सोमवार, 30 नवंबर 2020

पंजाब सरकार शतप्रतिशत गारंटी दे, तो रेलवे ट्रेनों की बहाली को तैयार

पंजाब में 22 जगह रेलवे ट्रैक पर जमे आंदोलनकारी किसान, पंजाब सरकार बेबस हरिभूमि ब्यूरो.नई दिल्ली। कृषि कानूनों के खिलाफ खासकर पंजाब में किसान संगठनों ने रेलवे ट्रेकों व परिसरों पर कब्जा करके ट्रेनों की आवाजाही को अवरूद्ध किया हुआ है। किसान आंदोलन के कारण यात्री ट्रेनों और मालगाड़ियों की ठप पड़ी आवाजाही के कारण रेलवे और खुद पंजाब सरकार को हर दिन करोड़ो रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। पंजाब में कृषि कानूनों के विरोध में रेलवे की संपत्तियों पर कब्जा करके रेल ट्रेक अवरूद्ध करने की वजह से रेलवे को प्रतिदिन करोड़ो रुपये के राजस्व का नुकसान झेलना पड़ रहा है। यही नहीं मालगाड़ियों के आवागमन रुकने के कारण पंजाब में जरुरी सामान व संसाधन न मिलने से औद्योगिक और व्यापारिक क साथ कोयले के अभाव में बिजली उत्पादन जैसी गतिविधियों की गति रुकने से पंजाब सरकार को खुद भी हरेक दिन करोड़ो रुपये का नुकसान हो रहा है, लेकिन पंजाब सरकार किसानों के आंदोलन को रेलवे परिसंपत्ति से हटाने में अभी तक नाकाम है। इस मुद्दे पर रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष विनोद कुमार यादव ने शुक्रवार को स्पष्ट कहा कि रेल पटरियों पर लगे सभी अवरोधकों को हटाने में पंजाब सरकार अक्षम है और राज्य में अभी तक 22 स्थानों पर अब भी प्रदर्शनकारी किसान धरना देकर जमे हुए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश में ट्रेन सेवाओं की बहाली के लिये राज्य सरकार से 100 फीसदी सुरक्षा मंजूरी की जरूरत है। यादव ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि राज्य सरकार ने आश्वासन दिया था कि शुक्रवार की सुबह तक रेलवे पटरियों को खाली करा लिया जायेगा। किसान संगठनों ने हाल में पारित कृषि कानूनों के खिलाफ रेलवे पटरियों एवं स्टेशन परिसरों पर प्रदर्शन शुरू किया था और इस कारण राज्य में रेल सेवाएं 24 सितंबर से ही निलंबित है। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष ने कहा कि रेलवे चुनिंदा गाड़ियां नहीं चलायेगी बल्कि सभी सेवाओं को बहाल करेगी। उन्होंने कहा कि राज्य में अब भी 22 स्थानों पर अवरूद्ध की स्थिति है। रेलवे सुरक्षा बल और प्रदेश पुलिस के साथ चंडीगढ़ में कल बैठक हुई जिसमें उन्हें रेलवे की ओर से इस बात से अवगत कराया है कि वे हमें सभी ट्रेनों के लिये सुरक्षा मंजूरी दें ताकि हम एक बार में सभी ट्रेनों का परिचालन शुरू करें। यादव ने कहा कि ‘हम कुछ ट्रेनों का परिचालन शुरू नहीं करेंगे, चाहे वह मालगाड़ी हो या सवारी गाड़ी। हमने उनसे कहा है कि ट्रेनों के परिचालन के लिये उनसे हमें 100 फीसदी सुरक्षा मंजूरी चाहिए। रेल मंत्री की टिप्पणी से बिफरे कांग्रेसी सांसद इससे पहले शुक्रवार को पंजाब में रेल सेवाएं बहाल करने की मांग को लेकर गुरुवार को भाजपा प्रतिनिधिमंडल के बाद शुक्रवार को पंजाब के कांग्रेसी सांसदों ने रेल मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात की। पंजाब में रेल यातायात को बहाल करने को लेकर रेल मंत्री पीयूष गोयल और पंजाब से कांग्रेस के लोकसभा सांसदों के बीच हुई बैठक में तकरार हुआ और तीखी बहस सुनने को मिली। जब रेल मंत्री ने कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों को उकसाने का ठींकरा कांग्रेस पर फोड़ने का प्रयास किया तो रेल मंत्री की टिप्पणी से खफा होकर कांग्रेस के चार सांसद गुरप्रीत सिंह औजला, रवनीत सिंह बिट्टू, संतोख चौधरी और मोहम्मद सादिक बैठक का बहिष्कार करके बाहर निकल आए। सूत्रों के अनुसार इस बैठक में पंजाब राज्य में रेल पटरियों पर लगे अवरोधकों को हटाने और रेल यातायात बहाल करने के संबंध में हुई चर्चा के दौरान हुई तीखी बहस के बीच ही जब कृषि कानूनों के खिलाफ ‘किसानों को प्रदर्शन करने के लिए उकसाने और मदद करने का आरोप’ राज्य की कांग्रेस सरकार पर लगा तो कांग्रेस सांसद इसे बर्दाश्त करने को तैयार नहीं हुए। गौरतलब है कि पंजाब में इन कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन की वजह से रेल यातायात प्रभावित है। हालांकि इस बैठक में कांग्रेस के अन्य सांसद परनीत कौर, मनीष तिवारी, अमर सिंह और जसबीर सिंह बैठे रहे, जिन्होंने रेलमंत्री पीयूष गोयल को पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह का एक पत्र सौंपते हुए कहा कि जिसमें रेल सेवाएं बहाली के लिए पंजाब सरकार ने रेलवे को हर तरह से समर्थन देने और इसकी संपत्ति की रक्षा का भरोसा दिया। 07Nov-2020

