बुधवार, 3 जून 2020

दिल्ली-अमृतसर एक्सप्रेसवे के साथ बनेगा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे



केंद्र सरकार ने पंजाब सरकार की मांग को दी मंजूरी
हरिभूमि ब्यूरो.नई दिल्ली।
केंद्र सरकार ने मंगलवार को दिल्ली-अमृतसर एक्सप्रेस5वे के हिस्से के रूप में सुल्तानपुर लोधी, गोइंदवाल साहिब, खादूर साहिब के बरास्ते नाकोदर से अमृतसर शहर के लिए एक नये ग्रीनफील्ड सम्पर्क मार्ग को विकसित करने की घोषणा की है।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवार को नई दिल्ली में नितिन गडकरी की अध्यक्षता में अमृतसर के लिए नये मार्ग के विकास को लेकर हुई बैठक में घोषण की। उन्होंने कहा कि अमृतसर से गुरुदासपुर तक की सड़क भी पूरी तरह विकसित होगी तथा इसे पूरी तरह सिग्नल मुक्त बनाया जाएगा। इसकी वजह से सड़क मार्ग के यात्रियों के पास नाकोदर से गुरुदासपुर से आगे यात्रा करने का विकल्प होगा अर्थात वे अमृतसर के रास्ते भी जा सकते हैं और करतारपुर के रास्ते भी आवागमन आसान होगा। गडकरी ने कहा कि यह ग्रीनफील्ड मार्ग न केवल अमृतसर शहर के लिए बल्कि सुल्तानपुर लोधी, गोइंदवाल साहिब, खादूर साहिब तथा हाल ही में विकसित डेरा बाबा नानक/करतारपुर साहब अंतरराष्ट्रीय गलियारा के लिए भी सबसे छोटा और वैकल्पिक एक्सप्रेस सम्पर्क-मार्ग उपलब्ध कराएगा। गडकरी ने अमृतसर शहर के लिए एक नये ग्रीनफील्ड सम्पर्क-मार्ग को विकसित करने की घोषणा करते हुए यह भी जानकारी दी कि इस एक्सप्रेसवे के साथ अमृतसर से दिल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की यात्रा की दूरी वर्तमान आठ घंटों से घटकर लगभग चार घंटे की हो जाएगी। उन्होंने कहा कि यह पंजाब के लोगों की एक चिर प्रतीक्षित मांग को पूरी करेगा। एक्सप्रेसवे के पहले चरण में लगभग 25 हजार करोड़ रुपये का निवेश शामिल होगा। मंगलवार को हुई इस बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह, केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्री श्रीमती हरसिमरत कौर बादल, केंद्रीय आवासन तथा शहरी मामले राज्य मंत्री हरदीप सिंह पुरी, डोनर राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्यमंत्री जनरल वी के सिंह, राज्यसभा सांसद श्वेत मलिक, लोकसभा सांसद  गुरजीत सिंह औजला, पंजाब सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री अनिल जोशी, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग के सचिव, एनएचएआई के अध्यक्ष एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए।
भारत माला परियोजना में शामिल
उन्होंने कहा कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने भारतमाला परियोजना के तहत दिल्ली अमृतसर कटरा एक्सप्रेसवे का विकास आरंभ किया है। एक्सप्रेसवे को जनवरी 2019 में अंतिम रूप दिया गया और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आरंभ हो गई। हाल ही में अमृतसर के लिए एक्सप्रेसवे का मुद्दा खाद्य प्रसंस्करण मंत्री श्रीमती हरसिमरत कौर बादल और नागरिक उड्डयन तथा आवासन तथा शहरी मामले राज्य मंत्री हरदीप सिंह पुरी द्वारा केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के समक्ष उठाया गया है। यह मुद्दा राज्यसभा सांसद श्वेत मलिक, सांसद  के अलावा लोकसभा सांसदों गुरजीत सिंह औजला के साथ पंजाब सरकार, सिख संगठनों एवं अन्य जन प्रतिनिधियों द्वारा भी उठाया जा रहा था।
गौरतलब है कि परियोजना के आरंभ में जम्मू एवं कश्मीर की सरकार ने दिल्ली-कटरा एक्सप्रेसवे का प्रस्ताव रखा था। बहरहाल केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री गडकरी ने परिकल्पना की कि शहर के धार्मिक महत्व को देखते हुए जहां प्रति वर्ष चार मिलियन से अधिक पर्यटक यात्रा करते हैं, प्रस्तावित एक्सप्रेसवे को अमृतसर से गुजरना चाहिए और इस प्रकार भारतमाला के तहत दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे की संकल्पना अस्तित्व में आई। गडकरी ने पंजाब सरकार से भी आग्रह किया है कि वह पंजाब राज्य में प्रस्तावित एक्सप्रेसवे के लिए भूमि अधिग्रहण में तेजी लाने के लिए एनएचएआई को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराएं। 
03June-2020

