मंगलवार, 27 जुलाई 2021

हरियाणा के 18वें राज्यपाल होंगे बंडारू दत्तात्रेय

भाजपा के वरिष्ठतम नेताओं में शुमार रहे अपने गृहक्षेत्र में ‘पीपुल्स लीडर’ के रूप में है उनकी पहचान हरिभूमि न्यूज.रोहतक। हरियाणा के 18वें राज्यपाल के रूप में 74 वर्षीय बंडारू दत्तात्रेय को नियुक्त किया गया है, जिन्हें हिमाचल के राज्यपाल पद से स्थानांतरित करके हरियाणा इसी पद पर भेजा गया है। दत्तात्रे हरियाणा में राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य का स्थान लेंगे। दत्तात्रे भाजपा के वरिष्ठ राजनेता और आरएसएस के प्रचारक भी रह चुके हैं। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा जारी आदेश के अनुसार बंडारू दत्तात्रेय को हिमाचल प्रदेश से स्थानांतरित करके हरियाणा का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। चार बार लोकसभा सदस्य निर्वाचित होकर संसद में पहुंचने वाले बंडारू दत्तात्रेय को दो साल पहले सितंबर 2019 में हिमाचल का राज्यपाल बनाया गया था। हैदाराबाद की सिकंदराबाद लोकसभा क्षेत्र में वे ‘पीपुल्स लीडर’ से पहचाने जाते हैं। भाजपा की राजनीति में वे केंद्र की मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में केंद्रीय मंत्री रहे। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की संयुक्त राजधानी हैदराबाद में 12 जून 1947 को जन्मे बंडारू दत्तात्रेय ने उस्माहनिया यूनिवर्सिटी, हैदराबाद से बीएससी की डिग्री हासिल की हुई है। वे पहली बार 1991 में दसवीं लोकसभा के सदस्य निर्वाचित हुए। इसके बाद वर्ष 1998 में वह हैदराबाद की सिकंदराबाद लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर दूसरी बार लोकसभा पहुंचे और अटल बिहारी वाजपयेयी सरकार में शहरी विकास मंत्री बने। वर्ष 1999 में हुए मध्यावधि चुनाव में फिर उन्होंने लोकसभा चुनाव जीता, जिन्हें वाजपेयी सरकार में केंद्रीय रेल राज्यमंत्री बनाया गया। चौथी बार दत्तात्रेय साल 2014 में अपनी सिकंदराबाद सीट से ही चुनाव जीतकर मोदी केंद्रीय मंत्रिमंडल का हिस्सा बने। मोदी सरकार में केंद्रीय राज्यमंत्री श्रम एवं रोजगार (स्वतंत्र प्रभार) का कार्यभार सौंपा गया, लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्हें भाजपा ने टिकट नहीं दिया, जिसके बाद उन्हें हिमाचल का राज्यपाल बनाकर भेजा गया। ----ऐसे शुरू हुआ उनका राजनैतिक सफर----- बंडारू दत्तात्रेय वर्ष 1965 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में शामिल हो गए थे। उन्होंने 1968 से 1989 तक आरएसएस प्रचारक के रूप में काम किया। वह लोक संघ समिति (जयप्रकाश नारायण आंदोलन) के संयुक्त सचिव थे। आपातकाल के दौरान उन्हें जेल भेजा गया था। वह 1980 में भाजपा में शामिल हो गए। और आंध्र प्रदेश यूनिट के सचिव के तौर पर काम किया और दो बार आंध्र प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाली। दत्तात्रेय भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी रह हैं। वह 5 मार्च 2018 को वह हैदराबाद विश्वविद्यालय के न्यायालय के सदस्य बने। एक सितंबर 2017 को वह वित्त संबन्धी संसदीय स्थायी समिति के सदस्य बने। 2014 वह भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय घोषणा पत्र समिति के सदस्य बनाए गये। मई 2014 में उन्हें सिकंदराबाद से 16वीं लोकसभा चुनाव में वे फिर से निर्वाचित हुए। एक सितंबर 2014 से 9 नवंबर 2014 तक वह रेलवे पर स्थायी समिति के सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया। -----जब परिवार में टूटा मुसीबत का पहाड़----- भाजपा राजनेता बंडारू दत्तात्रेय का वर्ष 1989 में वसंता से विवाह हुआ। उनके दो बच्चे बेटा वैष्णव बंडारू और बेटी विजया लक्ष्मी है। उनके परिवार पर उस समय मुसीबतों का का पहाड़ टूटा, जब 23 मई 2018 को हार्ट अटैक के कारण उनके बेटे का महज 21 साल की उम्र में निधन हो गया।

पीजीआई में सौ से कम हुए ब्लैक फंगस के मरीज

कोरोना की रिकवरी दर 97.75 प्रतिशत और संक्रमण दर 5.52 प्रतिशत जिले में 25,232 लोगों ने जीती जंग, उपचार के लिए बचे 23 सक्रीय मरीज दो नए कोरोना मरीज मिले, एक मौत के बाद मृतक संख्या 556 हुई पीजीआई में ब्लैक फंगस के दस मरीजों का हुआ आपरेशन हरिभूमि न्यूज.रोहतक। जिलें मे कोरोना का संक्रमण धीरे धीरे कम हो रहा है, जिसके परिणाम स्वरूप अब उपचाराधीन सक्रीय मरीजों की संख्या तेजी से घटकर महज 23 रह गई है, जिनमें जिले के विभिन्न अस्पतालों में केवल 12 मरीज ही इलाज करा रहे हैं। वहीं रोहतक शहर के पीजीआई ट्रामा सेंटर पूरी तरह से कोरोना मरीजों से मुक्त हो चुका है, लेकिन पीजीआई में अभी भी ब्लैक फंगस के 99 मरीज भर्ती हैं। उधर ढलान पर आए करोना से ठीक होने वाले मरीजों के कारण अब रिकवरी दर बढ़कर 97.75 प्रतिशत हो गई। जबकि संक्रमण दर घटकर 5.52 प्रतिशत रह गई है। जिला प्रशासन ने जिलावासियों को सावधानी बरतने के लिए कोरोना बचाव के सभी उपायों के साथ सतर्क रहने की अपील की है। लोगों को चेताया गया है कि जिले में भले ही कोरोना संक्रमण की स्थिति ढ़लान पर हो, लेकिन वहीं मास्क लगाने और सामाजिक दूरी के साथ कोविड उचित व्यवहार को जीवन में अपनाकर सतर्क रहें। प्रशासन के सोमवार को जारी आंकड़ो के अनुसार पिछले 24 घंटे में जिले में जहां दो संक्रमण के मामले सामने आए, वहीं छह लोग संक्रमण मुक्त होकर अपने घरों को लौटे हैं। उधर पीजीआई के कोरोना का पिछले सप्ताह से एक भी मरीज नहीं है, लेकिन फंगस के मरीजों का इलाज किया जा रहा है। -------------------------------- ब्लैक फंगस के दस मरीजों का आपरेशन------- रोहतक स्थित भगवान ने पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के डॉक्टरों को यह बड़ी राहत मिली है। जहां एक भी कोरोना का मरीज नहीं है। वहीं पीजीआई के ईएनटी रोग विभागाध्यक्ष डॉ. आदित्य भार्गव, डॉ. जगत सिंह और डॉ. रमन बडेरा की टीम द्वारा लगातार किये जा रहे ब्लैक फंगस मरीजों के इलाज और सेवा अब धीरे-धीरे अच्छे नतीजे दे रही है। मसलन सोमवार को पीजीआई में ब्लैक फंगस के मरीजों की संख्या घटकर 99 रह गई है, जिनमें से दस मरीजों का आपरेशन किया गया है। पीजीआई के जनसंपर्क विभाग के कार्यकारी इंचार्ज डॉ गजेंद्र सिंह ने यह जानकारी देते हुए बताया कि उम्मीद है कि अगले महीने में पीजीआई कोरोना की तरह ही ब्लैक फंगस मरीजों से भी मुक्त हो जाएगा। -----छह लोग संक्रमणमुक्त हुए------ जिले में पिछले 24 घंटे में कोरोना का इलाज करा रहे 6 लोग स्वस्थ्य होकर अपने घर पहुंचे हैं। इस प्रकार जिले में अब तक 25,232 लोग इलाज के बाद कोरोना संक्रमण से मुक्त हुए हैं। इस दौरान संक्रमण के दो नए मामले दर्ज किये गये, जबकि एक कोरोना मरीज की मौत भी हो गई। इस प्रकार जिले में अब तक कोरोना संक्रमण ने 556 लोगों को अपने काल का ग्रास बनाया है। ------अस्पताल में 12 सक्रीय मरीज भर्ती--------- जिले में फिलहाल कोरोना वायरस से संक्रमित 23 सक्रीय मरीजों का इलाज चल रहा है, जिसमें 12 अस्पतालों और 11 अपने घरों में पृथकवास के बीच कोरोना का इलाज करा रहे हैं। जिला प्रशासन के अनुसार घरों में एकांतवास में रह रहे मरीजों को मैडिकल किट वितरित की गई है, जिनमें आवश्यक स्वास्थ्य उपकरण, दवाईयां एवं रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की दवाई व काढ़ा शामिल है। ---------दो नए संक्रमित मिले------ जिला प्रशासन के आंकड़ो के मुताबिक सोमवार को कोविड-19 के 735 सैंपल जांच के लिए भेजे गए, जिनमें से केवल 2 सैंपल पॉजिटिव पाये गए, जबकि 310 सैंपल का परिणाम आना शेष है। जिला में अब तक कोरोना के 4,66,749 सैंपल लिए गए हैं, जिनमें से 25,811 सैंपल पॉजिटिव पाए गए तथा 4,40,628 सैंपल नेगेटिव पाये गए। अब तक जिले 4,64,547 व्यक्तियों को सर्वेलेंस पर रखा गया, जिनमें संक्रमितों के सम्पर्क में आए व्यक्ति भी शामिल है। --------------------- जिला में 3,032 का टीकाकरण------ जिला में महामारी से बचाव के लिए चलाए जा रहे टीकाकरण अभियान के तहत सोमवार को 3032 लोगों को करोना वैक्सीन की डोज दी गई। इन डोज में कोविशिल्ड की 2,307 तथा को-वैक्सीन की 725 डोज शामिल हैं। अब तक कोरोना वैक्सीन की 3,40,312 डोज दी जा चुकी है। इसमें हेल्थ केयर वर्कर को 21,480 तथा फ्रंटलाइन वर्कर को 13,542 डोज दी गई। वहीं 18 से 44 आयु वर्ग में 1,15,337, 45 से 60 आयु वर्ग में 89,563 तथा 60 वर्ष या इससे अधिक आयु वर्ग में 1,00,390 लोगों को वैक्सीन का टीका लगाया जा चुका है। -डॉ. अनिलजीत त्रेहान, जिला टीकाकरण अधिकारी। 06July-2021

