सोमवार, 26 जुलाई 2021

मंडे स्पेशल: कोरोना की तीसरी लहर से निपटने को कितने तैयार हैं हम!

63 हजार बच्चों की जिम्मेदारी कैसे संभालेगा एक विशेषज्ञ चिकित्सक संक्रमित बच्चों के लिए सीएचसी व पीएचसी में नहीं पीकू व नीकू वार्ड की व्यवस्था ओ.पी. पाल, रोहतक। प्रदेश में तांडव मचाने वाली कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर धीमी जरुर पड़ी है, लेकिन नहीं हुई है। इसी बीच तीसरी लहर को लेकर तरह तरह की आशंका व्यक्त की जा रही है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि तीसरी लहर में सबसे अधिक प्रभावित बच्चें होंगे। क्योंकि हमारे पास उनके लिए वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। हालांकि कुछ विशेषज्ञ इससे इंकार कर रहे हैं। बावजूद इसके सरकार ने अपने स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं। प्रदेशभर में बाल रोग विशेषज्ञ चिकित्सकों व सुविधाओं को दुरस्त किया जा रहा है। प्रदेश की तैयारियों हरिभूमि टीम ने पड़ताल की तो पता चला कि प्रदेश में 16 साल तक की उम्र के 58 लाख से ज्यादा बच्चें हैं। जबकि राज्य के सरकारी अस्पतालों में बच्चों के लिए केवल 450 बेडों की व्यवस्था है, जबकि सरकारी अस्पतालों में 92 बाल रोग विशेषज्ञ चिकित्सक है, जिसमें सर्वाधिक 13 डाक्टर रोहतक में है, बाकी जिलों में किसी भी विशेषज्ञ चकित्सक की संख्या दहाई तक नहीं है। मसलन यानी एक बाल रोग विशेषज्ञ पर करीब 63 हजार बच्चों की जिम्मेदारी है। वहीं प्रदेश में बच्चों के लिए महज छह विशेष एंबुलेंस उपलब्ध हैं,जिसमें तीन अंबाला, एक नारनौल और दो कैथल जिले में हैं। प्रदेश में पीएचसी-सीएचसी के स्तर पर बच्चों को भर्ती करने या विशेषज्ञ चिकिकत्सक के भी इंतजाम नहीं हैं। दिलचस्प बात है कि खुद प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के अंबाला जिले में बच्चों के लिए 25 बेड और तीन सरकारी बाल रोग विशेषज्ञों की व्यवस्था है। प्रदेश में बच्चों के निजी अस्पतालों के बारे में पड़ताल की गई तो पता चला कि करीब 150 बाल रोग विशेषज्ञ डाक्टर मौजूद हैं। प्रदेश में बच्चों के लिए ऑक्सीजन सपोर्ट और मेडिकल उपकरणों से लैस एंबुलेंस की कमी भी सामने आई है। प्रदेश में 14 जिले ऐसे हैं जहां बच्चों के लिए एंबुलेंस की सुविधा नहीं है। ----------------------- हजारों बच्चें हो चुके संक्रमित--- कोरोना की दूसरी लहर ने बच्चों, किशोरों, महिलाओं के साथ हर आयुवर्ग को अपना शिकार बनाया है। इसमें बच्चों के लिए अलग वार्ड न होने की वजह से करीब 40 हजार बच्चों में संक्रमण पाया गया, जिनमें से 7,068 बच्चे 5 साल से कम आयु के थे, जबकि पांच से 14 साल तक के संक्रमित बच्चों की संख्या 33,051 थी। इनमें से 26 बच्चों को मौत का शिकार बनना पड़ा। इसलिए तीसरी लहर की आशंका को हलके में नहीं लेना चाहिए। दरअसल दूसरी लहर प्रदेश के लोगों के लिए कितनी खतरनाक साबित हुई, खासकर अप्रैल और फिर मई माह में संक्रमित और उसके कारण हुई मौतों के आंकड़े गवाह हैं। इसी दूसरी लहर से सबक लेते हुए प्रदेश सरकार ने तीसरी लहर से निपटने की दिशा में पहले से ही रोडमैप बनाकर तैयारियां शुरू करनी पड़ रही हैं। ------------------------------------- सीएचसी-पीएचसी में नहीं नीकू या पीकू वार्ड--- कोरोना की तीसरी लहर को देखते हुए प्रदेश सरकार ने तैयारियां तो शुरू कर दी है, लेकिन प्रदेश के किसी भी सीएचसी व पीएचसी में नीकू व पीकू वार्ड नहीं है। यानि एक से 18 साल तक के बच्चों के लिए पीकू वार्ड यानि इंटेंसिव केयर यूनिट में आईसीयू बेड की व्यवस्था की जाती है, जबकि एक साल तक के नवजात शिशु के लिए नीकू वार्ड यानि नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट की व्यवस्था होती है। इन दोनों वार्डो में आक्सीजन की व्यवस्था की जाती है। ---------------------------- सीरो सर्वे में शामिल होंगे बच्चे--- कोरोना की संभावित तीसरी लहर की तैयारियों में जुटी प्रदेश सरकार 15 जून से तीसरे चरण का सीरो सर्वे कराएगी। पहले दो सर्वे में पुरुष व महिलाओं को शामिल किया गया था, लेकिन इस बार बच्चों को भी शामिल करने का निर्णय लिया है। इसमें यह पता लगाया जाएगा कि कितने लोगों में टीकाकरण का असर हुआ और एंटी बाडी बन चुकी है। इसी आधार पर बच्चों में एंटीबाडी का आकलन करने के लिए छह साल और उससे अधिक आयु के बच्चों को भी इस अध्ययन में शामिल किया गया है। --------------------- सरकार की है क्या तैयारी--- हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने मई के अंत में ही कोराना महामारी की तीसरी लहर की आशंका के मद्देनजर प्रदेश में सीएचसी व पीएचसी स्तर पर बच्चों के वार्ड एवं अन्य स्वास्थ्य सुविधाएं बढाने के लिए सभी जिला उपायुक्तों को निर्देश जारी कर दिये थे। तीसरी लहर की आशंका के प्रति सचेत करते हुए मुख्यमंत्री ने इस तैयारी में सीएचसी पर एक एम्बुलेंस 24 घण्टे तैनात रखी रखने, गम्भीर मरीज को तत्काल जिला अस्पताल में भेजने, ज्यादा से ज्यादा लाईफ स्पोर्ट सिस्टम के साथ एम्बुलेंस को लैस करने जैसी व्यवस्था करने के भी आदेश दिये हैं। ---------------------- बच्चों की वैक्सीन का ट्रायल--- कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों के शिकार होने की आशंका को देखते हुए भारत में दो कोरोना वैक्सीन का ट्रायल शुरू हो गया है। हालांकि एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया ने भारतीय या ग्लोबल स्टडी का हवाला देते हुए कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों पर कहर की आशंकाओं को खारिज किया है। इन अध्ययनों में बच्चों पर ज्यादा असर हाने का कोई जिक्र नहीं है। यह भी नहीं है कि वायरस की दूसरी लहर में भी बच्चों में संक्रमण के मामूली लक्षण पाए गये। ------------------ बचाव करना संभव--- विशेषज्ञों के अध्ययन में दुनियाभर के अनुभवों के आधार पर अनुमान लगाया गया है कि कोरोना वायरस की तीसरी लहर का असर दूसरी लहर से काफी अलग होगा। यदि बेहतर तरीके से तैयारी होती है तो लोगों की जान बचाई जा सकती है। वैज्ञानिकों का मत है कि कोरोना वायरस की तीसरी लहर को तो नहीं जा सकता, लेकिन वैज्ञानिक स्तर पर इससे बचने के लिए तैयार रहना चाहिए। वहीं बाल रोग विशेषज्ञ होने के साथ नीति आयोग के सदस्य(स्वास्थ्य) वीके पॉल का मत है कि बच्चे इस वायरस से बच नहीं सकते हैं, उन्हें भी संक्रमण हो सकता है और वो भी दूसरों को संक्रमित कर सकते हैं, हालांकि कुछ तथ्य एकदम साफ नहीं हैं कि बच्चों में संक्रमण तुलनात्मक रूप से कम होगा। 14June-2021