कोरोना दिशानिर्देशों के बीच 26 जून से होगी हज यात्रा-2021

. हज यात्रियों के ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया आज से 10 नवंबर तक चलेगी हरिभूमि ब्यूरो.नई दिल्ली। वैश्विक कोरोना महामारी के कारण इस साल हज यात्रा नहीं हो सकी, लेकिन हज यात्रा करने वाले भारतीयों के लिए अगले साल 2021 में हज यात्रा की संभावनाएं बढ़ गई है, जिसके लिए भारत से 26 जून को हज यात्रियों का पहला जत्था सऊदी के लिए रवाना किया जाएगा। इसके लिए कल शनिवार सात नवंबर से 10 नवंबर तक हज यात्रा-2021 के लिए ऑनलाइन आवेदन किये जाएंगे। केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्रालय के अनुसार हज यात्रा-2021 के लिए भारतीय हज समिति ने एक एक्शन प्लान जारी किया हे, जिसके तहत अगले साल हज यात्रा करने वालों के लिए ऑनलाइन आवेदन करने की प्रक्रिया कल शनिवार सात नवंबर से शुरू की जा रही है, जिसके तहत 10 नवबंर तक हज यात्रा के लिए ऑनलाइन आवेदन किये जा सकेंगे। इस एक्शन प्लान के मुताबिक हज यात्रा के आवेदकों द्वारा स्वास्थ्य प्रमाण पत्र जमा करने के लिए एक जनवरी 2021 तक का समय दिया गया है। हालांकि इस हज यात्रा की तैयार की गई कार्य योजना में कोरोना महामारी के दिशानिर्देशों के तहत बदलाव नजर आएगें, जिसके लिए जल्द ही अलग से दिशानिर्देश जारी किये जाएंगे। यह तो तय है कि हज यात्रा के दौरान कोविड-19 के दिशानिर्देशों का पालन करना आवश्यक होगा। जहां तक हज यात्रा के लिए धनराशि जमा करने का सवाल है उसके लिए पहली किश्त एक मार्च होगी, जबकि पूर्ण निर्धारित धनराशि का भुगतान अप्रैल तक किया जा सकेगा। इस कार्य योजना के अनुसार हज यात्रा-2021 के लिए 15-16 मई को वैक्सीन कैंप में यात्रियों को वैक्सीन दी जाएगी और 26 जून से हज यात्रियों की सऊदी अरब रवानगी शुरू होगी और 13 जुलाई को हज यात्रा के लिए आखिरी उड़ान भरी जाएगी। जबकि वापसी 14 अगस्त से शुरू होगी। गौरतलब है कि केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने गत 26 सितंबर को हज यात्रा-2021 को लेकर इस बात के संकेत दे दिये थे कि उनका मंत्रालय अक्तूबर-नवंबर से हज यात्रा-2021 के लिए आवेदन जमा करने समेत सभी प्रकार की प्रक्रिया शुरू करने पर विचार कर रहा है। जैसे ही सऊदी अरब सरकार के दिशानिर्देश और इसके लिए हरी झंडी मिली तो भारत ने उसी आधार पर कार्य योजना तैयार करके हज यात्रा के लिए आवेदन जमा करने की प्रक्रिया को शुरू कर दी है। मसलन अगले साल भारतीय श्रद्धालुओं की हज यात्रा की संभावनाएं प्रबल हो गई हैं। कोरोना की वजह से हज 2020 पर ना जा पाने वाले 1 लाख 23 हजार लोगों के 2100 करोड़ रुपए बिना किसी कटौती के वापस कर दिए गए। वहीं सऊदी अरब सरकार ने 2018-19 के हज यात्रियों के यातायात के लगभग 100 करोड़ रुपए वापस किए हैं। इस साल नहीं हो सकी हज यात्रा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार हज यात्रा-2020 कोरोना वायरस के कारण निरस्त कर दी गई थी, जिसमें 2.30 लाख से ज्यादा भारतीय श्रद्धालुओं ने आवेदन किया था। मंत्रालय के अनुसार इस साल कोई भी भारतीय हज यात्रा पर नहीं जा सका, जिसके लिए आवेदनकर्ताओं के जमा धनराशि को सरकार बिना किसी कटौती के पूरा वापस लौटा रही है। गौरतलब है कि इस मौजूदा साल यानी हज यात्र-2020 के लिए सऊदी अरब सरकार ने कोविड-19 संक्रमण को देखते हुए रद्द करने का फैसला लिया है। हज कमिटी ऑफ इंडिया ने सभी हज यात्रियों का जमा पूरा रुपया वापस करने की प्रक्रिया पूरी कर ली है, जिसाके लिए कमेटी ने हज यात्रियों के इस जमा धन को उनके खातों में हस्तांतरित कराया है। मंत्रालय के अनुसार कोरोना की वजह से हज यात्रा-2020 रद्द होने के कारण भारत के 1 लाख 23 हजार लोगों के 2100 करोड़ रुपए बिना किसी कटौती के वापस कर दिए गए। वहीं सऊदी अरब सरकार ने 2018-19 के हज यात्रियों के यातायात के लगभग 100 करोड़ रुपए वापस किए हैं। 07Nov-2020

पंजाब में रेलवे ट्रैक पर आंदोलन से प्रभावित माल ढुलाई से बढ़ी परेशानी

राज्य के सांसदों और जनप्रतिनिध्यियों की रेल मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात हरिभूमि ब्यूरो.नई दिल्ली। कृषि कानूनों के विरोध में पंजाब में करीब तीन दर्जन स्थानों पर धरना व प्रदर्शन के साथ रेलवे ट्रेक और परिसरों में चल रहे किसानों के आंदोलन के कारण यात्री ट्रेनें और मालगाड़ियों का आवागमन ठप पड़ा हुआ है। इन ट्रेनों से प्रभावित माल ढुलाई से बढ़ी परेशानी को लेकर पंजाब के आठ सांसदों ने रेल मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात करके रेल मार्गो पर ट्रेनों की बहाली के लिए समाधान निकालने की मांग की है। पंजाब राज्य में चल रहे किसान आंदोलन ने विशेष रूप से रेल संपत्ति को लक्षित करके पिछले एक महीने से राज्य में यात्री और माल गाड़ी सेवाओं को बुरी तरह प्रभावित किया हुआ है। इसके कारण पंजाब का ही अब कोयले, उर्वरक, सीमेंट, पीओएल, कंटेनर और स्टील की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है, जिससे थर्मल पावर प्लांट और अन्य उद्योगों के कामकाज पर प्रतिकूल असर पड़ा है। मालगाड़ियों के ठप होने से राज्य में प्रभावित हो रहे जनजीवन और बुनियादी आपूर्ति न होने से परेशानी को दूर करने के लिए गुरुवार को नई दिल्ली में पंजाब के सांसदों और भाजपा नेताओं के उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने रेल मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात की। रेल मंत्री गोयल को प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि पंजाब में संसाधनों की आपूर्ति के अभाव में किस तरह से जनजीवन, कृषि और उद्योग पूरी तरह से प्रभावित हो रहे है, इस कारण राज्य में परेशानी बढ़ रही है। प्रतिनिधिमंडल ने रेल मंत्री से जल्द से जल्द राज्य में रेल सेवाओं को बहाल कराने की मांग की। इसके लिए रेल मंत्री गोयल ने राज्य से आग्रह किया है कि पंजाब सरकार रेल पटरियों तथा रेल परिसंपत्ति पर प्रदर्शन कर रहे लोगों को तुरंत हटवाने की कार्यवाही करे, ताकिक देश तथा राज्य के लोगों के व्यापक हित में रेलगाड़ियों का पुनः संचालन किया जा सके। रेल मंत्री से मुलाकात करने वाले पंजाब के इस उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल में सांसदों के साथ केंद्रीय विमानन मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अलावा भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग, भाजपा प्रवक्ता आर.पी. सिंह, भाजपा के पंजाब प्रदेशाध्यक्ष अश्वनी शर्मा भी शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल ने रेल मंत्री को एक ज्ञापन सौंपकर पंजाब के संसाधनों की उपलब्धता का लेकर ट्रेने चलाने की मांग की है। गौरतलब है कि रेल मंत्रालय पहले ही सात नवंबर या रेल ट्रेक खाली होने तक निरस्त की गई ट्रेनों को बहाल करने से इंकार कर चुका है। रेलवे व पंजाब को करोड़ों का नुकसान सूत्रों के अनुसार इस बीच पंजाब में प्रदर्शनकारियों की ओर से रेलवे की संपत्तियों और स्टाफ को नुकसान पहुंचने की आशंका की वजह से रेल मंत्रालय ने राज्य में 7 नवंबर तक सभी तरह की रेलगाड़ियों की आवाजाही बंद कर दिया है। हालांकि किसानों के धरने-प्रदर्शन और रेलवे ट्रैक्स के बाधित होने की वजह से राज्य में कई दिनों से मालगाड़ियों की आवाजाही ठप है। इस कारण जहां रेलवे का 1200 करोड़ से भी ज्यादा के राजस्व का नुकसान हुआ है, वहीं एक अनुमान के मुताबिक प्रदर्शन की अवधि में अकेले पंजाब सरकार को ही 40 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हो चुका है। मसलन ट्रेनों की आवाजाही नहीं होने का खामियाजा पंजाब के आम लोगों को भी भुगतना पड़ रहा है। तो वहीं कोयले की आपूर्ति नहीं हो पाने की वजह से पंजाब के पांच थर्मल प्लांटस को बंद करना पड़ा है और राज्य में होने वाले बिजली उत्पादन में भारी गिरावट आई है। वहीं राज्य की औद्योगिक इकाइयों तक कच्चा माल ना पहुंचने और तैयार माल उनके निर्धारित स्थानों तक नहीं पहुंचने से प्राइवेट सेक्टर को भी करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचा है। 06Nov-2020

