सोमवार, 4 नवंबर 2019

पीएम हाउस को राष्ट्रपति भवन के निकट लाने की तैयारी



केंद्र सरकार को आर्किटेक्‍ट कंपनी ने दिया सुझाव
नई दिल्ली।
राजपथ को डिजाइन करने के लिए चुनी गई आर्किटेक्ट फर्म सेंट्रल विस्टा ने पीएम आवास को 7 लोक कल्याण मार्ग से रायसीना हिल्स (राष्ट्रपति भवन) के दक्षिण में डलहौजी रोड हटमेंट्स पर शिफ्ट करने का सुझाव दिया है।
सूत्रों के अनुसार अधिकारियों ने हालांकि साफ कर दिया है कि सभी पहलुओं, जिनमें पीएम हाउस और प्रधानमंत्री कार्यालय को शिफ्ट करना भी शामिल है, पर काफी सोच विचार के बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा। अहमदाबाद स्थित आर्किटेक्चर ऐंड अर्बन डिजाइन फर्म एचपीसी डिजाइन ने प्रधानमंत्री आवास को शिफ्ट करने और राजपथ में कई बदलाव का प्रस्ताव दिया है। इसमें संसद भवन की नई इमारत और केंद्रीय सचिवालय की बिल्डिंग का निर्माण भी शामिल है। 12 हजार करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली परियोजना के प्रस्ताव में शास्त्री भवन, उद्योग भवन और कृषि भवन जैसे एक दर्जन सरकारी कार्यालयों की जगह एक आम सचिवालय के साथ लगभग 70 हजार केंद्र सरकार के कर्मचारी शामिल हैं, जो वर्तमान में 30 इमारतों में काम करते हैं। इसमें सचिवालय एनेक्स के लिए एक नए परिसर का प्रस्ताव रखा गया है। केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री हरदीप पुरी ने शनिवार को हिंदुस्तान टाइम्स को बताया कि सरकार अन्य सभी कंपनियों के कई परामर्श और इनपुट शामिल करेगी (जिन्हें शॉर्टलिस्ट किया गया था लेकिन उन्हें सम्मानित नहीं किया गया) और फिर "मास्टर प्लान को अंतिम रूप" देगी। बता दें कि पुरी के मंत्रालय ने पिछले सोमवार को अपने प्रस्तावों की समीक्षा के लिए तकनीकी दौर में शॉर्टलिस्ट की गई अन्य फर्मों को भी आमंत्रित किया था।
04Nov-2019
 


