प्रदेश की राजनीति के समीकरण पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पूर्वांचल, बुंदेलखंड और अवध जैसे क्षेत्रों के हिसाब से आंककर राजनीतिक दल चुनावी जंग में उतरते हैं। मसलन राजनीतिक भाषा में कहा जाए तो केंद्र की सत्ता का रास्ता यूपी से ही होकर जाता है। इसलिए जाहिर सी बात है कि खासकर लोकसभा चुनाव में सभी राजनीतिक दलों की निगाहें उत्तर प्रदेश में होने वाले चुनाव पर रहती है। आजादी से अब तक अलग अलग क्षेत्रों में अपने अलग ही तरह के मुद्दों पर सियासी समीकरण बदलते रहे हैं। फिलहाल की राजनीति में यूपी के पूर्वी इलाके की वाराणसी सीट से पिछले दो लोकसभा चुनाव में चुनाव जीतकर पीएम नरेन्द्र मोदी के कारण भाजपा की पैठ मजबूत हुई है, तो दूसरी सीएम योगी का गढ़ रहे गोरखपुर भी पूर्वांचल भी भाजपा मजबूत मानकर चल रही है। पहले दो चरणों में पश्चमी उत्तर प्रदेश की आठ-आठ सीटों पर जाट लैंड या गन्ना बैल्ट के रुप में पहचाने जा रहे पश्चमी उत्तर प्रदेश की आठ-आठ सीटों यानी 16 सीटों पर पहले व दूसरे चरण में 19 और 26 अप्रैल को मतदान होना है। यह क्षेत्र हमेशा किसान आंदोलन को लेकर राजनीतिक नक्शे पर देखा जा रहा है। इसलिए पिछले चुनाव से सबक लेते हुए भाजपा ने पश्चिम उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय लोकदल, तो पूर्वांचल में सुभासपा को सहयोगी बनाकर चुनाव लड़न का फैसला किया है।
सबसे ज्यादा मतदाता वाला राज्य: लोकसभा चुनाव 2024 में प्रदेश की 80 सीटों पर 15.29 करोड़ मतदाओं को जाल फैला हुआ है, जिसमें 8.14 करोड़ पुरुष, 7.15 करोड़ महिला मतदाता शामिल हैं। प्रदेश में 7,705 ट्रांसजेंडर, 10.50 लाख दिव्यांग और 2.97 लाख सर्विस मतदाता वोटिंग करेंगे। जबकि प्रदेश में बुजुर्ग मतदाताओं की संख्या 24.30 लाख है, जिनमें से 31,774 मतदाता सौ वर्ष की उम्र से ज्यादा के हैं। प्रदेश में इस बार जहां 18-19 वर्ष की आयु के 20.41 लाख युवा पहली बार मतदान करेंगे। वहीं मतदाता सूची में 20 से 29 वर्ष के करीब 30 लाख युवा मतदाताओं के नाम भी शामिल किये गये हैं।
सर्वाधिक मतदान केंद्र: देशभर में हो रहे लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश अकेला ऐसा राज्य है, जहां सबसे ज्यादा 1.62 लाख मतदान केंद्र बनाएं गये हैं, जिनमें 38,959 मतदान केंद्र शहरी क्षेत्रों तथा 1.23 लाख मतदान केंद्र ग्रामीण क्षेत्रों में बनाए गये हैं। दिव्यांगजनों व बुजुर्ग मतदाताओं के लिए घर से मतदान कराने की व्यवस्था की गई है।
