सरकार की 22 राजमार्गो को रनवे में बदलने की योजना
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
भारत व पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच आखिर भारत को सेना की ताकत बढ़ाने की योजना को केंद्र सरकार ने अमल लाने का फैसला कर लिया है, जिस पर रक्षा मंत्रालय के साथ मिलकर सड़क परिवहन मंत्रालय ने देश में ऐसे 22 राष्टÑीय राजमार्गो की पहचान की है, जिन्हें रनवे में तब्दील किया जाएगा। ऐसे हाइवे को युद्ध या दैवीय आपदा जैसे संकट की स्थिति में भारतीय वायु सेना रनवे के रूप में इस्तेमाल करके जरूरी विमानों की उड़ान और लैंडिंग कर सकेगी।
दरअसल ऐसा एक प्रस्ताव करीब डेढ़ साल पहले भारतीय वायु सेना ने केंद्र सरकार को दिया था, जिसमें केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय तथा रक्षा मंत्रालय मिलकर कुछ चुनिंदा हाइवेज का चौड़ा करके रनवे के रूप में तब्दील करना शामिल था। इसके लिए दोनों मंत्रालयों के अधिकारियों की एक समिति भी गठित की गई थी, जिसे ऐसे राजमार्ग खंडों के लिए औपचारिकताएं तय करने की जिम्मेदारी दी गई थी। जो रनवे या हवाई पटटी के रूप में बदले जा सकते हैं। अभी तक समिति ने ऐसे 22 हाइवे चिन्हित करके मंत्रालय को रिपोर्ट दी है, जिसमें ऐसे राजमार्ग खंडों की व्यावहार्यता, उनकी लंबाई व अन्य मुद्दों का भी आकलन भी किया है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का कहना है कि इस प्रस्ताव को अमलीजामा पहनाने के लिए जल्द ही दोनों मंत्रालय के अधिकारियों की एक बैठक होगी, जिसमें इस प्रस्ताव की रणनीति तय करके इस महत्वपूर्ण परियोजना को अंतिम रूप दिया जाएगा। प्रस्ताव में अधिकांश हाइवे वायु सेना के नक्शे में शामिल कर लिये जाएंगे। इसी मकसद से पिछले साल यमुना एक्सप्रेसवे पर मिराज-2000 की सफल लैंडिंग करवाकर एक सफल परीक्षण किया जा चुका है।
पाक से सटे हाइवे पर फोकस
भारतीय वायु सेना खासकर पाकिस्तान से जंग जैसे हालात बनने पर देश के हाईवेज का इस्तेमाल करना चाहती है। वायु सेना चाहती है कि देश के चुनिंदा हाईवे ऐसे हों जहां से फाइटर जेट्स लैंडिंग और टेकआॅफ कर सकें। इसके लिए वायुसेना ने एनएचएआई के साथ बातचीत करके प्रस्ताव को आगे बढ़ाने पर जोर दिया है। सूत्रों के अनुसार ऐसी सडकों या राजमार्गो को खासकर राजस्थान,गुजरात और पंजाब में विकसित करने की योजना है, जहां सर्वाधिक हाइवे को रनवे में तब्दील करने के लिए पहचाना गया है। दरअसल इन राज्यों की सीमा पाकिस्तान से लगती है। सूत्रों के अनुसार गठित की गई दोनों मंत्रालय की समिति द्वारा चिन्हित किये गये ज्यादातर राजस्थान, पंजाब और गुजरात के राजमार्गों वह कुछ प्रमुख सड़को पर फोकस किया है, जिनमें जरूरी बदलाव कर उन्हें रनवे की तरह इस्तेमाल किया जा सकेगा।
इसलिए जरूरी हुई योजना
भारत-पाक के बीच वर्ष 1971 के युद्ध की एक रिपोर्ट के अनुसार बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान पाकिस्तानी वायुसेना के कुछ विमान आगरा तक आ गए थे। हालांकि वे बम बरसाने में नाकाम रहे, जिन्हें भारतीय वायुसेना उन्हें खदेडने में कामयाब रही थी। पिछले कई दशकों से भारत-पाक की आतंकवाद के कारण तनातनी को देखते हुए भारतीय सेना एवं सुरक्षा एजेंसियों को महसूस हुआ कि देश के भीतर लडाकू विमान उतारने के लिए विकल्प होना जरूरी है। जिस तरह से अन्य कई देशों में हाइवे को रनवे के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है उसी तरह भारत में सेना को ताकत देना जरूरी है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि दुश्मन के हमले के वक्त रोड को भी रनवे बनाना पड सकता है। दूसरे देशों में ऐसे परीक्षण होते रहते हैं, पर भारत में आगरा में यह पहला मौका था, जब रोड पर लडाकू विमान की लैंडिंग कराई गई। पाक ने खुद पहले से ही ऐसे दो मार्गो को इमरजेंसी रनवे घोषित किया हुआ है
अमेरिका के साथ बनी थी योजना
सूत्रों के अनुसार इस योजना को मोदी सरकार के आमंत्रण पर अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा के भारत भ्रमण के दौरान तैयार की गई थी। आगरा के भ्रमण के दौरान अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों तथा भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की एक संयुक्त बैठक के दौरान ऐसी योजना का खाका बनाने में यह भी निर्णय लिया गया था, कि जरूरत पड़ने पर यमुना एक्सप्रेस-वे को रनवे के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि केंद्रीय सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय इस प्रस्ताव पर रक्षा मंत्रालय के साथ मिलकर पहले से ही काम कर रहा है। लेकिन भारत-पाक के मौजूदा तनाव के बीच केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने इसके जल्द परियोजना का रूप देने की दिशा में कहा कि राजमार्ग खंडों का विकास ऐसी तकनीक और तौर तरीकों से किया जाएगा, जिन्हें चौड़ा कर हवाई पटटी बनाई जा सके, इससे दुर्गम इलाकों में सड़क के साथ हवाई संपर्क की सुविधा भी मिल सकेगी।
17Oct-2016
एक जमाना था जब लोग अपने घरों के बाहर लिखते थे-अतिथि देवो भव: फिर शुरू किया-शुभ लाभ और बाद में लिखा जाने लगा-यूं आर वेलकम अब शुरू हो गया-......से सावधान!
सोमवार, 17 अक्टूबर 2016
रविवार, 16 अक्टूबर 2016
आतंकवाद: पाकिस्तान चौथा खतरनाक देश
दुनिया में 13वें पायदान पर शामिल भारत
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।आतंकवाद को पनाह देते आ रहे पाकिस्तान की दुनियाभर में आलोचना हो रही है, जिसकी आंच से खुद पाकिस्तान की तबाही के अंदेशा को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। दुनियाभर के देशों पर मंडरा रहे आतंकी जैसे खतरों की जद में पाकिस्तान को चौथेअसुरक्षित देश के रूप में आंका गया है, जबकि पाकिस्तान के आतंकवाद को लेकर नापाक इरादों के बावजूद भारत का असुरक्षित देशों की फेहरिस्त में तेरहवां स्थान माना गया है।
उरी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव का मामला दुनिया की सुर्खियों में है, जिसमें आतंकवाद का सहारा लेकर भारत के खिलाफ पाकिस्तान की नापाक हरकतों की दुनियाभर में आलोचना हो रही है और वह आतंकवाद पर अलग-थलग पड़ता नजर आ रहा है। ऐसे में पाकिस्तान के लिए सुरक्षा को लेकर करारा झटका लगना स्वाभाविक है, जब सुरक्षित और असुरक्षित देशों को लेकर एक अंतर्राष्टÑीय सर्वे रिपोर्ट में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की यूनिट लस्ट ग्लोबल ट्रैवल एंड टूरिज्म ने पाकिस्तान को दुनिया का चौथा सबसे असुरक्षित देश माना गया है। वहीं ऐसे असुरक्षित देशों के लिए जारी रैंकिंग भारत 13वें पायदान पर है, लेकिन भारत उन 20 सबसे सुरक्षित देशों की सूची में भी शामिल नहीं है, जिसमें सबसे सुरक्षित देशों में फिनलैंड दुनिया का पहले पायदान पर आने वाला देश है। इस सर्वे रिपोर्टें पाकिस्तान को सेμटी एंड सिक्युरिटी लिस्ट में 3.04 नंबर हासिल हुए हैं, जबकि फिनलैंड को 6.7 नंबर मिले हैं। पाकिस्तान के लिए यह पहला झटका नहीं है, इससे पहले अमेरिकी इंटेलीजेंस थिंकटैंक इंटेलसेंटर ने अपनी एक लिस्ट ‘कंट्री थ्रेट इंडेक्स’ में पाकिस्तान को दुनिया का 5वां सबसे खतरनाक देश करार दिया था।
खतरनाक देश
रिपोर्ट में रैंकिंग के आधार पर पंद्रह सबसे खतरनाक देशों में पहले पायदान पर नाइजीरिया है, जिसके बाद कोलंबिया, यमन,पाकिस्तान, वेनेजुएला, इजिप्ट, ग्वाटेमाला, अल-सल्वाडोर, होंडुरास, थाईलैंड, केन्या, लेबनान, भारत, फिलीपींस और जमैका माने गये हैं।
दुनिया के सबसे सुरक्षित देश
इस सर्वे रिपोर्ट की रैंकिंग के अनुसार दस सबसे सुरक्षित देशों में फिनलैंड, कतर, यूएई, आइसलैंड,5. आॅस्ट्रिया, लग्जमबर्ग, न्यूजीलैंड,सिंगापुर, ओमान और पुर्तगाल शामिल है।
16Oct-2016
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।आतंकवाद को पनाह देते आ रहे पाकिस्तान की दुनियाभर में आलोचना हो रही है, जिसकी आंच से खुद पाकिस्तान की तबाही के अंदेशा को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। दुनियाभर के देशों पर मंडरा रहे आतंकी जैसे खतरों की जद में पाकिस्तान को चौथेअसुरक्षित देश के रूप में आंका गया है, जबकि पाकिस्तान के आतंकवाद को लेकर नापाक इरादों के बावजूद भारत का असुरक्षित देशों की फेहरिस्त में तेरहवां स्थान माना गया है।
उरी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव का मामला दुनिया की सुर्खियों में है, जिसमें आतंकवाद का सहारा लेकर भारत के खिलाफ पाकिस्तान की नापाक हरकतों की दुनियाभर में आलोचना हो रही है और वह आतंकवाद पर अलग-थलग पड़ता नजर आ रहा है। ऐसे में पाकिस्तान के लिए सुरक्षा को लेकर करारा झटका लगना स्वाभाविक है, जब सुरक्षित और असुरक्षित देशों को लेकर एक अंतर्राष्टÑीय सर्वे रिपोर्ट में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की यूनिट लस्ट ग्लोबल ट्रैवल एंड टूरिज्म ने पाकिस्तान को दुनिया का चौथा सबसे असुरक्षित देश माना गया है। वहीं ऐसे असुरक्षित देशों के लिए जारी रैंकिंग भारत 13वें पायदान पर है, लेकिन भारत उन 20 सबसे सुरक्षित देशों की सूची में भी शामिल नहीं है, जिसमें सबसे सुरक्षित देशों में फिनलैंड दुनिया का पहले पायदान पर आने वाला देश है। इस सर्वे रिपोर्टें पाकिस्तान को सेμटी एंड सिक्युरिटी लिस्ट में 3.04 नंबर हासिल हुए हैं, जबकि फिनलैंड को 6.7 नंबर मिले हैं। पाकिस्तान के लिए यह पहला झटका नहीं है, इससे पहले अमेरिकी इंटेलीजेंस थिंकटैंक इंटेलसेंटर ने अपनी एक लिस्ट ‘कंट्री थ्रेट इंडेक्स’ में पाकिस्तान को दुनिया का 5वां सबसे खतरनाक देश करार दिया था।
खतरनाक देश
रिपोर्ट में रैंकिंग के आधार पर पंद्रह सबसे खतरनाक देशों में पहले पायदान पर नाइजीरिया है, जिसके बाद कोलंबिया, यमन,पाकिस्तान, वेनेजुएला, इजिप्ट, ग्वाटेमाला, अल-सल्वाडोर, होंडुरास, थाईलैंड, केन्या, लेबनान, भारत, फिलीपींस और जमैका माने गये हैं।
दुनिया के सबसे सुरक्षित देश
इस सर्वे रिपोर्ट की रैंकिंग के अनुसार दस सबसे सुरक्षित देशों में फिनलैंड, कतर, यूएई, आइसलैंड,5. आॅस्ट्रिया, लग्जमबर्ग, न्यूजीलैंड,सिंगापुर, ओमान और पुर्तगाल शामिल है।
16Oct-2016
राग दरबार:महिलाओं के अधिकार पर स्यापा क्यों?