रविवार, 3 नवंबर 2019

केंद्र सरकार ने जारी किया भारत का नया नक्शा

जम्मू कश्मीर व लद्दाख़ संघ राज्य क्षेत्रों में पीओके भी जोड़ा
हरिभूमि ब्यूरो. नई दिल्ली।
जम्मू-कश्मीर से धारा 370 और 35ए खत्म होने के बाद दो अलग अलग जम्मू-कश्मीर व लद्दाख संघ राज्यों के पुनर्गठन कानून लागू होने के एक दिन बाद केंद्र सरकार ने भारत का नक्शा जारी किया है, जिसमें पीओके के जिलों को भी इन दोनों संघ शासित राज्यों में शामिल कर जिलों की संख्या बढ़ाने की अधिसूचना जारी की गई है।
केंद्रीय गृहमंत्रालय के अनुसार शनिवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हस्ताक्षर से जारी अधिसूचना के अनुसार भारत के नए मानचित्र में 1947 में जम्मू-कश्मीर के 14 जिलों की संख्या वर्ष 2019 में बढ़ाकर 28 की गई है, जिसमें पाक अधिकृत कश्मीर के जिलों को भी इस मानचित्र में शामिल किया गया है। हालांकि पीओके पर पाकिस्तान का कब्जा है, लेकिन उसे भारत के मानचित्र में शामिल करके नया मानचित्र जारी किया गया है। गृह मंत्रालय के सचिव अजय कुमार भल्ला द्वारा राष्ट्रपति के हस्ताक्षर से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि संसद की सिफ़ारिश पर राष्ट्रपति द्वारा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 को प्रभावी तौर से निराकरित करने और जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम-2019 जारी करने के उपरांत भूतपूर्व जम्मू और कश्मीर राज्य 31 अक्टूबर 2019 को नए जम्मू कश्मीर संघ राज्य क्षेत्र तथा नए लद्दाख़ संघ राज्य क्षेत्र के रूप में पुनर्गठित हो गया है। नए लद्दाख़ संघ राज्य क्षेत्र में कारगिल तथा लेह दो ज़िले हैं और भूतपूर्व जम्मू और कश्मीर राज्य का बाक़ी हिस्सा नए जम्मू और कश्मीर राज्य संघ क्षेत्र में है। मंत्रालय के अनुसार 1947 में भूतपूर्व जम्मू और कश्मीर राज्य में निम्न 14 जिले थे, जिनमें कठुआ, जम्मू, ऊधमपुर, रियासी, अनंतनाग, बारामूला, पुँछ, मीरपुर, मुज़फ़्फ़राबाद, लेह और लद्दाख़, गिलगित, गिलगित वजारत, चिल्हास और ट्राइबल टेरिटॉरी शामिल हैं। अब 2019 तक भूतपूर्व जम्मू और कश्मीर की राज्य सरकार ने इन 14 ज़िलों के क्षेत्रों को पुनर्गठित करके 28 ज़िले बना दिए थे। नए जिलों के नाम कुपवाडा, बान्दीपुर, गंडेरबल, श्रीनगर, बड़गाम, पुलवामा, शूपियान, कुलगाम, राजौरी, रामबन, डोडा, किश्‍तवार, साम्बा और कारगिल हैं। इनमे से कारगिल ज़िले को लेह और लद्दाख़ ज़िले के क्षेत्र में से अलग करके बनाया गया है। राष्ट्रपति ने जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन (कठिनाइयों को हटाना) दूसरे आदेश-2019 द्वारा नए लद्दाख़ संघ राज्य क्षेत्र के लेह ज़िले को कारगिल ज़िला बनने के बाद 1947 के लेह और लद्दाख़ ज़िले के बाक़ी क्षेत्र में 1947 के गिलगिट, गिलगिट वजारत, चिल्हास और ट्राइबल टेरिटॉरी जिलों के क्षेत्रों को समावेशित करते हुए परिभाषित किया है। इस आधार पर 31 अक्टूबर 2019 को सृजित नए जम्मू और कश्मीर संघ राज्य क्षेत्र, नए लद्दाख़ संघ राज्य क्षेत्र और भारत के मानचित्र में इन दोनों नए संघ क्षेत्रों को दर्शाते हुए सर्वेअर जेनरल ओफ़ इंडिया द्वारा तैयार किये गए मानचित्र जारी किया गया है।
03Nov-2019

