गुरुवार, 12 अप्रैल 2018

इसी माह शुरू हो जाएगा ईस्टर्न ईस्टर्न एक्सप्रेसवे



देश में सड़क निर्माण की गति में 20 फीसदी वृद्धि
हरिभूमि ब्यूरो. नई दिल्ली।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में वाहनों का बोझ कम करने की दिशा में केंद्र सरकार की मेगा सड़क परियोजना में इस्टर्न पैरीफेरल एक्सप्रेस-वे और वेस्टर्न पैरीफेरल एक्सप्रेस-वे यानि ‘गोल्डन नेकलस’ के निर्माण का काम पूरा कर लिया गया है और इसी माह के मध्य में इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी करेंगे।
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि इस्टर्न पैरीफेरल एक्सप्रेस-वे के निर्माण पर काम लगभग पूरा हो चुका है, और जल्द ही इसे जनता के आवागमन हेतु खोल दिया जाएगा, उन्होंने संकेत दिये कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन अप्रैल माह के मध्य में करेंगे। इस एक्सप्रेस-वे की विशेषता बताते हुए उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से अभिगम-नियंत्रित एक्सप्रेसवे में केवल नामित इंटरचेंज के माध्यम से प्रविष्टि और निकास बिंदु हैं, जहां टोल केवल दूरी की यात्रा के लिए एकत्र की जाएगी। इसके लिए टोल प्लाजा इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह प्रणाली से सुसज्जित किये गये हैं। गडकरी ने कहा कि इस परियोजना के लिए 4420 करोड़ रुपये का लक्ष्य 910 दिनों के लक्ष्य के विपरीत 500 दिनों के रिकार्ड समय में पूरा किया जा रहा है। यह पूरी तरह से सौर शक्ति वाला देश का पहला एक्सप्रेस होगा, जिस पर चार मेगावाट क्षमता के आठ सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए गए हैं। एक्सप्रेसवे प्रदूषण को कम कर देगी और राष्ट्रीय राजधानी को घटा देगी, क्योंकि गैर-दिल्ली में बाध्य वाणिज्यिक वाहन शहर में प्रवेश नहीं करेंगे।
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे
केंद्रीय मंत्री गडकरी ने यह ऐलान भी किया कि महत्वाकांक्षी दिल्ली-मेरठ राजमार्ग परियोजना के अंतर्गत दिल्ली से 14-लेन राजमार्ग का निर्माण करने के लिए दिल्ली से मेरठ राजमार्ग परियोजना 15 महीने के रिकार्ड समय में लक्षित 30 महीने के मुकाबले समाप्त हो जाएगा। राजमार्ग के दोनों किनारों पर 2.5 मीटर का एक चक्र ट्रैक एक अनूठी विशेषता है। यमुना नदी पर स्थित मौजूदा प्रमुख पुल के दोनों किनारों पर दो नए 4-लेन पुलों को इसे 16-लेन पुल में बदल दिया जाएगा। यह सौर मंडल और ड्रिप सिंचाई के साथ ऊर्ध्वाधर उद्यान रखने के लिए देश का पहला पुल है।
नए वित्तीय वर्ष में रोज बनेगी 40 किमी सड़कें
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री गडकरी ने बताया कि वर्ष 2014 में 11 किमी लंबी सड़कों का प्रतिदिन निर्माण हो रहा था, लेकिन उन्होंने सड़क निर्माण कार्य में तेजी लाने के लिए जो फार्मूला दिया है उससे फिलहाल 20 किमी लंबी सड़कों का निर्माण हो रहा है और उनका लक्ष्य प्रतिदिन 40 किमी सड़क निर्माण का है, जिसे इस नए वित्तीय वर्ष में पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसी फार्मूले का नतीजा है कि वर्ष 2017-18 में 9829 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण किया गया। जो पिछले वर्ष हुए 8231 किलोमीटर निर्माण की तुलना में 20 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017-18 में 17055 किलोमीटर की सड़क की लंबाई को पिछले साल 15948 किलोमीटर की तुलना में सम्मानित किया गया था। वर्ष 2017-18 के दौरान राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण पर 1,16,324 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे।
04Apr-2018

