गुरुवार, 11 मई 2017

अब नई टोल टैक्स नीति लाने की तैयारी


किलोमीटर के हिसाब से लागू हो सकता है पथकर
हरिभूमि ब्यूरो.
नई दिल्ली।
देश में एनएचएआई द्वारा नए वित्तीय वर्ष से  राष्ट्रीय राजमार्गो पर टोल टेक्स की बढ़ी हुई दरें लागू करने के बावजूद केंद्र सरकार नई टोल नीति लाने की तैयारी कर रही है। इस नई नीति में वाहनों से किलोमीटर के हिसाब से पथकर वसूल करने का प्रस्ताव शामिल किये जाने की संभावना है।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भारत एकीकृत परिवहन एवं लॉजिस्टिक शिखर सम्मेलन में ऐसे संकेत दिये थे, जिस पर मंत्रालय में काम शुरू हो गया है। मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार सरकार ऐसी नई नीति का मसौदा तैयार कर रही है, जिसके तहत वाहनों से किलोमीटर के हिसाब से टोल टेक्स वसूला जा सके। मसलन जिस टोल रोड पर वाहन जितने किलोमीटर चला है, यात्री को उतनी ही दूरी का टोल-टेक्स देने का नियम लागू होगा। जबकि मौजूदा टोल स्कीम के तहत वाहनों से पूरे टोल रोड का टेक्स वसूला जाता है और अलग-अलग श्रेणियों के वाहनों के लिए अलग-अलग राशि वसूलने का प्रावधान पहले से ही निर्धारत है। मौजूदा व्यवस्था में इस बात का कोई फर्क नहीं किया जा रहा है कि किसी वाहन ने पूरी टोल रोड का उपयोग किया है या नहीं।
एक तीर से कई शिकार
सूत्रों के अनुसार प्रस्तावित नई नीति के तहत यदि प्रति किलोमीटर के हिसाब से टोल टेक्स वसूला जाता है तो आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों को काफी कम टेक्स देना पड़ेगा। माना जा रहा है कि इस नई नीति के सहारे केंद्र सरकार एक तीर से कई शिकार करने का प्रयास कर रही है। यानि आसपास के लोगों की जेबे मजबूत होंगी तो वहीं लंबी दूरी के वाहनों से अधिक टोल वसूल करके टोल कंपनियों की कमाई बढ़ेगी तो वहीं सरकार के राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी।

बुधवार, 10 मई 2017

सपा परिवार में दंगल-3 की सुगबुगाहट तेज

नये दल बनने के संकेत से पार्टी टूटने के कगार पर
ओ.पी. पाल.
नई दिल्ली।
उत्तर प्रदेश में स्थानीय निकाय के चुनाव की आहट हो चुकी है और समाजवादाी पार्टी की परिवारिक अंतर्कलह समाप्त होने का नाम नहीं ले रही है। सपा परिवार में पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश से पद छोड़कर मुलायम को देने की मांग को लेकर सपा विधायक शिवपाल यादव द्वारा नई पार्टी के ऐलान करके जहां पार्टी के टूटने के संकेत दे दिये हैं, वहीं सपा में दंगल के तीसरे चरण की सुगबुगहाट भी तेज हो गई है।
यूपी विधानसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी की करारी हार के बाद से ही सपा कुनबे में अंदरुनी कलह की संभावनाएं बढ़ने लगी थी, लेकिन दो धड़ो में बंटी सपा में अब सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद को लेकर घमासान होने की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता। दरअसल यूपी विधानसभा चुनाव के ऐन मौके पर सपा परिवार की अंतर्कलह के दौरान चुनाव आयोग के हस्तक्षेप से पार्टी की कमान तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के हाथ में आ गई थी, जिसमें उन्होंने सपा अधिवेशन के प्रस्ताव के तहत मुलायम सिंह यादव को संरक्षण भी बनाया था। सपा के दंगल के दूसरे हिस्से में जनवरी माह में पार्टी के अध्यक्ष बने अखिलेश ने पिता के सम्मान में तीन माह का समय मांगा था और कहा कहा था कि कि विधानसभा चुनावों के बाद वह पार्टी की कमान मुलायम सिंह यादव को सौंप देंगे। इसी वादे को याद दिलाते हुए चाचा शिवपाल के अलावा मुलायम परिवार की छोटी बहू अपर्णा यादव ने भी समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव से पार्टी की कमान मुलायम सिंह यादव को सौंपने की वकालत की। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद को लेकर मचे इस घमासान में इसलिए भी पार्टी के टूटने के आसार बने हुए हैं कि चाचा शिवपाल यादव ने ‘समाजवादी सेक्युलर मोर्चा’ बनाने का भी ऐलान कर दिया है, हालांकि मुलायम सिंह की ओर से अभी हरी झंडी नहीं दी गई और उनकी तटस्थ भूमिका में इस बात को लेकर भी संशय बना हुआ है कि उनकी भूमिका सपा के संरक्षक या फिर नए मोर्चा में होगी?
लोस चुनाव अगला लक्ष्य
अखिलेश यादव को सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद को छोड़ने की मांग को लेकर फिर से यह घमासान इसलिए भी तूल पकड़ रहा है कि पिछले दिनों सपा की राज्य कार्यकारिणी ने अखिलेश यादव के नेतृत्व के प्रति आस्था जताते हुए पार्टी के विस्तार और भाजपा सरकार की जनविरोधी नीतियों के विरूद्ध संघर्ष का संकल्प लिया। सपा के वजूद को मजबूत करने के लिए प्रदेशभर में सपा का सदस्यता अभियान गांव-गांव तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया गया। इसका मकसद अब अखिलेश के निशाने पर लोकसभा चुनाव-2019 रहेगा। शायद विधानसभा चुनाव में करारी हार के कारण फिलहाल स्थानीय निकायों चुनाव से अखिलेश को इतनी उम्मीद नहीं है।
ऐसी संभावनाएं भी बरकरार
सूत्रों के अनुसार समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव यदि पार्टी की कमान पिता मुलायम सिंह को सौंपते भी हैं तो उससे पहले उनके खिलाफ नई पार्टी के रूप में समाजवादी सेक्युलर मोर्चा बनाने की धमकी देने वाले चाचा को अनुशासनहीनता जैसे आरोप लगाकर पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा सकते हैं। इसलिए सपा में जारी अंतर्कलह को खत्म करने के मुलायम के जारी प्रयासों पर पानी फिर सकता और यह घमासान सड़को पर आ सकता है।

