सोमवार, 30 सितंबर 2019

राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनेगी सरदार पटेल जयंती


राष्ट्रपति 31 अक्टूबर को देंगे सरदार पटेल राष्ट्रीय एकता पुरस्कार
हरिभूमि ब्यूरो. नई दिल्ली।
केंद्र सरकार द्वारा पद्मश्री की तरह सरदार पटेल के नाम से शुरू किये गये सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार ‘सरदार पटेल राष्ट्रीय एकता पुरस्कार’ लौह पुरुष सरदार पटेल की जयंती पर 31 अक्टूबर को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा प्रदान किया जाएगा।
गृहमंत्रालय के प्रवक्ता ने यह जानकारी देते हुए बताया कि भारत सरकार ने सरदार वल्लभभाई पटेल के नाम पर भारत की एकता और अखंडता के क्षेत्र में योगदान के लिए सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा पद्म पुरस्कारों की तर्ज पर आगामी 31 अक्टूबर को राष्ट्रपति भवन में आयोजित पद्म पुरस्कार समारोह के साथ ही एक पुरस्कार समारोह में दिया जाएगा। सरदार बल्लभ भाई पटेल की जयंती की जयंती को इस दिन राष्ट्रीय एकता दिवस में रूप में मनाया जाएगा। इस पुरस्कार को शुरू करने के लिए गृहमंत्रालय पहले ही अधिसूचना जारी कर चुका है। इस पुरस्कार का मकसद राष्ट्रीय एकता और अखंडता को बढ़ावा देने और एक मजबूत और अखण्ड भारत के मूल्य को सुदृढ़ करने में उल्लेखनीय और प्रेरक योगदान के लिए सम्मानित करना है। मंत्रालय के अनुसार यह पुरस्कार राष्ट्रपति के हस्ताक्षर और मुहर के तहत एक सनद  के  तौर पर प्रदान किया जाएगा। इस पुरस्कार में एक पदक और एक प्रशस्ति पत्र होगा। इस पुरस्कार के साथ कोई भी मौद्रिक अनुदान या नकद पुरस्कार संबद्ध नहीं होगा। एक वर्ष में तीन से अधिक पुरस्कार नहीं दिए जाएंगे। यह अति असाधारण और अत्यधिक सुयोग्य मामलों को छोड़कर मरणोपरांत प्रदान नहीं किया जाएगा। मंत्रालय के अनुसार राष्ट्रपति को इस सम्मान को वापस लेने, देने से इंकार करने और उसे रद्द करने का अधिकार होगा। ऐसी स्थिति में सम्मान पाले वाले व्यक्ति/संस्था का नाम रजिस्टर से काट दिया जाएगा। ऐसे में सम्मान पाने वाले को पदक और सनद लौटाना होगा।
समिति करेगी पात्र व्यक्ति व संस्था का चयन
मंत्रालय के अनुसार सरदार पटेल राष्ट्रीय एकता पुरस्कार भारतीय नागरिक या संस्था या संगठन इस पुरस्कार के लिए विचारार्थ किसी व्यक्ति को दिया जाएगा जिसके चययन के लिए प्रधानमंत्री द्वारा एक पुरस्कार समिति का गठन किया जाएगा, जिसमें सदस्य के रूप में केंद्रीय मंत्रिमंडल सचिव, प्रधान मंत्री के प्रधान सचिव, राष्ट्रपति के सचिव, गृह सचिव और प्रधानमंत्री द्वारा चुने गए तीन-चार प्रतिष्ठित व्यक्ति शामिल होंगे। इसके लिए नामांकन प्रति वर्ष आमंत्रित किए जाएंगे। आवेदनों को गृह मंत्रालय द्वारा विशेष रूप से डिज़ाइन की गई वेबसाइट पर ऑनलाइन फाइल करना आवश्यक होगा। धर्म, प्रजाति, जाति, लिंग, जन्म स्थान, आयु या व्यवसाय के भेदभाव के बिना भारत का कोई भी नागरिक और कोई भी संस्था/संगठन, इस पुरस्कार के लिए पात्र होगा। भारत में स्थित कोई भी भारतीय नागरिक या संस्था या संगठन इस पुरस्कार के लिए विचारार्थ किसी व्यक्ति को नामांकित कर सकता है। व्यक्ति स्वयं को भी नामांकित कर सकते हैं। राज्य सरकारें, संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन और भारत सरकार के मंत्रालय भी नामांकन भेज सकते हैं।
