गुरुवार, 22 जनवरी 2026

उर्वरक सब्सिडी में बढ़ोतरी किसानों को देगी आर्थिक राहत!

केंद्र सरकार ने रबी सीजन में डीएपी सब्सिडी बढ़ाकर 29,805 रुपये प्रति टन की 
ओ.पी. पाल 
नई दिल्ली।केंद्र सरकार ने देश के किसानों को वैश्विक बाजार में कच्चे माल की कीमतों में अनिश्चितता और किसानों को महंगाई से बचाने के मकसद से रबी सीजन 2025-26 के लिए डीएपी सब्सिडी बढ़ाकर 29,805 रुपये प्रति टन कर दी है। सरकार ने इस सीजन में 37,952 करोड़ रुपये की उर्वरक आवश्यकता का अनुमान लगाया है। कृषि वैज्ञानिक भी मानते हैं कि रबी सीजन के लिए बढ़ी हुई सब्सिडी न केवल किसानों को वैश्विक महंगाई से राहत देगी, बल्कि यह भारतीय कृषि को वैज्ञानिक और संतुलित खेती की ओर ले जाने की सरकार की दीर्घकालिक रणनीति का भी हिस्सा है। 
केद्रीय कृषि मंत्रालय के जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, उर्वरक सब्सिडी में यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उर्वरकों और कच्चे माल की अस्थिर कीमतों को देखते हुए की गई है, ताकि किसानों पर लागत का बोझ न पड़े। इसके लिए सरकार ने पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (एनबीएस) योजना के तहत सब्सिडी दरों में, विशेषकर डाय-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) के लिए भारी वृद्धि करने का फैसला किया है। डीएपी पर यह सब्सिडी पिछले वर्ष के 21,911 रुपये प्रति टन से बढ़ाकर 29,805 रुपये प्रति टन की गई है। सरकार ने इस सीजन के लिए 37,952 करोड़ रुपये की अनुमानित उर्वरक आवश्यकता तय की है, जो खरीफ 2025 सीजन के मुकाबले करीब 736 करोड़ रुपये अधिक है। यह कदम न केवल बुवाई के आगामी सीजन में उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करेगा, बल्कि मृदा स्वास्थ्य को संतुलित बनाए रखने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण नीतिगत पहल है। वहीं इस निर्णय का सीधा लाभ गेहूं, तिलहन और दालों की खेती करने वाले किसानों को मिलेगा, क्योंकि रबी सीजन इन फसलों की बुवाई का मुख्य समय होता है। सरकार का उद्देश्य है कि किसानों को इस पीक सीजन के दौरान किफायती दरों पर उर्वरक उपलब्ध कराया जा सके। 
संतुलित खेती को मिलेगी बढ़ावा 
गौरतलब है कि केद्र सरकार ने 1 अप्रैल 2010 से किसानों के हित में पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (एनबीएस) योजना लागू की थी, जो उर्वरक क्षेत्र में एक बड़ा नीतिगत बदलाव माना जा रहा है। इससे पहले यूरिया के अत्यधिक उपयोग को प्रोत्साहित किया जा रहा था, जिसके विपरीत सरकार ने नई व्यवस्था के तहत एनबीएस ढांचा उर्वरकों में मौजूद पोषक तत्वों यानी नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश और सल्फर के आधार पर सब्सिडी तय की। इस दिशा में सरकार ने रबी 2025-26 के लिए नाइट्रोजन पर 43.02 रुपए प्रति किलोग्राम और फॉस्फेट पर 47.96 रुपए प्रति किलोग्राम की सब्सिडी तय की है। इसलिए इस बार डीएपी खाद पर सब्सिडी बढ़कर 29,805 रुपए प्रति मीट्रिक टन हो गई है, जो रबी 2024-25 में 21,911 रुपए प्रति मीट्रिक टन थी। गौरतलब है कि वैज्ञानिक दृष्टि से वर्षों तक नाइट्रोजन युक्त उर्वरकों के असंतुलित प्रयोग ने देश के कई कृषि क्षेत्रों में मिट्टी की सेहत को बेहद नुकसान पहुंचाया है और उपज की वृद्धि को सीमित कर दिया। एनबीएस योजना द्वितीयक और सूक्ष्म पोषक तत्वों (माइक्रोन्यूट्रिएंट्स) के उपयोग को बढ़ावा देकर मृदा क्षरण और पोषक तत्वों के असंतुलन की समस्या का समाधान करती है। 
उत्पादकता में वृद्धि और आत्मनिर्भरता पर बल 
सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो एनबीएस योजना के सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं। यानी देश में 2010-11 में खाद्यान्न उत्पादकता 1,930 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से बढ़कर 2024-25 में 2,578 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर हो गई है। कृषि क्षेत्र में उत्पादन की यह वृद्धि मोटे तौर पर एनबीएस योजना के विस्तार की अवधि का नतीजा माना जा रहा है, जो घरेलू उत्पादन के मंच पर यह भारत की महत्वपूर्ण प्रगति है और आयात पर निर्भरता भी कम हुई है। यही कारण है कि साल 2014 के बाद से घरेलू फॉस्फेटिक और पोटाश उर्वरक उत्पादन में 50 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज हुई है। 
कृषि क्षेत्र में वित्तीय स्थिरता संभव 
कृषि मंत्रालय के आंकड़ों पर गौर करें तो केंद्र सरकार ने 2022-23 और 2024-25 के बीच एनबीएस सब्सिडी पर 2.04 लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए हैं। हालांकि कुछ आलोचक इतनी भारी सब्सिडी के राजकोषीय स्थायित्व पर सवाल उठाते हैं, लेकिन वैज्ञानिकों औ समर्थकों का तर्क है कि उच्च पैदावार, बेहतर मृदा स्वास्थ्य और आयात पर कम होती निर्भरता की दृष्टि से यह खर्च उचित है, जो किसानों के लिए उत्पादन बढ़ाने के साथ आर्थक रुप से भी राहत का सबब बनेगा। 
  21Jan-2026