बुधवार, 3 जून 2020

दिल्ली सरकार को मिली पहली आइसोलेशन कोच ट्रेन

दिल्ली के कोरोना संक्रमितों का हो सकेगा इलाज
हरिभूमि ब्यूरो.नई दिल्ली।
भारतीय रेलवे ने कोरोना महामारी में संक्रमितों के इलाज की दिशा में पांच हजार से ज्यादा ट्रेनों के कोचों को आईसोलेशन वार्ड के रूप में तब्दील किये थे, लेकिन लॉकडाउन के दौरान एक भी कोच का इस्तेमाल नहीं हो सका, लेकिन अनलॉक शुरू होते ही दिल्ली सरकार को उसकी मांग पर दस आईसोलेशन वार्ड वाले कोच की एक स्पेशल ट्रेन सौंपी गई है।
रेलवे के अनुसार कोरोना वायरस के शिकार मरीजों के इलाज के लिए भारतीय रेलवे ने भी निरस्त की गई ट्रेनों के पांच हजार से ज्यादा कोचों को आईसोलेशन वार्ड में बदले थे, इनमें से आईसोलेशन वार्ड के रुप में पहले कोच का इस्तेमाल दिल्ली सरकार करेगी। रेलवे के अनुसार दिल्ली में बढ़ती कोरोना मरीजों की संख्या को देखते हुए अस्पतालों में बेड की कमी से जूझ रही दिल्ली सरकार ने भारतीय रेलवे से आईसोलेशन के रूप में बदले कोच की मांग की, तो रलेवे ने दिल्ली में कोरोना वायरस के रोगियों के इलाज के लिए दस आइसोलेशन वार्ड बने कोच की एक ट्रेन को तैनात कर दिया है। रेलवे के दिल्ली सरकार को सौंपी गई कोविड-19 स्पेशल ट्रेन में कुल 10 कोच हैं। इस ट्रेन में करीब 160 कोरोना पॉजिटिव मरीजों को भर्ती करने की व्यवस्था की गई है और कोरोना पॉजिटिव मरीजों के इलाज व क्वारंटीन से संबंधित सभी इंतजाम किए गए हैं। वहीं इस ट्रेने के आईसोलेशन कोचों में स्वास्थ्यकर्मियों के लिए भी एक वातानुकूलित कोच को तैनात किया गया है।
चिकित्सीय संसाधनों से लैस कोच
रेलवे के अनुसार रेलवे के दिल्ली डिवीजन की ओर से दिल्ली सरकार को ट्रेन के इन आइसोलेशन कोच में की गई सभी चिकित्सीय और मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था के बारे में बता दिया गया है, जिनमें पानी, बिजली, चादर, आक्सीजन सिलेंडर आदि की व्यवस्था रेलवे की तरफ से होगा। वहीं सुरक्षा के लिए सुरक्षा बलों को भी तैनात कर दिया गया है। इसके अलावा शकूरबस्ती वाशिंग लाइन में कुछ कमरे भी दिल्ली सरकार को दिए जाएंगे, ताकि वहां मरीजों की देखभाल से संबंधित कार्य के लिए तैयारी हो सके। गौरललब है रेलवे ने 5,231 डिब्बों को आइसोलेशन के लिए तैयार किया है, उनमें से 100 डिब्बों पर नए रंग चढ़ाए जा रहे हैं, ताकि जून-जुलाई की गर्मी में भी उसके अंदर रहने वालों को कम गर्मी से बचाव किया जा सके।
02June-2020

किसान, कारोबारी व रेहडी पटरी वालों को सौगातें



एमएसएमई की संशोधित परिभाषा को मिली मंजूरी
केंद्र सरकार ने पैकेज में भी किया इजाफा
हरिभूमि ब्यूरो.नई दिल्ली।
केंद्र सरकार ने एमएसएमई की परिभाषा में संशोधन को मंजूरी दे दी है, जिसमें निवेश की सीमा बढाने के साथ कारोबार के दायरे को भी बढ़ाया गया है। सरकार ने एमएसएमई क्षेत्र को 20 हजार करोड़ रुपये की सहायता देने के प्रावधान पर भी मुहर लगाई।  