जनांदोलन बन रहा है नमामि गंगे’ मिशन

सरकार ने खारिज की परियोजना की धीमी गति की आशंका
हरिभूमि ब्यूरो.
नई दिल्ली।
देश में गंगा और उसकी सहायक नदियों की स्वच्छता के लिए मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘नमामि गंगे’ एकजनांदोलन बन रहा है, जिसमें जनता की भागीदारी और जागरूकता को सुनिश्चित करने की पहल की गई है।
दरअसल नमामि गंगे परियोजना की धीमी प्रगति को लेकर उठ रहे सवालों को खारिज करते हुए राष्टÑीय स्वच्छ गंगा मिशन ने कहा है कि इस योजना में सरकार ज्यादा से ज्यादा जनभागीदारी सुनिश्चित करने और इस योजना के बारे में किसी प्रकार का संशय दूर करने के लिए कार्यक्रम आगे बढ़ाने की पहल कर रही है। एनएमसीजी के अनुसार गंगा कार्य योजना जैसे नदी को साफ करने की इस योजना में अतीत में किये गए प्रयासों के मद्देनजर बने संशय को दूर करके आम जनता के भरोसे को लेने का प्रयास किया जा रहा है। इस परियोजना को लेकर केंद्रीय जल संसाधन मंत्री सुश्री उमा भारती भी लगातार दोहरा रही है कि गंगा नदी से जुड़े श्रद्धा भाव या आस्था के साथ लोगों में गंगा को लेकर भावनात्मक जुड़ाव और धार्मिक नजरिये को भी ध्यान में रखा जा रहा है, जिसके लिए नदियों की साफ सफाई को लेकर जन जागरूकता फैलाना और जनभागीदारी सुनिश्चित करने के लिए ग्राम पंचायतों को भी इस योजना के सहयोग के लिए जोड़ा गया है। केंद्रीय जल संसाधन नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्री उमा भारती का कहना है कि राइन और टेम्स नदी को साफ करने में काफी समय लगा, उनकी सरकार ने दो साल पहले ही कार्यक्रम को शुरू किया है, तो समय तो चाहिए और सरकार ने सात-आठ साल का समय देश और देश की जनता से मांगा है।
कई मंत्रालय सहयोगी बने
केंद्रीय मंत्री उमा भारती का कहना है कि नमामि गंगा कार्यक्रम के परिणाम प्राप्त करने के लिए अधिक संयम रखने की जरूरत है। इसमें यह भी देखना जरूरी है कि नदी की साफ सफाई के कार्यक्रम से उसे कोई नुकसान न हो साथ ही इसका पारिस्थितिकी प्रवाह भी सुनिश्चित किया जा सके। नमामि गंगे को आगे बढ़ाने की पहल के तहत जनवरी 2016 को जल संसाधन मंत्रालय और सात अन्य मंत्रालयों के साथ सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किये थे, जिनमें रेल, मानव संसाधन विकास, स्वच्छता एवं पेयजल, ग्रामीण विकास, पर्यटन, आयुष, युवा एवं खेल मंत्रालय और पोत परिवहन मंत्रालय शामिल हैं। इन मंत्रालयों के अपने-अपने क्षेत्र में जारी सहयोग के तहत गंगा नदी को अविरल एवं निर्मल बनाने हेतु सात मुख्य क्षेत्रों की पहचान की गई है और साथ ही 21 कार्य बिंदु तय किए गए हैं। इसका मकसद आगामी तीन वर्षो के दौरान गंगा एवं उसकी सहायक नदियों में प्रदूषण फैलाने वाले तत्त्वों का प्रभावी नियंत्रण करना और आपसी सहयोग से स्वच्छता पहल को गति देना है।

मंगलवार, 9 मई 2017

पांच राष्ट्रीय दलों में सीपीएम सबसे अमीर पार्टी!