ओलंपिक में जाने से पहले हरियाणा ने रचा इतिहास, महाकुंभ में 31 महारथी

भारतीय कुश्ती दल में सभी सात हरियाणवी पहलवान नौ हरियाणा की खिलाड़ियों से सजी है महिला हॉकी टीम हरियाणा के सात खिलाड़ी दूसरी और एक तीसरी और एक चौथी बार ओलंपिक में ओ.पी. पाल. रोहतक। आगामी 23 जुलाई से जापान के टोक्यो में शुरू हो रहे ओलंपिक में हिस्सा लेने वाले भारतीय खिलाड़ियों के 121 सदस्यीय दल में हरियाणा के 30 खिलाड़ी हरियाणा राज्य से हैं, जिनमें सात सदस्यीय भारतीय कुश्ती दल में सभी हरियाणा के पहलवान हैं। वहीं 16 सदस्य महिला हॉकी टीम में नौ खिलाड़ी हरियाणा की बेटियां ही हैं। हरियाणा के दस खिलाड़ी ऐसे हैं जिन्हें ओलंपिक में खेलने का अनुभव है, जबकि चक्का फेंक में सीमा पूनिया चौथी बार, मुक्केबाज विकास कृष्ण तीसरी बार ओलंपिक का सफर तय करेंगे। बाकी आठ दूसरी बार ओलंपिक में हिस्सा लेंगे। टोक्यो ओलंपिक के लिए जाने वाले भारतीय खिलाड़ियों के दल में सर्वाधिक 30 खिलाड़ी हरियाणा के हैं। इसके साथ ही ओलंपिक में खेलने से पहले खेल जगत में इतिहास रच रहे हरियाणा में कई ऐसे रोचक पहलू हैं। इनमें सबसे बड़ी उपलब्धि तो यही है कि सात सदस्यीय भारतीय कुश्ती टीम के सभी 4 महिला व 3 पुरुष पहलवान हरियाणा के हैं, क्योंकि अन्य राज्यों के पहलवान ओलंपिक के लिए क्वालिफाई नहीं कर पाए। हरियाणा की दूसरी बड़ी उपलब्धि में महिला हॉकी टीम में पूर्व कप्तान रानी रामपाल समेत नौ खिलाड़ी हरियाणा की बेटियां हैं। ऐसे ही कई अन्य पहलू ओलंपिक खेलों को लेकर सुर्खियों में हैं। रियो ओलंपिक में हरियाणा की हिस्सेदारी में 7 महिला समेत 19 खिलाड़ियों ने विभिन्न स्पर्धाओं में हिस्सा लिया था, जिसके बाद खेलों के जज्बे के बीच इस बार दस और खिलाड़ियों का इजाफा हुआ है। टोक्यों में हरियाणा के 30 खिलाड़ियों में हरियाणा की 17 बेटियों ने 13 पुरुष खिलाड़ियों के मुकाबले भारतीय टीम में जगह बनाकर अपनी ताकत का अहसास कराया है। जहां तक ओलंपिक का अनुभव वाले खिलाड़ियों का सवाल है उसमें दस खिलाड़ियों में चक्का फेंक में सीमा पूनिया चौथी बार और मुक्केबाज विकास कृष्ण तीसरी बार ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, बाकी आठ खिलाड़ी रियो ओलंपिक के बाद टोक्यो में दूसरी बार ओलंपिक में भारतीय दल का हिस्सा बन रहे हैं। इन आठ खिलाड़ियों में सुरेंद्र, विनेश फौगाट, रानी रामपाल, सविता, मोनिका, नवजोत, संदीप शामिल हैं। -----हॉकी टीम में हरियाणवी छाप--------- टोक्यों ओलंपिक के लिए चुनी गई भारतीय महिला और पुरुष टीम में 11 खिलाड़ी हरियाणा से चुने गये हैं। इनमें 16 सदस्यीय महिला हॉकी टीम में पूर्व कप्तान रानी रामपाल समेत नौ खिलाड़ी हरियाणा की ही हैं, जिसमें रानी रामपाल, सविता पूनिया, मोनिका मलिक, नवजोत कौर, नवनीत कौर, नेहा गोयल, निशा, शर्मिला, उदिता शामिल हैं, इनमें पांच नवनीत कौर, नेहा गोयल, निशा, शर्मिला, उदिता ओलंपिक में डेब्यू करेंगी। वहीं प्रदेश के सुमित और सुरेंद्र कुमार टोक्यों ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम में शामिल किये गये हैं। ------टोक्यो ओलंपिक में हरियाणा के खिलाड़ी---------- कुश्ती- बजरंग पूनिया, दीपक पूनिया, रवि दहिया, विनेश फौगाट, अंशु मलिक, सोनम मलिक, सीमा शूटिंग- अभिषेक, संजीव राजपूत, यशस्विनी, मनु भाकर मुक्केबाजी- अमित पंघाल, विकास कृष्ण, मनीष, पूजा हॉकी- रानी रामपाल, सविता पूनिया, मोनिका मलिक, नवजोत कौर, नवनीत कौर, नेहा गोयल, निशा, शर्मिला, उदिता, सुमित, सुरेंद्र कुमार एथलेटिक्स-नीरज चोपड़ा, संदीप, राहुल। चक्का फेंक-सीमा पूनिया लॉन टेनिस- सुमित नागल 06July-2021