पहले व दूसरे चरण में दांव पर प्रतिष्ठा: लोकसभा चुनाव के पहले दो चरणों पश्चमी उत्तर प्रदेश की 16 सीटों पर भाजपा ही नहीं गठबंधन के दलों की प्रतिष्ठा दांव पर होगी। पहले चरण में 19 अप्रैल को 7693 मतदान केंद्रों पर आठ सीटों-सहारनपुर, कैराना, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, नगीना, मुरादाबाद, पीलीभीत, रामपुर को चुनाव होगा। जहां सात महिलाओं समेत 80 प्रत्याशियों के सामने 1.43 करोड़ मतदाताओं के चक्रव्यूह को भेदने की चुनौती होगी, इसमें 76.23 लाख पुरुष, 67.14 लाख महिला तथा 824 थर्डजेंडर मतदाता शामिल है। जबकि दूसरे चरण में 26 अप्रैल को आठ सीटों- अमरोहा, मेरठ, बागपत, गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर, बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा के लिए चुनाव होगा। इस चरण में 7797 मतदान केंद्रों पर 1.67 करोड़ मतदाता मतदान में हिस्सा लेंगे, जिनमें 90.11 लाख पुरुष, 77.38 महिलाएं और 787 थर्डजेंडर शामिल हैं।
क्या जातीय समीकरण: उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी जातीय आधारित सियासत कम नहीं है, जहां ओबीसी किसी भी चुनाव अहम किरदार निभाती आ रही है। हालांकि अलग अलग चुनाव और सीटों पर जातीय समीकरण अलग होता आया है। पिछले दिनो केंद्र की एक समिति की रिपोर्ट मे यूपी में पिछड़ी जातियों की आबादी 7.56 करोड़ आंकी गई है यानी राज्य की कुल आबादी का 50 फिसदी से भी ज्यादा हिस्सा है, जिसमें सर्वाधिक 19.4 प्रतिशत यादव आबादी है। कुर्मी व पटेल की 7.4 प्रतिशत हिस्सेदारी दूसरे पायदान पर हैं। जबकि ओबीसी की कुल संख्या में निषाद, मल्लाह और केवट 4.3 प्रतिशत, भर और राजभर 2.4 प्रतिशत, लोध 4.8 प्रतिशत और जाट 3.6 प्रतिशत हैं।
यूपी में किस चरण में कहां कहां होगी वोटिंग
पहला चरण(19 अप्रैल)-सहारनपुर, कैराना, मुज्जफनगर, बिजनौर, नगीना, मुरादाबाद, पीलीभीत, रामपुर। दूसरा चरण(26 अप्रैल)- अमरोहा, मेरठ, बागपत, गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर, बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा। तीसरा चरण-(07 मई )- संभल, हाथरस, आगरा, फतेहपुर सिकरी, फिरोजाबाद, मैनपुरी, एटा, बदायूं, ओनला, बरेली। चौथा चरण(13 मई)- शाहजहांपुर, फेरी, दौरा, सीतापुर, हरदोई, मिसरिख, उन्नाव, फर्रुखाबाद, इटावा, कन्नौज, कानपुर, अकबरपुर, बहराइच। पांचवां चरण(20 मई)- मोहनलालगंज, लखनऊ, राय बरेली, अमेठी, जालौन, झांसी, हमीरपुर, बांदा, फतेहपुर, कौशांबी, बाराबंकी, फैजाबाद, कैसरगंज, गोंडा। छठा चरण(25 मई)- सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, फूलपुर, प्रयागराज, अंबेडकरनगर, श्ववस्ती, डुमरियांगंज, बस्ती, संत कबीरनगर, लालगंज, आजमगढ़, जौनपुर, मछली शहर, भदोही में मतदान कराया जाएगा। सातवां चरण(01 जून)-महाराजगंज, गोरखपुर, कुशीनगर, देवरिया, वंशगांव, घोसी, सलेमपुर, बलिया, गाजीपुर, चंदौली, वाराणसी, मीरजापुर, रॉर्बट्सगंज सीट पर चुनाव होगा। 02Apr-2024
सोमवार, 1 अप्रैल 2024
बिहार: ‘क्लीन स्वीप’ की सियासी रणनीति के साथ चुनाव मैदान में राजग
चौपाल: युवाओं को अभिनय के गुरु सीखाकर पहचान दिलाते कलाकार डा. हरिकेश पंघाल
उत्तराखंड: पांचो लोकसभा सीटों पर भाजपा व कांग्रेस के बीच वर्चस्व की जंग
बसपा ने त्रिकोणीय मुकाबला बनाने के मकसद से सभी सीटों पर उतारे प्रत्याशी
