एक जमाना था जब लोग अपने घरों के बाहर लिखते थे-अतिथि देवो भव: फिर शुरू किया-शुभ लाभ और बाद में लिखा जाने लगा-यूं आर वेलकम अब शुरू हो गया-......से सावधान!
सोमवार, 1 फ़रवरी 2021
भारतीय रेलवे ने 18 रेल मार्गो पर चलाई किसान रेलगाड़ियां
अब तक 157 किसान रेल में की गई 49 हजार टन से अधिक माल ढुलाई
फल एवं सब्ज़ियों की ढुलाई पर 50 फीसदी की सब्सिडी का प्रावधान
हरिभूमि ब्यूरो.नई दिल्ली।
वैश्विक कोरोना महामारी के बावजूद पिछले साल केंद्रीय बजट की घोषणाओं पर अमल करते हुए भारतीय रेलवे ने किसानों के उत्पादों को रेल परिवहन मुहैया कराने की दिशा में अब तक देश के 18 रेल मार्गो पर 157 किसान रेलगाड़ियों का परिचालन किया है। किसान रेल के जरिए देश के एक कोने से दूसरे कोने तक ने दूध, मीट और मछली सहित जल्दी ख़राब होने वाले खाद्य पदार्थ और कृषि उत्पादों समेत 49 हजार टन से अधिक माल की ढुलाई की गई है।
रेल मंत्रालय के अनुसार केन्द्रीय बजट 2020-21 में की गई घोषणा के अनुसार भारतीय रेलवे ने दूध, मीट और मछली सहित जल्दी ख़राब होने वाले खाद्य पदार्थ और कृषि उत्पादों की ढुलाई के लिए किसान रेल सेवा शुरू कर दी है। यह मल्टी-कमोडिटी, मल्टी-कंसाइनर/कंसाइनी, मल्टी-लोडिंग/अनलोडिंग परिवहन सेवा है, जिसका उद्देश्य किसानों को बड़े स्तर पर बाज़ार उपलब्ध कराना है। किसान रेल सेवा का मुख्य उद्देश्य उत्पादन केन्द्रों को बाज़ार और उपभोक्ता केन्द्रों से जोड़कर कृषि क्षेत्र की आय को बढ़ाना है। भारतीय रेलवे किसान रेल सेवा को औपचारिक रूप से शुरू करने की योजना बनाने के लिए कृषि मंत्रालय, राज्य सरकारें और स्थानीय निकायों सहित विभिन्न हितधारकों के साथ सक्रिय रूप से काम कर रहा है। डिमांड संबंधी रुझान और हितधारकों से प्राप्त फीडबैक के आधार पर रेलवे ने अब तक 18 रूटों पर किसान रेल सेवा संचालित करना शुरू कर दिया है। किसान रेल के माध्यम से बुक की जाने वाली वस्तुओं पर ‘पी’ स्केल का माल शुल्क लगाया जाता है। खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय की ‘ऑपरेशन ग्रीन्स-टोप टू टोटल’ योजना के तहत किसान रेल के माध्यम से फल एवं सब्ज़ियों की ढुलाई पर 50 फीसदी की सब्सिडी दी जा रही है। ये सब्सिडी कन्साइनर/किसान को अपने सामान की बुकिंग के समय पर ही दी जा रही है, ताकि ये लाभ बिना किसी झंझट और देरी के किसानों तक पहुंच सके।
अगस्त में चलाई गई पहली किसान रेल
रेलवे के अनुसार गत 07 अगस्त 2020 को देवलाली (महाराष्ट्र) और दानापुर (बिहार) के बीच हरी झंडी दिखाकर पहली किसान रेल की शुरूआत की गई थी, जिसके बाद इसमें विस्तार करते हुए भारतीय रेलवे ने निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार 18 रूटों पर 157 किसान रेल सेवाएं संचालित की जा चुकी हैं, जो 49000 टन से अधिक माल की ढुलाई कर रही हैं। अब तक जिन रूटों पर किसान रेल सेवाएं संचालित की जा रही हैं, संचालित किया जाता है, और रास्ते में आने वाली किसी बाधा या देरी से बचाने के लिए इनकी समय की पाबंदी के पैमाने पर कड़ी निगरानी की जाती है। मुख्य रूप से जिन वस्तुओं को किसान रेल के माध्यम से एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजा जा रहा है, उनमें प्याज़, टमाटर, संतरा, आलू, अनार, केला, शरीफा, गाजर, शिमला मिर्च और अन्य सब्ज़ियां शामिल हैं।
ये किसान रेल के 18 रुट
रेल मंत्रालय के अनुसार भारतीय रेलवे की किसान रेल सेवाओं में अब तक चलाई जा रही किसान रेलगाड़ियों में देवलाली से दानापुर और अब संगोला से मुज़फ्फरपुर, अनंतरपुर से आदर्श नगर दिल्ली, यशवंतपुर से निज़ामुद्दीन, नागपुर से आदर्श नगर दिल्ली, छिंदवाड़ा से हावड़ा/न्यू तिनसुकिया, संगोला से वाया सिकंदराबाद हावड़ा, संगोला से शालीमार, इंदौर से न्यू गुवाहाटी, रतलाम से न्यू गुवाहाटी, इंदौर से अगरतला, जालंधर से जिरानिया, नागरसोल से न्यू गुवाहाटी, नागरसोल से चितपुर, नागरसोल से न्यू जलपाईगुड़ी, नागरसोल से नौगचिया, नागरसौल से फतुहा, नौगरसौल से बैहाटा और नागरसौल से मालदा टाउन तक शामिल हैं।
31Jan-2021
कृषि कानूनों के मुद्दे पर खुले दिमाग से विचार कर रही है सरकार
संसद के बजट सत्र: सर्वदलीय बैठक में बोले पीएम मोदी
सभी दलों से संसद में सुचारू कामकाज के महत्व पर सहयोग पर बल
हरिभूमि ब्यूरो.नई दिल्ली।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बजट सत्र में संसद के सुचारू कामकाज और सदन के पटल पर व्यापक बहस के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि सरकार और किसानों के बीच जारी गतिरोध को बातचीत के जरिए हल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार कृषि कानूनों के मुद्दे पर खुले दिमाग से विचार कर रही है।
संसद के शुरू हुए बजट सत्र की कार्यवाही को सुचारू रुप से चलाने की दिशा में केंद्र सरकार द्वारा शनिवार को संसद भवन में सर्वदलीय बैठक बुलाई। इस बैठक की वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए अध्यक्षता करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बैठक में शामिल हुए विभिन्न दलों को भरोसा दिया कि सरकार खुले दिमाग से कृषि कानूनों के मुद्दे पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का रुख वैसा ही है, जैसा 22 जनवरी को था। उन्होंने कहा कि सरकार कृषि मंत्री द्वारा किसानों के समक्ष दिया गया प्रस्ताव अभी भी कायम है। उन्होंने दोहराया कि कृषि मंत्री को सिर्फ एक फोन कॉल करके बातचीत को आगे बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन का समाधान बातचीत के जरिए ही निकाला जा सकता है। प्रधानमंत्री ने केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के हवाले से सभी दलों के नेताओं को कृषि कानूनों पर सरकार के रुख की जानकारी दी।