जल जीवन मिशन: जलापूर्ति बुनियादी ढांचे का डिजिटलीकरण करेगी सरकार

विकसित होगी ‘स्मार्ट जलापूर्ति मापन एवं निगरानी प्रणाली’ हरिभूमि ब्यूरो.नई दिल्ली। देश में जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में जलापूर्ति वितरण को मापने और निगरानी के लिए जल्द ही स्मार्ट ग्रामीण जल आपूर्ति इको-सिस्टम को विकसित किया जाएगा। केंद्र सरकार ने ‘स्मार्ट जलापूर्ति मापन एवं निगरानी प्रणाली’ विकसित करने की दिशा में शुरू की गई ग्रैंड चैलेंज में आए आवदेनों का मूल्यांकन जारी किया है। केंद्र सरकार के जल जीवन मिशन के तहत 2024 तक देश के हरेक ग्रामीण परिवार को नल कनेक्शन के जरिए स्वच्छ जल मुहैया कराने की मुहिम चलाई जा रही है। इस अभियान में विशेषकर नियमित रूप से पर्याप्त मात्रा में पानी की आपूर्ति और दीर्घकालिक आधार पर निर्धारित गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए निगरानी और स्वचालित रूप से सेवा वितरण डेटा प्राप्तर करने के लिए आधुनिक प्रौद्योगिकी के इस्तेामाल करने का फैसला किया गया। मसलन जल आपूर्ति अवसंरचना के डिजिटलीकरण में वर्तमान समस्याओं को हल करने और भविष्य की चुनौतियों का अनुमान लगाने तथा उनका पता लगाने की क्षमता की दिशा में जल शक्ति मंत्रालय के साथ मिलकर इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने 'स्मार्ट जलापूर्ति मापन एवं निगरानी प्रणाली' विकसित करने के लिए आईसीटी ग्रैंड चैलेंज की घोषणा की थी। जल जीवन मिशन इस ग्रैंड चैलेंज का उपयोगकर्ता एजेंट होगा और सी-डैक, बैंगलोर कार्यान्वयन एजेंसी है, जो चैलेंज के लिए तकनीकी सहायता प्रदान करेगा। सी-डैक शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों को प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट (पीओसी) डेवलपमेंट के लिए तकनीकी सहायता भी प्रदान करेगा। जलशक्ति मंत्रालय के जारी इस चेलैंज के मूल्यांकन के अनुसार इस चैलेंज में 218 आवेदनों के साथ देशभर में इंडियन टेक स्टार्ट-अप्स, इंडिविजुअल्स आदि विभिन्न क्षेत्रों की एलएलपी कंपनियों की उत्साही भागीदारी नजर आई। मंत्रालय के अनुसार ये आवेदन 46 व्यक्तियों, 33 कंपनियों, 76 भारतीय टेक स्टार्ट-अप, 15 एलएलपी कंपनियों और 43 एमएसएमई से प्राप्त किए गए थे। मंत्रालय ने बताया कि इन आवेदनों की लघुसूची में शामिल आवेदकों या संस्थाओं को विधिवत गठित जूरी यानि चयनकर्ताओं के सामने प्रस्तुति के लिए जल्द आमंत्रित किया जाएगा, जो इन ऑनलाइन प्रस्तुतियों का संचालन करेगा और प्रोटोटाइप विकास के अगले दौर के लिए शीर्ष 10 की पहचान के लिए आवेदनों की समीक्षा करेगा। मंत्रालय ने बताया कि इस ग्रैंड चैलेंज के तहत इस योजना में आइडिएशन टू प्रोटोटाइप स्टेज, प्रोटोटाइप टू प्रोडक्ट स्टेज, प्रोडक्ट डिप्लॉयमेंट स्टेज और तीन विजेताओं की घोषणा शामिल है। इन सभी चरणों को इलेक्ट्रॉ निक्स् एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और राष्ट्रीय जल जीवन मिशन के वित्तपोषण समर्थन के साथ किया जाएगा। इन चरणों के मूल्यांकन के आधार पर, एक विजेता और दो उपविजेताओं का चयन किया जाएगा और उन्हें विजेता के लिए 50 लाख रुपये और प्रत्येक रनर-अप के लिए 20 लाख रुपये दिए जाएंगे। 06Nov-2020