मंडे स्पेशल: बिजली खपत से ज्यादा उत्पादन क्षमता, फिर भी हाल बेहाल

राज्य के कई थर्मल पावर प्लांट बंद, वितरण व्यवस्था का विस्तार न होने से संकट में जनता अन्य प्रदेशों व निजी कंपनियों से बिजली खरीदकर मांग पूरी कर रही है सरकार ओ.पी. पाल.रोहतक। प्रदेश में बिजली का उत्पादन खपत से कम नहीं है। इसके बावजूद गर्मी के दिनों में राज्यवासी पसीने से तर-बतर हैं। एक ओर बंद पड़े थर्मल पावर प्लांटों ने पसीना निकाला, तो रही सही कसर बिजली वितरण व्यवस्था ने पूरी कर दी। कहीं ट्रांसफार्मर फूंके, तो कही केबल जलने से लोगों ने जागकर रात काटी। हालात ये रहे कि एक मिनट में बिजली किल्लत की तीन शिकायतें दर्ज की गई। जगह-जगह रास्ते रोके गये और लोगों ने जमकर नारेबाजी की। सूर्यदेव के तेवर कुछ नरम पड़े और देवराज प्रसन्न हुए तो राहत की सांस आई। प्रदेश में गर्मी बढ़ते ही बिजली की मांग बढ़ने लगी है। हालांकि हरियाणा के पावर प्लांटों में हो रहे बिजली उत्पादन की पूरी क्षमता से चलाने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन कई यूनिटें बंद पड़ी हैं। इसलिए प्रदेश में खासकर गर्मी के दिनों में बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए सरकार करीब 5700 मेगावाट बिजली की खरीद करती है। आमतौर पर प्रदेश में चार से पांच हजार मेगावाट खपत है, लेकिन गर्मी के दिनों में बिजली की मांग करीब आठ हजार मेगावाट से बढ़कर इस बार 11 हजार से ज्यादा तक जा पहुंची। मसलन प्रदेश में बिजली की कमी नहीं है, लेकिन गर्मी के दिनों में बढ़ते लोड़ के कारण वितरण व्यवस्था का ढांचा उसके आधुनिकीकरण की याद दिलाता है। हालात ये हैं कि इस व्यवस्था के दुरस्त न होने का खामियाजा लोगों को बिजली कट के कारण पसीना बहाकर भुगतना पड़ रहा है। हालांकि सरकार का दावा है कि बिजली विभाग ने 8000 बिजली के खम्भे खरीदे हैं और जल्द ही खराब खम्भों को बदला जाएगा। जल्द ही प्रदेश में सभी पुरानी तारों को भी बदलने का काम पूरा कर लिया जाएगा। इसके लिए 96 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। ------------------------- ऐसे पूरी हो रही है बिजली की मांग हरियाणा में जैसे जैसे अप्रैल माह में गर्मी बढ़ना शुरू हुई वैसे ही हर रोज 6500 मेगावाट से ज्यादा बिजली की खपत होना शुरू हो गई, जो बढ़ते बढ़ते एक जुलाई को 11732 मेगावाट तक रिकार्ड बना गई। पिछले साल जुलाई माह में अधिकतम 11400 मेगावाट बिजली की खपत हुई थी। प्रदेश में स्थिपित जहां कुछ बिजली उत्पादन प्लांट बंद है, तो चालू प्लांटों में क्षमता के अनुरूप बिजली का उत्पादन नहीं हो पा रहा है। ऐसे में प्रदेश सरकार ने पहले से ही बिजली की मांग को पूरा करने के लिए अन्य प्रदेशों और निजी बिजली उत्पादन कंपनियों से अनुबंध किया हुआ है। प्रदेश में समस्या है कि थर्मल पावर प्लांटों में क्षमता से कम बिजली का उत्पादन हो रहा है और बिजली की बढ़ती मांग के बावजूद कई उत्पादन इकाई बंद पड़ी हैं। प्रदेश सरकार के अनुबंधों के तहत फिलहाल खरीदी जा रही बिजली में अदानी पावर लिमिटेड की तीन इकाईयों से 1424 मेगावाट प्रतिदिन खरीद का अनुबंध है, लेकिन फिलहाल एक इकाई से ही हर रोज करीब 650 मेगावाट बिजली मिल रही है। फरीदाबाद गैस प्लांट से 196 और पानीपत में सोलर प्लांट से 10 मेगावाट बिजली मिल रही है। वहीं हरियाणा के लिए एचपीजीसीएल से 2582, भाखड़ा से 846, सेंट्रल पावर से 2572 और निजी क्षेत्र से 5700 मेगावाट बिजली ली जाती है। --------------------- प्रदेश के थर्मल पावर प्लांटों की क्षमता----- प्रदेश में हरियाणा विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (एचपीजीसीएल) भारत में हरियाणा सरकार की बिजली उत्पादक कंपनी है। हरियाणा में नए उत्पादक स्टेशन स्थापित करने की जिम्मेदारी संभाल रहे निगम के छह पावर स्टेशन और परियोजनाएं पानीपत, यमुना नगर, हिसार और झज्जर जिलों में स्थित हैं, जिनकी उत्पादन क्षमता 6032.2 मेगवाट है। बाकी सरकार अन्य प्रदेशों और निजी कंपनियों से खरीद करके प्रदेश में बिजली की मांग को पूरा कर रही है। पानीपत थर्मल पावर प्लांट की आठ में से चार ईकाईयों से 920 मेगावाट, राजीव गांधी थर्मल पावर स्टेशन, खेदड, हिसार की दो इकाईयों से 1200 मेगावाट उत्पादन चालू है। इंदिरा गांधी सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट, झज्जर की तीन यूनिट से 1500 मेगावाट, महात्मा गांधी थर्मल पावर प्लांट प्रोजेक्ट, झज्जर की दो इकाईयों से 1320 मेगावाट बिजली बन रही है। दीन बंधु छोटू राम थर्मल पावर प्लांट, यमुनानगर की दो इकाई से 600 मेगावाट तथा डब्ल्यूवाईसी हाइड्रो इलेक्ट्रिक स्टेशन, यमुनानगर की चार इकाई से 62.40 मेगावाट बिजली का उत्पादन करने की क्षमता है। --------------------------- बिजली आपूर्ति की क्या है व्यवस्था----- प्रदेश में बिजली की आपूर्ति के लिए हरियाणा बिजली प्रसारण निगम, उत्तरी हरियाणा बिजली वितरण निगम और दक्षिणी हरियाणा बिजली वितरण निगम बिजली का संप्रेषण करते हैं। प्रसारण निगम से मिलने वाली बिजली को उत्तरी हरियाणा बिजली वितरण निगम अपने तहत आने वाले करनाल, पानीपत, सोनीपत, जींद, रोहतक, कुरुक्षेत्र, यमुनानगर व अंबाला सर्कल में औद्योगिक, ग्रामीण, शहरी, कृषि क्षेत्रों में बिजली की आपूर्ति करती है। इसी तरह दक्षिणी हरियाणा बिजली वितरण निगम अपने हिसार, भिवानी, गुड़गांव, सिरसा, नारनौल, फरीदाबाद सर्कलों में कृषि, ग्रामीण, शहरी व औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली की आपूर्ति करता है। -------------- सौर ऊर्जा को बढ़ावा---- प्रदेश सरकार का दावा है कि ऊर्जा संरक्षण के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने वाला हरियाणा देश का दूसरा राज्य है। राज्य सरकार का दावा है कि 'म्हारा गांव-जगमग गांव' योजना के तहत राज्य के करीब 5300 गांवों में 24 घंटे बिजली दी जा रही है। सरकार ने इस योजना के तहत प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों को रोशन करने के लिए छह हजार सोलर एलईडी स्ट्रीट लाइट, 12 वॉट की 5 हजार एलईडी और सीसीटीवी कैमरा वाली एक हजार हाईमास्ट एलईडी लाइट लगाने का निर्णय लिया गया है। मौजूदा वित्तीय वर्ष के बजट में यह भी ऐलान किया गया कि प्रदेश में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए हरियाणा विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड 77 मेगावॉट के सौर ऊर्जा संयंत्र लगाएगा। इसके अलावा सरकार पंचकूला को ग्रीन सिटी के रूप में विकसित करके शहर की 20 प्रतिशत बिजली की मांग को सौर ऊर्जा से पूरा करने का निर्णय लिया है। ----------------------- स्मार्ट मीटर का लक्ष्य अधूरा------ हरियाणा डिस्कॉम ने तीन वर्षों में 10 लाख स्मार्ट मीटर लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस कार्य के लिए डिस्कॉम ने एनर्जी एफिशिएंट सर्विस लिमिटेड के साथ काम करने की योजना बनाई है। दिसंबर 2020 तक राज्य में 2.15 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। बिजली विभाग द्वारा खरीदे गये 10 लाख स्मार्ट मीटरों में से 2.75 लाख स्मार्ट मीटर गुरुग्राम, फरीदाबाद, करनाल और पंचकूला में लगाए गए हैं। इसके अलावा सरकार जल्द ही 20 लाख स्मार्ट मीटर और खरीने की योजना बना रही है। वहीं हरियाणा में बिजली के नव एवं नवीनीकरण के पहले चरण में 15000 ऑफ-ग्रिड सौर पंप और दूसरे चरण में 35000 ऑफ ग्रिड सौर पंप स्थापित किए जाने थे, सरकार ने एक साल में इस घोषणा का 75 प्रतिशत कार्य पूरा कर लिया है। ------------ पहली बार बना खपत का रिकार्--- ‘प्रदेश में गर्मी के दिनों में बिजली की मांग बढ़ जाती है, जिसकी विभाग द्वारा निगरानी की जाती है। इस माह के पहले दिन यानि एक जुलाई को ही प्रदेशे के इतिहास में सबसे ज्यादा बिजली की 2576.88 लाख लाख यूनिट के रिकॉर्ड खपत और 11732 मेगावाट बिजली का लोड दर्ज किया गया। इसके सबसे ज्यादा गुरुग्राम सबसे ज्यादा 1147 मेगावाट लोड़ दर्ज हुआ। सरकार की अग्रिम तैयारियों के कारण प्रदेश में बिजली की कमी जैसी कोई समस्या नहीं है। विभाग के अधिकारियों को निर्देश है कि बिजली की सुचारू उपलब्धता के लिए वितरण प्रणाली दुरस्त रखी जाए। इसी प्रकार राज्य के अधिकारियों के लिए दिशानिर्देश दिये गये हैं कि धान सीजन के दौरान सतर्क रहने और जनता व किसानों को निर्बाध रूप से बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। वहीं सरकार ने कोरोना काल के दौरान चार महीने की बिजली सिक्योरिटी को एक साल के लिए स्थगित कर जनता को राहत दी है। यानि जब तक कोरोना काल है तब तक बिजली पर कोई अधिभार नहीं लिया जाएगा। -रणजीत सिंह चौटाला, बिजली मंत्री, हरियाणा। 05July-2021

मंडे स्पेशल:सरकारी स्कूलों की सूरत बदलने में जुटी सरकार!