साक्षात्कार: समाज को जोड़ने में साहित्य की भूमिका अहम: डा. शील कौशिक

सामाजिक परिवेश पर  कहानियों, लघुकथाओं तथा कविताओं से लेखन
 व्यक्तिगत परिचय 
 नाम: डॉ. शील कौशिक 
 जन्म: 19 नवम्बर 1957 
 जन्म स्थान: ओल्ड फरीदाबाद (हरियाणा) शिक्षा: एम.एससी, बी.एड, एम.एच.एम (होम्यो),एलएलबी, विद्यासागर (मानद उपाधि) 
सम्प्रति: मलेरिया अधिकारी, स्वास्थ्य विभाग, हरियाणा(सेवानिवृत्त), अब स्वतंत्र लेखन
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साहित्य के क्षेत्र में सैकड़ो पुरस्कार व सम्मान हासिल कर चुकी महिला साहित्यकार डा. शील कौशिक को हरियाणा साहित्य अकादमी ने वर्ष 2018 के लिए पंडित माधव प्रसाद मिश्र पुरस्कार के लिए चयनित किया है। उनका मानना है कि ऐसे बड़े पुरस्कार साहित्य के जरिए समाज सेवा के लिए नई ऊर्जा देते हैं और इस क्षेत्र के लिए जिम्मेदारी बढ़ाते हैं। साहित्य,भारतीय संस्कृति में समाज सेवा का एक महत्वपूर्ण माध्यम है, जिसके बिना जीवन की राह आसान नहीं होती। इसी प्रगतिवादी व दूरदर्शी सोच के साथ पठन-पाठन में रूचि ने उनका साहित्यकार तक मार्ग प्रशस्त किया। साहित्य के क्षेत्र तक के सफर को उन्होंने ग्रामीण परिवेश की रूढ़िवादिता के बावजूद कैसे मंजिल दी। बचपन से साहित्यकार तक के सफर में अपने अनुभवों और समाज से जुड़े ऐसे पहलुओं पर साहित्यकार डॉ. शील कौशिक ने हरिभूमि संवाददाता के साथ हुई बातचीत के दौरान साझा किये। सामाजिक परिवेश पर आधारित कहानियों, लघुकथाओं तथा कविताओं से लेखन की शुरूआत करने वाली विद्यासागर की मानद उपाधि प्राप्त डा. शील कौशिक को जो ख्याति मिली है, उसकी कल्पना किसी के लिए करना इसलिए मुमकिन नहीं है, वह भी विज्ञान व अंग्रेजी में उच्च शिक्षा लेने के बाद स्वास्थ्य विभाग में एक अधिकारी के लिये। उन्होंने समाज को दिशा देने के मकसद से हर सामाजिक पहलुओं को उकेरने का प्रयास किया है। यहीं नहीं, बल्कि साहित्य को समाज सेवा का माध्यम मानते हुए अपनी रचनाओं, कविताओं और कहानियों के संग्रह में उन्होंने बच्चों से लेकर बुजुर्गो तक को यह समझाने का भी प्रयास किया है कि साहित्य के बिना जीवन अधूरा है। 
डा. शील कौशिक मानती हैं कि आज के इस आधुनिक युग के लगातार होते विस्तार के साथ सामाजिक ताने बाने जिस प्रकार बिखरे हैं। ऐसी सभी परिस्थितियों से उत्पन्न संवेग को उन्होंने अपने लेखन की प्रक्रिया का हिस्सा बनाया। मौजूदा विज्ञान और तकनीकी युग में इस भौतिकवादी प्रवृत्ति के कारण भारतीय संस्कृति एवं समाज में मानवीय मूल्यों का तेजी के साथ ह्रास हुआ है। सामाजिक तानेबाने, रीति-रिवाज, रिश्ते, भाषाशैली, कार्यशैली, परिधान के साथ प्रकृति में तेजी से बदलाव आये हैं। भारतीय संस्कृति एवं समाज को दिशा देने के लिए आज युवा पीढ़ी की अहम भूमिका हो सकती है, लेकिन उन्हें साहित्य के प्रति प्रोत्साहन करने की जरुरत है। साहित्य के क्षेत्र में महिला साहित्यकार डा. शील कौशिक कहती हैं कि उन्होंने एमएससी, बीएड, एलएलबी तथा होम्योपैथी में सर्टिफिकेट कोर्स किया, लेकिन उनके लिए शिक्षा की राह हमेशा मुश्किल रही। ग्रामीण परिवेश में उन दिनों लड़कियों के पढ़ाई को अहमियत नहीं थी। मां को उसका पढ़ना लिखना कतई नहीं भाया, लेकिन पिता का प्रोत्साहन मिलता रहा। वह घर में पत्र पत्रिकाएं लाते थे जिन्हें पढ़ने की रूचि उन्हें साहित्य के मार्ग पर ले गई। घर में मां के चाबुक के सामने 11वीं कक्षा में स्कूल टॉप करने के बावजूद कालेज में दाखिला दिलाने से मना कर दिया गया। जबकि उसकी जिद ने पिता ने आईसी गवर्मेंट महिला कॉलेज, रोहतक में प्री-मेडिकल में दाखिला दिला दिया। इसके बाद फरीदाबाद गवर्मेंट नेहरू कॉलेज में बीएससी पूरी हुई तो फिर मिला घर बैठने के फरमान। लेकिन पिता के कहने पर इंटरव्यू की हां हुई और वह चुन भी ली गई। मसलन उच्च शिक्षा के लिए उसके सामने न जाने कितनी अड़चने आई। किसी तरह एमएससी, बीएड, एमएचएम (होम्यो), एलएलबी तक शिक्षा ग्रहण कर गई। आश्चर्य की बात ये थी, जब वह स्वास्थ्य विभाग, हरियाणा में जीव वैज्ञानिक (राजपत्रित अधिकारी) के रूप में नियुक्त हुई, तो उस समय घर में सबसे ज्यादा खुश और गर्व करने वाली उनकी वही मां थी, जो उसकी पढ़ाई के नाम पर गुस्साई रहती थी। 
 प्रमुख पुस्तकें
डॉ. शील कौशिक की 31 पुस्तकें प्रकाशित हुई है, जिनमें 21 मौलिक कृतियां, 6 संपादित, 3 अनुवाद और एक लेखिका पर पुस्तक शामिल हैं। प्रमुख रूप से कविता संग्रह में नए अहसास के साथ, कचरे के ढेर पर जिंदगी, कविता से पूछो, कब चुप होती है चिड़िया, खिड़की से झांकते ही, मासूम गंगा के सवाल। एक सच यह भी और महक रिश्तों की नामक कहानी संग्रह। उसी पगडंडी पर पांव, कभी भी–कुछ भी और मेरी चुनिन्दा लघुकथाएं प्रमुख है। उन्होंने बचपन के आईने से, धूप का जादू, करें तो क्या करें, माशी की जीत जैसे चार चार हिन्दी बालकहानी संग्रह, बिल्लो रानी-बाल कविता संग्रह, रिमोट वाली गुड़िया-पंजाबी बालकथा के साथ तीन आलोचक ग्रंथ भी लिखे हैं। 
पुरस्कार व सम्मान
हरियाणा साहित्य अकादमी ने हाल ही में डॉ. शील कौशिक को ढ़ाई लाख रुपये के पंडित माधव प्रसाद मिश्र पुरस्कार-2018 से सम्मानित करने का फैसला किया। इससे पहले अकादमी ने डॉ. कौशिक को इससे पहले अकादमी वर्ष 2014 के श्रेष्ठ महिला रचनाकार सम्मान और उनकी लघुकथा पुस्तक ‘कभी भी-कुछ भी’ के लिए वर्ष 2012 के श्रेष्ठ कृति पुरस्कार से सम्मानित कर चुकी है। विश्व हिंदी लेखिका मंच का महादेवी वर्मा शक्ति सम्मान,राष्ट्रीय प्रतिभा सम्मान, राष्ट्रीय गौरव सम्मान, श्रीमती मोगरे स्मृति पुरस्कार, सृजन साहित्य सम्मान, समीक्षा सम्मान, महिला सशक्तिकरण सम्मान के साथ हरियाणा समेत करीब एक दर्जन राज्यों से सैकड़ो सम्मान और पुरस्कार हासिल करने वाली डा. कौशिक को विभिन्न संस्थाओं द्वारा मंचों से कई ऐसे पुरस्कार हासिल कर चुकी है, जिसकी वह साहित्य के क्षेत्र में सेवा के लिए हकदार रही हैं।
 14June-2021