मियां बीवी राजी तो क्या करेगा काजी..
भारत में एक समानता का माहौल बनाने की कवायद में जुटी मोदी सरकार जीएसटी की तरह ही धर्मनिरपेक्षता को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही है, भले ही सरकार को विपक्षी दलों की आलोचना का सामना करना पड़ रहा हो। ऐसी ही कवायद मे समान नागरिक संहिता यानि सिविल कोड़ लागू करने की तैयारी चल रही है। सिविल कोड़ और खासकर तीन तलाक के मुद्दे पर अचानक तेज हुई सियासी बहस में एक देश-एक कानून लागू करने की सरकार की और से जारी इस कवायद के विरोध में उतरे मुस्लिम संगठनों खासकर आॅल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड द्वारा रायशुमारी कर रहे विधि आयोग के उन 16 सवालों का बहिष्कार करने का ऐलान किया है, जिसमें एक साथ तीन तलाक का मुद्दा भी शामिल है। इन मुस्लिम संगठनों के विपरीत 95 फीसदी से भी ज्यादा मुस्लिम महिलाएं खासतौर पर तीन तलाक के मुद्दे पर सरकार की द्वारा सुप्रीम कोर्ट में सरकार द्वारा दिये गये हलफनामें को उचित ठहराने का इसलिए साहस किया है, क्यों कि वे ऐसे शरियत कानून में हो रहे अन्याय से छुटकारा पाने को बेताब हैं। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सरकार के खिलाफ उगले जहर पर इस मुद्दे पर केंद्र का बचाव करते हुए कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने तर्क दिया कि जब एक दर्जन से अधिक इस्लामी देश कानून बनाकर इस चलन का विनियमन कर सकते हैं, तो भारत जैसे धर्मनिरपेक्ष देश के लिए इसे किस प्रकार गलत माना जा सकता है। ऐसे मे सामजिक एवं कानून के जानकारों में चर्चा है कि भारत के संवैधानिक इतिहास में पहली बार किसी केंद्र सरकार द्वारा मुस्लिमों में बहुविवाह, निकाह हलाला और एक साथ तीन तलाक के चलन का उच्चतम न्यायालय में विरोध के समर्थन में मुस्लिम महिलाएं सक्रिय होकर आगे आ गई तो सरकार के ऐसे मामलों में देश में एक कानून लागू करने का काम आसान हो जाएगा। ऐसे में वही कहावत चरितार्थ होती नजर आएगी कि जब मियां बीवी राजी तो क्या करेगा काजी...।
भंवरजाल में केजरी सरकार
दिल्ली में ईमानदारी का चोला ओढ़कर सत्ता पर काबिज हुई आम आदमी पार्टी की केजरीवाल सरकार की की पोल ऐसे खुलती जा रही है, शायद दिल्ली में सरकार बनाने वाली आम आदमी पार्टी भारत के इतिहास में ऐसा पहली सत्तारूढ दल है जिसके मंत्री और विधायकों को आपराधिक या अन्य गैरकानूनी मामलों में फंसते आ रहे हैं और करीब एक दर्जन को जेल की हवा भी खानी पड़ी। रही सही कसर खुद केजरीवाल सरकार ने पूरी करते हुए ऐसी संवैधानिक मुसीबत को गले लगा लिया है, जिससे लगता है कि 70 सदस्यीय दिल्ली विधानसभा में 67 का आंकड़ा हासिल करने का इतिहास बनाने के बावजूद आप की सरकार अपने कार्यकाल को शायद ही पूरा कर पाए। सीएम केजरीवाल द्वारा नियुक्त किये गये संसदीय सचिव के लाभ का पद देने पर जल्द ही 21 विधायकों को अयोग्यता ठहराया जा सकता है। इनके अलावा राष्टÑपति 27 ऐसे ही और आप विधायकों की जांच के लिए एक याचिका चुनाव आयोग को भेजी है, जिन्हें लाभ के पद के रूप में रोगी कल्याण समितियों का अध्यक्ष बनाया हुआ है। राजनीतिक चर्चा यही है कि यदि चुनाव आयोग ने आप के इन करीब 45 विधायकों को अयोग्य करार दे दिया तो आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की सरकार का पतन तय है।
राजनीति जिंदा रहनी जरूरी ?...
राजनीति और नेता का मानो चोली दामन का साथ है। कुछ भी हो जाए दोनों साथ-साथ ही चलते रहेंगे। इन्हे एक-दूसरे का पूरक भी कहा जाता है। बात चाहे सर्जिकल स्ट्राइक की हो या सरकार द्वारा किए गए किसी नीतिगत फैसले की। हर बात पर राजनीति नहीं होगी, ऐसा संभव नहीं है। सर्जिकल स्ट्राइक के बाद राजनीति हुई जिसमें कोई सबूत मांग रहा था तो कोई कुछ और कह रहा था। फिर इसके बाद सरकार के नीतिगत फैसलों को लेकर ट्वीटर पर तू-तू-मैं-मैं का दौर शुरू हो गया। चारों तरफ बस क्रेडिट लेने की होड़ मच जाती है, कोई कहता है मैंने अच्छा काम किया तो दूसरा कहता कि मैंने किया। क्या करें इसी का नाम तो राजनीति है। नहीं करेंगे तो काम कैसे चलेगा। राजनीति का जिंदा रहना भी जरूरी है।
-ओ.पी. पाल व कविता जोशी
16Oct-2016
भारत में एक समानता का माहौल बनाने की कवायद में जुटी मोदी सरकार जीएसटी की तरह ही धर्मनिरपेक्षता को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही है, भले ही सरकार को विपक्षी दलों की आलोचना का सामना करना पड़ रहा हो। ऐसी ही कवायद मे समान नागरिक संहिता यानि सिविल कोड़ लागू करने की तैयारी चल रही है। सिविल कोड़ और खासकर तीन तलाक के मुद्दे पर अचानक तेज हुई सियासी बहस में एक देश-एक कानून लागू करने की सरकार की और से जारी इस कवायद के विरोध में उतरे मुस्लिम संगठनों खासकर आॅल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड द्वारा रायशुमारी कर रहे विधि आयोग के उन 16 सवालों का बहिष्कार करने का ऐलान किया है, जिसमें एक साथ तीन तलाक का मुद्दा भी शामिल है। इन मुस्लिम संगठनों के विपरीत 95 फीसदी से भी ज्यादा मुस्लिम महिलाएं खासतौर पर तीन तलाक के मुद्दे पर सरकार की द्वारा सुप्रीम कोर्ट में सरकार द्वारा दिये गये हलफनामें को उचित ठहराने का इसलिए साहस किया है, क्यों कि वे ऐसे शरियत कानून में हो रहे अन्याय से छुटकारा पाने को बेताब हैं। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सरकार के खिलाफ उगले जहर पर इस मुद्दे पर केंद्र का बचाव करते हुए कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने तर्क दिया कि जब एक दर्जन से अधिक इस्लामी देश कानून बनाकर इस चलन का विनियमन कर सकते हैं, तो भारत जैसे धर्मनिरपेक्ष देश के लिए इसे किस प्रकार गलत माना जा सकता है। ऐसे मे सामजिक एवं कानून के जानकारों में चर्चा है कि भारत के संवैधानिक इतिहास में पहली बार किसी केंद्र सरकार द्वारा मुस्लिमों में बहुविवाह, निकाह हलाला और एक साथ तीन तलाक के चलन का उच्चतम न्यायालय में विरोध के समर्थन में मुस्लिम महिलाएं सक्रिय होकर आगे आ गई तो सरकार के ऐसे मामलों में देश में एक कानून लागू करने का काम आसान हो जाएगा। ऐसे में वही कहावत चरितार्थ होती नजर आएगी कि जब मियां बीवी राजी तो क्या करेगा काजी...।
भंवरजाल में केजरी सरकार
दिल्ली में ईमानदारी का चोला ओढ़कर सत्ता पर काबिज हुई आम आदमी पार्टी की केजरीवाल सरकार की की पोल ऐसे खुलती जा रही है, शायद दिल्ली में सरकार बनाने वाली आम आदमी पार्टी भारत के इतिहास में ऐसा पहली सत्तारूढ दल है जिसके मंत्री और विधायकों को आपराधिक या अन्य गैरकानूनी मामलों में फंसते आ रहे हैं और करीब एक दर्जन को जेल की हवा भी खानी पड़ी। रही सही कसर खुद केजरीवाल सरकार ने पूरी करते हुए ऐसी संवैधानिक मुसीबत को गले लगा लिया है, जिससे लगता है कि 70 सदस्यीय दिल्ली विधानसभा में 67 का आंकड़ा हासिल करने का इतिहास बनाने के बावजूद आप की सरकार अपने कार्यकाल को शायद ही पूरा कर पाए। सीएम केजरीवाल द्वारा नियुक्त किये गये संसदीय सचिव के लाभ का पद देने पर जल्द ही 21 विधायकों को अयोग्यता ठहराया जा सकता है। इनके अलावा राष्टÑपति 27 ऐसे ही और आप विधायकों की जांच के लिए एक याचिका चुनाव आयोग को भेजी है, जिन्हें लाभ के पद के रूप में रोगी कल्याण समितियों का अध्यक्ष बनाया हुआ है। राजनीतिक चर्चा यही है कि यदि चुनाव आयोग ने आप के इन करीब 45 विधायकों को अयोग्य करार दे दिया तो आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की सरकार का पतन तय है।
राजनीति जिंदा रहनी जरूरी ?...
राजनीति और नेता का मानो चोली दामन का साथ है। कुछ भी हो जाए दोनों साथ-साथ ही चलते रहेंगे। इन्हे एक-दूसरे का पूरक भी कहा जाता है। बात चाहे सर्जिकल स्ट्राइक की हो या सरकार द्वारा किए गए किसी नीतिगत फैसले की। हर बात पर राजनीति नहीं होगी, ऐसा संभव नहीं है। सर्जिकल स्ट्राइक के बाद राजनीति हुई जिसमें कोई सबूत मांग रहा था तो कोई कुछ और कह रहा था। फिर इसके बाद सरकार के नीतिगत फैसलों को लेकर ट्वीटर पर तू-तू-मैं-मैं का दौर शुरू हो गया। चारों तरफ बस क्रेडिट लेने की होड़ मच जाती है, कोई कहता है मैंने अच्छा काम किया तो दूसरा कहता कि मैंने किया। क्या करें इसी का नाम तो राजनीति है। नहीं करेंगे तो काम कैसे चलेगा। राजनीति का जिंदा रहना भी जरूरी है।
-ओ.पी. पाल व कविता जोशी
16Oct-2016
शुक्रवार, 14 अक्टूबर 2016
विदेशी तकनीक की तर्ज पर होगा जल प्रबंधन!
