मंगलवार, 5 दिसंबर 2017

दिल्ली से मेरठ तक चलेगी रैपिड रेल



केंद्र से मिली यूपी में रैपिड रेल की मंजूरी
दिल्ली से मेरठ तक का होगा सफर
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
केंद्र सरकार की दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में मेट्रो रेल के अलावा नौ हाईस्पीड रैपिड रेल कॉरिडोर शुरू करने वाली परियोजनाओं में यूपी में दिल्ली से मेरठ के बीच रेपिड रेल परियोजना ने ज्यादा पड़ाव पार कर लिए हैं, जिसे केंद्र सरकार की हरी झंडी के बाद अब केवल लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्रीय परिवहन कार्पोरेशन से मंजूरी लेना बाकी है।  
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड की बैठक में तत्कालीन केंद्रीय शहरी विकास मंत्री एम. वेंकैया नायडू ने इन परियोजनाओं पर मुहर लगा दी गई थी। इसके तहत पहले चरण में दिल्ली-मेरठ, दिल्ली-अलवर और दिल्ली-पानीपत कॉरिडोर तैयार किए जाने का निर्णय हुआ था। दिल्ली-एनसीआर के यातायात के बोझ को कम करने के लिए यूपी सरकार सबसे आगे रही। सूत्रों की माने तो केंद्र की हरी झंडी के बाद पहले प्रस्ताव के रूप में उत्तर प्रदेश की रेपिड रेल परियोजना के रैपिड रेल ट्रांसपोर्ट सिस्टम यानि आरआरटीएस के तहत पटरी पर आने का रास्ता प्रशस्त हो गया है। अब केवल यूपी के इस प्रस्ताव को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्रीय परिवहन कार्पोरेशन से मंजूरी मिलना बाकी है। सूत्रों के अनुसार देश की रेपिड रेल को देश की पहली रैपिड रेल ट्रांसपोर्ट सिस्टम यानि आरआरटीएस के तहत लाने की कवायद यूपी की योगी सरकार ने इस दिशा में एक लंबित प्रस्ताव को आगे बढ़ाते हुए केंद्र सरकार की मंजूरी हासिल कर ली है।  इस मंजूरी के तहत 33 हजार करोड़ रुपये वाली इस परियोजना के तहत रेपिड रेल के इस प्रस्ताव के तहत दिल्ली, गाजियाबाद और मेरठ के बीच रेपिड रेल चलाने के लिए रैपिड रेल ट्रांसपोर्ट सिस्टम से जोड़ा जाना है और हाई स्पीड रेल ट्रांसपोर्ट सिस्टम को लागू करने के लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्रीय परिवहन कार्पोरेशन से मंजूरी लेना जरूरी है।
आधे घंटे में तय होगा सफर
सूत्रों के अनुसार दिल्ली से मेरठ के बीच चलाई जाने वाली प्रस्तावित रेपिड रेल की अधिकतम गति 160 किलोमीटर प्रति घंटे होगी, लेकिन इसे 100 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलाने की मंजूरी कापोर्रेशन लेने की तैयारी है। इस गति से भी दिल्ली से मेरठ तक का सफर 30 मिनट में पूरा किया जा सकेगा। केंद सरकार ने इसके लिए 33 हजार करोड़ की अनुमानित लागत वाली परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने की मंजूरी दी है, जिसमें 92 किमी आरआरटीएस लाइन बिछाने का प्रस्ताव है। सूत्रों के अनुसार इस परियोजना को 2024 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
रडार पर ये परियोजनाएं
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड की एनसीआर के प्रमुख शहरों को दिल्ली से रेपिड रेल परियोजना से जोड़ने वाली नौ परियोजनाओं से केंद्र सरकार से दिल्ली से मेरठ के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जबकि अलवर और पानीपत की हाईस्पीड रैपिड रेल को मंजूरी का रास्ता भी अंतिम चरणों में बताया जा रहा है। इसके अलावा सरकार के रडार पर छह कॉरिडोर में दिल्ली-पलवल, दिल्ली- फरीदाबाद-बल्लभगढ़, दिल्ली -गाजियाबाद- खुर्जा, दिल्ली-बहादुरगढ़–रोहतक, दिल्ली-गाजियाबाद–हापुड़ तथा दिल्ली-शाहदरा–बड़ौत को इस परियोजना से जोड़ने का खाका पहले ही तैयार हो चुका है। इनमें सबसे आगे दिल्ली से मेरठ तक के सफर की परियोजना सबसे आगे है।
05Dec-2017

सोमवार, 4 दिसंबर 2017

दुनिया में भारत का दबदबा कायम!