प्रदेश के कई जिलों के सरकारी स्कूलों में नहीं हुआ एक भी दाखिला सरकार 25 से कम छात्र संख्या वाले 1057 स्कूलों को बंद करेगी ओ.पी. पाल.रोहतक। इसे कोराना महामारी की मार कहें या निजी स्कूलों की चमक धमक.., कि अभिभावक सरकारी स्कूलों से दूरी बना रहे हैं। प्रदेशभर के कई जिलों में सरकारी स्कूलों में एक भी बच्चें का दाखिला नहीं हो सका। इसकी भनक लगते ही प्रदेश सरकार भी एक्शन मोड़ में आई और सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाने के साथ सुविधाएं बढ़ाकर निजी स्कूलों को टक्कर देने की तैयारियां शुरू कर दी हैं। यही नहीं राज्य शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों के प्राचार्यों को बिना एसएलसी विद्यार्थियों का दाखिला करने के निर्देश तक जारी कर दिये हैं और इसके लिए सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या बढ़ाने के लिए शिक्षकों ने बच्चों के अभिभावकों से सीधा संपर्क साधना शुरू कर दिया है। हरियाणा प्रदेश में अरसे से सरकारी स्कूलों का परीक्षा परिणाम संतोष जनक नहीं रहा। मौजूदा राज्य सरकार ने प्रदेश में सरकारी स्कूलों की शिक्षा में सुधार लाने के लिए कई योजनाएं बनाई, जिसका मकसद बच्चों की पढ़ाई के लिए अभिभावकों को आकर्षित करना है। प्रदेश में भाजपा की पहली सरकार में शिक्षा मंत्री रहे राम विलास शर्मा के सियासीगढ़ महेन्द्रगढ़ के सरकारी स्कूलों का रिजल्ट ज्यादा चिंताजनक देखा गया, जिसके बाद सरकार शिक्षा के प्रति एक्शन मोड में आई और हर साल के बजट में शिक्षा के लिए सर्वाधिक बजट जारी किया गया। इस साल के बजट में राज्य सरकार ने 18,410 करोड़ रुपये का बजट शिक्षा के लिए दिया, जो पिछले साल 19,639 करोड़ था। राज्य सरकार का दावा है कि इस साल के शैक्षणिक सत्र में सुधारात्मक और सरल शिक्षा योजना से प्रभावित होकर करीब दो लाख बच्चों ने निजी स्कूल छोड़कर सरकारी स्कूलों में दाखिला लिया है। इसके बावजूद राज्य सरकार ने प्रदेश के 14,400 सरकारी स्कूलों में से सर्वे कराने के बाद आई रिपोर्ट के आधार पर ऐसे 1,057 सरकारी स्कूलों को बंद करने का निर्णय लिया है, जिनमें विद्यार्थियों की संख्या 25 से कम है। ------------------------ अंग्रेजी मीडियम से पढ़ाई------ प्रदेश सरकार सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों की तर्ज पर सुविधाएं देने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। प्रदेश में खोले गये नए 136 राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ विद्यालयों और 1418 राजकीय मॉडल संस्कृति प्राथमिक विद्यालयों में शैक्षणिक सत्र शुरू हो गये हैं। इन स्कूलों में सरकार जहां विद्यार्थियों को एनसीईआरटी की मुफ्त पाठ्य पुस्तकें, स्कूल ड्रेस दे रही है। वहीं कक्षा नौवीं से बारहवीं तक की छात्राओं के लिए आने जाने के लिए वाहन की सुविधा भी सरकार की तरफ से मुफ्त होगी। सीबीएसई से मान्यता वाले इन स्कूलों में शिक्षा के स्तर में सुधार लाने की दिशा में हिंदी और अंग्रेजी मीडियम यानि सीबीएसई पैटर्न पर पढ़ाई कराई जाएगी। इसके लिए प्रत्येक स्कूल में पहली से नौंवी के लिए अंग्रेजी माध्यम का एक सेक्शन शुरू किया जाएगा। पहली से पांचवीं तक अधिकतम 30, छठी से आठवीं तक 35 और नौवीं व 11वीं के लिए 40 सीटे उपलब्ध कराई जाएंगी। ------------------------------- 141 स्कूलों में पांच छात्र तक नहीं------ इस साल नए शैक्षणिक सत्र से पहले सरकार ने 1057 सरकारी स्कूल बंद करने का फैसला लिया है, जिनमें तमाम प्रयासों के बावजूद विद्यार्थियों की संख्या 25 का आंकड़ा नहीं छू पाई। ऐसे स्कूलों में 743 प्राथमिक स्कूल और 314 मिडिल स्कूल हैं। शिक्षा विभाग द्वारा बंद किये जाने वाले प्रदेश के इन 743 प्राथमिक स्कूलों में से 91 स्कूलों में पांच से कम, 120 स्कूलों में दस से कम, 204 स्कूलों में 11 से 15, 180 स्कूलों में 16 से 20 और 148 स्कूलों में छात्र संख्या 21 से 25 के बीच है। जबकि 314 मिडिल स्कूलों में से 50 में पांच से कम, 20 में दस से कम, 54 में 11 से 15, 89 में 16 से 20 और 101 मिडिल स्कूलों में 21 से 25 के बीच छात्र हैं। ऐसे स्कूलों के इन विद्यार्थियों को एक किलोमीटर के दायरे में संचालित दूसरे राजकीय प्राथमिक स्कूलों में समायोजित किया जाएगा। वहीं इन स्कूलों में तैनात 1304 जेबीटी और मुख्य शिक्षकों, 763 टीजीटी और 167 ईएसएचएम को दूसरे अन्य स्कूलों में स्थानांतरित किया जाएगा। ------------------------------ सरकारी स्कूलों से दूरी की वजह------ जब प्रदेश सरकार प्राइवेट स्कूलों की तर्ज पर सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाने की मुहिम में जुटी है तो ऐसे समय अकेले भिवानी जिले में 34 प्राइमरी स्कूल ऐसे पाए गये, जहां तमाम प्रयासों के बावजूद पहली कक्षा में एक भी बच्चें का दाखिला नहीं हुआ। इसका कारण अभिभावन सरकारी स्कूलों में बच्चों की शिक्षा में रूचि नहीं दिखा रहे हैं, जबकि पहली कक्षा में एसएलसी की जरूरत भी नहीं पड़ती। शिक्षा विभाग ने ऐसे स्कूलों की सूची भी जारी कि जिसमें भिवानी जिले के इन 34 स्कूलो में भिवानी खंड में 14, बवानीखेड़ा में 7, कैरू में 5, लोहारू और बहल में 3-3 तथा तोशाम व सिवानी खंड में 1-1 स्कूल शामिल है। शिक्षा विभाग ने ऐसे स्कूलों के प्रधानाचार्यो का सरकार ने जवाब तलब भी किया और आवश्यक दिशानिर्देश जारी किये। ---------------------------------- ऐसे रही स्कूलों में दाखिले की स्थिति------ प्रदेश के इस नए सत्र में सरकारी स्कूलों में दाखिले नाममात्र के हुए हैं। प्रदेश के भिवानी में दो ,गुरुग्राम में पाँच, जींद में एक, कैथल में तीन, झज्जर में छह, यमुनानगर में 13, कुरुक्षेत्र में 9 ,पलवल में दो, रोहतक में तीन, अंबाला में दस, पंचकुला में 13, सिरसा में चार, दादरी में तीन, फ़तेहाबाद में पाँच, महेंद्रगढ़ में आठ, हिसार में तीन, रेवाड़ी में दो, सोनीपत में एक, करनाल जिले में दो बच्चों के पहली क्लास में दाखिले किये गये। जबकि फरीदाबाद, पानीपत और मेवात जिले में अभी तक एक भी बच्चें का दाखिला नहीं हो पाया। ----------------------- कारगर हुई शिक्षा विभाग की योजना----- प्रदेश में कोरोना महामारी के चलते स्कूल बंदी के इस दौर में भी प्राइवेट स्कूल अभिभावकों से पूरी फीस की मांग करने लगे तो इससे त्रस्त अभिभावकों को शिक्षा विभाग की बिना एसएलसी (स्कूल लिविंग सर्टिफिकेट) के दाखिला करने योजना से बल मिला, जिसमें शिक्षक सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ाने के लिए अभिभावकों से संपर्क करके सरकारी स्कूल के पढ़ाने के फायदे बता रहे हैं। सरकार का दावा है कि इस प्रकार के अभियान से प्रदेश में कम से कम दो लाख ऐसे बच्चें सरकारी स्कूलों में दाखिला ले चुके हैं, जो निजी स्कूलों में पढ़ रहे थे। ----------------------------- नई शिक्षा नीति लागू करने की तैयारी--- प्रदेश सरकार हरियाणा के सरकारी स्कूलों का सुधार करने में नई शिक्षा नीति को लागू करने की तैयारी कर रही है। सरकार का प्रयास है कि बच्चों का रूझान निजी स्कूलों की बजाए सरकारी स्कूलों में बढ़े। विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के लिए सरकार मौजूदा सरकारी स्कूलों में रैंकिंग के बाद हर तरह का बदलाव करने को तैयार है। ताकि सरकार का प्रयास है कि प्रदेश में राष्ट्रीय लक्ष्य 2030 से पहले वर्ष 2025 तक नई शिक्षा नीति लागू कर दी जाए। इसके लिए शिक्षा निदेशालय के निर्देशन में रैंकिंग पर शुरू हुई प्रक्रिया को अंजाम देने वाली अलग-अलग कमेटियों द्वारा सरकारी स्कूलों को ग्रीन, येलो तथा रेड श्रेणी में बांटा जा रहा है। इन कमेटियों में स्कूल प्रबंधक, अभिभावक, एनसीइआरटी के प्रतिनिधि तथा शिक्षा विभाग के प्रतिनिधि शामिल हैं। यह श्रेणियां इन स्कूलों में मिलने वाली सुविधाओं तथा परीक्षा परिणाम पर आधारित होंगी। ----------------------- रैंकिंग के आधार पर होगा सुधार---- हरियाणा सरकार की रैंकिंग योजना में जो मापदंड तय किये गये हैं, उनके अनुसार पहली बार की रैंकिंग में रेड जोन में आने वाले स्कूलों को छह से आठ माह के भीतर सुधारा जाएगा। जबकि ग्रीन जोन की रैंकिंग वाले स्कलों को तीन से छह माह के भीतर सुधारा जाएगा। यह सभी कमेटियां अपनी रिपोर्ट मुख्यालय को देंगी और मुख्यालय द्वारा यह रिपोर्ट शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता वाली कमेटी को सौंपी जाएंगी। इस सर्वे तथा रैंकिंग के लिए सरकार द्वारा निजी क्षेत्र की एक एजेंसी की भी सेवाएं ली जाएंगी। ------------------------- रैंकिंग का यह होगा मापदंड - -- सरकार की इस योजना के लिए सर्वे में रैंकिंग का मूल्यांकन करने के लिए स्कूल का तीन साल का परीक्षा परिणाम देखा जाएगा। इसके अलावा अध्यापक व छात्र अनुपात, स्कूल का मौजूदा बुनियादी ढांचा, मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से स्कूल बच्चों के अनुकूल हैं या नहीं, बच्चों को पढ़ाई के अनकुल माहौल मिलता है या नहीं, बच्चों के लिए पीने के पानी का प्रबंध, शौचालयों की दशा, लाइब्रेरी और लेबोरट्री की व्यवस्था, विद्यार्थी के स्कूल व घर के बीच का फासला तथा छात्राओं के मुकाबले महिला अध्यापकों की तैनाती की स्थिति देखी जाएगी। 28June-2021

