सोमवार, 7 जनवरी 2019

संसद में महत्वपूर्ण बिलों पर कसौटी पर सरकार

आखिर दो दिन की बैठक में बढ़ा काम का दबाव
हरिभूमि ब्यूरो. नई दिल्ली।
संसद के शीतकालीन सत्र की हंगामेदार शुरूआत के बाद दोनों सदनों में लगातार 14 दिन की की कार्यवाही हंगामें में होम होने के कारण सरकार एजेंडे के महत्वपूर्ण काम को आगे नहीं बढ़ा सकी है। कल सोमवार से होने वाली कार्यवाही समेत अब केवल दो दिन बाकी है, जिसमें भारीभरकम एजेंडे में शामिल तीन तलाक और मोटरयान जैसे एक दर्जन से भी ज्यादा विधेयक लटकने की संभावनाएं बनी हुई है। मसलन अभी तक संसद में केवल दो विधेयकों पर ही मुहर लग सकी है।
संसद में 11 दिसंबर से आरंभ हुए शीतकालीन सत्र में शुरू से ही राफेल, राम मंदिर, कावेरी और आंध्र प्रदेश जैसे विभिन्न मुद्दों को लेकर विपक्ष ने आक्रमक तेवर अपनाए और लगातार 14 दिन तक लोकसभा और राज्यसभा में प्रश्नकाल व शून्यकाल तक नहीं होने दिया। हालांकि इसी हंगामे में लोकसभा में करीब एक दर्जन विधेयक पारित कराए गये, लेकिन वे राज्यसभा में आकर अटक गये। इस सत्र में 16 बैठकें हुई हैं, जिसमें दिव्यांगों से संबन्धित राष्ट्रीय स्वपरायणता प्रमस्तिष्क घात, मानसिक मंदता और बहु-निशक्तता ग्रस्त कल्याण न्यास (संशोधन) विधेयक तथा बच्चों की नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा (संशोधन) विधेयक ही ऐसे रहे हैं जिन पर दोनों सदनों की मुहर लगी है।
तीन तलाक बिल के लटकने के आसार 
लोकसभा में तीन तलाका संबन्धी अध्यादेश को विधेयक के रूप में पारित होने के बाद राज्यसभा में एक बार फिर से चर्चा के लिए लंबित है, लेकिन विपक्ष के मौजूदा स्वरूप का विरोध होने के कारण ऐसी संभावना है कि कल सोमवार को भी इस विधेयक पर चर्चा होने की उम्मीद कम ही नजर आ रही हैं। इसी प्रकार देश में सड़क हादसों और यातायात नियमों को सख्त करने की दिशा में राज्यसभा में पिछले साल से लंबित नए मोटर वाहन संशोधन विधेयक के फिर से अटकने की संभावना बरकरार हैं। इसी प्रकार सरकार के एक दर्जन से ज्यादा ऐसे महत्वपूर्ण विधेयक और सरकारी कार्य  संसद में अटक सकते हैं, जो सरकार की प्राथमिकता में शामिल रहे। इसका प्रमुख कारण यह भी माना जा रहा है कि संसद सत्र की केवल दो दिन की बैठकें होना बाकी है।
राज्यसभा में कठिन डगर
केंद्र सरकार मौजूदा संसद के शीतकालीन सत्र के लिए तीन अध्यादेशों को विधेयकों का रूप देने तथा सात नए विधेयक समेत कुल 46 विधेयक अपने भारी भरकम ऐजेंडे में लेकर आई थी, लेकिन शीतकालीन सत्र की सर्वाधिक बैठकें हंगामे की भेंट चढ़ गई और ऐसे में सरकार के लिए लोकसभा व राज्यसभा में लंबित पड़े महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने की चुनौती एक कसौटी के रूप में सामने खड़ी हुई है।  सरकार ने इस सत्र के एजेंडे में दोनों सदनों में लंबित पड़े 23 विधेयकों को भी पारित कराने के इरादे से शामिल किया था। जबकि इसके अलावा 7 नए विधेयक भी सरकार के एजेंडे पर थे, जिन्हें लोकसभा में तो पारित करा लिया गया है, लेकिन उच्च सदन में ये विधेयक सरकार के लिए पारित कराना किसी चुनौती से कम नहीं है। इसका कारण राज्यसभा में सत्तापक्ष का अल्पमत में होना है।
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संसद में आज का एजेंडा
संसद में अंतिम सप्ताह के दो दिनों की कार्यवाही के लिए सोमवार के एजेंडे में खासकर राज्यसभा की कार्यसूची में सरकार ने लोकसभा से पारित कराए गये मुस्लिम महिला (विवाह संरक्षण अधिकार) विधेयक, उपभोक्ता संरक्षण विधेयक, भारतीय चिकित्सा परिषद (संशोधन) विधेयक, राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग विधेयक, भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद (संशोधन) विधेयक, नई मध्यस्थता और सुलह (संशोधन) विधेयक, लोक प्रतिनिधित्व (संशोधन) विधेयक के अलावा 11 विधेयकों को शामिल किया है। जबकि लोकसभा में रेलवे से संबन्धित वित्तीय समाधान और निक्षेप बीमा विधेयक, लोक परिसर (अनधिकृत कब्जा खाली कराना) संशोधन विधेयक जैसे विधेयकों को कार्य सूची में शामिल किया गया है। इसके अलावा समितियों की रिपोर्ट और विभिन्न विषयों पर मंत्रियों के वक्तव्य भी दोनों सदनों की कार्यसूची में शामिल हैं।
07Jan-2019