सभी मुद्दो पर चर्चा को तैयार सरकार
प्रधानमंत्री ने नरेन्द्र मोदी ने सर्वदलीय बैठक में विभिन्न दलों के नेताओं द्वारा उठाए गए मुद्दों पर कहा कि सरकार हर मुद्दे पर विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने संसद के सुचारू कामकाज और सदन के पटल पर व्यापक बहस के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सदन में बार-बार होने वाले व्यवधानों के कारण छोटे राजनीतिक दलों को पर्याप्त रूप से खुद को व्यक्त करने का अवसर नहीं मिल पाता है। उन्होंने कहा कि बड़े राजनीतिक दलों यह सुनिश्चित करना चाहिए कि संसद सुचारू रूप से चले, कोई व्यवधान न हो और इस प्रकार, छोटे दल संसद में अपने विचार रखने में सक्षम हों। वहीं बैठक में नेताओं द्वारा 26 जनवरी की दुर्भाग्यपूर्ण घटना का जिक्र आने पर प्रधानमंत्री ने कहा कि कानून अपना काम करेगा। सर्वदलीय बैठक में कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद, तृणमूल कांग्रेस के सुदीप बंद्योपाध्याय, शिवसेना सांसद विनायक राउत और शिरोमणि अकाली दल के बलविंदर सिंह भांडेर ने किसान आंदोलन पर बात की। जबकि जनता दल यूनाइटेड के सांसद आरसीपी सिंह ने कानूनों का समर्थन किया।
विश्व में भारत का महत्वपूर्ण योगदान
सर्वदलीय बैठक में पीएम मोदी ने कहा कि मौजूदा विश्व परिदृश्य में भारत बड़ा योगदान दे सकता है। इससे विकास होगा और गरीबों को लाभ पहुंचेगा। इससे सरकार को श्रेय का सवाल नहीं है, बल्कि देश को कामयाबी मिलेगी। सभी दलों को इसमें योगदान देने का आह्वान करते हुए पीएम ने कहा कि सरकार इसे लेकर सभी विषयों पर चर्चा को तैयार है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत दुनिया की भलाई के लिए कई क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने देशवासियों के कौशल और साहस का उल्लेख किया, जो वैश्विक समृद्धि को गुणात्मक रूप से बढ़ाने के लिए एक ताकत हो सकती है। इस मौके पर प्रधानमंत्री ने महात्मा गांधी को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि हमें उनके सपनों को पूरा करने की दिशा में प्रयास करना चाहिए। उन्होंने आज सुबह यूएसए में महात्मा गांधी की प्रतिमा को नुकसान पहुँचाने की घटना की निंदा करते हुए कहा कि नफरत का ऐसा माहौल हमारी दुनिया के लिए स्वागत योग्य नहीं है। इससे एक दिन पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी सर्वदलीय बैठक बुलाकर सभी दलों से सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने में सहयोग की अपील की थी।
31Jan-2021
पश्चिम बंगाल तक पहुंचा केवीआईसी का खादी अभियान
स्थानीय रोजगार के लिए 2250 कारीगरों को चरखे व परिधान मशीनें वितरित
हरिभूमि ब्यूरो.नई दिल्ली।
केंद्र सरकार की स्वदेशी उत्पादों को प्रोत्साहन देने और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन की दिशा में खादी और ग्रामोद्योग आयोग ने पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में 2250 कारीगरों को चरखे, सिल्क चरखे, रेडीमेड परिधान बनाने की मशीनों का वितरण करके एक व्यापक रोजगार अभियान की शुरुआत की है।
केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय ने यह जानकारी देत हुए बताया कि पश्चिम बंगाल में स्थायी आजीविका के अवसर तैयार करने के मकसद से केवीआईसी के अध्यक्ष विनय कुमार सक्सेना ने मालदा जिले में नए मॉडल के 1155 चरखे, 435 सिल्क चरखे, 235 रेडीमेड परिधान बनाने की मशीन, 230 आधुनिक करघे और कारीगरों के परिवारों को 135 रीलिंग बेसिन वितरित किए। लाभार्थियों में लगभग 90 प्रतिशत महिला कारीगर शामिल हैं, जो कताई और बुनाई की गतिविधियों से जुड़ी हैं। इन उन्नत उपकरणों का वितरण हाल के वर्षों में पश्चिम बंगाल में इस तरह के सबसे बड़े अभियानों में से एक है। यह अभियान मालदा में रेशम और सूती उद्योग में कताई, बुनाई और रीलिंग गतिविधियों के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन होगा। केवीआईसी ने मालदा के 22 खादी संस्थानों को मजबूत करने के लिए 14 करोड़ रुपये का वितरण किए हैं। यह अभियान इस जिले में रेडीमेड परिधान उद्योग को भी मजबूत करेगा, जो स्थानीय कारीगरों के लिए आजीविका का एक प्रमुख स्रोत रहा है। केवीआईसी के अध्यक्ष विनय कुमार सक्सेना ने कहा कि पश्चिम बंगाल में खादी उद्योग को मजबूत करना प्रधानमंत्री के हर परिवार में एक चरखा होने के सपने के साथ जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि इससे हर हाथ को काम मुहैया कराने के बड़े लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी। सक्सेना ने कहा कि पश्चिम बंगाल में पारंपरिक कपास और रेशम उद्योग को मजबूत करके राज्य में बड़े पैमाने पर रोजगार का सृजन करने पर केवीआईसी का मुख्य रूप से जोर दे रहा है। बंद इकाइयों को पुनर्जीवित करने, मौजूदा उद्योगों को मजबूत करने और स्थानीय कारीगरों के लिए स्थायी स्थानीय रोजगार सृजित करने से न केवल वित्तीय आत्मनिर्भरता सुनिश्चित होगी बल्कि पश्चिम बंगाल को कपास, रेशम एवं परिधान निर्माण के क्षेत्र में और भी अधिक मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।
