मंगलवार, 3 फ़रवरी 2026

बालिकाओं के सशक्तिकरण का प्रतीक ‘सुकन्या समृद्धि योजना’

11 सालों में अब तक देशभर में खुले 4.53 करोड़ से अधिक खाते 
 BY-ओ.पी. पाल 
भारत में एक बालिका को सशक्त बनाने की दिशा में भारत सरकार की ‘सुकन्या समृद्धि योजना’ ने 11 साल पूरे कर लिये हैं। बालिकाओं के सशक्तिकरण के साथ परिवार, समुदाय और राष्ट्र को सशक्त के लिहाज से ‘सुकन्या समृद्धि योजना’ आज एक बनती नजर आ रही है। इन 11 सालों में भारत सरकार द्वारा अधिसूचित एक लघु बचत योजना के तहत अब तक 4.53 करोड़ से अधिक खाते खोले जा चुके हैं, जिनमें 3.33 लाख करोड़ रुपये से अधिक राशि जमा हो चुकी है। मसलन सुकन्या समृद्धि योजना (एसएसवाई) देश भर में लाखों युवा लड़कियों के लिए आशा और सशक्तिकरण का एक सशक्त प्रतीक बन रही है, जो उनके सपनों को संजोने और उनके भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में जमीनी स्तर पर आत्मविश्वास, समावेश और दीर्घकालिक प्रगति की भावना के मार्ग को प्रशस्त कर रही है। यही नहीं सुकन्या समृद्धि योजना, वित्तीय समावेशन, लैंगिक समानता और दीर्घकालिक सामाजिक प्रगति को बढ़ावा देकर परिवारों को अपनी बेटियों के भविष्य में निवेश करने के लिए प्रोत्साहन को बढ़ावा दे रही है। 
भारत सरकार ने वैसे तो बालिकाओं की सुरक्षा, शिक्षा और सशक्तिकरण के लिए अनेक लक्षित योजनाएं लागू की हुई हैं, लेकिन 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' अभियान के तहत 22 जनवरी 2015 को शुरु की गई सुकन्या समृद्धि योजना ऐसी है, जिसने 22 जनवरी 2026 को 11 साल का सफर तय कर लिया है और आज यह योजना देश के लाखों परिवारों में अपनी बेटियों के उज्ज्वल भविष्य में सामूहिक विश्वास का प्रमाण बन चुकी है। यही नहीं, सरकार की यह योजना महज़ बचत के लिए की गई पहल से कहीं अधिक वित्तीय सुरक्षा और सामाजिक परिवर्तन के बीच एक सेतु के रूप में साबित होती दिख रही है। यानी परिवारों को अपनी बेटियों की शिक्षा और कल्याण के लिए जल्दी योजना बनाने के लिए प्रोत्साहित करके उनकी आर्थिक स्थिति के संतुलन को भी नियंत्रित करने का काम कर रही है। एक दशक से अधिक का सफर कर चुकी इस योजना का आर्थिक और सामाजिक महत्व है, क्योंकि यह मात्र एक वित्तीय निवेश नहीं है, बल्कि बालिकाओं के उज्ज्वल और समृद्ध भविष्य को सुरक्षित करने का उत्प्रेरक है। इसका मकसद बालिकाओं की शिक्षा और विवाह के खर्चों को पूरा करना है। शिक्षा, आर्थिक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देकर, यह पहल महिला सशक्तिकरण को मजबूत करती है और भविष्य में आत्मनिर्भरता की परिकल्पना में योगदान देती है। खास बात यह है कि बालिकाओं के लिए दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा के मकसद से बनाई गई सुकन्या समृद्धि योजना उच्च रिटर्न, कर लाभ और शिक्षा तथा भविष्य की जरूरतों के लिए सरल निकासी विकल्प भी प्रदान करती है, जो बालिकाओँ के वित्तीय भविष्य को सुरक्षित करने के लिए कई अन्य लाभ प्रदान करने का विकल्प भी प्रदान करती है। 
बालिका की बचत सुरक्षित वृद्धि 