साक्षात्कार: हिंदी से ही संस्कृति व सभ्यता का संरक्षण संभव: डा. रामफल गौड़

नई पीढ़ी को अपनी सामाजिक कविताओं के जरिए प्रेरित करने में जुटे 
व्यक्तिगत परिचय 
 नाम: डॉ. रामफल गौड़ 
 जन्म: एक अप्रैल 1965 
जन्म स्थान: गांव धनौरी, जिला जींद(हरियाणा) 
शिक्षा: एम.ए. (अंग्रेजी, इतिहास), बी.एड. 
 सम्प्रति: हरियाणा शिक्षा विभाग में अंग्रेजी प्रवक्ता 
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रियाणा साहित्य अकादमी द्वारा पंडित लखमीचन्द सम्मान-2019 से नवाजे जाने वाले प्रख्यात साहित्यकार एवं लोकप्रिय कवि डॉ. रामफल गौड़ का मानना है कि इस तकनीकी और आधुनिक युग में समाती जा रही भारतीय संस्कृति, इतिहास और साहित्य के संरक्षण के लिए मां बोली यानि हिंदी को बढ़ावा देने की जरुरत है। इसलिए हिंदी भाषा को पाठ्यक्रमों में अनिवार्य विषय होना चाहिए। वैसे भी इस इंटरनेट के जमाने में सबकुछ हिंदी में समझना बेहद आसान हो गया है। पठन-पाठन और आपसी बोलचाल में यदि मातृभाषा हिंदी का उपयोग होगा, तो इस भौतिकवाद के युग में भी समाज और सभ्यता और खासकर हरियाणवी संस्कृति के विकास में भारतीय संस्कृति और साहित्य जगत की प्रासांगिकता को और भी सुदृढ़ किया जा सकता है। हरियाणवी संस्कृति और समाज को दिशा देने खासकर नई पीढ़ी को अपनी सामाजिक कविताओं के जरिए प्रेरित करने में जुटे डा. रामफल गौड़ ने हरिभूमि संवाददाता से हुई खास बातचीत में ऐसे कई पहलुओं को उजागर किया, जिनमें नई पीढ़ी को साहित्य और इतिहास के प्रति प्रेरित किया जा सके। हरियाणा के जींद जिले के धनौरी गांव में जन्मे साहित्य जगत के कवि डॉ. रामफल गौड़ हरियाणा शिक्षा विभाग के राजकीय सीनियर सेंकेण्डरी स्कूल, नरवाना में अंग्रेजी के प्रवक्ता हैं। जिनकी उच्च शिक्षा भी अंग्रेजी व इतिहास विषय में हुई है। इसके बावजूद भारतीय संस्कृति एवं सामाजिक सभ्यता के संरक्षण के लिए समाज को दिशा देने में हिंदी साहित्य और कविताओं के माध्यम से जुटे हुए हैं। डा. गौड़ को बचपन में अपने ही परिवार के बुजुर्गो से हिंदी साहित्य और कविताओं के लिखने की प्रेरणा मिली। उनका कहना है कि गांव में उनके परिवार में हरिकेश हरियाणवी संस्कृति और मां बोली में ही सांग और लोकगीत व कविताएं गाते रहे हैं। घर में भी मां और अन्य बुजुर्ग कहानियां और कविताएं सुनाते थे। बेशक उनकी उच्च शिक्षा में हिंदी विषय न रहा हो, लेकिन हिंदी यानि अपनी हरियाणवी संस्कृति के प्रति उनका लगाव कम होने के बजाए बढ़ता चला गया और आज वह अंग्रेजी विषय के प्रवक्ता होने के बावजूद हिंदी भाषा में साहित्य के जरिए समाज सेवा कर रहे हैं। आज की नई और युवा पीढ़ी को संदेश के रूप में डा. गौड ने कहा कि वे समाज के हित में साहित्य और इतिहास को अवश्य पढ़े। वहीं अपने शैक्षिक अध्ययन में भले ही अंग्रेजी या अन्य भाषा विषय लें, लेकिन अपनी हिंदी भाषा को अनिवार्य रूप से रखें, तभी वे देश व समाज में अपनी अहम भूमिका निर्वहन कर सकते हैं। 
प्रमुख प्रकाशित पुस्तकें
डॉ. रामफल गौड़ की अब तक प्रकाशित प्रमुख पुस्तकों में भजनमाला, श्रृंगार रस के संग, तारा रानी की कथा और अन्य हरियाणवी भेंटे, सांग वाटिका, सांग सौरभ, रफ्तार जमाने की, दिल का दर्पण और प्रतिदिन शामिल हैं। इनमें सांग वाटिका पुस्तक हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा अनुदान प्राप्त है। इसके अलावा डा. गौड दूरदर्शन और आकाशवाणी पर केई बार काव्य पाठ कर चुके है। काव्य पाठ के लिए उन्हें विभिन्न संस्थाएं काव्य पाठ के लिए उन्हें आमंत्रित करती रही हैं। उनकी जिनकी कविताए और रचनाएं देश के विभिन्न अखबारों में प्रकाशित हुई है।
प्रमुख पुरस्कार व सम्मान
हरियाणा साहित्य अकादमी ने हाल ही में जींद जिले के धनौरी गांव निवासी साहित्यकार डॉ. रामफल गौड़ को दो लाख रुपये के पंडित लखमीचन्द्र पुरस्कार-2019 से सम्मानित करने का निर्णय लिया है। डॉ. गौड़ को इससे पहले दर्जनों पुरस्कार मिल चुके है, जिसमें अखिल भारतीय साहित्य परिषद का अजीत लाल चौपड़ा स्मृति सम्मान, पंडित हरिकेश पटवरी स्मृति सम्मान शामिल हैं। हिंदी साहित्य प्रेरक संस्था जींद द्वारा चन्द्रमती स्मृति साहित्य रत्न सम्मान, साहित्य सभा कैथल से बाबूराम गुप्ता स्मृति सम्मान, साझा साहित्य मंच करनाल से मनोहर सुगम स्मृति सम्मान, जिज्ञासा मंच हिसार से तारादत्त विलक्षण स्मृति सम्मान, जिला बार संघ करनाल से साहित्य पुरस्कार, म्हारी संस्कृति-म्हारा स्वाभिमान संस्था से संस्कृति रत्न सम्मान पा चुके हैं। डा. गौड़ कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के हरियाणवी भाषा समारोह में उपकुलपति और नरवाना उपमंडल प्रशासन द्वारा साहित्यक गतिविधियों के लिए सम्मानित होने के अलावा आरकेएसडी कॉलेज कैथल में विशिष्ट अतिथि सम्मान, मानव मित्रमंडल नरवाना से हरियाणा दिवस पर सम्मान पाने के साथ ग्राम सुधार समिति धनौरा जींद में संरक्षण का सम्मान भी हासिल कर चुके हैं।
प्रसिद्ध कविता
डा. गौड़ की कई ऐसी कविता रही, जो सामाजिक दृष्टि से सुर्खियां बनी है। ऐसी कविताओं में ‘मां की ममता को दर्शाने वाली ‘मां ममता की मूरत हो सै मम्मी सुनो विचार मेरा कड़ै गया मां मेरा बचपन कड़ै गया मां प्यार मेरा..’। नारी की सामाजिक स्थिति पर ‘देवी अबला पां की जूती, मिले खिताब हजार मनै, जिब तै बनी सृष्टि कितने ओटे अत्याचार मनै..’।‘चाल है हर दम नारी, फिर भी जीना से लाचारी जीना से लाचारी..’। ‘माता पिता तो नौकर बणगे, बालक बणे नवाब घणा के, मेज तले समझौता करते देक्खे से इंकलाब घणे। हरियाणवी मिट्टी की महिमा को दर्शाने वाली कविता में ‘माटी मरै, मिले माटी मैं, कितना अजब नजारा सै, बीच मैं माटी, अंत मै माटी, कौन से न्यारा माटी तै...’ शामिल हैं। 
28June-2021