रविवार, 6 जनवरी 2019

अब पेट्रोलियम आउटलेटों पर मिलेगा फास्टैग

एनएचएआई तेल कंपनियों से कर रही समझौता  
हरिभूमि ब्यूरो. नई दिल्ली।
देश में परिवहन व्यवस्था को दुरस्त करने के लिए खासकर राष्ट्रीय राजमार्गो पर बने टोल प्लाजाओं पर जाम से निजात दिलाने की दिशा में केंद्र सरकार की ई-टोल संग्रहण प्रणाली के रूप में फास्टैग की योजना शुरू की थी। योजना के लक्ष्य को हासिल करने के लिए अब एनएचएआई पेट्रोलियम आउटलेटों पर फास्टैग उपलब्ध कराएगा।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण पेट्रोलियम खुदरा दुकानों के माध्यम से फास्टैग्स को जारी करने के लिए तेल विपणन कंपनियों के साथ मिलकर कार्य करने का निर्णय लिया है। इसके लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा प्रवर्तित कंपनी भारतीय राजमार्ग प्रबंधन कंपनी लिमिटेड (आईएचएमसीएल) आगामी सोमवार 7 जनवरी को राज्य सरकार द्वारा संचालित तेल विपणन कंपनियों (आईओसीएल,बीपीसी और एचपीसी) के साथ एक समझौते ज्ञापन पर हस्ताक्षर करेगी। सरकार ने टोल प्लाजाओं पर ई-टोल संग्रह प्रणाली के लक्ष्य को पूरा करने के लिए अब फास्टैग्स की आसान उपलब्धता को सुनिश्चित करने के लिए नया कदम उठाया है। इस समझौते से देशभर के पेट्रोलियम विक्रय केन्द्रों पर फास्टैग्स की उपलब्धता को सुनिश्चित किया जा सकेगा।
एनसीआर से होगी शुरूआत
मंत्रालय के अनुसार इस करार में पहले चरण में यह फास्टैग दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के 50 तेल स्टेशनों पर उपलब्ध होंगे, इसके बाद इन्हें सम्पूर्ण भारत के विक्रय केन्द्रों में विस्तारित किया जाएगा। आईएचएमसीएल को देश में राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह कार्यक्रम (एनईटीसी) को लागू करने के लिए अधिकृत किया गया है। कंपनी ने अप्रैल 2016 में फास्टैग ब्रांड के तहत इस कार्यक्रम का शुभांरभ किया था। इस कार्यक्रम ने पिछले वर्षों में अब यह राष्ट्रीय राजमार्गों और चयनित 450 से अधिक टोल प्लाजाओं पर संचालन में हैं। वर्तमान एनईटीसी कार्यक्रम में, फास्टटेग्स को प्रमाणित बैंकों द्वारा कुछ सीमित माध्यमों जैसे एनएच टोल प्लाजा पर प्वाइंट-ऑफ-सेल, ऑनलाइन और चयनित बैंक शाखाओं के माध्यम से  जारी किया जा रहा हैं। सरकार के हाल के उपायों जैसे भारत के सभी टोल प्लाजाओँ में प्रस्तावित फास्टैग-जीएसटी एकीकरण और फास्टैग्स स्वीकृति जैसे विपणन माध्यमों को बढ़ाने की तत्काल आवश्यकता है। ये समझौता ज्ञापन विकसित बाजार की उम्मीदों को पूरा करने में आईएचएमसीएल की सहायता करेगा।
06Jan-2019

