एक जमाना था जब लोग अपने घरों के बाहर लिखते थे-अतिथि देवो भव: फिर शुरू किया-शुभ लाभ और बाद में लिखा जाने लगा-यूं आर वेलकम अब शुरू हो गया-......से सावधान!
मंगलवार, 27 जुलाई 2021
मंडे स्पेशल:सरकारी स्कूलों की सूरत बदलने में जुटी सरकार!
प्रदेश के कई जिलों के सरकारी स्कूलों में नहीं हुआ एक भी दाखिला
सरकार 25 से कम छात्र संख्या वाले 1057 स्कूलों को बंद करेगी
ओ.पी. पाल.रोहतक।
इसे कोराना महामारी की मार कहें या निजी स्कूलों की चमक धमक.., कि अभिभावक सरकारी स्कूलों से दूरी बना रहे हैं। प्रदेशभर के कई जिलों में सरकारी स्कूलों में एक भी बच्चें का दाखिला नहीं हो सका। इसकी भनक लगते ही प्रदेश सरकार भी एक्शन मोड़ में आई और सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाने के साथ सुविधाएं बढ़ाकर निजी स्कूलों को टक्कर देने की तैयारियां शुरू कर दी हैं। यही नहीं राज्य शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों के प्राचार्यों को बिना एसएलसी विद्यार्थियों का दाखिला करने के निर्देश तक जारी कर दिये हैं और इसके लिए सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या बढ़ाने के लिए शिक्षकों ने बच्चों के अभिभावकों से सीधा संपर्क साधना शुरू कर दिया है।
हरियाणा प्रदेश में अरसे से सरकारी स्कूलों का परीक्षा परिणाम संतोष जनक नहीं रहा। मौजूदा राज्य सरकार ने प्रदेश में सरकारी स्कूलों की शिक्षा में सुधार लाने के लिए कई योजनाएं बनाई, जिसका मकसद बच्चों की पढ़ाई के लिए अभिभावकों को आकर्षित करना है। प्रदेश में भाजपा की पहली सरकार में शिक्षा मंत्री रहे राम विलास शर्मा के सियासीगढ़ महेन्द्रगढ़ के सरकारी स्कूलों का रिजल्ट ज्यादा चिंताजनक देखा गया, जिसके बाद सरकार शिक्षा के प्रति एक्शन मोड में आई और हर साल के बजट में शिक्षा के लिए सर्वाधिक बजट जारी किया गया। इस साल के बजट में राज्य सरकार ने 18,410 करोड़ रुपये का बजट शिक्षा के लिए दिया, जो पिछले साल 19,639 करोड़ था। राज्य सरकार का दावा है कि इस साल के शैक्षणिक सत्र में सुधारात्मक और सरल शिक्षा योजना से प्रभावित होकर करीब दो लाख बच्चों ने निजी स्कूल छोड़कर सरकारी स्कूलों में दाखिला लिया है। इसके बावजूद राज्य सरकार ने प्रदेश के 14,400 सरकारी स्कूलों में से सर्वे कराने के बाद आई रिपोर्ट के आधार पर ऐसे 1,057 सरकारी स्कूलों को बंद करने का निर्णय लिया है, जिनमें विद्यार्थियों की संख्या 25 से कम है।
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अंग्रेजी मीडियम से पढ़ाई------
प्रदेश सरकार सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों की तर्ज पर सुविधाएं देने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। प्रदेश में खोले गये नए 136 राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ विद्यालयों और 1418 राजकीय मॉडल संस्कृति प्राथमिक विद्यालयों में शैक्षणिक सत्र शुरू हो गये हैं। इन स्कूलों में सरकार जहां विद्यार्थियों को एनसीईआरटी की मुफ्त पाठ्य पुस्तकें, स्कूल ड्रेस दे रही है। वहीं कक्षा नौवीं से बारहवीं तक की छात्राओं के लिए आने जाने के लिए वाहन की सुविधा भी सरकार की तरफ से मुफ्त होगी। सीबीएसई से मान्यता वाले इन स्कूलों में शिक्षा के स्तर में सुधार लाने की दिशा में हिंदी और अंग्रेजी मीडियम यानि सीबीएसई पैटर्न पर पढ़ाई कराई जाएगी। इसके लिए प्रत्येक स्कूल में पहली से नौंवी के लिए अंग्रेजी माध्यम का एक सेक्शन शुरू किया जाएगा। पहली से पांचवीं तक अधिकतम 30, छठी से आठवीं तक 35 और नौवीं व 11वीं के लिए 40 सीटे उपलब्ध कराई जाएंगी।
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141 स्कूलों में पांच छात्र तक नहीं------
इस साल नए शैक्षणिक सत्र से पहले सरकार ने 1057 सरकारी स्कूल बंद करने का फैसला लिया है, जिनमें तमाम प्रयासों के बावजूद विद्यार्थियों की संख्या 25 का आंकड़ा नहीं छू पाई। ऐसे स्कूलों में 743 प्राथमिक स्कूल और 314 मिडिल स्कूल हैं। शिक्षा विभाग द्वारा बंद किये जाने वाले प्रदेश के इन 743 प्राथमिक स्कूलों में से 91 स्कूलों में पांच से कम, 120 स्कूलों में दस से कम, 204 स्कूलों में 11 से 15, 180 स्कूलों में 16 से 20 और 148 स्कूलों में छात्र संख्या 21 से 25 के बीच है। जबकि 314 मिडिल स्कूलों में से 50 में पांच से कम, 20 में दस से कम, 54 में 11 से 15, 89 में 16 से 20 और 101 मिडिल स्कूलों में 21 से 25 के बीच छात्र हैं। ऐसे स्कूलों के इन विद्यार्थियों को एक किलोमीटर के दायरे में संचालित दूसरे राजकीय प्राथमिक स्कूलों में समायोजित किया जाएगा। वहीं इन स्कूलों में तैनात 1304 जेबीटी और मुख्य शिक्षकों, 763 टीजीटी और 167 ईएसएचएम को दूसरे अन्य स्कूलों में स्थानांतरित किया जाएगा।
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सरकारी स्कूलों से दूरी की वजह------
जब प्रदेश सरकार प्राइवेट स्कूलों की तर्ज पर सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाने की मुहिम में जुटी है तो ऐसे समय अकेले भिवानी जिले में 34 प्राइमरी स्कूल ऐसे पाए गये, जहां तमाम प्रयासों के बावजूद पहली कक्षा में एक भी बच्चें का दाखिला नहीं हुआ। इसका कारण अभिभावन सरकारी स्कूलों में बच्चों की शिक्षा में रूचि नहीं दिखा रहे हैं, जबकि पहली कक्षा में एसएलसी की जरूरत भी नहीं पड़ती। शिक्षा विभाग ने ऐसे स्कूलों की सूची भी जारी कि जिसमें भिवानी जिले के इन 34 स्कूलो में भिवानी खंड में 14, बवानीखेड़ा में 7, कैरू में 5, लोहारू और बहल में 3-3 तथा तोशाम व सिवानी खंड में 1-1 स्कूल शामिल है। शिक्षा विभाग ने ऐसे स्कूलों के प्रधानाचार्यो का सरकार ने जवाब तलब भी किया और आवश्यक दिशानिर्देश जारी किये।
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ऐसे रही स्कूलों में दाखिले की स्थिति------
प्रदेश के इस नए सत्र में सरकारी स्कूलों में दाखिले नाममात्र के हुए हैं। प्रदेश के भिवानी में दो ,गुरुग्राम में पाँच, जींद में एक, कैथल में तीन, झज्जर में छह, यमुनानगर में 13, कुरुक्षेत्र में 9 ,पलवल में दो, रोहतक में तीन, अंबाला में दस, पंचकुला में 13, सिरसा में चार, दादरी में तीन, फ़तेहाबाद में पाँच, महेंद्रगढ़ में आठ, हिसार में तीन, रेवाड़ी में दो, सोनीपत में एक, करनाल जिले में दो बच्चों के पहली क्लास में दाखिले किये गये। जबकि फरीदाबाद, पानीपत और मेवात जिले में अभी तक एक भी बच्चें का दाखिला नहीं हो पाया।
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कारगर हुई शिक्षा विभाग की योजना-----
प्रदेश में कोरोना महामारी के चलते स्कूल बंदी के इस दौर में भी प्राइवेट स्कूल अभिभावकों से पूरी फीस की मांग करने लगे तो इससे त्रस्त अभिभावकों को शिक्षा विभाग की बिना एसएलसी (स्कूल लिविंग सर्टिफिकेट) के दाखिला करने योजना से बल मिला, जिसमें शिक्षक सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ाने के लिए अभिभावकों से संपर्क करके सरकारी स्कूल के पढ़ाने के फायदे बता रहे हैं। सरकार का दावा है कि इस प्रकार के अभियान से प्रदेश में कम से कम दो लाख ऐसे बच्चें सरकारी स्कूलों में दाखिला ले चुके हैं, जो निजी स्कूलों में पढ़ रहे थे।
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नई शिक्षा नीति लागू करने की तैयारी---
प्रदेश सरकार हरियाणा के सरकारी स्कूलों का सुधार करने में नई शिक्षा नीति को लागू करने की तैयारी कर रही है। सरकार का प्रयास है कि बच्चों का रूझान निजी स्कूलों की बजाए सरकारी स्कूलों में बढ़े। विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के लिए सरकार मौजूदा सरकारी स्कूलों में रैंकिंग के बाद हर तरह का बदलाव करने को तैयार है। ताकि सरकार का प्रयास है कि प्रदेश में राष्ट्रीय लक्ष्य 2030 से पहले वर्ष 2025 तक नई शिक्षा नीति लागू कर दी जाए। इसके लिए शिक्षा निदेशालय के निर्देशन में रैंकिंग पर शुरू हुई प्रक्रिया को अंजाम देने वाली अलग-अलग कमेटियों द्वारा सरकारी स्कूलों को ग्रीन, येलो तथा रेड श्रेणी में बांटा जा रहा है। इन कमेटियों में स्कूल प्रबंधक, अभिभावक, एनसीइआरटी के प्रतिनिधि तथा शिक्षा विभाग के प्रतिनिधि शामिल हैं। यह श्रेणियां इन स्कूलों में मिलने वाली सुविधाओं तथा परीक्षा परिणाम पर आधारित होंगी।