फिर जीता अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन का चुनाव
हरिभूमि ब्यूरो
. नई दिल्ली।
भारत का दुनिया में दबदबा लगातार बढ़ रहा है, जिसके चलते भारत को अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन की परिषद में फिर से सदस्य के रूप में फिर से चुन लिया गया है। इसके लिए परिषद के चुनाव में जर्मनी के बाद भारत को सर्वार्धिक मत मिले।
केंद्रीय जहाजरानी मंत्रालय ने यह जानकारी देते हुए बताया कि आईएमओ मुख्यालय लंदन में गत 27 नवंबर से 6 दिसंबर तक चलने वाली आईएमओ विधानसभा के 30वें सत्र आईएमओ संगठन की तीन श्रेणियों के चुनाव हुए। भारत ने संगठन की बी श्रेणी वाली परिषद के चुनाव में जीत हासिल कर अगले दो साल के लिए सदस्यता को फिर से मजबूत कर लिया है। भारत ने दूसरे स्थान के मत हासिल कर आस्ट्रेलिया जैसे देश को भी पछाड़ा है। सबसे ज्यादा 146 मत जर्मनी को मिले, जबकि भारत ने 144 मत हासिल किये। भारत इस संगठन में दस सदस्यों वाले संगठन का 1959 से सदस्य है। अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन की बी श्रेणी की परिषद के लिए पहली बार हुआ है, जिसमें भारत अब अगले दो और सालों तक संगठन का सदस्य बना रहेगा। देश को ऐसे देशों के प्रतिनिधि के रूप में चुना गया है जिनका समुद्रीय मार्ग से व्यापार में बड़ा हित जुड़ा हुआ है। लंदन जाकर आईएमओ के वार्षिक समारोह में हिस्सा लिया था और भारत के लिए समर्थन भी मांगा था। इस बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व ब्रिटेन में भारत के उच्चायुक्त वाई.के. सिन्हा ने  किया।
क्या है आईएमओ
यह संगठन यूएन की तरह ही एक अंतर्राष्ट्रीय एजेंसी है, जहाजरान के बचाव और सुरक्षा की निगरानी के साथ इस बात पर भी नजर रखती है कि समुद्री जहाजों द्वारा ज्यादा प्रदूषण न किया जाए। भारत और जर्मनी के साथ ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, कनाडा, स्पेन, ब्राजील, स्वीडन, नीदरलैंड और यूएई इसके सदस्य हैं। ऑस्ट्रेलिया और यूएई इस संगठन के नए सदस्य हैं। इससे पहले तक बांग्लादेश और अर्जंटीना सदस्य हुआ करते थे।
आस्ट्रेलिया तीसरे पायदान पर
इस संगठन में जर्मनी के बाद भारत दूसरे स्थान पर रहा है, जबकि 143 मत लेकर ऑस्ट्रेलिया तीसरे पायदान पर सदस्यता बरकरार रखने वाला देश रहा। इसके अलावा फ्रांस को 140, कनाडा को 138, स्पेन को 137, ब्राजील को 131, स्वीडन को 129, नीदरलैंड को 124 और संयुक्त अरब अमीरात को 115 मत हासिल हुए।
गडकरी ने मांगा था समर्थन
मंत्रालय के अनुसार पिछले सप्ताह ब्रिटेन के दौरे पर गये केंद्रीय सड़क परिवहन एवं जहाजरानी मंत्री नितिन गडकरी ने लंदन में आईएमओ की बैठक के एक सत्र के दौरान संगठन की बी श्रेणी के तहत आईएमओ में फिर सदस्य के रूप में आईएमओ के संशोधित उद्देश्यों के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए भारत की भागीदारी को मजबूती से रखने का आश्वासन दिया था। उन्होंने कहा था कि भारत विकासशील देशों और समुद्र आधारित व्यापार में महत्वपूर्ण भूमिका रखने वाले देशों का प्रतिनिधित्व करेगा। इस सत्र में गडकरी के नेतृत्व में उच्च स्तरीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल हिस्सा ले रहा है, जिसमें जहाजरानी मंत्रालय के सचिव गोपाल कृष्णा, अतिरिक्त महानिदेश्क अमिताभ कुमार, नौवहन निदेशालय के उप समुद्री सलाहकार कैप्टन जयकुमार आदि शामिल हैं।

