गुरुवार, 30 अप्रैल 2026

बदलते भारत की नई आर्थिक तस्वीर: वैश्विक अमीरों का नया ठिकाना बना मुंबई

वैश्विक 'अल्ट्रा-हाई-नेट-वर्थ' आबादी के लिए एक प्रमुख पावर हाउस 
By-ओ.पी. पाल 
भारत ने पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक अर्थव्यवस्था के मंच पर अपनी एक अलग और मज़बूत पहचान बनाई है। तकनीक, नवाचार और पूंजी बाज़ारों में आए उछाल ने देश के भीतर धन-सृजन की प्रक्रिया को अभूतपूर्व गति दी है। हालिया जारी 'द वेल्थ रिपोर्ट 2026' इस बात की पुष्टि करता है कि भारत अब केवल एक विकासशील अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि वैश्विक 'अल्ट्रा-हाई-नेट-वर्थ' आबादी के लिए एक प्रमुख पावर हाउस बन चुका है। इस पूरे परिदृश्य के केंद्र में खड़ा है मुंबई, जो अभी भी मोनाको, हांगकांग और जिनेवा जैसे शहरों के मुकाबले बहुत अधिक 'वैल्यू फॉर मनी' प्रदान करता है। ऐसे ही मुंबई में प्राइम प्रॉपर्टी की कीमतों में इस उछाल की तुलना वैश्विक शहरों से की जाए, तो टोक्यो और दुबई जैसे शहरों के बाद भारत के बेंगलुरु और मुंबई ने दुनिया के कई विकसित देशों के बाज़ारों को पीछे छोड़ दिया है। मुंबई की सफलता के पीछे केवल धन का संकेंद्रण नहीं है, बल्कि बुनियादी ढांचे में हो रहे सुधार की भी गवाह है। 
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भारत का आर्थिक पावरहाउस इस रिपोर्ट के सबसे चौंकाने वाले और महत्वपूर्ण आंकड़ों में से एक यह है कि भारत के कुल अल्ट्रा-अमीर लोगों में से 35.4 प्रतिशत अकेले मुंबई में निवास करते हैं। यह केवल एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि इस शहर की आर्थिक गहराई और इसके प्रति निवेशकों के अटूट विश्वास का प्रमाण है। नाइट फ्रैंक की 'द वेल्थ रिपोर्ट 2026' के 20वें संस्करण की ताजा रिपोर्ट इस बात की भी पुष्टि करती है कि मुंबई की यह सफलता अचानक नहीं आई है, बल्कि पिछले पांच वर्षों में भारत की जीडीपी में हुई 38 प्रतिशत की वृद्धि का सबसे बड़ा लाभ इसी शहर को मिला है। देश की वित्तीय राजधानी होने के नाते, मुंबई ने न केवल पुराने औद्योगिक घरानों को सहेजा है, बल्कि नए ज़माने के टेक-टाइकून और स्टार्टअप संस्थापकों को भी अपनी ओर आकर्षित किया है। सीमित भूमि उपलब्धता और भौगोलिक सीमाओं (तटीय क्षेत्र) के बावजूद, मुंबई की मांग में कोई कमी नहीं आई है, जिसने यहाँ की प्रॉपर्टी की कीमतों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बना दिया है। यानी मुंबई में 1 मिलियन USD में अब केवल 96 वर्ग मीटर (लगभग 1,033 वर्ग फ़ीट) जगह खरीदी जा सकती है। हालांकि यह संख्या दिल्ली और बेंगलुरु की तुलना में कम है, लेकिन अगर हम वैश्विक संदर्भ में देखें, तो मुंबई अभी भी मोनाको (16 वर्ग मीटर), हांगकांग (23 वर्ग मीटर) और जिनेवा (28 वर्ग मीटर) जैसे शहरों के मुकाबले बहुत अधिक 'वैल्यू फॉर मनी' प्रदान करता है। 