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रैंकिंग के आधार पर होगा सुधार----
हरियाणा सरकार की रैंकिंग योजना में जो मापदंड तय किये गये हैं, उनके अनुसार पहली बार की रैंकिंग में रेड जोन में आने वाले स्कूलों को छह से आठ माह के भीतर सुधारा जाएगा। जबकि ग्रीन जोन की रैंकिंग वाले स्कलों को तीन से छह माह के भीतर सुधारा जाएगा। यह सभी कमेटियां अपनी रिपोर्ट मुख्यालय को देंगी और मुख्यालय द्वारा यह रिपोर्ट शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता वाली कमेटी को सौंपी जाएंगी। इस सर्वे तथा रैंकिंग के लिए सरकार द्वारा निजी क्षेत्र की एक एजेंसी की भी सेवाएं ली जाएंगी।
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रैंकिंग का यह होगा मापदंड - --
सरकार की इस योजना के लिए सर्वे में रैंकिंग का मूल्यांकन करने के लिए स्कूल का तीन साल का परीक्षा परिणाम देखा जाएगा। इसके अलावा अध्यापक व छात्र अनुपात, स्कूल का मौजूदा बुनियादी ढांचा, मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से स्कूल बच्चों के अनुकूल हैं या नहीं, बच्चों को पढ़ाई के अनकुल माहौल मिलता है या नहीं, बच्चों के लिए पीने के पानी का प्रबंध, शौचालयों की दशा, लाइब्रेरी और लेबोरट्री की व्यवस्था, विद्यार्थी के स्कूल व घर के बीच का फासला तथा छात्राओं के मुकाबले महिला अध्यापकों की तैनाती की स्थिति देखी जाएगी।
28June-2021
साक्षात्कार: हिंदी से ही संस्कृति व सभ्यता का संरक्षण संभव: डा. रामफल गौड़
नई पीढ़ी को अपनी सामाजिक कविताओं के जरिए प्रेरित करने में जुटे
व्यक्तिगत परिचय
नाम: डॉ. रामफल गौड़
जन्म: एक अप्रैल 1965
जन्म स्थान: गांव धनौरी, जिला जींद(हरियाणा)
शिक्षा: एम.ए. (अंग्रेजी, इतिहास), बी.एड.
सम्प्रति: हरियाणा शिक्षा विभाग में अंग्रेजी प्रवक्ता
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हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा पंडित लखमीचन्द सम्मान-2019 से नवाजे जाने वाले प्रख्यात साहित्यकार एवं लोकप्रिय कवि डॉ. रामफल गौड़ का मानना है कि इस तकनीकी और आधुनिक युग में समाती जा रही भारतीय संस्कृति, इतिहास और साहित्य के संरक्षण के लिए मां बोली यानि हिंदी को बढ़ावा देने की जरुरत है। इसलिए हिंदी भाषा को पाठ्यक्रमों में अनिवार्य विषय होना चाहिए। वैसे भी इस इंटरनेट के जमाने में सबकुछ हिंदी में समझना बेहद आसान हो गया है। पठन-पाठन और आपसी बोलचाल में यदि मातृभाषा हिंदी का उपयोग होगा, तो इस भौतिकवाद के युग में भी समाज और सभ्यता और खासकर हरियाणवी संस्कृति के विकास में भारतीय संस्कृति और साहित्य जगत की प्रासांगिकता को और भी सुदृढ़ किया जा सकता है। हरियाणवी संस्कृति और समाज को दिशा देने खासकर नई पीढ़ी को अपनी सामाजिक कविताओं के जरिए प्रेरित करने में जुटे डा. रामफल गौड़ ने हरिभूमि संवाददाता से हुई खास बातचीत में ऐसे कई पहलुओं को उजागर किया, जिनमें नई पीढ़ी को साहित्य और इतिहास के प्रति प्रेरित किया जा सके।
हरियाणा के जींद जिले के धनौरी गांव में जन्मे साहित्य जगत के कवि डॉ. रामफल गौड़ हरियाणा शिक्षा विभाग के राजकीय सीनियर सेंकेण्डरी स्कूल, नरवाना में अंग्रेजी के प्रवक्ता हैं। जिनकी उच्च शिक्षा भी अंग्रेजी व इतिहास विषय में हुई है। इसके बावजूद भारतीय संस्कृति एवं सामाजिक सभ्यता के संरक्षण के लिए समाज को दिशा देने में हिंदी साहित्य और कविताओं के माध्यम से जुटे हुए हैं। डा. गौड़ को बचपन में अपने ही परिवार के बुजुर्गो से हिंदी साहित्य और कविताओं के लिखने की प्रेरणा मिली। उनका कहना है कि गांव में उनके परिवार में हरिकेश हरियाणवी संस्कृति और मां बोली में ही सांग और लोकगीत व कविताएं गाते रहे हैं। घर में भी मां और अन्य बुजुर्ग कहानियां और कविताएं सुनाते थे। बेशक उनकी उच्च शिक्षा में हिंदी विषय न रहा हो, लेकिन हिंदी यानि अपनी हरियाणवी संस्कृति के प्रति उनका लगाव कम होने के बजाए बढ़ता चला गया और आज वह अंग्रेजी विषय के प्रवक्ता होने के बावजूद हिंदी भाषा में साहित्य के जरिए समाज सेवा कर रहे हैं। आज की नई और युवा पीढ़ी को संदेश के रूप में डा. गौड ने कहा कि वे समाज के हित में साहित्य और इतिहास को अवश्य पढ़े। वहीं अपने शैक्षिक अध्ययन में भले ही अंग्रेजी या अन्य भाषा विषय लें, लेकिन अपनी हिंदी भाषा को अनिवार्य रूप से रखें, तभी वे देश व समाज में अपनी अहम भूमिका निर्वहन कर सकते हैं।
प्रमुख प्रकाशित पुस्तकें
डॉ. रामफल गौड़ की अब तक प्रकाशित प्रमुख पुस्तकों में भजनमाला, श्रृंगार रस के संग, तारा रानी की कथा और अन्य हरियाणवी भेंटे, सांग वाटिका, सांग सौरभ, रफ्तार जमाने की, दिल का दर्पण और प्रतिदिन शामिल हैं। इनमें सांग वाटिका पुस्तक हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा अनुदान प्राप्त है। इसके अलावा डा. गौड दूरदर्शन और आकाशवाणी पर केई बार काव्य पाठ कर चुके है। काव्य पाठ के लिए उन्हें विभिन्न संस्थाएं काव्य पाठ के लिए उन्हें आमंत्रित करती रही हैं। उनकी जिनकी कविताए और रचनाएं देश के विभिन्न अखबारों में प्रकाशित हुई है।
प्रमुख पुरस्कार व सम्मान
हरियाणा साहित्य अकादमी ने हाल ही में जींद जिले के धनौरी गांव निवासी साहित्यकार डॉ. रामफल गौड़ को दो लाख रुपये के पंडित लखमीचन्द्र पुरस्कार-2019 से सम्मानित करने का निर्णय लिया है। डॉ. गौड़ को इससे पहले दर्जनों पुरस्कार मिल चुके है, जिसमें अखिल भारतीय साहित्य परिषद का अजीत लाल चौपड़ा स्मृति सम्मान, पंडित हरिकेश पटवरी स्मृति सम्मान शामिल हैं। हिंदी साहित्य प्रेरक संस्था जींद द्वारा चन्द्रमती स्मृति साहित्य रत्न सम्मान, साहित्य सभा कैथल से बाबूराम गुप्ता स्मृति सम्मान, साझा साहित्य मंच करनाल से मनोहर सुगम स्मृति सम्मान, जिज्ञासा मंच हिसार से तारादत्त विलक्षण स्मृति सम्मान, जिला बार संघ करनाल से साहित्य पुरस्कार, म्हारी संस्कृति-म्हारा स्वाभिमान संस्था से संस्कृति रत्न सम्मान पा चुके हैं। डा. गौड़ कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के हरियाणवी भाषा समारोह में उपकुलपति और नरवाना उपमंडल प्रशासन द्वारा साहित्यक गतिविधियों के लिए सम्मानित होने के अलावा आरकेएसडी कॉलेज कैथल में विशिष्ट अतिथि सम्मान, मानव मित्रमंडल नरवाना से हरियाणा दिवस पर सम्मान पाने के साथ ग्राम सुधार समिति धनौरा जींद में संरक्षण का सम्मान भी हासिल कर चुके हैं।
प्रसिद्ध कविता
डा. गौड़ की कई ऐसी कविता रही, जो सामाजिक दृष्टि से सुर्खियां बनी है। ऐसी कविताओं में ‘मां की ममता को दर्शाने वाली ‘मां ममता की मूरत हो सै मम्मी सुनो विचार मेरा कड़ै गया मां मेरा बचपन कड़ै गया मां प्यार मेरा..’। नारी की सामाजिक स्थिति पर ‘देवी अबला पां की जूती, मिले खिताब हजार मनै, जिब तै बनी सृष्टि कितने ओटे अत्याचार मनै..’।‘चाल है हर दम नारी, फिर भी जीना से लाचारी जीना से लाचारी..’। ‘माता पिता तो नौकर बणगे, बालक बणे नवाब घणा के, मेज तले समझौता करते देक्खे से इंकलाब घणे। हरियाणवी मिट्टी की महिमा को दर्शाने वाली कविता में ‘माटी मरै, मिले माटी मैं, कितना अजब नजारा सै, बीच मैं माटी, अंत मै माटी, कौन से न्यारा माटी तै...’ शामिल हैं।
28June-2021
सोमवार, 26 जुलाई 2021
मंडे स्पेशल: हरियाणा में 1100 कार्यक्रमों में योगासन करेंगे 55 हजार लोग
सातवां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस आज
कोरोना प्रोटोकॉल का पालन कराने का जिम्मा संभालेगा जिला प्रशासन
प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में व्यायामशालाओं के निर्माण पर कर रही काम
ओ.पी. पाल. रोहतक।