हंगरी से हुए करार को भी मिली हरी झंडी
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
केंद्र सरकार की देश में जल संरक्षण और प्रबंधन की दिशा में उठाए जा रहे कदमों के तहत खासकर कृषि क्षेत्र में विदेशी तकनीक की तर्ज पर जल संबन्धी योजनाओं को चलाया जाएगा, ताकि देश में बाढ़ और सूखे की स्थिति के हालातों से भी निपटा जा सके।
केंद्र सरकार की भारत में जल संकट के साथ बाढ़ और सूखे की स्थिति से निपटने के लिए कई परियोजनाएं पटरी पर है, जिनकी दशा और दिशा को विदेशी तकनीक से रμतार देने का प्रयास किया जा रहा है। हंगरी की पेयजल व सिंचाई के लिए इस्तेमाल के लिए 'क्लीन वॉटर एंड ग्रीन एनर्जी इनकोरपेशन' की तकनीक को भारत में इस्तेमाल करने का रास्ता तय किया जा रहा है। खासकर हंगरी के 'वन ड्रॉप मोर क्रॉप' (एक बूंद से अधिक फसल) के नारे के अनुकूल तकनीकी को देश के कृषि क्षेत्र में वरदान बनाने का प्रयास है। इसी दिशा में गुरुवार को यहां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल जल प्रबंन्धन क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग के लिए हंगरी के साथ होने वाले समझौते को मिलली मंजूरी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस करार के तहत दोनों ही देशों के बीच समानता और आपसी हितों के आधार पर जल प्रबंधन के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाया जाएगा। वहीं हंगरी व भारत के सार्वजनिक एवं निजी संगठनों के बीच द्विपक्षीय संबंधों के विकास को प्रोत्साहन मिलना तय है। करार के जरिए जल संसाधनों के विकास एवं प्रबंधन के क्षेत्र में वैज्ञानिक प्रतिनिधिमंडलों के बीच संयुक्त गतिविधियों एवं आपसी आदान-प्रदान से दोनों देशों को फायदा मिलेगा। इससे पहले जल सरंक्षण और जल प्रबंधन के क्षेत्र में इजरायल के साथ भी आपसी सहयोग की नीति अपनाई गई है। जल प्रबंधन के क्षेत्र में इजरायल और हंगरी की तकनीक दुनिया के लिए एक सबक बनी हुई है, जिसके जरिए किसी भी देश में जल संबन्धी समस्याओं का समाधान संभव है।
कृषि क्षेत्र के विकास पर बल
केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय के प्रवक्ता के अनुसार सरकार की प्राथमिकता है कि कृषि विकास के लिए जल संरक्षण और अपशिष्ट जल प्रबंधन की योजना में विदेशी तकनीक के इस्तेमाल ऐसी तमाम जल संबन्धी योजनाओं में किया जाए, जिससे जल संकट को दूर किया जा सके। हंगरी और इजरायल की की तकनीक के जरिए देश में नदी बेसिन प्रबंधन, एकीकृत जल संसाधन प्रबंधन, जल आपूर्ति, सिंचाई प्रौद्योगिकी नवाचार, बाढ़ और सूखा प्रबंधन में समझौते से दोनों देशों के लोगों के सामाजिक एवं आर्थिक स्थितियों में सुधार करने के लक्ष्य हासिल करना आसान हो जाएगा। वहीं संयुक्त गतिविधियों और जल संसाधनों के विकास तथा प्रबंधन के क्षेत्र में वैज्ञानिक प्रतिनिधिमंडलों व विशेषज्ञों के आपसी आदान-प्रदान से दोनों देशों को लाभ होगा। सरकार की प्राथमिकता है कि कृषि विकास के लिए जल संरक्षण और अपशिष्ट जल प्रबंधन की योजना में विदेशी तकनीक के इस्तेमाल ऐसी तमाम जल संबन्धी योजनाओं में किया जाए, जिससे जल संकट को दूर किया जा सके।
क्या है विदेशी तकनीक
जल संरक्षण के तहत कृषि सिंचाई के लिए इजरायल में गंदे पानी को शोध संयंत्रों के बाद वैज्ञानिक तकनीक के बाद सिंचाई में प्रयोग किया जा रहा है, जबकि नीदरलैंड के अलावा हंगरी जैसे कई देशों में कम लागत पर ज्यादा जल का उपयोग करने के लिए भी तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है। नीदरलैंड अपशिष्ट जल को शुद्ध जल में तब्दील करने की तकनीक का भरपूर उपयोग कर रहा है। इसी प्रकार हंगरी ने भी अपने देश में जल संरक्षण और उसके उपयोग में तकनीक का सहारा लेकर चुनौतियों का मुकाबला करके अन्य देशों के सामने मिसाल पेश की है। इसलिए केंद्र सरकार को भारत में जहां तक कृषि विकास और सिंचाई क्षेत्र में ऐसे देशों की तकनीक रास आ रही है। गौरतलब है कि इजरायल की तकनीक मध्य प्रदेश और हंगरी की तकनीक पंजाब में अपनाई जा रही है। इसके पूरे देश में अपनाने के लिए ही सरकार ने इजरायल और हंगरी की जल प्रबंधन क्षेत्र की तकनीकों को साझा करके कृषि विकास के साथ देश के विकास के एजेंडे को आगे बढ़ाने का प्रयास तेज किये हैं।
14Oct-2016
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
केंद्र सरकार की देश में जल संरक्षण और प्रबंधन की दिशा में उठाए जा रहे कदमों के तहत खासकर कृषि क्षेत्र में विदेशी तकनीक की तर्ज पर जल संबन्धी योजनाओं को चलाया जाएगा, ताकि देश में बाढ़ और सूखे की स्थिति के हालातों से भी निपटा जा सके।
केंद्र सरकार की भारत में जल संकट के साथ बाढ़ और सूखे की स्थिति से निपटने के लिए कई परियोजनाएं पटरी पर है, जिनकी दशा और दिशा को विदेशी तकनीक से रμतार देने का प्रयास किया जा रहा है। हंगरी की पेयजल व सिंचाई के लिए इस्तेमाल के लिए 'क्लीन वॉटर एंड ग्रीन एनर्जी इनकोरपेशन' की तकनीक को भारत में इस्तेमाल करने का रास्ता तय किया जा रहा है। खासकर हंगरी के 'वन ड्रॉप मोर क्रॉप' (एक बूंद से अधिक फसल) के नारे के अनुकूल तकनीकी को देश के कृषि क्षेत्र में वरदान बनाने का प्रयास है। इसी दिशा में गुरुवार को यहां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल जल प्रबंन्धन क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग के लिए हंगरी के साथ होने वाले समझौते को मिलली मंजूरी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस करार के तहत दोनों ही देशों के बीच समानता और आपसी हितों के आधार पर जल प्रबंधन के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाया जाएगा। वहीं हंगरी व भारत के सार्वजनिक एवं निजी संगठनों के बीच द्विपक्षीय संबंधों के विकास को प्रोत्साहन मिलना तय है। करार के जरिए जल संसाधनों के विकास एवं प्रबंधन के क्षेत्र में वैज्ञानिक प्रतिनिधिमंडलों के बीच संयुक्त गतिविधियों एवं आपसी आदान-प्रदान से दोनों देशों को फायदा मिलेगा। इससे पहले जल सरंक्षण और जल प्रबंधन के क्षेत्र में इजरायल के साथ भी आपसी सहयोग की नीति अपनाई गई है। जल प्रबंधन के क्षेत्र में इजरायल और हंगरी की तकनीक दुनिया के लिए एक सबक बनी हुई है, जिसके जरिए किसी भी देश में जल संबन्धी समस्याओं का समाधान संभव है।
कृषि क्षेत्र के विकास पर बल
केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय के प्रवक्ता के अनुसार सरकार की प्राथमिकता है कि कृषि विकास के लिए जल संरक्षण और अपशिष्ट जल प्रबंधन की योजना में विदेशी तकनीक के इस्तेमाल ऐसी तमाम जल संबन्धी योजनाओं में किया जाए, जिससे जल संकट को दूर किया जा सके। हंगरी और इजरायल की की तकनीक के जरिए देश में नदी बेसिन प्रबंधन, एकीकृत जल संसाधन प्रबंधन, जल आपूर्ति, सिंचाई प्रौद्योगिकी नवाचार, बाढ़ और सूखा प्रबंधन में समझौते से दोनों देशों के लोगों के सामाजिक एवं आर्थिक स्थितियों में सुधार करने के लक्ष्य हासिल करना आसान हो जाएगा। वहीं संयुक्त गतिविधियों और जल संसाधनों के विकास तथा प्रबंधन के क्षेत्र में वैज्ञानिक प्रतिनिधिमंडलों व विशेषज्ञों के आपसी आदान-प्रदान से दोनों देशों को लाभ होगा। सरकार की प्राथमिकता है कि कृषि विकास के लिए जल संरक्षण और अपशिष्ट जल प्रबंधन की योजना में विदेशी तकनीक के इस्तेमाल ऐसी तमाम जल संबन्धी योजनाओं में किया जाए, जिससे जल संकट को दूर किया जा सके।
क्या है विदेशी तकनीक
जल संरक्षण के तहत कृषि सिंचाई के लिए इजरायल में गंदे पानी को शोध संयंत्रों के बाद वैज्ञानिक तकनीक के बाद सिंचाई में प्रयोग किया जा रहा है, जबकि नीदरलैंड के अलावा हंगरी जैसे कई देशों में कम लागत पर ज्यादा जल का उपयोग करने के लिए भी तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है। नीदरलैंड अपशिष्ट जल को शुद्ध जल में तब्दील करने की तकनीक का भरपूर उपयोग कर रहा है। इसी प्रकार हंगरी ने भी अपने देश में जल संरक्षण और उसके उपयोग में तकनीक का सहारा लेकर चुनौतियों का मुकाबला करके अन्य देशों के सामने मिसाल पेश की है। इसलिए केंद्र सरकार को भारत में जहां तक कृषि विकास और सिंचाई क्षेत्र में ऐसे देशों की तकनीक रास आ रही है। गौरतलब है कि इजरायल की तकनीक मध्य प्रदेश और हंगरी की तकनीक पंजाब में अपनाई जा रही है। इसके पूरे देश में अपनाने के लिए ही सरकार ने इजरायल और हंगरी की जल प्रबंधन क्षेत्र की तकनीकों को साझा करके कृषि विकास के साथ देश के विकास के एजेंडे को आगे बढ़ाने का प्रयास तेज किये हैं।
14Oct-2016
सिविल कोड पर छिड़ी बहस-विरोध में उतरे मुस्लिम संगठन
देशहित में नहीं है यूनिफार्म सिविल कोड: पर्सनल लॉ
ट्रिपल तलाक का विरोध करना भी गलत: रहमानी
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
केंद्र सरकार द्वारा देश में समान नागरिक संहिता यानि यूनिफार्म सिविल कोड लागू करने की मुहिम का विरोध करते हुए मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा है कि यह देशहित में नहीं होगा। सरकार के प्रयास से गृहयुद्ध जैसे हालात पैदा होने का खतरा है। पर्सनल लॉ बोर्ड ने ट्रिपल तलाक के विरोध को भी गलत करार दिया है।