कोरोना में अनाथ बच्चों का पुनर्वास कराएगा हालसा

जिले में तैयार की ‘संघर्ष से उत्कर्ष’ परियोजना हरिभूमि न्यूज.रोहतक। कोरोना काल में अपने माता पिता को खोने वाले अनाथ बच्चों की मदद के लिए राज्य सरकार के बाद हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (हालसा) भी उनके पुनर्वास कराने के लिए आगे आया है। इसके लिए ‘संघर्ष से उत्कर्ष’ परियोजना को तैयार किया गया है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के चेयरमैन एएस नारंग ने गुरुवार को यह जानकारी देते हुए कहा कि हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने उन बच्चों की मदद करने का निर्णय लिया है, जिन्होंने कोरोना महामारी के दौरान अपने माता-पिता को खो दिया है। उन्होंने कहा कि हालसा ने इस उद्देश्य से ही संघर्ष से उत्कर्ष नाम से परियोजना तैयार की है। इस परियोजना के तहत ऐसे सभी बच्चों को सुरक्षा व पुनर्वास की सुविधा प्रदान की जाएगी। इसके लिए हालसा गैर सरकारी संगठनों और सार्वजनिक एजेंसियों की भागीदारी से ऐसे बच्चों को भोजन, आश्रय, कपड़े आदि की बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध करवाएगा। एस नारंग ने कहा कि इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य ऐसे बच्चों की पीड़ा को कम करना है। उन्होंने कहा कि पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश एवं हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष राजन गुप्ता ने इस परियोजना को प्रभावी रूप से क्रियान्वित करने के निर्देश दिए हैं ताकि ऐसे बच्चों की बेहतरी के लिए हर संभव प्रयास किए जा सके। ---------जागरुकता अभियान---------- एएस नारंग ने कहा कि हालसा ने कोरोना होम वॉरियर्स एक जागरूकता अभियान की भी शुरुआत की है ताकि महामारी की रोकथाम के लिए आमजन में अधिक से अधिक जागरूकता पैदा की जा सके। उन्होंने कहा कि जागरूकता के इस अभियान में बच्चों व सोशल मीडिया का प्रभावी प्रयोग किया जाएगा। एएस नारंग ने कहा कि किसी भी विषय में जागरूकता लाने के लिए बच्चों की अहम भूमिका हो सकती है। बच्चों द्वारा उठाए गए मुद्दों का अत्यधिक प्रभाव रहता है। उन्होंने कहा कि इस उद्देश्य से बच्चों को एनीमेटेड फिल्में, पोस्टर व बैनर आदि जागरूकता सामग्री प्रदान की जाएगी। इस जागरूकता अभियान में भाग लेने वाले बच्चों को हालसा द्वारा प्रमाण पत्र भी दिया जाएगा। 11june-2021

मंडे स्पेशल: कोरोना ने दिए मासूमों को गहरे जख्म, 1483 के सिर से उठ गया मां का आंचल या पिता का साया

बेसहारा हुए बच्चों के लालन पोषण को सरकार आई आगे हरियाणा में बाल सरंक्षण के लिए शुरू की गई बाल सेवा योजना ओ.पी.पाल.रोहतक। कोरोना महामारी ने हर किसी को जख्म दिए हैं। किसी की नौकरी चली गई तो किसी का व्यापार ठप हो गया। किसी की दुकान बंद हो गई तो किसी की फैक्ट्री पर ताला लग गया। कोरोना के दानव ने किसी के भाई को निगल लिया तो किसी की बहन काल का ग्रस बन गई, लेकिन सबसे ज्यादा दर्द उन मासूमों को मिला है, जिनके माता-पिता की वायरस संक्रमण से मौत हो गई। प्रदेश में सैकड़ों ऐसे मासूम हैं जिनके सिर से मां और बाप दोनों का साया उठ गया है तो वहीं एक हजार से ज्यादा ऐसे बच्चे भी हैं, जिन्होंने इस महामारी में अपने माता-पिता में से किसी एक को खोया है। अभी तक इन मासूमों को रिश्तेदार, सामाजिक संस्थाएं और आस पडोस वाले ही संभाल रहे थे। अब इनकी जिम्मेदारी के लिए फिक्रमंद हुई केंद्र और राज्य सरकारों ने बकायदा योजनाएं बनाई हैं। हरियाणा सरकार ने प्रदेश में कोरोना के कारण अनाथ हुए बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण के अलावा उनके पालन पोषण, शिक्षा और लड़कियों की शादियों की जिम्मेदारी का खर्च उठाने लिए मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना शुरू की है। जबक केंद्र सरकार भी पीएम केयर फंड से भी प्रदेश के ऐसे बच्चों को 23 साल की उम्र होने पर दस लाख रुपये की मदद देगी। -------- प्रदेश अनाथ बच्चों की स्थिति------ प्रदेश में कोरोना के दौरान अपने माता या फिर पिता को खोने वाले बच्चों की संख्या 1,545 पहुंच चुकी है, जिनमें 62 बच्चे ऐसे हैं, जिनके सिर से मां का आंचल और बाप का साया दोनों ही उठ चुका है। जबकि 1,483 बच्चों ने अपने मां या पिता में से किसी एक को खोया है। हालांकि हरियाणा महिला एवं बाल विकास विभाग की तरफ से ऐसे बच्चों का आंकड़ा लगातार जुटाया जा रहा है, ताकि उसके आधार पर बाल सेवा योजना को शुरू किया जा सके। ---------- जिनके सिर से उठा मां-बाप का साया------ प्रदेश में पांच दर्जन से ज्यादा ऐसे बच्चें हैं, जिन्हें कोरोना संक्रमण ने अनाथ की जिंदगी जीने के लिये मजबूर कर दिया यानि ऐसे बच्चों ने अपने माता-पिता दोनों खो दिये हैं। इनमें जिला सोनीपत में 6, सिरसा में पांच, रेवाड़ी में चार, महेन्द्रगढ़ और झज्जर में तीन-तीन और कुरुक्षेत्र में सात बच्चों की पहचान की गई है। --------- किसी ने मां तो किसी ने पिता को खोया-------- प्रदेश में ऐसे बच्चों की संख्या ज्यादा है जिनकी माता की ममता और पिता के साय को कोरोना संक्रमण ने छीना है। इसमें जिला सोनीपत में 235, जींद में 130, रेवाडी में 120, झज्जर में 114, महेन्द्रगढ़ में 106, भिवानी में 104, सिरसा में 69 तथा करना में 68 बच्चों को कोरोना के कारण माता या पिता से दूर कर दिया है। --------------------- सरकार करेगी सुरक्षा और संरक्षण------- राज्य की मनोहर लाल सरकार ने अनाथ हुए बच्चों के लिए बाल सेवा योजना का ऐलान किया है। इस योजना के तहत इन बच्चों को सरकार हर महीने 2500 रुपये की आर्थिक मदद 18 साल की उम्र तक देगी। वहीं सरकार हर साल 12 हजार रुपये भी इन बच्चों को अन्य खर्चों के लिए देगी। वहीं जिन बच्चों के देखभाल करने वाला परिवार का कोई सदस्य नहीं है उनकी देखभाल बाल देखभाल कोई संस्था कर रही है तो ऐसे संस्थान को 1500 रुपए प्रति बच्चा प्रति महीना 18 वर्ष तक सहायता भी सरकार द्वारा प्रदान की जाएगी। यह राशि अवधि जमा के रूप में बैंक खाते में डाल दी जाएगी और 21 वर्ष की आयु होने पर बच्चे को मैच्योरिटी राशि दे दी जाएगी। जबकि अन्य पूरा खर्च बाल देखभाल संस्थान द्वारा वहन किया जाएगा। ----- लड़कियों की तक का जिम्मा----- राज्य सरकार की इस योजना के तहत किशोर अवस्था में बेसहारा हुई अनाथ बच्चियों को कस्तूरबा गांधी विद्यालयों में मुफ्त आवासीय शिक्षा देने के साथ ही ऐसी बच्चियों की शादी के लिए अभी से उनके बैंक खाते में 51 हजार रुपये जमा कराने का फैसला किया है, जो विवाह के समय ब्याज समेत उन्हें दी जाएगी। सरकार कक्षा 8वीं से 12वीं के बीच या व्यावसायिक पाठ्यक्रम में किसी भी कक्षा में पढ़ने वाले बच्चों को उनकी शिक्षा में सहायता के लिए टैब भी मुहैया करायेगी। -------- बाल गृहों में पुनर्वास-------- प्रदेश सरकार की घोषणा के मुताबिक इसके अलावा राज्य सरकार के बाल गृहों में पालन पोषण होने वाले ऐसे बच्चों का पूरा खर्च खर्च सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। ऐसे अनाथ बच्चों का बैंक खाता खुलवा कर इसमें 1500 रुपये प्रति महीने 18 साल की उम्र तक जाम कराए जाएंगे। ------- गोद लेने का भी होगा विकल्प------- कोरोना के कारण अनाथ हुए बच्चों को गोद लेने की भी एक कानूनी प्रक्रिया है। लेकिन बाल कल्याण समिति के संज्ञान में लाये बिना किसी बच्चे को गोद लेना गैर कानूनी व दंडनीय अपराध भी है। इसलिए बच्चों को कानूनी रूप से गोद लेने के लिए सेंट्रल अडाप्शन रिसोर्स अथारिटी के वेबसाइट www.cara.nic.in पर संपर्क करने के बाद इस प्रक्रिया को पूरा किया जा सकता है। वहीं यदि परिवार के अन्य सदस्य या कोई रिश्तेदार अभिभावक के रूप में ऐसे अनाथ बच्चों की देख रेख या पालन पोषण करना चाहता है, तो करने यदि परिवार के अन्य सदस्य या कोई रिश्तेदार करना चाहता है तो उसके लिए उन्हें बाल संरक्षण व बाल कल्याण समिति के समक्ष लिखित में गारंटी पत्र देना होगा। हालांकि बाल गृह में किसी भी अनाथ बच्चे को आवासित करवाना अंतिम विकल्प होना चाहिए। -------- सामाजिक पहलुओं पर सर्वे---------- अनाथ बच्चों की पहचान करने के लिए बाल समितियों की निगरानी में हो रहे सर्वे में उनके बारे में सामाजिक जांच रिपोर्ट भी तैयार करने के निर्देश है, जिनमें ग्राम सचिवों से जानकारी हासिल कर यह देखा जाएगा कि बेसहारा हुए किन बच्चों के नाम जमीन है या नहीं, इसमें क्षेत्र के पटवारियों ने अनापत्ति पत्र लिया जाएगा। इस सामाजिक जांच रिपोर्ट के लिए कराय जा रहे सर्वे में सोशल वर्कर, आउट रीच वर्कर, गैर-संस्थागत केयर और एलपीजओ को लगाया जा रहा है। ------ हर पहलुओं पर नजरें------ कोरोना काल में अनाथ बच्चों को तस्करी जैसे खतरों से बचाने पर भी फोकस किया जा रहा है। मसलन ऐसे अनाथ हुए बच्चों को लोग अवैध तरीके से गोद लेकर कई तरह के खतरों में डाल सकते हैं। यानि ऐसे बच्चों के लालन पोषण के नाम पर परिवार के अन्य लोग या रिश्तेदार उन्हें बाल श्रम का शिकार बना सकते हैं या फिर उनका मानसिक और शारीरिक तौर पर प्रताड़ित करने के अलावा यौन शोषण करने जैसे पहलुओं पर भी सरकार की नजर होगी। 07June-2021