अब तो विज्ञान भी मान चुका है कि योग इम्युनिटी बढ़ाने का सबसे कारगर और सरल साधन है। इस बार पूरी दुनिया 21 जून को ऐसे मौके योग दिवस मना रही है जब कोरोना से लड़ने के लिए मजबूत इम्युनिटी की सख्त जरूरत है। यही कारण है कि इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के लिए खास तैयारी की गई है। मसलन प्रदेशभर में कोरोना प्रोटोकॉल के चलते 1100 से ज्यादा योग कार्यक्रम तो रखे गए है, लेकिन हर आयोजन में साधकों की संख्या केवल 50 ही होगी। सरकार, राज्य योग आयोग और समाजिक संगठन इस प्रयास में लगे हैं कि आम जन घर में ही रहकर योग के आसनों का अभ्यास करें। इसके लिए लगातार जागरुकता अभियान चलाए जा रहे हैं।
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में घोषित होने के बाद योग को वर्ष 2016 में प्रदेश सरकार ने बढ़ावा देने की दिशा में हरियाणा के ग्रामीण क्षेत्रों में एक हजार व्यायामशालाओं का निर्माण करने का निर्णय लिया था। वहीं एक हजार योग शिक्षकों की भर्ती करने का भी ऐलान हुआ। सरकार के अधिकारिक सूत्रों के अनुसार अभी तक करीब 300 योग एवं व्यायामशालाओं का निर्माण किया जा चुका है। ग्रामीण क्षेत्रों में खेल के बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने की दिशा में पहले चरण के 1000 पार्क-सह-व्यायमशालाओं की स्थापना पर काम जारी है। भविष्य में इनकी संख्या दोगुना करने पर भी विचार चल रहा है। जबकि इसके विपरीत प्रदेशभर के जिलों में हरिभूमि टीम की पड़ताल के बाद जो तथ्य सामने आए हैं उसमें किसी भी जिले में व्यायामशालाओं का लक्ष्य पूरा नहीं हो पाया और ग्रामीण क्षेत्रों में जहां निर्माण हुआ है तो वहां योग शिक्षक या किसी अन्य कर्मचारी की नियुक्ति तथा मूलभूत सुविधाओं के अभाव में व्यायामशालाएं खस्ता हालत में विरान अवस्था में हैं। पड़ताल के अनुसार जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों में जिन व्यायायामशालाओं का निर्माण हुआ है, वह या तो अधूरा है या फिर उनकी देखरेख और उनमें दी जाने वाली सुविधाओं के अभाव में उनकी भी हालत बद से बदतर होने के कगार पर है। हालांकि हरियाणा योग आयोग का गठन करके राज्य सरकार ने ग्रामीण स्तर पर योगशालाओं की स्थापना करने और योग प्रशिक्षकों की नियुक्ति करने की योजना को सिरे चढ़ाने के प्रयासों को तेज कर दिया है, ताकि योग को जमीनी स्तर पर लोगों को अपने जीवन शैली का हिस्सा बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।
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सरकार की ये भी है योजना----
प्रदेश में योगा और आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए सरकार की यह भी योजना है। इसके तहत जिला, ब्लॉक और तहसील स्तर पर योग प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिसमें प्रशिक्षित शारीरिक प्रशिक्षण प्रशिक्षक (पीटीआई) और शारीरिक शिक्षा में डिग्री धारक (डीपीई) योग प्रशिक्षण देंगे। प्रशिक्षण पहले चरण में 2,200 अध्यापकों को योग में प्रशिक्षित किया जाएगा। वहीं सरकार की प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र का नाम बदलकर ‘योग और आयुष केंद्र’ करने की योजना है, जिसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों के अलावा सभी जिला मुख्यालयों पर भी ‘योग और आयुष केंद्र’ स्थापित किए जाएंगे। इस योजना के तहत कुरुक्षेत्र के श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय स्तर का ध्यान योग केंद्र स्थापित किया जाएगा। योग परिषद को हरियाणा योग आयोग के रूप में स्थापित करके प्रदेश सरकार ने पहले ही विधेयक को मंजूरी दे दी है, ताकि अधिनियम के आधार पर योग को बढ़ावा दिया जा सके।
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स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा बना योग---
प्रदेश सरकार ने स्वस्थ्य के सबसे सरल साधन माने जाने वाले योग को बचपन से ही अपनी जीवन शैली में अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने की दिशा में योग को हरियाणा के सभी सरकारी स्कूलों में एक अप्रैल 2021 से शैक्षणिक सत्र में योग को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने का ऐलान किया था, लेकिन कोरोना महामारी के कहर के बीच शिक्षण संस्थाएं बंद होने के कारण इसकी शुरूआत नहीं हो सकी। हालांकि राज्य में नैतिक शिक्षा के अलावा छात्रों को शैक्षणिक सत्र 2016-17 से योग पढ़ाया जा रहा है।
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कोरोना ने समेटा योग दिवस---
प्रदेश में कोरोना संक्रमण के कारण सातवें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर आयोजित होने वाले योग कार्यक्रमों को सीमित कर दिया है। कोरोना प्रोटोकॉल के तहत प्रदेशभर में 1100 स्थानों पर योग कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं। यानि राज्य सरकार के निर्देशों के तहत हरेक जिले में 50-50 योगा कार्यक्रम हो रहे हैं, जिनमें कोरोना महामारी के दिशानिर्देशों के तहत एक कार्यक्रम में योग करने के लिए केवल 50-50 साधकों को ही योगासन करने के लिए अनुमति दी गई। इस प्रकार प्रदेश के 22 जिलों में 55 हजार साधक ही योगासन के लिए हिस्सेदारी कर सकेंगे। कोरोना प्रोटोकॉल के तहत योगा कार्यक्रम आयोजित करने की जिम्मेदारी जिला उपायुक्तों के कंधों पर है, तो कार्यक्रम में योग प्रशिक्षकों और कार्यक्रम स्थल पर अन्य सुविधाओं की व्यवस्था हरियाणा योग आयोग और आयुष विभाग कर रहा है।
---स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा बना योग---
प्रदेश सरकार ने स्वस्थ्य के सबसे सरल साधन माने जाने वाले योग को बचपन से ही अपनी जीवन शैली में अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने की दिशा में योग को हरियाणा के सभी सरकारी स्कूलों में एक अप्रैल 2021 से शैक्षणिक सत्र में योग को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने का ऐलान किया था, लेकिन कोरोना महामारी के कहर के बीच शिक्षण संस्थाएं बंद होने के कारण इसकी शुरूआत नहीं हो सकी। हालांकि राज्य में नैतिक शिक्षा के अलावा छात्रों को शैक्षणिक सत्र 2016-17 से योग पढ़ाया जा रहा है।
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वर्जन
महामारी में योग बेहतर उपाय-----
योग का अर्थ है टू ज्वाइंट यानी जुड़ना या लगाव। हम जो भी कार्य करें उसे पूरी एकाग्रता के साथ करें। इस सृष्टि में चारों तरफ योग ही दिखाई दे रहा है। स्वस्थ व्यक्ति योग को जीवन पद्धति, रोगी व्यक्ति चिकित्सा पद्धति और योग साधक योग को कैवल्य प्राप्ति का साधन मानते हैं। कोरोना महामारी के समय लोगों ने प्रणायाम करके अपनी जीवन शक्ति यानी प्रतिरक्षी संस्थान को मजबूत किया। जिससे कि वे कोविड जैसी महामारी में भी स्वयं स्वस्थ रख पाए। आसन व सूर्य नमस्कार से शरीर को मजबूत बनाया। षटकर्म करके अपने शरीर की शुद्धता यानी सफाई की। योगनिद्रा, श्वासन, मकरासन आदि से अपनी पूरे शरीर का सूक्ष्म निरीक्षण किया। ध्यान के द्वारा अपने आप को उस परमपिता परमात्मा के साथ जोड़ा और इस प्रकार लोग योग द्वारा इस महामारी में शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रुप से स्वस्थ रह सके और महामारी का शिकार होने से बच गए। हमें योग को अपनी दिनचर्या के अहम हिस्से के रुप में स्वीकार करना चाहिए जिससे कि हम शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक रूप से स्वस्थ रह सकें और किसी भी प्रकार के तनाव से मुक्त हो जाएं।
-संगीता दलाल, असिस्टेंट प्रोफेसर योगा साइंस, महारानी किशोरी जाट कन्या महाविद्यालय
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शारीरिक व मानसिक विकास का सर्वांगीण उपाय है योग---