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में सोमवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में एमएसएमई की परिभाषा बदलने के संशोधित प्रस्ताव को मंजूरी देने के साथ इसके तहत निवेश की सीमा बढ़ाकर एक करोड़ के निवेश और 5 करोड़ का कारोबार करने का फैसला किया गया है। केंद्र की मंजूरी के तहत लघु इकाई निवेश की सीमा बढ़ाकर 10 करोड़ रुपए और 50 करोड़ रुपए का कारोबार किया गया, तो वहीं मध्यम इकाई के तहत 20 करोड़ रुपए निवेश और 250 करोड़ रुपए का कारोबार कर दिया है, इसके दायरे में मध्यम और मैन्युफैक्चरिंग सेवा इकाइयां भी शामिल हैं। वहीं यह भी निर्णय लिया गया है कि निर्यात में एमएसएमई को किसी भी टर्नओनर में नहीं गिना जाएगा, चाहे वह सूक्ष्म,लघु या मध्यम ईकाई ही क्यों न हों।
देश में छह करोड़ एमएसएमई
केंद्रीय एमएसएमई मंत्री नितिन गडकरी ने केंद्र सरकार के इस फैसले को लेकर कहा कि एमएसएमई को भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, जिसकी संख्या करीब 6 करोड़ है। कोरोना महामारी के बाद प्रधानंत्री द्वारा एमएसएमई की आत्मनिर्भरता को पहचाने और उसे पैकेज देने के निर्णय को देशहित में बताते हुए नितिन गडकरी ने कहा कि सरकार की अर्थव्यवस्था सुधार के लिए की गई घोषणाओं से देशभर में 66 करोड़ से ज्यादा लोगों को फायदा होगा, जिसमें 55 करोड़ खेती पर निर्भर लोग हैं, जबकि 11 करोड़ ऐसे लोग हैं जो एमएसएमई में काम कर रहे हैं।
एमएसएमई को 20 हजार करोड़
केंद्रीय कैबिनेट की बैठक की जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर और नितिन गडकरी ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत घोषणाओं के लिए रोडमैप तैयार किया जा चुका है। इन घोषणाओं से एमएसएमई क्षेत्र में निवेश आएगा और नौकरियां पैदा होंगी। कोरोना महामारी के कारण लॉकडाउन की वजह से संकट में फंसे एमएसएमई को इक्विटी सहायता देने की दिशा में कैबिनेट की बैठक में एमएसएमई के तहत 20 हजार करोड़ रुपए की सहायता के प्रावधान के प्रस्ताव को भी स्वीकृत किया गया। इस मंजूरी से देश में संकट में फंसे 2 लाख एमएसएमई को फायदा होगा। गडकरी ने कहा कि इस क्षेत्र में 50 हजार करोड़ रुपए के इक्विटी निवेश का प्रस्ताव भी पहली बार हुआ है, जिससे एमएसएमई उद्योगों को स्टॉक एक्सचेंज में सूचिबद्ध होने का मौका मिलेगा।
एमएसमई में बनेंगे दो फंड
केंद्रीय एमएसएमई मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि सरकार ने एमएसएमई के लिए दो फंड बनाने का निर्णय लिया है। गडकरी ने कहा कि एमएसएमई को लेकर दो फंड बनाए गए हैं। इसमें पहला डिस्ट्रेस एसेसमेंट फंड होगा,, जिसमें 4 हजार करोड़ का प्रावधान है, जबकि दूसरे को फंड ऑफ फंड्स के रूप में परिभाषित किया गया है, जो 50 हजार करोड़ रुपये का है। इन दोनों शेयरों को बहुत जल्द शेयर मार्केट में सूचीबद्ध किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार के फैसलों से देशभर में एमएसएमई में 11 करोड़ से ज्यादा लोगों को नौकरी मिली है। वहीं एमएसएमई की मजबूती से निर्यात बढ़ेगा, इसके लिए गडकरी ने 25 लाख एमएसएमई के पुनर्गठन की उम्मीद जताई है।
एमएसएमई के लिए वरदान साबित होगा ‘चैंपियन्स’                
अर्थव्यवस्था के सुधार की दिशा में पीएम मोदी ने की पोर्टल की शुरुआत
हरिभूमि ब्यूरो.नई दिल्ली।
केंद्र सरकार ने एमएसएमई की नई परिभाषा बदलने के साथ उसकी अर्थव्यवस्था सुधार के लिए टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म के रूप में ‘चैम्पियंस’ पोर्टल की शुरूआत की है, जिसे पीएम मोदी ने लांच किया।