राज्य की पुरानी शिल्प होगी पुनर्जीवित
केवीआईसी के अध्यक्ष ने कहा कि पश्चिम बंगाल में शुरू की गई रोजगार गतिविधियां ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘स्थानीय के लिए मुखर’ आह्वान को बढ़ावा देंगी। उन्होंने कहा कि उन्नत मशीन के साथ कारीगरों को सशक्त बनाने से उत्पादन गतिविधियों में तेजी आएगी और अंततः उनकी आय में वृद्धि होगी। यह पश्चिम बंगाल के पुराने शिल्प को पुनर्जीवित करने में एक लंबा रास्ता तय करेगा। गौरतलब है कि कई सदियों से पश्चिम बंगाल कुछ बेहतरीन सूती और रेशमी कपड़े के उत्पादन के लिए जाना जाता है। राज्य व्यापक रूप से अपने मूगा, शहतूत और तसर रेशम के लिए प्रख्यात है, जो पीढ़ियों से एक प्रमुख कारीगरी गतिविधि थी। राज्य अपने विश्व प्रसिद्ध मुस्लिन कपास के लिए भी जाना जाता है। केवीआईसी ने पहली बार अपने ई-पोर्टल के माध्यम से मलमल कपड़े को ऑनलाइन बिक्री मंच प्रदान किया है, जिसने बंगाल की खादी संस्थाओं को काफी बढ़ावा दिया है। सक्सेना ने संस्थानों से दरियों, कंबल आदि जैसे नए उत्पादों का पता लगाने का भी आग्रह किया, जिसके लिए केवीआईसी को अर्धसैनिक बलों से आ रही भारी मांग को पूरा कर सकेगा।
31Jan-2021
राष्ट्रपति केअभिभाषण के साथ शुरू हुआ संसद का बजट सत्र
किसानों से लेकर कोरोना तक मोदी सरकार के कदमों को सराहा
राष्ट्रपति कोविंद ने लाल किला पर तिरंगे के अपमान पर दी नसीहत
हरिभूमि ब्यूरो.नई दिल्ली।
संसद के बजट सत्र की शुरूआत राष्ट्रपति कोविंद के अभिभाषण के साथ शुरू हो गई है। इस दौरान अभिभाषण में बोलते हुए राष्ट्रपति कोविंद ने गणतंत्र दिवस पर लाल किला पर तिरंगे के अपमान, कृषि कानून, भारत और चीन के बीच जारी गतिरोध, गलवां घाटी में शहीद हुए जवानों, कोरोना वायरस, देश की अर्थव्यवस्था, आत्मनिर्भर भारत मिशन, जल जीवन मिशन, कोरोना वैक्सीन जैसे अनेक मुद्दों को उजागर किया। कोरोना महामारी के कारण शायद यह पहला मौका है जब संयुक्त सदनों की बैठक में संसद सदस्य केंद्रीय कक्ष के अलावा लोकसभा और राज्यसभा कक्ष में भी बैठाए गये।
संसद के बजट सत्र के पहले दिन शुक्रवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक के संबोधन में कोविंद ने बजट सत्र के पहले दिन संसद के केन्द्रीय कक्ष में दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में अपने अभिभाषण के 91 बिंदुओं में मोदी सरकार की उपलब्धियों और देश व समाज हित में उठाए गये कदमों का जिक्र किया, जिसके लिए सदस्यों ने मेजे थपथपाकर अभिवादन किया। कोरोना महामारी के मद्देनजर शायद आजाद भारत के इतिहास में पहली बार संसद सदस्यों और मंत्रिपरिषद के सदस्यों को लोकसभा और राज्य सभा कक्ष में भी बैठाया गया। अपने अभिभाषण में कोविंद ने गणतंत्र दिवस पर लाल किला पर राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के हुए अपमान बहुत दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए नसीहत दी और कहा कि संविधान हमें अभिव्यक्ति की आजादी का अधिकार देता है, वही संविधान हमें सिखाता है, कि कानून और नियम का भी उतनी ही गंभीरता से पालन करना चाहिए। राष्ट्रपति कोविंद कहा कि कोरोना काल में मोदी सरकार के फैसलों की वजह से लाखों लोगों की जानें बचीं। कृषि कानूनों को बेहतर बताते हुए कहा कि इन कानूनों के जरिए सरकार ने किसानों को नई सुविधाएं दी है और नए अधिकार भी। उन्होंने कोरोना महामारी जैसे संकट को लेकर कहा कि चुनौती कितनी ही बड़ी क्यों न हो, न हम रुकेंगे और न भारत रुकेगा। भारत जब-जब एकजुट हुआ है, तब-तब उसने असंभव से लगने वाले लक्ष्यों को प्राप्त किया है। महामारी के खिलाफ इस लड़ाई में हमने अनेक देशवासियों को असमय खोया भी है। सरकार के समय पर लिए गए सटीक फैसलों से लाखों देशवासियों का जीवन बचा है। आज देश में कोरोना के नए मरीजों की संख्या भी तेजी से घट रही है और जो संक्रमण से ठीक हो चुके हैं उनकी संख्या भी बहुत अधिक है।
कोरोना काल में अर्थव्यवस्था पर रहा फोकस
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए रिकॉर्ड आर्थिक पैकेज के जरिए केंद्र सरकार ने इस बात का भी ध्यान रखा कि किसी गरीब को भूखा न रहना पड़े। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के माध्यम से 8 महीनों तक 80 करोड़ लोगों को 5 किलो प्रतिमाह अतिरिक्त अनाज निशुल्क सुनिश्चित किया गया। सरकार ने प्रवासी श्रमिकों, कामगारों और अपने घर से दूर रहने वाले लोगों की भी चिंता की। महामारी के दौरान गरीब कल्याण रोजगार अभियान के तहत 50 करोड़ मैन डेज के बराबर रोजगार पैदा हुए। राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि करीब 31 हजार करोड़ रुपए गरीब महिलाओं के जनधन खातों में सीधे ट्रांसफर भी किए और उज्ज्वला योजना में गरीब महिलाओं को 14 करोड़ से अधिक मुफ्त गैस सिलेंडर दिये। वहीं आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत देश में 1.5 करोड़ गरीबों को 5 लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज मिला है। प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत सरकार ने 22 नए ‘एम्स’ को भी मंजूरी दी है। उन्होंने कहा कि भारत के लिए गर्व की बात है कि आज भारत दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान चला रहा है। इस प्रोग्राम की दोनों वैक्सीन भारत में ही निर्मित हैं। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार द्वारा स्वास्थ्य के क्षेत्र में पिछले 6 वर्षों में जो कार्य किए गए हैं, उनका बहुत बड़ा लाभ हमने इस कोरोना संकट के दौरान देखा है।