राज्यसभा में नये 41 सदस्यों ने ली शपथ

जेटली फिर नियुक्त हुए उच्च सदन के नेता 
हरिभूमि ब्यूरो. नई दिल्ली।  
संसद में विपक्षी दलों के हंगामे के कारण 19वें दिन भी दोनों सदनों की कार्यवाही पटरी पर नहीं आ पायी। जबकि राज्यसभा में नवनिर्वाचित 41 सांसदों को सदन की सदस्यता के लिए शपथ दिलाई गई। लोकसभा में कल भारत बंद के दौरान हिंसा को लेकर गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने हंगामे के बीच ही अपना बयान दिया। लगातार हो रहे हंगामे के कारण मंगलवार को भी दोनों सदनों की कार्यवाही को पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया गया है।
राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होने पर सभापति ने हाल ही में हुए द्विवार्षिक चुनावों में नवनिर्वाचित सदस्यों की शपथ की जानकारी दी और 11 राज्यों के नवनिर्वाचित 41 सदस्यों को उच्च सदन की सदस्यता एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई गई। सभापति एम वेंकैया नायडू ने जिन नए सदस्यों को शपथ दिलाई है उनमें भाजपा के 23, कांग्रेस के 6, तृणमूल कांग्रेस के चार, जदयू, राजद व तेदेपा के दो-दो, शिवसेना, और राकांपा का एक-एक सदस्य शामिल हैं। उच्च सदन में दोबारा निर्वाचित होकर आए 18 सदस्यों में आठ केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली, रविशंकर प्रसाद, जेपी नड्डा, धर्मेन्द्र प्रधान, थांवरचंद गहलौत, प्रकाश जावडेकर, पुरुषोत्तम रुपाला, और मनसुख भाई मावडिया भी शामिल हैं, जबकि अन्य दस सदस्यों में तेदेपा सीएम रमेश, कांग्रेस कांग्रेस के अभिषेक सिंघवी भी शामिल हैं। जबकि नए सदस्यों में भाजपा के अनिल बलूनी, कैलाश सोनी, सरोज पांडेय, अनिल अग्रवाल, विजयपाल तोमर, अशोक वाजपेयी, अनिल कुमार जैन, देवेन्द्र पाल वत्स आदि के अलावा राजद के मनोज झा, जदयू के महेन्द्र प्रसाद और कांग्रेस के अखिल प्रसाद सिंह जैसे सदस्य शामिल हैं। मंगलवार को शपथ लेने वाले सदस्यों में आंध्र प्रदेश के दो, बिहार के छह, छत्तीसगढ, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, उत्तराखंड का एक-एक, मध्य प्रदेश के पांच, महाराष्ट्र के छह, उत्तर प्रदेश के आठ, पश्चिम बंगाल के पांच सदस्य शामिल रहे। इनमें से 26 सदस्यों ने हिंदी, चार ने अंग्रेजी, तीने बंगाली, दो ने तेलगू, दो ने मराठी के अलावा एक-एक ने संस्कृत, कन्नड व उद्रू में शपथ ली।
नायडू ने किया स्वागत