26Sep-2019

मुख्यमंत्री मनोहर लाल के दावों पर जजपा का पलटवार


पार्टी प्रमुख दुष्यंत चौटाल ने झूठ का पुलिंदा दिया करार
हरिभूमि ब्यूरो. नई दिल्ली।
हरियाणा में अगले महीने 21 अक्टूबर को होने वाले विधानसा चुनाव के लिए सभी सियासी दलों की प्रचार की गतिविधियां गति पकड़ने लगी है। इसी के तहत इनेलो की फूट से बनी जननायक जनता पार्टी के प्रमुख दुष्यंत चौटाला ने हरियाणा में मनोहर लाल खट्टर सरकार के पिछले पांच साल में उपलब्धियों को झूठ का पुलिंदा करार दिया है। 
जननायक जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व सांसद दुष्यंत चौटाला ने बुधवार को यहां नई दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन में एक दिन पहले यायनि मंगलवार को चंडीगढ़ में हुई सीएम मनोहर लाल की प्रेस कॉनफ्रेस को झूठ का पुलिंदा करार देते हुए राज्य की जनता को भ्रमित करने का का आरोप लगया है। उन्होंने सीएम के दावों पर पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा सरकार ने पिछले पांच सालों में प्रदेश को लूटकर बर्बाद करने के साथ-साथ बेरोजगारी की खाई को और गहरा करके उसमें सक्षम युवाओं को पीछे धकेलेने का काम किया है। दुष्यंत चौटाला ने इस बात पर हैरानी जताई कि प्रदेश में सिर्फ 80 हजार स्नातक युवाओं को बेरोजगार बताने वाले मुख्यमंत्री शायद ये भूल गए कि प्रदेश में पिछले तीन दिन चली क्लर्क भर्ती में लाखों युवाओं का हाल कैसा रहा यानि 4800 क्लर्क पदों के लिए 15 लाख युवाओं को दर-दर की ठोकरें खाने पड़ी। उन्होंने सरकार द्वारा पेश किये जा रहे रोजगार के आंकड़ों का झूठा करार देते हुए कहा कि रोजगार से जुड़े सरकारी आंकड़ो से साबित होता है कि हरियाणा में 28 प्रतिशत से ऊपर की बेरोजगारी दर है। जबकि राज्य में इसके विपरीत भाजपा सरकार की नीति के कारण दिनों-दिन बेरोजगारी दर बढ़ रही है। चौटाला ने कहा कि यह बात मुख्यमंत्री खुद स्वीकार कर चुके हैं कि फोरचून 500 जैसी बड़ी कंपनी का हरियाणा से पलायन हुआ है। जबकि मनोहर सरकार इज ऑफ डूइंग बिजनेस की बड़ी-बड़ी बातें करने में जुटी है।
मुख्यमंत्री से किये सवाल
जजपा प्रमुख दुष्यंत ने मुख्यमंत्री से सवाल करते हुए कहा कि भाजपा सरकार निवेश को लेकर स्पष्ट करें कि वो चाईना से 70 हजार करोड़, हैपनिंग हरियाणा से सवा लाख करोड़, अमेरिका से 26 हजार करोड़, दुबई-सिंगापुर से 10 हजार करोड़ रूपए जैसे तमाम निवेश लाने के जो पहले दावे करती थी उनमें से वो किस-किस में विफल रही है। वहीं उन्होंने पूछा है कि अगर प्रदेश में इतना ही निवेश आया तो आज हरियाणा डेढ़ लाख करोड़ रुपए के कर्ज के तले क्यों दबा हुआ है।  एक सवाल में उन्होंने सरकार से पूछा कि अब उन्हें नौकरी के लिए आवेदकों की गृह जिले में ही परीक्षा करवाने का कैसे याद आया? दुष्यंत ने एक अन्य सवाल करते हुए कहा कि दूर जिलों में परीक्षा, मेडिकल टेस्ट होने की वजह से करीब 18 बच्चों की जान जा चुकी है जिसका जिम्मेदार कौन है?