रविवार, 27 जून 2021

विश्व पर्यावरण दिवस: भगवान को भूल रहे हैं हम

प्रकृति व संस्कृति के प्रति आस्था के बिना असंभव पर्यावरण संरक्षण -डॉ. राजेन्द्र सिंह, जल पुरुष विश्व पर्यावरण दिवस को मनाने की सच्चा सकंल्प और सार्थकता तभी पूरी हो सकती है, जब तक हम प्रकृति और संस्कृति का सम्मान करने वाली आस्था में विश्वास को मजबूत नहीं कर लेते। संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित पर्यावरण या अन्य घोषित दिवस मनाने की जरुरत इसलिए पड़ी, कि जब भी वैश्विक या राष्टीय संकट आए तो सरकारों का दायित्व और जिम्मेदारी है कि वे जनचेतना जगाने का काम करें। पर्यावरण दिवस पर्यावरण के संकट की तरफ लोगों का ध्यान खींचने और इस संकट के बारे में लोगों को याद दिलाने के लिए मनाया जाता है, लेकिन आज यह दिवस एक औपचारिकता महज बनकर रह गया है। हमारी सरकारें भी सिर्फ पर्यावरण जैसे दिवस मनाकर अपनी औपचारिकताएं पूरी कर रही हैं। हमें गंभीरता से सोचना होगा कि हम उस भगवान को भूल रहे हैं जिसने हमे निर्मित किया है। यदि हमें कोरोना जैसे वैश्विक संकट से निपटना है तो जलवायु परिवर्तन जैसे संकट को समझकर अपनी धरती, प्रकृति के प्रति जागरुक रहना जरुरी है। प्रकृति ही भारतीय आस्था का मान, सम्मान और व्यवहार ही हमारी संस्कृति थी, जिसे हमे बचाना होगा। यदि लोगों के भीतर पर्यावरण के प्रति आस्था नहीं है, तो एक दिन के लिए पर्यावरण दिवस मना लेने का कोई अर्थ नहीं है और इससे कुछ बदलाव नहीं होने वाला है। पर्यावरण की स्थिति विनाश की ओर बढ़ चली है और जन-जन के भीतर आस्था जगाए बगैर इस विनाश को रोक पाना कठिन है। देश में ही नहीं विश्वभर में पर्यावरण का संकट कोई मामूली संकट नहीं, बल्कि यह जीवन से जुड़ा हुआ संकट है। यह संकट इसलिए पैदा हुआ है, क्योंकि पर्यावरण के प्रति राज, समाज की आस्था खत्म हो गई है। कोरोना महामारी का संकट भी इस पर्यावरण संकट के साथ जुड़ गया है, जिसकी चुनौतियों से निपटने के लिए प्राकृति और संस्कृति के प्रति खत्म होती जा रही आस्था में फिर से विश्वास जगाने की जरुरत है। यह भी तय है कि जब तक यह आस्था फिर से पैदा नहीं होगी, तब तक हम पर्यावरण के संकट को दूर नहीं कर सकते। यह सभी को पता है कि हर जीव को जीवन देने के लिए बने पर्यावरण का क्या महत्व है। इसमें पेड़ जो कार्बन डाई ऑक्साइड ग्रहण करता है और ऑक्सिजन देता है तो सूर्य अपनी आभाओं से हर किसी को स्वस्थता का वरदान देता है। जल तथा वायु भी जीवन की समुन्नत के लिए महत्वपूर्ण है। लेकिन मानव अपनी लालसाओं के कारण पर्यावरण का दोहन कर रहा है, जिससे पर्यावरण पर बेहद नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। पर्यावरण अपने ऊपर के प्रदुषण रुपी दबाव को कम करने के लिए रौद्र रूप धारण कर लेता है, जिससे इंसानों तथा अन्य जीवों को जान-माल की हानि उठानी पड़ती है। हमें अपने पर्यावरण की पुकार समझनी पड़ेगी। कोरोना संकट भी हमारे जीवन संकट से जुड़ा हुआ है, जहां जल, जंगल, जमीन संरक्षित करने के लिए प्रकृति व संस्कृति में आस्था रखने पर संकट की चुनौतियों से निपटना संभव है। हम आज भगवान को भूल गये है यानि भू, गगन, वायु, अग्नि और नीर से मिलकर ही पर्यावरण का निर्माण हुआ है। इन्हीं पंच महाभूतों से हमारे शरीर का भी निर्माण होता है। पर्यावरण संकट में है तो समझो पंच महाभूत संकट में हैं। पर्यावरण का यह संकट हमने खुद ही से पैदा किया है। अब इसका एक मात्र उपाय यही है कि इन पंच महाभूतों के प्रति फिर से अपने भीतर आस्था पैदा करें, वरना विनाश दस्तक दे रहा है। इस विकसित भारतीय आस्था में प्रकृति थी, जिसके सम्मान के लिए जीना होगा। भारत की आस्था अंधविश्वास नहीं, बल्कि वैज्ञानिक आधार पर विकसित हुई थी, जिसमें जब तक प्रकृति व संस्कृति का सम्मान होता रहा तो हम विश्व गुरु थे। जैसे जैसे आस्थाएं खत्म हो गई, वैसे ही अनेक राष्ट्रीय व वैश्विक संकट के रूप में प्रदूषण और अनेक चुनौतियां सामने आ रही है। इस 21वीं शताब्दी में फिर से प्रकृति और संस्कृति में आस्था में विश्वास को पुनर्जीवित करके हम दुनिया को भारतीय संस्कृति की ओर आकर्षित कर सकते हैं। हमारी आस्था की इंजीनियरी प्रकृति और संस्कृति का दोहन करना नहीं सिखाती थी, लेकिन आज के आधुनिकी की तकनीक व इंजीनियरी में प्रकृति व संस्कृति का दोहन किया जा रहा है। इसी कारण से जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियां सामने खड़ी है। इससे निपटने के लिए भी भौतिकवादी इंजीनियरी व तकनीक को अपनाया जा रहा है। ऐसे अब तो विनाश की तरफ ही बढ़ रहे हैं। सुधार की संभावना न के बराबर दिखाई देती है। लेकिन कोशिशें होती रहनी चाहिए, क्योंकि ये कोशिशें ही पुनर्निर्माण के बीज बनेंगी, और प्रकृति इन्हीं बीजों से एक बेहतर दुनिया का सृजन करेगी। विश्व पर्यावरण दिवस का संदेश देश के जन जन तक पहुंचाने की कौशिश होनी चाहिए, तभी पर्यावरण दिवस को सार्थक किया जा सकता है। कोरोना काल जैसे संकट के बीच विश्व पर्यावरण दिवस पर हमें और भी गंभीरता से सोचना होगा, कि प्रकृति के सम्मान के लिए एकजुटता के साथ सभी आगे आएं। -(ओ.पी. पाल से बातचीत पर आधारित) 06June-2021