आॅल इंडिया मुस्लिम पसर्नल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना मोहम्मद वली रहमानी के नेतृत्व में गुरुवार को यहां एक संवाददाता सम्मेलन में नौ मुस्लिम संगठनों के प्रतिनिधियों ने यूनिफार्म सिविल कोड लागू करने के लिए केंद्र सरकार के प्रयासों का विरोध किया। वहीं इन संगठनों ने ट्रिपल तलाक का किया जा रहा विरोध भी संविधान के मौलिक अधिकार के खिलाफ है, जो पूरी तरह से गलत है। पर्सनल लॉ बोर्ड के रहमानी ने समान नागरिक संहिता पर विधि आयोग द्वारा तैयार की गई प्रश्नावली को खारिज करते हुए कहा कि वे एक भी सवाल का जवाब नहीं देंगे। बल्कि अन्य मुस्लिम समुदाय और संगठनों से भी अपील की जा रही है कि वे विधि आयोग की इस प्रश्नावली का बहिष्कार करें। उन्होंने कहा कि विधि आयोग की इस प्रश्नावली का वास्तविक मकसद मुस्लिम पर्सनल लॉ को समाप्त करना है और यह प्रश्नावली लोगों को भ्रमित करने के लिए तैयार की गई है। रहमानी ने आरोप लगाया कि संविधान के अनुच्छेद 44 का उल्लेख कर समान नागरिक संहिता को संवैधानिक दर्जा देने की कोशिश की गई है, जो नीति निर्देशक तत्वों के खिलाफ है और इसे लागू नहीं किया जा सकता है। जबकि भारतीय संविधान के मौलिक अधिकार के अनुच्छेद 25 के तहत हर व्यक्ति को अपने मन पसंद धर्म को चुनने, उसका प्रचार करने और उसे अपनाने का अधिकार है। समय-समय पर अदालतों ने भी अपने फैसलों में कहा है कि व्यक्ति का मौलिक अधिकार सर्वोच्च है। यदि केंद्र सरकार नीति निर्देशक तत्व को लागू करने के लिए वाकई गंभीर है तो उसे सबको शिक्षा देने, सबको स्वास्थ्य सुविधाएं देने और नशाबंदी को लागू करना चाहिए, जो सीधे जनता की बेहतरी के लिए हैं।
क्या है यूनिफॉर्म सिविल कोड
यूनिफॉर्म सिविल कोड या समान नागरिक संहिता का मतलब है, कि भारत के सभी नागरिक वो चाहे किसी भी धर्म और जाति के हों उनके लिए समान कानून रहेगा। समान नागरिक संहिता एक धर्मनिरपेक्ष कानून होता है, जो सभी धर्मों के लोगों के लिये समान रूप से लागू होगा। यह कानून भी किसी भी धर्म या जाति के सभी निजी कानूनों से ऊपर होगा। फिलहाल हर धर्म के लोग इन मामलों का निपटारा अपने पर्सनल लॉ यानी निजी कानूनों के तहत करते हैं यानि दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत में हिन्दू और मुस्लिमों के लिए अलग-अलग कानून हैं और अलग तरीके से लागू होते हैं। केंद्र सरकार की यह कवायद यदि अंजाम तक पहुंची तो देश में समान नागरिक संहिता यानि यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू हो जायेगा।
क्या है सरकार का मकसद
केंद्र सरकार का इस कानून के तहत देश में रहने वाले हर व्यक्ति के लिए एक ही तरह का कानून अनिवार्य करने का मकसद है, जो सभी धर्म और संप्रादाय पर लागू होगा। मसलन इस कानून के लागू होने के बाद भारत में हर धर्म के लोगों के लिए शादी, तलाक,गोद लेना और जायदाद के बंटवारे जैसे मामलों में एक ही कानून लागू होगा। केंद्र सरकार ने गत जुलाई में देश में समान आचार संहिता लागू करने के मुद्दे पर विधि आयोग से अध्ययन कराने और इसके लागू करने संबन्धी एक रिपोर्ट तैयार करने को भी कहा था, जिसमें केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय ने विधि आयोग को पत्र लिखकर मामले में विस्तृत रिपोर्ट की मांग थी। इसीलिए विधि आयोग ने पर्सलन लॉ बोर्ड समेत सभी समुदायों के संगठनों को एक प्रश्नावली भेजकर उनके जवाब के रूप में राय मांगी है।
मुस्लिम महिलाओं ने कहा
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और कुछ दूसरे मुस्लिम संगठनों की ओर से तीन तलाक एवं समान नागरिक संहिता से जुड़ी विधि आयोग की प्रश्नावली के बहिष्कार का ऐलान किए जाने के बाद मुस्लिम महिला कार्यकर्ताओं ने बोर्ड और इन संगठनों पर निशाना साधते हुए कहा कि ये लोग मुसलमानों के प्रतिनिधि नहीं हैं और उनका रुख धार्मिक नहीं बल्कि राजनीतिक है।भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन की सह-संस्थापक जकिया सोमान ने कहा,विधि आयोग ने सिर्फ तीन तलाक की बात नहीं कही है। उसने हिंदू महिलाओं के संपत्ति के अधिकार और ईसाई महिलाओं के तलाक से संबंधित मामलों की भी बात की है। इसलिए आयोग पर सवाल खड़े करना अनुचित है। जकिया ने आरोप लगाया, पर्सनल लॉ बोर्ड में बैठे लोग मुसलमानों के प्रतिनिधि नहीं हो सकते। यह बोर्ड महज एक एनजीओ है और देश में हजारों एनजीओ हैं। इसलिए इनकी बात को मुस्लिम समुदाय की बात नहीं कहा जा सकता। मुझे लगता है कि इनका रूख धार्मिक नहीं बल्कि पूरी तरह से राजनीतिक है। महिलाओं की मांग कुरान के मुताबिक है और उन्हें उनका हक मिलना ही चाहिए।
14Oct-2016
ट्रिपल तलाक का विरोध करना भी गलत: रहमानी
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
केंद्र सरकार द्वारा देश में समान नागरिक संहिता यानि यूनिफार्म सिविल कोड लागू करने की मुहिम का विरोध करते हुए मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा है कि यह देशहित में नहीं होगा। सरकार के प्रयास से गृहयुद्ध जैसे हालात पैदा होने का खतरा है। पर्सनल लॉ बोर्ड ने ट्रिपल तलाक के विरोध को भी गलत करार दिया है।
आॅल इंडिया मुस्लिम पसर्नल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना मोहम्मद वली रहमानी के नेतृत्व में गुरुवार को यहां एक संवाददाता सम्मेलन में नौ मुस्लिम संगठनों के प्रतिनिधियों ने यूनिफार्म सिविल कोड लागू करने के लिए केंद्र सरकार के प्रयासों का विरोध किया। वहीं इन संगठनों ने ट्रिपल तलाक का किया जा रहा विरोध भी संविधान के मौलिक अधिकार के खिलाफ है, जो पूरी तरह से गलत है। पर्सनल लॉ बोर्ड के रहमानी ने समान नागरिक संहिता पर विधि आयोग द्वारा तैयार की गई प्रश्नावली को खारिज करते हुए कहा कि वे एक भी सवाल का जवाब नहीं देंगे। बल्कि अन्य मुस्लिम समुदाय और संगठनों से भी अपील की जा रही है कि वे विधि आयोग की इस प्रश्नावली का बहिष्कार करें। उन्होंने कहा कि विधि आयोग की इस प्रश्नावली का वास्तविक मकसद मुस्लिम पर्सनल लॉ को समाप्त करना है और यह प्रश्नावली लोगों को भ्रमित करने के लिए तैयार की गई है। रहमानी ने आरोप लगाया कि संविधान के अनुच्छेद 44 का उल्लेख कर समान नागरिक संहिता को संवैधानिक दर्जा देने की कोशिश की गई है, जो नीति निर्देशक तत्वों के खिलाफ है और इसे लागू नहीं किया जा सकता है। जबकि भारतीय संविधान के मौलिक अधिकार के अनुच्छेद 25 के तहत हर व्यक्ति को अपने मन पसंद धर्म को चुनने, उसका प्रचार करने और उसे अपनाने का अधिकार है। समय-समय पर अदालतों ने भी अपने फैसलों में कहा है कि व्यक्ति का मौलिक अधिकार सर्वोच्च है। यदि केंद्र सरकार नीति निर्देशक तत्व को लागू करने के लिए वाकई गंभीर है तो उसे सबको शिक्षा देने, सबको स्वास्थ्य सुविधाएं देने और नशाबंदी को लागू करना चाहिए, जो सीधे जनता की बेहतरी के लिए हैं।
क्या है यूनिफॉर्म सिविल कोड
यूनिफॉर्म सिविल कोड या समान नागरिक संहिता का मतलब है, कि भारत के सभी नागरिक वो चाहे किसी भी धर्म और जाति के हों उनके लिए समान कानून रहेगा। समान नागरिक संहिता एक धर्मनिरपेक्ष कानून होता है, जो सभी धर्मों के लोगों के लिये समान रूप से लागू होगा। यह कानून भी किसी भी धर्म या जाति के सभी निजी कानूनों से ऊपर होगा। फिलहाल हर धर्म के लोग इन मामलों का निपटारा अपने पर्सनल लॉ यानी निजी कानूनों के तहत करते हैं यानि दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत में हिन्दू और मुस्लिमों के लिए अलग-अलग कानून हैं और अलग तरीके से लागू होते हैं। केंद्र सरकार की यह कवायद यदि अंजाम तक पहुंची तो देश में समान नागरिक संहिता यानि यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू हो जायेगा।
क्या है सरकार का मकसद
केंद्र सरकार का इस कानून के तहत देश में रहने वाले हर व्यक्ति के लिए एक ही तरह का कानून अनिवार्य करने का मकसद है, जो सभी धर्म और संप्रादाय पर लागू होगा। मसलन इस कानून के लागू होने के बाद भारत में हर धर्म के लोगों के लिए शादी, तलाक,गोद लेना और जायदाद के बंटवारे जैसे मामलों में एक ही कानून लागू होगा। केंद्र सरकार ने गत जुलाई में देश में समान आचार संहिता लागू करने के मुद्दे पर विधि आयोग से अध्ययन कराने और इसके लागू करने संबन्धी एक रिपोर्ट तैयार करने को भी कहा था, जिसमें केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय ने विधि आयोग को पत्र लिखकर मामले में विस्तृत रिपोर्ट की मांग थी। इसीलिए विधि आयोग ने पर्सलन लॉ बोर्ड समेत सभी समुदायों के संगठनों को एक प्रश्नावली भेजकर उनके जवाब के रूप में राय मांगी है।
मुस्लिम महिलाओं ने कहा
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और कुछ दूसरे मुस्लिम संगठनों की ओर से तीन तलाक एवं समान नागरिक संहिता से जुड़ी विधि आयोग की प्रश्नावली के बहिष्कार का ऐलान किए जाने के बाद मुस्लिम महिला कार्यकर्ताओं ने बोर्ड और इन संगठनों पर निशाना साधते हुए कहा कि ये लोग मुसलमानों के प्रतिनिधि नहीं हैं और उनका रुख धार्मिक नहीं बल्कि राजनीतिक है।भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन की सह-संस्थापक जकिया सोमान ने कहा,विधि आयोग ने सिर्फ तीन तलाक की बात नहीं कही है। उसने हिंदू महिलाओं के संपत्ति के अधिकार और ईसाई महिलाओं के तलाक से संबंधित मामलों की भी बात की है। इसलिए आयोग पर सवाल खड़े करना अनुचित है। जकिया ने आरोप लगाया, पर्सनल लॉ बोर्ड में बैठे लोग मुसलमानों के प्रतिनिधि नहीं हो सकते। यह बोर्ड महज एक एनजीओ है और देश में हजारों एनजीओ हैं। इसलिए इनकी बात को मुस्लिम समुदाय की बात नहीं कहा जा सकता। मुझे लगता है कि इनका रूख धार्मिक नहीं बल्कि पूरी तरह से राजनीतिक है। महिलाओं की मांग कुरान के मुताबिक है और उन्हें उनका हक मिलना ही चाहिए।
14Oct-2016
गुरुवार, 13 अक्टूबर 2016
पाक को झटका देगी चाबहार बंदरगाह परियोजना!