कृषि और किसानों का रखा गया ख्याल
अभिभाषण के दौरान राष्ट्रपति ने कृषि क्षेत्र और किसानों को लेकर कहा कि सरकार ने बीते 6 वर्षों में बीज से लेकर बाज़ार तक हर व्यवस्था में सकारात्मक परिवर्तन का प्रयास किया है, ताकि भारतीय कृषि आधुनिक भी बने और कृषि का विस्तार भी हो। मेरी सरकार ने स्वामीनाथन आयोग की सिफ़ारिशों को लागू करते हुए लागत से डेढ़ गुना एमएसपी देने का फैसला भी किया था। सरकार आज न सिर्फ एमएसपी पर रिकॉर्ड मात्रा में खरीद कर रही है, बल्कि खरीद केंद्रों की संख्या को भी बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि 2013-14 में जहां 42 लाख हेक्टेयर जमीन में ही माइक्रो-इरिगेशन की सुविधा थी, वहीं आज 56 लाख हेक्टेयर से ज्यादा अतिरिक्त जमीन को माइक्रो-इरिगेशन से जोड़ा जा चुका है।
नए कृषि कानून बदलेंगे किसानों की तकदीर
कृषि क्षेत्र को नई दिशा और किसानों की आय में बढ़ोतरी के इरादे से ही सरकार ने सात महीने पूर्व तीन महत्वपूर्ण कृषि सुधार, कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक, कृषि (सशक्तीकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा करार विधेयक, और आवश्यक वस्तु संशोधन विधेयक पारित किए हैं। इन कृषि सुधारों का सबसे बड़ा लाभ भी 10 करोड़ से अधिक छोटे किसानों को तुरंत मिलना शुरू हुआ। इन कृषि सुधारों के जरिए सरकार ने किसानों को नई सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ नए अधिकार भी दिए हैं। इसके अलावा लघु सिंचाई योजना, प्रधानमंत्री कृषि सम्मान निधि, कृषि बीमा, मत्स्य योजना, खाद्यान्न उत्पादन, का भी जिक्र किया। वहीं उन्होंने राम मंदिर, जम्मू कश्मीर में जिला परिषद चुनाव, स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग पर ‘वोकल फार लोकल’ के जिक्र करने के साथ सरकार की मुद्रा योजना, महिलाओं की भागीदारी एवं स्वरोजगार, जनधन एवं उज्ज्वला योजना, नये एम्स को मंजूरी, शौचालयों का निर्माण का भी उल्लेख किया। उनके भाषण में सांसदों ने टीकाकरण अभियान, प्रत्यक्ष विदेश निवेश में वृद्धि, आधारभूत ढांचे के विकास के लिये निवेश, बोडो शांति समझौता, नक्सली हिंसा में कमी, वास्तविक नियंत्रण रेखा पर शांति भंग करने के प्रयास, भारत और चीन के बीच जारी गतिरोध जैसी चुनौतियों से निपटने की नीतियों को भी सराहा।
30Jan-2021
संसद में पेश हुई आर्थिक समीक्षा 2020-21: वित्त वर्ष 2021-22 में जीडीपी 11 प्रतिशत रहने का अनुमान
वित्त वर्ष 2021-22 में जीडीपी 11 प्रतिशत रहने का अनुमान
इस साल 7.7 फीसदी तक गिर सकती है जीडीपी
हरिभूमि ब्यूरो.नई दिल्ली।
संसद के शुरू हुए बजट सत्र में राष्ट्रपति अभिभाषण के बाद लोकसभा और राज्यसभा में पेश की गई आर्थिक समीक्षा में कोरोना वायरस महामारी के कारण लॉकडाउन से प्रभावित अर्थव्यवस्था में वित्त वर्ष 2021-22 में तेजी से पुनरूद्धार की उम्मीद जताई गई। वहीं अनुमान लगाया गया कि वित्त वर्ष 2021-22 में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 11 प्रतिशत और सांकेतिक जीडीपी वृद्धि दर 15.4 प्रतिशत रहेगी, जो देश की आजादी के बाद सर्वाधिक है।
संसद में एक फरवरी को पेश किये जाने वाले केंद्रीय बजट से पूर्व शुक्रवार को शुरू हुए बजट सत्र के बाद लोकसभा और राज्यसभा की बैठकों में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आर्थिक समीक्षा में आर्थिक वृद्धि को गति देने के लिये आगे किये जाने वाले सुधारों के बारे में सुझाव भी दिये गये हैं। आर्थिक समीक्षा के सार में कहा गया कि कोरोना वायरस महामारी के कारण लॉकडाउन से प्रभावित अर्थव्यवस्था में वित्त वर्ष 2021-22 में तेजी से पुनरूद्धार की उम्मीद है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर में 23.9 प्रतिशत और दूसरी तिमाही में 7.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। पूरे वित्त वर्ष में 7.7 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान है। जबकि अगले वित्त वर्ष 2021-22 में जीडीपी यानि सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर 11 प्रतिशत और सांकेतिक जीडीपी वृद्धि दर 15.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है। आर्थिक समीक्षा में कहा गया कि व्यापक टीकाकरण अभियान, सेवा क्षेत्र में तेजी से हो रही बेहतरी और उपभोग एवं निवेश में त्वरित वृद्धि की संभावनाओं की बदौलत देश में ‘वी’ आकार में आर्थिक विकास संभव होगा। आर्थिक समीक्षा 2020-21 में कहा गया है कि पिछले वर्ष के अपेक्षा से कम रहने वाले संबंधित आंकड़ों के साथ-साथ कोविड-19 के उपचार में कारगर टीकों का उपयोग शुरू कर देने से देश में आर्थिक गतिविधियों के निरंतर सामान्य होने की बदौलत ही आर्थिक विकास फिर से तेज रफ्तार पकड़ पाएगा।
अगले दो वर्ष में तेजी से बढ़ेगी अर्थव्यवस्था