अस्पतालो में घटने लगी कोरोना मरीजों की संख्या

ऑक्सीजन बेड़ो पर रह गये केवल 212 मरीज पिछले 24 घंटे में 61 कोरोना मरीज हुए ठीक एक दिन में कोरोना के आए 21 नए मामले, दो ने गंवाई जान हरिभूमि न्यूज.रोहतक। जिले में कोरोना संक्रमण का प्रभाव धीरे धीरे कम होता नजर आ रहा है। अस्पतालों में फिलहाल 215 मरीज उपचाराधीन मरीज रह गये हैं, जिनमें 212 मरीज ऑक्सीजन बेडो पर रह गये हैं। पिछले 24 घंटे में 61 मरीज कोरोना वायरस को मात देने के बाद ठीक हुए है। जबकि जिले में इस दौरान 21 नए मामले सामने आए, तो वहीं दो मरीजों की मौत दर्ज की गई है। कोरोना को मात देने वाले मरीजों की संख्या बढ़कर 24,431 हो गई है, जिसके साथ ही रिकवरी दर बढ़कर में 95.48 प्रतिशत हो गई है। इनमें पिछले 24 घंटे में 61 कोरोना मरीज स्वस्थ्य होकर अपने घर लौटे हैं। इसी प्रकार जिले में इस दौरान 21 लोग और पॉजिटिव आने के बाद जिले में कुल संक्रमितों की संख्या 25,587 हो गई है। जिले में ताजा आंकड़ो के अनुसार केवल दो कोरोना संक्रमितों की मौत हो गई है, जिसके कारण जिले में अब तक कोरोना की वजह से 516 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। वहीं जिला प्रशासन ने कोरोना संक्रमण की स्थिति की जानकारी देते हुए जो आंकड़े जारी किये हैं उसके अनुसार जिले में अब तक 440299 लोगों की जांच के बाद नमूने लिए गये, जिनमें से पर रखा गया, जिनमें 414109 की रिपोर्ट निगेटिव आई है। को को कोविड-19 के 1232 सैंपल जांच के लिए भेजे गए। आंकड़ो के मुताबिक कोरोना संक्रमण की कम होती रफ्तार के कारण जिले के विभिन्न अस्पतालों में उपचाराधीन मरीजों की संख्या 215 रह गई है, जिनमें 212 मरीज ऑक्सीजन बेड पर उपचाराधीन है। हालांकि होम आईसोलेट मरीजों का भी इलाज चल रहा है, जिसके कारण मजिले में संक्रमितों की संख्या 640 रह गई है। -----मरीजों को सुविधाओं की कमी नहीं---- जिला प्रशासन ने दावा किया है कि जिले में जिस अस्पताल में संक्रमित मरीज अपना इलाज करा रहे हैं, वहां उनके इलाज के लिए सभी स्वास्थ्य सुविधाएं और संसाधन पर्याप्त संख्या में हैं। मसलन ऑक्सीजन और बेडों की कोई कमी नहीं है। प्रशासन के मुताबिक जिले के अस्पतालों में मौजूद अधिकृत आईसीयू बेड 376 में से 129 मरीजों का आईसीयू ऑक्सीजन बेड पर इलाज चल रहा है, एक दिन में ऐसे इलाजरत दस मरीज ठीक हुए हैं। आईसीयू बेड के अलावा 812 ऑक्सीजन बेड में से केवल 83 बेड पर ही उपचाराधीन मरीज रह गये हैं। इसी प्रकार अधिकृत वेंटिलेटर 200 में से 86 पर उपाराधीन मरीज हैं। इसी प्रकार जिले में 108 नोन ऑक्सीजन बेड अधिकृत है, जिनमें से केवल तीन पर मरीजो का इलाज हो रहा है। ------पीजीआई में पर्याप्त ऑक्सीजन---- जिला प्रशासन ने बताया कि रोहतक स्थित पीजीआईएमएस में 24 घंटे, ह्रदय नीलायम हर्ट लंग एंड वास्कुलर इंस्टीट्यूट में 100 घंटे, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चिड़ी में 80 घंटे, कलानौर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 24 घंटे, मान अस्पताल व मदीना सीएचसी में 12 घंटे तथा कायनोस अस्पताल, सिविल अस्पताल व ऑस्कर सुपर स्पैशलिटी ट्रामा सेंटर में 10-10 घंटे के लिए ऑक्सीजन उपलब्ध है। जिले में कोरोना अस्पतालो के रूप में 13 अस्पतालों मे सभी सुविधाएं मुहैया कराई गई हैं। ------------- आज 22 मरीजो ऑक्सीजन की होम डिलीवरी---- रोहतक। जिले में रह गये कुल संक्रमितों मे से अस्पतालों में इलाज करा रहे मरीजों के अलावा बाकी अपने घरों पर ही इलाज करा रहे हैं। ऐसे मरीजों को आवश्यकता पड़ने पर ऑक्सीजन सिलेंडरों की होम डिलीवरी कराई जा रही है। गुरुवार को ऐसे मरीजों के लिए 22 ऑक्सीजन सिलेंडरों की होम डिलीवरी की गई। इसके साथ ही जिला प्रशासन द्वारा जिला रेडक्रास सोसाइटी और उनके साथ इस कार्य में सहयोग कर रहे सती भाई सांई दास सेवादल रोहतक तथा हरिओम सेवादल रोहतक के माध्यम से अब तक 782 ऑक्सीजन सिलेंडरों की होम डिलीवरी कराई जा चुकी है। ----------- जिले में 3610 का टीकाकरण--- रोहतक। जिले में गुरुवार को 3610 लोगों को कोरोना बचाव के लिए वैक्सीन की डोज दी गई। अब तक कोरोना वैक्सीन 2,24,488 लोगों का टीकाकरण किया गया है। इस टीकाकरण में हेल्थ केयर वर्कर को 19214, फ्रंटलाइन वर्कर को 10771 टीके लगाए गये। जबकि जिले में 18 से 44 आयु वर्ग में 30172 डोज दी गई। इसी प्रकार 45 से 60 आयु वर्ग में 76598 तथा 60 वर्ष या इससे अधिक आयु वर्ग में 88271 लोगों का टीकाकरण किया गया। जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ अनिलजीत त्रेहान के अनुसार गुरुवार को कोविशिल्ड की 2550 तथा को-वैक्सीन की 1060 टीके लगाए गये। ------------- बचाव के साथ पीये हुक्का--- रोहतक। जिला प्रशासन द्वारा ग्रामीणों में कोरोना संक्रमण को नियंत्रित करने की दिशा में गांवों में की गई व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए अधिकारी लगातार दौरा कर रहे हैं। गुरुवार को रोहतक के एसडीएम राकेश कुमार सैनी ने गांव कटवाड़ा, खिड़वाली व जसिया का दौरा करके ग्रामीणों को कोरोना महामारी से बचाव के लिए जागरूक किया। उन्होंने ग्रामीणों को हुक्का पीने और ताश आदि खेलने में झुंड न बनाने की सलाह देते हुए कहा कि कोरोना महामारी के प्रति सावधानी बरतने से ही सुरक्षित रहा जा सक है। इसलिए उन्होंने ग्रामीणों को ऐसे समय मास्क लगाने और सामाजिक दूरी बनाकर कोरोना दिशानिर्देशों का पालन करने का कहा। उन्होंने जन सेवा संस्थान का भी दौरा करके वहां टीकाकरण का निरीक्षण भी किया। 04June-2021