योग केवल व्यायाम की कला नहीं है, बल्कि यही शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक उन्नति का सर्वांगीण उपाय है। योग में मन पर नियन्त्रण सबसे महत्वपूर्ण है। हमारे शरीर में रोगों का मुख्य कारण है मन का अनियन्त्रित होना। पैसे की अन्धी भागदौड़ और उससे उत्पन्न मानसिक तनाव, वर्तमान युग में असाध्य रोगों को जन्म देता है। आज सुख-सुविधाओं के उपभोग तथा श्रम के अभाव के कारण मानव बिमार पड़ रहा है। खाने-पीने में असावधानी के कारण मोटापे का जिन्न भी बढ़ता जा रहा है। योग हमें सम्पूर्ण स्वास्थ्य की ओर ले जाता है। मन और तन दोनों को स्वस्थ बनाने की कला है योग। यम, नियम के पालन के अतिरिक्त योगासान, प्राणायाम भी मन पर नियन्त्रण करना सिखाते हैं। योग का शरीर के सभी अंगों, सभी ग्रन्थियों और सभी इन्द्रियों पर प्रभाव पड़ता है। प्राणायाम द्वारा अपनी सांसों पर और प्राणशक्ति पर नियन्त्रण करना आ जाता है। जिससे हमारी आयु लम्बी होती है। एक निरोगी, निरामय जीवन, एक ऐसा जीवन जो आपके अपने हाथ में है, आपको किसी डॉक्टर के पास जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती, आप स्वयं अपने डॉक्टर बन सकते हैं। इसलिए योग को जीवन में अपनाओ ओर अपने जीवन को सफल बनाओ।
-स्वामी आदित्यवेश,
21June-2021
कन्या भ्रूण हत्या पर लगाम कसने की तैयारी में प्रशासन
गर्भधारण के शुरुआती दिन से ही की जाएगी ट्रैकिंग
हरिभूमि न्यूज.रोहतक।
प्रदेश सरकार के लिंगानुपात में सुधार की दिशा में फोकस करने की दिशा में जिले में प्रशासन ने भी कन्या भ्रूण हत्या जैसी सामाजिक कुरीती पर लगाम लगाने के लिए ट्रैकिंग कराने का निर्णय लिया है, जिसके तहत महिला के गर्भधारण के शुरुआती दिन से ही ट्रैक करने का कार्य किया जाएगा। वहीं जिले में एनीमिया उन्मूलन के लिए प्रत्येक गांव व शहरी केंद्रों की मैपिंग की जाएगी।
जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग के पोषण अभियान के तहत जिला विकास भवन में बैठक में जिला उपायुक्त कैप्टन मनोज कुमार ने कहा कि प्रदेश में लिंगानुपात में सुधार को लेकर सरकार का विशेष फोकस है और इसमें सुधार करना बेहद जरूरी है। उन्होंने निर्देश दिए कि पिछले लगभग एक वर्ष के दौरान के आंकड़े एकत्र जाएं। इस समयावधि में गर्भधारण के कितने मामले हैं और कितनी संख्या में बच्चों का जन्म हुआ है। इस बात की जांच की जाए कि इस दौरान कोई कन्या भ्रूण हत्या तो नहीं हुई है। वहीं उन्होंने महिला व बच्चों में एनीमिया उन्मूलन संबंधी दिशा-निर्देश भी जारी करते हुए कहा कि इस संबंध में मैपिंग करके आंकड़े प्रस्तुत किये जाएंगे। पूरे गर्भकाल के दौरान महिला में कितना खून था। अनिमिया में कितना उतार-चढ़ाव हुआ इसका आकलन किया जा सके। कोरोना महामारी के दौरान सर्वे की तर्ज पर अब महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा की जाएगी।
----एनिमिया उन्मूलन को होगी मैपिंग----
बैठक में उपायुक्त कहा कि एनीमिया उन्मूलन के संबन्ध में होने वाले इस सर्वे के कार्य में सीडीपीओ व सुपरवाइजर के अलावा स्वास्थ्य विभाग की एएनएम व आशा वर्कर भी शामिल होंगी। मैपिंग के इस कार्य के दौरान जिला के हर एक गांव के साथ-साथ शहरी केंद्रों पर भी टीमें पहुंचेगी। इस मैपिंग का उद्देश्य यही है कि एनीमिया का कितना फैलाव हुआ है। कोविड-19 प्रभाव कितना है, पोस्ट कोविड-19 स्थिति है, ऐसे सभी आंकड़े मैपिंग के माध्यम से तैयार किए जाएंगे। इसके साथ ही ये टीमें कोरोना महामारी के प्रति लोगों को जागरूक करने का कार्य भी करेगी।
---पोषण अभियान पर हो फोकस----
उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्र एक प्रकार से प्ले स्कूल है और आंगनवाड़ी वर्कर एक अध्यापिका मानकर अपनी ड्यूटी का निर्वहन करें। उन्होंने कहा कि महिलाओं व बच्चों के स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखा जाए। बैठक में राशन की आपूर्ति, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, पोषण अभियान, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ तथा महिला व बच्चों के शारीरिक व मानसिक विकास के बारे में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए। बैठक में अतिरिक्त उपायुक्त महेंद्र पाल, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी महेश कुमार, मुख्यमंत्री सुशासन सहयोगी शैलेट जोश, महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला कार्यक्रम अधिकारी बिमलेश कुमारी मौजूद थे।
19June-2021
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रमों की तैयारी में जुटा प्रशासन
जिले में 50 स्थानों पर 50-50 लोगों के साथ होगा योग
रोहतक शहर में छह स्थानों पर मनाया जाएगा योग दिवस
हरिभूमि न्यूज.रोहतक।
आगामी 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर जिले मे 50 स्थानों पर योगा कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। जिला प्रशासन कार्यक्रमों की तैयारियों को अंतिम रूप देने मे जुटा हुआ है। रोहतक शहर में योगा कार्यक्रम के लिए छह स्थानों को चिन्हित कर लिया गया है। जबकि जिले के तीनों उपमंडल क्षेत्र में 15-15 स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित होंगे।
प्रदेश सरकार के निर्देशानुसार अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर 21 जून को जिला में 50 अलग-अलग स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित होंगे, जिनमें कोरोना महामारी की वजह से प्रोटोकॉल के साथ महिलाओं समेत अधिकतम 50 लोगों को हिस्सा लेने की अनुमति होगी। जहां योगा के लिए कार्यक्रम आयोजित होंगे, उन्हें सेनिटाइज किया जा रहा है। सभी कार्यक्रम स्थल पर कोरोना प्रोटोकॉल के मद्देनजर 3 लेयर मास्क व सैनिटाइजर की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी, ताकि कोरोना संक्रमण के फैलाव की संभावना न रहे। मसलन कार्यक्रम में सभी लोगों को कोरोना महामारी दिशानिर्देशों की अनुपालना करना आवश्यक होगा और कम से कम छह फुट की सामाजिक दूरी बनाकर योगा करना होगा। यही नहीं सभी कार्यक्रम स्थलों पर सभी प्रकार की सुविधाओं जैसे पानी शौचालय योगा करने वालों के लिए रिफ्रेशमेंट सहित तमाम सुविधाएं प्रशासन द्वारा मुहैया करवाई जाएगीं। जिला उपायुक्त ने जिले में होने वाले इन कार्यक्रमों के समुचित प्रबंधों के लिए अधिकारियों व योग शिक्षकों की ड्यूटी निर्धारित कर दी है। कार्यक्रम के लिए 18 जून से रिहर्सल का आयोजन किया जाएगा।
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नोडल अधिकारी नियुक्त------
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर जिले में सभी योग कार्यक्रम अतिरिक्त उपायुक्त महेंद्र पाल की निगरानी में आयोजित किये जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों के लिए अलग-अलग नोडल अधिकारी नियुक्त किये गये हैं। योग कार्यक्रमों की तैयारियों के संबन्ध में गुरुवार को अतिरिक्त उपायुक्त ने उन सभी अधिकारियों के साथ बैठक की, जिन्हें कार्यक्रमों के आयोजन की जिम्मेदारी सौंपी गई हैं। जिले में अलग अलग स्थानों पर योग कार्यक्रम को कोरोना प्रोटोकॉल के अनुपालन की सुनिश्चिता करने पर बल दिया गया है। इस बैठक में नगराधीश ज्योति मित्तल, सीईओ जिला परिषद महेश कुमार, जिला राजस्व अधिकारी पूनम बब्बर, डीआईओ डॉ. जितेंद्र मलिक, जिला आयुर्वेदिक अधिकारी, सतवीर फोगाट सहित सभी संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
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अतिरिक्त मुख्य सचिव की उपायुक्तों से चर्चा--------
गृह एवं स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजीव अरोड़ा ने गुरुवार को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की तैयारियों को लेकर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिला के उपायुक्तों से चर्चा की। उन्होंने सभी जिलों में गहन रुचित के साथ इस कार्यक्रम को आयोजित करने पर बल देते हुए कहा कि जिले में सभी नागरिकों को इस दिन योगा करने के लिए प्रेरित किया जाए, क्योंकि स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से योग दिवस से अच्छा कार्यक्रम और कोई हो नहीं सकता। इसलिए अपने घरों में में रहकर प्रत्येक व्यक्ति को योग को जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए।