आईएमएफ के अनुसार भारत अगले दो वर्षों में सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बन जाएगा। देश के बुनियादी आर्थिक तत्व अब भी मजबूत हैं, क्योंकि लॉकडाउन को क्रमिक रूप से हटाने के साथ-साथ आत्मनिर्भर भारत मिशन के जरिए दी जा रही आवश्यक सहायता के बल पर अर्थव्यवस्था बड़ी मजबूती के साथ बेहतरी के मार्ग पर अग्रसर है, जिसकी बदौलत वर्ष 2019-20 की विकास दर की तुलना में वास्तविक जीडीपी में 2.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज होगी, जिसका मतलब यही है कि अर्थव्यवस्था दो वर्षों में ही महामारी पूर्व स्तर पर पहुंचने के साथ-साथ इससे भी आगे निकल जाएगी। ये अनुमान दरअसल आईएमएफ के पूर्वानुमान के अनुरूप ही हैं जिनमें कहा गया है कि भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर वित्त वर्ष 2021-22 में 11.5 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2022-23 में 6.8 प्रतिशत रहेगी। आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि ‘सौ साल में एक बार’ भारी कहर ढाने वाले इस तरह के गंभीर संकट से निपटने के लिए भारत ने अत्यंत परिपक्वता दिखाते हुए जो विभिन्न नीतिगत कदम उठाए हैं। भारत के ये नीतिगत कदम दीर्घकालिक लाभों पर फोकस करने के महत्वपूर्ण फायदों को भी दर्शाते हैं। भारत ने नियंत्रण, राजकोषीय, वित्तीय और दीर्घकालिक ढांचागत सुधारों के चार स्तम्भों वाली अनूठी रणनीति अपनाई। देश में उभरते आर्थिक परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए सुव्यवस्थित ढंग से राजकोषीय और मौद्रिक सहायता दी गई।
कृषि क्षेत्र विकास में आशा की किरण
भारत में कोरोना महामारी के प्रकोप के बाद बढ़ती गतिशीलता पर फोकस करने से पता चलता है कि ई-वे बिल, रेल माल भाड़ा, जीएसटी संग्रह और बिजली की मांग बढ़ने जैसे संकेतक पिछले वर्ष के स्तरों को भी पार कर गये है। वहीं रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे मासिक जीएसटी संग्रह इस बात का संकेत है कि देश में औद्योगिक एवं वाणिज्यिक गतिविधियों को किस हद तक उन्मुक्त कर दिया गया है। वाणिज्यिक प्रपत्रों की संख्या में तेज वृद्धि, यील्ड में कमी आने और एमएसएमई को मिले कर्जों में उल्लेखनीय वृद्धि कि विभिन्न उद्यमों को अपना अस्तित्व बनाए रखने और विकसित होने के लिए व्यापक मात्रा में कर्ज देने की नीतियों का नतीजा हैं। यहीं कारण है कि आर्थिक समीक्षा में वित्त वर्ष के दौरान विनिर्माण क्षेत्र में भी उल्लेखनीय मजबूती देखी गई, ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती मांग से समग्र आर्थिक गतिविधियों को आवश्यक सहारा मिला और इसके साथ ही तेजी से बढ़ते डिजिटल लेन-देन के रूप में उपभोग संबंधी ढांचागत बदलाव देखने को मिले। समीक्षा में कहा गया है कि कृषि क्षेत्र की बदौलत वर्ष 2020-21 में भारतीय अर्थव्यवस्था को कोविड-19 महामारी से लगे तेज झटकों के असर काफी कम हो जाएंगे। कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर पहली तिमाही के साथ-साथ दूसरी तिमाही में भी 3.4 प्रतिशत रही है। सरकार द्वारा लागू किए गए विभिन्न प्रगतिशील सुधारों ने जीवंत कृषि क्षेत्र के विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया है जो वित्त वर्ष 2020-21 में भी भारत की विकास गाथा के लिए आशा की किरण है।
30Jan-2021
केवीआईसी ने असम में पुनर्जीवित किया खादी संस्थान
तीन दशक पहले बोडो विद्रोहियों जलाकर कर दिया था ध्वस्त
हरिभूमि ब्यूरो.नई दिल्ली।
असम के सबसे पुराने खादी संस्थानों में से एक है, पिछले तीस सालों से बोडो विद्रोह के चलते बर्बादी के कगार पर रहा। बोड़ो विद्रोहियों द्वारा जलाकर ध्वस्त इस खादी संस्थान को खादी और ग्रामोद्योग आयोग पुनजीर्वित कर नई जिंदगी दी है।
केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय ने गुरुवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि असम के बक्सा जिले के कावली गांव में इस खादी उद्योग संस्थान को वर्ष 1989 में बोडो विद्रोहियों ने जलाकर नष्ट कर दिया था, उसे अब केवीआईसी ने सिल्क रीलिंग सेंटर के रूप में पुनर्जीवित किया गया है। अब फरवरी के दूसरे सप्ताह में 15 महिला कारीगरों और 5 अन्य कर्मचारियों के साथ यहां कताई और बुनाई की गतिविधियां फिर से शुरू होंगी। मंत्रालय के अनुसार 1962 में चीन के आक्रमण के बाद अरुणाचल प्रदेश से असम में स्थानांतरित हुए तामुलपुर आंचलिक ग्रामदान संघ नामक खादी संस्था द्वारा इसका निर्माण किया गया था। शुरुआत में सरसों के तेल का उत्पादन यहां शुरू हुआ था और 1970 से यहां कताई और बुनाई गतिविधियों ने भी 50 कारीगर परिवारों को यहां आजीविका प्रदान करना शुरू कर दिया था। मगर त्रासदी तब हुई जब 1989 में इस संस्थान को चरमपंथियों द्वारा जला दिया गया और तब से यह बंद रही।