राग दरबार: रिपोर्ट के बाद बदला कांग्रेसी चेहरा

बेमन का कांग्रेसी चेहरा
कांग्रेस ने गुजरात चुनाव पर जिस प्रकार फोकस करके भाजपा को उसी की रणनीतियों से पटकने की सियासी मुहिम चला रखी हैं, जिसमें कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल का गुजरात दौरों के दौरान मंदिरों में पूजा करने की परंपरा शुरू की है, उससे कांग्रेस का चेहरा बदल जाएगा यह किसी के गले नहीं उतर रहा है। इसका कारण साफ है कि कांग्रेस के हिंदू विरोधी होने के धब्बे अभी मिटे नहीं हैं यानि कांग्रेस का हिंदू विरोध कोई कहावत नहीं, बल्कि जिता-जागता उदाहरण है कि जब सोनिया-मनमोहन युग में कांग्रेस खुल कर हिंदू विरोध पर उतरती देखी गई। मसलन आतंकवाद का काई रंग या मजहब नहीं होता जैसी बाते करने वाले कांग्रेसनीत सरकार यूपीए के तत्कालीन गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने भगवा आतंकवाद की खोज कर हिंदू आतंकवाद की परिभाषा गढ़ डाली थी। यही नहीं सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा देकर मनमोहन सरकार ने राम के अस्तित्व को नकारते हुए उन्हें कवि की कोरी कल्पना करार देने का भी पाप किया और कांग्रेस के प्रधानमंत्री ने देश में संसाधनों पर पहला हक अल्पसंख्यकों का बताने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी। राजनीतिकारों का तो मानना है कि गुजरात चुनाव में बदलते कांग्रेस के हिंदू चहरे के पीछे 2014 के लोकसभा चुनाव में करारी हार हैं, जिसके कारणों की पडताल के लिए गठित एंटोनी समिति ने बहुसंख्यक समाज की उपेक्षा को एक बडा कारण माना था। हालांकि इसी रिपोर्ट के बाद भी कांग्रेस का रवैया नहीं बदला और कांग्रेस एक के बाद एक प्रदेशों में पराजय होती रही। इन हारों से सबक लेकर अब एंटोनी रिपोर्ट पर गुजरात में कांग्रेस को नरम हिंदुत्व की राह पर आने के लिए मजबूर होना पड़ा और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल खुद को हिंदू होने के सुबूत के तौर पर जनेऊ धारण कर शिव भक्त बनकर मंदिर दर मंदिर जाकर दर्शन और पूजन कर रहे हैं। कांग्रेस प्रवक्ता उनके हिंदू होने के सुबूत के तौर पर जनेऊ वाले चित्र दिखा रहे हैं।
गुजरात में बैकपुट पर कांग्रेस
गुजरात चुनाव में भाजपा को पीछे धकलने के लिए कांग्रेस की रणनीतियों पर शायद उत्तर प्रदेश में निकाय चुनावों के परिणाम ने ऐसा पानी फेरा कि कांग्रेस को बैकफुट पर लाकर खड़ा कर दिया है। यह भी तय माना जा रहा है यूपी निकाय चुनाव के भाजपा का परचम लहराने वाले नतीजों को गुजरात चुनाव में भाजपा के लिए संजीवनी का काम करेगा। भले ही कांग्रेस युवराज गुजरात चुनाव में हिंदुत्व का चोला ही क्येां न धारण करते नजर आ रहे हों। सोशल मीडिया पर सुर्खियां बने यूपी निकाय चुनाव के नतीजों में यहां तक टिप्पणी सामने आ रही हैं कि भाजपा के लिए कांग्रेस की परांपरागत संसदीय क्षेत्र एवं उसके सियासी गढ़ राजयबरेली और अमेठी में कांग्रेस को हिलाना नामुमकिन था, वहां भी भाजपा ने कांग्रेस के किले को ध्वस्तकर धूल चटा दी है, तो गुजरात में कांग्रेस की क्या मजाल है कि वह भाजपा की रणनीति को ध्वस्त कर दें। राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं कि यह कांग्रेस के लिए यह दुर्भाग्यकाल ही माना जा सकता है कि गुजरात चुनाव की सियासत में भाजपा के लिए मुश्किल बनती जा रही कांग्रेस की रणनीति पर यूपी निकाय के चुनाव नतीजों ने पानी फेर दिया है। हालांकि इसकी असल पुष्टि तो गुजरात विधानसभा चुनाव के 18 दिसंबर को आने वाले नतीजे ही तय करेंगे, लेकिन गुजरात चुनाव से पहले यूपी में कांग्रेस की बुरी तरह खिसकी सियासी जमीन उसके लिए शुभ संकेत कतई नहीं है?
बे-असर जीएसटी
देश में नोटबंदी और जीएसटी लागू करने वाली मोदी सरकार पर पिछले एक साल से विपक्ष लगातार हमलावर बना हुआ है और सरकार के खिलाफ सड़क से संसद तक अपनी आवाज बुलंद करने का ही प्रयास किया। अब केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा जब हाल में चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही रिपोर्ट में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 5.7 प्रतिशत से बढ़ 6.3 पहुंची तो कांग्रेस समेत विपक्ष इस रिपोर्ट को लेकर कोई प्रतिक्रिया देने को तैयार नहीं है। इसके लिए सरकार का दावा है कि इन आंकड़ो से स्पष्ट हो रहा है कि नोटबंदी और जीएसटी का प्रभाव खत्म हो चुका है और देश की अर्थव्यवस्था अब तेजी से आगे बढ़ रही है। खासकर एक जुलाई को लागू हुई जीएसटी के बाद जीडीपी में वृद्धि का यह पहला आंकड़ा है इसलिए विपक्ष को जीएसटी को लेकर विरोध के स्वर वापस लेने की जरूरत है।
और अंत में …..
देश में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की सलाहकार एवं सुपुत्री इवांका ट्रंप ने भारत के दौरे पर हैदराबाद के एक सम्मेलन में महिलाओं को बराबरी का हक देने की वकलात क्या कि आईएएस अधिकारी स्नेहलता श्रीवास्तव लोकसभा को आजाद भारत के इतिहास में पहली बार महिला महासचिव मिल गई हैं, जो संसद के शीतकालीन सत्र में सदन की कार्यवाही की संवैधानिक प्रक्रियाओं में मदद करती नजर आएंगी। इसी प्रकार केन्‍द्रीय लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के सदस्य के रूप में सुश्री स्मिता नागराज की नियुक्ति की गई है। 
03Dec-2017