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चौ. देवीलाल की 106वीं जयंती पर श्रद्धांजलि
हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री स्व. चौधरी देवी लाल जी की 106वीं जयंती को जननायक जनता पार्टी, जननायक सेवा दल और इनसो ने पूरे श्रद्धाभाव से मनाया। जेजेपी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व सांसद दुष्यंत चौटाला ने दिल्ली स्थित संघर्ष स्थल जाकर ताऊ देवीलाल जी की समाधि पर पुष्प अर्पित करके उन्हें नमन किया और उनके दिखाये रस्ते पर चलने का प्रण लिया। इस दौरान दुष्यंत चौटाला ने कहा कि ऐसे महान पुरुष के दिखाए हुए रास्ते पर निरंतर निस्वार्थ भाव से प्रदेश के हित में वे संघर्ष करते रहेंगे। उन्होंन कहा कि जननायक चौधरी देवीलाल जी की कल्याणकारी नीतियों की वजह से देशभर में सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में बदलाव की क्रांति आई। दुष्यंत चौटाला ने कहा कि स्व. चौधरी देवीलाल जन-जन के जननायक हैं। उन्होंने कहा कि आज उनकी नीतियों और सोच के चलते पूरा देश उन्हें श्रद्धा-भाव से किसान, मजूदर व कमेरे वर्ग के मसीहा के रूप में याद करता हैं। साथ ही उन्होंने आह्वान किया कि आज की युवा पीढ़ी को चौधरी देवीलाल जी के दिखाए रास्ते पर चलना चाहिए। इस अवसर पर पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अनंतराम तंवर, जननायक सेवादल के राष्ट्रीय प्रवक्ता दिनेश डागर, दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष ओम प्रकाश सेहरावत, प्रधान महासचिव हेम चन्दर भट्ट, सचिव प्रदीप शौकीन, मुकेश बागड़ी, सरोज बामल आदि उपस्थित थे।
26Sep-2019

सामाजिक सुरक्षा के दायरे में हों निजी सुरक्षा गार्ड: शाह


निजी सुरक्षा एजेंसियों के लाइसेंसिंग पोर्टल की हुई शुरूआत
हरिभूमि ब्यूरो. नई दिल्ली।
केंद्र सरकार ने देश में निजी सुरक्षा गार्डों के प्रशिक्षण की समुचित व्यवस्था के साथ उन्हें केंद्र सरकार की जन-धन योजना, सामाजिक सुरक्षा बीमा योजना तथा अटल पेंशन जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ देने की वकालत की है, जिससे निजी सुरक्षा एजेंसियों की विश्वसनीयता बढ़ेगी।
यह बात मंगलवार को नई दिल्ली में निजी सुरक्षा एजेंसियों के लाइसेंसिंग पोर्टल के लोकार्पण करते हुए कही है। उन्होंने कहा कि निजी सुरक्षा रक्षकों का देश की सुरक्षा में दिये जा रहे महत्वपूर्ण योगदान को नजरअंदाजन नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पीएम नरेन्द्र मोदी के देश की 5 ट्रिलियन इकोनामी के संकल्प के लिए निजी सुरक्षा एजेंसियों को तत्पर रहने की जरूरत है, क्योंकि निजी सुरक्षा रक्षक ही फर्स्ट लाइन आफ रिस्पांडर होते हैं और पहली लाइन जितनी चुस्त-दुरुस्त होगी दूसरी तथा तीसरी लाइन का काम उतना ही आसान होगा। उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों से कहा कि निजी सुरक्षा गार्डों के प्रशिक्षण की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए, जिसमें सुरक्षा गार्डों के थानों के साथ सामंजस्य और संवाद होना चाहिए। वहीं आधुनिक तकनीकी प्रणालियों के साथ गार्डो का प्रशिक्षण भी बेहद जरूरी है। शाह ने कहा कि देश में लगभग 90 लाख निजी सुरक्षा गार्ड हैं, जबकि पुलिस और अर्धसैनिक बल कर्मियों की संख्या लगभग 30 लाख है। इसका मतलब है कि 24 प्रतिशत पुलिसकर्मी और 76 प्रतिशत निजी सुरक्षा गार्ड हैं।