हरियाणा समेत आठ राज्यों में एमएसपी पर जारी रबी खाद्यान्न की खरीद

पीएमजीकेएवाई के तीसरे चरा में तेज होगी राशन कार्ड योजना नई दिल्ली/चंडीगढ़। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए प्रधानमंत्री गरीब अन्न योजना के तीसरे चरण में ‘एक राष्ट्र-एक राशन कार्ड’ योजना को तेजी से चलाने के राज्यों को दिशानिर्देश जारी किये हैं। वहीं रबी विपणन सत्र 2021-22 के लिए गेंहू जैसे खाद्यान्न की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर हरियाणा समेत आठ राज्यों में खरीद को जारी रखने का निर्णया लिया गया है। यह जानकारी देते हुए गुरुवार को एक वेबिनार संवादाता सम्मेलन में केंद्रीय खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के सचिव सुधांशु पांडे ने पीएमजीकेएवाई के तीसरे चरण के तहत खाद्यान्न वितरण की प्रगति, खाद्यान्न खरीद और एक राष्ट्र एक राशन कार्ड योजना की विस्तार से जानकारी दी। डीएफपीडी सचिव ने कहा कि गेहूं की खरीद वर्तमान रबी विपणन सत्र 2021-22 के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य पर हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली तथा जम्मू और कश्मीर राज्यों में सुचारु रूप से जारी है, जिसके तहत दो जून तक 411.12 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की गई, जबकि पिछले साल की इसी समान अवधि में 389.92 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया था। सचिव पांडे ने कहा कि करीब 44.43 लाख किसान मौजूदा रबी विपणन सत्र में एमएसपी मूल्यों पर हुए खरीद कार्यों से लाभान्वित हो चुके हैं। ----हरियाणा के किसानों 16.71 लाख करोड़ की राशि हस्तांतरित---- उन्हेंने बताया कि इस दौरान किसानों से 81,196.20 करोड़ रुपये की खरीद की गई है, जिसमें से 76,055.71 करोड़ रुपये की राशि पहले ही देश भर के किसानों को हस्तांतरित की जा चुकी है। इसमें हरियाणा में 16,706.33 करोड़ रुपये तथा पंजाब में 26,103.89 करोड़ रुपये की राशि सीधे किसानों के खाते में भेजी जा चुकी है। उन्होंने कहा कि यह भी एक खासबात है कि एक दिन पहले यानि दो जून तक 411.12 लाख मीट्रिक टन गेहूँ की कुल खरीद में पंजाब का का 132.27 लाख मीट्रिक टन यानि 32.17 फीसदी, हरियाणा का 84.93 लाख मीट्रिक टन यानि 20.65 फीसदी योगदान रहा है। जबकि मध्य प्रदेश से 128.08 लाख मीट्रिक टन यानि 31.15 फीसदी खाद्यान्न की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर की गई है। -----हरियाणा व पंजाब को मिला लाभ---- हरियाणा और पंजाब ने भी एमएसपी का अप्रत्यक्ष भुगतान करने के स्थान पर सभी खरीद एजेंसियों द्वारा किसानों के बैंक खाते में सीधे ऑनलाइन हस्तांतरण के लिए भारत सरकार के निर्देश के अनुसार डिजिटल माध्यम को अपना लिया है। इन दोनों राज्यों के इस निर्णय से इस साल सार्वजनिक खरीद के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। इस डिजिटल तकनीक से किसानों को बिना किसी देरी और कटौती के ‘एक राष्ट्र, एक एमएसपी’, एक डीबीटी’ के तहत अपनी गेहूं की फसल की बिक्री का प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त हुआ है। ----खरीफ फसल में धान की खरीद----- पाण्डेय ने कहा कि वर्तमान खरीफ 2020-21 में धान की खरीद इसकी बिक्री वाले राज्यों में सुचारू रूप से जारी है। जून तक 799.74 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान क्रय किया जा चुका है, इसमें खरीफ फसल का 706.69 लाख मीट्रिक टन और रबी फसल का 93.05 लाख मीट्रिक टन धान भी शामिल है। जबकि पिछले वर्ष की इसी समान अवधि में 728.49 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया था। मौजूदा खरीफ विपणन सत्र में लगभग 118.60 लाख किसानों को पहले ही एमएसपी मूल्य पर 1,50,990.91 करोड़ रुपये के खरीद कार्य से लाभान्वित किया जा चुका है। जिसमें से एमएसपी की 1,38,330.12 करोड़ रुपये की राशि 02 जून तक सीधे किसानों के खाते में ट्रांसफर की गई है। 04June-2021

हरियाणा के नौ मुक्केबाजों ने दिखाया अपना दम

एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप में भारत का अब तक का रिकार्ड प्रदर्शन हरिभूमि न्यूज.रोहतक। भारतीय मुक्केबाजों ने एशियन चैंपियनशिप में दो स्वर्ण पदकों समेत 15 पदक हासिल करके अब तक का रिकार्ड प्रदर्शन किया है। भारत के लिए बटोरे गये दोनों स्वर्ण पदकों समेत नौ पदक हरियाणा के मुक्केबाजों के नाम रहे। दुबई में इस चैंपियनशिप में दस महिलाओं समेत 20 सदस्य भारतीय मुक्केबाजों ने हिस्सा लिया, जिनमें से सभी महिलाओं ने जबरदस्त पंच का दम दिखाते हुए दस पदक जीते, जबकि पुरुष वर्ग के पांच खिलाड़ियों ने अपने मुक्कों से पांच पदक भारत के लिए निकाले। भारत के इन 15 पदकों में दो स्वर्ण पदकों को हरियाणा में रोहतक के संजीत सगरोहा ने 91 किग्रा भार और भिवानी की पूजा बोहरा ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए झटका। जबकि भारत को मिले पांच रजत पदकों में रोहतक के अमित पंघाल ने 52 किग्रा और पलवल की अनुपमा कुंडू ने 81 किग्रा से अधिक भार के मुकाबले में हासिल कर योगदान दिया। इसके अलावा भारत के लिए मिले आठ कांस्य पदकों में भी पांच पदकों का योगदान कर हरियाणा प्रमुख हिस्सेदार बना। ये पांच कांस्य पदक हिसार के विकास कृष्णा के महिला मुक्केबाजों रोहतक की मोनिका, भिवानी की साक्षी ढांडा और जैस्मीन लंबोरिया तथा हिसार की स्वीटी बुरा ने अपने प्रदर्शन की बदौलत हासिल किये। ----------*हरियाणा ने बढ़ाई भारत की शान: अनिल मान*----------- अंतर्राष्ट्रीय मुक्केबाज अनिल मान ने एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप में भारतीय मुक्केबाजों द्वारा भारत के लिए बटोरे गये पदकों के लिए सभी प्रतिभागियों को बधाई दी है। खासतौर से इन 15 पदकों में नौ पदकों की हिस्सेदारी को हरियाणा के पुरुष और महिला मुक्केबाजों ने बढ़ाकर हरियाणा को गौरवान्वित करने पर अनिल मान ने कहा कि भारतीय दल में हरियाणा के मुक्केबाजों ने जिस प्रकार प्रदर्शन किया है। सबसे बड़ी बात है कि भारत के हिस्से में जो दो स्वर्ण पदक आए हैं वह भी हरियाणा के मुक्केबाजों के पंच से निकले हैं। वह इस बात का संकेत है कि खेल जगत में हरियाणा के खिलाड़ी अपनी प्रतिभा का बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे है। मान ने उम्मीद जताई है कि भारतीय मुक्केबाज टोक्यो ओलंपिक में इससे भी बेहतर प्रदर्शन करके भारत के लिए नए कीर्तिमान स्थापित करेंगे। -------------- *बॉक्सिंग संघों ने दी शुभकामनाएं*---- एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप में भारतीय मुक्केबाजों के प्रदर्शन और रिकार्ड पदक लेकर भारत को गौरवान्वित करने के लिए सभी खिलाड़ियों को भारतीय बॉक्सिंग फैडरेशन के अलावा हरियाणा बॉक्सिंग संघ के पदाधिकारियों ने शुभकामनाएं दी हैं। भारतीय मुक्केबाजों द्वारा दुबई में जबरदस्त प्रदर्शन से रिकार्ड पदक लेकर भारत को गौरवान्वित करने पर हरियाणा मुक्केबाजी संघ के अध्यक्ष मेजर सत्यपाल सिंधु ने इस बात पर खुशी जताई कि दुबई में हुई एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप मे भागीदारी करने गये 20 में से 15 मुक्केबाजों ने अपना शानदार प्रदर्शन करके भारत के लिए दो स्वर्ण पदक समेत 15 पदक लेकर अब तक का रिकार्ड बनाया है। उन्होंने इस रिकार्ड में छह महिलाओं समेत नौ हरियाणवी मुक्केबाजों के प्रदर्शन को लेकर कहा कि अभिभावकों और प्रशिक्षकों के प्रयासों द्वारा जिस प्रकार से प्रतिभाओं को तैयार जा रहा है, उसी का परिणाम है कि भारतीय रिकार्ड में हरियाणा की सर्वश्रेष्ठ हिस्सेदारी है, जिसे भविष्य में और भी बढ़ाने के प्रयास जारी रहेंगे। 02June-2021