सभापति वेंकैया नायडू ने शपथ लेने वाले सदस्यो का सदन में स्वागत किया और कहा कि उच्च सदन में नौ भाषाओं में शपथ ली, जिसमें आठ सदस्यों की मातृभाषा है। इससे देश की भाषाई और सांस्कृतिक विविधता का पता चलता है। उन्होंने सदन में दोबारा चुनकर आए सदस्यों को अपने पुराने अनुभव को नए सदस्यों से साझा करने की उम्मीद की और उम्मीद जताई कि सदस्य विभिन्न विषयों पर होने वाली चर्चाओं में सार्थक रूप से हिस्सा लेंगे और संसदीय लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में सदन की गरिमा को भी बढाएंगे।
जेटली फिर उच्च सदन के नेता नियुक्त
सभापति एम वेंकैया नायडू ने मंगलवार सदन की कार्यवाही शुरू होने पर जानकारी दी कि संसदीय कार्यमंत्री अनंत कुमार ने उन्हें दो अप्रैल को लिखित सूचना दी, कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अरुण जेटली को नेता सदन नियुक्त किया है। उन्होंने कहा कि जेटली का उच्च सदन का कार्यकाल कल समाप्त हो गया था और इस कार्यकाल में भी वह नेता सदन की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उन्हें इस कार्यकाल में भी नेता सदन बनाया गया है। जेटली उत्तर प्रदेश से उच्च सदन में चुनकर आये हैं। हालाकि जेटली उस समय सदन में मौजूद नहीं थे।
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हंगामें के कारण संसद में नहीं हुआ कामकाज                               
राज्यसभा में मंगलवार को 41 नवनिर्वाचित सदस्यों को शपथ दिलाये जाने के बाद विपक्षी सदस्यों के विभिन्न मुद्दों पर हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी गयी। उच्च सदन में कावेरी प्रबंधन बोर्ड के गठन, आन्ध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने, तथा दलितों के मुद्दे पर विपक्षी सदस्यों ने भारी हंगामा किया जिससे सभापति को जरूरी दस्तावेज पटल पर रखवाये बिना ही कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित करनी पड़ी। नायडू ने इसके बाद जैसे ही विधायी दस्तावेज पटल पर रखवाने की कोशिश की अन्नाद्रमुक, द्रमुक, तृणमूल कांग्रेस, कांग्रेस और तेलुगु देशम पार्टी के सदस्य तेजी से आसन की ओर आए और हंगामा शरू कर दिया, जिसके कारण सदन की कार्यवाही को पूरे दिन के लिए स्थगित करना पडा। इसी प्रकार हंगामे लोकसभा में भी इन्हीं मुद‍्दों को लेकर सदन की कार्यवाही दो मिनट के भीतर ही पहले दोपहर 12 बजे तक और उसके बाद पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई। इसी हंगामे के बीच एससी/एसटी एक्ट मुद्दे पर भारत बंद को लेकर गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने अपना बयान दिया। हंगामे के लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने सदन की कार्यवाही को बुधवार 11 बजे तक स्थगित कर दिया।
04Apr-2018

