रविवार, 7 जून 2020

भारतीय रेल को देश के विकास का इंजन बनाने का रोडमैप तैयार


एक साल में किया गया 5782 किमी रेलवे ट्रैक का विद्युतीकरण, दोगुना हुआ दोहरीकरण
हरिभूमि ब्यूरो.नई दिल्ली।
केंद्र सरकार ने वर्ष 2030 तक 50 लाख करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश के साथ भारतीय रेल को देश का विकास इंजन बनाने का रोड मैप तैयार किया गया है। इसी लक्ष्य के तहत वर्ष वर्ष 2019-20 में भारतीय रेल ने बुनियादी ढांचे के विकास पर नए सिरे से शुरू करते हुए बजट में पूंजीगत व्यय के लिए आवंटन का 90.8 फीसदी का इस्तेमाल किया है। इस वित्तीय वर्ष के दौरान देश में दौरान में 5782 किलोमीटर लंबे रेल मार्ग के विद्युतीकरण का काम पूरा किया गया है, वहीं 5,622 करोड़ रुपये की लागत पर 562 किलोमीटर रेल लाइन निर्माण की 15 महत्वपूर्ण परियोजनाएं शुरू की गई हैं।
रेल मंत्रालय ने वर्ष 2019-2020 के दौरान रेलवे के बुनियादी विकास को मजबूत करने के लिए शुरू की गई परियोजनाओं के बारे में बताया कि वर्ष 2019-2020 में संशोधित बजट में पूंजीगत व्यय के लिए 1,61,351, करोड़ रूपए का आवंटन में से मार्च 2020 के अंत तक 1,46,507 करोड़ रुपये यानि 90.8 फीसदी के पूंजीगत व्‍यय का इस्तेमाल किया गया है। भारतीय रेल को वर्ष 2030 तक 50 लाख करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश के साथ देश का विकास इंजन बनाने के तैयार किये गये रोडमैप के तहत रेलवे परियोजनाओं को तेजी से कार्यान्वित किया जा रह है।
देश में रेलवे के कायाकल्प की दिशा में वर्ष 2019-2020 के दौरान 39,836 करोड़ रुपये की लागत से नई लाइन बिछाने, लाइनों के दोहरीकरण और उनके गेज परिवर्तन तथा उन्‍हें शुरु करने का काम दोगुना बढ़कर 2,226 किलोमीटर किया गया है, जो इससे पहले साल में 1,520 किमी हो सका था। इसमें अकेले 1458 किलोमीटर रेल लाइन दोहरीकरण परियोजनाओं पर 22,689 करोड़ रुपये खर्च किया गया है, जो 2009-14 के बीच इस कार्य के खर्च किये गये 2,462 करोड़ रुपये की तुलना औसत वार्षिक खर्च से 9 गुना अधिक है। रेल मंत्रालय के अनुसार देश में इलेक्ट्रिक इंजन से सभी रेलगाडियां चलाने के मकसद से तेजी के साथ चलाई जा रही रेलवे ट्रैक के विद्युतीकरण की परियोजना के तहत वित्त वर्ष 2019-20 में रेलवे ने 5782 किमी रेल मार्ग का विद्युतीकरण की परियोजना को पूरा किया है, जबकि 31 मार्च तक 4,378 किमी मार्ग के विद्युतीकरण का कार्य चालू किया जा चुका है।
कुछ महत्‍वपूर्ण परियोजनाएं पूरी
भारतीय रेल ने महत्‍व और प्रगति कार्यों के आधार पर रेल लाइनों के दोहरीकरण की अपनी 15 अत्‍याधिक महत्‍वपूर्ण परियोजनाओं को पूरा करने और उन्‍हें चालू करने को प्राथमिकता दी है। रेलवे के अनुसार वर्ष 2019-20 के दौरान शुरू की गई रेलवे परियोजनाओं के तहत हरियाणा-राजस्थान में 320.04 किलोमीटर लंबी जयपुर-रिंगस-सीकर-चूरू और सीकर-लोहारू तक 320.04 किमी लंबी रेल लाइन गेज परिवर्तन परियोजना प्रगति पर है। वहीं हरियाणा और दिल्‍ली में तुगलकाबाद-पलवल नाम से चौथी लाइन के दोहरीकरण की 34 किमी लंबी सुपर क्रिटिकल