भारत, ईरान और अफगानिस्तान ने की समीक्षा
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
भारत के ईरान और अफगानिस्तान के विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ते दोस्ताना सबन्ध पाकिस्तान को रास नहीं आ रहे हैं। खासकर ईरान में प्रस्तावित चाबहार बंदरगाह परियोजना को लेकर वह सबसे ज्यादा बेचैन है, लेकिन पाक के नापाक कारनामों से उसके पडोसी होने के बावजूद ईरान और अफगानिस्तान ने भारत की पाक को अलग-थलग करने के समर्थन में पाकिस्तान को चाबहार परियोजना के मद्देनजर गहरा झटका देने की तैयारी कर ली है।
भारत ने मौजूदा तनाव के बीच पकिस्तान को एक और गहरा सदमा पहुंचाने की तैयारी में लंबित पड़ी चाबहार बंदरगाह परियोजना को आगे बढ़ाने की नीति तेज कर दी है। दरअसल हाल ही में केंद्रीय जहाजरानी मंत्री नितिन गडकरी के निमंत्रण पर अफगानिस्तान के परिवहन मंत्री डा. मोहमदुल्लाह बताश और ईरान के सड़क एवं शहरी विकास मंत्री डा. अब्बास अहमद अखौंडी भारत पहुंचे थे, जहां त्रिपक्षीय समीक्षा बैठक करके चाबहार परियोजना के कार्यान्वयन को आगे बढ़ाने पर सहमति बनाई गई। मंत्रालय के अनुसार इस बैठक में अंतर्राष्ट्रीय परिवहन और ट्रांजिट कॉरिडोर की स्थापना के लिए त्रिपक्षीय समझौते के अमल पर भी चर्चा की गई। चाबहार परियोजना पर इसी साल पीएम मोदी और ईरान के राष्ट्रपति की मौजूदगी में एक समझौते पर हस्ताक्षर किये जा चुके हैं। मंत्रालय के अनुसार तीनों देशों के बीच हुई चर्चा के दौरान क्षेत्रीय कनेक्टिविटी हुए एक केंद्र के रूप में चाबहार परियोजना से जुड़े मुद्दों पर फैसला किया गया कि चाबहार बंदरगाह को लेकर जागरुकता फैलाने के लिए इसी साल के भीतर एक कनेक्टिविटी समारोह का आयोजन किया जाएगा। ताकि तीनों देश समझौते के अनुमोदन पर आंतरिक प्रक्रियाओं को पूरा करके इस परियोजना को शुरू किया जा सके। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि समझौते के शीघ्र कार्यान्वयन की दिशा में परिवहन पारगमन, बंदरगाह, सीमा शुल्क प्रक्रियाओं और कौंसुलर मामलों से संबंधित प्रोटोकॉल विकसित किया जाएगा। वहीं एक महीने के भीतर चाबहार में तीनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों के एक विशेषज्ञ स्तरीय बैठक भी होगी, जिसमें तीनो देशों की आर्थिक वृद्धि और विकास से व्यापार का पुनर्गठन होगा। गौरतलब है कि इस समझौते में भारत और अफगानिस्तान के अधिकार क्षेत्रों में सामानों तथा यात्रियों के लाने-ले जाने तथा आने-जाने के लिए आवश्यक और कानूनी रूपरेखा का प्रावधान है।
इसलिए चिढ़ा है पाकिस्तान
भारत जब भी किसी पड़ोसी देश या क्षेत्रीय ताकत से दोस्तना संबंध बनाता है या रणनीतिक सहयोग करता है, तो उससे पाकिस्तान की बेचैनी बढ़ जाती है। भारत, ईरान और अफगानिस्तान के लिए व्यापार की दृष्टि से महत्वपूर्ण चाबहार बंदरगाह परियोजना से पाकिस्तान को पूरी तरह अलग-थलग पड़ने का खतरा नजर आ रहा है। मसलन भारत और पाकिस्तान इस क्षेत्र में मजबूत प्रतिद्वंद्वी माने जाते हैं जिसकी दो तीन वजह पाकिस्तान को ज्यादा परेशान कर रही हैं। अभी तक पाकिस्तान के जरिए अफगानिस्तान तक पहुंचने वाली भारतीय चीजें चाबहार परियोजना के पूरा होते ही ईरानी बंदरगाह के जरिए अफगानिस्तान तक सीधे पहुंचना शुरू हो जाएंगी। इसी परियोजना के जरिए भारतीय सामान सेंट्रल एशिया और पूर्वी यूरोप तक सामान भेज सकता है। पाकिस्तान को यह खतरा है कि व्यापार में भारत-ईरान-अफगानिस्तान का सहयोग, रणनीति और अन्य क्षेत्रों में भी बढ़ेगा और इसके पाकिस्तान के लिए नकारात्मक नतीजे निकलेंगे।
चीन भी है बेचैन
भारत और ईरान के बीच चाबहार बंदरगाह परियोजना को जहां पाकिस्तान अपने लिए खतरा मान रहा है, क्योंकि इस परियोजना के जरिए पाकिस्तान को ठेंगा दिखाते हुए भारत मध्य एशिया और अफगानिस्तान तक पहुंचेगा। ऐसे में पाकिस्तान से नजदीकी बढ़ाने के बाद चीन ने भी प्रतिद्वंद्वता जाहिर करते हुए पाकिस्तान का ग्वादर पोर्ट बनाना शुरू किया है। दरअसल चीन ग्वादर के सहारे अरब सागर तक अपनी पहुंच बनाने का प्रयास कर रहा है। भारत की पाक को सबक सिखाने के लिए ऐसी भी योजना है कि मध्य एशिया से पाइप लाइन के जरिए तेल और गैस भी भारत तक आए, लेकिन पाकिस्तान के अविश्वास के कारण पाइपलाइन शुल्क और उसकी सुरक्षा को लेकर खतरा हो सकता है। ऐसे में चाबहार के जरिए र्इंधन जहाजो के जरिए र्इंधन पहुंचाने के लिए यह परियोजना अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगी।
यह भी हुआ निर्णय
इस समीक्षा बैठक के दौरान अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन कॉरिडोर (आईएनएसटीसी) बनाने पर भी भी भारत और ईरान ने बल दिया। वहीं निर्णय लिया गया कि चाबहार-जाहेदन रेलवे और चाबहार फ्री जोन में निवेश सहित अन्य परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लायी जाए, बल्कि दोनों देशों ने क्षेत्रीय कनेक्टिविटी से संबंधित नई परियोजनाओं के बारे में भी विचार-विमर्श किया। भारत इस बंदरगाह में भारत ने चाबहार में करीब 10 करोड़ डॉलर का निवेश कर चुका और 50 करोड़ डॉलर के और निवेश करने वाला है। इसके अलावा ईरान और भारत के बीच कई क्षेत्रों में करोड़ों डॉलर के द्विपक्षीय समझौते भी किये जा चुके हैं।
13Oct-2016
पाक को झटका देगी चाबहार बंदरगाह परियोजना!
भारत, ईरान और अफगानिस्तान ने की समीक्षा
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
भारत के ईरान और अफगानिस्तान के विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ते दोस्ताना सबन्ध पाकिस्तान को रास नहीं आ रहे हैं। खासकर ईरान में प्रस्तावित चाबहार बंदरगाह परियोजना को लेकर वह सबसे ज्यादा बेचैन है, लेकिन पाक के नापाक कारनामों से उसके पडोसी होने के बावजूद ईरान और अफगानिस्तान ने भारत की पाक को अलग-थलग करने के समर्थन में पाकिस्तान को चाबहार परियोजना के मद्देनजर गहरा झटका देने की तैयारी कर ली है।
भारत ने मौजूदा तनाव के बीच पकिस्तान को एक और गहरा सदमा पहुंचाने की तैयारी में लंबित पड़ी चाबहार बंदरगाह परियोजना को आगे बढ़ाने की नीति तेज कर दी है। दरअसल हाल ही में केंद्रीय जहाजरानी मंत्री नितिन गडकरी के निमंत्रण पर अफगानिस्तान के परिवहन मंत्री डा. मोहमदुल्लाह बताश और ईरान के सड़क एवं शहरी विकास मंत्री डा. अब्बास अहमद अखौंडी भारत पहुंचे थे, जहां त्रिपक्षीय समीक्षा बैठक करके चाबहार परियोजना के कार्यान्वयन को आगे बढ़ाने पर सहमति बनाई गई। मंत्रालय के अनुसार इस बैठक में अंतर्राष्ट्रीय परिवहन और ट्रांजिट कॉरिडोर की स्थापना के लिए त्रिपक्षीय समझौते के अमल पर भी चर्चा की गई। चाबहार परियोजना पर इसी साल पीएम मोदी और ईरान के राष्ट्रपति की मौजूदगी में एक समझौते पर हस्ताक्षर किये जा चुके हैं। मंत्रालय के अनुसार तीनों देशों के बीच हुई चर्चा के दौरान क्षेत्रीय कनेक्टिविटी हुए एक केंद्र के रूप में चाबहार परियोजना से जुड़े मुद्दों पर फैसला किया गया कि चाबहार बंदरगाह को लेकर जागरुकता फैलाने के लिए इसी साल के भीतर एक कनेक्टिविटी समारोह का आयोजन किया जाएगा। ताकि तीनों देश समझौते के अनुमोदन पर आंतरिक प्रक्रियाओं को पूरा करके इस परियोजना को शुरू किया जा सके। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि समझौते के शीघ्र कार्यान्वयन की दिशा में परिवहन पारगमन, बंदरगाह, सीमा शुल्क प्रक्रियाओं और कौंसुलर मामलों से संबंधित प्रोटोकॉल विकसित किया जाएगा। वहीं एक महीने के भीतर चाबहार में तीनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों के एक विशेषज्ञ स्तरीय बैठक भी होगी, जिसमें तीनो देशों की आर्थिक वृद्धि और विकास से व्यापार का पुनर्गठन होगा। गौरतलब है कि इस समझौते में भारत और अफगानिस्तान के अधिकार क्षेत्रों में सामानों तथा यात्रियों के लाने-ले जाने तथा आने-जाने के लिए आवश्यक और कानूनी रूपरेखा का प्रावधान है।
इसलिए चिढ़ा है पाकिस्तान
भारत जब भी किसी पड़ोसी देश या क्षेत्रीय ताकत से दोस्तना संबंध बनाता है या रणनीतिक सहयोग करता है, तो उससे पाकिस्तान की बेचैनी बढ़ जाती है। भारत, ईरान और अफगानिस्तान के लिए व्यापार की दृष्टि से महत्वपूर्ण चाबहार बंदरगाह परियोजना से पाकिस्तान को पूरी तरह अलग-थलग पड़ने का खतरा नजर आ रहा है। मसलन भारत और पाकिस्तान इस क्षेत्र में मजबूत प्रतिद्वंद्वी माने जाते हैं जिसकी दो तीन वजह पाकिस्तान को ज्यादा परेशान कर रही हैं। अभी तक पाकिस्तान के जरिए अफगानिस्तान तक पहुंचने वाली भारतीय चीजें चाबहार परियोजना के पूरा होते ही ईरानी बंदरगाह के जरिए अफगानिस्तान तक सीधे पहुंचना शुरू हो जाएंगी। इसी परियोजना के जरिए भारतीय सामान सेंट्रल एशिया और पूर्वी यूरोप तक सामान भेज सकता है। पाकिस्तान को यह खतरा है कि व्यापार में भारत-ईरान-अफगानिस्तान का सहयोग, रणनीति और अन्य क्षेत्रों में भी बढ़ेगा और इसके पाकिस्तान के लिए नकारात्मक नतीजे निकलेंगे।
चीन भी है बेचैन
भारत और ईरान के बीच चाबहार बंदरगाह परियोजना को जहां पाकिस्तान अपने लिए खतरा मान रहा है, क्योंकि इस परियोजना के जरिए पाकिस्तान को ठेंगा दिखाते हुए भारत मध्य एशिया और अफगानिस्तान तक पहुंचेगा। ऐसे में पाकिस्तान से नजदीकी बढ़ाने के बाद चीन ने भी प्रतिद्वंद्वता जाहिर करते हुए पाकिस्तान का ग्वादर पोर्ट बनाना शुरू किया है। दरअसल चीन ग्वादर के सहारे अरब सागर तक अपनी पहुंच बनाने का प्रयास कर रहा है। भारत की पाक को सबक सिखाने के लिए ऐसी भी योजना है कि मध्य एशिया से पाइप लाइन के जरिए तेल और गैस भी भारत तक आए, लेकिन पाकिस्तान के अविश्वास के कारण पाइपलाइन शुल्क और उसकी सुरक्षा को लेकर खतरा हो सकता है। ऐसे में चाबहार के जरिए र्इंधन जहाजो के जरिए र्इंधन पहुंचाने के लिए यह परियोजना अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगी।
यह भी हुआ निर्णय
इस समीक्षा बैठक के दौरान अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन कॉरिडोर (आईएनएसटीसी) बनाने पर भी भी भारत और ईरान ने बल दिया। वहीं निर्णय लिया गया कि चाबहार-जाहेदन रेलवे और चाबहार फ्री जोन में निवेश सहित अन्य परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लायी जाए, बल्कि दोनों देशों ने क्षेत्रीय कनेक्टिविटी से संबंधित नई परियोजनाओं के बारे में भी विचार-विमर्श किया। भारत इस बंदरगाह में भारत ने चाबहार में करीब 10 करोड़ डॉलर का निवेश कर चुका और 50 करोड़ डॉलर के और निवेश करने वाला है। इसके अलावा ईरान और भारत के बीच कई क्षेत्रों में करोड़ों डॉलर के द्विपक्षीय समझौते भी किये जा चुके हैं।