संसद में नहीं टूटा गतिरोध, कार्यवाही रही ठप

एससी/एसटी और पेपर लीक के मुद्दे पर हुआ हंगामा

हरिभूमि ब्यूरो. नई दिल्ली।  
संसद में सोमवार को भी विपक्ष के हंगामे के कारण दोनों सदनों में कोई कामकाज नहीं हो सका और दोनों सदनों की कार्यवाही बारी-बारी से पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई। संसद के बजट सत्र में सरकार और विपक्ष के जारी गतिरोध के खत्म न होने के कारण पिछले 18 दिनों में प्रश्नकाल तक नहीं चल सका ह
संसद में बजट सत्र के दूसरे चरण की 18वें दिन भी हंगामे की भेंट चढ़ गई और दोनों सदनों की कार्यवाही को पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया गया। लोकसभा में सोमवार को कार्यवाही शुरू होते ही कावेरी जल प्रबंधन बोर्ड के गठन की मांग को लेकर अन्नाद्रमुक सदस्यों ने जमकर नारेबाजी की। वहीं कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने सदन में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा कराने की मांग करते हुए आरोप लगाया कि सरकार योजित व्यवधान के जरिए चर्चा से भाग रही है। इस दौरान खड़गे ने अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निरोधक कानून को लेकर उच्चतम न्यायालय के फैसले और विभिन्न परीक्षाओं के पेपर लीक होने का मुद्दा उठाया। हंगामे के कारण लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने कुछ देर बाद ही सदन की कार्यवाही को 12 बजे तक स्थगित कर दिया। दोबारा 12 बजे शुरू हुई कार्यवाही के दौरान सबसे पहले आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाए गये, लेकिन इसके बाद सदन में विपक्षी दलों का हंगामा शुरू हो गया। तेदपा सांसद आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा दिये जाने की मांग करते हुए हमेशा की तरह पीली पट्टिका की जगह आज काली पट्टी भी पहने हुए थे। इस हंगामे के कारण कांग्रेस समेत कई दलों के सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के नोटिसों को भी नहीं लिया जा सका। लोकसभा अध्यक्ष ने हंगामे का हवाला देते हुए अविश्वास प्रस्ताव को आगे बढ़ाने में असमर्थता जाहिर करते हुए सदन की कार्यवाही को तीन अप्रैल 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया। जहां तक अविश्वास प्रस्ताव का सवाल है उसके लिए खडगे के आरोप का जवाब देते हए संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने कहा कि सदन व्यवस्था में आए तो सरकार अविश्वास प्रस्ताव समेत अन्य मुद्दों पर भी चर्चा कराने के लिए तैयार है।
राज्यसभा का कामकाज भी ठप
राज्यसभा में सोमवार को जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू  हुई तो बसपा के सतीश मिश्रा ने भीमराव अंबेडकर की मूर्तियां तोडे जाने का मामला उठाया। वहीं दूसरी तरफ तेदेपा व टीआरएस के सदस्य अपनी मांगों को लेकर हाथों में तख्तियां लेकर नारेबाजी करते हुए आसन के करीब आ गये। इसी बीच प्रतिपक्ष नेता गुलाम नबी आजाद ने बैंक घोटाले, दलितों, अल्पसंख्यकों और पेपर लीक के मामले उठाते हुए चर्चा कराने की मांग की। इस पर सभापति एम. वेंकैया नायडू ने हंगामा कर रहे सदस्यों से शांति बनाकर अपनी सीटों पर जाने की अपील की, लेकिन इस अपील का कोई असर नहीं हुआ। हंगामा थमता न देख सभापति ने सदन की कार्यवाही को पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया। इससे पहले सभापति नायडू ने सदन में आवश्यक दस्तावेजों को पटल पर रखवाया। गौरतलब है कि उच्च सदन में अभी तक 18 दिनों में केवल एक विधेयक पारित हुआ है और अपना कार्यकाल पूरा कर  रहे सदस्यों के भाषण के लिए चर्चा ही हो पाई है, अन्यथा एक भी दिन प्रश्नकाल या अन्य किसी मुद्दे पर कोई चर्चा तक नहीं हो सकी है। सदन में संसदीय कार्य राज्यमंत्री विजय गोयल ने विपक्ष से अपील की है कि सदन में बहुत महत्वपूर्ण कार्य अधूरा है और सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलने में सहयोग करें, लेकिन इस अपील का कोई असर नहीं हुआ और हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही ठप रही।
तेदेपा सांसद का नया रूप
संसद का बजट सत्र खत्म होने को आ रहा है और अब भी आंध्र प्रदेश के लिए विशेष दर्जे की मांग को लेकर तेदेपा सांसदों का प्रदर्शन जारी है। सोमवार को तेदपा सांसदों ने सरकार के खिलाफ संसद में अविश्वास प्रस्ताव लाने का नोटिस दिया था, जो सदन में रखा नहीं जा सका। वहीं तेदेपा अपनी मांगों को लेकर सदन के भीतर और बाहर लगातार विरोध कर रही है, इसी कड़ी में तेदपा सांसद एन शिवाप्रसाद सोमवार को स्वतंत्रता सेनानी अल्लूरी सीताराम राजू का वेश में संसद पहुंचे, जिनके हाथों में धनुष-वाण था और वह कंधे पर तरकश टांगे हुए दिखे गये। इससे पहले हर दिन शिवाप्रसाद नए-नए रूप में संसद आकर सुर्खियां बटोर रहे हैं। कभी वह कृष्ण के अवतार में नजर आते हैं तो कभी बाबा साहेब अंबेडकर की वेशभूषा में संसद पहुंचते हैं। यहां तक कि शिवाप्रसाद स्कूल बच्चे, तेलुगू महिला, मछुआरे के अवतार में भी संसद आ चुके हैं।
03Apr-2018