परियोजना पूरी की गई है। दिल्‍ली में नई दिल्‍ली से तिलक ब्रिज तक 7 किमी लंबी रेल लाइन(5 वीं और छठी लाइन) दोहरीकरण की लंबित पड़ी अत्‍याधिक महत्‍वपूर्ण परियोजना पूरी हो चुकी है। इसी प्रकार छत्‍तीसगढ़ में खरसिया-कोरीछापर की 42.57 किमी लंबी नई कोल लाइन परियोजना को भी इस दौरान अंजाम तक पहुंचाया गया है। इसी प्रकार मध्‍यप्रदेश में कटनी यार्ड को बाइपास कर निकलने वाली 2 किमी लंबी जुखेरी बाईपास कॉर्ड लाइन, 7 किमी लंबी सोनताली-भगरतावा परियोजना, 25 किमी लंबी इटारसी-बुधनी सुपर क्रिटिकल रेल लाइन दोहरीकरण परियोजना को कार्यान्वित किया गया है। इसी प्रकार उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल के अलावा पूर्वोत्तर राज्यों में भी रेलवे की कई परियोजनाएं शुरू की जा चुकी हैं।
05June-2020

दस साल तक भारत नहीं आ सकेंगे ढ़ाई हजार विदेशी तब्लीगी जमाती

केंद्र सरकार ने काली सूची में शामिल विदेशी नागरिकों पर लगाया प्रतिबंध
नई दिल्ली।   
केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में निजामुद्दीन मरकज में आयोजित तब्लीगी जमात की गतिविधियों में शामिल 2500 विदेशी नागरिकों के भारत आने पर 10 साल का प्रतिबंध लगा दिया गया है।
सूत्रों के मुताबिक इनमें से बहुत से विदेशी नागरिकों को पहले ही ब्लैकलिस्ट किया जा चुका था। ये सभी टूरिस्ट वीजा पर भारत आए थे। देश में कोरोना वायरस संक्रमण के बीच दिल्ली के निजामुद्दीन में तब्लीगी जमात के लोग बड़ी संख्या में जुटे थे। उनकी वजह से अन्य लोगों में भी कोरोना वायरस बहुत ज्यादा संख्या में फैल गया था। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अप्रैल महीने में तब्लीगी जमात के 960 विदेशी नागरिकों को ब्लैक लिस्ट कर दिया था। साथ ही इनके वीजा को रद्द कर दिया गया था। गृह मंत्रालय ने दिल्ली पुलिस व अन्य राज्यों की पुलिस से अपने-अपने क्षेत्र में रह रहे विदेशी नागरिकों के खिलाफ आपदा प्रबंधन अधिनियम व विदेशी नागरिक अधिनियम के तहत कार्रवाई करने को कहा था। गृह मंत्रालय ने ट्वीट कर इस कार्रवाई की जानकारी दी थी। दिल्ली के निजामुद्दीन में हुए कार्यक्रम में हिस्सा लेने वालों में 1300 विदेशी नागरिकों की पहचान की गई थी। इनमें अमेरिका, फ्रांस और इटली के नागरिक शामिल थे। इनकी पहचान कर इन्हें क्वारंटीन में भेजा गया था। निजामुद्दीन पश्चिम में तब्लीगी जमात मरकज कोरोना वायरस का हॉटस्पॉट बन गया था। इस वजह से पूरे क्षेत्र को सील करना पड़ा था। कई सरकारी एजेंसियों ने अपनी जांच में पाया कि 9000 से ज्यादा तब्लीगी जमात के भारतीय सदस्यों ने देश के 20 राज्यों में कोरोना संक्रमण फैला दिया था। 
इन देशों के हैं नागरिक
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, काली सूची में डाले गए विदेशियों में माली, नाइजीरिया, श्रीलंका, केन्या, जिबूती, तंजानिया, दक्षिण, अफ्रीका, म्यांमार, थाईलैंड, बांग्लादेश, यूके ऑस्ट्रेलिया और नेपाल के नागरिक शामिल हैं।
541 विदेशियों के खिलाफ साकेत कोर्ट में चार्जशीट दायर