हाशिए पर जीवन बिताने वालों को एसबीआई बिना गांरटी देगा लोन

03June-2020

अब उन्नीस जून को राज्यसभा की 24 सीटों पर होगा चुनाव



जून-जुलाई में रिक्त होने वाली 6 सीटों पर भी मतदान कराने का निर्णय
हरिभूमि ब्यूरो.नई दिल्ली।
केंद्रीय चुनाव आयोग ने देश में कोरोना संकट की वजह से स्थगित राज्यसभा की 55 सीटों के लिए द्विवार्षिक चुनाव को 19 जून को कराने का ऐलान किया है, जिसमें 37 प्रत्याशियों के निर्विरोध निर्वाचित सांसद चुने जाने के बाद बाकी 18 सीटों के लिए मतदान कराया जाएगा। इन्हीं के साथ चुनाव आयोग ने राज्यसभा में जून व जुलाई में रिक्त होने वाली छह सीटों के लिए भी इसी तारीख को मतदान कराने का निर्णय लिया है, जिसमें अब 19 जून को 24 सीटों के लिए चुनाव होगा।
चुनाव आयोग के प्रवक्ता के अनुसार तीन राज्यों के छह राज्यसभा सांसदों का कार्यकाल जून व जुलाई में समाप्त हो रहा है, जिसके कारण रिक्त होने वाली इन छह सीटों के लिए भी द्विवार्षिक चुनाव कराने का ऐलान किया है। आयोग के अनुसार 23 जून को अरुणाचल के राज्यसभा सांसद मुकुट मिथी का कार्यकाल पूरा हो रहा है, जबकि 25 जून का कर्नाटक की चार सीटें बीके हरिप्रसाद, डी. कुपेन्द्र रेड्डी, प्रभाकर कोरे तथा एमवी राजीवगौडा के अलावा एक सीट मिजोरम के रोनाल्ड सप तलौ के कार्यकाल के कारण रिक्त होने जा रही हैं। चुनाव आयोग के घोषित कार्यक्रम के अनुसार इन छह सीटों के लिए तत्काल दो जून से नामांकन प्रक्रिया शुरू हो गई है, जिसके लिए नौ जून अंतिम तिथि होगी। 10 जून को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 12 जून तक नामांकन वापस लिये जा सकेंगे। 19 जून को सुबह नौ बजे से चार बजे तक यदि आवश्यकता हुई तो मतदान कराया जाएगा। इसी दिन सायं पांच बजे से मतदान प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी और संभवत: उसी दिन रात तक चुनाव परिणाम घोषित कर दिया जाएगा। आयोग को 22 जून से पहले चुनाव प्रक्रिया पूरी करानी है। चुनाव आयोग के अनुसार 26 मार्च में कराए जाने वाले सात राज्यों में उन 18 सीटों पर चुनाव भी 19 जून को कराने की घोषणा पहले ही की जा चुकी है। दरअसल 26 मार्च को राज्यसभा की 55 सीटों पर मतदान होना था, जिनमें 37 प्रत्याशियों को पहले ही निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया था। जबकि बाकी बची 18 सीटों पर कोरोना संकट के कारण चुनाव स्थगित करना पड़ा था। सात राज्यों की इन 18 सीटों में  आंध्र प्रदेश और गुजरात की 4-4 सीटें, मध्य प्रदेश और राजस्थान की तीन-तीन सीटें, झारखंड की दो और पूर्वोत्तर राज्यों मेघालय और मणिपुर की एक-एक सीट शामिल हैं।
17 राज्यों में रिक्त थीं 55 सीटें
राज्यसभा की जिन 55 सीटों पर 26 मार्च में चुनाव कराए जाने थे, उन सीटों में ऐसी 37 सीटों पर प्रत्याशियों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया जा चुका था, उनमें राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश, राकांपा प्रमुख शरद पवार, केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले, शिवसेना की प्रियंका चतुर्वेदी, एआईएडीएमके नेता एम थम्बीदुरई, तमिल मनीला कांग्रेस के अध्यक्ष जीके वासन, वरिष्ठ वकील केटीएस तुलसी और कांग्रेस नेता दीपेंद्र सिंह हुड्डा शामिल हैं। मसलन महाराष्ट्र की सभी सात सीटों, तमिलनाडु का छह, हरियाणा, छत्तीसगढ़ एवं तेलंगाना की दो, ओडिशा की चार, बिहार एवं पश्चिम बंगाल की पांच-पांच, असम की तीन और हिमाचल प्रदेश की एक सीट पर उम्मीदवार निर्विरोध रूप से राज्यसभा में दाखिल हो चुके हैं।
03June-2020