अब नंबर प्लेट के साथ मिलेंगे नए वाहन

आरटीओ से केवलन पंजीकरण होगा   
हरिभूमि ब्यूरो. नई दिल्ली।
केंद्र सरकार की परिवहन व्यवस्था को दुरस्त करने की दिशा में लिए जा रहे निर्णयों के तहत अब देश में वाहन कंपनियां फास्टैग लगी कारों के साथ जल्द ही नंबर प्लेट लगी कारों की भी बिक्री करना शुरू कर देगी। जबकि पंजीकरण संख्या आरटीओ से ही जारी होगा।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के हवाले से यह जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने वाहनों खासकर कारों में फास्टैग के बाद अब वाहन निर्माताओं व कंपनियों के लिए दिशानिर्देश जारी किये हैं कि वे वाहनों में नंबर प्लेट भी लगाना सुनिश्चित करें। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि नई प्रौद्योगिकी से बनी नंबर प्लेट के इस्तेमाल वाले महत्वपूर्ण निर्णय लेने का मकसद वाहन खरीदारों को राहत देना है, ताकि देशभर में वाहनों की नंबर प्लेटों में एकरूपता लाई जा सके। उन्होंने कहा कि कारों के अलावा अन्य वाहनों की नंबर प्लेटों में एक समानता लाई जाएगी। खासबात है कि वाहन नंबर प्लेट की कीमत वाहन की कीमत में ही शामिल की जाएगी। उन्होंने बताया कि अब विनिर्माता नंबर प्लेट लगाकर देंगे और उन पर अक्षर उभारने का काम मशीन के जरिए किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि वाहनों की सुरक्षा से किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा, चाहे वह वाहन सस्ता हो या महंगा सबके लिए नियम एक समान होंगे। अभी तक वाहनों की नंबर प्लेट विभिन्न राज्यों के जिला स्तरीय क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय द्वारा जारी की जाती हैं।
सुरक्षा मानकों अनिवार्य
मंत्रालय के अनुसार वाहन निर्माता कंपनियों को पहले ही जारी दिशा निर्देशों के अनुसार सुरक्षा मानकों के तहत वाहनों का निर्माण करने के लिए कहा गया है। इसके तहत अगले साल जुलाई से वाहन चालको के लिए एयर बैग्स और सीट बेल्ट रिमाइंडर को भी अनिवार्य कर दिया है। वहीं 80 किलोमीटर से अधिक की रफ्तार के लिए स्पीडिंग अलर्ट प्रणाली तथा रिवर्स पार्किंग के लिए सेंसर जैसी व्यवस्था भी जरूरी की गई हैं। 
02Apr-2018

संसद में खत्म नहीं हुई केंद्र सरकार की चुनौती!