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने बीते 28 मई को तबलीगी जमात से जुड़े तीन देशों के 541 विदेशी नागरिकों के खिलाफ दिल्ली की साकेत कोर्ट में 12 आरोप पत्र दायर किए। कोर्ट 25 जून को मामले की सुनवाई करेगी। दिल्ली पुलिस इससे पहले 32 देशों के 374 विदेशी नागरिकों के खिलाफ आरोप पत्र दायर कर चुकी है।  अधिकारियों ने बताया कि तबलीगी जमात के सदस्यों के खिलाफ आरोप लगाए गए हैं कि उन्होंने वीजा नियमों एवं महामारी संबंधी कानून के तहत सरकारी दिशानिर्देशों का उल्लंघन किया तथा ऐसी लापरवाही की जो जानलेवा बीमारी फैलाने की वजह बन सकती है।
05June-2020

देश के किसान अब मंडी से बाहर भी बेच सकेंगे अपनी उपज


सरकार ने कई कृषि उत्पादों को आवश्यक वस्तु कानून से किया बाहर
सरकार ने बाधामुक्त कृषि व्यापार के लिए अध्यादेश को दी मंजूरी
हरिभूमि ब्यूरो.नई दिल्ली।
केंद्र सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की दिशा में कई बड़े फैसलें किये हैं, जिसमें किसानों और एमएसएमई उद्योगों को कोरोना संकट में बड़ी राहत देने के मकसद से कई निर्णयों को मंजूरी दी। सरकार ने कृषि उपज के बाधा मुक्त व्यापार को प्रोत्साहन देने के लिए एक अध्यादेश को भी मंजूरी दी है। वहीं बहुत से कृषि उत्पादों को आवश्यक वस्तु अधिनियम से बाहर करने के लिए कानून में संशोधन करने का निर्णय लिया। 
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आवास पर बुधवार को उनकी अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में लिए गये फैसलों की जानकारी देते हुए यहां केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि भारत एक देश-एक बाजार की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिसके लिए सरकार ने आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत खेती-किसानी के लिए बडे फैसले लिये हैं। इसी मकसद से सरकार ने कई कृषि उत्पादों को आवश्यक वस्तु अधिनियम से बाहर किया है और किसानों को एपीएमसी कानून से बाहर भी उत्पाद बेचने की अनुमति दी गई है। मसलन अब किसान मंडी के अलावा अपनी उपज सीधे निर्यातकों को बेच सकेंगे, जिससे उन्हें अधिक आर्थिक लाभ मिल सकेगा, जो भारतीय किसानों के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा। जावडेकर ने कहा कि देश में छह दशक से ज्यादा पुराने आवश्यक वस्तु अधिनियम में संशोधन करते हुए केंद्रीय कैबिनेट ने अनाज, दालें, आलू और प्याज आदि को इससे बाहर कर दिया। सरकार ने यह फैसला कृषि क्षेत्र में सुधार लाने के लिए और किसानों की आय बढ़ाने के मकसद से लिया है। कैबिनेट ने कृषि उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अध्यादेश-2020 को भी मंजूरी दी है, ताकि किसान अंतर्राज्यीय बाजार में कृषि उपज का बाधा मुक्त व्यापार कर सकें। इस मौके पर कैबिनेट निर्णयों को लेकर केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि ये फैसले कृषि क्षेत्र में सकारात्मक सुधार लाएंगे और किसानों को आर्थिक रूप से मजबूती मिलेगी।
व्यापारियों व निर्यातकों से सीधे जुड़ सकेंगे किसान