रेलवे ने योजनाओं तेज करने के लिए कसी कमर



समीक्षा बैठक में तिमाही रोडमैप तैयार करने के निर्देश
हरिभूमि ब्यूरो. नई दिल्ली।
भारतीय रेलवे की कायाकल्प और यात्रियों की सुविधाओं तथा सुरक्षा की प्राथमिकता के साथ चलाई जा रही रेलवे परियोजनाओं में तेजी लाने पर बल दिया जा रहा है। रेल मंत्री पीयूष गोयल ने रेलवे बोर्ड और जोनल रेलवे के तमाम महाप्रबंधकों व संभागीय रेलवे के प्रबंधकों के साथ एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में जनवरी-मार्च के लिए तिमाही रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिये हैं।
रेल मंत्रालय के प्रवक्ता ने यह जानकारी देते हुए बताया कि इस समीक्षा बैठक के दौरान केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए डीआरएम के साथ भी रेल परियोजनाओं को तेजी से कार्यान्वित करने के लिए बातचीत की। उन्होंने मौजूदा वर्ष के दौरान कामकाज की समीक्षा करते हुए सभी अधिकारियों को आगामी जनवरी-मार्च 2019 तिमाही के लिए रोडमैप तैयार करने का निर्देश दिया, जिसमें रेलवे परियोजनाओं और गतिविधियों की कड़ी निगरानी और उन्हें समय पर पूरा किये जाने पर बल दिया। बैठक के दौरान पीयूष गोयल ने रेलवे के उच्चाधिकारियों का आव्हान किया कि वे समयबद्ध तरीके से विभिन्न परियोजनाओं और गतिविधियों को पूरा करने के लिए कमर कस लें। खासतौर पर निर्धारित तारीख तक रेल सुरक्षा, यात्री सुविधा, सेवा, राजस्व, अवसंरचना विकास, स्टाफ कल्याण और कामकाज के हर स्तर पर पारदर्शिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि तिमाही रोडमैप के लिए रेलवे पदाधिकारियों द्वारा चालू परियोजनाओं की निगरानी के लिए 15 जनवरी तक एकीकृत डैशबोर्ड और इसे अधिक पारदर्शिता के मद्देनज़र जनता के लिए काम शुरू होने के पहले और पूरा होने के बाद की तस्वीरों को नियमित रूप से डैशबोर्ड पर अपलोड किया जाए।
रोडमैप में रेलवे का लक्ष्य
बैठक के दौरान रेल मंत्री गोयल ने रोडमैप के लक्ष्य भी तय किये, जिसमें 2000 रेलवे स्टेशनों पर वाई-फाई की उपलब्धता सुनिश्चित करने, सभी शिकायतों के लिए एकल हेल्पलाइन नंबर और आरक्षण चार्ट की पब्लिक डोमेन में उपलब्धता शामिल करने को कहा है। वहीं इस तिमाही में लगभग 600-700 किलोमीटर पूर्वी और पश्चिमी डीएफसी को चालू करने, सभी खान-पान स्टाफ और टीटीई को यथाशीघ्र मार्च तक स्वाइप और बिल जनरेटिंग मशीन के साथ पीओएस मशीनें वितरित करना सुनिश्चित करने के निर्देश दिये। वहीं उन्होंने फरवरी 2019 तक 68 स्टेशनों का पुनर्विकास के काम को पूरा करने का लक्ष्य भी तय किया है। इसके अलावा 15 फरवरी से पहले 100 स्टेशनों पर 3-डी डिजिटल संग्रहालयों को पूरा करने और कुलियो के लिए कल्याणकारी उपाय पूरे करने पर बल दिया गया।
समर्पित माल कॉरीडोर की शुरूआत
समर्पित माल कॉरीडोर के निर्माण की ठोस प्रगति का जायजा लेते हुए गोयल ने कहा कि इस तिमाही में 777 किलोमीटर पूर्वी और पश्चिमी डीएफसी को चालू करने को सुनिश्चित किया जाए।
पारदर्शी आरक्षण प्रणाली
रेल मंत्री ने कहा कि टिकट बुकिंग को और अधिक पारदर्शी बनाने के दृष्टिकोण से मंत्रिमंडल ने निर्देश दिये हैं कि आरक्षण चार्ट को जनता के सामने जल्‍द से जल्द उपलब्‍ध कराया जाना चाहिए। अगर सीट उपलब्ध है तो रेलों के निर्धारित प्रस्‍थानों या ट्रेन में चढ़ने के बाद भी टिकटों की बुकिंग की संभावना का पता लगाया जाए।
05Jan-2019