---यूट्यूब पर प्रसारित होगा कार्यक्रम ----
मुख्यमंत्री के एपीएस एवं सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा विभाग के महानिदेशक डॉ अमित कुमार अग्रवाल ने कहा कि चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री आवास पर कोरोना प्रोटोकॉल के मुताबिक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसका प्रसारण यूट्यूब के माध्यम से होगा। उधर योग आयोग के चेयरमैन जयदीप आर्य ने भी योगा दिवस को लेकर सभी जिला उपायुक्तों को दिशा निर्देश जारी किए।
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अनुभवी योग शिक्षक कराएंगे योगा---
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रमों में शामिल होने वाले लोगों को योग कराने के लिए जिले में चिन्हित सभी कार्यक्रम स्थलों पर पतंजलि से विशेष तौर पर बुलाए गए अनुभवी योग गुरु व आयुष विभाग के कर्मचारी कार्यक्रम स्थल पर उपस्थित लोगों को योगा का महत्व बताते हुए योगा सिखाएंगे।
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हर कार्यक्रम स्थल पर एलईडी स्क्रीन---
जिले में सभी योग कार्यक्रम स्थलों पर एलईडी स्क्रीन लगाई जाएगी। नोडल अधिकारी के रूप में इसकी जिम्मेदारी डीआईओ जितेन्द्र मलिक को सौँपी गई है। कोरोना प्रोटोकॉल के कारण जो लोग कार्यक्रम स्थल पर नहीं जा पाएंगे, वे कार्यक्रम से दूर बैठने के बावजूद भी स्क्रीन पर देखकर योगा कर सकेंगे।
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रोहतक में यहां होंगे कार्यक्रम----
जिला मुख्यालय रोहतक शहर 6 स्थानों राजीव गांधी स्टेडियम, मानसरोवर पार्क, ताऊ देवी लाल पार्क, सिटी पार्क, हुड्डा कंपलेक्स पार्क व ओल्ड आईटीआई ग्राउंड स्थित पार्क को योगा कार्यक्रम के लिए चिन्हित किया गया है। जबकि इसके इसके अलावा सिंहपुरा खुर्द व्यामशाला, सुंदरपुर व्यामशाला व पीटीसी सुनारिया में भी योगा दिवस कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
कलानौर खंड में प्रमुंख रूप से चिन्हित स्थानों में गुडान, व्यामशाला कलानौर, व्यामशाला कटेसरा, व्यामशाला खैरेड़ी, व्यामशाला माडौदी रांगडान, व्यामशाला पटवापुर, व्यामशाला रिटोली, व्यामशाला सांगाहेड़ा, व्यामशाला बालंद, व्यामशाला नगर पालिका कलानौर व हूडा पार्क कलानौर में योग दिवस के कार्यक्रम आयोजित किये जाएंगे।
सांपला खंड में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सांपला, अनाज मंडी सांपला, महिला महाविद्यालय सांपला, राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय गढ़ी सांपला, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय खेड़ी सांपला, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय नया बांस, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय भैंसरू कलां, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय भैंसरू खुर्द, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय खरावड़, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय इस्माईला 11 बी, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय इस्माईला 9 बी, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय गांधरा, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय समचाना व राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय चुलियाना में योग कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
महम उपमंडल क्षेत्र में आईटीआई मैदान महम, सुभाष पार्क महम, गिरोत्रा बैंकट हॉल महम, शुगर मिल महम, राजीव गांधी स्टेडियम महम, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय महम, सामुदायिक केंद्र मदीना गिंदरान, सर छोटू राम पार्क मोखरा, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय मदीना, कोरसान व्यामशाला खरखड़ा बाजयान, व्यामशाला निडाना, व्यामशाला फरमाना बादशाहपुर, व्यामशाला बलम्बा व राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय निंदाना शामिल है।
18June-2021
रेवाड़ी से समर्पित माल गलियारे पर दौड़ाई सैन्य ट्रेन
पश्चिमी समर्पित फ्रेट कॉरिडोर रेवाडी से फुलेरा तक हुआ पूरा
नई दिल्ली।
हरियाणा और राजस्थान को जोड़ने वाले न्यू रेवाड़ी-न्यू फुलेरा खंड के बीच 430 किमी पश्चिमी समर्पित फ्रेट कॉरिडोर का निर्माण पूरा हो चुका है, जिसके परीक्षण के लिए वाहनों और उपकरणों के साथ सैन्य ट्रेन की 65 किमी प्रति घंटे की गति से दौड़ाया गया।
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉर्पोरेशन के उप महाप्रबंधक राजेश चौपड़ा ने बुधवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि माल वाहक रेल गाड़ियों के लिए बनाए जा रहे पश्चिमी समर्पित फ्रेट कॉरिडोर के 430 किमी लंबे हिस्से को पूरा कर लिया गया है, जो हरियाणा के न्यू रेवाड़ी और राजस्थान के न्यू फुलेरा रेल खंड को जोड़ता है। इस माल गलियारे का ट्रायल करने के लिए इस कॉरिडोर पर सैन्य वाहनों और उपकरणों को लादकर सैन्य ट्रेन को 65 किमी प्रति घंटे की गति से चलाकर किया गया। इससे पहले गत सात जनवरी को 306 किलोमीटर रेवाड़ी-मदार खंड पर डबल डेकर ट्रेन को हरी झंडी देकर 07 जनवरी 2021 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्र को समर्पित किया गया। इसके बाद फुलेरा तक 124 किमी लंबे कॉरिडोर का निर्माण पूरा करने के बाद 430 किमी लंबे पश्चिमी समर्पित फ्रेट कॉरिडोर को चालू करने से पहले सैन्य ट्रेन को चलाकर इसका ट्रायल किया गया है। यह ट्रायल रन डीएफसी और भारतीय सेना की टीमों के निकट समन्वय में काम करने के कारण किया गया है। यह ट्रायल राष्ट्रीय संसाधनों के अनुकूलन और विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच सहज तालमेल हासिल करने के लिए ‘संपूर्ण राष्ट्र दृष्टिकोण’ का हिस्सा है। वहीं सशस्त्र बलों के सैन्य सामान और उसकी क्षमता को बढ़ाने में कारगर साबित होगा।
चोपड़ा के अनुसार रोल ऑन-रोल ऑफ (आरओ-आरओ) सेवा पर स्वामित्व वाले रोलिंग स्टॉक को औपचारिक रूप दिया जा रहा है और तौर-तरीके विकसित किए जा रहे हैं। ये परीक्षण सशस्त्र बलों की संचालनात्मक तैयारी को बढ़ाने के मार्ग की शुरुआत करने में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। यह पहल यह सुनिश्चित करने के लिए प्रक्रियाओं को स्थापित करेगी, कि योजना स्तर पर ही राष्ट्रीय बुनियादी ढांचे के विकास में सैन्य आवश्यकताओं को आपस में जोड़ा जाए। डीएफसी, भारतीय सेना और भारतीय रेलवे की बातचीत, डीएफसी को सशस्त्र बलों के मोबिलाइजेशन मैट्रिक्स में लाभ उठाने और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। कुछ स्थानों पर बुनियादी ढांचे का विकास करना और रक्षा के कदम को मान्य करने के लिए परीक्षण करना। रोल ऑन-रोल ऑफ (आरओ-आरओ) सेवा पर स्वामित्व वाले रोलिंग स्टॉक को औपचारिक रूप दिया जा रहा है और तौर-तरीके विकसित किए जा रहे हैं। ये परीक्षण सशस्त्र बलों की संचालनात्मक तैयारी को बढ़ाने के मार्ग की शुरुआत करने में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। यह पहल यह सुनिश्चित करने के लिए प्रक्रियाओं को स्थापित करेगी, कि योजना स्तर पर ही राष्ट्रीय बुनियादी ढांचे के विकास में सैन्य आवश्यकताओं को आपस में जोड़ा जाए।
अब तक कमीशन सेक्शन में कुल 4000 से अधिक ट्रेनें चलाई जा चुकी हैं। पूर्वी डीएफसी में इसकी 3000 से अधिक ट्रेनें हैं और डब्ल्यूडीएफसी में 850 से अधिक ट्रेनें हैं। टोटल जीटीकेएम ने 30 लाख टन का आंकड़ा पार कर लिया है। खंड की कुछ ट्रेनें ईडीएफसी में 99.38 किमी प्रति घंटे और डब्ल्यूडीएफसी में 89.50 किमी प्रति घंटे की औसत गति प्राप्त कर रही हैं। ये गति किसी भी सबसे तेज मेल एक्सप्रेस ट्रेनों की तुलना में हैं।
मंडे स्पेशल: कोरोना की तीसरी लहर से निपटने को कितने तैयार हैं हम!