13Oct-2016
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
भारत के ईरान और अफगानिस्तान के विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ते दोस्ताना सबन्ध पाकिस्तान को रास नहीं आ रहे हैं। खासकर ईरान में प्रस्तावित चाबहार बंदरगाह परियोजना को लेकर वह सबसे ज्यादा बेचैन है, लेकिन पाक के नापाक कारनामों से उसके पडोसी होने के बावजूद ईरान और अफगानिस्तान ने भारत की पाक को अलग-थलग करने के समर्थन में पाकिस्तान को चाबहार परियोजना के मद्देनजर गहरा झटका देने की तैयारी कर ली है।
भारत ने मौजूदा तनाव के बीच पकिस्तान को एक और गहरा सदमा पहुंचाने की तैयारी में लंबित पड़ी चाबहार बंदरगाह परियोजना को आगे बढ़ाने की नीति तेज कर दी है। दरअसल हाल ही में केंद्रीय जहाजरानी मंत्री नितिन गडकरी के निमंत्रण पर अफगानिस्तान के परिवहन मंत्री डा. मोहमदुल्लाह बताश और ईरान के सड़क एवं शहरी विकास मंत्री डा. अब्बास अहमद अखौंडी भारत पहुंचे थे, जहां त्रिपक्षीय समीक्षा बैठक करके चाबहार परियोजना के कार्यान्वयन को आगे बढ़ाने पर सहमति बनाई गई। मंत्रालय के अनुसार इस बैठक में अंतर्राष्ट्रीय परिवहन और ट्रांजिट कॉरिडोर की स्थापना के लिए त्रिपक्षीय समझौते के अमल पर भी चर्चा की गई। चाबहार परियोजना पर इसी साल पीएम मोदी और ईरान के राष्ट्रपति की मौजूदगी में एक समझौते पर हस्ताक्षर किये जा चुके हैं। मंत्रालय के अनुसार तीनों देशों के बीच हुई चर्चा के दौरान क्षेत्रीय कनेक्टिविटी हुए एक केंद्र के रूप में चाबहार परियोजना से जुड़े मुद्दों पर फैसला किया गया कि चाबहार बंदरगाह को लेकर जागरुकता फैलाने के लिए इसी साल के भीतर एक कनेक्टिविटी समारोह का आयोजन किया जाएगा। ताकि तीनों देश समझौते के अनुमोदन पर आंतरिक प्रक्रियाओं को पूरा करके इस परियोजना को शुरू किया जा सके। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि समझौते के शीघ्र कार्यान्वयन की दिशा में परिवहन पारगमन, बंदरगाह, सीमा शुल्क प्रक्रियाओं और कौंसुलर मामलों से संबंधित प्रोटोकॉल विकसित किया जाएगा। वहीं एक महीने के भीतर चाबहार में तीनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों के एक विशेषज्ञ स्तरीय बैठक भी होगी, जिसमें तीनो देशों की आर्थिक वृद्धि और विकास से व्यापार का पुनर्गठन होगा। गौरतलब है कि इस समझौते में भारत और अफगानिस्तान के अधिकार क्षेत्रों में सामानों तथा यात्रियों के लाने-ले जाने तथा आने-जाने के लिए आवश्यक और कानूनी रूपरेखा का प्रावधान है।
इसलिए चिढ़ा है पाकिस्तान
भारत जब भी किसी पड़ोसी देश या क्षेत्रीय ताकत से दोस्तना संबंध बनाता है या रणनीतिक सहयोग करता है, तो उससे पाकिस्तान की बेचैनी बढ़ जाती है। भारत, ईरान और अफगानिस्तान के लिए व्यापार की दृष्टि से महत्वपूर्ण चाबहार बंदरगाह परियोजना से पाकिस्तान को पूरी तरह अलग-थलग पड़ने का खतरा नजर आ रहा है। मसलन भारत और पाकिस्तान इस क्षेत्र में मजबूत प्रतिद्वंद्वी माने जाते हैं जिसकी दो तीन वजह पाकिस्तान को ज्यादा परेशान कर रही हैं। अभी तक पाकिस्तान के जरिए अफगानिस्तान तक पहुंचने वाली भारतीय चीजें चाबहार परियोजना के पूरा होते ही ईरानी बंदरगाह के जरिए अफगानिस्तान तक सीधे पहुंचना शुरू हो जाएंगी। इसी परियोजना के जरिए भारतीय सामान सेंट्रल एशिया और पूर्वी यूरोप तक सामान भेज सकता है। पाकिस्तान को यह खतरा है कि व्यापार में भारत-ईरान-अफगानिस्तान का सहयोग, रणनीति और अन्य क्षेत्रों में भी बढ़ेगा और इसके पाकिस्तान के लिए नकारात्मक नतीजे निकलेंगे।
चीन भी है बेचैन
भारत और ईरान के बीच चाबहार बंदरगाह परियोजना को जहां पाकिस्तान अपने लिए खतरा मान रहा है, क्योंकि इस परियोजना के जरिए पाकिस्तान को ठेंगा दिखाते हुए भारत मध्य एशिया और अफगानिस्तान तक पहुंचेगा। ऐसे में पाकिस्तान से नजदीकी बढ़ाने के बाद चीन ने भी प्रतिद्वंद्वता जाहिर करते हुए पाकिस्तान का ग्वादर पोर्ट बनाना शुरू किया है। दरअसल चीन ग्वादर के सहारे अरब सागर तक अपनी पहुंच बनाने का प्रयास कर रहा है। भारत की पाक को सबक सिखाने के लिए ऐसी भी योजना है कि मध्य एशिया से पाइप लाइन के जरिए तेल और गैस भी भारत तक आए, लेकिन पाकिस्तान के अविश्वास के कारण पाइपलाइन शुल्क और उसकी सुरक्षा को लेकर खतरा हो सकता है। ऐसे में चाबहार के जरिए र्इंधन जहाजो के जरिए र्इंधन पहुंचाने के लिए यह परियोजना अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगी।
यह भी हुआ निर्णय
इस समीक्षा बैठक के दौरान अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन कॉरिडोर (आईएनएसटीसी) बनाने पर भी भी भारत और ईरान ने बल दिया। वहीं निर्णय लिया गया कि चाबहार-जाहेदन रेलवे और चाबहार फ्री जोन में निवेश सहित अन्य परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लायी जाए, बल्कि दोनों देशों ने क्षेत्रीय कनेक्टिविटी से संबंधित नई परियोजनाओं के बारे में भी विचार-विमर्श किया। भारत इस बंदरगाह में भारत ने चाबहार में करीब 10 करोड़ डॉलर का निवेश कर चुका और 50 करोड़ डॉलर के और निवेश करने वाला है। इसके अलावा ईरान और भारत के बीच कई क्षेत्रों में करोड़ों डॉलर के द्विपक्षीय समझौते भी किये जा चुके हैं।
13Oct-2016
बुधवार, 12 अक्टूबर 2016
भारत-पाक सरहद खतरनाक सीमा में शुमार!
आतंकी घुसपैठ रोकने के मकसद से होगी सील
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
दुनियाभर में भारत-पाक सीमा को सबसे खतरनाक और संवेदनशील माना जाने लगा है, जहां सुरक्षा के तमाम इंतजामों के बावजूद पाकिस्तान की ओर से आतंकियों की घुसपैठ बादस्तूर जारी है। इसी कारण उरी हमले और पीओके में सर्जिकल स्ट्राइक से सीमापार की आतंकी संगठनों के आक्रमक तेवरों को देख भारत को पाक से लगी सीमाओं को सील करने का फैसला करना पड़ा है।
पिछले सप्ताह ही केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान और गुजरात की सरकारों के साथ विचार विमर्श करने के बाद पाकिस्तान से लगी भारत की करीब 3,323 किमी लंबी सीमा को पूरी तरह से सील करने का ऐलान किया। पाकिस्तान की सेना और खुफिया एजेंसी आईएसआई द्वारा भारत के खिलाफ आतंकवाद का इस्तेमाल करने के रूप में पाकिस्तान की पूरी दुनिया में पहचान हो चुकी हे। खासकर उरी आतंकी हमले ने पाक को अलग-थलग दिया। हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में भारत और पाकिस्तान के बीच लगी सीमा रेखा सबसे खतरनाक और संवेदनशील मानी गई है। दरअसल इन चार राज्यों से पाकिस्तान से 2900 किमी से ज्यादा लंबी सीमा भारत और पाकिस्तान के बीच लगती है। यही नहीं रिपोर्ट में तो भारत की तटीय रेखा को भी दुनिया की सबसे ज्यादा खतरनाक करार दिया गया है, जिसकी लंबाई पूर्व में पश्चिमी बंगाल से दक्षिणी राज्यों से लगती हुई पश्चिम में महाराष्ट्र तक 7,516 किमी है। दुनियाभर में तटीय रेखा की लंबाई नौवें स्थान पर होते हुए भी सर्वाधिक खतरे के दायरे में है। हालांकि पाकिस्तान की ओर से आतंकवाद के जरिए भारत को अस्थिर करने के प्रयास जम्मू-कश्मीर से गुजरात तक लगी सीमा के जरिए ही ज्यादा की जा रही है, जिसे भारत 2018 तक पूरी तरह दीवार खड़ी करके सील करने का निर्णय ले चुका है।
अंतरराष्ट्रीय सीमा का उल्लंघन
भारत-पाक के जानकारी विशेषज्ञों के अनुसार जम्मू-कश्मीर की पाकिस्तान के साथ 264 किमी लम्बी अंतरराष्ट्रीय सीमा अंतरराष्ट्रीय सीमा का नाम इसलिए दिया गया है, क्योंकि इस पर संयुक्त राष्ट्र संघ के तत्वावधान में सीमा बुर्जियों की स्थापना की हुई है। मसलन ऐसी निशानदेही का मकसद दोनों देशों की हद की सीमा तय करना था। इस सीमा पर अंतर्राष्ट्रीय नियमों का पालन करते कभी भी गोलीबारी न करने के निर्देश हैं, लेकिन पाकिस्तान है जो कि मानता नहीं, जिसकी सेना अंतरराष्ट्रीय नियमों और सीजफायर का लगातार उल्लंघन करता आ रहा है और साथ में आतंकवाद का सहारा लेकर भारत में भी घुसपैठ कराने की नापाक हरकत से बाज आने को तैयार नहीं है। जहां तक जम्मू-कश्मीर से लगी कुल 2062 किमी लम्बी सीमा चीन और पाकिस्तान से लगी हुई है, जिसमें से पाक से सटी 1202 किमी सीमा अति संवेदनशील और खतरनाक साबित हो रही है। अंतर्राष्ट्रीय सीमा में चीन और पाक के अलावा भारत की म्यांमार से करीब 1624 किमी की सीमा मिलती है, जहां से देश के पूर्वी क्षेत्र के अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मिजोरम और मणिपुर राज्य सटे हुए हैं। ये ऐसी सीमाएं हैं जहां से नकली मुद्रा, हथियार और नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए सुरक्षाकर्मियों को दिन-रात गश्त करनी पड़ती है। इसी प्रकार भारत और बांग्लादेश के बीच करीब 4096 किमी लंबी सीमा रेखा है। यह दुनिया का पांचवा सबसे बड़ी सीमा रेखा है। इसमें करीब 262 किमी की सीमा रेखा असम, त्रिपुरा से करीब 856 किमी, मिजोरम से करीब 180 किमी, बंगाल से 2217 किमी और मेघालय से 443 किमी की सीमा रेखा मिलती है। वहीं बांग्लादेश के मेमनसिंह, खुलना, राजशाही,रंगपुरा, सेलहट और चिटगांव भारतीय सीमा रेखा से मिलते हैं।
भारत के इंतजाम
गृह मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार पाकिस्तान की नापाक हरकत पर नजर रखने के लिए भारत ने पाक से सटी सीमाओं पर तकनीक के साथ तमाम इंतजाम करने के आलवा करीब पचास हजार ऐ खंभे लगाए हुए हैं, जिन पर रात्रि के समय सुरक्षा बलों की निगरानी को आसान बनाने के लिए करीब डेढ़ लाख μलट लाइट्स लगाई गई हैं। यही नहीं पिछले दिनों सरकार ने भारत-पाक सीमा पर बहुस्तरीय सुरक्षा योजना भी शुरू की है, लेकिन पाकिस्तान की ओर से आतंकियों की घुसपैठ और नापाक हरकत थमने का नाम नहीं ले रही हैं तो भारत को सीमा सील करने का सख्त फैसला करने को मजबूर होना पड़ा है, भले ही चीन जैसा देश भी इस फैसले पर सवाल उठाता नजर आ रहा हो।
12Oct-2016
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
दुनियाभर में भारत-पाक सीमा को सबसे खतरनाक और संवेदनशील माना जाने लगा है, जहां सुरक्षा के तमाम इंतजामों के बावजूद पाकिस्तान की ओर से आतंकियों की घुसपैठ बादस्तूर जारी है। इसी कारण उरी हमले और पीओके में सर्जिकल स्ट्राइक से सीमापार की आतंकी संगठनों के आक्रमक तेवरों को देख भारत को पाक से लगी सीमाओं को सील करने का फैसला करना पड़ा है।