सोमवार, 26 जुलाई 2021

मंडे स्पेशल: हरियाणा में 1100 कार्यक्रमों में योगासन करेंगे 55 हजार लोग

सातवां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस आज कोरोना प्रोटोकॉल का पालन कराने का जिम्मा संभालेगा जिला प्रशासन प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में व्यायामशालाओं के निर्माण पर कर रही काम ओ.पी. पाल. रोहतक। अब तो विज्ञान भी मान चुका है कि योग इम्युनिटी बढ़ाने का सबसे कारगर और सरल साधन है। इस बार पूरी दुनिया 21 जून को ऐसे मौके योग दिवस मना रही है जब कोरोना से लड़ने के लिए मजबूत इम्युनिटी की सख्त जरूरत है। यही कारण है कि इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के लिए खास तैयारी की गई है। मसलन प्रदेशभर में कोरोना प्रोटोकॉल के चलते 1100 से ज्यादा योग कार्यक्रम तो रखे गए है, लेकिन हर आयोजन में साधकों की संख्या केवल 50 ही होगी। सरकार, राज्य योग आयोग और समाजिक संगठन इस प्रयास में लगे हैं कि आम जन घर में ही रहकर योग के आसनों का अभ्यास करें। इसके लिए लगातार जागरुकता अभियान चलाए जा रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में घोषित होने के बाद योग को वर्ष 2016 में प्रदेश सरकार ने बढ़ावा देने की दिशा में हरियाणा के ग्रामीण क्षेत्रों में एक हजार व्यायामशालाओं का निर्माण करने का निर्णय लिया था। वहीं एक हजार योग शिक्षकों की भर्ती करने का भी ऐलान हुआ। सरकार के अधिकारिक सूत्रों के अनुसार अभी तक करीब 300 योग एवं व्यायामशालाओं का निर्माण किया जा चुका है। ग्रामीण क्षेत्रों में खेल के बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने की दिशा में पहले चरण के 1000 पार्क-सह-व्यायमशालाओं की स्थापना पर काम जारी है। भविष्य में इनकी संख्या दोगुना करने पर भी विचार चल रहा है। जबकि इसके विपरीत प्रदेशभर के जिलों में हरिभूमि टीम की पड़ताल के बाद जो तथ्य सामने आए हैं उसमें किसी भी जिले में व्यायामशालाओं का लक्ष्य पूरा नहीं हो पाया और ग्रामीण क्षेत्रों में जहां निर्माण हुआ है तो वहां योग शिक्षक या किसी अन्य कर्मचारी की नियुक्ति तथा मूलभूत सुविधाओं के अभाव में व्यायामशालाएं खस्ता हालत में विरान अवस्था में हैं। पड़ताल के अनुसार जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों में जिन व्यायायामशालाओं का निर्माण हुआ है, वह या तो अधूरा है या फिर उनकी देखरेख और उनमें दी जाने वाली सुविधाओं के अभाव में उनकी भी हालत बद से बदतर होने के कगार पर है। हालांकि हरियाणा योग आयोग का गठन करके राज्य सरकार ने ग्रामीण स्तर पर योगशालाओं की स्थापना करने और योग प्रशिक्षकों की नियुक्ति करने की योजना को सिरे चढ़ाने के प्रयासों को तेज कर दिया है, ताकि योग को जमीनी स्तर पर लोगों को अपने जीवन शैली का हिस्सा बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके। ------------------- सरकार की ये भी है योजना---- प्रदेश में योगा और आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए सरकार की यह भी योजना है। इसके तहत जिला, ब्लॉक और तहसील स्तर पर योग प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिसमें प्रशिक्षित शारीरिक प्रशिक्षण प्रशिक्षक (पीटीआई) और शारीरिक शिक्षा में डिग्री धारक (डीपीई) योग प्रशिक्षण देंगे। प्रशिक्षण पहले चरण में 2,200 अध्यापकों को योग में प्रशिक्षित किया जाएगा। वहीं सरकार की प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र का नाम बदलकर ‘योग और आयुष केंद्र’ करने की योजना है, जिसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों के अलावा सभी जिला मुख्यालयों पर भी ‘योग और आयुष केंद्र’ स्थापित किए जाएंगे। इस योजना के तहत कुरुक्षेत्र के श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय स्तर का ध्यान योग केंद्र स्थापित किया जाएगा। योग परिषद को हरियाणा योग आयोग के रूप में स्थापित करके प्रदेश सरकार ने पहले ही विधेयक को मंजूरी दे दी है, ताकि अधिनियम के आधार पर योग को बढ़ावा दिया जा सके। ---------------------------- स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा बना योग--- प्रदेश सरकार ने स्वस्थ्य के सबसे सरल साधन माने जाने वाले योग को बचपन से ही अपनी जीवन शैली में अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने की दिशा में योग को हरियाणा के सभी सरकारी स्कूलों में एक अप्रैल 2021 से शैक्षणिक सत्र में योग को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने का ऐलान किया था, लेकिन कोरोना महामारी के कहर के बीच शिक्षण संस्थाएं बंद होने के कारण इसकी शुरूआत नहीं हो सकी। हालांकि राज्य में नैतिक शिक्षा के अलावा छात्रों को शैक्षणिक सत्र 2016-17 से योग पढ़ाया जा रहा है। ---------------------- कोरोना ने समेटा योग दिवस--- प्रदेश में कोरोना संक्रमण के कारण सातवें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर आयोजित होने वाले योग कार्यक्रमों को सीमित कर दिया है। कोरोना प्रोटोकॉल के तहत प्रदेशभर में 1100 स्थानों पर योग कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं। यानि राज्य सरकार के निर्देशों के तहत हरेक जिले में 50-50 योगा कार्यक्रम हो रहे हैं, जिनमें कोरोना महामारी के दिशानिर्देशों के तहत एक कार्यक्रम में योग करने के लिए केवल 50-50 साधकों को ही योगासन करने के लिए अनुमति दी गई। इस प्रकार प्रदेश के 22 जिलों में 55 हजार साधक ही योगासन के लिए हिस्सेदारी कर सकेंगे। कोरोना प्रोटोकॉल के तहत योगा कार्यक्रम आयोजित करने की जिम्मेदारी जिला उपायुक्तों के कंधों पर है, तो कार्यक्रम में योग प्रशिक्षकों और कार्यक्रम स्थल पर अन्य सुविधाओं की व्यवस्था हरियाणा योग आयोग और आयुष विभाग कर रहा है। ---स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा बना योग--- प्रदेश सरकार ने स्वस्थ्य के सबसे सरल साधन माने जाने वाले योग को बचपन से ही अपनी जीवन शैली में अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने की दिशा में योग को हरियाणा के सभी सरकारी स्कूलों में एक अप्रैल 2021 से शैक्षणिक सत्र में योग को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने का ऐलान किया था, लेकिन कोरोना महामारी के कहर के बीच शिक्षण संस्थाएं बंद होने के कारण इसकी शुरूआत नहीं हो सकी। हालांकि राज्य में नैतिक शिक्षा के अलावा छात्रों को शैक्षणिक सत्र 2016-17 से योग पढ़ाया जा रहा है। ------- वर्जन महामारी में योग बेहतर उपाय----- योग का अर्थ है टू ज्वाइंट यानी जुड़ना या लगाव। हम जो भी कार्य करें उसे पूरी एकाग्रता के साथ करें। इस सृष्टि में चारों तरफ योग ही दिखाई दे रहा है। स्वस्थ व्यक्ति योग को जीवन पद्धति, रोगी व्यक्ति चिकित्सा पद्धति और योग साधक योग को कैवल्य प्राप्ति का साधन मानते हैं। कोरोना महामारी के समय लोगों ने प्रणायाम करके अपनी जीवन शक्ति यानी प्रतिरक्षी संस्थान को मजबूत किया। जिससे कि वे कोविड जैसी महामारी में भी स्वयं स्वस्थ रख पाए। आसन व सूर्य नमस्कार से शरीर को मजबूत बनाया। षटकर्म करके अपने शरीर की शुद्धता यानी सफाई की। योगनिद्रा, श्वासन, मकरासन आदि से अपनी पूरे शरीर का सूक्ष्म निरीक्षण किया। ध्यान के द्वारा अपने आप को उस परमपिता परमात्मा के साथ जोड़ा और इस प्रकार लोग योग द्वारा इस महामारी में शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रुप से स्वस्थ रह सके और महामारी का शिकार होने से बच गए। हमें योग को अपनी दिनचर्या के अहम हिस्से के रुप में स्वीकार करना चाहिए जिससे कि हम शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक रूप से स्वस्थ रह सकें और किसी भी प्रकार के तनाव से मुक्त हो जाएं। -संगीता दलाल, असिस्टेंट प्रोफेसर योगा साइंस, महारानी किशोरी जाट कन्या महाविद्यालय --------------- शारीरिक व मानसिक विकास का सर्वांगीण उपाय है योग--- योग केवल व्यायाम की कला नहीं है, बल्कि यही शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक उन्नति का सर्वांगीण उपाय है। योग में मन पर नियन्त्रण सबसे महत्वपूर्ण है। हमारे शरीर में रोगों का मुख्य कारण है मन का अनियन्त्रित होना। पैसे की अन्धी भागदौड़ और उससे उत्पन्न मानसिक तनाव, वर्तमान युग में असाध्य रोगों को जन्म देता है। आज सुख-सुविधाओं के उपभोग तथा श्रम के अभाव के कारण मानव बिमार पड़ रहा है। खाने-पीने में असावधानी के कारण मोटापे का जिन्न भी बढ़ता जा रहा है। योग हमें सम्पूर्ण स्वास्थ्य की ओर ले जाता है। मन और तन दोनों को स्वस्थ बनाने की कला है योग। यम, नियम के पालन के अतिरिक्त योगासान, प्राणायाम भी मन पर नियन्त्रण करना सिखाते हैं। योग का शरीर के सभी अंगों, सभी ग्रन्थियों और सभी इन्द्रियों पर प्रभाव पड़ता है। प्राणायाम द्वारा अपनी सांसों पर और प्राणशक्ति पर नियन्त्रण करना आ जाता है। जिससे हमारी आयु लम्बी होती है। एक निरोगी, निरामय जीवन, एक ऐसा जीवन जो आपके अपने हाथ में है, आपको किसी डॉक्टर के पास जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती, आप स्वयं अपने डॉक्टर बन सकते हैं। इसलिए योग को जीवन में अपनाओ ओर अपने जीवन को सफल बनाओ। -स्वामी आदित्यवेश, 21June-2021