अरुणाचल के दूरदराज गांव माइमी तक पहुंचा जल जीवन मिशन

गांव की सामुदायिक भागीदारी में मार्च 2021 तक ‘हर घर जल’ पहुंचाने के लक्ष्यत हरिभूमि ब्यूरो.नई दिल्ली। चीन सीमा के नजदीक अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी हिस्से में नामसाई जिले के चौखाम ब्लॉक के तहत जिला मुख्यालय से लगभग 40 किमी दूर स्थित हरे-भरे धान के खेतों के बीच एक छोटी सी जल धारा के किनारे एक निर्मल छोटा सा गांव माइली बसा हुआ है। महज 42 परिवार वाले इस गांव के ग्रामीण समुदाय ने भागीदारी का निर्णय लेकर इस मिशन को मार्च 2021 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने यह जानकारी देते हुए बताया कि अरुणाचल प्रदेश के गांव माइमी में सभी ग्रामीण शांतिप्रिय और बौद्ध धर्म के अनुयायी हैं, जिनका मुख्यज व्योवसाय कृषि है। हालांकि उनमें से कुछ लोग सरकारी सेवा और अन्य व्यवसायों में भी लगे हुए हैं। ये लोग खुश रहते हैं और जीवन का आनंद उठाते हैं, लेकिन यहां के लोगों के लिए पीने के पानी की कमी एक बड़ी समस्या बनी हुई है। इस समस्या के निदान के लिए केंद्र सरकार के जल जीवन मिशन की डोर इस गांव तक पहुंची तो ग्रामीणों ने समुदायिक भागीदारी करने में ऐसा उत्साह दिखाया कि इस मिशन को आगामी मार्च 2021 तक पूरा करने का लक्ष्य तय कर लिया। प्रमुख रूप से इस गांव में घर की महिलाओं को इस छोटी जल धारा से पानी लेना पड़ता था, हालांकि उनके घर इस जलधारा से लगभग 300 मीटर दूरी ही हैं। पीने और खाना पकाने, नहाने और कपड़े धोने के लिए साफ पानी की जरूरत होती है। इस जरुरत को पूरा करने के लिए ग्राम सभा की बैठक में ग्रामीणों के लिए जल जीवन मिशन नामक प्रमुख कार्यक्रम पेश किया गया, तो ग्रामीणों की खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा, जो उनके सपने सच होने जैसा था। गांव के हर घर तक एचडीपीई पाइप नेटवर्क के साथ गहरे बोरवेल से सौर ऊर्जा आधारित जल उपचार संयंत्र लगाने का ग्राम सभा द्वारा अनुमोदन किया गया। ग्रामीणों ने विभाग की मदद से पाइप नेटवर्क नक्शाण भी तैयार करके ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति का भी गठन किया जिसकी भूमिकाओं, जिम्मेदारियों और कर्तव्यों के बारे में भी जानकारी दी गई। इनमें गाँव बरहा (गाँव के बुजुर्ग), आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ता तथा स्कूल के शिक्षक शामिल किए गए। माइमी गाँव को जल उपलब्धी कराने की योजना का राज्य स्तरीय योजना मंजूरी समिति (एसएलएसएससी) द्वारा अनुमोदन किया गया है और इसे मार्च 2021 तक पूरा करने का प्रस्ताव है। ग्रामीणों ने श्रम के रूप में 5 प्रतिशत की हिस्सेदारी में अपना योगदान देना शुरू कर दिया है। हैंड पंप का दूषित पानी राज्य के माइमी गांव के घरों में हैंड पंप है, लेकिन उसका पानी दूषित है, जिसके पानी में दुर्गंध आती है और इस पानी से कपड़े धाने से कपड़े लाल रंग के हो जाते हैं। इसलिए इस पानी का उपयोग केवल साफ-सफाई, टॉयलेट फ्लशिंग जैसे कार्यों में किया जाता है। कभी-कभी जब कोई महिला जल धारा से पानी नहीं ला पाती, तो उसकी बेटियां यह कार्य करती हैं। मानसून के दौरान जल धारा ओवरफलो हो जाती है और इसमें मिट्टी मिल जाती है, जिसके कारण पानी में गंदगी बढ़ जाती है। तब गांव के लोग अपने पीने की पानी की जरूरत कम खुदाई किए गए कुंए से करने के लिए मजबूर होते हैं। इस कारण उनके बच्चेी बीमारी हो जाते हैं और अपनी अर्धवार्षिक स्कूल परीक्षा में उपस्थित नहीं हो पाते हैं। डॉक्टर ने कहा कि यह दूषित जल उन्हें बीमार कर रहा है। यह माइमी गांव के हर घर की कहानी है। यहां लोगों को जल धारा और हैंड पंप के प्रदूषित पानी पर निर्भर रहना पड़ता है। महिलाओं को अपनी दैनिक पानी की जरूरतों को के लिए परेशानी का सामना करना पड़ता है। 06Nov-2020

इस बार समय से पहले कुम्हारों की मनी दीपावली!

खादी इंडिया के ई-पोर्टल के जरिए देश के कौने-कौने तक पहुंचे मिट्टी के दीये हरिभूमि ब्यूरो.नई दिल्ली। केंद्र सरकार को कुम्हार समुदाय के सशक्तिकरण की योजना इस बार दिवाली में खुशियां लेकर आई हैं। खासकर राजस्थान के जैसलमेर और हनुमानगढ़ जिलों के सुदूर हिस्सों में कुम्हारों द्वारा बनाए गए मिट्टी के दीये खादी इंडिया के ई-पोर्टल की बदौलत देश के हर कोने तक पहुंच रहे हैं। दरअसल खादी और ग्रामोद्योग आयोग ने इस साल प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण आत्मनिर्भर भारत के तहत ‘वोकल फॉर लोकल’ को सार्थक बनाने के लिए ऑनलाइन और स्टोर के जरिये से दीया बेचने का फैसला किया था। पीएम की कुम्हार सशक्तिकरण योजना के तहत कुम्हारों द्वारा बनाए गये आकर्षक दीयों की ऑनलाइन बिक्री केवीआईसी ने 8 अक्टूबर को ही शुरू कर दी थी और एक माह के कमस समय में ही करीब 10 हजार दीये दीपावली से पहले ही ऑनलाइन बिक चुके हैं। केवीआईसी की ऑनलाइन बिक्री के शुरू होने के बाद पहले दिन से ही मिट्टी के दीयों की भारी मांग रही और 10 दिनों से भी कम समय में डिजाइनर दीयों को पूरी तरह से बेच दिया गया था। केवीआईसी के चेयरमैन विनय कुमार सक्सेना ने बताया कि इसके केवीआईसी ने डिजाइनर दीयों के नए सेट लॉन्च करते ही मिट्टी के दीयों की भारी मांग बढ़ती देखी गई, जो दीवाली का समय नजदीक आते हुए बिक्री तेजी से बढ़ रही है। सक्सेना के अनुसार केवीआईसी ने 8 प्रकार के डिजाइनर दीये लॉन्च किए हैं, जिनकी कीमत 84 रुपये से लेकर 12 के सेट के लिए 108 रुपये है। केवीआईसी इन दीयों पर 10 प्रतिशत की छूट भी दे रहा है। पोखरण में पुनर्जिवित हुई प्रचानी कला केवीआईसी ई-पोर्टल के माध्यम से राजस्थान में हनुमानगढ़ जिले के जैसलमेर और रावतसर में पोखरण में कुम्हार सशक्तिकरण योजना के जरिए मिट्टी के कलात्मक बर्तन बनाने की कला पुनर्जीवित हुई है। राजस्थान में निर्मित दीये अरुणाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, केरल, असम, महाराष्ट्र, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह जैसे दूरस्थ राज्यों में खरीदे जा रहे हैं। खादी के डिजाइनर दीये वेबसाइट पर उपलब्ध हैं। यही नहीं केवीआईसी दिल्ली और अन्य शहरों में अपने आउटलेट के माध्यम से दीया और अन्य मिट्टी की वस्तुओं जैसे लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों और अन्य सजावट के सामान भी बेच रहा है। ये मूर्तियां वाराणसी, राजस्थान, हरियाणा और अन्य राज्यों में कुम्हारों द्वारा बनाई जा रही हैं और कुम्हारों के लिए अच्छी आय का जरिया बन रही हैं, जो कुम्हारों को सशक्त बनाना और मिट्टी के बर्तनों को पुनर्जीवित करना प्रधानमंत्री का सपना है। मदन की खुशी का ठिकाना नहीं केवीआईसी के अनुसार राजस्थान के पोखरण में पीएमईजीपी इकाई के ऐसे ही एक कुम्हार मदन लाल प्रजापति का कहना है कि यह पहली बार है जब वह अपने गांव के बाहर दीये बेच रहे हैं, जिसके कारण वह बेहद उत्साहित और खुश है। उसने कहा कि इस बार की दिवाली में हमारी बिक्री में तेजी आई है। हम दिल्ली में खादी भवन में अपने दीये की आपूर्ति कर रहे हैं और वहां से इसे पूरे देश में ऑनलाइन बेचा जा रहा है, जिससे उसकी आमदनी में अच्छी बढ़ोतरी हो रही है। गौरतलब है कि केवीआईसी ने बिजली चालित चाकों का वितरण करने से पहले कुम्हारों को प्रशिक्षित किया है और उन्हें कुम्हार सशक्तिकरण योजना के तहत बिजली के चाक और अन्य उपकरण प्रदान किए हैं, जिससे उनके उत्पादन और आय में 5 गुना तक वृद्धि हुई है। केवीआईसी की इस योजना ने अब तक कुम्हार समुदाय के 80 हजार से अधिक लोगों को लाभान्वित करने वाले 18 हजार से अधिक इलेक्ट्रिक पॉटर व्हील्स वितरित किए हैं। 06Nov-2020