एमएसएमई मंत्रालय के अनुसार सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म चैम्पियंस लॉन्च किया। इस पोर्टल का मकसद एमएसएमई क्षेत्र में उत्पादन और राष्ट्रीय शक्ति बढ़ाने के लिए आधुनिक प्रक्रियाओं का निर्माण और सामंजस्यपूर्ण अनुप्रयोग को बढ़ावा देना है। प्रधानमंत्री ने कहा यह एमएसएमई सेक्टर की सभी समस्याओं के समाधान और सहायता के लिए एकमात्र केंद्र होगा। इसका उद्देश्य इन उद्योगों की सहायता, शिकायतों का निवारण, उद्यमशील प्रतिभा का उपयोग और व्यापार के नए अवसरों की खोज करना है। यह पोर्टल मूलत: छोटी इकाईयों की समस्याओं का हल करके, उन्हें उत्साहित करने, सहयोग देकर बड़ा बनाने के लिए है। यह एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग) उद्योगों की सभी समस्याओं के समाधान के लिए एक केंद्र होगा। यह व्यवस्था वर्तमान कठिन परिस्थितियों में एमएसएमई उद्योगों की मदद करने के लिए और उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उभारने के लिए तैयार की गई है।  इस मौके पर एमएसएमई मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि इस पोर्टल के जरिए क्षमताओं को बढ़ावा मिलेगा, जिसमें ऐसे क्षमतावान उद्योगों को प्रोत्साहित करना जो वर्तमान स्थितियों के मुताबिक खड़े होने में सक्षम हैं और जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान बना सकते हैं। गडकरी के अनुसार यह एक टेक्नोलॉजी पर आधारित कंट्रोल रूम और सूचना प्रबंधन व्यवस्था है। यह टेलीफोन, इंटरनेट और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधाओं से लैस है। इसके साथ ही इसमें आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई), डाटा एलालिटिक्स और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल किया गया है।
ये है चैंपियन्स का अर्थ
मंत्रालय के अनुसार इस पोर्टल के शब्दों के चयन की जानकारी दी गई है, जिसमें चैंपियन्स में सी का मतलब क्रिएशन यानी निर्माण, एच का मतलब हारमोनियस यानी सामंजस्यपूर्ण, ए का मतलब एप्लीकेशन यानी अनुप्रयोग, एम का मतलब मॉडर्न यानी आधुनिक, पी का मतलब प्रोसेसेस यानी प्रक्रियाएं, आई का मतलब इंक्रीज यानी बढ़ोत्तरी, ओ का मतलब आउटपुट यानी उत्पादन, एन का मतलब नेशनल यानी राष्ट्रीय और एस का मतलब स्ट्रेंथ यानी ताकत है।
समस्याओं का होगा समाधान
मंत्रालय के अनुसार एमएसएमई क्षेत्र में आने वाली शिकायतों व समस्याओं के समाधान में भी यह पोर्टल बेहतर विकल्प होगा। मसलन एमएसएमई की समस्याओं को हल करने के लिए जिनमें वित्त, कच्चे माल, श्रम, विनियामक अनुमति आदि शामिल हैं। वहीं इसमें नए मौके तलाशना भी आसान होगा यानि  चिकित्सा उपकरणों और अन्य सामान जैसे पीपीई, मास्क आदि का निर्माण और राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उनकी आपूर्ति करने की जानकारी हासिल होगी। 
02June-2020


नेशनल हाईवे में विकसित होंगे राज्यों की राजधानियों को जोड़ने वाले राजमार्ग


एनएचएआई ने ऐसे 1,735 किमी लंबे 57 राजमार्ग की है पहचान