पिछले सप्ताह ही केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान और गुजरात की सरकारों के साथ विचार विमर्श करने के बाद पाकिस्तान से लगी भारत की करीब 3,323 किमी लंबी सीमा को पूरी तरह से सील करने का ऐलान किया। पाकिस्तान की सेना और खुफिया एजेंसी आईएसआई द्वारा भारत के खिलाफ आतंकवाद का इस्तेमाल करने के रूप में पाकिस्तान की पूरी दुनिया में पहचान हो चुकी हे। खासकर उरी आतंकी हमले ने पाक को अलग-थलग दिया। हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में भारत और पाकिस्तान के बीच लगी सीमा रेखा सबसे खतरनाक और संवेदनशील मानी गई है। दरअसल इन चार राज्यों से पाकिस्तान से 2900 किमी से ज्यादा लंबी सीमा भारत और पाकिस्तान के बीच लगती है। यही नहीं रिपोर्ट में तो भारत की तटीय रेखा को भी दुनिया की सबसे ज्यादा खतरनाक करार दिया गया है, जिसकी लंबाई पूर्व में पश्चिमी बंगाल से दक्षिणी राज्यों से लगती हुई पश्चिम में महाराष्ट्र तक 7,516 किमी है। दुनियाभर में तटीय रेखा की लंबाई नौवें स्थान पर होते हुए भी सर्वाधिक खतरे के दायरे में है। हालांकि पाकिस्तान की ओर से आतंकवाद के जरिए भारत को अस्थिर करने के प्रयास जम्मू-कश्मीर से गुजरात तक लगी सीमा के जरिए ही ज्यादा की जा रही है, जिसे भारत 2018 तक पूरी तरह दीवार खड़ी करके सील करने का निर्णय ले चुका है।
अंतरराष्ट्रीय सीमा का उल्लंघन
भारत-पाक के जानकारी विशेषज्ञों के अनुसार जम्मू-कश्मीर की पाकिस्तान के साथ 264 किमी लम्बी अंतरराष्ट्रीय सीमा अंतरराष्ट्रीय सीमा का नाम इसलिए दिया गया है, क्योंकि इस पर संयुक्त राष्ट्र संघ के तत्वावधान में सीमा बुर्जियों की स्थापना की हुई है। मसलन ऐसी निशानदेही का मकसद दोनों देशों की हद की सीमा तय करना था। इस सीमा पर अंतर्राष्ट्रीय नियमों का पालन करते कभी भी गोलीबारी न करने के निर्देश हैं, लेकिन पाकिस्तान है जो कि मानता नहीं, जिसकी सेना अंतरराष्ट्रीय नियमों और सीजफायर का लगातार उल्लंघन करता आ रहा है और साथ में आतंकवाद का सहारा लेकर भारत में भी घुसपैठ कराने की नापाक हरकत से बाज आने को तैयार नहीं है। जहां तक जम्मू-कश्मीर से लगी कुल 2062 किमी लम्बी सीमा चीन और पाकिस्तान से लगी हुई है, जिसमें से पाक से सटी 1202 किमी सीमा अति संवेदनशील और खतरनाक साबित हो रही है। अंतर्राष्ट्रीय सीमा में चीन और पाक के अलावा भारत की म्यांमार से करीब 1624 किमी की सीमा मिलती है, जहां से देश के पूर्वी क्षेत्र के अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मिजोरम और मणिपुर राज्य सटे हुए हैं। ये ऐसी सीमाएं हैं जहां से नकली मुद्रा, हथियार और नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए सुरक्षाकर्मियों को दिन-रात गश्त करनी पड़ती है। इसी प्रकार भारत और बांग्लादेश के बीच करीब 4096 किमी लंबी सीमा रेखा है। यह दुनिया का पांचवा सबसे बड़ी सीमा रेखा है। इसमें करीब 262 किमी की सीमा रेखा असम, त्रिपुरा से करीब 856 किमी, मिजोरम से करीब 180 किमी, बंगाल से 2217 किमी और मेघालय से 443 किमी की सीमा रेखा मिलती है। वहीं बांग्लादेश के मेमनसिंह, खुलना, राजशाही,रंगपुरा, सेलहट और चिटगांव भारतीय सीमा रेखा से मिलते हैं।
भारत के इंतजाम
गृह मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार पाकिस्तान की नापाक हरकत पर नजर रखने के लिए भारत ने पाक से सटी सीमाओं पर तकनीक के साथ तमाम इंतजाम करने के आलवा करीब पचास हजार ऐ खंभे लगाए हुए हैं, जिन पर रात्रि के समय सुरक्षा बलों की निगरानी को आसान बनाने के लिए करीब डेढ़ लाख μलट लाइट्स लगाई गई हैं। यही नहीं पिछले दिनों सरकार ने भारत-पाक सीमा पर बहुस्तरीय सुरक्षा योजना भी शुरू की है, लेकिन पाकिस्तान की ओर से आतंकियों की घुसपैठ और नापाक हरकत थमने का नाम नहीं ले रही हैं तो भारत को सीमा सील करने का सख्त फैसला करने को मजबूर होना पड़ा है, भले ही चीन जैसा देश भी इस फैसले पर सवाल उठाता नजर आ रहा हो।
12Oct-2016
चुनावों में पेश नहीं होगा आम बजट
सरकार चुनावी प्रक्रिया के दौरान बजट पेश करने के पक्ष में नहीं
हरिभूमि ब्यूरो. नई दिल्ली
केंद्र सरकार एक अप्रैल से आम बजट की प्रक्रियाओं को लागू करने के प्रति गंभीर है। इसके लिए जनवरी के अंतिम सप्ताह में बजट सत्र बुलाकर आम बजट पेश करने की योजना है। इसका कारण यह भी है कि आगामी फरवरी में यूपी समेत पांच राज्यों में विधानसभा होने की संभावना है और सरकार चुनावी प्रक्रिया के दौरान बजट पेश करने के पक्ष में नहीं है।
ऐसे संकेत यहां केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने देते हुए कहा कि एक अप्रैल से बजट की विधायी प्रक्रियाओं को लागू करने के लिए केंद्रीय कैबिनेट पहले ही सैद्धांतिक मंजूरी दे चुका है। वहीं फरवरी और मार्च में पांच राज्यों उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में विधानसभा चुनाव होने के प्रबल आसार हैं। इसलिए सरकार संसद का बजट सत्र जनवरी के अंतिम सप्ताह में बुलाकर आम बजट पेश करने पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार के बजट तय समय से पहले पेश करने का निर्णय के साथ सरकार इसके लिए भी गंभीर है कि राज्य विधानसभा चुनावों के दौरान बजट पेश न किया जाए। ऐसी सैद्धांतिक मंजूरी केंद्रीय मंत्रिमंडल पहले दे चुका है कि फरवरी माह के अंतिम दिन बजट पेश किये जाने की उपनिवेश काल से चली आ रही परपंरा को समाप्त कर इसे एक महीने पहले पेश किया जाए। सरकार को इस परंपरा को बदलने का मकसद यह सुनिश्चित करना भी है कि सालाना खर्च योजना और कर प्रस्ताव के लिए विधायी मंजूरी प्रक्रिया एक अप्रैल से शुरू नए वित्त वर्ष से पहले पूरी कर ली जाए। जेटली के मुताबिक बजट पहले पेश किए जाने से पूरी बजट प्रक्रिया और वित्त विधेयक समय रहते पारित हो सकेंगे, ताकि उसे एक अप्रैल से लागू करने में मदद मिल सके।
दरअसल मंत्रालय चाहता है कि 25 जनवरी से पहले बजट सत्र बुलाया जाए और 10 या 15 फरवरी से 3 सप्ताह का अवकाश हो और प्रक्रिया पूरी करने के लिए इसे दोबारा 10 या 15 मार्च को बुलाया जाए, लेकिन 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में बजट के चुनावों के बीच में पड़ने की संभावना को देखते हुए जनवरी के अंतिम सप्ताह में आम बजट पेश करने की योजना के तहत काम किया जा रहा है। इस बार रेल बजट अलग से पेश नहीं किया जाएगा जिसके लिए कैबिनेट में पहले ही इस परंपरा को खत्म करके उसे आम बजट में ही विलय करने का फैसला किया जा चुका है।
आमसहमति बनाने का प्रयास
जेटली ने कहा कि 2017 में 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव को देखते हुए सरकार सभी राजनीतिक दलों के साथ आम सहमति बनाने का भी प्रयास कर रही है, ताकि चुनाव के दौरान बजट जैसी प्रक्रियाओं की घोषणा नहीं करनी पड़े। हालांकि राजनीतिक दलों के साथ तालमेल के बाद ही यह तय होगा कि बजट चुनाव से पहले या बाद में पेश किया जाए, जबकि सरकार चुनावों से पहले ही आम बजट पेश करने की योजना है, जिसकी वित्त मंत्रालय में तैयारियां भी की जा रही हैं। मसलन सरकार के वित्त मंत्रालय का यह प्रस्ताव यह भी था कि आम बजट एक फरवरी को पेश हो और पूरी प्रक्रिया 24 मार्च तक पूरी हो जाए।
12Oct-1216
हरिभूमि ब्यूरो. नई दिल्ली
केंद्र सरकार एक अप्रैल से आम बजट की प्रक्रियाओं को लागू करने के प्रति गंभीर है। इसके लिए जनवरी के अंतिम सप्ताह में बजट सत्र बुलाकर आम बजट पेश करने की योजना है। इसका कारण यह भी है कि आगामी फरवरी में यूपी समेत पांच राज्यों में विधानसभा होने की संभावना है और सरकार चुनावी प्रक्रिया के दौरान बजट पेश करने के पक्ष में नहीं है।
ऐसे संकेत यहां केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने देते हुए कहा कि एक अप्रैल से बजट की विधायी प्रक्रियाओं को लागू करने के लिए केंद्रीय कैबिनेट पहले ही सैद्धांतिक मंजूरी दे चुका है। वहीं फरवरी और मार्च में पांच राज्यों उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में विधानसभा चुनाव होने के प्रबल आसार हैं। इसलिए सरकार संसद का बजट सत्र जनवरी के अंतिम सप्ताह में बुलाकर आम बजट पेश करने पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार के बजट तय समय से पहले पेश करने का निर्णय के साथ सरकार इसके लिए भी गंभीर है कि राज्य विधानसभा चुनावों के दौरान बजट पेश न किया जाए। ऐसी सैद्धांतिक मंजूरी केंद्रीय मंत्रिमंडल पहले दे चुका है कि फरवरी माह के अंतिम दिन बजट पेश किये जाने की उपनिवेश काल से चली आ रही परपंरा को समाप्त कर इसे एक महीने पहले पेश किया जाए। सरकार को इस परंपरा को बदलने का मकसद यह सुनिश्चित करना भी है कि सालाना खर्च योजना और कर प्रस्ताव के लिए विधायी मंजूरी प्रक्रिया एक अप्रैल से शुरू नए वित्त वर्ष से पहले पूरी कर ली जाए। जेटली के मुताबिक बजट पहले पेश किए जाने से पूरी बजट प्रक्रिया और वित्त विधेयक समय रहते पारित हो सकेंगे, ताकि उसे एक अप्रैल से लागू करने में मदद मिल सके।
दरअसल मंत्रालय चाहता है कि 25 जनवरी से पहले बजट सत्र बुलाया जाए और 10 या 15 फरवरी से 3 सप्ताह का अवकाश हो और प्रक्रिया पूरी करने के लिए इसे दोबारा 10 या 15 मार्च को बुलाया जाए, लेकिन 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में बजट के चुनावों के बीच में पड़ने की संभावना को देखते हुए जनवरी के अंतिम सप्ताह में आम बजट पेश करने की योजना के तहत काम किया जा रहा है। इस बार रेल बजट अलग से पेश नहीं किया जाएगा जिसके लिए कैबिनेट में पहले ही इस परंपरा को खत्म करके उसे आम बजट में ही विलय करने का फैसला किया जा चुका है।
आमसहमति बनाने का प्रयास
जेटली ने कहा कि 2017 में 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव को देखते हुए सरकार सभी राजनीतिक दलों के साथ आम सहमति बनाने का भी प्रयास कर रही है, ताकि चुनाव के दौरान बजट जैसी प्रक्रियाओं की घोषणा नहीं करनी पड़े। हालांकि राजनीतिक दलों के साथ तालमेल के बाद ही यह तय होगा कि बजट चुनाव से पहले या बाद में पेश किया जाए, जबकि सरकार चुनावों से पहले ही आम बजट पेश करने की योजना है, जिसकी वित्त मंत्रालय में तैयारियां भी की जा रही हैं। मसलन सरकार के वित्त मंत्रालय का यह प्रस्ताव यह भी था कि आम बजट एक फरवरी को पेश हो और पूरी प्रक्रिया 24 मार्च तक पूरी हो जाए।
12Oct-1216
मंगलवार, 11 अक्टूबर 2016
सिमी के खतरे से निपटने की भी तैयारी!