राज्यसभा: विधवाओं के कल्याण पर आया संकल्प गिरा

सरकार का दावा-पहले से ही पटरी पर हैं अनेक योजनाएं 
हरिभूमि ब्यूरो. नई दिल्ली।
राज्यसभा में शुक्रवार को देश में विधवाओं के कल्याण पर पेश गत मानसून सत्र में पेश किये गये निजी संकल्प(रेजुलेशन) पर को चर्चा के लिए पेश किया, लेकिन सरकार की ओर से विधवाओं के कल्याण के लिए चलाई जा रही योजनाओं को व्यापक स्तर पर लागू करने के दावे के बीच इस संकल्प को वापस लेने को कहा, लेकिन विपक्ष ने इस पर मत विभाजन मांगा। मतविभाजन के बाद सदन में मौजूद 59 सांसदों में से सत्तापक्ष के 35 के मुकाबले विपक्ष के 23 मतों के कारण यह संकल्प गिर गया।
संसद के दोनों सदनों में शुक्रवार को भोजनावकाश के बाद गैर सरकारी विधेयक और संकल्प पेश किये जाते हैं। इसी के तहत शुक्रवार को अन्नाद्रमुक सांसद तिरुचि शिवा ने इस निजी सकंल्प पर बोलते हुए सदन को बताया कि 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में विधवाओं की संख्या 4.33 करोड़ है जो देश की महिला आबादी का 7.37 फीसदी और विश्व में विधवाओं की सर्वाधिक आबादी है। उन्होंने कहा कि देश में विधवाओं की स्थिति बेहद खराब होती जा रही है। शिवा ने भारतीय समाज में अभी तक चल रहे पुरातन रूढ़ियों के चलते पति की मृत्यु को सामाजिक कलंक समझा जाता है, जिसके कारण विधवाओं की आजीविका बद से बदतर होती जा रही है। हालांकि सरकार द्वारा उनके लिए सेंटर होम बनाने की योजना भी  है। शिवा ने मथुरा के वृंदावन में बनाए जा रहे एक हजार विधवाओं की क्षमता वाले सेंटर होम को नाकाफी बताते हुए केंद्र सरकार से देश में विधवाओं के कल्याण के लिए एक ऐसा उपयुक्त कानून बनाने का अनुरोध किया, जो उनकी सामाजिक सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम हो। इसके लिए उन्होंने सरकार से निराश्रित विधवाओं को मौजूदा जीवन स्तर के बराबर पर्याप्त वित्तीय सहायता प्रदान करने और ऐसी नीति तैयार करने पर बल दिया जिससे विधवाओं को उचित कानूनी सहायता और स्वास्थ्य की देखभाल की सुविधा मुहैया हो सके।
सरकार का तर्क
सदन में विधवाओं के कल्याण संबन्धी इस सकंल्प को वापस लेने का अनुरोध करते हुए सरकार ने दावा किया कि केंद्र सरकार पहले से ही देश की विधवाओं के कल्याण के लिए प्रतिबद्धता के साथ अनेक योजनाएं लागू करती आ रही है। महिला एवं बाल कल्याण राज्यमंत्री चौधरी वीरेन्द्र कुमार ने मथुरा-वृंदावन में विधवाओं के कल्याण के लिए बनवाए गये विधवा बाल कल्याण गृह में दी जा रही सुविधाओं को प्रर्याप्त करार देत हुए कहा कि उसकी क्षमता बढ़ाने के लिए भी उनका मंत्रालय तैयार है यदि राज्य सरकार ऐसा कोई प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजे। संबन्धित मंत्री वीरेन्द्र कुमार के बाद संसदीय कार्य मंत्री विजय गोयल ने तिरुचि शिवा से पूछा कि केंद्र सरकार की विधवाओं के कल्याण की प्रतिबद्धता को देखते हुए क्या वह इस संकल्प को वापस लेना चाहेंगे, तो इस पर उप सभापति ने सदन की राय ली, लेकिन विपक्ष संकल्प को पारित कराने की मांग करने लगा। इस पर उपसभापति   हरिवंश ने पहले सदन के मौखिक मत विभाजन की परंपरा अपनाई, लेकिन इस पर राय नहीं, बनी तो फिर सदन में संकल्प पर मतदान कराया गया। इस मतदान के दौरान सदन में मौजूद 59 सांसदों में से संकल्प वापसी के लिए 35 वोट पड़े, जबकि पारित कराने के पक्ष में केवल 23 मत मिले और इसे खारिज कर दिया गया।
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आंकड़ो की सुरक्षा पर कानून बनाने की योजना
राज्यसभा में शुक्रवार को केंद्रीय आईटी एवं कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने प्रश्नकाल के दौरान एक सवाल के जवाब में कहा कि एक लाख रूपए से कम राशि वाले आर्थिक फर्जीवाड़ों के मामलों पर गौर करने के लिए सरकार रिजर्व बैंक के साथ मिलकर आंकड़ो की सुरक्षा के लिए कानून बनाने का काम कर रही है। इसके लिए वित्तीय आंकड़ा सुरक्षा विधेयक तैयार किया जा रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि भारत की डिजिटल और आईटी ताकत इतनी मजबूत है कि आंकड़ों को कोई नहीं चुरा सकता है और नियमों का उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि साइबर अपराध से निबटने के लिए सुरक्षा अभ्यास के अलावा प्रशिक्षण पर भी जोर दिया जा रहा है उन्होंने कहा कि पुलिस में अलग से आईटी सेल भी बनाया गया है।
04Jan-2019