केवीआईसी के अध्यक्ष विनय कुमार सक्सेना ने कहा कि इस खादी संस्थान के पुनरुद्धार ने ऐतिहासिक महत्व ग्रहण किया है और खादी गतिविधियों को फिर से शुरू करने से स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा। उन्होंने कहा कि शुरुआत में केवाइसी असम की एरी सिल्क की रीलिंग के लिए इकाई को विकसित करेगा। भविष्य में अन्य खादी गतिविधियों जैसे ग्रामोद्योग उत्पादों का निर्माण भी शुरू किया जाएगा। यह केंद्र स्थानीय कारीगरों के लिए एक प्रमुख रोजगार सृजन का काम करेगा। यह पहल खादी के मुख्य गांधीवादी सिद्धांत 'ग्रामीण पुनरुत्थान' से जुड़ी है, जो माननीय प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण ‘सबका साथ, सबका विकास’ के अनुरूप है। यह खादी संस्था गुवाहाटी से 90 किमी दूर स्थित है। केवीआईसी से वित्तीय सहायता के साथ इसे पुन: कार्यशील बनाया जा रहा है जिसके पीछे मकसद खादी कारीगरों को बेहतर कार्यशील स्थिति प्रदान करना है जिससे अंततः उनकी उत्पादकता में सुधार होगा। हाल के वर्षों में केवीआईसी ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, असम, ओडिशा और तमिलनाडु जैसे राज्यों में कई ऐसे खादी संस्थानों को पुनर्जीवित किया है जो कई दशकों से खराब पड़े हुए थे।
29Jan-2021
‘पोषण और कोविड जागरूकता शिविर’ में महिलाएं सम्मानित
मोदी सरकार ने कोरोना के खिलाफ जंग में आपदा को अवसर में बदला: नकवी
हरिभूमि ब्यूरो.नई दिल्ली।
केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास और वित्त निगम द्वारा आयोजित ‘पोषण और कोविड जागरूकता शिविर’ में लोगों की सेहत-सलामती के संकल्प के साथ काम करने वाली सेल्फ हेल्प ग्रुप की महिलाओं को सम्मानित भी किया गया।
नई दिल्ली में गुरुवार को केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास और वित्त निगम यानि एनएमडीएफसी द्वारा जरूरतमंद तबकों की महिलाओं के लिए आयोजित ‘पोषण और कोविड जागरूकता शिविर’ में यह बात कहते हुए नकवी ने कहा कि कोरोना की चुनौती के एक वर्ष से भी कम समय में भारत में दो ‘मेड इन इंडिया’ वैक्सीन का आना, देश के वैज्ञानिकों के प्रयासों का परिणाम और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देशवासियों की सलामती के संकल्प का पुख्ता प्रमाण हैं। इस अवसर पर कोरोना की चुनौतियों के दौरान लोगों की सेहत-सलामती के संकल्प के साथ काम करने वाली उन सेल्फ हेल्प ग्रुप की महिलाओं को सम्मानित भी किया, जिन्होंने आपदा को अवसर बनाने में सरकार, समाज और संस्थाओं ने कंधे से कंधा मिला कर प्रेरणादायक काम किया है। नकवी उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कोरोना काल को आपदा नहीं बनने दिया बल्कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ बनाने के एक अवसर में तब्दील कर दिया।
बीस लाख से ज्यादा का टीकाकरण
नकवी ने कहा कि भारत में अभी तक 20 लाख से ज्यादा लोगों को देशव्यापी कोविड 19 टीकाकरण अभियान के तहत टीका लगाया गया है। इस अभियान के पहले दो चरणों में 30 करोड़ देशवासियों को टीका लगाया जायेगा। नकवी ने कहा कि भारत के लिए कोरोना काल ‘सेवा, संयम और संकल्प’ का सकारात्मक समय साबित हुआ। एनएमडीएफसी ने हजारों कारीगरों और 27 राज्य चैनेलाइजिंग एजेंसियों को अपने समूहों के बीच कोविड-19 की रोकथाम के संदेश का प्रसार करने के लिए तथा पोषण के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए अभियान भी आयोजित किया है। इस मौके पर मोस्ट रेव. अनिल जोसफ कुटो, दिल्ली के आर्चबिशप, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के सचिव पी. के. दास, अतिरिक्त सचिव एस.के. देव वर्मन; एनएमडीएफसी के सीएमडी शाहबाज़ अली, अन्य वरिष्ठ अधिकारी तथा अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।
कोरोना काल में सरकार की उपलब्धियां गिनाई
इस मौके पर केंद्रीय मंत्री नकवी ने कहा कि कोरोना की चुनौतियों के दौरान 80 करोड़ से ज्यादा लोगों को मुफ्त राशन मुहैया कराने के अलावा 8 करोड़ से ज्यादा परिवारों को 3 महीने का निशुल्क गैस सिलिंडर दिया गया। वहीं 20 करोड़ महिलाओं के जन धन खाते में 1500 रूपए दिये। कोरोना से लड़ने के लिए केंद्र सरकार ने राज्यों को 17 हजार करोड़ रूपए से ज्यादा जारी किये। इसी प्रकार श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के जरिये 60 लाख से अधिक प्रवासियों को उनके गृह राज्यों तक पहुंचाया गया और 20 लाख करोड़ रूपए का ‘आत्मनिर्भर भारत पैकेज’ जारी किया गया। किसान सम्मान निधि का लाभ 10 करोड़ से अधिक किसानों को देने के साथ आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत कृषि क्षेत्र के लिए एक लाख करोड़ रूपए की घोषणा की गई।
29Jan-2021
केंद्रित सुधार योजना में मध्य प्रदेश अव्वल
निर्धारित चारों नागरिक सुधार लागू करने वाला पहला राज्य बना
बिजली सुधार: किसानों के बैंक खातों में पहुंची 32.07 करोड़ बिजली सब्सिडी
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
मध्य प्रदेश आत्मनिर्भर भारत मिशन के तहत राज्यों में आर्थिक सुधार की दिशा नागरिक केंद्रित सुधार योजना में निर्धारित चारों नागरिक सुधारों को लागू करने वाला पहला राज्य बन गया है। हालांकि मध्य प्रदेश इन चारों सुधारों को लागू करने से पहले तीन सुधार लागू करते ही योजना के प्रावधानों के तहत पूंजीगत व्यय के लिए विशेष वित्तीय सहायता हासिल करने का हकदार बन गया था।सुधारों के साथ ही योजना के प्रावधानों के तहत पूंजीगत व्यय के लिए विशेष वित्तीय सहायता हासिल करने का हकदार बन गया था।