रविवार, 6 जून 2021

हरियाणवी महिलाओं के दम पर मुक्केबाजी चमका भारत

दुबई में भारत के लिए बटोरे स्वर्ण पदक समेत दस पदक हरिभूमि न्यूज.रोहतक। दुबई मे चल रही एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप में भारतीय महिला मुक्केबाजों के दल ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए अपने पंच से भारत के लिए दस पदक हासिल किये हैं। दस सदस्यीय महिला दल में छह मुक्केबाज हरियाणा की रही, जिनमें भारत के लिए पूजा बोहरा ने स्वर्ण पदक हासिल किया, जिन्होंने थाईलैंड में भी स्वर्ण पदक हासिल करके हरियाणा का ही नहीं भारतवर्ष को गौरवान्वित किया था। भारतीय महिला दल को अपना दम दिखाकर पदक हासिल करने पर चौतरफा बधाई मिल रही है। हरियाणा के भिवानी की मुक्केबाज पूजा बोहरा ने 75 किग्रा भार वर्ग में भारत के लिए स्वर्ण पदक हासिल किया, तो वहीं 81 किग्रा से अधिक भार में पलवल की अनुपमा कुंडू ने रजत पदक लिया। रोहतक की मोनिका ने 48 किग्रा, भिवानी की साक्षी ढांडा ने 54 किग्रा और जैस्मीन लंबोरिया ने 57 किग्रा तथा हिसार की स्वीटी बूरा ने 81 किग्रा भार वर्ग में शानदार पंच का प्रदर्शन करते हुए भारत को कांस्य पदक दिलाये। वहीं मणिपुर की विश्व चैंपियन मैरी कॉम ने 51 किग्रा और असम की लालूबुतशी ने 64 किग्रा भार में जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए भारत को रजत पदक दिलाए। पंजाब की सिमरनजीत कौर ने 60 किग्रा भार और असम की लवलिना ने 69 किग्रा भार वर्ग में कांस्य पदक हासिल कर भारत के लिए अपना दम दिखाया। भारतीय महिला मुक्केबाजों को दुबई में जबरदस्त प्रदर्शन के दम पर भारत के लिए पदक हासिल करने पर भारतीय मुक्केबाजी संघ और व हरियाणा मुक्केबाजी संघ द्वारा बधाई दी गई है। हरियाणा बॉक्सिंग संघ के अध्यक्ष मेजर सत्यपाल सिंधु ने भारतीय महिला मुक्केबाजों को शानदार प्रदर्शन और उनके प्रशिक्षकों की मेहनत से पदक हासिल करने पर शुभकामनाएं दी। उन्होंने खासकर भारत के लिए एक मात्र स्वर्ण पदक हासिल करने वाली भिवानी की पूजा बोहरा समेत हरियाणा की महिला मुक्केबाजों के प्रदर्शन की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनके प्रदर्शन से निकले पदकों से भारत ही नहीं, बल्कि हरियाणा भी गौरवान्वित महसूस कर रहा है। ------------------ गुलशन पांचाल ने दी बधाई---- हरियाणा की महिला बॉक्सरों के प्रदर्शन की बदौलत दुबई में चल रही बॉक्सिंग चैंपियनशिप में भारत को दस पदक मिले हैं। हरियाणा बॉक्सिंग संघ के रेपरी एंड जजिंग कमीशन के चेयरमैन गुलशन पांचाल ने हरियाणा की सभी छह मुक्केबाजों समेत भारतीय महिला मुक्केबाजी में भारत के हिस्से में आए दस पदकों के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इन पदको के लिए इन खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देने वाले कोचों की भी अहम भूमिका है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी प्रशिक्षक बेहतर खिलाड़ियों को आगे बढ़ाते रहेंगे, ताकि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय जीत में हरियाणा हिस्सेदार बनता रहे। -------------------------- हरियाणा के बढ़ते कदम: सांगवान---- पूर्व अंतर्राष्ट्रीय बॉक्सर राजकुमार सांगवान दुबई में एशियिन बॉक्सिंग चैंपियनशिप में हरियाणा की सभी छह महिला बॉक्सरों द्वारा पदक जीतने पर बधाई देते हुए कहा कि इन खिलाड़यों का प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि खेल जगत में हरियाणा के कदम आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन हटने के बाद एक समारोह में इन पदक विजेताओं को सम्मानित किया जाएगा। सांगवान ने रोहतक के अमित पंघाल व संजीत सगरोह को भी शुभकामनाएं दी। ------------------------- हरियाणा की बढ़ी हिस्सेदारी---- हरियाणा बॉक्सिंग संघ के कोषाध्यक्ष कैप्टन प्रवीर गहलोत ने सभी महिला मुक्केबाजों को पदक हासिल करने पर बधाई दी और उम्मीद जताई कि वे भविष्य में और भी बेहतर प्रदर्शन कर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हरियाणा के नाम को गौरवान्वित करती रहेंगी। भारत को महिला मुक्केबाजी में मिले दस पदकों में से छह में हरियाणा के हिस्सेदार बनने पर खुशी जाहिर की। इसके लिए खिलाड़ियों के साथ उन्होंने प्रशिक्षकों को भी बधाई दी है। ------------------------------ पूजा ने बढ़ाया हरियाणा का मान--- भारतीय महिला मुक्केबाजों को दुबई में चल रही बॉक्सिंग चैंपियनशिप में पदक हासिल करने पर बधाई देते हुए मेवात बॉक्सिंग संघ के प्रधान यशवीर राघव ने कहा कि भिवानी की पूजा बोहरा ने स्वर्ण पदक झटककर भारत को ही नहीं हरियाणा का भी मान बढ़ाया है। हरियाणा की अन्य पांचों महिला बॉक्सरों ने भी पदक जीते हैं। इसके लिए हरियाणा बॉक्सिंग संघ और बॉक्सिंग कोच भी बधाई के पात्र हैं। ------------------------------------- स्वर्ण पदक के लिए हरियाणा योगदान--- कैथल जिजा बॉक्सिंग संघ के कोषाध्यक्ष विजय ढुल ने दुबई चैंपियनशिप में हरियाणा की महिला बॉक्सरों द्वारा पदक हासिल करने पर शुभकामनाएं दी और कहा कि इससे बढ़कर हरियाणा के लिए कोई खुशी नहीं हो सकती है, कि भारतीय महिलाओं को मुक्केबाजी में मिले दस पदकों में छह हरियाणा की खिलाड़ियों ने हासिल किये हैं। वहीं हरियाणा के लिए यह भी गौरव का विषय है कि भारत के लिए पूजा को मिले स्वर्ण पदक में हरियाणा का योगदान रहा। 01June-2021