सोमवार को मिलेगी राहुल को कांग्रेस की कमान!


राहुल गांधी का सोमवार को होगा नामांकन दाखिल
हरिभूमि ब्यूरो
. नई दिल्ली।
कांग्रेस पार्टी की कमान पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी को सौंपने के लिए भले ही चुनाव कार्यक्रम तय कर दिया गया हो, लेकिन इस पद के लिए पहले ही राहुल गांधी को पार्टी अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव कार्यसमिति में पारित हो चुका है। इसलिए राहुल गांधी नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख चार दिसंबर सोमवार को अपना नामांकन दाखिल करेंगे। ऐसी संभावना है कि पार्टी अध्यक्ष के लिए कोई और नामांकन न होने के कारण उसी दिन पार्टी अध्यक्ष का ऐलान हो जाएगा।
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की कार्यसमिति की गत 20 नवंबर को हुई बैठक में जहां राहुल गांधी को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव पारित हुआ था, वहीं केंद्रीय चुनाव कमेटी के चैयरमैन ने चुनाव कार्यक्रम का भी ऐलान किया, जिसके तहत इस पद के लिए चुनाव 16 दिसंबर को होना है। इसके लिए एक दिसंबर से चार दिसंबर तक नामांकन दाखिल होने हैं। कांग्रेस के सूत्रों के अनुसार सोमवार चार दिसंबर को 11.30 बजे राहुल गांधी अध्यक्ष पद के लिए पार्टी मुख्यालय पर अपना नामांकन दाखिल करेंगे, इस दिन तीन बजे तक नामांकन दाखिल करने का अंतिम मौका होगा। इस पद पर उनके अलावा किसी अन्य नामांकन दाखिल होने की कोई संभावना नहीं है, इसलिए उसी दिन तीन बजे के बाद राहुल गांधी को अध्यक्ष बनाने का ऐलान होने के पूरे आसार हैं। सूत्रों के अनुसार यदि राहुल गांधी के अलावा किसी कांग्रेस नेता का नामांकन दाखिल भी होता है तो उसे पांच दिसंबर को नामांकन जांच के दौरान निरस्त या फिर 11 दिसंबर को नामांकन वापसी की अंतिम तिथि से पहले वापिस करा लिया जाएगा। हालांकि ऐसी कोई संभावना नजर नहीं आती। कांग्रेस पार्टी के नेताओं को भी उम्मीद है कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी निर्विरोध पार्टी के नए अध्यक्ष पद पर चुने जाएंगे। यदि चुनाव की नौबत आई तो इसके नतीजे 19 नवंबर को सामने आएंगे।
ताजपोशी का दिन भी सोमवार
कांग्रेस मुख्यालय मुख्यालय 24 अकबर रोड पर चुनाव के लिए भी 11 दिसंबर को सोमवार है, जिस दिन राहुल गांधी की ताजपोशी की औपचारिकताओं के तहत कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का पार्टी मुख्यालय पर जमावड़ा होगा, ताकि राहुल गांधी को को नए अध्यक्ष के रूप में बधाई देने और जश्न मनाया जा सके। पार्टी के सूत्रों की माने तो पार्टी अध्यक्ष के रूप में नई जिम्मेदारी के मद्देनजर राहुल गांधी चार दिसंबर को नामांकन दाखिल करने से पहले विधिवत पूजा अर्चना करके मां सोनिया का आशीर्वाद लेंगे। गौरतलब है कि गुजरात चुनाव के प्रचार अभियान में राहुल गांधी अपने आपको शिवभक्त बता रहे हैं तो ऐसे में उन्होंने नामांकन दाखिल करने के साथ ताजपोशी के लिए सोमवार का दिन ही चुना है। 
03Dec-2017

शनिवार, 2 दिसंबर 2017

मोदी सरकार ने कसी कुपोषण के खिलाफ कमर!