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव के पहले चरण में 19 अप्रैल को देवभूमि उत्तराखंड की सभी पांच सीटों पर होने वाले चुनाव में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही वर्चस्व के संघर्ष करती नजर आ रही हैं। फिलहाल पांचों सीटों पर भाजपा का कब्जा है। शायद यही कारण है कि इस दिलचस्प राजनीति के चलते इस बार इन पांचों लोकसभा सीटों पर भाजपा ने दो और कांग्रेस ने चार नए चेहरों पर दांव खेला है। हालांकि बसपा भी अपना वोट बैंक बरकरार रखने के लिए सभी सीटों पर चुनावी जंग में है। उत्तराखंड की पांचों सीटों पर नामांकन जांच और वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद 55 प्रत्याशी चुनावी जंग में अपनी किस्मत आजमाएंगे। इनमें सबसे ज्यादा 14 प्रत्याशी हरिद्वार लोकसभा सीट पर हैं, जबकि सबसे कम सात प्रत्याशी अल्मोड़ा सीट पर चुनाव मैदान में होंगे। इसके अलावा गढ़वाल में 13, टिहरी में 11, नैनीताल में 10 प्रत्याशी लोकसभा चुनाव के महाकुंभ में जनता के बीच जाएंगे। भाजपा ने पौडी गढ़वाल सीट पर नए चेहरे के रुप में राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी को उतारकर मुकाबला दिलस्प कर दिया है। इसी प्रकार हरिद्वार सीट से भाजपा ने पहली बार पूर्व सीएम त्रिवेन्द्र सिंह रावत तो कांग्रेस ने पूर्व सीएम हरीश रावत के बेटे वीरेन्द्र रावत पर दांव खेलकर वर्चस्व की लड़ाई बना दिया। वहीं हरिद्वार जिले के कदावर नेता खानपुर के विधायक उमेश कुमार ने भी निर्दलीय प्रत्याशी के रूप हरिद्वार सीट के चुनाव को दिलचस्प मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है। कांग्रेस नैनीताल व टिहरी सीट पर भी नए चेहरे उतारे हैं। इन लोकभा चुनाव में खासबात ये भी है कि भाजपा और कांग्रेस के मुकाबले को त्रिकोणीय चुनावी संघर्ष बनाने के इरादे से बहुजन समाज पार्टी ने भी पांचों सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। हालांकि कांग्रेस का दावा है कि बसपा को चुनाव मैदान में आने के पीछे कांग्रेस के वोटबैंक में सेंधमारी के मकसद से भाजपा की सियासी साजिश काम कर रही है। राज्य के राजनीतिक विशेषज्ञ भी कांग्रेस के इस दावे को पुख्ता करते नजर आ रहे हैं, जिसमें बसपा प्रत्याशियों को पड़ने वाले वोट से भाजपा को राजनीतिक लाभ मिलने वाला है। जबकि बसपा पिछले चुनाव में भी अपने उम्मीदवारों को चुनावी मैदान में उतारा था और वह अपने वोट प्रतिशत को बढ़ाने की फिराक में है।
83.38 लाख मतदाता चुनेंगे पांच सांसद
उत्तराखंड में इस बार लोकसभा चुनाव की पांच सीटों पर 83,37,914 मतदाता मतदान करेंगे। इनमें 43,17,579 पुरुष और 40,20,038 महिला मतदाता हैं। जब कि 297 थर्ड जेंडर मतदाता है। राज्य में सर्विस मतदाताओं की संख्या 93,187 है, जिसमें 90,554 पुरुष और 2633 महिला सर्विस वोटर हैं। 1,45,220 युवा वोटर पहली बार वोटिंग करेंगे। इनमें 1363 ऐसे बुजुर्ग मतदाता भी शामिल है जो 100 वर्ष की आयु पूरी कर चुके हैं, जिनमें सबसे ज्यादा महिलाएं शामिल है। ऐसे मतदाताओं को पोस्टल बैलेट का विकल्प लेने की सुविधा दी गई है। हरिद्वार सीट पर सबसे ज्यादा 20,31,632 और अल्मोड़ा सीट पर सबसे कम 13,37,648 मतदाता हैं।