गुरुवार, 5 नवंबर 2020

हिमाचल में जल्द शुरू होगी लुहरी जल विद्युत परियोजना

केंद्र सरकार ने परियोजना के पहले चरण के लिए दी 1810 करोड़ के निवेश को मंजूरी परियोजना से से हर साल होगा 758.20 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन हरिभूमि ब्यूरो.नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश के कुल्लू और शिमला जिलों में सतलुज नदी पर स्थित 210 मेगावाट क्षमता वाली लुहरी जल विद्युत परियोजना के प्रथम चरण के लिए 1810.56 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इस परियोजना से प्रतिवर्ष 758.20 मिलियन विद्युत यूनिट का उत्पादन होगा। यहां नई दिल्ली में बुधवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक में आर्थिक मामलों की समिति द्वारा इस मंजूरी से सतलुज नदी पर 210 मेगावाट क्षमता वाली लुहरी जल विद्युत परियोजना के पहले चरण का काम जल्द शुरू हो सकेगा। केंद्रीय कैबिनेट की बैठक की जानकारी देते हुए केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने बताया कि इस परियोजना में भारत सरकार और हिमाचल प्रदेश सरकार की सक्रिय भागीदारी है। इस परियोजना को ‘बनाओ-स्वामित्व-संचालन-रखरखाव यानि बिल्ड–ऑन–ऑपरेट–मेंटेन-बीओओएम’ आधार पर सतलुज जल विद्युत निगम लिमिटेड द्वारा क्रियान्वित किया जा रहा है। इस परियोजना से संबंधित समझौता ज्ञापन पर पिछले साल नवंबर में आयोजित ‘राइजिंग हिमाचल, ग्लोबल इन्वेस्टर मीट’ के दौरान हिमाचल प्रदेश सरकार के साथ हस्ताक्षर किए गए थे और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 7 नवंबर 2019 को इस परियोजना का उद्घाटन किया था। इस परियोजना का पहला चरण 62 माह में पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है। 2030 तक 12 हजार मेगावाट उत्पादन की उम्मीद- भारत सरकार इस परियोजना में आधारभूत विकास के ढांचे के लिए 66.19 करोड़ रुपये का अनुदान उपलब्ध कराकर सहायता प्रदान कर रही है और इससे बिजली की दरों में कमी लाने में मदद मिली है। सतलुज जल विद्युत निगम लिमिटेड ने नवीकरणीय ऊर्जा विद्युत वितरण और तापीय विद्युत उत्पादन क्षेत्र में काफी जोरदार पहल की है। निगम ने वर्ष 2023 तक सभी स्रोतों से अपने कुल स्थापित क्षमता का 5000 मेगावाट उत्पादन का आंतरिक वृद्धि लक्ष्य रखा है। इसमें वर्ष 2030 तक 12000 मेगावाट और वर्ष 2040 तक 25000 मेगावाट विद्युत उत्पादन की परिकल्पना की गई है। परियोजना से सुधरेगी वायु की गुणवत्ता- केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद इस परियोजना से उत्पन्न होने वाली बिजली से ग्रिड स्थायित्व में मदद मिलेगी और बिजली की आपूर्ति में सुधार होगा। ग्रिड को महत्वपूर्ण नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत उपलब्ध कराने के अलावा वातावरण में प्रतिवर्ष उत्सर्जित होने वाली 6.1 लाख टन कार्बनडाइआक्साइड की मात्रा में भी इस परियोजना से कमी आएगी और इससे वायु की गुणवत्ता में सुधार होगा। इस परियोजना की निर्माणात्मक गतिविधियों से इसके आसपास लगभग 2000 लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा। जिससे राज्य के सामाजिक-आर्थिक विकास में मदद मिलेगी। इस परियोजना की समय अवधि 40 वर्ष है और इससे हिमाचल प्रदेश को 1140 करोड़ रुपये मूल्य की निःशुल्क बिजली मिलेगी। इस परियोजना से प्रभावित होने वाले परिवारों को अगले 10 वर्ष तक प्रतिमाह 100 यूनिट मुफ्त बिजली उपलब्ध करवाई जाएगी। 05Nov-2020