राष्‍ट्रीय पोषण मिशन की स्थापना को दी मंजूरी                     
हरिभूमि ब्यूरो. नई दिल्ली।
नरेन्द्र मोदी सरकार ने देश में कुपोषण और इससे जुड़ी समस्याओं से निपटने के लिए कमर कस ली है। केंद्रीय कैबिनेट ने इस दिशा वर्ष 2022 तक ठोस नतीजे निकालने के लिए 9046.17 करोड़ रूपये के बजट के साथ ‘राष्‍ट्रीय पोषण मिशन’ गठित करने की मंजूरी दी है। केंद्र सरकार ने यह फैसला इसी माह आई एक वैश्विक रिपोर्ट में भारत की कुपोषण के मामले में बदतर स्थिति में सुधार करने के तहत किया है।
प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस मंजूरी की जानकारी शुक्रवार को महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी के साथ केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने दी है। उन्होंने कहा कि पिछले सप्ताह ही 'द ग्लोबल न्यूट्रिशन रिपोर्ट-2017' में दी गई चेतावनी को गंभीरता से लेते हुए प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में देश में अल्पपोषण व इससे संबंधित समस्याओं को रोकने और कम करने के लिए किए उठाए गए कदमों की प्रगति और प्रयासों की समीक्षा की गई। इस बैठक में प्रधानमंत्री कार्यालय, नीति आयोग और अन्य संबन्धित मंत्रालयों के अधिकारियों के साथ कुपोषण से निपटने के लिए वर्ष 2022 तक सकारात्मक नतीजे लाने पर विचार हुआ और इसके लिए राष्‍ट्रीय पोषण मिशन (एनएनएम) की स्‍थापना करने का प्रस्ताव किया गया। कैबिनेट ने इस प्रसताव को तीन साल की अवधि में अनुमानित खर्च के रूप में 9046.17 करोड़ रूपये के बजट के साथ मंजूरी दे दी है। गौरतलब है कि 140 देशों पर जारी इस रिपोर्ट में कुपोषण के तीन प्रकारों के विश्लेषण में भारत की आधी से ज्यादा मां बनने में सक्षम महिलाओं को खून की कमी की बीमारी एनीमिया की मरीज बताया गया है।
शीर्षस्थ निकाय का रूप होगा मिशन
केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा मंजूर किये गये राष्‍ट्रीय पोषण मिशन (एनएनएम) के प्रस्ताव में किये गये प्रावधानों के तहत यह मिशन एक शीर्षस्थ निकाय के रूप में मंत्रालयों के पोषण संबंधी हस्‍तक्षेपों की निगरानी, पर्यवेक्षण, लक्ष्य निर्धारित करने तथा मार्गदर्शन करने का काम करेगा। प्रस्ताव में यह मिशन कुपोषण का समाधान करने हेतु विभिन्न स्‍कीमों, अत्‍यधिक मजबूत अभिसरण तंत्र प्रारंभ करने, आईसीटी आधारित वास्‍तविक समय निगरानी प्रणाली के साथ तय किये गये लक्ष्‍यों को हासिल करने वाले राज्यों को को प्रोत्‍साहित करेगा।
दस करोड़ लोगों को होगा लाभ
सरकार का दावा है कि राष्ट्रीय कुपोषण मिशन के इस कार्यक्रम से 10 करोड़ से ज्‍यादा लोगों को लाभ मिलेगा। सभी राज्‍यों और जिलों को चरणबद्ध रूप से यानि वर्ष 2017-18 में 315 जिले, वर्ष 2018-19 में 235 जिले तथा 2019-20 में शेष जिलों को शामिल किया जाएगा। यह कार्यक्रम लक्ष्‍यों के माध्यम से ठिगनेपन, अल्प पोषाहार, खून की कमी तथा जन्म के समय बच्‍चे के वजन कम होने के स्तर में कमी के उपाय करने के लिए संबन्धित मंत्रालयों के अलावा राज्यों के साथ समन्वय बनाकर लक्ष्य हासिल करेगा।
आंगनवाड़ी में नहीं होगा रजिस्‍टरों के प्रयोग
मिशन के प्रस्तावों में आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों द्वारा रजिस्ट्ररों के प्रयोगों को समाप्त करने के साथ आंगनवाड़ी केंद्रों पर बच्‍चों की ऊंचाई के मापन प्रारंभ की जाएगी, जिसका सामाजिक लेखा परीक्षा भी मिशन करेगा। कुपोषण के खिलाफ इस मिशन में आम लोगों को जन आंदोलन के जरिए पोषण पर विभिन्न गतिविधियों आदि के माध्यम से शामिल करने और पोषण संसाधन केंद्रों की स्‍थापना भी की जाएगी।
दस करोड़ लोगों को होगा लाभ
सरकार का दावा है कि राष्ट्रीय कुपोषण मिशन के इस कार्यक्रम से 10 करोड़ से ज्‍यादा लोगों को लाभ मिलेगा। सभी राज्‍यों और जिलों को चरणबद्ध रूप से यानि वर्ष 2017-18 में 315 जिले, वर्ष 2018-19 में 235 जिले तथा 2019-20 में शेष जिलों को शामिल किया जाएगा। यह कार्यक्रम लक्ष्‍यों के माध्यम से ठिगनेपन, अल्प पोषाहार, खून की कमी तथा जन्म के समय बच्‍चे के वजन कम होने के स्तर में कमी के उपाय करने के लिए संबन्धित मंत्रालयों के अलावा राज्यों के साथ समन्वय बनाकर लक्ष्य हासिल करेगा।