रोजगार की बढ़ेंगी संभावनाएं
शाह ने यह भी कहा कि देश में निजी सुरक्षा एजेंसियों के जरिए रोजगार के सृजन की अपार संभावनाओं में निजी सुरक्षा एजेंसियों के इस पोर्टल की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। अमित शाह ने कहा कि बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक इन एजेंसियों के माध्यम से कार्य कर रहे हैं और एनसीसी तथा स्किल इंडिया सर्टिफिकेट धारकों को रोजगार में प्राथमिकता दी जानी चाहिये। इससे सुरक्षा एजेंसियां विश्वसनीयता हासिल करेंगी और उनका व्यापार भी बढ़ेगा। शाह ने कहा कि इस पोर्टल के अनेक फायदे हैं और 90 दिन के अंदर सभी भारतीय भाषाओं में यह पोर्टल उपलब्ध होगा। उन्होंने कहा कि इस दिशा में इस तरह के नियम बनाये जायेंगे कि पोर्टल का अखिल भारतीय स्वरूप हो तथा एक राज्य में रजिस्टर एजेंसी के लिए दूसरे राज्य में कार्य करना आसान हो। शाह ने कहा कि निजी सुरक्षा गार्डों के पुलिस वेरिफिकेशन में काफी समय लगता था किंतु अब 90 फीसदी से ज्यादा थाने ऑनलाइन हैं, जिससे गार्ड के बारे में समस्त जानकारी प्राप्त की जा सकती है। शाह ने कहा कि इस पोर्टल के माध्यम से जनता को सूचना प्राप्त होगी कि उनके शहर में कितनी सुरक्षा एजेंसियों को लाइसेंस प्राप्त है जिससे उनका विश्वास और मजबूत होगा।
निजी सुरक्षा एक्ट का कार्यान्वयन चुनौती
इस मौके पर गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा कि निजी सुरक्षा एक्ट पर कार्यान्वयन एक चुनौती है जिसे हासिल करने में इस पोर्टल की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने कहा कि बिना लाइसेंस वाली तथा गैर कानूनी संस्थाओं पर रोक लगनी चाहिए। उनका यह भी कहना था कि सुरक्षा एजेंसियों के माध्यम से बड़ी संख्या में रोजगार सृजन हो रहा है जो आने वाले दिनों में और बढ़ेगा। समारोह में गृह सचिव अजय कुमार भल्ला ने कहा कि निजी सुरक्षा उद्योग लाखों लोगों को सुरक्षा देता है, जिसके लाइसेंस की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिये इस पोर्टल का निर्माण किया गया है। प्रत्येक राज्य का अलग नियम है जिसे सुव्यवस्थित करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सिंगल विंडो सुविधा प्रदान की जा रही है। उन्होंने कहा कि राज्य के नियंत्रण अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श कर पोर्टल का निर्माण किया गया है जिसमें आवेदन की प्रक्रिया तथा लंबित अवधि आदि पर निगरानी रखी जा सकेगी।
25Sep-2019

छत्तीसगढ व हरियाणा के दो-दो एनएसएस कार्यकर्ताओं को राष्ट्रीय पुरस्कार


राष्ट्रपति रामनाथ कोंविद ने किया एनएसएस इकाईयों व कार्यकर्ताओं का सम्मान
हरिभूमि ब्यूरो. नई दिल्ली।
देश के विश्वविद्यालयों की राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के 29 पुरस्कारों में दो-दो एनएसएस पुरस्कार छत्तीसगढ तथा हरियाणा के कार्यकर्ताओं के हिस्से में भी आए हैं, जिन्हें रजत पदक के साथ 50-50 हजार रुपये की नकद राशि देकर सम्मानित किया गया है।