कन्या भ्रूण हत्या पर लगाम कसने की तैयारी में प्रशासन

गर्भधारण के शुरुआती दिन से ही की जाएगी ट्रैकिंग हरिभूमि न्यूज.रोहतक। प्रदेश सरकार के लिंगानुपात में सुधार की दिशा में फोकस करने की दिशा में जिले में प्रशासन ने भी कन्या भ्रूण हत्या जैसी सामाजिक कुरीती पर लगाम लगाने के लिए ट्रैकिंग कराने का निर्णय लिया है, जिसके तहत महिला के गर्भधारण के शुरुआती दिन से ही ट्रैक करने का कार्य किया जाएगा। वहीं जिले में एनीमिया उन्मूलन के लिए प्रत्येक गांव व शहरी केंद्रों की मैपिंग की जाएगी। जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग के पोषण अभियान के तहत जिला विकास भवन में बैठक में जिला उपायुक्त कैप्टन मनोज कुमार ने कहा कि प्रदेश में लिंगानुपात में सुधार को लेकर सरकार का विशेष फोकस है और इसमें सुधार करना बेहद जरूरी है। उन्होंने निर्देश दिए कि पिछले लगभग एक वर्ष के दौरान के आंकड़े एकत्र जाएं। इस समयावधि में गर्भधारण के कितने मामले हैं और कितनी संख्या में बच्चों का जन्म हुआ है। इस बात की जांच की जाए कि इस दौरान कोई कन्या भ्रूण हत्या तो नहीं हुई है। वहीं उन्होंने महिला व बच्चों में एनीमिया उन्मूलन संबंधी दिशा-निर्देश भी जारी करते हुए कहा कि इस संबंध में मैपिंग करके आंकड़े प्रस्तुत किये जाएंगे। पूरे गर्भकाल के दौरान महिला में कितना खून था। अनिमिया में कितना उतार-चढ़ाव हुआ इसका आकलन किया जा सके। कोरोना महामारी के दौरान सर्वे की तर्ज पर अब महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा की जाएगी। ----एनिमिया उन्मूलन को होगी मैपिंग---- बैठक में उपायुक्त कहा कि एनीमिया उन्मूलन के संबन्ध में होने वाले इस सर्वे के कार्य में सीडीपीओ व सुपरवाइजर के अलावा स्वास्थ्य विभाग की एएनएम व आशा वर्कर भी शामिल होंगी। मैपिंग के इस कार्य के दौरान जिला के हर एक गांव के साथ-साथ शहरी केंद्रों पर भी टीमें पहुंचेगी। इस मैपिंग का उद्देश्य यही है कि एनीमिया का कितना फैलाव हुआ है। कोविड-19 प्रभाव कितना है, पोस्ट कोविड-19 स्थिति है, ऐसे सभी आंकड़े मैपिंग के माध्यम से तैयार किए जाएंगे। इसके साथ ही ये टीमें कोरोना महामारी के प्रति लोगों को जागरूक करने का कार्य भी करेगी। ---पोषण अभियान पर हो फोकस---- उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्र एक प्रकार से प्ले स्कूल है और आंगनवाड़ी वर्कर एक अध्यापिका मानकर अपनी ड्यूटी का निर्वहन करें। उन्होंने कहा कि महिलाओं व बच्चों के स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखा जाए। बैठक में राशन की आपूर्ति, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, पोषण अभियान, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ तथा महिला व बच्चों के शारीरिक व मानसिक विकास के बारे में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए। बैठक में अतिरिक्त उपायुक्त महेंद्र पाल, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी महेश कुमार, मुख्यमंत्री सुशासन सहयोगी शैलेट जोश, महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला कार्यक्रम अधिकारी बिमलेश कुमारी मौजूद थे। 19June-2021

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रमों की तैयारी में जुटा प्रशासन