63 हजार बच्चों की जिम्मेदारी कैसे संभालेगा एक विशेषज्ञ चिकित्सक
संक्रमित बच्चों के लिए सीएचसी व पीएचसी में नहीं पीकू व नीकू वार्ड की व्यवस्था
ओ.पी. पाल, रोहतक।
प्रदेश में तांडव मचाने वाली कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर धीमी जरुर पड़ी है, लेकिन नहीं हुई है। इसी बीच तीसरी लहर को लेकर तरह तरह की आशंका व्यक्त की जा रही है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि तीसरी लहर में सबसे अधिक प्रभावित बच्चें होंगे। क्योंकि हमारे पास उनके लिए वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। हालांकि कुछ विशेषज्ञ इससे इंकार कर रहे हैं। बावजूद इसके सरकार ने अपने स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं। प्रदेशभर में बाल रोग विशेषज्ञ चिकित्सकों व सुविधाओं को दुरस्त किया जा रहा है।
प्रदेश की तैयारियों हरिभूमि टीम ने पड़ताल की तो पता चला कि प्रदेश में 16 साल तक की उम्र के 58 लाख से ज्यादा बच्चें हैं। जबकि राज्य के सरकारी अस्पतालों में बच्चों के लिए केवल 450 बेडों की व्यवस्था है, जबकि सरकारी अस्पतालों में 92 बाल रोग विशेषज्ञ चिकित्सक है, जिसमें सर्वाधिक 13 डाक्टर रोहतक में है, बाकी जिलों में किसी भी विशेषज्ञ चकित्सक की संख्या दहाई तक नहीं है। मसलन यानी एक बाल रोग विशेषज्ञ पर करीब 63 हजार बच्चों की जिम्मेदारी है। वहीं प्रदेश में बच्चों के लिए महज छह विशेष एंबुलेंस उपलब्ध हैं,जिसमें तीन अंबाला, एक नारनौल और दो कैथल जिले में हैं। प्रदेश में पीएचसी-सीएचसी के स्तर पर बच्चों को भर्ती करने या विशेषज्ञ चिकिकत्सक के भी इंतजाम नहीं हैं। दिलचस्प बात है कि खुद प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के अंबाला जिले में बच्चों के लिए 25 बेड और तीन सरकारी बाल रोग विशेषज्ञों की व्यवस्था है। प्रदेश में बच्चों के निजी अस्पतालों के बारे में पड़ताल की गई तो पता चला कि करीब 150 बाल रोग विशेषज्ञ डाक्टर मौजूद हैं। प्रदेश में बच्चों के लिए ऑक्सीजन सपोर्ट और मेडिकल उपकरणों से लैस एंबुलेंस की कमी भी सामने आई है। प्रदेश में 14 जिले ऐसे हैं जहां बच्चों के लिए एंबुलेंस की सुविधा नहीं है।
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हजारों बच्चें हो चुके संक्रमित---
कोरोना की दूसरी लहर ने बच्चों, किशोरों, महिलाओं के साथ हर आयुवर्ग को अपना शिकार बनाया है। इसमें बच्चों के लिए अलग वार्ड न होने की वजह से करीब 40 हजार बच्चों में संक्रमण पाया गया, जिनमें से 7,068 बच्चे 5 साल से कम आयु के थे, जबकि पांच से 14 साल तक के संक्रमित बच्चों की संख्या 33,051 थी। इनमें से 26 बच्चों को मौत का शिकार बनना पड़ा। इसलिए तीसरी लहर की आशंका को हलके में नहीं लेना चाहिए। दरअसल दूसरी लहर प्रदेश के लोगों के लिए कितनी खतरनाक साबित हुई, खासकर अप्रैल और फिर मई माह में संक्रमित और उसके कारण हुई मौतों के आंकड़े गवाह हैं। इसी दूसरी लहर से सबक लेते हुए प्रदेश सरकार ने तीसरी लहर से निपटने की दिशा में पहले से ही रोडमैप बनाकर तैयारियां शुरू करनी पड़ रही हैं।
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सीएचसी-पीएचसी में नहीं नीकू या पीकू वार्ड---
कोरोना की तीसरी लहर को देखते हुए प्रदेश सरकार ने तैयारियां तो शुरू कर दी है, लेकिन प्रदेश के किसी भी सीएचसी व पीएचसी में नीकू व पीकू वार्ड नहीं है। यानि एक से 18 साल तक के बच्चों के लिए पीकू वार्ड यानि इंटेंसिव केयर यूनिट में आईसीयू बेड की व्यवस्था की जाती है, जबकि एक साल तक के नवजात शिशु के लिए नीकू वार्ड यानि नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट की व्यवस्था होती है। इन दोनों वार्डो में आक्सीजन की व्यवस्था की जाती है।
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सीरो सर्वे में शामिल होंगे बच्चे---
कोरोना की संभावित तीसरी लहर की तैयारियों में जुटी प्रदेश सरकार 15 जून से तीसरे चरण का सीरो सर्वे कराएगी। पहले दो सर्वे में पुरुष व महिलाओं को शामिल किया गया था, लेकिन इस बार बच्चों को भी शामिल करने का निर्णय लिया है। इसमें यह पता लगाया जाएगा कि कितने लोगों में टीकाकरण का असर हुआ और एंटी बाडी बन चुकी है। इसी आधार पर बच्चों में एंटीबाडी का आकलन करने के लिए छह साल और उससे अधिक आयु के बच्चों को भी इस अध्ययन में शामिल किया गया है।
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सरकार की है क्या तैयारी---
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने मई के अंत में ही कोराना महामारी की तीसरी लहर की आशंका के मद्देनजर प्रदेश में सीएचसी व पीएचसी स्तर पर बच्चों के वार्ड एवं अन्य स्वास्थ्य सुविधाएं बढाने के लिए सभी जिला उपायुक्तों को निर्देश जारी कर दिये थे। तीसरी लहर की आशंका के प्रति सचेत करते हुए मुख्यमंत्री ने इस तैयारी में सीएचसी पर एक एम्बुलेंस 24 घण्टे तैनात रखी रखने, गम्भीर मरीज को तत्काल जिला अस्पताल में भेजने, ज्यादा से ज्यादा लाईफ स्पोर्ट सिस्टम के साथ एम्बुलेंस को लैस करने जैसी व्यवस्था करने के भी आदेश दिये हैं।
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बच्चों की वैक्सीन का ट्रायल---
कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों के शिकार होने की आशंका को देखते हुए भारत में दो कोरोना वैक्सीन का ट्रायल शुरू हो गया है। हालांकि एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया ने भारतीय या ग्लोबल स्टडी का हवाला देते हुए कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों पर कहर की आशंकाओं को खारिज किया है। इन अध्ययनों में बच्चों पर ज्यादा असर हाने का कोई जिक्र नहीं है। यह भी नहीं है कि वायरस की दूसरी लहर में भी बच्चों में संक्रमण के मामूली लक्षण पाए गये।
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बचाव करना संभव---
विशेषज्ञों के अध्ययन में दुनियाभर के अनुभवों के आधार पर अनुमान लगाया गया है कि कोरोना वायरस की तीसरी लहर का असर दूसरी लहर से काफी अलग होगा। यदि बेहतर तरीके से तैयारी होती है तो लोगों की जान बचाई जा सकती है। वैज्ञानिकों का मत है कि कोरोना वायरस की तीसरी लहर को तो नहीं जा सकता, लेकिन वैज्ञानिक स्तर पर इससे बचने के लिए तैयार रहना चाहिए। वहीं बाल रोग विशेषज्ञ होने के साथ नीति आयोग के सदस्य(स्वास्थ्य) वीके पॉल का मत है कि बच्चे इस वायरस से बच नहीं सकते हैं, उन्हें भी संक्रमण हो सकता है और वो भी दूसरों को संक्रमित कर सकते हैं, हालांकि कुछ तथ्य एकदम साफ नहीं हैं कि बच्चों में संक्रमण तुलनात्मक रूप से कम होगा।
14June-2021
साक्षात्कार: समाज को जोड़ने में साहित्य की भूमिका अहम: डा. शील कौशिक
सामाजिक परिवेश पर कहानियों, लघुकथाओं तथा कविताओं से लेखन
व्यक्तिगत परिचय
नाम: डॉ. शील कौशिक
जन्म: 19 नवम्बर 1957
जन्म स्थान: ओल्ड फरीदाबाद (हरियाणा)
शिक्षा: एम.एससी, बी.एड, एम.एच.एम (होम्यो),एलएलबी, विद्यासागर (मानद उपाधि)
सम्प्रति: मलेरिया अधिकारी, स्वास्थ्य विभाग, हरियाणा(सेवानिवृत्त), अब स्वतंत्र लेखन