हरिभूमि ब्यूरो.नई दिल्ली।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) देश के प्रत्येक राज्य की राजधानी को जोड़ने वाले ऐसे 57 राजमार्गों का राष्ट्रीय राजमार्ग के रुप में विकास करने की योजना बनाई है। इस योजना के तहत राजमार्ग इंजीनियरों को प्रशिक्षित किया जाएगा।
एनएचएआई के प्रवक्ता प्रवीण त्यागी ने यह जानकारी देते हुए बताया कि प्राधिकरण ने देश में राष्ट्रीय राजमार्गों को मजबूत एवं टिकाउ बनाने की दिशा में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने हरेक राज्य की राजधानियों के पास राजमार्गो को नेशनल हाईवे के मॉडल स्ट्रेच के रुप में विकसित करने की योजना के तहत तैयार की है। इसके लिए राजमार्ग इंजीनियरों को प्रशिक्षित किया जाएगा। देशभर में ऐसे 57 राजमार्गो की पहचान की गई है जिनकी लंगाई 1,735 किलोमीटर है। ये मॉडल नेशनल हाई-वे हाईटेक होंगे, जिनके तकनीकी विकास के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग इंजीनियरों के साथ ही राज्य लोक निर्माण विभाग के इंजीनियरों को प्रशिक्षित ​किया जाएगा, इसके लिए देश के राष्ट्रीय राजमार्ग इंजीनियरों को निर्देशित किया गया है, जिनके लिए एक मंच के रूप में काम करने के राज्यों के लोक निर्माण विभाग के इंजीनियर भी शामिल रहेंगे।एनएचएआई ने देश में राज्यों के जिन राजमार्गों को आदर्श राष्ट्रीय राजमार्गमार्ग में विकसित किया जाना है उनमें प्रमुख रुप से राजस्थान में दौसा से जयपुर, पंजाब में जालंधर से अमृतसर,जम्मू—कश्मीर में श्रीनगर से बनिहाल, यूपी मे वाराणसी रिंगरोड, तमिलनाडु में चेन्नई बाईपास, मध्य प्रदेश-महाराष्ट्र सीमा से नागपुर (नागपुर बाईपास सहित) और असम मे ब्रह्मपुत्र नदी पुल से गुवाहाटी तक का राजमार्ग शामिल है।
कैसा होगा निर्माण का स्वरुप
एनएचएआई के अनुसार इन मॉडल नेशनल हाई-वे के निर्माण कार्य में सड़क संकेतक, सड़क की मार्किंग, सड़क फर्नीचर और सुरक्षा सामान, उचित जंक्शन और एंट्री-एक्जिट शामिल हैं। वहीं  राष्ट्रीय राजमार्गों पर उचित ड्रेनेज, पैदल चलने वाले यात्रियों के लिए जगह, स्ट्रीट लाइट, पेड़-पौधे, टोल प्लाजा, बुनियादी सुविधाएं और सीसीटीवी कैमरा लगाने की योजना भी इन मार्गो को हाईटेक बनाने मे मदद करेगी। दुर्घटनाओं और पर्यावरणीय उपायों के तहत दुर्घटना संभावित यानि ब्लैक स्पॉट पर विशेषरुप से सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। मसलन इन सभी विशेषताओं के साथ यह मॉडल सड़क के एक परिपूर्ण पाठ्यपुस्तक संस्करण की तरह दिखाई देगा।
जारी किए गये नीति दिशानिर्देश
एनएचएआई ने पहले ही अपने क्षेत्रीय अधिकारियों व परियोजना निदेशकों को मॉडल स्ट्रेच के विकास की पहचान और योजना बनाने और गतिविधि को समय पर पूरा करने में मदद करने के लिए नीति दिशानिर्देश जारी किए हुए हैं। इस मामले में त्वरित निर्णय लेने के लिए पर्याप्त वित्तीय शक्तियां प्रत्यायोजित की गई हैं। एनएचएआई मुख्यालय ऑनलाइन ई-पोर्टल (डेटा लेक) के माध्यम से प्रगति की बारीकी से निगरानी करेगा, जहां प्रत्येक मॉडल स्ट्रेच के चित्र/वीडियो को अन्य संबंधित जानकारी के अलावा अपलोड किया जाएगा। एनएचएआई देश के राजमार्ग इंजीनियरों को शिक्षित करने के अलावा राजमार्ग उपयोगकर्ताओं को सुरक्षित और सुखद ड्राइविंग अनुभव प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
01June-2020