अंतिम सप्ताह में भी गतिरोध टूटने के आसार नहीं
हरिभूमि ब्यूरो. नई दिल्ली।
संसद में बजट सत्र के अंतिम सप्ताह की कार्यवाही कल सोमवार से शुरू हो रही है, लेकिन विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार और विपक्ष के साथ जारी गतिरोध खत्म होने का नाम नहीं नही ले रहा है, ऐसे में महत्वपूर्ण विधेयकों और अन्य सरकारी कामकाज के बोझ बढ़ने के कारण इन दिनों में केंद्र सरकार को कहीं ज्यादा चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।
केंद्र सरकार बजट सत्र के दूसरे चरण में पिछले 17 दिनों की कार्यवाही के दौरान दोनों सदनों में लगातार जारी हंगामे के कारण संसद से केवल एक ही बिल ही बिना चर्चा के पारित करा चुकी है। जबकि इसी हंगामे के बीच लोकसभा में वित्त विधेयक समेत चार विधेयक हंगामे के दौरान ही बिना किसी चर्चा के पारित कराए गये। दोनों सदनों में ही इन 17 दिनों में लोकसभा या राज्यसभा में एक भी दिन प्रश्नकाल या महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा तक नहीं हो पायी है। अब मौजूदा सत्र के अंतिम सप्ताह की कार्यवाही कल सोमवार से फिर शुरू होगी, लेकिन सरकार और दोनों सदनों की सभापीठ के प्रयास भी विपक्ष के साथ जारी गतिरोध का खत्म नहीं करा सके हैं। बजट सत्र छह अप्रैल तक निर्धारत है और अभी तक विपक्ष के हंगामें की भेंट चढ़ती आ रही कार्यवाही के इन अंतिम दिनों में भी पटरी पर आने की कोई संभावना नजर नहीं आ रही है। ऐसे में मोदी सरकार की कई महत्वपूर्ण विधेयकों और और अन्य सरकारी कामकाज को निपटाने की दृष्टि से कहीं ज्यादा चुनौती बढ़ गई है। सूत्रों के अनुसार ऐसी भी संभावना बन रही है कि यदि सोमवार को भी पिछले दिनों जैसी हंगामे की स्थिति रही तो बजट सत्र को समय से पहले ही अनिश्चित काल के लिए स्थगित किया जा सकता है।
अविश्वास प्रस्ताव पर संशय
लोकसभा में आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने और तेलंगाना में आरक्षण के मामले को लेकर पिछले दो सप्ताह से तेदपा और वाईएसआर कांग्रेस के अलावा प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस पार्टी और माकपा भी नोटिस देने के बावजूद मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास का प्रस्ताव पेश नहीं कर पाई है, जिसकी वजह सदन में लगातार विपक्षी दलों का वेल में आकर हंगामा करना है। जहां तक सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश करने का सवाल है उस पर विभिन्न मुद्दों पर जारी हंगामे के कारण अभी तक संशय बना हुआ है। इस प्रस्ताव पेश करने की अनुमति देने के लिए लोकसभा अध्यक्ष हर बार सदन की कार्यवाही व्यवस्थित होने का हवाला देती आ रही है, जबकि विपक्षी दल हंगामा करने पर अड़िग हैं। हालांकि इस प्रस्ताव के बावजूद मोदी सरकार को कोई खतरा नहीं है और यह बात विपक्ष भी जानता है। इसी कारण इस प्रस्ताव पर सरकार भी चर्चा कराने को तैयार है। 
इन विधेयकों पर अटकी सरकार
संसद में बजट सत्र के इन अंतिम पांच दिनों में लोकसभा में चार विधेयक पारित कराने के बाद केंद्र सरकार के सामने व्यक्तियों का दुर्व्यवहार (निवारण, संरक्षण और पुनर्वास) विधेयक, अविनियमित निक्षेप स्कीम पाबंदी विधेयक, चिट फंड (संशोधन) विधयक, भगोड़ा आर्थिक अपराधी विधेयक, भारतीय विमानपत्तन आर्थिक विनियामक प्राधिकरण (संशोधन) विधेयक, वाणिज्यिक न्यायालय, उच्च न्यायालय वाणिज्यिक प्रभाग और वाणिज्यिक अपील प्रभाग (संशोधन) विधेयक, माध्यस्थम और सुलह (संशोधन) विधेयक तथा राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद(संशोधन) विधेयक जैसे महत्वपूर्ण विधेयक पेश कराकर पारित करने की बड़ी चुनौती होगी। वहीं दूसरी ओर हंगामे की स्थिति में इस दौरान राज्यसभा में वित्त विधेयक व आम बजट से संबन्धित विधेयक के अलावा मोटरयान (संशोधन) विधेयक, स्टेट बैंक (निरसन और संशोधन)विधेयक तथा भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) विधेयक जैसे कई जरूरी काम पारित कराना सरकार के लिए असान नहीं है। हालांकि वित्त विधेयक व आम बजट संबन्धी विधेयकों का धन विधेयक होने के कारण राज्यसभा से पारित होना जरूरी नहीं है, जो राज्यसभा में पेश होने की तिथि से 14 दिन बाद स्वत: ही पारित माना जाएगा।
02Apr-2018


रविवार, 1 अप्रैल 2018

अब ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना होगा आसान

नियमों में बदलाव के बाद लागू होगी नई प्रक्रिया
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
देश में फर्जी ड्राइविंग लाइसेंसों पर लगाम लगाने की दिशा में केंद्र सरकार द्वारा संशोधित किये गये नियम कल एक अप्रैल से लागू हो जाएंगे। सरकार का दावा है कि अब ड्राइविंग लाइसेस और उसके नवीनीकरण या अन्य विवरण बदलने की प्रक्रियाओं को पूरा कराना बेहद आसान हो जाएगा।