ये राष्ट्रीय सेवा योजना पुरस्कार राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने मंगलवार को एनएसएस के स्वर्ण जयंती के उपलक्ष्य में यहां राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में प्रदान किये गये। राष्ट्रीय सेवा योजना पुरस्कार 2017-18 के लिए दिये स्वैच्छिक सेवा के  लिए उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रदान किये गये हैं। एनएसएस कार्यकर्ताओं के अलावा विश्वविद्यालयों की एनएसएस ईकाई को भी इसके लिए इस राष्ट्रीय पुरस्कारों से नवाजा गया है। एनएसएस ईकाईयों के अलावा देश के विभिन्न राज्यों के विश्वविद्यालयों की राष्ट्रीय सेवा योजना ईकाई में उत्कृष्ट योगदान करने वाले 29 एनएसएस कार्यकर्ताओं को भी एनएसएस पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया है। इनमें छत्तीसगढ सिमरदीप सिंह स्याल तथा कुमारी प्रियंका बिस्सा को रजत पदक, प्रमाण पत्र के अलावा 50-50 हजार रुपये नकद प्रदान किये गये हैं। जबकि हरियाणा के चरण सिंह और रोहित कुमार को इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। इसके अलावा चंडीगढ़ के राहुल व कुमारी वैज्यंती, हिमाचल के नीजर शर्मा, राजस्थान की कु. उमा कृष्णावत व तमन्ना यदुवंशी, यूपी के धीरेन्द्र प्रताप सिंह व कुमारी प्रिया आर्य के अलावा बिहार की कुमारी अनीशा, झारखंड के रवि कुमार व राजेन्द्र कुमार साव, गुजरात के हर्षल रमेशभाई व कुमारी सलोनी उन्मेश पारिख के साथ आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, गोवा, महाराष्ट्र के एनएसएस कार्यकर्ता भी इस पुरस्कार के हिस्सेदार बने हैं।
एनएसएस ईकाई में तमिलनाडु अव्वल
राष्ट्रपति द्वारा दिये गये एनएसएस पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रीय सेवा योजना के संचालन के लिए तमिलनाडु के भारतीदासन विश्वविद्यालय त्रिरुचिराप्पल्ली को पहला पुरस्कार दिया गया, जिसके वाइस चांसलर डा. पी. मणिशंकर को ट्राफी और एनएसएस प्रोग्राम कार्डिनेटर डा. ए. लक्ष्मीप्रभा को रजत पदक, प्रमाणपत्र के साथ तीन लाख रुपये का पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया है। द्वितीय पुरस्कार आंध्र प्रदेश की विक्रम सिम्हापुरी यूनिवर्सिटी को मिला, जिसके वाइस चांसलर आर. सुदर्शन राव को ट्राफी के अलावा कार्यक्रम समन्वयक डा. के. रमेश रेड्डी को रजत पदक, प्रमाण पत्र के साथ दो लाख रुपये का नकद पुरस्कार दिया गया। एनएसएस ईकाई में सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार के लिए आंध्र प्रदेश अनंतापुरम के राजकीय मेडिकल कॉलेज की के प्राचार्य को ट्राफी के साथ एक लाख और कार्यक्रम समन्वयक को 70 हजार रुपये के नकद पुरस्कार से नवाजा गया है। कालेज की एनएसएस ईकाई में द्वितीय पुरस्कार गुजरात एआरएस सखीदा आर्टस, कॉमर्स एंड सीसी होम साइंस कॉलेज को दिया गया है, जबकि तीसरे पायदान पर राजस्थान के एसएस जैन सुबोध पीजी कॉलेज रहा। इस श्रेणी में दिये गये दस पुरस्कारों में पांचवा स्थान भी तमिलनाडु के कॉलेज को मिला है, जबकि हिमाचल प्रदेश के राजकीय कालेज सीमा(रोहरु) ने हासिल किया है। जबकि इसके अलावा यह पुरस्कार केरला, तेलंगाना, महाराष्ट्र, कर्नाटक और ओडिसा के एक-एक कॉलेज के हिस्से में भी आया है।
25Sep-2019