वैश्विक कोरोना महामारी के कारण प्रभावित अर्थव्यवस्था की चुनौतियों से निपटने के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री सीतारमण द्वारा गत 12 अक्टूबर को आत्मनिर्भर भारत पैकेज 2.0 जारी करने के दौरान ऐलान किया था कि इस पैकेज के एक हिस्से के रूप में निधारित वन नेशनवन राशन कार्ड रिफॉर्म, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रिफॉर्म, अर्बन लोकल बॉडी/यूटीलिटी रिफॉर्म और पॉवर सेक्टर रिफॉर्म में से तीन सुधारों को पूरा करने वाले राज्यों को दूसरा लाभ पूंजीगत व्यय के रूप में दो हजार करोड़ रुपये की राशि अतिरिक्त वित्तीय सहायता के रूप देने का प्रावधान किया गया है। मंत्रालय ने बताया कि मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश ने अपने अपने राज्यों में निर्धारित चार नागरिक केंद्रित सुधारों में से शहरी निकाय सुधारों तरीके से तीन सुधारों वन नेशन-वन राशन कार्ड रिफॉर्म, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रिफॉर्म और शहरी निकाय सुधारों को सबसे पहले पूरा किया। अब मध्य प्रदश ने चौथे सुधार के रूप में पॉवर सेक्टर में सुधारों को लागू करके आत्मनिर्भर भारत मिशन में एक मिसाल कायम की है, जिसमें सबसे पहले चारों नागरिक केंद्रित सुधारों को लागू किया गया है। केंद्र की योजना के तहत इससे पहले जनवरी के पहले सप्ताह में ही चार में से तीन सुधारों को लागू करके मध्य प्रदेश व आंध्र प्रदेश एक पुरस्कार के रूप में पूंजीगत व्यय के लिए विशेष सहायता के तहत 1,004 करोड़ रूपये की अतिरिक्त वित्तीय सहायता के हकदार बन गये थे, जिसमें मध्य प्रदेश को 660 करोड़ रुपये की अतिरिक्त सहायता राशि देने का ऐलान किया गया। यह राशि इन दोनों राज्यों को इन सुधारों को पूरा करने के लिए अतिरिक्त ऋण हेतु पहले जारी हो चुकी 14,694 करोड़ रुपये की अनुमति के अलावा एक पुरस्कार के रूप प्रदान की गई है। केंद्र सरकार ने इन चारों सुधारों के लिए राज्यों को 15 फरवरी तक की अवधि को पहले ही बढ़ाया हुआ है।
चौथे सुधार के लिए 1423 करोड़ की अनुमति
वित्त मंत्रालय के अनुसार मध्य प्रदेश द्वारा चौथे और अंतिम सुधार यानि बिजली क्षेत्र में सुधारों को लागू करने से राज्य को अपने सकल राज्य घरेलू उत्पाद यानि जीएसडीपी के 0.15 प्रतिशत के बराबर अतिरिक्त वित्तीय पूंजी जुटाने का हक मिल गया है। यानि इसके तहत केंद्र सरकार ने राज्य को पहले से जारी धनराशि के अलावा खुले बाजार में 1423 करोड़ रुपये कर्ज लेने की अनुमति प्रदान कर दी है। हालांकि मध्य प्रदेश सरकार ने दिसंबर 2020 से राज्य के विदिशा जिले में किसानों को बिजली के तहत मिलने वाली सब्सिडी को सीधे बैंक खाते में देनी शुरू कर दी थी। मसलन अब तक 60,081 लाभार्थियों के बैंक खातों में 32.07 करोड़ रुपये डीबीटी के जरिए भेजे गए हैं। इसके अलावा राज्य ने झाबुआ और सिवनी जिलों में भी डीबीटीयोजना को लागू करने के लिए एक प्रक्रिया शुरू कर दी है। पहले चरणमें 3 जिलों में योजना के लागू होने के बाद उससे मिले अनुभव के आधार पर योजना को वित्त वर्ष 2021-22 में पूरे राज्य में लागू किया जाएगा।
बिजली क्षेत्र में तीन सुधार
मंत्रालय के अनुसार हालांकि बिजली क्षेत्र के तीन सुधारों में बाकी दो सुधारों को लागू करना है। इन तय लक्ष्यों के अनुसार राज्य को जीएसडीपी के 0.05 फीसदी के बराबर कुल तकनीकी और वाणिज्यिक ह्रास (टेक्निकल एंड कॉमर्शियल लॉस) को लाना होगा। वहीं औसत बिजली आपूर्ति लागत और औसत कमाई (रेवेन्यू रियलाइजेशन) के अंतर को जीएसडीपी के 0.05 फीसदी के बराबर लाना है।
29Jan-2021
उत्तराखण्ड की ‘केदारखंड’ झांकी को मिला तृतीय पुरस्कार
गणतंत्र दिवस समारोह की परेड में हुई थी शामिल
हरिभूमि ब्यूरो.नई दिल्ली।
गणतंत्र दिवस पर विभिन्न राज्यों की झांकियों ने राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली के राजपथ पर आयोजित परेड में हिस्सा लिया, जिसमें शामिल रही उत्तराखण्ड की ‘केदारखंड’ झांकी को तीसरे स्थान के लिये पुरस्कृत किया गया है। जबकि उत्तर प्रदेश की झांकी को प्रथम और त्रिपुरा की झांकी को दूसरा स्थान मिला है।
नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय रंगशाला शिविर में गुरुवार को केंद्रीय राज्य मंत्री किरेन रिजिजू ने यह पुरस्कार प्रदान किया। उत्तराखण्ड के प्रतिनिधि और टीम लीडर केएस चौहान ने राज्य की ओर से पुरस्कार प्राप्त किया। राज्य गठन के बाद उत्तराखण्ड द्वारा अनेक बार प्रतिभाग किया गया परंतु यह पहला अवसर है, जब उत्तराखण्ड की झांकी को पुरस्कार के लिए चुना गया है। राज्य के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने इस पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि उत्तराखण्ड देवभूमि है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन में 2013 की आपदा के बाद केदारनाथ धाम का पुनर्निर्माण कर इसे पहले से भी अधिक भव्य रूप प्रदान किया गया है। मुख्यमंत्री ने झांकी को पुरस्कार के लिए चुने जाने पर प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए सचिव सूचना दिलीप जावलकर, सूचना महानिदेशक डॉ मेहरबान सिंह बिष्ट, टीम लीडर व उपनिदेशक सूचना केएस चौहान और झांकी बनाने वाले कलाकारों तथा झांकी में सम्मलित सभी कलाकारों को बधाई दी है। गौरतलब है कि राजपथ नई दिल्ली गणतंत्र दिवस समारोह में उत्तराखण्ड राज्य की ओर से ‘केदारखंड’ की झांकी प्रदर्शित की गई थी। उत्तराखण्ड सूचना विभाग के उपनिदेशक/झांकी के टीम लीडर के.एस.चौहान के नेतृत्व में 12 कलाकारों के दल ने भी झांकी में अपना प्रदर्शन किया। झांकी का थीम सांग “जय जय केदारा” था। गणतंत्र दिवस परेड-2021 समारोह में उत्तराखण्ड राज्य की झांकी में सम्मिलित होने वाले कलाकारों में झांकी निर्माता श्रीमती सविना जेटली, मोहन चन्द्र पाण्डेय, विशाल कुमार, दीपक सिंह, देवेश पन्त, वरूण कुमार, अजय कुमार, श्रीमती रेनू, कु. नीरू बोरा, कु. दिव्या, कु. नीलम और कु. अंकिता नेगी शामिल थे।