राकांपा की आय घटी, सीपीआई के पास सबसे कम धन
ओ.पी. पाल.
नई दिल्ली।
देश की सात राष्ट्रीय दलों में से दो दल छह माह बीत जाने के बावजूद अभी तक अपने दल के आय-व्यय का ब्यौरा नहीं दे सके, जबकि पांच दलों के चुनाव आयोग को भेजे ब्यौरे में सीपीएम सबसे अमीर दल के रूप में सामने आया है, जबकि राकांपा की आय में तेजी से गिरावट दर्ज की गई, लेकिन सीपीआई सबसे कम आय वाली पार्टी है।
केंद्रीय सूचना आयोग के दिशानिर्देशों को सुप्रीम कोर्ट के मिले समर्थन के बाद सभी राजनीतिक दलों को अपने वार्षिक आय-व्यय का ब्यौरा केंद्रीय चुनाव आयोग को देना होता है। वित्तीय वर्ष 2015-16 के लिए चुनाव आयोग ने सभी दलों को अपनी वार्षिक आॅडिट रिपोर्ट यानि आय-व्यय का ब्यौरा देने के लिए 31 अक्टूबर 2016 की तिथि निर्धारितकी थी, जिसके तहत राष्ट्रीय दलों तृणमूल कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी और सीपीएम ने इस समय सीमा से पहले ही अपनी रिपोर्ट का ब्यौरा प्रस्तुत कर दिया था। जबकि सीपीआई ने निर्धारित तिथि के 16 दिन और राकांपा ने चार माह बाद अपनी पार्टी के आय-व्यय का ब्यौरा चुनाव आयोग भेजा है, जबकि एक मई तक भाजपा और कांग्रेस ने अपनी आॅडिट रिपोर्ट छह माह बीत जाने के बावजूद प्रस्तुत नहीं की है। यह खुलासा चुनाव सुधार के लिए कार्य करने वाली गैर सरकारी संस्था एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफार्म्स की ताजा अध्ययन रिपोर्ट में किया गया है। गौरतलब है कि वर्ष 2014-15 के वित्तीय वर्ष में सभी राष्ट्रीय दलों सबसे अमीर दल के रूप में भाजपा उभरी थी, जिसने अपनी आय 970.43 करोड़ घोषित की थी, जबकि कांग्रेस 593.31 करोड़ रुपये की आय के साथ दूसरे पायदान पर थी, लेकिन इस बार इन दलों की आॅडिट रिपोर्ट प्रस्तुत न होने से उनके आय-व्यय का आकलन नहीं किया जा सका है।
सीपीआई सबसे गरीब दल
सात राष्ट्रीय दलों में इन पांच दलों की कुल आय 200.76 करोड़ रुपये आंकी गई है। इसमें भाकपा यानि सीपीआई की वर्ष 2015-16 में सबसे ज्यादा 107.48 करोड़ रुपये घोषित की गई है, जबकि 47.39 करोड़ रुपये की आय के साथ बसपा दूसरे पायदान पर है। इसके बाद तृणमूल कांग्रेस की आय 34.578 करोड़, राकांपा की 9.137 करोड़ और सीपीआई की सबसे कम 2.176 करोड़ रुपये की आय सामने आई है।
बसपा की तेजी से बढ़ी आय
इन पांच राष्ट्रीय दलों में बसपा की आय में पिछले वित्तीय वर्ष के मुकाबले सबसे तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिसमें पिछले साल की 11.90 करोड़ में 75 फीसदी की छलांग के बाद 47.385 करोड़ रुपये हो गई है। इसके बाद तृणमूल कांग्रेस की पिछले वित्तीय वर्ष की 13.35 करोड़ बढ़कर 34.578 करोड़ हो गई, जो 61 फीसदी वृद्धि दर्ज कर रही है। सीपीआई की आय भले ही सबसे कम है, लेकिन पिछले साल 1.48 करोड़ में 32 फीसदी बढ़ोतरी के साथ 2.176 करोड़ तक पहुंची है। इस वित्तीय वर्ष में पांच दलों में सबसे अमीर बनकर उभरी सीपीएम ने पिछले साल की 84.82 करोड़ में 21 फीसदी की बढ़ोतरी घोषित की है।

सोमवार, 8 मई 2017

‘सागरमाला’ के बाद अब ‘भारतमाला’