शुक्रवार, 1 दिसंबर 2017

अब फास्टैग संग सड़क पर आएंगे नए चौपहिया वाहन



सभी टोल प्लाजाओं पर आज से अनिवार्य हुआ ई-टोल कलेक्शन
हरिभूमि ब्यूरो. नई दिल्ली।
देशभर में राष्ट्रीय राजमार्गो पर तमाम टोल प्लाजाओं पर ई-टोल संग्रहण प्रणाली अनिवार्य हो जाएगी। वहीं अब कोई भी वाहन कंपनी बिना फास्टैग के किसी नए चार पहिया वाहन को नहीं बेच सकेंगे। यानि अब हर नया चार पहिया वाहन फास्टैग से लैस होकर सड़क पर आएगा।
केंद्र सरकार ने देशभर के सभी 370 टोल प्लाजाओं पर ई-टोल संग्रहण प्रणाली को अनिवार्य करने और एक दिसंबर से वाहन कपंनियों को फास्टैगयुक्त चार पहिया वाहन बेचने की अनिवार्यता के लिए गत दो नवंबर को एक अधिसूचना के साथ दिशानिर्देश जारी कर दिये थे। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार इस राजपत्र अधिसूचना के लिए मंत्रालय की ओर से केंद्रीय मोटर वाहन नियम 1989 की संशोधित धारा 138ए का हवाला देते हुए वाहन निर्माता कंपनियों स्पष्ट आदेश दिये गये हैं कि वे नए वाहनों को कंपनी से बाहर निकलने से पहले ही फास्टैग से लैस करना सुनिश्चत करें। मसलन अब कल एक दिसंबर से कोई भी चार पहिया वाहन बिना फास्टैग के नहीं खरीदा जा सकेगा। अधिसूचना में जारी दिशानिर्देशों के तहत बिना विंड स्क्रीन के ड्राइव अवे चेसिस के रूप में बेचे जाने वाले वाहनों के मामले में वाहन मालिक द्वारा उसके पंजीकरण कराए जाने से पूर्व उनमें फास्टैग फिट करना अनिवार्य होगा। मंत्रालय के अनुसार इसका मकसद टोल प्लाजाओं पर लगने वाली वाहनों की लंबी कतारों के कारण समय की बर्बादी और परेशानियों को दूर करना है। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2019 तक 80 फीसदी वाहनों को फास्ट टैग युक्त करने का है। मंत्रालय के अनुसार फास्ट टैग मोबाइल एप पर भी उपलब्ध है और इसके अलावा एसबीआई समेत देश के लगभग सभी बड़े बैंक टोल प्लाजाओं पर भी बिक्री के लिए फास्टैग मुहैया हो सकेंगे। एनएचएआई के अनुसार फास्टैग की मियाद 5 साल तक होगी, जिसे प्रीपेड एकाउंट से लिंक करने पर वाहन चालक को समय-समय पर इसे रीचार्ज कराना होगा।
वाहनों को यह होगा लाभ
केंद्र सरकार की टोल प्लाजाओं पर ई-टोल संग्रहण के लिए शुरू की गई इस योजना से वाहन मालिकों को फायदा होगा। इसके तहत जब वाहन किसी भी टोल प्लाजा से गुजरता है तो वहां वाहन चालक को रुककर टोल देने की जरूरत नहीं होगी। फास्टैग लगे वाहन टोल प्लाज से बिना रूके अपने गणतंव्य के लिए जा सकेंगे। वाहन पर लगे फास्टैग जरिए टोल प्लाजा पर फास्टैग लेन में घुसते ही टोल टैक्स का भुगतान प्रीपेड या संबंध बचत खाते से स्वत: ही कट जाएगा। यानि ऐसे वाहनों को टोल देने के लिए ठहरने की जरूरत नहीं होगी।
लाखों वाहनों में लगे फास्टैग
मंत्रालय के अनुसार केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने टोल प्लाजाओं को इलैक्ट्रॉनिक संग्रहण प्रणाली से जोड़ने के लिए सभी हितधारकों को इस संबन्ध में दिशानिर्देश जारी कर दिये है और इसके लिए पहले ही अधिसूचना जारी करके टोल पर ई-कलैक्शन करना अनिवार्य किया है। मंत्रालय के अनुसार इस अधिसूचना के बाद फास्टैग से लैस वाहनों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। अब तक देशभर में 7.50 लाख से ज्यादा चार पहिया वाहनों में फास्टैग लग चुके हैं, जिनकी संख्या मार्च 2018 तक 25 लाख से भी ज्यादा होने की संभावना है।