इसके साथ ही सरकार ने मूल्य आश्वासन और कृषि सेवा अध्यादेश पर किसानों का (सशक्तिकरण और संरक्षण) समझौता अधिनियम, 2020 को भी अनुमति दी। इससे  प्रोसेसर, एग्रीगेटर, थोक व्यापारी, बड़े खुदरा विक्रेताओं और निर्यातकों के साथ जुड़ने के लिए किसानों को सशक्त बनाया जा सकेगा। कैबिनेट निर्णयों की जानकारी देते हुए कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि ये फैसले कृषि क्षेत्र में सकारात्मक सुधार लाएंगे और किसानों को सशक्त करेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार ने मूल्य आश्वासन और कृषि सेवा अध्यादेश पर किसानों का (सशक्तिकरण और संरक्षण) समझौता अधिनियम-2020 को भी स्वीकृति प्रदान की है, जिसके तहत प्रोसेसर, एग्रीगेटर, थोक व्यापारी, बड़े खुदरा विक्रेताओं और निर्यातकों के साथ जुड़ने के लिए किसानों को सशक्त बनाया जा सकेगा।
किसानों को यह होगा लाभ
केंद्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र तोमर ने कहा कि केंद्र सरकार के इन फैसलों से एपीएमसी (कृषि उपज मंडी समिति) से बाहर कृषि उत्पाद बेच सकेंगे किसान, कम लागत में अधिक आय होने पर समृद्धि बढ़ेगी। मसलन अब किसानों को अपना उत्पाद सीधे निर्यातकों को बेचने की अनुमति दी गई है, जिससे किसानों को अपने उत्पाद की अधिक कीमत मिलेगी। तोमर ने कहा कि मोदी सरकार ने किसानों के हित में अनेक कदम उठाए हैं, जिनमें किसान की सामाजिक सुरक्षा के लिए किसान मान धन योजना बनाई गई है। सभी किसानों को क्रेडिट कार्ड मिले, इस पर काम किया जा रहा है। पीएम किसान सम्मान निधि से एकमुश्त एकमुश्त 75 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया। उन्होंने कहा कि सरकार ने खाद सब्सिडी में 80 हजार करोड़ रुपये दिए गए। वहीं किसान क्रेडिट कार्ड से चार लाख करोड़ किसानों को कर्ज मिल चुका है। किसान को खरीद की गारंटी मिले तो उत्पाद की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार की योजना के तहत देश में 10 हजार नए एफपीओ (किसान उत्पादक संगठन) बनाए जाएंगे, जो किसान की संरक्षा के लिए कृषि मंत्रालय अनुबंध के मॉडल पर काम करेगा। अब अनुबंध के तहत पैदा किए गए कृषि उत्पादों पर राज्यों का कर लागू नहीं होगा। इस अनुबंध में किसानों और अन्य संस्थाओं के बीच विवाद के निपटारा का प्रावधान होगा। सरकार के फैसलों में कोई भी फैसला किसान की जमीन के खिलाफ नहीं होगा।
-----------------------------------------
अब श्‍यामा प्रसाद मुखर्जी ट्रस्ट कहलाएगा कोलकाता बंदरगाह
केंद्र सरकार ने नाम परिवर्तन के प्रस्ताव को दी मंजूरी
हरिभूमि ब्यूरो.नई दिल्ली।
केंद्र सरकार ने कोलकाता बंदरगाह ट्रस्ट का नाम बदलकर श्‍यामा प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह ट्रस्ट करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। अब कोलकाता बंदरगाह नए नाम श्‍यामा प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह से जाना जाएगा।