भारत का बढ़ता वैश्विक कद 
वेल्थ रिपोर्ट 2026 भारत की आर्थिक परिपक्वता की एक गौरवशाली तस्वीर पेश करती है। 2021 से 2026 के बीच, 30 मिलियन USD (लगभग 250 करोड़ रुपये) से अधिक की संपत्ति रखने वाले लोगों की संख्या में 63 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी देखी गई है। यह संख्या 12,000 से बढ़कर 19,877 हो गई है। इस वृद्धि के साथ ही भारत अब दुनिया का छठा सबसे बड़ा उच्च निवल संपत्ति (UHNW) वाला बाज़ार बन गया है। रिपोर्ट का 'वेल्थ साइज़िंग मॉडल' अनुमान लगाता है कि यह रफ़्तार यहीं नहीं रुकने वाली। 2031 तक भारत की अल्ट्रा-अमीर आबादी 27 प्रतिशत और बढ़कर 25,217 तक पहुँचने की उम्मीद है। हम वैश्विक स्तर पर जब हम लक्ज़री रियल एस्टेट की तुलना करते हैं, तो '1 मिलियन USD' (लगभग 8.3 करोड़ रुपये) एक मानक पैमाना माना जाता है। यह रिपोर्ट दिखाती है कि मुंबई में जमीन की कीमतें कितनी तेज़ी से बढ़ रही हैं। 

अल्ट्रा-लक्ज़री मार्केट में बड़ा उछाल 
'द वेल्थ रिपोर्ट 2026' रिपोर्ट के अनुसार साल 2025 मुंबई के रियल एस्टेट इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुआ है। इस साल शहर में 5 मिलियन यूएसडी (लगभग 41 करोड़ रुपये) से अधिक मूल्य वाले 56 नए अल्ट्रा-लक्ज़री घरों के सौदे हुए। यह रुझान एक गहरे व्यवहारिक बदलाव की ओर इशारा करता है। नाइट फ्रैंक इंडिया के चेयरमैन शिशिर बैजल के अनुसार, अब भारत के अमीर लोग केवल 'निवेश' के लिए घर नहीं खरीद रहे, बल्कि वे अपनी 'जीवनशैली' को अपग्रेड कर रहे हैं। कोरोना महामारी के बाद के दौर में, बड़े रहने की जगहें, विश्व-स्तरीय सुख-सुविधाएं और 'ब्रांडेड रेजिडेंस' की मांग तेज़ी से बढ़ी है। अमीर खरीदार अब ऐसे घरों की तलाश में हैं जो उन्हें वैश्विक स्तर का अनुभव प्रदान करें। मुंबई में कोस्टल रोड, नए मेट्रो लिंक और ट्रांस-हार्बर लिंक जैसे प्रोजेक्ट्स ने शहर की कनेक्टिविटी को वैश्विक स्तर पर पहुँचा दिया है। आने वाले समय में, जैसे-जैसे भारत की अर्थव्यवस्था और मज़बूत होगी, मुंबई जैसे शहरों में लक्ज़री रियल एस्टेट की मांग 'एंड-यूज़र' (स्वयं रहने वाले खरीदारों) द्वारा संचालित होगी। यह न केवल रियल एस्टेट सेक्टर के लिए अच्छा संकेत है, बल्कि यह देश की समग्र आर्थिक स्थिरता और आत्मविश्वास का भी प्रतीक है। 

बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले में मुंबई 
यह रिपोर्ट के मुताबिक 'प्राइम इंटरनेशनल रेजिडेंशियल इंडेक्स' में 100 शहरों में लक्ज़री हाउसिंग के प्रदर्शन को ट्रैक किया गया है, जिसके निष्कर्षों पर नजर ड़ालें तो साल 2025 में प्राइम रेजिडेंशियल कीमतों में औसतन 3.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो लगातार दूसरे साल मुख्यधारा के हाउसिंग बाज़ारों से बेहतर प्रदर्शन रहा। साल 2025 में प्राइम और सुपर-प्राइम सेगमेंट में मज़बूत मांग के चलते प्राइम रेजिडेंशियल कीमतों में 8.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। लक्ज़री रेजिडेंशियल बाज़ारों का प्रदर्शन के मामले में वैश्विक रैंकिंग में भी इस शहर ने काफ़ी ऊपर छलांग लगाई, और 2024 में 21वें स्थान से बढ़कर 2025 में 10वें स्थान पर पहुँच गया। हालांकि बेंगलुरु 9.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 8वें स्थान पर है। इस वैश्विक रैंकिंग में 58.5 प्रतिशत के साथ टोक्यो पहले पायदान पर है, इसके बाद दुबई 25.1 प्रतिशत, मनीला 17.5 प्रतिशत और सियोल 14.7 प्रतिशत टॉप 5 में शामिल हैं। भारत की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली इस मामले में 6.9 प्रतिशत बढ़ोतरी के साथ 17वें स्थान पर आती है। 
30Apr-2026

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