लंदन में रोड शो में हुई नमामी गंगे की गूंज



ब्रिटेन में भारतीयों ने किया 5 अरब डॉलर का निवेश
हरिभूमि ब्यूरो. नई दिल्ली।
मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना ‘नमामि गंगे मिशन’ के तहत गंगा स्वच्छता के लिए चलाई जा रही परियोजनाओं को दिशा देने के लिए ब्रिटेन में भारतीय मूल के कारोबारियों और उद्योगपतियों द्वारा पांच अरब डॉलर का निवेश किया जाएगा।
यह जानकारी देते हुए केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय ने बताया कि ब्रिटेन के दौरे पर गये केंद्रीय जल संसाधन, सड़क परिवहन  एवं जहाजरानी मंत्री नितिन गडकरी ने लंदन में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए भारतीय मूल के उद्योगों और कंपिनयों से गंगा के सफाई अभियान को सफल बनाने के लिए परियोजनाओं में निवेश का आव्हान किया। इस दौरान लंदन में ब्रिटेन में भारतीय उच्च आयोग और गंगा सफाई राष्ट्रीय अभियान द्वारा आयोजित रोड शो में वहां के भारतीय उद्योग जगत यानि संयुक्त गणराज्य में भारतीय कारोबारियों, एनआरआई और पीआईओ ने नमामि गंगे मिशन के तहत गंगा किनारे सुविधाओं को विकसित करने वाली परियोजनाओं के लिए पांच बिलियन डॉलर से भी अधिक निवेश करने की वचनबद्धता केंद्रीय मंत्री गडकरी को दी है। भारतीय कारोबारियों ने नमामि गंगे अभियान के तहत ही घाटों, नदियों के अहातों, श्मशान घाटों और पार्कों जैसी सुविधाएं जुटाने के लिए यह निवेश करने का फैसला किया है।
इन कंपनियों ने निवेश पर करार
मंत्रालय के अनुसार नमामि गंगे मिशन की परियोजनाओं में निवेश करने वाली भारतीय कंपनियों ने महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर भी किये हैं। इन करारों के पटना में गंगा नदी पर घाटों और सुविधाओं के लिए वेदांता समूह के अनिल अग्रवाल, कानपुर के लिए फोरसाइट समूह के रवि मल्होत्रा, हरिद्वार के लिए हिंदुजा समूह, कोलकाता के लिए इंडो रामा समूह के प्रकाश लोहिया ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। करारों के तहत नमामि गंगे की परियोजनाओं का विकास, निर्माण तथा परिचालन इन कारोबारियों द्वारा अपने सीएसआर कार्यकलापों के तहत किया जाएगा। वहीं लंदन वाटर केल्टिक रेनुएबल्स, मेडिफार्म, एनएचवी प्रौद्योगिकियां और अरकाताप सहित कई कंपनियों के साथ नदी सफाई हेतु नवीन प्रौद्योगिकियों के लिए समझौता ज्ञापनों पर भी हस्ताक्षर किये गए। इनके अलावा कई कंपनियों और व्यक्तिगत प्रवासियों ने 200 से अधिक परियोजनाओं की सूची में अपनी इच्छा से चयनित परियोजनाओं में निजी धन खर्च करने की सहमति दी है।
दस हजार करोड़ रुपये की दरकार
मंत्रालय के अनुसार नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत घाटों, श्मशान घाटों, जलाशयों, पार्कों, स्वच्छता सुविधाओं, जन सुविधाओं और नदी अहातों के विकास आदि परियोजनाओं के लिए 10 हजार करोड़ रूपये से भी अधिक की की आवश्यकता है। इसके अलावा  2500 करोड रूपये से भी अधिक की परियोजनाओं के लिए धन को निजी स्रोतों से जुटाने की आवश्यकता महसूस की गई है। इस संबन्ध में मंत्रालय के तहत स्वच्छ गंगा राष्ट्रीय अभियान (एनएमसीजी) की वेबसाइट पर ई-बुकलेट के रूप में भी उपलब्ध होने की जानकारी दी गई, वहीं मंत्रालय की जारी एक पुस्तक को भी इस मौके पर जारी किया गया। 
01Dec-2017