इस योजना के तहत माता-पिता और कानूनी अभिभावक एसएसवाई खाते में न्यूनतम 250 रुपए की प्रारंभिक जमा राशि से शुरुआत कर सकते हैं और बाद की जमा राशि 50 रुपए के गुणकों में की जा सकती है, बशर्ते कि एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 250 रुपए जमा किए जाएं। कुल वार्षिक जमा सीमा 1,50,000 रुपए है, इससे अधिक राशि पर ब्याज नहीं मिलेगा और उसे वापस कर दिया जाएगा। खाता खोलने की तारीख से अधिकतम 15 वर्षों की अवधि के लिए जमा राशि जमा की जा सकती है। ब्याज की गणना हर महीने की जाती है और प्रत्येक वित्तीय वर्ष के अंत में इसे खाते में जमा कर दिया जाता है। यदि खाता वर्ष के दौरान किसी अन्य बैंक या डाकघर में स्थानांतरित भी कर दिया जाता है, तब भी वित्तीय वर्ष के अंत में ब्याज जमा कर दिया जाता है, जिससे बालिका की बचत में स्थिर और सुरक्षित वृद्धि सुनिश्चित होती है। 
ऐसे निकाली जा सकती है राशि 
खाताधारक पिछले वित्तीय वर्ष के अंत में उपलब्ध शेष राशि का 50 प्रतिशत तक शैक्षिक उद्देश्यों के लिए निकाल सकता है। यह सुविधा खाताधारक के अठारह वर्ष की आयु प्राप्त करने या दसवीं कक्षा उत्तीर्ण करने पर, जो भी पहले हो, उपलब्ध हो जाती है। आवेदन करने के लिए, खाताधारक को ज़रुरी दस्तावेजों, जैसे कि प्रवेश का पुष्ट प्रस्ताव या शैक्षणिक संस्थान द्वारा जारी शुल्क पर्ची जिसमें ज़रुरी खर्चों का ज़िक्र हो, के साथ एक औपचारिक आवेदन जमा करना होगा। धन की निकासी एकमुश्त या किश्तों में की जा सकती है, लेकिन अधिकतम पाँच वर्षों की अवधि के लिए प्रति वर्ष एक बार निकासी की जा सकती है। सभी मामलों में निकाली गई राशि जमा किए गए दस्तावेजों में दर्शाए गए वास्तविक शुल्क से अधिक नहीं होनी चाहिए। 
क्या हैं एसएसवाई खाता खोलने के नियम 
एक बालिका का केवल एक एसएसवाई खाता खोला जा सकता है और एक परिवार अधिकतम दो बालिकाओं के लिए खाते खोल सकता है। हालांकि जुड़वां या तीन जुड़वां बच्चों के मामले में, संबंधित जन्म प्रमाण पत्र के साथ शपथ पत्र जमा करने पर दो से अधिक खाते खोलने की अनुमति है। यह खाता भारत में किसी भी स्थान पर स्थानांतरित किया जा सकता है। खास बात यह है कि जब तक बालिका 18 वर्ष की नहीं हो जाती, तब तक खाता माता-पिता अथवा अभिभावक द्वारा प्रबंधित किया जाता है। इससे अभिभावक बचत की निगरानी कर सकते हैं और यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि धनराशि का उपयोग बालिका की शिक्षा और भविष्य की ज़रुरतों के लिए प्रभावी ढंग से किया जा रहा है। लेकिन 18 वर्ष की आयु होने पर, खाताधारक लड़की ज़रुरी दस्तावेज जमा करके स्वयं खाते का नियंत्रण अपने हाथ में ले सकती है। भारत सरकार द्वारा अधिसूचित एक लघु बचत योजना के तहत जमा पर सरकार द्वारा समय-समय पर अधिसूचित दरों पर 8.2 प्रतिशत की दर से ब्याज मिलता है और राशि का भुगतान योजना के नियमों के अनुसार किया जाता है। यानी एक कम जोखिम वाली जमा योजना में सरकार मूलधन की गारंटी देती है और ब्याज का भुगतान प्रत्येक तिमाही में निर्धारित दरों के अनुसार वार्षिक रूप से किया जाता है। 