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने ड्राइविंग लाइसेंस के लिए नियमों को आसान बनाने की दिशा में मोटर वाहन अधिनियम-1989 में संशोधन किया है। कल एक अप्रैल से लागू हो रहे इन बदले नियमों के तहत ड्राइविंग लाइसेंस की प्रक्रिया को ऑनलाइन करने की सुविधा दी गई है। मसलन अब नए वित्तीय वर्ष यानि एक अप्रैल से लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस, ड्राइविंग लाइसेंस, ड्राइविंग लाइसेंस का नवीकरण के अलावा जन्मतिथि या पता आदि बदलवाने के लिए अब एक ही फार्म की व्यवस्था की है। नए नियमों के अनुसार अब किसी भी प्रक्रिया के लिए लाइसेंस धारकों को अलग-अलग फॉर्म भरने की जरूरत नहीं पड़ेगी। खास बात यह है कि नए नियमों के तहत इन सभी प्रक्रियाओं के लिए नया एकीकृत फार्म ऑनलाइन ही उपलब्ध हो जाएगा और ऑनलाइन ही इन प्रक्रियाओं के लिए आवेदन किया जा सकेगा। इन बदले नियमों को एक अप्रैल से लागू करने के संबन्ध में मंत्रालय के दिशानिर्देश पहले ही देशभर में जिला स्तरीय संभागीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) को जारी किये जा चुके हैं।
क्या हैं नए  नियम
केंद्र सरकार ने मोटर अधिनियम में संशोधन करते हुए नए कानून में अधिनियम के नियम 10,14 (1), 17 (1) और 18 को समाप्त कर दिया गया है। संशोधित नियमों की जारी की इसी माह जारी की गई अधिसूचना के अनुसार अब डीएल के लिए केवल एक ही नया फार्म-2 आवेदनकर्ता को भरना होगा, जिसमें सभी प्रक्रियाओं के आठ नए कॉलम भी दिए गए हैं। इन नए नियमों के तहत नया डीएल या नवीकरण कराने की दिशा में अब आवेदनकर्ता को अपना आधार नंबर, ईमेल और मोबाइल नंबर भी देना अनिवार्य होगा। इस नए फार्म में नए फॉर्म में आवेदकों को क्रमवार आठ जानकारी देनी होगी, जिसमें डीएल संबंधी कौन सा कार्य कराने, लर्निंग या स्थायी डीएल से कौन सा वाहन चलाएंगे एवं व्यक्तिगत विवरण देना जरूरी होगा। वहीं व्यक्तिगत विवरण के अलावा किस वाहन से डीएल को लिंक करना है और प्रमाण के तौर पर दस्तावेज भी अपलोड करना जरूरी होगा।
पहचान के दस्तावेज
एक अप्रैल से लागू नए नियम के तहत आवेदकों की सुविधा को आयु एवं पते के लिए 10 प्रकार के प्रमाण पत्रों आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, जीवन बीमा पॉलिसी, पासपोर्ट, स्कूल प्रमाण पत्र, जन्म प्रमाण पत्र, राज्य एवं केंद्र सरकार और स्थानीय निकाय के किसी कार्यालय से जारी वेतन पर्ची, मेडिकल प्रैक्टिशनर द्वारा जारी प्रमाण पत्र, राज्य एवं केंद्र सरकार के विभागीय परिचय पत्र जैसे दस्तावेजों को मान्यता दी गई हैं।
फर्जी लाइसेंसो पर लगाम
मंत्रालय के अनुसार ड्राइविंग लाइसेंस और आरसी बनवाने की प्रक्रियाओं को आसान बनाने के लिए मोटर अधिनियम में किये गये संशोधनों के तहत नियमों में बदलाव किया गया है। सरकार के नियमों में किये गये बदलाव और ऑनलाइन प्रक्रिया का लागू करने का मकसद देशभर में लाखों की संख्या में फर्जी ड्राइविंग लाइसेंसों पर लगाम लगाना है। वहीं नियमों में इन बदलाव के बाद लाइसेंस बनवाने वालों को कई फायदे होंगे और पहले की अपेक्षा अब डीएल बनवाना आसान हो जाएगा। यह निर्णय के कई नियम बदल गए हैं। इनसे लोगों को एक नहीं कई फायदे होंगे और कई परेशानियों से निजात मिल जाएगी।
ई-संपर्क केंद्रों की स्थापना
सरकार ने ड्राइविंग लाइसेंस और आरसी बनाने में सहूलियत के लिए आरएलए के जरिए पहले ही ऑनलाइन अप्वाइंटमेंट सिस्टम शुरू कर दिया है। मसलन जिन लोगों को ऑनलाइन आवेदन करने का ज्ञान नहीं है वह अपने नजदीकी ई-संपर्क केंद्र पर जाकर डीएल बनवाने या आरसी के लिए आवेदन कर सकते हैं। मंत्रालय के अनुसार इसक अलावा रजिस्ट्रिंग एंड लाइसेंसिंग अथारिटी (आरएलए) अब कम पढ़े-लिखे या अशिक्षित लोगों या कंप्यूटर की जानकारी न रखने वालों की सुविधा के लिए वायस सिस्टम भी शुरू किया जा रहा है, जिन्हें ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए ऑनलाइन टेस्ट देने में सुविधा होगी।
बंद हो सकते हैं अंतर्राष्ट्रीय ड्राइविंग लाइसेंस व परमिट
कई देशों में प्रारूप पर ऐतराज जताकर किये अमान्य
हरिभूमि ब्यूरो. नई दिल्ली।   
केंद्र सरकार भारतीय परिवहन प्राधिकरण द्वारा जारी किए गए कई देशों को अंतर्राष्ट्रीय ड्राइविंग लाइसेंस व परमिट को बंद कर सकती है। इसका कारण है इन लाइसेंसों के प्रारूप पर ऐतराज जताते हुए अमान्य कर रखा है।