अंतिम रूप में 10 लाख करोड़ की सड़क परियोजना
ओ.पी. पाल.
नई दिल्ली।
देश में एक कोने से दूसरे कोने तक सड़क नेटवर्क तैयार करने के लिए केंद्र सरकार की चल रही सड़क परियोजनाओं में सीमावर्ती इलाकों और तटीय क्षेत्रों में सड़क की व्यवस्था सुधारने की योजना के तहत 'सागर माला' के बाद अब जल्द ही 'भारत माला' परियोजना को भी शुरू कर दिया जाएगा।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार आने वाले चार-पांच साल में भारतमाला नामक मेगा सड़क परियोजना पूरी होने के बाद देश के कम से कम 15 सीमावर्ती राज्यों और अन्य इलाके भारत के सड़क नेटवर्क से जुड़ जाएंगे। मंत्रालय के अनुसार दस लाख करोड़ की तैयार हो चुकी इस परियोजना की डीपीआर तैयार होते ही इस परियोजना को शुरू कर दिया जाएगा। इससे पहले सागरमाला कार्यक्रम के तहत देश के बंदरगाहों को सड़क और रेल नेटवर्क से जोड़ने की परियोजनाएं जारी हैं। मंत्रालय के अनुसार भारतमाला परियोजना देश के पूर्वी छोर से पश्चिमी छोर के सीमावर्ती क्षेत्रों तक की पहुंच बेहद आसान हो जाएगी और तटीय बंदरगाहों का गलियारा भी इस कनेक्टिविटी को और मजबूत करेगा। उम्मीद है कि इसी महीने भारतमाला परियोजना पर प्रेजेंटेशन के बाद परियोजना के पहले चरण में 20 हजार किमी सड़क निर्माण के लिए पब्लिक इंवेस्टमेंट बोर्ड (पीआइबी) की मंजूरी मिल सकती है। राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना यानी एनएचडीपी में करीब 50 हजार किमी सड़क का विकास हुआ। यानि भारत माला इसके बाद देश की दूसरी सबसे बड़ी सड़क परियोजना साबित होगी।
क्या है भारत माला परियोजना
देश में जिस प्रकार से अटल बिहारी वाजपेयी ने स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना शुरू की थी, उसी तर्ज पर अब पीएम नरेन्द्र मोदी ने भारतमाला जैसी एक महत्वाकांक्षी परियोजना को सिरे चढ़ाने का निर्णय लिया है, जिसके तहत भारत के पूरब से पश्चिम तक यानी मिजोरम से गुजरात तक सीमावर्ती इलाकों में सड़क बनाई जाएगी। वहीं इस परियोजना के तहत बनने वाले हाइवे को महाराष्ट्र से पश्चिम बंगाल तक तटीय राज्यों को एक सड़क नेटवर्क से जोड़ेगा। सड़क मंत्रालय के अनुसार सरकार की इस परियोजना के पहले चरण में करीब 20 हजार किमी हाईस्पीड हाईवे का निर्माण किया जाएगा। लिहाजा मंत्रालय को उम्मीद है कि भारतमाला परियोजना की एक विस्तृत प्रॉजेक्ट रिपोर्ट यानि डीपीआर तैयार होने की स्थिति में है। इस भारतमाला की शुरूआत पश्चिम में सीमावर्ती राज्य गुजरात और राजस्थान से शुरू होकर पंजाब और जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और इसके बाद उत्तर प्रदेश और बिहार के तराई क्षेत्र से होते हुए पश्चिम बंगाल तक काम पूरा किया जाएगा। अगल अगले चरण में सिक्किम, असम, अरुणाचल प्रदेश से होते हुए मणिपुर और मिजोरम में काम पूरा करके भारत-म्यांमार सीमा तक सड़के बनाई जाएंगी।
सुरक्षित होंगी सीमाएं
मंत्रालय के अनुसार इस परियोजना को पटरी पर उतारने का मकसद सीमावर्ती इलाकों को भारत के सड़क नेटवर्क से जोड़ना है, ताकि देश की सीमाओं तक आवागमन में भी असानी हो सके और भारतीय सेनाओं और सुरक्षा बलों को अपने गंतव्य तक पहुंचना आसान हो सके। खासतौर से मोदी सरकार ने चीन और नेपाल सीमा से सटे राज्यों में कमजोर सड़क नेटवर्क को मजबूती देने के लिए महत्वाकांक्षी 'भारत माला' परियोजना तैयार की है, जिसके तहत उत्तराखंड के चीन और नेपाल से सटे संवेदनशील सीमांत इलाकों को सड़क नेटवर्क से जोड़ने की योजना है। मसलन देश की सीमाओं की सुरक्षा की दृष्टि से भी इस परियोजना के तहत पूरब से पश्चिम तक पूरी सीमा को कवर किया जाना है। मंत्रालय ने बताया कि पहले चरण में 20 हजार किमी सड़क ऐक्सेस कंट्रोल्ड हाइवे होगा, जो दोनो तरफ बैरिकेडिंग के साथ हाईस्पीड हाईवे होने के कारण इसका ज्यादातर हिस्सा यूटर्न फ्री होगा यानि इस सड़क खास इलाकों पर ही यूटर्न और कट्स बनाने की योजना है।
82 हाईवे भी बनेंगे
मंत्रालय के अनुसार भारतमाल परियोजना के तहत पोर्ट कनेक्टिविटी सुधारने की दिशा में 82 हाईवे का निर्माण भी किया जाना है, जिसमें 18 हाइवे परियोजना केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और 18 हाईवे परियोजनाओं का काम भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानि एनएचएआई को सौंपा गया है। बाकी हाईवे केंद्र सरकार और एनएचएआई मिलकर पूरा करेंगे। खासबात ये है कि भारतमाला परियोजना के तहत तटीय और सीमा क्षेत्रोें के अलावा धार्मिक और पर्यटन स्थलों आदि इलाकों तक को राष्ट्रीय राजमार्गों क े नेटवर्क से जोड़ा जाएगा।