पंजाब में किसान आंदोलन से रेलवे को लगी करोड़ो की चपत

कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब में 32 जगह रेलवे ट्रैक पर आंदोलन जारी महज तीन दिन में हुआ 1200 करोड़ रुपये का नुकसान यात्री ट्रेनों के रदद होने के कारण रु. 45 करोड के कुल राजस्व की हानि रेल ट्रैकों पर जमे किसानों के कारण 1373 यात्री व 2225 माल गाड़ी ट्रेनें प्रभावित हरिभूमि ब्यूरो.नई दिल्ली। कृषि कानूनों के विरोध में पंजाब में 32 स्थानों पर रेलवे परिसर और ट्रैकों पर किसान संगठनों को आंदोलन जारी रहने से रेलवे को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। नवंबर माह के पहले तीन दिन में ही इस आंदोलन के कारण 1373 यात्री ट्रेनों और 2225 से अधिक माल गाड़ियों के रद्द होने से उत्तर रेलवे को यात्रि ट्रेनों से 45 करोड़ रुपये समेत करीब 1200 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है। रेल मंत्रालय के अनुसार पंजाब में किसानों द्वारा रेल पटरियों को बाधित किये जाने से रेल यात्रा और माल भाड़ा ढुलाई की गतिविधियां ठप होने के कारण 1200 करोड़ रुपये से भी ज्यादा राजस्व का नुकसान हुआ है। रेलवे के अनुसार इस किसान आंदोलन के कारण 1373 यात्री ट्रेनों और 2225 से अधिक माल गाड़ियों को रद्द करना पड़ा है। मंत्रालय के अनुसार प्रदर्शनकारी प्लेटफॉर्मों और रेल पटरियों के नजदीक धरना दे रहे हैं, जिसकी वजह से संचालनात्मक और सुरक्षा कारणों को लेकर ट्रेनों की आवाजाही एक बार फिर रद्द की गई है। किसानों का यह आंदोलन जान्दियाला, नाभा, तलवंडी, साबू और भटिण्डा में अचानक पटरियों को रोके जाने से ट्रेनों की आवाजाही संचालन और सुरक्षा कारणों की वजह से एक बार फिर रोकी गई। इस किसान आंदोलन की वजह से काफी संख्या में माल भाड़ा ढुलाई रेल गाड़ियां और भरी हुई रेल गाड़ियां 15 से 20 दिनों से फँसी हुई हैं। व्यापार में हुए नुकसान के बाद अनेक माल भाड़ा उपभोक्ता आवश्यक वस्तुओं को भेजने अन्य विकल्पों का सहारा ले रहे हैं। पंजाब से आवश्यक वस्तुओं को लेकर बाहर जाने वाली रेल गाड़ियों पर भी इसका असर पड़ा है। इसकी वजह से खाद्यानों, कन्टेनर, ऑटोमोबाइल, सीमेंट, पेटकोक और उर्वरकों की लोडिंग पर पंजाब में औसतन 40 रैक प्रतिदिन का नुकसान हुआ है। पंजाब में आने वाला यातायात भी इसकी वजह से प्रभावित हुआ है और आंदोलन के कारण कंटेनर, सीमेंट, जिप्सन, उर्वरक राज्य में महत्वपूर्ण स्थानोंपर पहुंच नहीं पा रहे हैं और यह प्रतिदिन 30 रैक का औसतन नुकसान है। आंदोलन के कारण 33 रेल इंजनों के पहिए भी थमे उधर उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक आशुतोष गंगल ने बुधवार को पंजाब में 32 जगहों पर रेलवे परिसरों व पटरियों पर किसानों के रेल रोको आंदोलन के बारे में बताया कि कि इस आंदोलन के कारण यात्री ट्रेनों व मालगाड़ियों के प्रभावित होने से उत्तर रेलवे को 1200 करोड़ रुपये के राजस्व का यह नुकसान महज तीन दिन यानि एक नवंबर से तीन नवंबर के बीच आंका गया है। गंगल ने बताया कि पंजाब के रेल मार्गो पर प्रतिदिन आवागमन करने वाले औसतन 70 रैक का संचालन पूरी तरह से प्रभावित है। गंगल ने बताया कि पंजाब राज्य से कोयला, उर्वरक, सीमेंट, पीओएल, कंटेनर, इस्पात तथा अन्य वस्तुओं के 230 रैकों का पंजाब में आना रूक गया और पंजाब राज्य में विभिन्न वस्तुओं के कुल 33 रैक वहीं रूक गए हैं। जबकि पंजाब में विभिन्न स्थानों पर कुल 33 रेल इंजन के पहिये भी थमे हुए हैं। मसलन यह किसान आंदोलन विद्युत संयंत्रों को कोयले की आपूर्ति और शेष भारत में खाद्यान्न तथा उवर्रक की आपूर्ति को भी व्यापक रूप से प्रभावित कर रहा है। उन्होंने बताया कि गत एक अक्टूबर से पंजाब में 32 विभिन्न स्थानों पर रेलवे लाइन और प्लेटफॉर्म पर धरना दे रहे हैं। जनजीवन भी प्रभिवत- रेल मंत्रालय ने पटरियों की सुरक्षा तथा रेलवे गतिविधियों को दोबारा शुरू करने के मद्देनजर स्टाफ की सुरक्षा को लेकर पंजाब के मुख्यमंत्री को 26 अक्टूबर को पत्र लिखा था। खासकर कोविड महामारी के समय यात्रियों को गम्भीर असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। वहीं पंजाब में कई स्थानों पर रेल पटरियों को लगातार बाधित किए जाने की वजह सेकई स्थानों पर से मालभाड़ा गतिविधियों पर प्रतिकूल असर पड़ने से खेती, उद्योग और आधारभूत ढांचे से जुड़े क्षेत्रों को आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता पर असर पड़ा है। पंजाब, जम्मू कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश में आवश्यक वस्तुओं को लाने और लेजाने वाली सभी रेलगाड़ियों पर प्रतिकूल असर पड़ा है। रेलवे ने दिवाली और छठ विशेष ट्रेनों से हटाए अनारक्षित कोच हरिभूमि ब्यूरो.नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने दीवाली व छठ जैसे त्‍योहारों के दौरान रेल यात्रा की सुविधा देते हुए कई विशेष ट्रेनें चलाई हैं, लेकिन इन ट्रेनों में लगाए गये सभी आरक्षित कोचों के कारण अनारक्षित टिकट पर यात्रा नहीं हो सकेगी। यही नहीं बिना आरक्षित टिकट के रेलवे स्टेशनों के प्लेटफार्म पर भी प्रवेश नहीं मिलेगा। रेल मंत्रालय ने दीवाली और छठ त्योहार विशेष ट्रेनों के लिए बुधवार को यात्रियों के लिए इस जानकारी को सार्वजनिक किया है। उत्तर रेलवे के प्रवक्ता ने कहा कि कोरोना महामारी के दिशानिर्देशों के अनुसार इन त्योहार विशेष रेलगाड़ियों में केवल आरक्षित टिकट पर ही यात्रा करने की अनुमति होगी, जिसे देखते हुए इन ट्रेनों से सभी अनारक्षित कोचों को हटा लिया गया है। इसलिए त्यौहारों के दौरान इन ट्रेनों में यात्रा करने के लिए रेलवे ने सार्वजनिक सूचना के जरिए आरक्षण कराने का आव्हान किया है। उत्तर रेलवे के अनुसार आरक्षित टिकट के बिना किसी भी यात्री को रेलवे स्टेशनों के प्लेटफार्म पर भी प्रवेश नहीं दिया जाएगा। इस संबन्ध में रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष विनोद कुमार यादव ने बताया कि फिलहाल 736 विशेष रेलगाड़ियां चलाई जा रही हैं, जिनमें 327 ट्रेनें प्रतीक्षारत हैं। इन 327 ट्रेनों की लगातार निगरानी की जा रही है, ताकि प्रतीक्षा सूची का निर्धारण होने के बाद ऐसे रेल मार्गो पर क्लोन ट्रेने चलाने पर विचार किया जाएगा। भारतीय रेलवे ने 21 सितंबर से ऐसी क्लोन ट्रेनों के रूप में 20 रेलगाड़ियों को चलाया है। जबकि त्योहार विशेष रेलगाड़ियों के रूप में 436 ट्रेनों को चलाया गया है, जिनकी संख्या आवश्यकता के अनुसार बढ़ाने की भी योजना है। किसान आंदोलन: एक दर्जन से ज्यादा और ट्रेने रद्द पंजाब में किसान आंदोलन को देखते हुए रेलवे ने बुधवार को एक दर्जन से ज्यादा और ट्रेनों को रद्द कर दिया है। उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी दीपक कुमार ने यह जानकारी देते हुए बताया कि पंजाब व हरियाणा की ओर आने जाने वाली ट्रेनों को रद्द करने का कारण पंजाब में करीब तीन दर्जन स्थानों पर रेलवे ट्रैक व स्टेशनों पर धरना देकर आंदोलन कर रहे किसान हैं, जिससे लगातार ट्रेनें प्रभावित हो रही हैं। इन निरस्त ट्रेनों में दोनों और से आने जाने वाली नई दिल्ली-जम्मूतवी-नई दिल्ली एक्सप्रेस विशेष, अमृतसर-हरिद्वार एक्सप्रेस, नई दिल्ली-श्रीमाता वैष्णोदेवी कटरा-नई दिल्ली वंदेभारत एक्सप्रेस, नई दिल्ली-श्रीमाता वैष्णोदेवी कटरा एक्सप्रेस, नई दिल्ली-कालका-नई दिल्ली शताब्दी एक्सप्रेस विशेष ट्रेनों को निरस्त कर दिया गया है। इसके अलावा पूजा यानि त्यौहार विशेष ट्रेनों में जम्मूतवी-अजमेर-जम्मूतवी, लखनऊ-चंडीगढ़-लखनऊ, बाडमेर-ऋषिकेश-बाडमेर, दिल्ली-बठिंडा-दिल्ली, श्रीगंगानगर-दिल्ली-श्रीगंगानगर, नई दिल्ली-कटरा-नई दिल्ली, चंडीगढ़-गोरखपुर-चंडीगढ़, चंडीगढ़-पाटलीपुत्र-चंडीगढ़, अजमेर-अमृतसर-अजमेर तथा जम्मूतवी-हावड़ा-जम्मूतवी पूजा विशेष ट्रेनों को निरस्त किया गया है। इसके अलावा कुछ ट्रेनों के मार्ग में परिवर्तन किया गया है, तो वहीं कुछ को आंशिक रूप से रद्द किया गया है। 05Nov-2020