राज्यसभा: आखिर पटरी पर आई सदन की कार्यवाही


शीतकालीन सत्र में पहली बार चला शून्यकाल व प्रश्नकाल
हरिभूमि ब्यूरो. नई दिल्ली।
आखिर संसद के शीतकालीन सत्र में अभी तक चल रहे हंगामे का कारण बने सरकार और विपक्ष के बीच चले आ रहे गतिरोध पर विराम लगता नजर आया। राज्यसभा में गुरुवार को इस सत्र में पहली बार शून्यकाल व प्रश्नकाल के अलावा जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर जोरदार व गरम चर्चा भी हुई।
संसद में 11 दिसंबर से शुरू हुए शीतकालीन सत्र के दौरान अभी तक हुई बैठकों में सरकार और विपक्ष के बीच राफेल, कावेरी, आंध्र प्रदेश और अन्य मुद्दों को लेकर जारी गतिरोध के कारण दोनों सदनों में कामकाज पटरी पर नहीं आ पा रहा था। खासतौर पर राज्यसभा में एक दर्जन से ज्यादा बैठकें हंगामे की भेंट चढ़ गई और कामकाज पूरी तरह से ठप रहा। राज्यसभा में कल बुधवार को आसन के करीब आकर कावेरी मुद्दे पर पहले दिन से ही नारेबाजी करने वाले अन्नाद्रमुक व द्रमुक सदस्यों के खिलाफ सभापति एम. वेंकैया नायडू की कार्यवाही करने और विपक्षी दलो के साथ चर्चा करने के बाद उच्च सदन में गुरुवार को माहौल बदला नजर आया। राज्यसभा में 12 दिसंबर को केवल दिव्यांगों से संबन्धित राष्ट्रीय स्वपरायणता प्रमस्तिष्क घात, मानसिक मंदता और बहु-निशक्तता ग्रस्त कल्याण न्यास (संशोधन) विधेयक पारित हुआ था, जिसके बाद उसे लोकसभा ने मंजूरी दी। मसलन अभी तक संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान यही विधेयक ऐसा है जिसे संसद की मंजूरी मिल चुकी है, अन्यथा लोकसभा में हंगामे के बीच मुस्लिम महिलाएं (विवाह अधिकारों संरक्षण) विधेयक समेत आधा दर्जन से ज्यादा विधेयक इस गतिरोध व हंगामे के कारण राज्यसभा में अटके हुए हैं। दरअसल उच्च सदन में गुरुवार को कार्यवाही शुरू होने पर सभापति एम. वेंकैया नायडू ने सबसे पहले सदन की कार्यवाही को शांतिपूर्ण चलाने में सभी दलों द्वारा दिये गये भरोसे की जानकारी दी और कहा कि सभी सदस्यों का दायित्व है कि संसद में जनता से जुड़े मुद्दों और राष्ट्रहित के कार्यो को आगे बढ़ाने में सहयोग दें। उन्होंने उम्मीद जताई कि सदस्य अगले तीन दिनों की कार्यवाही में भी सहयोग बनाकर सरकारी कामकाज में भी सार्थक भूमिका निभाएंगे।
शून्यकाल में उठे महत्वपूर्ण मुद्दे
राज्यसभा की गुरुवार को कार्यवाही शुरू होने पर सभापति एम. वेंकैया नायडू ने आवश्यक दस्तावेजों को पटल पर रखवाया और उसके बाद शून्यकाल शुरू करने का ऐलान किया। हालांकि शुरू में हल्का शोर शराबा भी हुआ, लेकिन शून्यकाल सुचारू रूप से चला और विभिन्न दलों ने नवोदय स्कूलों में छात्रों की आत्महत्या, यूपीएससी और इसी प्रकार की परीक्षाओं में क्षेत्रीय भाषा, महिला आरक्षण, मेघालय खदान में फंसे मजदूरो, पुराने कर्मचारियों की पेंशन, नमामि गंगे मिशन में बांधों के निर्माण को रोकने, निजी क्षेत्र के बैंकों, कंप्यूटर व संचार प्रणाली में निगरानी से निजता, किसानों की भूमिअधिग्रहण के मुआवजे, महाराष्ट्र में धनगर शब्द को बिगाड़कर धनगड करने से जनजाति का दर्जा छीनने, देश में ब्लड बैंकों की खराब स्थिति तथा देश में फर्जी डाक्टरों व नकली दवाई के साथ रेल नेटवर्क को दुरस्त करने जैसे मुद्दे उठाए। खासबात यह रही कि समय की बचत के लिए इन मुद्दों पर एक सांसद का सभी दलों के सांसदों ने अपने आपको संबद्ध किया।
प्रश्नकाल में पूरे सवाल
राज्यसभा में भले ही शीतकालीन सत्र के दौरान पहली बार प्रश्नकाल शांतिपूर्ण ढंग से चला और सांसदों के सवालों व पूरक प्रश्नों के उत्तर पर भी संबन्धित मंत्रियों ने दिये। सदन में प्रश्नकाल में सभी 15 प्रश्नों को लिया गया। इनमें प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा, कार्मिक, लोकशिकायत और पेंशन संबन्धी सवालों के जवाब पीएमओ में राज्यमंत्री डा. जितेन्द्र सिंह ने दिये। दो बजे शुरू हुई सदन की कार्यवाही में सुषमा स्वराज ने वापस करने के लिए नालंदा विश्वविद्यालय(संशोधन) विधेयक-2013 विधेयक पेश किया, जिसे समूचे सदन की मंजूरी मिली।
जम्मू-कश्मीर पर हुई जोरदार चर्चा
सदन में गृह मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा दो जनवरी को जम्मू-कश्मीर से संबन्धित उस संकल्प पर चर्चा को आगे बढ़ाया गया, जिसमें राष्ट्रपति द्वारा 19 दिसंबर को जम्मू-कश्मीर राज्य के संबन्ध में भारत के संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत जारी हुई उद्घोषणा का अनुमोदन किया गया। दो घंटे से ज्यादा समय तक चली इस चर्चा में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच गरमा गरमी भी हुई और यह चर्चा के दौरान खासकर सदन के नेता अरुण जेटली व नेता प्रतिपक्ष गुलामनबी आजाद के बीच तीखी झड़पे भी देखने को मिली।
04Jan-2019
 