जिले में 50 स्थानों पर 50-50 लोगों के साथ होगा योग रोहतक शहर में छह स्थानों पर मनाया जाएगा योग दिवस हरिभूमि न्यूज.रोहतक। आगामी 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर जिले मे 50 स्थानों पर योगा कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। जिला प्रशासन कार्यक्रमों की तैयारियों को अंतिम रूप देने मे जुटा हुआ है। रोहतक शहर में योगा कार्यक्रम के लिए छह स्थानों को चिन्हित कर लिया गया है। जबकि जिले के तीनों उपमंडल क्षेत्र में 15-15 स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित होंगे। प्रदेश सरकार के निर्देशानुसार अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर 21 जून को जिला में 50 अलग-अलग स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित होंगे, जिनमें कोरोना महामारी की वजह से प्रोटोकॉल के साथ महिलाओं समेत अधिकतम 50 लोगों को हिस्सा लेने की अनुमति होगी। जहां योगा के लिए कार्यक्रम आयोजित होंगे, उन्हें सेनिटाइज किया जा रहा है। सभी कार्यक्रम स्थल पर कोरोना प्रोटोकॉल के मद्देनजर 3 लेयर मास्क व सैनिटाइजर की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी, ताकि कोरोना संक्रमण के फैलाव की संभावना न रहे। मसलन कार्यक्रम में सभी लोगों को कोरोना महामारी दिशानिर्देशों की अनुपालना करना आवश्यक होगा और कम से कम छह फुट की सामाजिक दूरी बनाकर योगा करना होगा। यही नहीं सभी कार्यक्रम स्थलों पर सभी प्रकार की सुविधाओं जैसे पानी शौचालय योगा करने वालों के लिए रिफ्रेशमेंट सहित तमाम सुविधाएं प्रशासन द्वारा मुहैया करवाई जाएगीं। जिला उपायुक्त ने जिले में होने वाले इन कार्यक्रमों के समुचित प्रबंधों के लिए अधिकारियों व योग शिक्षकों की ड्यूटी निर्धारित कर दी है। कार्यक्रम के लिए 18 जून से रिहर्सल का आयोजन किया जाएगा। -------------------- नोडल अधिकारी नियुक्त------ अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर जिले में सभी योग कार्यक्रम अतिरिक्त उपायुक्त महेंद्र पाल की निगरानी में आयोजित किये जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों के लिए अलग-अलग नोडल अधिकारी नियुक्त किये गये हैं। योग कार्यक्रमों की तैयारियों के संबन्ध में गुरुवार को अतिरिक्त उपायुक्त ने उन सभी अधिकारियों के साथ बैठक की, जिन्हें कार्यक्रमों के आयोजन की जिम्मेदारी सौंपी गई हैं। जिले में अलग अलग स्थानों पर योग कार्यक्रम को कोरोना प्रोटोकॉल के अनुपालन की सुनिश्चिता करने पर बल दिया गया है। इस बैठक में नगराधीश ज्योति मित्तल, सीईओ जिला परिषद महेश कुमार, जिला राजस्व अधिकारी पूनम बब्बर, डीआईओ डॉ. जितेंद्र मलिक, जिला आयुर्वेदिक अधिकारी, सतवीर फोगाट सहित सभी संबंधित अधिकारी मौजूद रहे। ------------------------------ अतिरिक्त मुख्य सचिव की उपायुक्तों से चर्चा-------- गृह एवं स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजीव अरोड़ा ने गुरुवार को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की तैयारियों को लेकर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिला के उपायुक्तों से चर्चा की। उन्होंने सभी जिलों में गहन रुचित के साथ इस कार्यक्रम को आयोजित करने पर बल देते हुए कहा कि जिले में सभी नागरिकों को इस दिन योगा करने के लिए प्रेरित किया जाए, क्योंकि स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से योग दिवस से अच्छा कार्यक्रम और कोई हो नहीं सकता। इसलिए अपने घरों में में रहकर प्रत्येक व्यक्ति को योग को जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। ---यूट्यूब पर प्रसारित होगा कार्यक्रम ---- मुख्यमंत्री के एपीएस एवं सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा विभाग के महानिदेशक डॉ अमित कुमार अग्रवाल ने कहा कि चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री आवास पर कोरोना प्रोटोकॉल के मुताबिक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसका प्रसारण यूट्यूब के माध्यम से होगा। उधर योग आयोग के चेयरमैन जयदीप आर्य ने भी योगा दिवस को लेकर सभी जिला उपायुक्तों को दिशा निर्देश जारी किए। --------------------------- अनुभवी योग शिक्षक कराएंगे योगा--- अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रमों में शामिल होने वाले लोगों को योग कराने के लिए जिले में चिन्हित सभी कार्यक्रम स्थलों पर पतंजलि से विशेष तौर पर बुलाए गए अनुभवी योग गुरु व आयुष विभाग के कर्मचारी कार्यक्रम स्थल पर उपस्थित लोगों को योगा का महत्व बताते हुए योगा सिखाएंगे। --------------------- हर कार्यक्रम स्थल पर एलईडी स्क्रीन--- जिले में सभी योग कार्यक्रम स्थलों पर एलईडी स्क्रीन लगाई जाएगी। नोडल अधिकारी के रूप में इसकी जिम्मेदारी डीआईओ जितेन्द्र मलिक को सौँपी गई है। कोरोना प्रोटोकॉल के कारण जो लोग कार्यक्रम स्थल पर नहीं जा पाएंगे, वे कार्यक्रम से दूर बैठने के बावजूद भी स्क्रीन पर देखकर योगा कर सकेंगे। ------------------------- रोहतक में यहां होंगे कार्यक्रम---- जिला मुख्यालय रोहतक शहर 6 स्थानों राजीव गांधी स्टेडियम, मानसरोवर पार्क, ताऊ देवी लाल पार्क, सिटी पार्क, हुड्डा कंपलेक्स पार्क व ओल्ड आईटीआई ग्राउंड स्थित पार्क को योगा कार्यक्रम के लिए चिन्हित किया गया है। जबकि इसके इसके अलावा सिंहपुरा खुर्द व्यामशाला, सुंदरपुर व्यामशाला व पीटीसी सुनारिया में भी योगा दिवस कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। कलानौर खंड में प्रमुंख रूप से चिन्हित स्थानों में गुडान, व्यामशाला कलानौर, व्यामशाला कटेसरा, व्यामशाला खैरेड़ी, व्यामशाला माडौदी रांगडान, व्यामशाला पटवापुर, व्यामशाला रिटोली, व्यामशाला सांगाहेड़ा, व्यामशाला बालंद, व्यामशाला नगर पालिका कलानौर व हूडा पार्क कलानौर में योग दिवस के कार्यक्रम आयोजित किये जाएंगे। सांपला खंड में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सांपला, अनाज मंडी सांपला, महिला महाविद्यालय सांपला, राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय गढ़ी सांपला, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय खेड़ी सांपला, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय नया बांस, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय भैंसरू कलां, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय भैंसरू खुर्द, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय खरावड़, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय इस्माईला 11 बी, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय इस्माईला 9 बी, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय गांधरा, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय समचाना व राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय चुलियाना में योग कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। महम उपमंडल क्षेत्र में आईटीआई मैदान महम, सुभाष पार्क महम, गिरोत्रा बैंकट हॉल महम, शुगर मिल महम, राजीव गांधी स्टेडियम महम, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय महम, सामुदायिक केंद्र मदीना गिंदरान, सर छोटू राम पार्क मोखरा, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय मदीना, कोरसान व्यामशाला खरखड़ा बाजयान, व्यामशाला निडाना, व्यामशाला फरमाना बादशाहपुर, व्यामशाला बलम्बा व राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय निंदाना शामिल है। 18June-2021

रेवाड़ी से समर्पित माल गलियारे पर दौड़ाई सैन्य ट्रेन

पश्चिमी समर्पित फ्रेट कॉरिडोर रेवाडी से फुलेरा तक हुआ पूरा नई दिल्ली। हरियाणा और राजस्थान को जोड़ने वाले न्यू रेवाड़ी-न्यू फुलेरा खंड के बीच 430 किमी पश्चिमी समर्पित फ्रेट कॉरिडोर का निर्माण पूरा हो चुका है, जिसके परीक्षण के लिए वाहनों और उपकरणों के साथ सैन्य ट्रेन की 65 किमी प्रति घंटे की गति से दौड़ाया गया। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉर्पोरेशन के उप महाप्रबंधक राजेश चौपड़ा ने बुधवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि माल वाहक रेल गाड़ियों के लिए बनाए जा रहे पश्चिमी समर्पित फ्रेट कॉरिडोर के 430 किमी लंबे हिस्से को पूरा कर लिया गया है, जो हरियाणा के न्यू रेवाड़ी और राजस्थान के न्यू फुलेरा रेल खंड को जोड़ता है। इस माल गलियारे का ट्रायल करने के लिए इस कॉरिडोर पर सैन्य वाहनों और उपकरणों को लादकर सैन्य ट्रेन को 65 किमी प्रति घंटे की गति से चलाकर किया गया। इससे पहले गत सात जनवरी को 306 किलोमीटर रेवाड़ी-मदार खंड पर डबल डेकर ट्रेन को हरी झंडी देकर 07 जनवरी 2021 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्र को समर्पित किया गया। इसके बाद फुलेरा तक 124 किमी लंबे कॉरिडोर का निर्माण पूरा करने के बाद 430 किमी लंबे पश्चिमी समर्पित फ्रेट कॉरिडोर को चालू करने से पहले सैन्य ट्रेन को चलाकर इसका ट्रायल किया गया है। यह ट्रायल रन डीएफसी और भारतीय सेना की टीमों के निकट समन्वय में काम करने के कारण किया गया है। यह ट्रायल राष्ट्रीय संसाधनों के अनुकूलन और विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच सहज तालमेल हासिल करने के लिए ‘संपूर्ण राष्ट्र दृष्टिकोण’ का हिस्सा है। वहीं सशस्त्र बलों के सैन्य सामान और उसकी क्षमता को बढ़ाने में कारगर साबित होगा। चोपड़ा के अनुसार रोल ऑन-रोल ऑफ (आरओ-आरओ) सेवा पर स्वामित्व वाले रोलिंग स्टॉक को औपचारिक रूप दिया जा रहा है और तौर-तरीके विकसित किए जा रहे हैं। ये परीक्षण सशस्त्र बलों की संचालनात्मक तैयारी को बढ़ाने के मार्ग की शुरुआत करने में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। यह पहल यह सुनिश्चित करने के लिए प्रक्रियाओं को स्थापित करेगी, कि योजना स्तर पर ही राष्ट्रीय बुनियादी ढांचे के विकास में सैन्य आवश्यकताओं को आपस में जोड़ा जाए। डीएफसी, भारतीय सेना और भारतीय रेलवे की बातचीत, डीएफसी को सशस्त्र बलों के मोबिलाइजेशन मैट्रिक्स में लाभ उठाने और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। कुछ स्थानों पर बुनियादी ढांचे का विकास करना और रक्षा के कदम को मान्य करने के लिए परीक्षण करना। रोल ऑन-रोल ऑफ (आरओ-आरओ) सेवा पर स्वामित्व वाले रोलिंग स्टॉक को औपचारिक रूप दिया जा रहा है और तौर-तरीके विकसित किए जा रहे हैं। ये परीक्षण सशस्त्र बलों की संचालनात्मक तैयारी को बढ़ाने के मार्ग की शुरुआत करने में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। यह पहल यह सुनिश्चित करने के लिए प्रक्रियाओं को स्थापित करेगी, कि योजना स्तर पर ही राष्ट्रीय बुनियादी ढांचे के विकास में सैन्य आवश्यकताओं को आपस में जोड़ा जाए। अब तक कमीशन सेक्शन में कुल 4000 से अधिक ट्रेनें चलाई जा चुकी हैं। पूर्वी डीएफसी में इसकी 3000 से अधिक ट्रेनें हैं और डब्ल्यूडीएफसी में 850 से अधिक ट्रेनें हैं। टोटल जीटीकेएम ने 30 लाख टन का आंकड़ा पार कर लिया है। खंड की कुछ ट्रेनें ईडीएफसी में 99.38 किमी प्रति घंटे और डब्ल्यूडीएफसी में 89.50 किमी प्रति घंटे की औसत गति प्राप्त कर रही हैं। ये गति किसी भी सबसे तेज मेल एक्सप्रेस ट्रेनों की तुलना में हैं।