रविवार, 7 मई 2017

प्रशिक्षित चालकों को ही मिलेगा लाइंसेस

केंद्र सरकार खोलेगी 100 प्रशिक्षण केंद्र
ओ.पी. पाल.
नई दिल्ली।
देश में सुरक्षित यातायात व्यवस्था को अंजाम देने के प्रयास में जुटी केंद्र सरकार ने फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने वालो पर शिकंजा कसने के इरादे से यातायात नियमों में बदलाव कर दिये हैं, जिसमें अब प्रशिक्षित चालकों को ही ड्राविंग लाइसेंस दिया जाएगा।
केंद्र सरकार ने पिछले महीने ही यातायात नियमों में ऐसे बदलाव करके अधिसूचना जारी की है, जिसके तहत फर्जी लाइसेंस धारक सरकार के रडार पर होगा। इसके लिए केंद्र सरकार ने ड्राइविंग लाइसेंसों को नेशनलन पोर्टल से जोड़ना शुरू कर दिया है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की अधिसूचना के तहत ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया आॅनलाइन की गई है, लेकिन वहीं ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने वालों को मान्यता प्राप्त ड्राइविंग प्रशिक्षण केंद्र के प्रमाणपत्र जैसा दस्तावेज भी प्रस्तुत करना होगा। इसके बावजूद लर्निंग के बाद ड्राइविंग लाइसेंस हासिल करने के लिए यातायात नियमों संबन्धी परीक्षा के दौर से भी गुजरना होगा। जहां तक चालकों के प्रशिक्षण का सवाल है उसके लिए केंद्रीय सड़क मंत्रालय ने केंद्रीय कौशल विकास मंत्रालय के साथ हाल ही में संपन्न हुए भारत एकीकृत परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स सम्मेलन में समझौता भी किया है, जिसके तहत चालकों के कौशल विकास के लिए देशभर में विभिन्न राज्यों में 100 प्रशिक्षण केंद्र खोले जाएंगे। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्री राजीव प्रताप रूडी की मौजूदगी में हुए इस करार पर रूडी ने कहा कि सरकार ड्राइवरों को कौशल प्रदान करने और उन्हें ढेरों अवसरों के लिए तैयार करने के लिए 100 ड्राइवर प्रशिक्षण संस्थान स्थापित करेंगे।
केंद्रों को मिलेगा अनुदान
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय और कौशल विकास मंत्रालय के बीच मोटरवाहन, निर्माण और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्रों में किये गये करार का मकसद देश में प्रामाणिक कॉमर्शियल ड्राइवरों की बढ़ती मांग की पूरा करने और चालकों के कौशल विकास क्षमता को बढ़ाना है। इस दिशा में चालकों को प्रशिक्षण देने के लिए 100 प्रशिक्षण संस्थानों की स्थापना की जाएगी। इस करार के तहत सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय देश में स्थापित होने वाले 100 प्रशिक्षण संस्थानों में हरेक के लिए एक करोड़ रुपए का अनुदान देगा। कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय भी प्रशिक्षण अवधि के दौरान मजदूरी के नुकसान की भरपाई के लिए प्रशिक्षुओं को अध्येता प्रदान करने के लिए बजट आवंटित करेगा। हर प्रशिक्षु को पूरी प्रशिक्षण अवधि के दौरान 15 हजार रुपए की छात्रवृत्ति भी दी जाएगी, जो सीधे आधार से जुड़े प्रत्यक्ष अंतरण आधार पर प्रशिक्षुओं के खातों में अंतरित होगी। 
ड्राइविंग स्कूल के नियम सख्त
केंद्रीय सड़क मंत्रालय द्वारा जारी नए यातायात नियमों के तहत ऐसे ड्राइविंग लाइसेंस प्रशिक्षण केंद्र को ही मान्यता दी जाएगी जो नए नियमों पर खरा उतरेगा। मसलन इसके लिए परिवहन विभाग से लाइसेंस, प्रशिक्षण देने के लिए मोटर इंजीनियरिंग की योग्यता, वाहन सिखाने के लिए पांच साल कॉमर्शियल वाहन चला चुके अनुभवी चालक, खुद का एक वाहन होना जरूरी है। यही नहीं केंद्र में वाहन में दोहरे नियंत्रण की सुविधा के अलावा प्रशिक्षण के लिए आवश्यक मॉडल संकेत, यातायात चिन्ह, वाहन के सभी पार्ट्स के ब्योरे वाला चार्ट लगा हो। मोटरयान का इंजन, गियर बॉक्स, टायर लिवर, पंक्चर किट, व्हील ब्रेस, जैक, स्पैनर, परिसर में आपातस्थिति के लिए उपचार पेटिका, परिसर में ट्रैफिक संकेतकों युक्त ट्रैक जैसी सुविधा होना जरूरी किया गया है।