हरियाणा: भूपेन्द्र हुड्डा बने कांग्रेस विधायक दल के नेता


हरियाणा विधानसभा में पूर्व मुख्यंत्री होंगे नेता प्रतिपक्ष
पर्यवेक्षक की रिपोर्ट के बाद सोनिया गांधी ने की नियुक्ति
हरिभूमि ब्यूरो. नई दिल्ली।
आखिर हरियाणा विधानसभा के विशेष सत्र से पहले पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा को कांग्रेस हाईकमान ने हरियाणा कांग्रेस विधायक दल नेता नियुक्त कर दिया है, जो हरियाणा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी होंगे। इससे पहले विधायक दल के नेता को लेकर कांग्रेस में रस्साकशी चल रही थी, जिस पर चुनाव पर्यवेक्षक मधुसूदन मिस्त्री की रिपोर्ट के बाद कांग्रेस हाईकमान ने हुड्डा के नाम पर मुहर लगाई है।
चौदवीं हरियाणा विधानसभा का पहला और विशेष सत्र चार नवंबर को दो बजे शुरू होगा, जिसमें प्रोटेम स्पीकर नवनिर्वाचित विधायकों को सदन की सदस्यता और गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे। इसी सत्र में विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव भी कराया जाएगा। हरियाणा में कांग्रेस के 31 विधायक निर्वाचित हुए है, जिनके नेता को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र हुड्डा और किरण चौधरी के बीच रस्साकशी चल रही थी। इसे देखते हुए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने हरियाणा कांग्रेस विधायक दल का नेता चुनने के लिए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मधूसूदन मिस्त्री को पर्यवेक्षक नियुक्त किया था, जिनकी रिपोर्ट के बाद शनिवार को नई दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपिन्दर सिंह हुड्डा को राज्य में पार्टी विधायक दल का नेता नियुक्त किया। यह जानकारी एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान कांग्रेस महासचिव और हरियाणा प्रभारी गुलाम नबी आजाद ने देते हुए कहा कि हरियाणा के विधायकों ने नेता का निर्णय कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर छोड़ा था। दरअसल शुक्रवार को चंडीगढ़ में प्रभारी महासचिव गुलाम नबी आजाद और पर्यवेक्षक मधुसूदन मिस्त्री की मौजूदगी में कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कुमारी सैलजा की अध्यक्षता में हरियाणा के नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक हुई थी, जिसमें कांग्रेस विधायक दल का नया नेता चुनने के लिए भूपेन्द्र हुड्डा के पक्ष में 25 और किरण चौधरी के पक्ष में छह विधायक मुखर हुए। इसके बाद पर्यवेक्षक मधुसूदन मिस्त्री ने यह रिपोर्ट कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया को दी, जिसमें विधायक दल के नेता के रूप में भूपेन्द्र हुड्डा के नाम पर मुहर लगाई गई।
सीएलपी बैठक में उलझा था पेंच
कांग्रेस महासचिव गुलाम नबी आजाद ने कहा कि चंडीगढ़ में सीएलपी की बैठक में 31 में से 30 विधायक शामिल हुए। इस बैठक में विधायक दल के नेता पर सहमति न बनने पर भूपेन्द्र हुड्डा ने प्रस्ताव किया कि विधायक दल के नेता की नियुक्ति करने का निर्णय कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर छोड़ा जाए जिसे सर्वसम्मति से पारित किया गया। आजाद ने बताया कि इसके बाद एक और बैठक हुई जिसमें सभी निर्वाचित विधायक और पराजित उम्मीदवार शामिल हुए, जिसमें पहली बैठक में प्रस्ताव पर सहमति बनाई गई। कांग्रेस नेता ने कहा कि हरियाणा विधानसभा में सदस्यों की संख्या के मुताबिक दस विधायको वाला विपक्षी दल सदन में विपक्षी नेता बनता है और कांग्रेस के पास 31 विधायक हैं, इसलिए विधायक दल के नेता भूपेन्द्र हुड्डा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी होंगे।
कांग्रेस ने किया बेहतर प्रदर्शन
कांग्रेस महासचिव गुलामनबी आजाद ने हरियाणा चुनाव में प्रदेशाध्यक्ष कुमारी सैलजा और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र हुड्डा जैसे अनुभवी नेताओं के नेतृत्व में कांग्रेस ने अच्छा प्रदर्शन किया है। उनका मानना था कि कांग्रेस 6-7 सीटें और जीत सकती थी, जहां कांग्रेस प्रत्याशी हजार या 1200 मतों से ही हारे हैं। यदि इन सीटों पर दोबारा गिनती कराई जाती तो ये सीटे भी कांग्रेस के खाते में आ जाती। आजाद ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ सीटों पर जहां कांग्रेस जीत रही थी, वहां सत्ताधारी दल ने दोबारा गिनती कराके वे सीटे अपने खाते में डाल ली हैं। उन्होंने कहा कि यह पहली बार नहीं हो रहा इससे पहले भी अपनी आदत के अनुसार भाजपा कई राज्यों में ऐसा करती रही है, जिसके लिए कांग्रेस चुनाव आयोग को कार्यवाही करने के लिए लिखता भी रहा है, लेकिन चुनाव आयोग ने नतीजे घोषित होने के बाद कोई कार्रवाई नहीं की। इसका मतलब यह माना जाए कि जो भारतीय जनता पार्टी की हरियाणा में जो 40 सीटें हैं, इन 40 सीटों में असलियत में 30-32 सीटों से ज्यादा वो नहीं जीते हैं, बाकी सब तोड़-फोड़, जोड़ करके उन्होंने 7-8 सीटें बढ़ाई हैं, लेकिन उसके बाद भी उन्हें 3 बैसाखियों की जरुरत पड़ी। एक तो चौटाला की, तीसरी विरोधी दल, जो इंडिपेंडेड चुनकर आए थे, उनके बलबूते पर उन्होंने सरकार बनाई है।
03Nov-2019