सीएपीएफ कैंटीन से विदेशी सामानों के डी-लिस्ट करने पर रोक


गृह मंत्रालय ने अचानक बदला फैसला में संशोधन
हरिभूमि ब्यूरो.नई दिल्ली।
देश में जब एक जून को स्वदेशी उत्पादों की बिक्री शुरू की गई, जिसके लिए विदेश ब्रांड के सामनों को डीलिस्ट किया जाने लगा तो अचाननक गृहमंत्रालय ने करीब 1026 गैर स्वदेशी सामानों और कंपनियों को डी-लिस्ट करने पर अपना फैसला बदलते हुए रोक लगा दी है।
गृह मंत्रालय के अनुसार केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के लिए केंद्रीय पुलिस कल्याण भंडार की सीएपीएफ कैंटिनों से एक जून से हटाए जा रहे गैर स्वदेशी उत्पादों को डी-लिस्ट करने पर रोक लगा दी है। मंत्रालय के अनुसार इससे पहले सीएपीएफ की कैंटीनों ने डाबर, वीआईपी इंडस्ट्रीज, यूरेका फोर्ब्स, जकुआर, एचयूएल (फूड्स), नेस्ले इंडिया जैसी कंपनियों के एक हजार से अधिक उत्पादों को को कैंटिनों से हटाने का निर्णय लिया गया था, इसके लिए एक जून से केवल स्वदेशी उत्पादों की बिक्री होनी थी, लेकिन जब केपीकेबी की कैंटिनों से इन उत्पादों को हटाया जाने लगा तो सोमवार को ही अचालन गृह मंत्रालय ने डी-लिस्ट की जा रही कंपनियों व उत्पादों के हटाने पर फिलहाल रोक लगाने का फैसला किया। हालांकि सीएपीएफ कैंटीनों में अब संबंधित उत्पादों की बिक्री न होने की बात एक सरकारी आदेश में कही गई थी। मंत्रालय के अनुसार कुछ खास उत्पादों में आयातित सामान का इस्तेमाल करने वाली और सूची से बाहर हुई कंपनियों में डाबर इंडिया लिमिटेड, वीआईपी इंडस्ट्रीज, नेस्ले इंडिया, ब्लू स्टार लिमिटेड, बोरोसिल ग्लास वर्क्स लिमिटेड, कोलगेट पामोलिव इंडिया लिमिटेड, यूरेका फोर्ब्स, जकुआर, एचयूएल (फूड्स) और अन्य कंपनियां शामिल हैं। आदेश में कहा गया था कि गैर स्वदेशी वस्तुओं को खारिज या सूची से बाहर पूरी तरह कंपनियों द्वारा उपलब्ध कराई गई सूचना के आधार पर किया गया है। गौरतलब है कि लॉकडाउन के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा कोरोना संकट से निपटने के लिए आत्मनिर्भर भारत पैकेज का ऐलान करने के बाद गृहमंत्रालय ने निर्णय लिया था कि एक जून से देश में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की कैंटिनों यानि केंद्रीय पुलिस कल्‍याण भंडारों पर स्वदेशी सामान की बिक्री की जाएगी।
देशभर में 1700 कैंटीन
गृह मंत्रालय के अनुसार केंद्रीय पुलिस कल्याण भंडार वर्ष 2006 में स्थापित किये गये सीएपीएफ कैंटिन के नेटवर्क को संचालित करने मुख्य संस्था है। केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की कैंटीन के तहत देशभर में 1700 से अधिक केंद्रीय पुलिस पैरामिलिट्री कैंटीन (सीपीसीएफ) का संचालन हो रहा है। इन कैंटिनों में किराना का सामान, कपड़े, उपहार सामग्री और वाहन एवं अन्य सामानों की बिक्री होती है। सीएपीएफ की कैंटीन में सालाना करीब 2800 करोड़ रुपये का व्यवसाय होता है। पुलिस बलों की तैनाती वाले विभिन्न स्थानों पर 119 से ज्यादा मास्टर कैंटीन और 1625 सहायक कैंटीन हैं। केंद्रीय पुलिस कैंटीन का इस्तेमाल सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, सीआईएसएफ, एसएसबी, एनएसजी और असम राइफल्स में सेवारत लगभग 10 लाख कर्मियों के लगभग 50 लाख परिवार के सदस्य करते है।
तीन श्रेणियों में बांटे उत्पाद
केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्णय के अनुसार केंद्रीय पुलिस कल्याण भंडार (केपीकेबी) ने गृहमंत्रालय के निर्णय के कार्यान्वयन की प्रक्रिया में गैर स्वदेशी उत्पादों को श्रेणी-3 में रखते हुए उन्हें व कंपनियों को डी-लिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी, जिन पर गृह मंत्रालय ने रोक लगा दी है। मंत्रालय के अनुसार केपीकेबी ने प्रतिबंधित किये जाने वाले सभी उत्पादों को तीन श्रेणियों में विभाजित किया है। केंद्रीय पुलिस कल्याण भंडार में केवल श्रेणी-1 और श्रेणी-2 के अंतर्गत आने वाले स्वदेशी ब्रांड के सामान को रखा जा रहा है। जबकि श्रेणी-3 में आने वाले उन सामानों की बिक्री पर रोक लगाने के लिए एक जून यानि सोमवार से जिन उत्पादों को डीलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू की गई उनमें विशुद्ध रूप से आयातित यानि विदेशी उत्पाद शामिल है। जबकि पहली दो श्रेणियों में विशुद्ध रूप से भारत में निर्मित उत्पाद और कच्चा माल आयातित, लेकिन उत्पाद भारत में निर्मित या असेंबल्ड वाले उत्पाद शामिल हैं।
02June-2020