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साहित्य के क्षेत्र में सैकड़ो पुरस्कार व सम्मान हासिल कर चुकी महिला साहित्यकार डा. शील कौशिक को हरियाणा साहित्य अकादमी ने वर्ष 2018 के लिए पंडित माधव प्रसाद मिश्र पुरस्कार के लिए चयनित किया है। उनका मानना है कि ऐसे बड़े पुरस्कार साहित्य के जरिए समाज सेवा के लिए नई ऊर्जा देते हैं और इस क्षेत्र के लिए जिम्मेदारी बढ़ाते हैं। साहित्य,भारतीय संस्कृति में समाज सेवा का एक महत्वपूर्ण माध्यम है, जिसके बिना जीवन की राह आसान नहीं होती। इसी प्रगतिवादी व दूरदर्शी सोच के साथ पठन-पाठन में रूचि ने उनका साहित्यकार तक मार्ग प्रशस्त किया। साहित्य के क्षेत्र तक के सफर को उन्होंने ग्रामीण परिवेश की रूढ़िवादिता के बावजूद कैसे मंजिल दी। बचपन से साहित्यकार तक के सफर में अपने अनुभवों और समाज से जुड़े ऐसे पहलुओं पर साहित्यकार डॉ. शील कौशिक ने हरिभूमि संवाददाता के साथ हुई बातचीत के दौरान साझा किये।
सामाजिक परिवेश पर आधारित कहानियों, लघुकथाओं तथा कविताओं से लेखन की शुरूआत करने वाली विद्यासागर की मानद उपाधि प्राप्त डा. शील कौशिक को जो ख्याति मिली है, उसकी कल्पना किसी के लिए करना इसलिए मुमकिन नहीं है, वह भी विज्ञान व अंग्रेजी में उच्च शिक्षा लेने के बाद स्वास्थ्य विभाग में एक अधिकारी के लिये। उन्होंने समाज को दिशा देने के मकसद से हर सामाजिक पहलुओं को उकेरने का प्रयास किया है। यहीं नहीं, बल्कि साहित्य को समाज सेवा का माध्यम मानते हुए अपनी रचनाओं, कविताओं और कहानियों के संग्रह में उन्होंने बच्चों से लेकर बुजुर्गो तक को यह समझाने का भी प्रयास किया है कि साहित्य के बिना जीवन अधूरा है।
डा. शील कौशिक मानती हैं कि आज के इस आधुनिक युग के लगातार होते विस्तार के साथ सामाजिक ताने बाने जिस प्रकार बिखरे हैं। ऐसी सभी परिस्थितियों से उत्पन्न संवेग को उन्होंने अपने लेखन की प्रक्रिया का हिस्सा बनाया। मौजूदा विज्ञान और तकनीकी युग में इस भौतिकवादी प्रवृत्ति के कारण भारतीय संस्कृति एवं समाज में मानवीय मूल्यों का तेजी के साथ ह्रास हुआ है। सामाजिक तानेबाने, रीति-रिवाज, रिश्ते, भाषाशैली, कार्यशैली, परिधान के साथ प्रकृति में तेजी से बदलाव आये हैं। भारतीय संस्कृति एवं समाज को दिशा देने के लिए आज युवा पीढ़ी की अहम भूमिका हो सकती है, लेकिन उन्हें साहित्य के प्रति प्रोत्साहन करने की जरुरत है।
साहित्य के क्षेत्र में महिला साहित्यकार डा. शील कौशिक कहती हैं कि उन्होंने एमएससी, बीएड, एलएलबी तथा होम्योपैथी में सर्टिफिकेट कोर्स किया, लेकिन उनके लिए शिक्षा की राह हमेशा मुश्किल रही। ग्रामीण परिवेश में उन दिनों लड़कियों के पढ़ाई को अहमियत नहीं थी। मां को उसका पढ़ना लिखना कतई नहीं भाया, लेकिन पिता का प्रोत्साहन मिलता रहा। वह घर में पत्र पत्रिकाएं लाते थे जिन्हें पढ़ने की रूचि उन्हें साहित्य के मार्ग पर ले गई। घर में मां के चाबुक के सामने 11वीं कक्षा में स्कूल टॉप करने के बावजूद कालेज में दाखिला दिलाने से मना कर दिया गया। जबकि उसकी जिद ने पिता ने आईसी गवर्मेंट महिला कॉलेज, रोहतक में प्री-मेडिकल में दाखिला दिला दिया। इसके बाद फरीदाबाद गवर्मेंट नेहरू कॉलेज में बीएससी पूरी हुई तो फिर मिला घर बैठने के फरमान। लेकिन पिता के कहने पर इंटरव्यू की हां हुई और वह चुन भी ली गई। मसलन उच्च शिक्षा के लिए उसके सामने न जाने कितनी अड़चने आई। किसी तरह एमएससी, बीएड, एमएचएम (होम्यो), एलएलबी तक शिक्षा ग्रहण कर गई। आश्चर्य की बात ये थी, जब वह स्वास्थ्य विभाग, हरियाणा में जीव वैज्ञानिक (राजपत्रित अधिकारी) के रूप में नियुक्त हुई, तो उस समय घर में सबसे ज्यादा खुश और गर्व करने वाली उनकी वही मां थी, जो उसकी पढ़ाई के नाम पर गुस्साई रहती थी।
प्रमुख पुस्तकें
डॉ. शील कौशिक की 31 पुस्तकें प्रकाशित हुई है, जिनमें 21 मौलिक कृतियां, 6 संपादित, 3 अनुवाद और एक लेखिका पर पुस्तक शामिल हैं। प्रमुख रूप से कविता संग्रह में नए अहसास के साथ, कचरे के ढेर पर जिंदगी, कविता से पूछो, कब चुप होती है चिड़िया, खिड़की से झांकते ही, मासूम गंगा के सवाल। एक सच यह भी और महक रिश्तों की नामक कहानी संग्रह। उसी पगडंडी पर पांव, कभी भी–कुछ भी और मेरी चुनिन्दा लघुकथाएं प्रमुख है। उन्होंने बचपन के आईने से, धूप का जादू, करें तो क्या करें, माशी की जीत जैसे चार चार हिन्दी बालकहानी संग्रह, बिल्लो रानी-बाल कविता संग्रह, रिमोट वाली गुड़िया-पंजाबी बालकथा के साथ तीन आलोचक ग्रंथ भी लिखे हैं।
पुरस्कार व सम्मान
हरियाणा साहित्य अकादमी ने हाल ही में डॉ. शील कौशिक को ढ़ाई लाख रुपये के पंडित माधव प्रसाद मिश्र पुरस्कार-2018 से सम्मानित करने का फैसला किया। इससे पहले अकादमी ने डॉ. कौशिक को इससे पहले अकादमी वर्ष 2014 के श्रेष्ठ महिला रचनाकार सम्मान और उनकी लघुकथा पुस्तक ‘कभी भी-कुछ भी’ के लिए वर्ष 2012 के श्रेष्ठ कृति पुरस्कार से सम्मानित कर चुकी है। विश्व हिंदी लेखिका मंच का महादेवी वर्मा शक्ति सम्मान,राष्ट्रीय प्रतिभा सम्मान, राष्ट्रीय गौरव सम्मान, श्रीमती मोगरे स्मृति पुरस्कार, सृजन साहित्य सम्मान, समीक्षा सम्मान, महिला सशक्तिकरण सम्मान के साथ हरियाणा समेत करीब एक दर्जन राज्यों से सैकड़ो सम्मान और पुरस्कार हासिल करने वाली डा. कौशिक को विभिन्न संस्थाओं द्वारा मंचों से कई ऐसे पुरस्कार हासिल कर चुकी है, जिसकी वह साहित्य के क्षेत्र में सेवा के लिए हकदार रही हैं।
14June-2021
कोरोना में अनाथ बच्चों का पुनर्वास कराएगा हालसा
जिले में तैयार की ‘संघर्ष से उत्कर्ष’ परियोजना
हरिभूमि न्यूज.रोहतक।
कोरोना काल में अपने माता पिता को खोने वाले अनाथ बच्चों की मदद के लिए राज्य सरकार के बाद हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (हालसा) भी उनके पुनर्वास कराने के लिए आगे आया है। इसके लिए ‘संघर्ष से उत्कर्ष’ परियोजना को तैयार किया गया है।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के चेयरमैन एएस नारंग ने गुरुवार को यह जानकारी देते हुए कहा कि हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने उन बच्चों की मदद करने का निर्णय लिया है, जिन्होंने कोरोना महामारी के दौरान अपने माता-पिता को खो दिया है। उन्होंने कहा कि हालसा ने इस उद्देश्य से ही संघर्ष से उत्कर्ष नाम से परियोजना तैयार की है। इस परियोजना के तहत ऐसे सभी बच्चों को सुरक्षा व पुनर्वास की सुविधा प्रदान की जाएगी। इसके लिए हालसा गैर सरकारी संगठनों और सार्वजनिक एजेंसियों की भागीदारी से ऐसे बच्चों को भोजन, आश्रय, कपड़े आदि की बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध करवाएगा। एस नारंग ने कहा कि इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य ऐसे बच्चों की पीड़ा को कम करना है। उन्होंने कहा कि पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश एवं हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष राजन गुप्ता ने इस परियोजना को प्रभावी रूप से क्रियान्वित करने के निर्देश दिए हैं ताकि ऐसे बच्चों की बेहतरी के लिए हर संभव प्रयास किए जा सके।
---------जागरुकता अभियान----------
एएस नारंग ने कहा कि हालसा ने कोरोना होम वॉरियर्स एक जागरूकता अभियान की भी शुरुआत की है ताकि महामारी की रोकथाम के लिए आमजन में अधिक से अधिक जागरूकता पैदा की जा सके। उन्होंने कहा कि जागरूकता के इस अभियान में बच्चों व सोशल मीडिया का प्रभावी प्रयोग किया जाएगा। एएस नारंग ने कहा कि किसी भी विषय में जागरूकता लाने के लिए बच्चों की अहम भूमिका हो सकती है। बच्चों द्वारा उठाए गए मुद्दों का अत्यधिक प्रभाव रहता है। उन्होंने कहा कि इस उद्देश्य से बच्चों को एनीमेटेड फिल्में, पोस्टर व बैनर आदि जागरूकता सामग्री प्रदान की जाएगी। इस जागरूकता अभियान में भाग लेने वाले बच्चों को हालसा द्वारा प्रमाण पत्र भी दिया जाएगा।