केंद्रीय जहाजरानी मंत्रालय के प्रवक्ता ने यह जानकारी देते हुए बताया कि बुधवार को प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में हुई केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में कोलकाता बंदरगाह का नया नाम श्‍यामा प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह करने की अनुमति दे दी है। कोलकाता बंदरगाह ट्रस्‍ट के बोर्ड ऑफ ट्रस्‍टी ने 25 फरवरी 2020 को हुई अपनी बैठक में एक प्रस्‍ताव पारित कर विधिवेत्‍ता, शिक्षक, विचारक और जन साधारण के नेता श्‍यामा प्रसाद मुखर्जी को बहुआयामी प्रतिभा के धनी के रूप में ध्‍यान में रखकर  कोलकाता बंदरगाह को नया नाम श्‍यामा प्रसाद मुखर्जी करने की मंजूरी दे दी थी। मंत्रालय के अनुसार कोलकाता बंदरगाह की 150वीं जयंती के उद्घाटन समारोह के अवसर पर  गत 12 जनवरी 2020 को, पश्चिम बंगाल की जनता की भावनाओं को ध्‍यान में रखते हुए यह घोषणा की गई कि कोलकाता बंदरगाह का नाम बदलकर उसे नया नाम श्‍यामा प्रसाद मुखर्जी दिया जाएगा, जिन्‍हें पश्चिम बंगाल का सबसे योग्‍य पुत्र और राष्‍ट्रीय एकता को बनाए रखने में अग्रणी, बंगाल के विकास का स्‍वप्‍नदृष्‍टा, औद्यो‍गिकरण का प्रेरणा स्रोत और एक राष्‍ट्र के लिए एक कानून का प्रचंड समर्थक माना जाता था। इससे पहले हाल में 2017 में कांडला बंदरगाह का नाम बदलकर दीनदयाल बंदरगाह कर दिया गया। इसके अलावा अनेक हवाई अड्डों के नाम भारत के महान नेताओं के नाम पर रखे गए हैं।
------------------------------
औषध कोष आयोग की स्थापना को मंजूरी
प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने आयुष मंत्रालय के अंतर्गत अधीनस्‍थ कार्यालय के रूप में भारतीय औषध और होम्‍योपैथी (पीसीआईएमऔरएच) के लिए औषधकोष (फार्माकपीआ) आयोग की पुर्नस्‍थापना को अपनी मंजूरी दे दी है। इसमें गाजियाबाद में 1975 से स्‍थापित दो केन्‍द्रीय प्रयोगशालाओं-फार्माकपीआ लेबोरेट्री फॉर इंडियन मेडिसिन (पीएलआईएम) और होम्‍योपैथिक फार्माकपीआ लेबोरेट्री (एचपीएल) का विलय कर दिया गया है। वर्तमान में 2010 से स्‍थापित आयुष मंत्रालय के अंतर्गत भारतीय औषध और होम्‍योपैथी के लिए औषध कोष आयोग एक स्वायत्‍तशासी संगठन है। विलय का उद्देश्‍य तीनों संगठनों की बुनियादी ढांचा सुविधाओं, तकनीकी मानव श्रम और वित्‍तीय संस्‍थानों का अधिकतम इस्‍तेमाल करना है ताकि आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी और होम्‍योपैथी दवाओं के नतीजों के मानकीकरण में वृद्धि की जा सके जिससे प्रभावी नियंत्रण और गुणवत्‍ता नियंत्रण की दिशा में बढ़ा जा सकेगा। इस विलय से औषधकोश और लिखे गए नुसखे के विवरण का प्रकाशन और आयुष दवाओं के मानकों का केन्द्रित और संसक्‍त विकास को बढ़ावा मिलेगा। 
04June-2020

प्रवासियों की घर वापसी के लिए चली 4200 श्रमिक स्पेशल ट्रेनें

पिछले 34 दिन में 60 लाख से ज्यादा लोगों की हुई घर वापसी
राज्यों ने यात्रियों के अभाव में रद्द की 256 ट्रेनें
हरिभूमि ब्यूरो.नई दिल्ली।
देशभर में कोरोना संकट के मद्देनजर लॉकडाउन की वजह से जगह-जगह फंसे प्रवासी श्रमिकों समेत लाखों लोगों की घर वापसी के लिए भारतीय रेलवे ने पिछले 34 दिनों में करीब 4200 श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाई, जिनमें 60 लाख से भी ज्यादा प्रवासी अपने गंतव्य तक पहुंचे हैं।