मतदान केंद्रों की ये व्यवस्था
राज्य में कुल 11,729 पोलिंग स्टेशन बनाए गए हैं। इसमें 12 पोलिंग पार्टियां मतदान से तीन दिन पूर्व पोलिंग स्टेशन के लिए प्रस्थान करेंगी। इसमें 11 पोलिंग स्टेशन उत्तरकाशी में और एक पोलिंग स्टेशन पिथौरागढ़ में चिह्नित किया गया है। 705 पोलिंग पार्टियां मतदान से दो दिन पूर्व पोलिंग स्टेशन के लिए प्रस्थान करेंगी और 11012 पोलिंग पार्टियां मतदान से एक दिन पूर्व पोलिंग स्टेशन के लिए प्रस्थान करेंगी। मतदान से दो दिन पूर्व प्रस्थान करने वाली सर्वाधिक पौड़ी में 181 और अल्मोड़ा में 136 पोलिंग पार्टियां हैं।
प्रवासी भी करेंगे मतदान
उत्तराखंड में रहने वाले जम्मू-कश्मीर के प्रवासी भी अब डाक मतपत्रों के जरिये मतदान कर सकेंगे। यह सुविधा केवल बारामूला श्रीनगर और अनंतनाग-राजौरी लोकसभा सीट के उन मतदाताओं के लिए है, जो परिस्थितिवश पलायन कर गए थे। वहीं प्रदेश में अब सर्विस मतदाताओं से प्राप्त आवेदनों के बाद राज्य मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने इनकी संख्या तय कर दी है।
किस सीट पर कितने प्रत्याशी
उत्तराखंड की पांचों सीटों पर नामांकन जांच और वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद 55 प्रत्याशी चुनावी जंग में अपनी किस्मत आजमाएंगे। इनमें सबसे ज्यादा 14 प्रत्याशी हरिद्वार लोकसभा सीट पर हैं, जबकि सबसे कम सात प्रत्याशी अल्मोड़ा सीट पर चुनाव मैदान में होंगे। इसके अलावा गढ़वाल में 13, टिहरी में 11, नैनीताल में 10 प्रत्याशी लोकसभा चुनाव के महाकुंभ में जनता के बीच जाएंगे।
इनके बीच मुख्य चुनावी जंग
उत्तराखंड की पांच सीटों पर भाजपा, कांग्रेस और बसपा ने मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने के मकसद से सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किये हैं। राज्य की टिहरी से मालाराज्य लक्ष्मीा शाह, कांग्रेस ने जोत सिंह गुनसोला और बसपा ने नीम चंद्र छुरियाल को प्रत्याशी बनाया है। जबकि गढ़वाल सीट पर भाजपा के अनिल बलूनी, कांग्रेस के गणेश गोदियाल व बसपा के धीर सिंह बिष्ट चुनाव मैदान में हैं। कुमायूं की दो सीटों में अल्मोड़ा (सुरक्षित) से भाजपा के अजय टम्टाी, कांग्रेस के प्रदीप टम्टा के बीच बसपा से नरायण राम ताल ठोक रहे हैं, तो नैनीताल-उधमसिंह नगर सीट पर भाजपा के अजय भट्ट, कांग्रेस के प्रकाश जोशी और बसपा के अख्तर अली माहीगिर के बीच मुकाबला होगा। जबकि हरिद्वार लोकसभा सीट पर भाजपा ने त्रिवेंद्र सिंह रावत, कांग्रेस ने वीरेंद्र रावत तथा बसपा ने जमील अहमद को उम्मीदवार बनाया है। 31Mar-2024