यूपी की झांकी को पहला पुरस्कार
नई दिल्ली में राजपथ पर गणतंत्र दिवस परेड में शामिल हुई उत्तर प्रदेश की झाँकी श्रीराम मंदिर को प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ है। दिल्ली कैंट स्थित रविन्द्र राष्ट्रीय रंगशाला में आयोजित रंगारंग कार्यक्रम में ट्राफी और प्रशस्ति पत्र युवा कल्याण एवं खेल राज्य मंत्री किरन रिजिजू के कर-कमलों से प्राप्त किया सूचना विभाग उप्र के अपर मुख्य सचिव नवनीत सहगल, सूचना निदेशक, उप्र शिशिर कुमार सिंह और टीम ने। इस अवसर पर झाँकी के कलाकारों ने मंच पर अपनी शानदार प्रस्तुति से उपस्थितजनों को मंत्रमुग्ध कर दिया। जबकि त्रिपुरा की झांकी को दूसरा सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार दिया गया। त्रिपुरा की झांकी ने सामाजिक-आर्थिक मापदंडों में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए पर्यावरण के अनुकूल परंपरा को बढ़ावा दिया। पूर्वोत्तर राज्य 19 जनजातियों का घर है और दुनिया की 21 प्रजातियों का समर्थन करने वाले बांस का समृद्ध संसाधन है। झांकी में बांस की प्रजाति और जनजातियों की समृद्ध विरासत को दिखाया गया, जिसमें उनके पारंपरिक परिधान प्रदर्शित होते थे, जो बांस और बेंत से बने उत्पादों को पहने हुए थे। गौरतलब है कि गणतंत्र दिवस परेड में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 32 झांकी शामिल हुई, जिनमें 17 सबसे अच्छी झांकी का चयन किया गया। इनमें नौ विभिन्न मंत्रालयों और विभागों और अर्धसैनिक बलों से और छह रक्षा मंत्रालय के अलावा देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, आर्थिक प्रगति और रक्षा कौशल का चित्रण करने वाली शामिल हैं।
29Jan-2021
अब मिशन मोड़ पर चलेगी उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक परियोजना
परियोजना की प्रगति की समीक्षा के बाद रेल मंत्री पीयूष गोयल ने दिये निर्देश
हरिभूमि ब्यूरो.नई दिल्ली।
देश के विभिन्न इलाकों से कश्मीर घाटी को जोड़ने वाली 272 किलोमीटर लंबी उधमपुर-बारामूला रेल लिंग परियोजना का अधिकांश हिस्सा पूरा होने के बाद बाकी बचे कार्य को मिशन मोड़ पर तेजी से किया जाएगा। ऐसा आदेश रेल मंत्री पीयूष गोयल ने जारी किया है।
रेल मंत्रालय के प्रवक्ता ने यह जानकारी देते हुए बताया कि देश की महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय परियोजना इस परियोजना के 272 किलोमीटर में से 161 किलोमीटर का कार्य पूरा हो गया है। रेल मंत्री पीयूष गोयल ने इस परियोजना की प्रगति की समीक्षा करने के बाद उत्तर रेलवे और परियोजना से जुड़े अधिकारियों को निर्देश दिया है कि इस परियोजना के बाकी बचे कार्य को जल्द पूरा करने की दिशा में कार्य को मिशन मोड़ पर किया जाए। दरअसल अभी इस परियोजना के तहत 111 किलोमीटर लंबे कटरा-बनिहाल सेक्शन का कार्य प्रगति पर है। इस सेक्शन पर 111 किमी में से 97 किलोमीटर यानि 87 फीसदी कार्य मुख्य रूप से सुरंगों का है। समीक्षा बैठक के दौरान बताया गया कि इस सेक्शन पर 97.6 किलोमीटर लंबी 27 मुख्य सुरंगें और 66.4 किमी लंगी 8 एस्केप सुरंगें का काम किया जा रहा है। इस प्रकार कटरा-बनिहाल सेक्शन पर कुल मिलाकर 164किलोमीटर सुरंगों का निर्माण कार्य किया जा रहा है। रेल मंत्री को अधिकारियों ने जानकारी दी कि इस परियोजना में उधमपुर-कटरा 25 किमी, क़ाज़ीगुंड-बारामूला 118 किमी और बनिहाल-क़ाज़ीगुंड 18 किमी का कार्य पूरा करने के बाद इसे चालू कर दिया गया है। अब केवल 111 किमी लंबे कटड़ा-बनिहाल सेक्सन का चुनौतीपूर्ण कार्य किया जा रहा है। रेलवे के अनुसार इस परियोजना के तहत वर्तमान में 136 किमी मुख्य सुरंग मार्ग, जिसमें मुख्य सुरंग के 97 किलोमीटर में से 83 किमी और 66.4 किमी के सुरंग मार्ग में से 55 किलोमीटर का कार्य पूरा हो चुका है। इसमें कुल 37 पुलों में से 26 बड़े पुल और 11 छोटे पुल हैं। वर्तमान में 12 बड़े पुलों और 10 छोटे पुलों का कार्य पूरा हो चुका है और शेष पुलों का कार्य तीव्र गति पर है।
मार्च तक पूरा होगा चिनाब ब्रिज का कार्य
इसी परियोजना के तहत बनाए जा रहे इन पुलों में चिनाब पुल का कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण है, जो दुनिया के सबसे ऊंचे रेल पुल को चिनाब नदी की तलहटी से जिसकी कुल लंबाई 1315 मीटर, आर्क स्पैन 467 मीटर और ऊंचाई 359 मीटर तक के कार्य भी शामिल है। फिलहाल चिनाब पुल के आर्क को बनाने का कार्य प्रगति पर है। इसके 550 मीटर में से 516 मीटर का कार्य पूरा हो चुका है और शेष 34 मीटर का कार्य ही बाकी है। इसे मार्च 2021 तक पूरा कर लिए जाने की उम्मीद है। रेलवे के अनुसार भारतीय रेल के पहले केबल स्टे्ड पुल का निर्माण भी अंजी खड्ड पर किया जा रहा है। इसके 193 मीटर के मुख्य पायलन के कार्य में से 120 मीटर का कार्य पूरा हो गया है। अंजी पुल के सहायक पुल के हिस्से का कार्य पुरा हो चुका है। अन्य बड़े पुलों में पुल संख्या 39 और 43 का कार्य प्रगति पर है, जिनके निर्माण का क्रमश: 191 मीटर और 141 मीटर का कार्य पूरा हो चुका है।
28Jan-2021
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