योजना की अहम भूमिका 
 सुकन्या समृद्धि योजना भारत में लड़कियों के लिए एक सुरक्षित और सशक्त भविष्य के निर्माण की दिशा में एक सार्थक कदम साबित हो रहा है। दीर्घकालिक बचत को प्रोत्साहित करके और शिक्षा तथा वित्तीय स्वतंत्रता को सर्वोपरि रखकर, यह योजना परिवारों के भीतर आर्थिक जिम्मेदारी और व्यापक सामाजिक प्रगति दोनों को बढ़ावा दे रही है। पिछले 11 सालों में सुकन्या समृद्धि योजना खातों की संख्या में लगातार हो रही वृद्धि इस पहल पर बढ़ते विश्वास और इसके प्रभाव की तस्वीर पेश कर रही है। मसलन जैसे-जैसे भारत लैंगिक समानता और समावेश की ओर सुदृढ़ हो रहा है, वैसे ही सुकन्या समृद्धि योजना हरेक लड़की को विकास, सफलता और अपनी पूरी क्षमता का एहसास करने के लिए ज़रुरी संसाधन और आत्मविश्वास पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती नजर आ रही है। 
24Jan-2026
https://tinyurl.com/mtfrer56
https://tehelkanews.net/%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%93%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%b6%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a4%a3-%e0%a4%95%e0%a4%be/

गुरुवार, 22 जनवरी 2026

उर्वरक सब्सिडी में बढ़ोतरी किसानों को देगी आर्थिक राहत!

केंद्र सरकार ने रबी सीजन में डीएपी सब्सिडी बढ़ाकर 29,805 रुपये प्रति टन की 
ओ.पी. पाल 
नई दिल्ली।केंद्र सरकार ने देश के किसानों को वैश्विक बाजार में कच्चे माल की कीमतों में अनिश्चितता और किसानों को महंगाई से बचाने के मकसद से रबी सीजन 2025-26 के लिए डीएपी सब्सिडी बढ़ाकर 29,805 रुपये प्रति टन कर दी है। सरकार ने इस सीजन में 37,952 करोड़ रुपये की उर्वरक आवश्यकता का अनुमान लगाया है। कृषि वैज्ञानिक भी मानते हैं कि रबी सीजन के लिए बढ़ी हुई सब्सिडी न केवल किसानों को वैश्विक महंगाई से राहत देगी, बल्कि यह भारतीय कृषि को वैज्ञानिक और संतुलित खेती की ओर ले जाने की सरकार की दीर्घकालिक रणनीति का भी हिस्सा है। 
केद्रीय कृषि मंत्रालय के जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, उर्वरक सब्सिडी में यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उर्वरकों और कच्चे माल की अस्थिर कीमतों को देखते हुए की गई है, ताकि किसानों पर लागत का बोझ न पड़े। इसके लिए सरकार ने पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (एनबीएस) योजना के तहत सब्सिडी दरों में, विशेषकर डाय-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) के लिए भारी वृद्धि करने का फैसला किया है। डीएपी पर यह सब्सिडी पिछले वर्ष के 21,911 रुपये प्रति टन से बढ़ाकर 29,805 रुपये प्रति टन की गई है। सरकार ने इस सीजन के लिए 37,952 करोड़ रुपये की अनुमानित उर्वरक आवश्यकता तय की है, जो खरीफ 2025 सीजन के मुकाबले करीब 736 करोड़ रुपये अधिक है। यह कदम न केवल बुवाई के आगामी सीजन में उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करेगा, बल्कि मृदा स्वास्थ्य को संतुलित बनाए रखने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण नीतिगत पहल है। वहीं इस निर्णय का सीधा लाभ गेहूं, तिलहन और दालों की खेती करने वाले किसानों को मिलेगा, क्योंकि रबी सीजन इन फसलों की बुवाई का मुख्य समय होता है। सरकार का उद्देश्य है कि किसानों को इस पीक सीजन के दौरान किफायती दरों पर उर्वरक उपलब्ध कराया जा सके। 