शुक्रवार, 5 मई 2017

एकीकृत परिवहन व लॉजिस्टिक्स का खुला रास्ता

बुनियादी ढांचे में जीएसटी की होगी अहम भूमिकाओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
केंद्र सरकार के विकास के एजेंडे के तहत लॉजिस्टिक लागत कम करते हुए देश के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए देशभर से विभिन्न राज्यों के साथ दो लाख करोड़ रुपये के निवेश के 34 समझौते किये गये हैं। इसका मकसद देश में एकीकृत परिवहन प्रणाली को लागू करना है, जिसमें जल, थल, वायु और रेल और अन्य लॉजिस्टिक्स क्षेत्रों को एकजुटता के साथ विकसित किया जाएगा।
यहां विज्ञान भवन में संपन्न हुए तीन दिवसीय भारतीय एकीकृत परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान संबन्धित विषय पर प्रदर्शियों का आयोजन भी किया गया और राज्यों के साथ मिलकर इस दिशा में करीब 2 लाख करोड़ रुपये के 34 समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किये गये। इस शिखर सम्मेलन में देश-विदेश के लगभग 3000 प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिनमें केन्द्र एवं राज्यों के सरकारी संगठनों और विश्व बैंक एवं एडीबी जैसे अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि, वैश्विक परिवहन तथा सप्लाई चेन विशेषज्ञ और निजी कंपनियों के प्रतिनिधियों ने देश के बुनियादी ढांचे को मजबूत करके विकसित करने की योजनाओं पर गंभीरता के साथ विचार विमर्श किये और सुझावों का आदान-प्रदान भी हुआ। सम्मेलन के समापन सत्र में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग और शिपिंग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि यदि हम आर्थिक विकास दर को दहाई अंकों में ले जाने के साथ हीसमाज के सबसे कमजोर तबकों का कल्याण भी सुनिश्चित करना चाहते हैं तो देश में लॉजिस्टिक्स लागत को घटाकर उसे वैश्विक दरों के बराबर करना अत्यंत जरूरी है। मंत्रालय ने इस अवसर पर सोलर टोल प्लाजा डिजाइन करने के लिए आयोजित प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कार भी प्रदान किये।

देश में तेजी से गिर रहा है भूजल स्तर!