मंडे स्पेशल: कोरोना ने खत्म किये रिश्ते-नाते और आस्थाओं की परंपराएं

शमशान घाटों में अपनों का इंतजार कर रही हैं अस्थियां संक्रमण से मौत के बाद अपनों का कंधा तक भी नसीब नहीं ओ.पी.पाल.रोहतक।--- कोरोना ने रिश्तों और मानवता पर दोहरा प्रहार किया है। जिसकी टीस हमारे सामाजिक ताने बाने पर उभरी नजर आ रही है। अनेक पीडित परिवारों का दर्द है कि वो अंतिम समय में अपनों का चेहरा तक नहीं देख पाए। कोरोना प्रोटोकाल के चलते अंतिम संस्कार में उन्हें जाने तक की अनुमति दी गई। यह हमारे रिश्तों और संस्कारों का उजला आईना है जिसका दूसरा पक्ष अंधकार भरा है। इस महामारी में अनेक ऐसे भी रहे जो अपने परिवार में मौत होने पर उसे मुखाग्नि देने को श्मशान घाट तक ही नहीं पहुंच सके। ऐसे में उनका अंतिम संस्कार सरकारी कर्मचारियों ने कर दिया। अब उनकी अस्थियां लेने भी कोई नहीं आया। ऐसे अनेक मृतक हैं जिनकी अस्तियां हरिद्वार ले जाने को समाजिक संस्थाएं आगे आई हैं। हरियाणा के ज्यादातर जिलों में कोरोना की दूसरी लहर के कोहराम के बीच संक्रमण से मरने वालों का आंकड़ा आसमान छूता नजर आ रहा है। अब धीरे धीरे कोरोना संक्रमण के मामलों में तो कमी आ रही है, लेकिन उसके हिसाब से मौतों के आंकड़े में वो कमी आने का नाम नहीं ले रही है। मसलन कोरोना वायरस ने दुनिया ही नहीं बदली, बल्कि सामाजिक और धार्मिक परंपराएं तक बदलने को मजबूर कर दिया। कोरोना की वजह से लोगों में इतना भय बना हुआ है कि उसके कारण अपनो की मौत होने पर वह शमशान घाटों तक नहीं जा पा रहे। कोरोना संक्रमण से मरने वालों को अपनो का कंधा तक नसीब नहीं हो पा रहा है और दाह संस्कार भी स्थानीय निकायों के कर्मचारियों या विभिन सामाजिक संस्थाओं को करना पड़ रहा है। यही नहीं शमशान घाटों में अस्थियां रखने के लिए लॉकर तक बनाने पड़ रहे हैं, जहां अस्थियों को रखा जा रहा है। हालांकि देर से ही सही प्रदेश के ज्यादातर जिलों में परिजन अस्थियां अपना रहे हैं। बाकी जो अपनो का इंतजार करती अस्थियों को शमशान घाटों का संचालन करने वाली समितयां अथवा धार्मिक और सामाजिक संस्थाएं खुद विसर्जन करा रही हैं। सभी जगह ऐसा भी नहीं है, लॉकडाउन के कारण कुछ परिजन अपनों की अस्थियों को शमशान संचालकों के जरिए अस्थियों को शमशान घाट में ही सुरक्षित रखवा रहे, जिन्हें कुछ दिनों बाद उन्हें विसर्जन के लिए एकत्र करेंगे। ----प्रदेश में आठ हजार से ज्यादा मौतें---- प्रदेश में कोरोना संक्रमण की चपेट में आए आठ हजार से ज्यादा लोगों को मौत ने अपने आगोश में लिया है, लेकिन इनमें से पांच हजार से ज्यादा लोगों की मौत कोरोना की दूसरी लहर यानि अप्रैल व मई में हुई है। मौजूदा मई का महीना तो हरियाणा के लिए ज्यादा ही खौफजदा रहा है, जिसमें चार हजार लोगों को कोरोना संक्रमण ने लीला है। जाहिर सी बात है कि कोरोना संक्रमण से मरने वालों का अंतिम संस्कार भी कोरोना प्रोटोकॉल के तहत होता है। हालांकि हरियाणा में अकेले मई माह में अब तक चार हजार से ज्यादा लागों की संक्रमण से मौत हुई है, जिनमें कुछेक जिनकी अपने घर में ही मौत हुई है को छोड़कर ज्यादातर का अंतिम संस्कार कोरोना प्रोटोकॉल के हिसाब से हुआ है। ----ज्यादातर अपने कर रहे हैं अस्थियां विसर्जित---- हरियाणा में कोरोना के खौफ के बावजूद संक्रमण से मरे लोगों का भले ही अंतिम संस्कार नगर निगम, स्वास्थ्य विभाग की टीमों या सामाजिक संस्थाओं ने कराया हो, लेकिन अपनों की अस्थियां लेने के लिए ज्यादातर परिवारों ने दिलचस्पी दिखाई है। मसलन हिसार में करीब आठ सौ लोगों का दाह संस्कार नगर निगम की टीमों ने कहराया, लेकिन ज्यादातर लोगों ने अपनों की अस्थियों को ग्रहण किया। इसी प्रकार करनाल में चार सौ लोगों का दाह संस्कार हुआ, जहां अनेक लोगों की अस्थियां शमशान घाटों के लॉकरों में बंद है। महेन्द्रगढ़ जिलें में भी करीब डेढ सौं लोगों की कोरोना से मौत हुई और परंपराओं के विपरीत कोरोना नियम से दाह संस्कार हुआ, ज्यादातर परिजनों ने अपनों की अस्थियों को अपनाया है। यमुनानगर में संक्रमण से मरने वाले करीब 350 का दाह संस्कार हुआ, जिनमें से एक को छोड़कर सभी परिजनों ने अस्थियां चुनी। कुरुक्षेत्र में करीब पौने दो सौं लोगों के दाह संस्कार के बाद अपनों ने अस्थियां चुनकर विसर्जित की। इस जिले में 193 ऐसे लावारिश शवों को दाह संस्कार हुआ, जिनकी अस्थियों को सामाजिक संस्थाओं ने हिंदू रीति रिवाज के साथ हरिद्वारा में विसर्जित किया। रेवाडी में अभी भी 15 लोगों की अस्थियां शमशान घाट के लॉकरों में बंद हैं, जबकि 115 लोगों की अस्थियों को उनके परिजन लेकर गये हैं। जबकि सोनीपत में सामाजिक संस्थाओं द्वारा 420 शवों का दाह संस्कार कराया, जिनमें केवल 15 लोगों की अस्थियां अपनों का इंतजार कर रही हैं। ---क्या है दाह संस्कार का प्रोटोकॉल---- कोरोना प्रोटोकॉल के तहत जिस भी कोरोना संक्रमित मरीज की इलाज के दौरान मौत होती है, तो उसकी सूचना परिजन को तो दी जाती है, लेकिन शव को चिकित्सकों की देखरेख में एंबुलेंस के साथ सीधे शमशान घाट पहुंचा जा रहा है, जहां परिजनों को सीमित संख्या में कोरोना दिशानिर्देशों की पालन की शर्त पर अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए बुलाया जाता है। शमशान घाट पर नगर निगम और स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा पीपीई किट के तहत दाह संस्कार कराया जाता है, जिसमें परिजनों को अपने के अंतिम दर्शन करने की भी इजाजत नहीं है। यदि अंतिम दर्शन कराने होते हैं तो परिवार के केवल दो लोगों को पीपीई किट के साथ कोरोना प्रोटोकोल के पालन के साथ केवल चेहरा दिखाया जा सकता है। इस प्रोटोकॉल के तहत दाह संस्कार से पहले की कोई रस्म तक नहीं हो पा रही है। दाह संस्कार के बाद परिजन अस्थियां ले सकते हैं और यदि समय रहते नहीं ले पाते, तो उन्हें शमशान घाट के लॉकर में रख दिया जाता है। ---क्या रही प्राचीन परंपराएं---- सामान्य या गैर कारोना बीमारी से मरने वाले लोगों का परिजन दाह संस्कार और तेरहवीं जैसी सभी अन्य रस्मे धार्मिक परंपराओं के तहत करते हैं, जिनके अंतिम दर्शन के साथ शव यात्रा में रिश्ते-नाते वालों के अलावा पडोसी और अन्य जानकार भी शामिल होकर परिजनों के साथ अर्थी को कंधा तक देते हैं। शमशान घाट पर वहां की संचालन समिति में शामिल पंडित द्वारा चिता लगाने से पहले की जाने वाली धार्मिक रस्म और नहलाने जैसी परंपरा पूरी की जाती है। इसके बाद तीजा की रस्म से पहले यानि दाह संस्कार के तीसरे दिन सुबह ही परिजन चिता से अपनों की अस्थियां चुनकर ले जाते हैं, जिन्हें गंगा या अन्य जल प्रवाह में रीति रिवाज के साथ विसर्जित करते हैं। इसी प्रकार की बहुत सी परंपराएं हैं जो तीजा और तेरहवीं तक होता है। वहीं देवी देवताओं में आस्था बनाए रखने के लिए पिंड दान की परंपरा भी है। लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण पडोसी और रिश्तेदार का तो कोई सवाल ही नहीं, बल्कि परिजन भी अपनो की अस्थियां तक अपनाने से दूर भाग रहे हैं। 31May-2021