बुधवार, 4 नवंबर 2020

बैंक ऑफ बडौदा ने वापस लिया नये नियम लागू करने का फैसला

वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट की सेवा शुल्क की तथ्यात्मक स्थिति हरिभूमि ब्यूरो.नई दिल्ली। गत एक नवंबर से कुछ सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों यानि पीएसबी द्वारा सेवा शुल्क में बेतहाशा वृद्धि करने के संबन्ध में आई मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए केंद्र सरकार ने इस संबन्ध में तथ्यात्मक स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा कि भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा निर्धारित मुफ्त सेवाओं के जन धन खातों सहित बुनियादी बचत बैंक जमा खातों पर कोई सेवा शुल्क लागू नहीं है। वहीं बैंक ऑफ बडौदा द्वारा परिवर्तित नियमों को भी कोरोना महामारी के कारण वापस ले लिया है। वित्त मंत्रालय ने मंगलवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि मीडिया रिपोर्टों में कुछ सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों द्वारा सेवा शुल्क में बेतहाशा वृद्धि का उल्लेख किया गया है। जबकि तथ्यात्मक स्थिति के अनुसार जन धन खातों सहित बुनियादी बचत बैंक जमा (बीएसबीडी) खाते भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) द्वारा निर्धारित मुफ्त सेवाओं के लिए समाज के गरीब और बैंकों से अछूते रहे तबकों द्वारा खोले गए 41.13 करोड़ जन धन खातों सहित 60.04 करोड़ बुनियादी बचत बैंक जमा (बीएसबीडी) खातों पर कोई सेवा शुल्क लागू नहीं है। मंत्रालय के अनुसार नियमित बचत खाते, चालू खाते, नकद उधार खाते और ओवरड्राफ्ट खातों में शुल्क तो नहीं बढ़ाया गया है, लेकिन बैंक ऑफ बड़ौदा ने 1 नवंबर 2020 से प्रति माह मुफ्त नकद जमा और निकासी की संख्या के संबंध में कुछ परिवर्तन किए थे, जिसमें मुफ्त नकद जमा एवं निकासी की संख्या प्रति माह 5 से घटाकर प्रति माह 3 कर दी गई है, जिसमें इन मुफ्त लेनदेन से अधिक लेनदेन के लिए शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है। बैंक ऑफ बडौदा ने वापस लिया निर्णय- मंत्रालय के अनुसार बैंक ऑफ बड़ौदा ने सूचित किया है कि वर्तमान कोविड से जुड़ी स्थिति के आलोक में उन्होंने इन परिवर्तनों को वापस लेने का निर्णय लिया है। इसके अलावा हाल में किसी अन्य पीएसबी ने इस तरह के शुल्क में वृद्धि नहीं की गई है। भारतीय रिज़र्व बैंक के दिशा-निर्देशों के अनुसार पीएसबी सहित सभी बैंकों को उचित, पारदर्शी और भेदभावरहित तरीके से अपनी सेवाओं के एवज में इस पर आने वाले लागतों के आधार पर शुल्क लगाने की अनुमति है। लेकिन अन्य पीएसबी ने भी यह सूचित किया है कि कोविड महामारी के मद्देनजर निकट भविष्य में बैंक शुल्कों में बढ़ोतरी करने का उनका कोई प्रस्ताव नहीं है। क्या था बैंक ऑफ बड़ौदा का नया नियम- बैंक ऑफ बड़ौदा ने पैसे जमा करने और निकालने के नियम में बदलाव करते हुए एक नवंबर से बैंक में खाताधारकों को अपना पैसा जमा करने और निकालने के लिए भी शुल्क लागू किया था, जिसमें तय सीमा से ज्यादा बैंकिंग करने पर खाताधारकों को अलग से शुल्क लगाने का निर्णय लिया था। मसलन बैंक ऑफ बड़ौदा नए नियम के मुताबिक खाताधारकों को चालू खाते, बचत खाते में से कैश क्रेडिट लिमिट और ओवरड्राफ्ट अकाउंट से कैश जमा-निकासी के लिए अलग-अलग चार्ज लागू किया था और हर तरह के खाते के लिए यह चार्ज अलग-अलग होगा। बैंक ऑफ बड़ौदा के नियम के मुताबिक लोन अकाउंट के लिए महीने में तीन बार के बाद खाताधारक जितनी बार अपने खाते से पैसा निकालेंगे, उन्हें हर बार 150 रुपए चार्ज के तौर पर भुगतान करना होगा। वहीं बचत खाते में तीन बार के बाद पैसा निकालने पर 40 रुपए सर्विस चार्ज देना होगा। खाताधारकों को खाते में पैसा जमा करने या माह में तीन बार से ज्यादा बार निकालने पर भी शुल्क लागू किया था यानि चौथी बार रकम निकालने पर चालू खातेदार पर 150 रुपये और बचत खातेदार पर 40 रुपये का सेवा शुल्क लागू किया गया था। हालांकि जनधन खाताधारकों को बैंक खाते में जमा करने पर कोई शुल्क नहीं लगाया गया, लेकिन तय सीमा के बाद खाते से पैसे निकालने पर 100 रुपए का चार्ज वसूलने का निर्णय था। अब कोरोना महामारी के मद्देनजर बैंक ऑफ बडौदा ने इन नए नियमों को लागू करने का फैसला वापस ले लिया है, जिसकी पुष्टि वित्त मंत्रालय द्वारा की गई है। 04Nov-2020