चिकित्सकों की कमी से जूझ रहे हैं कैदी

देशभर की जेलों में स्वीकृत 43 फिसदी डाक्टरों की नियुक्ति नहीं
हरिभूमि ब्यूरो. नई दिल्ली।
केंद्र सरकार द्वारा देश की जेलों के आधुनिकीकरण के साथ वहां विचाराधीन कैदियों के स्वास्थ्य संबन्धी सुविधाओं का विस्तार करने की योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन तमाम जेलों में चिकित्सकों की कमी का कैदियों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। मसलन देशभर की जेलों में स्वीकृत स्वीकृत चिकित्सकों के मुकाबले करीब 57 फीसदी ही जेल अस्पतलों में नियुक्त हैं।
यह जानकारी बुधवार को राज्यसभा में कांग्रेस सांसद पीएल पुनिया के सवालों के लिखित जवाब में गृह राज्यमंत्री हंसराज गंगाराम अहीर ने स्वीकार किया कि मंत्रालय के पास इस सबंध में 2015 तक के ही आंकड़े हैं, जिसमें जेलों में कैदियों के अनुपात के आधार पर 29 राज्यों व 7 केंद्र शासित प्रदेशो की जेलों में 1152 रेजिडेंट मेडिकल आफीसर और मेडिकल आफीसर के पद स्वीकृत हैं, लेकिन 657 चिकित्साधिकारी ही तैनात हैं। उन्होंने कहा कि जेलों में कैदियों के स्वास्थ्य संबन्धी सुविधाओं का विस्तार करने की योजनाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है और राज्यों में कैदियों के अनुपात के आधार पर चिकित्सकों की जेलों के अस्पतालों में तैनाती की जाती है, जो राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में है। अहीर ने सदन में बताया कि गृह मंत्रालय द्वारा सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को जारी मॉडल कारागार मैनुअल के अनुसार सभी केंद्रीय और जिला कारागारों की प्राथमिकता के पांच प्रतिशत के पैमाने पर अस्पताल की सुविधा और उनमें कैदियों के अनुपात के आधार पर चिकित्सकों की नियुक्ति की जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि 50 बिस्तरों और उससे अधिक के बड़े अस्पतालों को ‘क’ श्रेणी तथा 50 बिस्तरों से कम वाले अस्पतालों को ‘ख’ श्रेणी के अस्पताल के रूप में वर्गीकृत किया गया है। मंत्रालय के आंकड़ो के अनुसार देश में प्रत्येक जेल के लिए नियुक्त चिकित्साधिकारियों में स्त्री रोग विशेषज्ञ, फिजिशियन, ह्दय रोग विशेषज्ञ और अन्य रोगों के जानकार डाक्टरों को तैनात करने के अलावा फार्मेसिस्ट और पराचिकित्सक कर्मचारियों के पद सृजित किये गये हैं।
छग में नौ, मप्र में 10 व हरियाणा में 19 डाक्टर
गृह मंत्रालय के अनुसार देशभर में केंद्रीय व जिला जेलों में स्वीकृत 1162 की तुलना में तैनात 657 चिकित्साधिकारियों में छत्तीसगढ़ राज्य में 43 चिकित्साधिकारियों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन इस राज्य में अभी तक 34 पद रिक्त हैं यानि केवल नौ डाक्टर ही तैनात हैं। जबकि मध्य प्रदेश में स्वीकृत 57 चिकित्साधिकारियों के पदों के सापेक्ष केवल 10 पदों पर ही डाक्टर काम कर रहे हैं। इसी प्रकार हरियाणा राज्य की जेलों के अस्पतालों में 38 चिकित्साधिकारियों के पद स्वीकृत हैं, जिनमें मंत्रालय में उपलब्ध आंकड़ो के आधार पर 19 चिकित्सकों ही तैनाती है। यहां तक कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जेल अस्पतालों में 63 चिकित्साधिकारी तैनात हैं, जबकि यहां स्वीकृत पदों के मुताबिक 134 चिकित्साधिकारियों की तैनाती होनी चाहिए।
03Jan-2019