देश में बढ़े अपराध: उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक हत्याएं



राजनाथ सिंह ने जारी किये एनसीआरबी के आंकड़े
हरिभूमि ब्यूरो. नई दिल्ली।
देशभर में अपराधों का ग्राफ कम होने का नाम नहीं ले रहा है। राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो द्वारा जारी वर्ष 2016 के दौरान विभिन्न अपराधों के राज्यवार आंकड़े यही गवाही दे रहे हैं। इन आंकड़ो के अनुसार उत्तर प्रदेश में हत्या और महिलाओं के खिलाफ सर्वाधिक अपराध हुए हैं, जबकि दिल्ली में भी महिलाओं की सुरक्षा दांव पर लगी हुई है। हालांकि बलात्कार के मामले में मध्य प्रदेश सबसे ऊपर है।
केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो यानि एनसीआरबी के आपराधिक आंकड़ो वाली पुस्तक ‘भारत में अपराध 2016-सांख्यिकी’ जारी किया। एनसीआरबी जारी आंकडो के मुताबिक वर्ष 2016 के दौरान देश के 19 महानगरीय शहरों में अपराध विश्लेषणों की रिपोर्ट तैयार की है। इस रिपोर्ट के मुताबिक 2016 के दौरान दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ 33.0 प्रतिशत अपराध दर्ज किए गए हैं, जिनमें 41,761 में से 13,803 अपराधिक मामले दर्ज किए गए। इनमें दिल्ली शहर में लगभग 40 प्रतिशत बलात्कार के मामले दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा पति और उसके रिश्तेदारों द्वारा दहेज के कारण मौतों की संख्या में भी 29 प्रतिशत है। दिल्ली में अपहरण और अगवा करने के सबसे अधिक मामले (5,453) दर्ज किए गए हैं, जो 2016 के दौरान कुल अपराधों के (48 प्रतिशत) है। दिल्ली शहर हत्याओं के मामले में भी 21.8 प्रतिशत यानि कुल (2194 मामलों में 479) हत्याएं हुई। दिल्ली में आईपीसी और एसएलएल अपराध महिलाओं के खिलाफ ज्यादा हैं, जिसमें आईपीसी अपराधों में 38.8 प्रतिशत दर्शाया गया है। 19 महानगरीय शहरों में से दिल्ली में किशोर अपराध मामलों की संख्या सबसे अधिक बताई गई है। 2016 में दिल्ली में ऐसे मामलों की संख्या 35.6 प्रतिशत बताई गई यानि कि (2368) अपराधिक मामले दिल्ली में हुए।
उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक हत्या
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के मुताबिक हत्या और महिलाओं के खिलाफ अपराध जैसे सर्वाधिक मामले वर्ष 2016 में उत्तर प्रदेश में दर्ज किए गए। देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में हत्या की घटनाएं सबसे ज्यादा हुईं। यहां हत्या की 4,889 घटनाएं हुईं, जो ऐसे कुल मामलों का 16.1 फीसदी है। उत्तर प्रदेश के बाद हत्या की सबसे ज्यादा 2,581 (8.4 फीसदी) घटनाएं बिहार में दर्ज की गईं। वर्ष 2016 में महिलाओं के खिलाफ अपराधों के कुल मामलों में से 14.5 फीसदी (49,262 मामले) उत्तर प्रदेश में हुए, जिसके बाद 6 फीसदी यानी 32,513 मामलों के साथ पश्चिम बंगाल रहा।
बलात्कार के मामलों में एमपी अव्वल
आंकड़ो के अनुसार वर्ष 2016 में वर्ष 2015 के मुकाबले देश में बलात्कार की घटनाएं 12.4 फीसदी बढोतरी देखी गई। आंकड़ों के मुताबिक बलात्कार के मामले सबसे ज्यादा मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में हुए। ऐसी कुल घटनाओं में से 12.5 फीसदी (4,882 मामले ) मध्य प्रदेश में, 12.4 फीसदी (4,816 मामले) उत्तर प्रदेश तथा 10.7 फीसदी यानी 4,18 मामले महाराष्ट्र में हुए।