11june-2021
मंडे स्पेशल: कोरोना ने दिए मासूमों को गहरे जख्म, 1483 के सिर से उठ गया मां का आंचल या पिता का साया
बेसहारा हुए बच्चों के लालन पोषण को सरकार आई आगे
हरियाणा में बाल सरंक्षण के लिए शुरू की गई बाल सेवा योजना
ओ.पी.पाल.रोहतक।
कोरोना महामारी ने हर किसी को जख्म दिए हैं। किसी की नौकरी चली गई तो किसी का व्यापार ठप हो गया। किसी की दुकान बंद हो गई तो किसी की फैक्ट्री पर ताला लग गया। कोरोना के दानव ने किसी के भाई को निगल लिया तो किसी की बहन काल का ग्रस बन गई, लेकिन सबसे ज्यादा दर्द उन मासूमों को मिला है, जिनके माता-पिता की वायरस संक्रमण से मौत हो गई। प्रदेश में सैकड़ों ऐसे मासूम हैं जिनके सिर से मां और बाप दोनों का साया उठ गया है तो वहीं एक हजार से ज्यादा ऐसे बच्चे भी हैं, जिन्होंने इस महामारी में अपने माता-पिता में से किसी एक को खोया है। अभी तक इन मासूमों को रिश्तेदार, सामाजिक संस्थाएं और आस पडोस वाले ही संभाल रहे थे। अब इनकी जिम्मेदारी के लिए फिक्रमंद हुई केंद्र और राज्य सरकारों ने बकायदा योजनाएं बनाई हैं।
हरियाणा सरकार ने प्रदेश में कोरोना के कारण अनाथ हुए बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण के अलावा उनके पालन पोषण, शिक्षा और लड़कियों की शादियों की जिम्मेदारी का खर्च उठाने लिए मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना शुरू की है। जबक केंद्र सरकार भी पीएम केयर फंड से भी प्रदेश के ऐसे बच्चों को 23 साल की उम्र होने पर दस लाख रुपये की मदद देगी।
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प्रदेश अनाथ बच्चों की स्थिति------
प्रदेश में कोरोना के दौरान अपने माता या फिर पिता को खोने वाले बच्चों की संख्या 1,545 पहुंच चुकी है, जिनमें 62 बच्चे ऐसे हैं, जिनके सिर से मां का आंचल और बाप का साया दोनों ही उठ चुका है। जबकि 1,483 बच्चों ने अपने मां या पिता में से किसी एक को खोया है। हालांकि हरियाणा महिला एवं बाल विकास विभाग की तरफ से ऐसे बच्चों का आंकड़ा लगातार जुटाया जा रहा है, ताकि उसके आधार पर बाल सेवा योजना को शुरू किया जा सके।
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जिनके सिर से उठा मां-बाप का साया------
प्रदेश में पांच दर्जन से ज्यादा ऐसे बच्चें हैं, जिन्हें कोरोना संक्रमण ने अनाथ की जिंदगी जीने के लिये मजबूर कर दिया यानि ऐसे बच्चों ने अपने माता-पिता दोनों खो दिये हैं। इनमें जिला सोनीपत में 6, सिरसा में पांच, रेवाड़ी में चार, महेन्द्रगढ़ और झज्जर में तीन-तीन और कुरुक्षेत्र में सात बच्चों की पहचान की गई है।
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किसी ने मां तो किसी ने पिता को खोया--------
प्रदेश में ऐसे बच्चों की संख्या ज्यादा है जिनकी माता की ममता और पिता के साय को कोरोना संक्रमण ने छीना है। इसमें जिला सोनीपत में 235, जींद में 130, रेवाडी में 120, झज्जर में 114, महेन्द्रगढ़ में 106, भिवानी में 104, सिरसा में 69 तथा करना में 68 बच्चों को कोरोना के कारण माता या पिता से दूर कर दिया है।
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सरकार करेगी सुरक्षा और संरक्षण-------
राज्य की मनोहर लाल सरकार ने अनाथ हुए बच्चों के लिए बाल सेवा योजना का ऐलान किया है। इस योजना के तहत इन बच्चों को सरकार हर महीने 2500 रुपये की आर्थिक मदद 18 साल की उम्र तक देगी। वहीं सरकार हर साल 12 हजार रुपये भी इन बच्चों को अन्य खर्चों के लिए देगी। वहीं जिन बच्चों के देखभाल करने वाला परिवार का कोई सदस्य नहीं है उनकी देखभाल बाल देखभाल कोई संस्था कर रही है तो ऐसे संस्थान को 1500 रुपए प्रति बच्चा प्रति महीना 18 वर्ष तक सहायता भी सरकार द्वारा प्रदान की जाएगी। यह राशि अवधि जमा के रूप में बैंक खाते में डाल दी जाएगी और 21 वर्ष की आयु होने पर बच्चे को मैच्योरिटी राशि दे दी जाएगी। जबकि अन्य पूरा खर्च बाल देखभाल संस्थान द्वारा वहन किया जाएगा।
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लड़कियों की तक का जिम्मा-----
राज्य सरकार की इस योजना के तहत किशोर अवस्था में बेसहारा हुई अनाथ बच्चियों को कस्तूरबा गांधी विद्यालयों में मुफ्त आवासीय शिक्षा देने के साथ ही ऐसी बच्चियों की शादी के लिए अभी से उनके बैंक खाते में 51 हजार रुपये जमा कराने का फैसला किया है, जो विवाह के समय ब्याज समेत उन्हें दी जाएगी। सरकार कक्षा 8वीं से 12वीं के बीच या व्यावसायिक पाठ्यक्रम में किसी भी कक्षा में पढ़ने वाले बच्चों को उनकी शिक्षा में सहायता के लिए टैब भी मुहैया करायेगी।
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बाल गृहों में पुनर्वास--------
प्रदेश सरकार की घोषणा के मुताबिक इसके अलावा राज्य सरकार के बाल गृहों में पालन पोषण होने वाले ऐसे बच्चों का पूरा खर्च खर्च सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। ऐसे अनाथ बच्चों का बैंक खाता खुलवा कर इसमें 1500 रुपये प्रति महीने 18 साल की उम्र तक जाम कराए जाएंगे।
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गोद लेने का भी होगा विकल्प-------
कोरोना के कारण अनाथ हुए बच्चों को गोद लेने की भी एक कानूनी प्रक्रिया है। लेकिन बाल कल्याण समिति के संज्ञान में लाये बिना किसी बच्चे को गोद लेना गैर कानूनी व दंडनीय अपराध भी है। इसलिए बच्चों को कानूनी रूप से गोद लेने के लिए सेंट्रल अडाप्शन रिसोर्स अथारिटी के वेबसाइट www.cara.nic.in पर संपर्क करने के बाद इस प्रक्रिया को पूरा किया जा सकता है। वहीं यदि परिवार के अन्य सदस्य या कोई रिश्तेदार अभिभावक के रूप में ऐसे अनाथ बच्चों की देख रेख या पालन पोषण करना चाहता है, तो करने यदि परिवार के अन्य सदस्य या कोई रिश्तेदार करना चाहता है तो उसके लिए उन्हें बाल संरक्षण व बाल कल्याण समिति के समक्ष लिखित में गारंटी पत्र देना होगा। हालांकि बाल गृह में किसी भी अनाथ बच्चे को आवासित करवाना अंतिम विकल्प होना चाहिए।
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सामाजिक पहलुओं पर सर्वे----------
अनाथ बच्चों की पहचान करने के लिए बाल समितियों की निगरानी में हो रहे सर्वे में उनके बारे में सामाजिक जांच रिपोर्ट भी तैयार करने के निर्देश है, जिनमें ग्राम सचिवों से जानकारी हासिल कर यह देखा जाएगा कि बेसहारा हुए किन बच्चों के नाम जमीन है या नहीं, इसमें क्षेत्र के पटवारियों ने अनापत्ति पत्र लिया जाएगा। इस सामाजिक जांच रिपोर्ट के लिए कराय जा रहे सर्वे में सोशल वर्कर, आउट रीच वर्कर, गैर-संस्थागत केयर और एलपीजओ को लगाया जा रहा है।
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हर पहलुओं पर नजरें------
कोरोना काल में अनाथ बच्चों को तस्करी जैसे खतरों से बचाने पर भी फोकस किया जा रहा है। मसलन ऐसे अनाथ हुए बच्चों को लोग अवैध तरीके से गोद लेकर कई तरह के खतरों में डाल सकते हैं। यानि ऐसे बच्चों के लालन पोषण के नाम पर परिवार के अन्य लोग या रिश्तेदार उन्हें बाल श्रम का शिकार बना सकते हैं या फिर उनका मानसिक और शारीरिक तौर पर प्रताड़ित करने के अलावा यौन शोषण करने जैसे पहलुओं पर भी सरकार की नजर होगी।
07June-2021
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