संतुलित खेती को मिलेगी बढ़ावा 
गौरतलब है कि केद्र सरकार ने 1 अप्रैल 2010 से किसानों के हित में पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (एनबीएस) योजना लागू की थी, जो उर्वरक क्षेत्र में एक बड़ा नीतिगत बदलाव माना जा रहा है। इससे पहले यूरिया के अत्यधिक उपयोग को प्रोत्साहित किया जा रहा था, जिसके विपरीत सरकार ने नई व्यवस्था के तहत एनबीएस ढांचा उर्वरकों में मौजूद पोषक तत्वों यानी नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश और सल्फर के आधार पर सब्सिडी तय की। इस दिशा में सरकार ने रबी 2025-26 के लिए नाइट्रोजन पर 43.02 रुपए प्रति किलोग्राम और फॉस्फेट पर 47.96 रुपए प्रति किलोग्राम की सब्सिडी तय की है। इसलिए इस बार डीएपी खाद पर सब्सिडी बढ़कर 29,805 रुपए प्रति मीट्रिक टन हो गई है, जो रबी 2024-25 में 21,911 रुपए प्रति मीट्रिक टन थी। गौरतलब है कि वैज्ञानिक दृष्टि से वर्षों तक नाइट्रोजन युक्त उर्वरकों के असंतुलित प्रयोग ने देश के कई कृषि क्षेत्रों में मिट्टी की सेहत को बेहद नुकसान पहुंचाया है और उपज की वृद्धि को सीमित कर दिया। एनबीएस योजना द्वितीयक और सूक्ष्म पोषक तत्वों (माइक्रोन्यूट्रिएंट्स) के उपयोग को बढ़ावा देकर मृदा क्षरण और पोषक तत्वों के असंतुलन की समस्या का समाधान करती है। 
उत्पादकता में वृद्धि और आत्मनिर्भरता पर बल 
सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो एनबीएस योजना के सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं। यानी देश में 2010-11 में खाद्यान्न उत्पादकता 1,930 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से बढ़कर 2024-25 में 2,578 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर हो गई है। कृषि क्षेत्र में उत्पादन की यह वृद्धि मोटे तौर पर एनबीएस योजना के विस्तार की अवधि का नतीजा माना जा रहा है, जो घरेलू उत्पादन के मंच पर यह भारत की महत्वपूर्ण प्रगति है और आयात पर निर्भरता भी कम हुई है। यही कारण है कि साल 2014 के बाद से घरेलू फॉस्फेटिक और पोटाश उर्वरक उत्पादन में 50 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज हुई है। 
कृषि क्षेत्र में वित्तीय स्थिरता संभव 
कृषि मंत्रालय के आंकड़ों पर गौर करें तो केंद्र सरकार ने 2022-23 और 2024-25 के बीच एनबीएस सब्सिडी पर 2.04 लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए हैं। हालांकि कुछ आलोचक इतनी भारी सब्सिडी के राजकोषीय स्थायित्व पर सवाल उठाते हैं, लेकिन वैज्ञानिकों औ समर्थकों का तर्क है कि उच्च पैदावार, बेहतर मृदा स्वास्थ्य और आयात पर कम होती निर्भरता की दृष्टि से यह खर्च उचित है, जो किसानों के लिए उत्पादन बढ़ाने के साथ आर्थक रुप से भी राहत का सबब बनेगा। 
  21Jan-2026