आतंकी हमलों की ढाल बनने की आशंका
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
उरी हमले के बाद भारतीय सेना द्वारा की पीओके में की गई सर्जिकल स्ट्राइक का बदला लेने की फिराक में जुटे आतंकी संगठन भारत में सिमी को ढ़ाल बना सकते हैं। ऐसी आशंका पर केंद्र सरकार ने सुरक्षा बलों को सतर्क करके सिमी की गतिविधियों पर पैनी नजर रखने के निर्देश दिये हैं।
भारतीय सेना की पीओके में आतंकी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक के बाद भारत व पाक के बीच लगातार बढ़ते तनाव के बीच आतंकी संगठन भारतीय सेना की इस कार्रवाई का बदला लेने के प्रयास में जुटा है, जिसकी आतंकी संगठनों की ओर से लगातार धममियां भी दी जा रही है। भारत-पाक सीमा पर भारतीय सुरक्षा बलो की सतर्कता और कड़ी चौकसी के बाद हरेक दिन आतंकियों की घुसपैठ के प्रयास नाकाम किये जा रहे हैं। पाक खुफिया एजेंसी और आतंकी संगठन भारत में आतंकी हमलो को अंजाम देने में पहले भी देश के भीतर ऐसे में भारत में प्रतिबंधित इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) के संपर्क में हैं, जिसके लिए स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट आफ इंडिया (सिमी) के सदस्य अपनी गतिविधियों को अंजाम देते रहे हैं। सूत्रों के अनुसार आईएम और सिमी लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्म्द जैसे आतंकी संगठनों के संपर्क में हैं। ऐसी रिपोर्ट भारतीय खुफिया एजेंसी भी सरकार को मुहैया करा चुकी है। सर्जिकल स्ट्राइक का बदला लेने को बेताब पाक के आतंकी संगठन ऐसे में सिमी के सदस्यों को ढ़ाल बनाने के प्रयास में है। गृह मंत्रालय ने ऐसी खुफिया रिपोर्ट के आधार पर सुरक्षा बलो और राज्यों की पुलिस को भी सतर्क रहने के निर्देश दिये हैं। हालांकि सिमी संगठन पर प्रतिबंध लगाया हुआ है, लेकिन उसके सदस्यों ने अपने तौर तरीके बदलकर अपनी गतिविधियों का खाका तैयार किया हुआ है। ऐसे में केंद्र सरकार देश में किसी भी खतरे के प्रति पूरी तरह से सतर्कता बरत रही है।
सूचीबद्ध करने की कार्रवाही
गृह मंत्रालय के सिमी के खिलाफ जारी सुरक्षा अलर्ट के अनुसार पिछले एक-डेढ़ दशक में उन तमाम सिमी सदस्यों को सूचीबद्ध करके उनकी गतिविधियों पर पैनी नजर रखने को कहा गया है जो आतंकी संगठन के निर्देश मिलने सक्रिय होकर अपनी गतिविधियों को अंजाम देने खाका तैयार करते हैं। ऐसे सिमी सदस्यों को सूचीबद्ध करने का काम शुरू कर दिया गया है। गृह मंत्रालय की ओर से देश में सुरक्षा बलों का अलर्ट पहले ही जारी किया हुआ है। चूंकि सिमी का गठन पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में हुआ था और खुफिया रिपोर्ट के अनुसार सिमी के सदस्य अपनी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए सक्रिय हैं। ऐसी आशंका पर सिमी के सदस्यों पर पैनी नजर रखी जा रही है।
संसद की सुरक्षा चाकचौबंद
पाक अधिकृत कश्मीर में भारतीय सेना की सर्जिकल स्ट्राइक जैसी कार्रवाई से बौखलाए पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई, सेना और आतंकी संगठनों की नजरे भारत से बदला लेने पर फोकस हैं। मीडिया रिपोर्ट के बाद आईएसआई ने जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों को किसी भी हालत में सर्जिकल स्ट्राइक का बदला लेने को कहा है, जिसमें आतंकी संगठन मौलाना मसूद अजहर का एक बार फिर भारतीय संसद पर हमला करने की साजिश रच रहा है। ऐसी आशंका को देखते हुए संसद की सुरक्षा को चाकचौबंद कर दिया गया है,जिसमें तकनीकी उपकरण का इस्तेमाल भी किया जा रहा है, जिससे किसी भी तरह के आतंकी खतरे से निपटा जा सके। इससे पहले संसद की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा भी की गई है।
कई इमारते निशाने पर
सुरक्षा एजेंसियों को खुफिया रिपोर्ट मिली है कि यदि संसद पर हमला नाकाम होता है तो दिल्ली सचिवालय या अक्षरधाम और लोटस टैंपल जैसी कई इमारतों के अलावा भीड़भाड़ वाले बाजार या शॉपिंग मॉल तक आतंकी संगठनों के निशाने पर हैं, जहां सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत कर दिया गया है। सूत्रों के अनुसार खुफिया रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि दो फिदायीनों के दिल्ली में घुसने की सूचना है, जो किसी भी रूप में अपनी गतिविधियों को अंजाम दे सकते हैं।
11Oct-2016
ओ.पी. पाल. नई दिल्ली।
उरी हमले के बाद भारतीय सेना द्वारा की पीओके में की गई सर्जिकल स्ट्राइक का बदला लेने की फिराक में जुटे आतंकी संगठन भारत में सिमी को ढ़ाल बना सकते हैं। ऐसी आशंका पर केंद्र सरकार ने सुरक्षा बलों को सतर्क करके सिमी की गतिविधियों पर पैनी नजर रखने के निर्देश दिये हैं।
भारतीय सेना की पीओके में आतंकी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक के बाद भारत व पाक के बीच लगातार बढ़ते तनाव के बीच आतंकी संगठन भारतीय सेना की इस कार्रवाई का बदला लेने के प्रयास में जुटा है, जिसकी आतंकी संगठनों की ओर से लगातार धममियां भी दी जा रही है। भारत-पाक सीमा पर भारतीय सुरक्षा बलो की सतर्कता और कड़ी चौकसी के बाद हरेक दिन आतंकियों की घुसपैठ के प्रयास नाकाम किये जा रहे हैं। पाक खुफिया एजेंसी और आतंकी संगठन भारत में आतंकी हमलो को अंजाम देने में पहले भी देश के भीतर ऐसे में भारत में प्रतिबंधित इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) के संपर्क में हैं, जिसके लिए स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट आफ इंडिया (सिमी) के सदस्य अपनी गतिविधियों को अंजाम देते रहे हैं। सूत्रों के अनुसार आईएम और सिमी लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्म्द जैसे आतंकी संगठनों के संपर्क में हैं। ऐसी रिपोर्ट भारतीय खुफिया एजेंसी भी सरकार को मुहैया करा चुकी है। सर्जिकल स्ट्राइक का बदला लेने को बेताब पाक के आतंकी संगठन ऐसे में सिमी के सदस्यों को ढ़ाल बनाने के प्रयास में है। गृह मंत्रालय ने ऐसी खुफिया रिपोर्ट के आधार पर सुरक्षा बलो और राज्यों की पुलिस को भी सतर्क रहने के निर्देश दिये हैं। हालांकि सिमी संगठन पर प्रतिबंध लगाया हुआ है, लेकिन उसके सदस्यों ने अपने तौर तरीके बदलकर अपनी गतिविधियों का खाका तैयार किया हुआ है। ऐसे में केंद्र सरकार देश में किसी भी खतरे के प्रति पूरी तरह से सतर्कता बरत रही है।
सूचीबद्ध करने की कार्रवाही
गृह मंत्रालय के सिमी के खिलाफ जारी सुरक्षा अलर्ट के अनुसार पिछले एक-डेढ़ दशक में उन तमाम सिमी सदस्यों को सूचीबद्ध करके उनकी गतिविधियों पर पैनी नजर रखने को कहा गया है जो आतंकी संगठन के निर्देश मिलने सक्रिय होकर अपनी गतिविधियों को अंजाम देने खाका तैयार करते हैं। ऐसे सिमी सदस्यों को सूचीबद्ध करने का काम शुरू कर दिया गया है। गृह मंत्रालय की ओर से देश में सुरक्षा बलों का अलर्ट पहले ही जारी किया हुआ है। चूंकि सिमी का गठन पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में हुआ था और खुफिया रिपोर्ट के अनुसार सिमी के सदस्य अपनी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए सक्रिय हैं। ऐसी आशंका पर सिमी के सदस्यों पर पैनी नजर रखी जा रही है।
संसद की सुरक्षा चाकचौबंद
पाक अधिकृत कश्मीर में भारतीय सेना की सर्जिकल स्ट्राइक जैसी कार्रवाई से बौखलाए पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई, सेना और आतंकी संगठनों की नजरे भारत से बदला लेने पर फोकस हैं। मीडिया रिपोर्ट के बाद आईएसआई ने जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों को किसी भी हालत में सर्जिकल स्ट्राइक का बदला लेने को कहा है, जिसमें आतंकी संगठन मौलाना मसूद अजहर का एक बार फिर भारतीय संसद पर हमला करने की साजिश रच रहा है। ऐसी आशंका को देखते हुए संसद की सुरक्षा को चाकचौबंद कर दिया गया है,जिसमें तकनीकी उपकरण का इस्तेमाल भी किया जा रहा है, जिससे किसी भी तरह के आतंकी खतरे से निपटा जा सके। इससे पहले संसद की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा भी की गई है।
कई इमारते निशाने पर
सुरक्षा एजेंसियों को खुफिया रिपोर्ट मिली है कि यदि संसद पर हमला नाकाम होता है तो दिल्ली सचिवालय या अक्षरधाम और लोटस टैंपल जैसी कई इमारतों के अलावा भीड़भाड़ वाले बाजार या शॉपिंग मॉल तक आतंकी संगठनों के निशाने पर हैं, जहां सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत कर दिया गया है। सूत्रों के अनुसार खुफिया रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि दो फिदायीनों के दिल्ली में घुसने की सूचना है, जो किसी भी रूप में अपनी गतिविधियों को अंजाम दे सकते हैं।
11Oct-2016
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