देशभर में सिग्नलफ्री होंगे राष्ट्रीय राजमार्ग

 हाइवे पर हर क्रासिंग पर बनेगा ओवरब्रिज व अंडरब्रिज
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।  
केंद्र सरकार ने 2020 तक सड़क हादसों में 50 फीसदी कमी लाने के लक्ष्य में नए साल में एक वृहद योजना का खाका खींचा है, जिसमें परिवहन व्यवस्था को सुगम एवं सुरक्षित बनाने की दिशा में देशभर में राष्ट्रीय राजमार्ग व एक्सप्रेस-वे पर आने वाले हरेक लेवल क्रासिंग या रेलवे फाटकों पर ओवर ब्रिज और अंडर ब्रिज बनाने की योजना को तेज करने का फैसला किया गया है।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार सेतुभारतम परियोजना को तेजी लागू करके सरकार राष्ट्रीय राजमार्गो को पूरी तरह सिग्नल फ्री करने के प्रयास में है, सरकार ने देश के सभी लेवल क्रासिंग के स्थानों पर रोड ओवर ब्रिज (आरओडी) या रोड अंडर ब्रिज (आरयूबी) बनाने की तैयार की गई योजना को नए साल में पटरी पर उतारने का फैसला किया है। मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार सेतु भारतम योजना के तहत कमजोर और संकरे पुलों को बदलने और चौड़ा करके मजबूत करने का कार्य भी इस योजना में शामिल किया है। हरिभूमि को मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक 2020 तक सड़क दुर्घटनाओं में 50 प्रतिशत की कमी लाने की दिशा में नवंबर 2014 में रेल मंत्रालय के साथ हुए समझौते के तहत राष्ट्रीय राजमार्गो पर आने वाले सभी लेवल क्रासिंग पर ओवरब्रिज व अंडरब्रिज बनाने के लिए 50,800 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान लगाया गया है। इसके लिए देशभर में कराए गये सर्वे के अनुसार 208 रेलवे क्रासिंग समेत कुल 515 आरओबी/ आरयूबी चिन्हित किये गये हैं। जबकि रेलवे क्रासिंग के अलावा सेतु भारतम योजना के तहत कुल 174 आरओबी/आरयूबी चिन्हित किये गये हैं, जिनमें 93 ओवरब्रिज के लिए 7121 करोड़ की राशि मंजूर की गई  है, जिनमें 57 आरओबी के ठेके भी दे दिये गये हैं।
208 रेलवे क्रासिंग चिन्हित
मंत्रालय के अनुसार देशभर में सेतु भारतम परियोजना के तहत 19 राज्यों में 208 रेलवे क्रासिंग को ओवर ब्रिज या अंडर पास में बदलने का कार्य के लिए 10,200 करोड़ रुपये की लागत स्वीकृत की गई थी। रेलवे क्रासिंग को ओवर ब्रिज व अंडर ब्रिज में बदलने का कार्य पहले से ही जारी है। इस परियोजना के तहत 208 रेलवे क्रासिंगों में राष्ट्रीय राजमार्गो पर छत्तीसगढ़ में तीन हाइवों पर पांच, मध्य प्रदेश में चार हाइवें पर छह व हरियाणा में दस राष्ट्रीय राजमार्गो पर दस रेलवे क्रासिंग पर ओवर ब्रिज या अंडर पास के निर्माण का कार्य किया जा रहा है। मंत्रालय के अनुसार 19 राज्यों में सर्वाधक 33 रेलवे क्रासिंग आंध्र प्रदेश और सबसे कम दो रेलवे क्रासिंग उत्तराखंड में चिन्हित किये गये थे।
छत्तीसगढ़ में लंबित नहीं कोई प्रस्ताव
राष्ट्रीय राजमार्गो पर छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय राजमार्गों पर ओवर ब्रिज (आरओबी) के निर्माण के संबंध में मंत्रालय के अधिकारी का कहना है कि इस राज्य में रोड ओवर ब्रिज के निर्माण के लिए मंत्रालय के पास कोई लंबित प्रस्ताव नहीं है। जबकि राष्ट्रीय राजमार्ग-353पर चैनेज 25.200 पर हरबंध के निकट रेलवे चैनेज 66/4 पर रायपुर से विशाखापट्टनम रेलवे लाइन पर एल/सी सं.42 पर आरओबी के निर्माण के लिए एक प्रस्ताव स्वीकृत किया गया है। मंत्रालय द्वारा 4 आरओबी के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट की तैयारी हेतु प्राक्कलन संस्वीकृत किए गए हैं तथा राज्य सरकार को डीपीआर तैयार किए जाने, भूमि अधिगृहीत करने और कार्यों की पारस्परिक प्राथमिकता एवं निधियों की उपलब्धता के आधार पर वार्षिक योजनाओं में शामिल करने हेतु प्रस्तावों को प्रस्तुत करने का अनुरोध किया गया है।
आईबीएमएस के दायरे में 1.73 पुल
सड़क परिवहन मंत्रालय के अनुसार देशभर में विभिन्न सड़क मार्गो पर मरम्मत, पुनर्निर्माण या नया निर्माण करने के लिए 1,72,517 पुलों, पुलियाओं और संरचनाओं को भारत पुल प्रबंधन प्रणाली (आईबीएमएस) के तहत चिन्हित किया गया है। इनमें 1,34,229 पुलिया (कल्वर्ट), 32,806 छोटे पुल, 3,647 बड़े पुल तथा 1,835 अधिक बड़े पुल शामिल हैं। प्रत्येक वर्ष मॉनूसन से पहले और बाद में पुलों की स्थिति की जांच की जाएगी। इनके आंकड़ों को डिजिटल रूप में विकसित करने, राष्ट्रीय राजमार्गों पर पुलों की पहचान करने, पुलों और संरचनाओं की स्थिति का सर्वेक्षण करने, सूची बनाने और कमजोर पुलों की पहचान करने तथा संबंधित एजेंसी को मरम्मत, पुनर्निर्माण या नया निर्माण के लिए सूचित करने के लिए आईबीएम प्रणाली का निर्माण किया गया है।
02Jan-2019