जल जीवन मिशन के लक्ष्य पूरा करने को गंभीर हुई केंद्र सरकार

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री ने राज्यों मंत्रियों के साथ की ऑनलाइन समीक्षा बैठक हरिभूमि ब्यूरो.नई दिल्ली। केंद्रीय जल मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के ग्रामीण जल आपूर्ति मंत्रियों के साथ जल जीवन मिशन के कार्यान्वयन की प्रगति की समीक्षा करते हुए 2024 तक देश के सभी ग्रामीण घरों में पीने का शुद्ध पानी मुहैया कराने के लिए नल जल कनेक्शन देने में तेजी लाने का आव्हान किया। केंद्रीय जल मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने एक आभासी सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए मंगलाव को जल जीवन मिशन के तहत की गई प्रगति की समीक्षा करते हुए उम्मीद जताई कि सभी राज्य और केन्द्र शासित प्रदेश हर घर नल- हर घर जल ’सुनिश्चित करने के लिए इस मिशन के कार्यान्वयन में तेजी से काम करेंगे, जिसमें उन्होंने जल जीवन मिशन के कार्यान्वयन की गति, पैमाने और कौशल के साथ नियोजन, प्रगति और रोडमैप पर चर्चा करते हुए इसके कार्यान्वयन को गति देने का आग्रह किया। उन्होंने राज्यों से कहा कि जल जीवन मिशन लोगों के जीवन की सुगमता सुनिश्चित करेगा, वहीं जल की गुणवत्ता में सुधार और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। इस ऑनलाइन समीक्षा बैठक में जल शक्ति राज्य मंत्री रतनलाल कटारिया, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल तथा त्रिपुरा के मुख्यमंत्री विपल्व के अलावा ज्यादा राज्यों के जल शक्ति मंत्रियों और उनके प्रतिनिधियों ने हिस्सा लेते हुए चर्चा की। सभी राज्यों ने इस मिशन के लक्ष्य को समयसीमा के भीतर हासिल करने की प्रतिबद्धता को दोहराया। केंद्र सरकार ने राज्यों को इसके लिए हर संभव मदद करने का भरोसा भी दिया है। गोवा ने हासिल किया शतप्रतिशत लक्ष्य- इस मिशन के तहत कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन के लिए शतप्रतिशत कार्यान्वयन के लिए विभिन्न राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा तैयार की गई योजनाओं की जानकारी देते हुए केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने बताया कि इस मिशन के तहत ग्रामीण घरों में नल कनेक्शन के जरिए पीने का पानी मुहैया कराने के लिए गोवा ने मौजूदा 2020 में शतप्रतिशत लक्ष्य हासिल कर पहला स्थान प्राप्त किया है। जबकि अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, बिहार, पुदुचेरी, तेलंगाना ने 2021 में शतप्रतिशत लक्ष्य हासिल करने की योजना तैयार की है। हरियाणा, जम्मू और कश्मीर, लद्दाख, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, मेघालय, पंजाब, सिक्किम, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश 2022 में सभी ग्रामीण घरों में नल कनेक्शन प्रदान करेगा। मंत्रालय के अनुसार छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश के अलावा अरुणाचल प्रदेश, कर्नाटक, केरल, मणिपुर, मिजोरम, नागालैंड, तमिलनाडु व त्रिपुरा ने इस लक्ष्य को 2023 में शतप्रतिशत करने की कार्ययोजना तैयार की है। जबकि राष्ट्रीय लक्ष्य 2024 तक मिशन के शतप्रतिशत लक्ष्य को हासिल करने के लिए असम, आंध्र प्रदेश, झारखंड, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान और पश्चिम बंगाल ने कार्य योजना बनाने का दावा किया है। पानी की गुणवत्ता पर फोकस- इस समीक्षा के दौरान बताया गया कि देश के राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों में 2,233 सरकारी स्वामित्व वाली जल गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशालाएँ हैं। अधिकांश राज्यों में ये प्रयोगशालाएं केवल पानी के नमूनों का परीक्षण करती हैं। जबकि कुछ राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों में ये प्रयोगशालाएँ सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं, लेकिन परीक्षण के लिए ज्यादा के कारण सामान्य परिवार के लिए जल का नमूना लेना और परीक्षण करवाना संभव नहीं है। इसीलिए मिशन इन प्रयोगशालाओं को उनके जल के नमूनों को नाममात्र शुल्क पर परीक्षण के लिए सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कारने हेतु प्रोत्साहित करने के लिए जल समितियों को जल परीक्षण के लिए किट का उपयोग करने का प्रशिक्षण भी दे रहा है। यह प्रयास पानी को पीने की क्षमता बढ़ाने के साथ ही इन प्रयोगशालाओं को एकीकृत करने और उन्हें आम जनता के लिए सुलभ बनाने से नल के माध्यम से आपूर्ति की गई जल की क्षमता का पता लगाने में मदद करेगा। 04Nov-2020