रेल मंत्रालय के अनुसार गृह मंत्रालय के दिशानिर्देशों के मुताबिक लॉकडाउन की वजह से जगह-जगह फंसे प्रवासी श्रमिकों, तीर्थयात्रियों, पर्यटकों, छात्रों और अन्य लोगों की आवाजाही की अनुमति मिलने के बाद भारतीय रेलवे ने एक मई से विशेष श्रमिक ट्रेनों का परिचालन शुरू कर दिया था, जिसमें बुधवार यानि 34 दिनों के दौरान चलाई गई करीब 4200 श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में 60 लाख से ज्यादा प्रवासी श्रमिकों व अन्य लोगों ने सफर करते हुए अपने घर वापसी की है। भारतीय रेलवे ने इन प्रवासियों को कोरोना बचाव के लिए सभी तरह की सुरक्षात्मक सुविधाओं के साथ निशुल्क यात्रा कराई है और सफर के दौरान उन्हें निशुल्क भोजन व पानी भी मुहैया कराया जा रहा है। रेलवे के अनुसार अब तक संचालित ट्रेनों में से बुधवार दोपहर तक 4119 अपने गंतव्य तक पहुंच चुकी हैं और 81 ट्रेने गंतव्य तक जाने के लिए रेल पटरियों पर दौड रही हैं, जबकि बुधवार को दस ट्रेनें देर रात तक चलाई जानी हैं। रेल मंत्रालय ने यह भी जानकारी दी है कि अब तक चलाई गई करीब चार हजार 200 श्रमिक विशेष ट्रेनों में से यात्रियों के अभाव में मांग के बावजूद कुछ राज्यों ने अब तक 256 ट्रेनों को रद्द किया है। इनमें महाराष्ट्र में सर्वाधिक 105 ट्रेन, गुजरात में 47 ट्रेनें, कर्नाटक में 38 ट्रेनें और उत्तर प्रदेश में 30 ट्रेन रद्द की गई हैं।
यूपी पहुंची सबसे ज्यादा ट्रेनें
रेलवे के अनुसार अब तक संचालित 4155 श्रमिक वेशष रेलगाड़ियों में सबसे ज्यादा 1026 ट्रेने गुजरात से रवाना की गई। शीर्ष पांच राज्यों में इसके बाद महाराष्ट्र से 802 ट्रेनें, पंजाब से 416 ट्रेनें, उत्तर प्रदेश और बिहार से 294-294 ट्रेनों की उत्पत्ति हुई। जबकि सबसे ज्यादा 1682 ट्रेने उत्तर प्रदेश पहुंची हैं। जबकि 1495 ट्रेनें बिहार, 197 ट्रेने झारखंड 187 ट्रेने ओडिशा तथा 156 ट्रेनों का सफर पश्चिम बंगाल में समाप्त हुआ है।
-------------------------------
लॉकडाउन में उत्तर रेलवे को हुआ 1885 करोड का नुकसान
उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी दीपक कुमार ने बुधवार को जानकारी दी है कि कोरोना महामारी के कारण लॉकडान के बीच सभी यात्री ट्रेनों के रद्द किये जाने से 31 मई तक 1885 करोड रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है। मसलन 31 मई तक यात्रा के लिए बुक हुए आरक्षित टिकटों की पूरी रकम के रूप में उत्तर रेलवे द्वारा 1885 करोड़ रुपये की धनराशि यात्रियों को वापस की जा चुकी है। इस प्रकार रेलवे को लॉकडाउन के कारण ट्रेनों को रद्द करने के कारण हजारों करोड़ों के नुकसान के साथ यात्रियों को वापस की जा रही धनराशि के कारण बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। रेलवे द्वारा यात्रियों को समय पर बुक टिकटों का रिफंड देने के लिए उन्हें पीआरएस काउंटर पर जाने की असुविधा से दूर रखने की भी रेलवे ने व्यवस्था की है, जिसमें कोरोना बचाव से सुरक्षा को कायम रखा जा सके।
04June-2020