दो माह के भीतर 22 फीसदी आई कमी
ओ.पी. पाल.
नई दिल्ली।
केंद्र सरकार द्वारा देश के सूखाग्रस्त इलाकों के लिए शुरू किये गये जल संरक्षण कार्यक्रम जैसी कई योजनाओं के बावजूद गर्मी के कारण हा-हाकार मचना शुरू हो गया है। मसलन देश में जिस तेजी से भूजल में गिरावट आ रही है उसे देखते हुए पिछले दो माह के भीतर जल स्तर में करीब 22 फीसदी की गिरावट आई है।
केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय के अनुसार पिछले साल गर्मियों के दिनों में सुखाग्रस्त इलाकों खासकर बुंदेलखंड और मराठावाडा में पानी की कमी को लेकर हा-हाकार मचा रहा है, जिसकी सुगबुगहाट इस साल गर्मी में भी शुरू होने लगी है। मंत्रालय के अनुसार केंद्रीय जल संसाधन मंत्री सुश्री उमा भारती ने पिछले महीने ही 15 राज्यों से गर्मी के दिनों में पेयजल के अलावा अन्य जरूरतों और सिंचाई के लिए पानी की स्थिति का आकलन रिपोर्ट तलब की है। इसी आधार पर जल संसाधन मंत्रालय ने सूखीग्रस्त इलाकों की प्यास बुझाने के लिए 1600 करोड़ रुपये की योजना को पटरी पर उतारा है, जिसके तहत ऐसे इलाकोें में तेजी के साथ जल संरक्षण कार्यक्रम शुरू कराए गये हैं।
प्रमुख जलाशयों की स्थिति
केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय ने केंद्रीय जल आयोग के शुक्रवार को जारी आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया है कि इस दौरान देश के 91 प्रमुख जलाशयों में 41.066 बीसीएम यानि अरब घन मीटर जल का संग्रहण आंका गया, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का केवल 26 फीसदी है और इनमें पिछले एक सप्ताह में एक प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। हालांकि पिछले एक दशक के औसत जल संग्रहण के हिसाब से स्थिति बेहतर है। गौरतलब है कि गत 31 मार्च यानि दो माह पहले इन प्रमुख जलाशयों का जलस्तर 52.632 बीसीएम यानि अरब घन मीटर आंका गया था, जो मौजूदा जल संग्रह 41.066 बीसीएम के मुकाबले करीब 22 फीसदी कम हुआ है। खासबात यह भी है कि इन जलाशयों में से 37 जलाशय ऐसे है जिनसे 60 मेगावाट से भी ज्यादा पन बिजली का उत्पाद होतो है।
एक्शन में योगी सरकार
यूपी के बुंदेलखंड के जिलों में पिछले सप्ताह ही पानी कमी को लेकर हुए हा-हाकार को देखते हुए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने फरमान जारी कर दिया कि यदि बुंदेलखंड में किसी भी स्थिति में पानी की कमी सामने आई तो उसके लिए अधिकारी जिम्मेदार होंगे, इसलिए ऐसे सूखाग्रस्त इलाकों में आदमी हो या पशु-पक्षी तक के लिए जरूरत के आधार पर पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करें और वहीं बुंदेलखंड क्षेत्र की सिंचाई परियोजनाओं की समीक्षा करके इंतजाम करने में कोई भी कोताही नहीं बरती जानी चाहिए। बुंदेलखंड इलाके में केंद्रीय जल आयोग की निगरानी में 29 जलाशयों की स्थिति पर भी नजर रखी जा रही है, जिनका जलस्तर गर्मी के कारण गिरता नजर आ रहा है।

गुरुवार, 4 मई 2017

एकीकृत परिवहन प्रणाली पर एकजुट हुए मंत्रालय

योजना को लेकर शिखर सम्मेलन में शुरू हुआ मंथन
ओ.पी. पाल.
नई दिल्ली।
देश में एकीकृत परिवहन प्रणाली को लागू करने के लिए सड़क, जहाजरानी, नागर विमानन और रेल मंत्रालय एकजुट नजर आए। यहां चल रहे भारत एकीकृत परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स शिखर सम्मेलन में केंद्र के संबन्धित मंत्रालयों और विशेषज्ञों के बीच विस्तार से मंथन किया गया।
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने गुरुवार को तीन दिवसीय भारत एकीकृत परिवहन और लॉजिस्टिक्स शिखर सम्मेलन में कहा कि देश में मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट सिस्टम लागू करने का मकसद है कि देश में ‘अंत्योदय’ या समाज में सबसे कमजोर व्यक्ति की पहुंंच को आसान बनाया जाए। इसके लिए सुरक्षित यातायात को बहाल करना सबसे बड़ी चुनौती बताते हुए गडकरी ने कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश में आर्थिक विकास को बढ़ावा देना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की ऐसी कल्याणकारी योजनाओं के जरिए मौज्ूदा करीब 7.5 प्रतिशत जीडीपी में दो अंकों की वृद्धि दर हासिल की जा सकेगी। गडकरी ने कहा कि ऐसा करके विकास को प्रोत्साहन देने की भी आवश्यकता है। यदि हम देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और देश को टिकाऊ और संतुलित विकास सुनिश्चित करना चाहते हैं, तो हमें तत्काल विश्व स्तर पर तुलनात्मक दरों पर हमारी लॉजिस्टिक लागत को कम करने पर ज्यादा ध्यान देना होगा। देश में मल्टीमॉडल बुनियादी ढांचे के विकास के लिए विभिन्न हितधारकों के बीच रचनात्मक संवाद की सुविधा के उद्देश्य से आईआईटीएलएस का आयोजन किया गया है।
पहली बार एकजुट मंत्रालय
देश में शायद यह पहला मौका है जब सड़क परिवहन और राजमार्ग, नौवहन, नागर विमानन, रेलवे, उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण, कौशल विकास, वाणिज्य, शहरी विकास, वित्त, विभिन्न राज्य सरकारों और उद्योग और बुनियादी ढांचे के विशेषज्ञ मंत्रालय एक साथ मिलकर एकीकृत परियोजनाओं पर मंथन करके एकजुटता का संदेश दे दहे हैं। मसलन विभिन्न जुड़े मुद्दे पर जान बूझकर और भारत में लॉजिस्टिक्स और परिवहन परिदृश्य के परिवर्तन के बारे में चर्चा करने के लिए रूपरेखाओं पर चर्चा की गई। गौरतलब है कि सागरमल कार्यक्रम के साथ पोर्ट रेल कनेक्टिविटी भी बेहतर और अधिक कुशल बन रही है। देश में परिवहन व्यवस्था वास्तव में कुशल बनाने के लिए सभी मंत्रालयों ने एकीकृत, निर्बाध, बहुआयामी विकास पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत पर जोर दिया।

बुधवार, 3 मई 2017

एकीकृत परिवहन प्रणाली विकसित करने की तैयारी!