देश में हर रोज लापता होते हैं 175 बच्चे!




तलाशने को चलाई ‘आपरेशन स्माइल’ योजना
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
देश में पिछले तीन साल में 1.93 लाख से भी ज्यादा बच्चे किसी न किसी रूप में लापता हुए हैं, जिनमें मानव तस्करी, अपहरण और अन्य गतिविधियां सामने आई है। मसलन भारत में हरेक दिन औसतन 175 बच्चे लापता हो रहे हैं। हालांकि सरकार लापता बच्चों को तलाशने के लिए ‘आपरेशन स्माइल’ योजना चला रही है।
गृहमंत्रालय के अनुसार मोदी सरकार द्वारा वर्ष 2014 से 206 के दौरान यानि तीन सालों में 1.93 लाख, 724 बच्चे लापता हुए है, जिनमें 1.19 लाख 276 बालिकाएं शामिल हैं। मंत्रालय के अनुसार वर्ष 2014 में लापता हुए 68874 बच्चों में 41614 बालिकाएं, वर्ष 2015 में लापता 60443 बच्चों में 36595 बालिकाएं तथा वर्ष 2016 में 63407 बच्चे लापता हुए है, जिनमें 41067 बालिकाएं भी शामिल हैं। इनमें इन तीन सालों में अकेले राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 22362 बच्चें लापता हुए है, जहां हर साल करीब सात हजार से ज्यादा बच्चों के लापता होने के मामले दर्ज हैं। मंत्रालय के अनुसार इन लापता बच्चों में अपहरण और बच्चों के व्यापार के गोरखधंधे जैसी गतिविधियां सामने आई है। मसलन देश में हरेक दिन कम से कम औसतन 175 बच्चों के लापता होने के मामले सामने आ रहे हैं। इनमें अकेले दिल्ली-एनसीआर में ही प्रतिदिन औसतन 20 बच्चें लापता हो रहे हैं। लापता बच्चों के बचाव की दिशा में गृहमंत्रालय ने मानव तस्करी के मामलों से निपटने के लिए देशभर में 270 मानव दुरव्यपार रोधी ईकाईयां सक्रिय हैं, जिनके संचालन के लिए राज्यों को केंद्रीय वित्तीय सहायता भी प्रदान की जा रही है।
बरामद हुए 66453 बच्चें
मंत्रालय के अनुसार बच्चों के बचाव और उनकी सुरक्षा की दिशा में उनकी तलाश हेतु मोदी सरकार ने जनवरी 2015 में राज्य पुलिस की मदद से जनवरी 2015 में आपरेशन मुस्कान योजना शुरू की थी। इस योजना के तहत पिछले तीन सालों के दौरान या उससे पहले वर्षो के दौरान लापता हुए बच्चों में से 66453 बच्चों को बरामद किया गया है। वहीं इस योजना के तहत बच्चों को तलाशकर उनके परिजनों से मिलाने और उनके पुनर्वास करने जैसी कार्यवाही की जाती है। इस योजना को पुलिस और स्वयंसेवी संस्थाओं के जरिए खासकर दिल्ली व एनसीआर में तेजी के साथ चलाया जा रहा है। इसके अलावा अन्य राज्यों में ऐसी योजना को चलाने का अनुरोध किया गया है। वहीं इन तीन सालों के दौरान बच्चों का अपहरण या उनकी खरीद-फरोख्त की नीयत से तस्करी के मामले में देशभर में पुलिस द्वारा की गई कार्यवाही के दौरान बच्चों की बरामदगी के बाद अपराधियों के खिलाफ कार्यवाही भी की जा रही है,जिसके तहत पिछले तीन सालों में करीब 95 हजार से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी भी की गई है।
01Apr-2018