राज्यसभा में हंगामा: पेश नहीं हो सका तीन तलाक विधेयक

प्रवर समिति से जांच कराने की मांग पर अड़ा रहा विपक्ष                 
हरिभूमि ब्यूरो. नई दिल्ली।
लोकसभा में संशोधनों के साथ पारित हुए तीन तलाक संबन्धी विधेयक पर सोमवार को राज्यसभा में चर्चा होनी थी, लेकिन इसे जांच के लिए प्रवर समिति को भेजने की मांग पर अड़िग विपक्ष के हंगामे के कारण इस विधेयक को उच्च सदन में पेश नहीं किया जा सका।
संसद के शीतकालीन सत्र का 12वें दिन भी राज्यसभा हंगामे के नाम रही, जहां सोमवार को तीन तलाक संबन्धी मुस्लिम महिलाएं (विवाह अधिकारों संरक्षण) विधेयक पर चर्चा तय थी, जिसे पिछले सप्ताह लोकसभा ने संशोधनों के साथ पारित किया था। सोमवार को एक बार के स्थगन के बाद जब उच्च सदन की कार्यवाही दो बजे फिर शुरू हुई तो अन्नाद्रमुक सदस्यों के कावेरी मुद्दे को लेकर आसन के करीब आकर नारेबाजी करने लगे, इसी हंगामे के बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने स्वास्थ्य देखरेख वृत्ति विधेयक पेश किया। इसके बाद उपसभापति हरिवंश ने तीन तलाक संबन्धी ‘मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक 2018 पेश करने की प्रक्रिया शुरू करने का प्रयास किया, तो विपक्षी दल अपनी सीटों पर खड़े होकर तीन तलाक बिल को जांच के लिए प्रवर समिति के सुपुर्द करने की मांग करने लगे। इस हंगामे के बीच सत्ता व विपक्ष के बीच चले आरोप-प्रत्यारोप के कारण केंद्रीय विधि मंत्री रविशंकर प्रसाद तीन तलाक बिल को पेश करने के लिए खड़े भी नही हो सके, जिन्होंने सदन में व्यवस्था बनाने की ओर इशारा किया। इसी बीच तृणमूल कांग्रसे के डेरेक ओ' ब्रायन और बाद में प्रतिपक्ष नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि विपक्ष इस महत्वपूर्ण विधेयक को पारित करने और सदन की कार्यवाही को चलाने के पक्ष में हैं, लेकिन इससे पहले नियम 125 के तहत 15 प्रमुख विपक्षी दलों की ओर से इस विधेयक को प्रवर समिति को भेजे जाने का नोटिस दिया है, जिस पर चर्चा होनी चाहिए। सदन में पक्ष-विपक्ष के बीच तर्क-वितर्क के साथ हंगामे को देखते हुए उपसभापति ने सदन की कार्यवाही को दस मिनट बाद ही 15 मिनट के लिए स्थगित कर दिया। इस बीच उपसभापति के कक्ष में सत्ता और विपक्ष के कई नेता मंत्रणा और चर्चा करने के लिए गये, लेकिन जब फिर सदन की कार्यवाही शुरू होने पर तीन तलाक विधेयक पेश करने के लिए केंद्रीय मंत्री रविशंकर खड़े हुए और उन्होंने कहा कि विधि एवं न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि कल तक तीन तलाक हुए हैं। इस विधेयक को लटकाया नहीं जा सकता है। उच्चतम न्यायालय ने भी कानून बनाने के लिए कहा है। इस विषय पर विपक्षी दलों के आने वाले सुझावों को भी सुना जाएगा, लेकिन सदन में हंगामा शुरू हो गया और कार्यवाही को पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया गया।
आरोप-प्रत्यारोप
सदन में हंगामे के बीच संसदीय कार्य राज्यमंत्री विजय गोयल ने कहा कि जो कांग्रेस पहले इस विधेयक का समर्थन कर चुकी है, जबकि आज वह विरोध में खड़ी होकर तीन तलाक पर राजनीति कर रही है। इसके जवाब में कांग्रेस के आनंद शर्मा ने उल्टे तीन तलाक पर सरकार और सत्ता पक्ष पर राजनीति करने का आरोप मंढना शुरू किया, जिसके कारण सत्ता व विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप लगते रहे और दोनों ही पक्षों के अपने-अपने रुख पर कायम रहे यानि विपक्ष इसे प्रवर समिति में भेजने और सत्ता पक्ष प्रवर समिति में न भेजने पर अडिग रहा। इसी वजह से इस विधेयक को राज्यसभा में पेश नहीं किया जा सका और सदन की कार्यवाही को कुछ मिनटों बाद ही दो जनवरी 11 बजे तक स्थगित कर दिया गया।
अन्य मुद्दों पर हंगामा
सोमवार को सुबह उच्च सदन की कार्यवाही शुरू होने पर प्रख्यात फिल्मकार और राज्यसभा के पूर्व सदस्य मृणाल सेन के निधन पर शोक व्यक्त किया गया और सदस्यों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। इसके बाद आवश्यक दस्तावेजों को सदन के पटल पर रखवाया गया, जिसके बाद शून्यकाल शुरू करने का ऐलान होते ही अन्नाद्रमुक के सदस्यों ने कावेरी मुद्दे को लेकर आसन के करीब आकर नारेबाजी करने लगे और अन्य दलों के सदस्य भी विभिन्न मांगों को लेकर अपनी सीटों पर खड़े हो गये। सदन में हंगामा देख उपसभापति ने सदन की कार्यवाही को करीब सवा ग्यारह बजे दोपहर बाद दो बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।
01Jan-2019