भारत की मेजबानी में शुरू हुआ शिखर सम्मेलन
ओ.पी. पाल.
नई दिल्ली।
देश में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार की देश में एकीकृत परिवहन प्रणाली यानि जल, थल, वायु व रेल नेटवर्क को मल्टीमॉडल निर्माण के आधार पर विकसित करने की तैयारी की जा रही है, जिसमें लॉजिस्टिक लागत कम करने का भी लक्ष्य है।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग तथा जहाजरानी मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को शुरू हुए यहां भारत एकीकृत परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स शिखर सम्मेलन के तहत देश के अतीत, वर्तमान और भविष्य और सुरक्षित सड़क और अंतर्राज्यीय राजमार्ग ट्रांसफार्मिंग इंडिया का उद्घाटन किया। इसके तहत यहां विज्ञान भवन में आयोजित दो प्रदर्शनियों का भी आयोजन किया गया है। ये प्रदर्शनी अतीत से लेकर भविष्य भारत में सड़क परिवहन के विकास को प्रदर्शित कर रही हैं। यह सम्मेलन पांच मई तक चलेगा, जिसमें देश विदेश के विशेषज्ञ भी हिस्सा ले रहे हैं। सम्मेलन में प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि भारत ने पहली बार एक एकीकृत, बहुआयामी परिवहन व्यवस्था की योजना शुरू कर दी है। उन्होंने कहा कि देश में रसद लागत को कम करने के लिए एकीकृत परिवहन योजना की एक तत्काल आवश्यकता है।
राजमार्ग सागा प्रदर्शनी
एक प्रदर्शनी को राजमार्ग सागा का नाम दिया गया है, जिसमें अतीत की वर्तमान और भविष्य' और 'सुरक्षित सड़क और अंतर राज्य राजमार्ग ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया को दर्शाया गया है। मसलन विगत, वर्तमान और भविष्य भारत में सड़क परिवहन के विकास की इस प्रदर्शनी मंडप को भी तीन अलग-अलग हिस्सों में विभाजित किया गया है। यानि पिछले, वर्तमान और भविष्य यह खंड सिंधु घाटी सभ्यता के दौरान और वर्तमान समय में वर्षों के दौरान परिवहन के साधनों का प्रदर्शन है जिसमें मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे के प्रसिद्ध भटना सुरंग का प्रदर्शन भी शामिल है। इस प्रदर्शन में स्वर्ण चतुर्भुज, राष्ट्रीय राजमार्ग 44 और विभिन्न अनूठे राजमार्ग शामिल किये हैं। भारत के भविष्य वाले खंड में आने वाली और भविष्यगत घटनाओं जैसे हाइपर लूप, पैसेंजर रैपिड ट्रांजिट और एम्फिबियन बसें हैं। सड़क विकास में शामिल एलआईडीएआर प्रौद्योगिकी हर किसी के लिए वास्तविक लिडर उपकरणों के साथ प्रदर्शित करने और अनुभव करने के लिए प्रदर्शित होती है। आॅनलाइन कई सेवाओं के कार्यान्वयन के संबंध में एमओआरटी द्वारा आईटी की पहल भी प्रदर्शन पर हैं।
सड़क सुरक्षा पर जागरूकता
सुरक्षित रोड और इंटर स्टेट हाईवे ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया मंडप ज्यादा आकर्षक है, जो सड़क सुरक्षा के मुद्दों के बारे में लोगों को जागरूकता बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, यह मंडप एक भूलभुलैया में खुलता है जिससे कि आगंतुक को सड़क के संकेतों की मदद से बातचीत करनी पड़ती है सही संकेतों का पालन करने की प्रेरणा दी जा रही है। मंडप में ड्राइविंग में सुरक्षा पर बल दिया गया है। इसका मकसद ड्राइविंग में सुरक्षा के बारे में सतर्कता बरतने की दिशा में विशाल मोबाइल फोन, हेलमेट, सीट बेल्ट, बोतल, स्पीडोमीटर, एम्बुलेंस आदि का प्रदर्शन हैं। इस मंडप में भी एक कार सिम्युलेटर है जो अपने ड्राइविंग कौशल, खेल को सड़क के संकेतों और एक चेतावनी फिल्म पर अपने ज्ञान का परीक्षण करने के लिए परीक्षण करता है जो भारत में होने वाली दुर्घटनाओं पर बल देता है।